| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 58 |
वामदेवो गौतमः |
ऋतुः |
पंक्तिः |
॥ वामदेवो गौतमः ऋतुः पंक्तिः ॥
वा᳒स॑न्तइ᳸न्नुरन्याः᳹ । ग्रीष्मइन्नु᳒र᳒त्न्याः॑ । वा᳒र्षाणइन्नुशारा᳒दाः॑ । हेमन्ता᳹शी ᳹शीरइन्नुरन्त्याः॑ ॥ १ ॥
वा सफान्ताफइ न्नूखार न्त्याःशा। ग्रीकष्म इ न्नू रायिन्तीपयाःश। वाचर्षा णि इ न्नु शाटूहि म्माचाइश। रातदाःत। हे म न्त शि शि र इषृन्नुकृराटन् ति याकाबुश। बाख ॥३॥
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ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 59 |
अगस्त्यो मैत्रावरुणिः |
निचृदनुष्टुप् |
ओषधयः |
॥ अगस्त्यो मैत्रावरुणिः ओषधयः निचृदनुष्टुप् ॥
ता᳒वत्य᳹पीतोददतः । तावास्वादिष्ठाते᳒पीतो । प्रस्वद्वा᳒नोरासा॑नां । तूविग्री᳒वा॑इवेरते ॥ २ ॥
इ हा उ वोतीवाशइ हे हा उ वोतुवाश। इ हा उ वोतीवाशइ हे हा उ वोतुवाश। इ हा उ वोतीवाश। इ हे हा उ वोतुवाश। त व त्ये पि तोषुद द ता उ वोतुवाश। इ हा उ वोतीवाशइ हे हा उ वोतुवाश। त व स्वा दि ष्ठ तेषूपि ता उ वोतीवाश। इ हा उ वोतीवाश। इ हे हा उ वोतुवाश। प्र स द्वा नोषीर स ना उ वोतुवाश। इ हा उ वोतीवाश। इ हे हा उ वोतुवाश। तु वि ग्री वाषीइ वे र ता उ वोतूवाश। इ हा उ वोतीवाशइ हे हा उ वोतुवाश। इ हा उ वोतीवाशइ हे हा उ वोतुवाश। इ हा उ वोतीवाशइ हे हा उ वोखुवात्र। ऊखक् ॥४॥
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ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 60 |
भर्गः प्रागाथः |
निचृद्बृहती |
इन्द्र: |
॥ भर्गः प्रागाथः ओषधयः निचृदनुष्टुप् ॥
इन्द्र᳹स्फाढूतावृ॑त्राहा᳒ । परस्पा᳒नोवा᳒रेण्यः । सा᳒नो॑र᳹क्षिषच्चार᳹मंसा᳹मा᳒ध्यामं । सा᳒पश्चात्पातूसा᳒पू॑राः ॥ ३ ॥
हा बु हा बु हातुबुश। ध त्रंचाध त्रंचाध त्रंचा। यकत्रंचयकत्रंचयकत्रंच। भूकतंचभूकतंचभूकतंच। भकव्यंचभकव्यंचभकव्यंच। भ वि ष्याचित्भ वि ष्याचित्भ वि ष्याचित्श। द्यौचद्यौचद्यौचर न्त रि क्षचीम न्त रि क्षचीम न्त रि क्षचीम्श। भू मिचार्भू मिचार्भूचमिःश। इ न्द्र स्प ढूखीताशवृ त्राकाहाफ। पा राचास्पायनोटवा राकाइ णायायाःट। सा नो र क्षिषीष च्च र मं सा मायूद्या माटाम् । सा प श्चाचित्पाकतु साताआ उ वाटि। पू रोखाहात्रइश ॥५॥
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ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 61 |
अनानतः पारुच्छेपिः |
पवमानः सोमः |
अत्यष्टिः |
॥ अनानतः पारुच्छेपिः पवमानः सोमः अत्यष्टिः ॥
आ᳒या᳒रूचा᳒हा᳒रिण्यापूना᳒नः᳒ । वि᳒श्वा᳒द्वेषांसितरतीसायूग्वा॑भिः । सूरोना᳒सायूग्वा॑भिः । धा᳸रा॑पृष्ठास्या॑रोचते । पु᳒नानो᳹आ॑रुषोहा᳒रिःवि᳒श्वा॑यद्रूपा᳹पा॑र्या᳒स्यऋत्वा॑भिः । सप्ता᳹स्ये॑भिऋ᳒त्वा॑भिः ॥ ४ ॥
