| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 101 |
वसिष्ठो मैत्रावरुणिः |
इन्द्रः |
त्रिष्टुप् |
॥ वसिष्ठो मैत्रावरुणिः इन्द्रः त्रिष्टुप् ॥
इ᳒न्द्रन्ना᳹रो॑नेमा᳒धी॑ताहवन्ते । यत्पार्यायू॑ना᳹ज॑न्तेधीयस्ताः᳒ । शू᳒रोनृ᳹षा॑ताश्रावा॑साश्चका᳒मे । आ᳒गो᳒मा॑तीव्रा᳸जे᳹भाजात्व᳒न्नाः॑ ॥ १ ॥
इ याकाहोच। इ याकाहोच। इ याकाहोच। इकन्द्र न्न रो नेकीम धि ता ह व न्ताकूइश। य त्पाचार्याशयू न ज न्ताचीइशधी य स्ताःकि। शूकरो नृ षा ताकीश्र व स श्च काकीमाचइश। आकगो म ता इकीव्रा जे भ जा त्वकुन्नाःश। इ याकाहोच। इ याकाहोच। इ याखाऔ हो वाशि। ईख ॥१॥ हो हो इ याकी। हो हो इ याकी। हो हो इ याकी। इकन्द्र न्न रो नेकीम धि ता ह व न्ताकूइश। य त्पाचार्याशयू न ज न्ताचीइशधी य स्ताःकि। शूकरो नृ षा ताकीश्र व स श्च काकीमाचइश। आकगो म ता इकीव्रा जे भ जा त्वकुन्नाःश। हो हो इ याकी। हो हो इ याकी। हो होटाइ याखाऔ हो वाशि। ईख ॥२॥
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ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 102 |
नृमेध पुरुमेधावाङ्गिरसौ |
इन्द्रः |
बृहती |
॥ नृमेध पुरुमेधावांगिरसौ इन्द्रः बृहती ॥
प्रा᳒वाइ᳒न्द्रा॑यबृहा॑ते । मारूतोब्र᳒ह्मा॑र्च्चता । वृत्रंहा᳒नातिवृत्रा᳒हाशाता᳒क्रा॑तुः॑ । व᳒ज्ज्रे॑णाशाता᳒पा॑र्वणा ॥ २ ॥
हा बु हा बु हा बुषूप्र व इ न्द्रा याचु। बृ हाचाता इ हा ता इ हा ता इशॄ। म रु तो ब्र ह्माची। र्चा ता र्चा ता र्चा ताशू। वृ त्रं ह ना तिषुवृ त्र हा शाची। त क्रा तुःचिक्रा तुः क्रा तुःशी। व ज्रे ण शा ता पाचू। र्वा णा र्वा णा र्वा णाशू। हाषबु हा बु हा उ वातू। इ ट् इ ळाटिख् ॥३॥
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ऋषिः (Rishi) |
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छन्दः (Chandas) |
| 102 |
नृमेध पुरुमेधावाङ्गिरसौ |
इन्द्रः |
बृहती |
प्रा᳒वाइ᳒न्द्रा॑यबृहा॑ते । मारूतोब्र᳒ह्मा॑र्च्चता । वृत्रंहा᳒नातिवृत्रा᳒हाशाता᳒क्रा॑तुः॑ । व᳒ज्ज्रे॑णाशाता᳒पा॑र्वणा ॥ २ ॥
हा बु हा बु हातुबुश। स न्त्वा नो नौकू। स न्त्वा नो नौकू। स न्त्वा नो नौकू। र नो नौकि। र नो नौकि। र नो नौकि। मा रु तोचिम रु तोचिम रु तोचि। वि श्व स्माकि। द्वि श्व स्माकि। द्वि श्व स्माकित् । प्र व इ न्द्रा याचु। बृ हाचाता इ हा ता इ हा ता इशॄ। म रु तो ब्र ह्माची। र्चा ता र्चा ता र्चा ताशू। वृ त्रं ह ना तिषुवृ त्र हा शाची। त क्रा तुःचिक्रा तुः क्रा तुःशी। व ज्रे ण शा ता पाचू। र्वा णा र्वा णा र्वा णाशू। हा बु हा बु हातुबुश। स न्त्वा नो नौकू। स न्त्वा नो नौकू। स न्त्वा नो नौकू। र नो नौकि। र नो नौकि। र नो नौकि। मा रु तोचिम रु तोचिम रु तोचि। वि श्व स्माकि। द्वि श्व स्माकि। द्वि श्व स्माखिऔ हो वाशि। ईख ॥४॥
