| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 112 |
भरद्वाजो बार्हस्पत्यः |
अग्निः |
त्रिष्टुप् |
॥ भरद्वाजो बार्हस्पत्यः अग्निः त्रिष्टुप् ॥
मूर्धानंदीवोआ॑रातिं᳹पृ॑थिव्याः᳒ । वैश्वा᳒नारा᳒मृतआ᳒जाता᳒म᳒ग्निम् । काविं᳒सम्म्राजमा᳹तीथि॑ञ्ज॑ना॑नां । आ᳒स᳒न्नापा॑त्रञ्जनयन्तादेवाः ॥ १ ॥
हा बु हा बु हातुबुश। हिकञ्चोचहिकञ्चोचहिकञ्चोच। मूकर्द्धा न न्दा इ वोकुआकर ता ईं पृ थि व्याःकू। वैकश्वा न राकिमृषत आ जा ता म ग्निंकू। का विं स म्रा जकुमषधि ता इं ज ना नाकूम् । आकस न्ना पा त्रंकीज न य न्त दे वाःकू। हा बु हा बु हातुबुश। हिकञ्चोचहिकञ्चोचहिकञ्चोटहा उ वाति। एतर्तचम् ॥१॥ हा बु हा बु हातुबुश। हि ञ्चिकादोचहि ञ्चिकादोचहि ञ्चिकादोच। मूकर्द्धा न न्दा इ वोकुआकर ता ईं पृ थि व्याःकू। वैकश्वा न राकिमृषत आ जा ता म ग्निंकू। का विं स म्रा जकुमाषति था इं ज ना नाकूम् । आकस न्ना पा त्रंकीज न य न्त दे वाःकू। हा बु हा बु हातुबुश। हि ञ्चिकादोचहि ञ्चिकादोच। हि ञ्चि दोटिहा उ वाति। ईख ॥२॥ हा बु हा बु हा वा जि दो ह मा जिषैदो ह मा जि दो हातू। मूकर्द्धा न न्दा इ वोकुआकर ता ईं पृ थि व्याःकू। वैकश्वा न राकिमृषत आ जा ता म ग्निंकू। का विं स म्रा जकुमषधि ता इं ज ना नाकूम् । आकस न्ना पा त्रंकीज न य न्त दे वाःकू। हा बु हा बु हा वा जि दो ह मा जिषैदो हाकमाथजि दोटाहाखऔ हो वाशि। एतआ जि दोकिह मेकाआ जि दोकिह मेकाआटजि दोटाहाखम् ॥३॥
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ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 113 |
वसिष्ठो मैत्रावरुणिः |
इन्द्रः |
विराडुष्णिक् |
| 114 |
मधुच्छन्दा वैश्वामित्रः |
इन्द्रः |
गायत्री |
| 115 |
गोतमो राहूगणः |
इन्द्रः |
पंक्तिः |
॥ वसिष्ठो मैत्रावरुणिः इन्द्रः विराडुष्णिक् ॥ ॥ मधुच्छन्दा वैश्वामित्रः इन्द्रः गायत्री ॥ ॥ गोतमो (सम्मदो वा) राहूगणः इन्द्रः पङ्क्त्तिः ॥
पीबासो᳒मा॑मिन्द्रा᳒मन्द॑तुत्वा । य᳸न्ते॑सूषा᳒वाहरिय्य᳒श्वाद्रिः᳒ । सोतु᳒र्बा॑हुभ्यांसू᳹यातोना᳒र्वा ॥ २ ॥
सुरूपकृ᳒त्नूमूता᳒ये । सूदूघा᳒मीवागोदूहे । जुहूमा᳒सी॑द्यावी᳒द्यवि ॥ ३ ॥
स्वादो᳒रित्था᳹वी॑षूवा᳒ताः । मा᳒धोः॑पिबन्तिगौर्याः१ । या᳒इ᳒न्द्रे॑णासा᳒याववा॑रिः । वृष्णामाद॑न्तीशो᳒भा᳒था । व᳒स्वीरा᳹नू॑स्वारा᳒ज्य॑म् ॥ ४ ॥
हा बु हा बु हाचुवा इ हीकि। आ इ हीकि। आ इ हीकि। योटयोटयोट। त्रिः । इ या हाकि। वि या हाकि। वि या हाकिबुश। पीचबा सो मा मि न्द्र माकून्द तु त्वाकि। यकन्ते सु षा व ह र्याकूश्राचद्रिःश। सोकतु र्बा हु भ्यांकीसू य तो ना र्वाकु। हा बु हा बु हाचुवा इ हीकिआ इ हीकिआ इ हीकि। योटयोटयोट। त्रिः । इ या हाकिवि या हाकिवि याटाहा उ वाति। ईख ॥४॥ सु रू प कृ त्नु मूकूत येचा। सु रू प कृ त्नु मूकूत येचा। सु रू प कृ त्नु मूकूत येचा। सु दु घाकिमि व गोकिदु हे जु हूभीम साचाइश। द्याकवि द्य वाचिइश। द्याकवि द्य वाचिइश। द्या वि द्या व याकूआ उ वाटि। हिंटहिंटहिंट ॥५॥ ओंकच्ओंकच्ओंकच्। स्वा दो रेकिइ त्था एकि। वि षू एकिवा ताचाआच। ओंकओंटओखवाण। शंकय्यो शंकाय्योःच। ओंकच्ओंकच्ओंकच्। म धो रेकुपि बा एकिन्ति गा एकि। री याचाआच। ओंकओंटओखवाण। हा विचार्हा विःचा। ओंकच्ओंकच्ओंकच्। या या एकिन्द्रे णा एकि। स या एकिवा रीकाआच। ओंकओंटओखवाण। सूचव स्वाःचा। ओंकच्ओंकच्ओंकच्। वृ ष्णा एकिम दा एकिन्ती शो एकिभा थाकाआच। ओंकओंटओखवाण। ज्यो ती र्ज्यो तिः । ओंकच्ओंकच्ओंकच्। व स्वी रेकिआ नु एकिस्वा रा एकिजी याकामाच। ओंकओंटओखवाण। इ ट् इ ळाटिख् ॥६॥
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ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 116 |
अन्भीगुः श्यावाश्विः |
पवमानः सोमः |
अनुष्टुप् |
| 117 |
अमहीयुराङ्गिरसः |
पवमानः सोमः |
गायत्री |
| 118 |
रेभसूनू काश्यपौ |
पवमानः सोमः |
अनुष्टुप् |
| 119 |
अवत्सारः काश्यपः |
पवमानः सोमः |
गायत्री |
| 120 |
कश्यपो मारीचः |
पवमानः सोमः |
त्रिष्टुप् |
| 121 |
जमदग्निर्भार्गवः |
पवमानः सोमः |
गायत्री |
॥ अन्भीगुः श्यावाश्विः पवमानः सोमः अनुष्टुप् ॥ ॥ अमहीयुराङ्गिरसः पवमानः सोमः गायत्री ॥ ॥ रैभसूनू काश्यपौ पवमानः सोमः अनुष्टुप् ॥ ॥ अवत्सारः काश्यपः पवमानः सोमः गायत्री ॥ ॥ कश्यपो मारीचः पवमानः सोमः त्रिष्टुप् ॥ ॥ जमदग्निर्भार्गवः पवमानः सोमः गायत्री ॥
पूरो᳒जी॑तीवोअ᳒न्धासः । सूता᳒या॑मादयित्ना᳒वे । आपश्वा᳒नंश्नथिष्टना । साखा॑योदीर्घाजि१ह्व्यम् ॥ ५ ॥
उच्चा॑ते॑जातमन्धा᳸सा᳒ । दिविसा᳒त्भूम्याद॑दे । उग्रं᳒शर्म्मा᳒माहिश्रा᳒वाः ॥ ६ ॥
आभी᳒ना॑वन्तेअद्रू᳒हाः । प्रीय᳹मिन्द्रा॑स्यका᳒म्यं॑ । वत्सन्नपू᳒र्वाआ᳒यूनि । जातं᳒रिहन्तीमा॑ताराः ॥ ७ ॥
ता᳒रत्सा᳒मन्दीधा॑वती । धा᳸रासूतस्या᳒न्धा॑सः । ता᳒रत्सा᳒मन्दीधावती ॥ ८ ॥
आ᳒स॑र्जीवक्वारय्थेया᳒थाजौ᳒ । धीया᳹मानो॑क्ताप्राथामा᳹मा॑नीषा । दशस्वासा॑रोआधीसा॑नोअव्ये । मृज᳒न्ती᳒वहिंसा᳹द॑नेष्व᳒च्छा॑ ॥ ९ ॥
अ᳸स॑व्यंशुर्मा᳒दाय । अ᳸प्सु᳒द᳒क्षोगीरीष्ठाः । श्ये᳒नो᳒नयोनीमा᳒सा॑दत् ॥ १० ॥
ए पु रो जि तीकु। वो अ न्ध स स्सु ता य मा द याटूइशत्ना वाचाइश। इ ळाचा। उ च्चाकातेकजा त माटिन्धा साचा। अ थाचा। दा इ वि स त्भूकुमि याटाद दाचाइश। अ थाचा। उ ग्रंकाश र्माटाम हाचाइशश्रा वाचा। अ थाचा। आ प श्वा नं श्न थायूइ ष्टापानाश। सा खा यो दी र्घा जाटूइ हो ह्वा य माकुआ उ वाटि। इ ट् इ ळाटिख् ॥७॥ ए आ भीकिना व न्ता याटीद्रू ह याकि। आ उ वाटि। । ता र त्स म न्दी धाकूव तीखा। प्रा य मिकिन्द्र स्य काटिमी य माकि। । आ उ वाटि। धाकराचसू त स्याचिन्ध साःशा। वा त्सकान्न पू र्व आटीयू नि याकि। आ उ वाटि। ता र त्स म न्दी धाकूव तीखा। जा तंकारि ह न्ति माचीता र याटि। आ उ वाटि। इ ट् इ ळाटिख् ॥८॥ ए आ साकि। जीषव क्वा र थ्ये य थाटूजाचबुश। इ ळाचा। आ साकाव्यंकशु र्माटादाकयाच। अ थाचा। धा याका। माषनो त्ता प्र थ मा माटूनीकळाच। इ ळाचा। आचप्सु द क्षो गाटीइशरि ष्ठाचा। अ थाचादा श स्व सा रोषुअ धि सा नो आटुव्याचइशइ ळाचा। श्या इ नोकिचनाकयो नि माटिसा दाचात् । अ थाच। माचर्ज न्तीकाव न्हिंकासषद ना इ षु वा च्छाटूआ उ वाटि। इ ट् इ ळाटिख् ॥९॥
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ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 122 |
कविर्भार्गवः |
पवमानः सोमः |
जगती |
॥ कविर्भार्गवः पवमानः सोमः जगती ॥
धर्ता᳒दीवाः᳒पा॑वातेकृत्वि᳒योरासाः॑ । द᳸क्षोदेवा᳒नामानुमा᳒द्यो॑नृभिः । हा᳒री॑सृजानोअ᳒त्योनसत्वा॑भीः । वृ॑थापाजांसि॑कृणूषे᳹नादीष्वा ॥ ११ ॥
हा ह हौ वा उ वोतूवाश। हा ह हौ वा उ वोतूवाश। हा ह हौ वा उ वोतूवाश। ए औ हो औ हो वाटूहा उ वाटिईचळाश। हा ह हौ वा उ वोतूवाश। हा ह हौ वा उ वोतूवाश। हा ह हौ वा उ वोतूवाश। ए औ हो औ हो वाटूहा उ वाटि। ध र्त्ताचादि वः प व तेकुकृ त्व्योकारा सा इ ळाकीईचळाश। द क्षो देकिवा नाकाम नु मा द्योकीनृ मी रि ळाकीईचळाश। हा रीकासृ जाकानो अ त्योकिन स त्व भी रि ळाकूईचळाश। वृ थाकापा जां सि कृ णु षेकूना दीकाषू वाटाख्। हा ह हौ वा उ वोतूवाश। हा ह हौ वा उ वोतूवाश। हा ह हौ वा उ वोतूवाश। ए औ हो औ हो वाटूहा उ वाटिईचळाश। ईचळाश ॥१०॥ ॥ हा ह हा उ वोतूवाश। हा ह हा उ वोतूवाश। हा ह हा उ वोतूवाश। ए औ हो औ हो वाटूहा उ वाटि। ध र्त्ताचादि वः प व तेकुकृ त्व्योकारा साका। ईचळाश। द क्षो देकिवा ना माकिईचळाश। नु मा द्योकिनृ मीका। ईचळाश। हा रीकासृ जाकानो अ त्योकिन स त्वाकिभी रिचाळाश। वृ थाकापा जां सि कृकि। ईचळाश। णु षेकाना दीकाच्षू वाटाख्। हा ह हा उ वोतूवाश। हा ह हा उ वोतूवाश। हा ह हा उ वोतूवाश। ए औ हो औ हो वाटूहा उ वाटि। ईचळाश ॥११॥ औकहो औकाहो वाटाहो वाट। ए औ हो औ हो वाटूहा उ वाटि। ध र्त्ताचादिचवः पा वाकिईचळाश। ते कृ त्वीकियोचर साःशा। द क्षो देकिवा ना माकिईचळाश। नू मा द्योकिनृ भीःचा। हा री सृ जाकीन याकाईचळाश। ती योकान स त्व भीःची। वृ थाकापा जां सि कृकिईचळाश। औकहो औकाहो वाटाहो वाट। ए औ हो औ हो वाटूहा उ वाटि। णु षेकाना दीकाषू वाटाच् ॥१२॥ आतऔ हो वातिहात। ए औ हो औ हो वाटूहा उ वाटि। ध र्त्ता दीटिवः पाकावाटते कृ त्वीकियो र साःचि। द क्षो देकिवा ना माकिनु मा द्योकिनृ भीकाईचळाश। हा री सृ जाटीनो आकात्योटनाकस त्व भाटिइःश। वृ थाकापा जां सि कु णु षेकूच्ना दीकाषू वाटा। आतऔ हो वातिहात। ए औ हो औ हो वाटूहा उ वाटि। ईचळाश ॥१३॥