हा बु हा बु हातुबुश। आ युकारा युकारा युकार्द्यौकर्द्यौकद्यौकर न्ता रि क्षकीम न्ता रि क्षकीम न्ता रि क्षकीम् । भू मिकार्भू मिकार्भू मिकास्स्वकस्स्वकस्स्वकज्यो तिचाज्यो तिचाज्योचतिःश। अ या रू चा हाकुरि ण्याथापु नाचानःशपु नाचानःशपु नाचानःश। वि श्वा द्वे षांषीसि त र ती साचुयु ग्वाचाभि र्ग्वाचाभि र्ग्वाचाभिःश। सू रो नाचिसाकयुचग्वा भि र्ग्वा भि र्ग्वा भिःशू। धा राचापृ ष्ठा स्य रोकीचा ताचाइशचा ताचाइशचा ताचाइश। पु ना नो आ रु षोचूहा रिचार्हा रिचार्हाचरिःश। वि श्वा य द्रू पाकुप रि याथिस्य र्क्वाचाभि र्क्वाचाभि र्क्वाचाभिःश। स प्ता स्येचिभी र्क्वाचाभि र्क्वाचाभि र्क्वाचाभिःश। हा बु हा बु हातुबुश। आ युकारा युकारा युकार्द्यौकर्द्यौकद्यौकर न्ता रि क्षकीम न्ता रि क्षकीम न्ता रि क्षकीम् । भू मिकार्भू मिकार्भू मिकास्स्वकस्स्वकस्स्वकज्यो तिचार्ज्यो तिचाज्योकताखऔ हो वाशि। एतरा जकान्सा मु द्री याकीआ पाकाउ प स्थोकिय स्या पृ थि विकुम ही पाकिश्वे य स्याकिवि द्यु तौकिद्यौः पृ ष्ठंकिम ह त स्सा ताःचु ॥६॥
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ऋषिः (Rishi) |
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छन्दः (Chandas) |
| 62 |
भर्गः प्रागाथः |
इन्द्रः |
बृहती |
| 63 |
अम्बरीषो वार्षागिरः ऋजिष्वा भारद्वाजश्च |
पवमानः सोमः |
अनुष्टुप् |
॥ भर्गः प्रागाथः इन्द्रः बृहती ॥ ॥ अम्बरीषो वार्षागिरः ऋजिष्वा भारद्वाजश्च पवमानः सोमः अनुष्टुप् ॥
याता॑इन्द्राभाया॑महे । ता᳸तो॑नोआ᳒भा॑यंकृ॑धि । मा᳒घा॑वन्शग्धिता᳹वा॑तन्नाऊता᳒ये॑ । वि᳒द्वि᳒षोविमृधो॑जहि ॥ ५ ॥
आ᳒भी᳒नोवाजसा᳒तामं । रायीमऋ॑षाशातस्पृह॑म् । इ᳸न्दो॑साहास्रा॑भर्णा॑सं । तूविद्युम्नंवीभासा᳒ह॑म् ॥ ६ ॥
आ युकारा युकारा युका। रै या याकि। दै रा याकि। दै रा याकि। त्सा मै रा याकी। त्सा मै रा याकी। त्सा मै रा याकीत् । भू जे ना च्छाचीत्र इ मोकिजायसाट। भू जे ना च्छाचीत्र इ मोकिजायसाट। भू जे ना च्छाचीत्र इ मोकिजायसाट। य त इ न्द्राचीभा याकामायहाटइश। त तो नो आचीभा याकाङ्कायर्धीट। मा घ व न्श ग्धिषुत व तचिन्ना ऊकाताययाटइश। वि द्वि षो वीचीमृ धोकाजायहीट। आ युकारा युकारा युकारै या याकिदै रा याकिदै रा याकित्सा मै रा याकीत्सा मै रा याकीत्सा मै रा याकीत् । भू जे ना च्छाचीत्र इ मोकिजायसाट। भू जे ना च्छाचीत्र इ मोकिजायसाट। भू जे ना च्छाचीत्र इ मोकिजाटसाखऔ हो वाशि। एतध र्म एकित्वि रे त्वि षि रेकुअ थ एकिस हाःटाख् ॥७॥ हा हाणाहा हाणाबुश। हा हाणाहा हाणाबुश। हा हाणाहा हाणाबुश। प्रा हा हाणिहा हाणाबुश। प्रा हा हाणिहा हाणाबुश। प्रा हा हाणिहा हाणाबुश। वा हा हाणिहा हाणाबुश। वा हा हाणिहा हाणाबुश। वा हा हाणिहा हाणाबुश। ई हा हाणिहा हाणाबुश। ई हा हाणिहा हाणाबुश। ई हा हाणिहा हाणाबुश। आ भि नो वा जाकुसाचत म न्त म न्त मशूम् । र यि म र्षा शाकुत स्पृ हंचिस्पृ हंचास्पृ हचाम् । इकन्द्रो स ह स्रकीभचर्न स न्न स न्न सशूम् । तु वि द्यु म्नं वीकूभाचस हं स हं स हशूम् । हा हा हा हा बु । त्रिः । हा हाणाहा हाणाबुश। हा हाणाहा हाणाबुश। हा हाणाहा हाणाबुश। प्रा हा हाणिहा हाणाबुश। प्रा हा हाणिहा हाणाबुश। प्रा हा हाणिहा हाणाबुश। वा हा हाणिहा हाणाबुश। वा हा हाणिहा हाणाबुश। वा हा हाणिहा हाणाबुश। ई हा हाणिहा हाणाबुश। ई हा हाणिहा हाणाबुश। ईषह ह ह हा उ वातु। एतमा होचाम हाचात् । एतमा होचाम हाचात् । एतमा होचाम हाचात् ॥८॥
| Global # |
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छन्दः (Chandas) |
| 64 |
भरद्वाजो बार्हस्पत्यः |
अग्निः |
गायत्री |
॥ भारद्वाजो बार्हस्पत्यः अग्निः गायत्री ॥
अग्ना॑आ᳒याहीवी᳒ता᳒ये । गृ᳒णा᳒नोहव्यादा॑तये । नीहो᳒ता॑सत्सीबर्हीषि॑ ॥ ७ ॥
अ स्मीकान स्मीथाअ स्मीकान स्मीथाअ स्मीकान स्मीथान् । नृ म्णाकाइ न्नृ म्णंचि। नृ म्णाकाइ न्नृ म्णंचि। नृ म्णाकाइ न्नृ म्णंचि। नी धा इ माटीहाट। नी धा इ माटीहाट। नी धा इ माटीहाट। अ ग्नाकाआ याथाही वाकाइ तायायाटइश। गु णा नो हाचीव्या दाकाताययाटइश। नी हो ता साचीत्सी बाकार्हायइ षीटा। अ स्मीकान स्मीथाअ स्मीकान स्मीथाअ स्मीकान स्मीथान् । नृ म्णाकाइ न्नृ म्णंचि। नृ म्णाकाइ न्नृ म्णंचि। नृ म्णाकाइ न्नृ म्णंचि। नी धा इ माटीहाट। नी धा इ माटीहाट। नी धा इ माटीहाखओ हो वाशि। एतस्व र्ज्योटातीःख ॥९॥
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देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 65 |
नारायणः |
पुरुषः |
अनुष्टुप् |
| 66 |
वामदेवो गौतमः |
पुरुषः |
अनुष्टुप् |
| 67 |
वामदेवो गौतमः |
पुरुषः |
अनुष्टुप् |
| 68 |
वामदेवो गौतमः |
पुरुषः |
अनुष्टुप् |
| 69 |
नारायणः |
पुरुषः |
अनुष्टुप् |
| 70 |
नारायणः |
पुरुषः |
अनुष्टुप् |
| 71 |
नारायणः |
पुरुषः |
अनुष्टुप् |
॥ नारायणः पुरुषः अनुष्टुप् ॥ ॥ वामदेवो गौतमः पुरुषः अनुष्टुप् ॥
सह᳒स्राशीर्षापूरू॑षः । सहस्राक्षा᳒स्साहस्रा᳒पात् । सा᳸भू॑मिंस᳒र्वातो॑वृत्वा । अत्यातिष्ठद्दशांगूलम् ॥ ८ ॥
त्रीपा᳒दूर्ध्वा॑ऊदू᳒यत्पूरू᳒षः । पादो॑स्येहा᳹भा॑वत्पूनाः । ता᳒थाविष्वंव्या१क्रमात् । अ᳹श॑ना॑नशने᳒आभि ॥ ९ ॥
पूरू॑षाए᳒वेदंस᳒र्वं॑ । य᳒त्भूतंया᳒च्चाभा᳒व्यं॑ । पादो॑स्यास᳹र्वा॑भूतानी । त्रीपाद॑स्यामृ᳹त॑न्दीवी᳒ ॥ १० ॥