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छन्दः (Chandas) |
| 103 |
विरूप आङ्गिरसः |
अग्निः |
गायत्री |
॥ विरूप आंगिरसः अग्निः गायत्री ॥
अ᳒ग्नि᳒र्मूर्द्धादीवाःकाकू᳒त् । पा᳒तीःपृथिव्या᳒आ᳒यम् । आपांरेतांसिजिन्वति ॥ ३ ॥
हो होटावा ईटायाट। हो होटावा ईटायाट। हो होटावा ईटायाट। अ ग्निकार्मू र्द्धाथादी वाःकाकायकूटत् । प तिःकापृथथि व्याकाआययाटम् । अ पांकारे तांथासी जाकाइ न्वायाताटइश। हो होटावा ईटायाट। हो होटावा ईटायाट। हो होटावा ईटायाखऔ हो वाशि। एतअ ग्नि र्मू र्द्धाकीभु वशार्दि वाःचा ॥५॥
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छन्दः (Chandas) |
| 104 |
नहुशो मानवः |
पवमानः सोमः |
अनुष्टुप् |
॥ नहुषो मानवः पवमानः सोमः अनुष्टुप् ॥
आयंपूषा᳒रायि᳒र्भागाः᳒ । सोमाः॑पूनानोअ॑र्ष॑ति । पाति॑र्वि᳹श्वा॑स्याभू᳒म॑नः । व्यख्यद्रोद॑सीऊभे ॥ ४ ॥
ओ वा इ याकीऔट। हो आखायणम् । पू षाटार यि र्भाखिगाःण। ओ वा इ याकीऔट। हो इ सोखिमाःण। पू नाटानो अ र्षाखिताणइश। ओ वा इ याकीऔट। हो ई पाखितीण। र्वा इ श्वाटिस्य भू माखिणाःण। ओ वा इ याकीऔट। हो ई वाखियाणम् । ख्य द्रो द सी ऊखिमाणइश। ओ वा इ याकीऔट। होटवाखऔ हो वाश। ईख ॥६॥
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| 105 |
मधुच्छन्दा वैश्वामित्रः |
पवमानः सोमः |
गायत्री |
॥ मधुच्छन्दा वैश्वामित्रः पवमानः सोमः गायत्री ॥
स्वा॑दी॑ष्ठायामा᳒दी॑ष्ठाया । पा᳒वा॑स्वसोमाधारा॑या । इ᳸न्द्रा॑यापा᳒तावेसूतः᳒ ॥ ५ ॥
अ याकामा याचा। म याकामा याचा। म याकामा याचाम् । स्वा दि ष्ठ याकीम दा इ ष्ठाखीयाण। पा वा स्व सोकीम धा राखियाण। इ न्द्रा य पाटीत वा इ सूखीताःण। अ याकामा याचा। म याकामा याचा। म याकामाटयाखऔ हो वाशि। ईख ॥७॥
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| 106 |
कविर्भार्गवः |
पवमानः सोमः |
जगती |
॥ कविर्भार्गवः पवमानः सोमः जगती ॥
धर्ता᳒दीवाः᳒पा॑वातेकृत्वि᳒योरासाः॑ । द᳸क्षोदेवा᳒नामानुमा᳒द्यो॑नृभिः । हा᳒री॑सृजानोअ᳒त्योनसत्वा॑भीः । वृ॑थापाजांसि॑कृणूषे᳹नादीष्वा ॥ ६ ॥
हा बु हा बुकीहा वौथाहो वा एकिहि या हातिबुश। ध र्त्ताचादा इ वाःचिप व तेकिकृ त्वि योकि। र सोकार सोकार साःशा। द क्षोथादा इ वाचिना मा नू मा द्योकु। नृ भिकानृ भिकानृ भीःशा। हा रीथास्सा र्जाकानो अ त्योकि। न स त्वाकिभि स त्वाकिभि स त्व भीःच। पा र्त्थाथापा जां सिकिकृ णु षेकिन दीका। षु वाकाषु वाकाषु वाका। हा बु हा बुकीहो वा एकिहि याताहा उ वाति। ईख ॥८॥
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| 107 |
वामदेवो गौतमः |
इन्द्रः |
गायत्री |
॥ वामदेवो गौतमः इन्द्रः गायत्री ॥
यूष्मा᳒दस्पारासस्पारी । यस्ये॑दमारा॑जोयू᳒जाः॑ । तुजे॑ज᳒ने॑वानंस्वाः१ । इन्द्र॑स्यार᳹न्त्यं॑बृहा᳒त् ॥ ७ ॥
हा बु या स्याकी। ई द मा र जो यूयूजाःट। तू जे ज ने व नां सूयूवाःट। आ इ न्द्रा स्याटीराखऔ हो वाशि। त्यं बृ हातिच्त् ॥९॥
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| 107 |
वामदेवो गौतमः |
इन्द्रः |
गायत्री |
यूष्मा᳒दस्पारासस्पारी । यस्ये॑दमारा॑जोयू᳒जाः॑ । तुजे॑ज᳒ने॑वानंस्वाः१ । इन्द्र॑स्यार᳹न्त्यं॑बृहा᳒त् ॥ ७ ॥
पा तीःटापा तीटा। र्दि वाकायाच। पा तीःटापा तीटा। र न्त रि क्षं स्याचु। पा तीःटापा तीटा। पा र्थिचाव स्याचा। पा तीःटापा तीटा। रा पाकामो ष धीकिनाच। पा तीःटापा तीटा। र्वि श्व स्यकिभूकत स्याचा। पा तीःटापा तीटापाटताखऔ हो वाशि। एतप तीकार्दि व ए प तिकुर न्त रि क्ष स्याकुच्। एतप तीः पा र्थि व स्याकू। एतप तीकारा पा मो ष धी नांकू। एतप तिकार्वि श्व स्य भू त स्याकू। एतस्व र्ज्योटातीःख ॥१०॥
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| 108 |
वसिष्ठो मैत्रावरुणिः |
इन्द्रः |
त्रिष्टुप् |
॥ वसिष्ठो मैत्रावरुणिः इन्द्रः त्रिष्टुप् ॥
इन्द्रोरा᳒जाजग॑तश्वर्षाणीनां । आ᳸धि॑क्षामा᳒विश्वा᳹रू॑पंया᳒द॑स्या । ता᳒तो॑ददातीदाशू᳒षेवा᳒सू॑नी । चोदद्राआधाऊ᳒पास्तुतञ्चीदर्वा᳒क् ॥ ८ ॥
॥ वा वी न्द्राःकि। राकजा ज ग त च र्ष णीकूनातन्नातन्नात। न्नो वाचान्नो वाचान्नो वाचा। नो वा हाकिइश। नो वा हाकिइश। नो वा हाकिइश। हा उ वोखिवाप्लहातइश। आ धि क्षा माकीवि श्व रू प य्य दाकूस्यातस्यातस्यात। स्यो वाचास्यो वाचास्यो वाचास्यो वा हाकिइश। स्यो वा हाकिइश। स्यो वा हाकिइश। हा उ वोखिवाप्लहातइश। ता तो द दा तीकुदा शु षा इ व सूकूनीतनीतनीत। नो वाचानो वाचानो वाचा। नो वा हाकिइश। नो वा हाकिइश। नो वा हाकिइश। हा उ वोखिवाप्लहातइश। चोकद द्रा धाकिउ प स्तु त श्वि दकूर्वातर्वातर्वात। र्वो वाचार्वो वाचा। र्वो वाचा। र्वो वा हाकिइश। र्वो वा हाकिइश। र्वो वा हाकिइश। हा उ वोखिवाप्लहाखऔ हो वाशि। ईख ॥११॥ इ न्द्रो हातिबुश। राकजा ज ग त च र्ष णीकूनातन्नातन्नात। ना ओचानाशना ओचानाशना ओचानाश। ना होचानाशना होचानाशना होचानाश। हातबुशऔ हो हाभिबुश। आ धि क्षा माचीवि श्व रू पचीय्य दाकस्यातस्यातस्यात। स्याकओ ना स्याकिओ ना स्याकिओ नाका। स्या हो नाकिस्या हो नाकिस्या हो नाकि। औ हो हातिबुशऔ होचा। ता तो द दा तीकुदा शु षा इ व सूकूनीतनीतनीत। ना ओ नाकिना ओ नाकिना ओ नाकि। ना हो नाकिना हो नाकि। हातबुशऔ हो हाभबुश। चोकद द्रा धाकिउ प स्तू त श्वि दकूर्वातर्वातर्वात। र्वाकओ ना र्वाकओ ना र्वाकिओ नाका। र्वा हो नाकिर्वा हो नाकिर्वा हो नाकि। औ हो हाभिबुशऔ होटाहा उ वाति। ईख ॥१२॥
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छन्दः (Chandas) |
| 109 |
शुनः शेप आजीगर्तिः कृत्रिमो देवरातो वैश्वामित्रो वा |
वरुणः |
त्रिष्टुप् |
॥ शुनः शेप आजीगर्तिः कृत्रिमो देवरातो वैश्वामित्रो वा वरुणः त्रिष्टुप् ॥
ऊ᳒दु॑क्तामंवारूणापा᳹शा॑मस्मात् । आबा॑धामं᳹वीमा॑ध्यामं᳒श्ना॑थाय । आथा॑दित्यव्रातेवा᳒यन्ता᳒वा॑ । आ᳒नागसोआ᳒दीतयेस्याम ॥ ९ ॥
हा बु हा बु हातुबुश। आ यु श्च क्षु श्रो त्रंषूज्यो ति रौ हो वाकुईटयात। उ दु त्त मंषीव रु ण पा श माटूस्मातत् । आ बा ध मंषीवि म ध्य मं श्न थाटूयात। आ था दि त्यषीव्र ते व य न्ताटुवात। आ ना ग सो अ दि त ये स्याटमात। हा बु हा बु हातुबुश। आ युः च क्षु श्रो त्रं ज्यो ति रौ हो वाकीईटयाखऔ हो वाशि। ईख ॥१३॥
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छन्दः (Chandas) |
| 110 |
वसिष्ठो मैत्रावरुणिः |
इन्द्रः |
त्रिष्टुप् |
॥ वसिष्ठो मैत्रावरुणिः इन्द्रः त्रिष्टुप् ॥
इ᳒न्द्रन्ना᳹रो॑नेमा᳒धी॑ताहवन्ते । यत्पार्यायू॑ना᳹ज॑न्तेधीयस्ताः᳒ । शू᳒रोनृ᳹षा॑ताश्रावा॑साश्चका᳒मे । आ᳒गो᳒मा॑तीव्रा᳸जे᳹भाजात्व᳒न्नाः॑ ॥ १० ॥
इ याचाहो इ याचिइ या ईटियात। इ याचाहो इ याचिइ या ईटियात। इ याचाहो इ याचिइ या ईटियात। इ इकन्द्र न्न रो ने इश। य त्पा र्याकियू न ज न्ताकीइ धी य स्ताःकी। शूकरो नृ षाकिताचश्र व स काकीमाचइश। आचगो म ता इशीव्रा जे भ जाकीत्वचन्नाःश। इ याचाहो इ याचिइ या ईटियात। इ याचाहो इ याचिइ या ईटियात। इ याचाहो इ याचिइ या ईटियाखऔ हो वाशि। ईख ॥१४॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 110 |
वसिष्ठो मैत्रावरुणिः |
इन्द्रः |
त्रिष्टुप् |
इ᳒न्द्रन्ना᳹रो॑नेमा᳒धी॑ताहवन्ते । यत्पार्यायू॑ना᳹ज॑न्तेधीयस्ताः᳒ । शू᳒रोनृ᳹षा॑ताश्रावा॑साश्चका᳒मे । आ᳒गो᳒मा॑तीव्रा᳸जे᳹भाजात्व᳒न्नाः॑ ॥ १० ॥
हि म्मि योकिहोच। हि म्मि योकिहोच। हि म्मि योकिहोच। इकन्द्र न्न रो नेकीम धि ता ह व न्ताकूइश। य त्पा र्याकियू न ज न्ताकीइ धि य स्ताःकी। शू रोचानृ षा ताकिश्र व स श्च काकुमाचइश। आचगो म ता इशीव्रा जे भ जाकीस्त्वचन्नःश। हि म्मि योकिहोच। हि म्मि योकिहोच। हि म्मि योकिहा उ वाति। ईख ॥१५॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 111 |
वसिष्ठो मैत्रावरुणिः |
इन्द्रः |
विराडुष्णिक् |
॥ वसिष्ठो मैत्रावरुणिः इन्द्रः विराडुष्णिक् ॥
पीबासो᳒मा॑मिन्द्रा᳒मन्द॑तुत्वा । य᳸न्ते॑सूषा᳒वाहरिय्य᳒श्वाद्रिः᳒ । सोतु᳒र्बा॑हुभ्यांसू᳹यातोना᳒र्वा ॥ ११ ॥
आ ग स्त्याटिहोटआ ग स्त्याचि। आ ग स्त्याटिहोटआ ग स्त्याचि। आ ग स्त्याटिहोटआ ग स्त्याचि। पी बाषासो मा मि न्द्रा माकुन्द तु त्वाकि। यकन्ते सु षा व ह र्याकिश्रा द्रीःचा। सोकतू र्बा हु भ्यांकीसू य तो ना र्वाकू। आ ग स्त्याटिहोटआ ग स्त्याचि। आ ग स्त्याटिहोटआ ग स्त्याचि। आ ग स्त्याटिहोटअ गाटास्ति याखाऔ हो वाशि। ईख ॥१६॥