ता᳒वा॑नस्यामाहीमा᳒ । ता᳒तो᳸ज्यायांश्चापू᳒रु॑षः । ऊता᳹मृ॑तत्वस्येशा॑नः । याद॑न्नेनातीरो᳹हा॑ति ॥ ११ ॥
ता᳸तो॑वीराड᳒जा᳒यत । वीरा᳒जोआ᳒धीपू᳒रु॑षः । सा᳒जातो᳒अत्या॑रिच्यत । पश्चात्भू᳒मि᳸मा᳸थो॑पूरः᳒ ॥ १२ ॥
य᳒त्पू᳒रूषेणाहावीषाः᳒ । देवा᳒यज्ञामा᳒त॑न्वाताः । वस॑न्ताये॑षामासीदा᳒ज्यं॑ । ग्रीष्मा᳒इध्माः᳹शा᳸रा॑द्धाविः ॥ १३ ॥
सप्ता᳒स्या॑सन्पारीधा᳒याः । त्रीस्सप्त᳒स्समीधाः᳒कृ॑ताः । देवायद्य᳒ज्ञ᳒न्तन्वानः᳒ । आब॑ध्नन्पू᳒रू॑षंहाविः᳒ ॥ १४ ॥
उ हु वा हाकी। बु हु वा हाकी। बु हु वा हाकीबुश। सषह स्र शी र्षा पू रूटूषाःत। सषह स्रा क्ष स्स ह स्राटूपातत् । साषभू मिं स र्व तो वाटूत्वात। अषत्य ति ष्ठ द्द शा ङ्गूटूलातम् । उ हु वा हाकी। बु हु वा हाकी। बु हु वाटिहा उतिवा । इ ट् ई ळाटिख् ॥१०॥ उ हु वौ हो वाटुच्। उ हु वौ हो वाटुच्। उ हु वौ हो वाटुच्। त्री पाषादू र्ध्वा उ दै त्पू रुटूषाःत। पाषदो स्ये हा भ व त्पूटूनाःत। ताषथा वि ष्वं वि य क्राटूमा त् । अषश ना न श ने आटूभीत। उ हु वौ हो वाटुच्। उ हु वौ हो वाटुच्। उ हु वौ होटीट्वाखओ हो वाशि। ईखळाण। उ हु वौ हो वाटुच्। उ हु वौ हो वाटुच्। उ हु वौ होटीट्वाखओ हो वाशि। सुखवाःण। उ हु वौ हो वाटुच्। उ हु वौ हो वाटुच्। उ हु वौ होटीट्वाखओ हो वाशि। ऊख ॥११॥ इ हि यौ हो वाटुच्। इ हि यौ हो वाटुच्। इ हि यौ हो वाटुच्। पुषरु ष ए वे दं साटूर्वातम् । यषत्भू त य श्च भा वाटूयातम् । पाषदो स्य स र्वा भू ताटूनीत। त्रिषपा द स्या मृ त न्दाटूइ वीता। इ हि यौ हो वाटुच्। इ हि यौ हो वाटुच्। इ हि यौ होटीट्वाखऔ हो वाशि। । इ हि यौ हो वाटुच्। इ हि यौ हो वाटुच्। इ हि यौ होटीट्वाखऔ हो वाशि। ईखळाण। इ हि यौ हो वाटुच्। इ हि यौ हो वाटुच्। इ हि यौ होटीट्वाखऔ हो वाशि। ज्योखतीःण। इ हि यौ हो वाटुच्। इ हि यौ हो वाटुच्। इ हि यौ होटीट्वाखऔ हो वाशि। ईख ॥१२॥ ऊ र्घाकाबु हा बु हाती। बू र्घाकाबु हा बु हाती। बू र्घाकाबु हा बु हातीबुश। ता वा न स्या म हाटूइ माता। ताषतो ज्या यां श्च पू रूटूषाःत। ऊषता मृ त त्त्व स्ये शाटूनाः । याषद न्ने ना ति रो हाटूती । ऊ र्घाकाबु हा बु हाती। बू र्घाकाबु हा बु हाती। बू र्घाकाबु हा बु हा उ वातू। इ ट् इ ळाटिख् ॥१३॥ हा बु हा बु हातुबुश। ताषतो वी रा ड जा याटूतात। वीषरा जो अ धि पू रूटूषाःत। साषजा तो अ त्य रि च्याटूतात। पषश्चा त्भू मि म थो पूटूराःत। हाषबु हा बु हा उ वातू। ईख ॥१४॥ हा बु हा बु हातुबुश। यषत्पू रु षे णा हा वाटूइ षाता। देषवा य ज्ञ म त न्वाटूतात। वाषस न्तः ए षा मा सी दाटूज्यातम् । ग्रीषष्म इ ध्म श र द्धाटूवातइःश। हाषबु हा बु हा उ वातू। ईख ॥१५॥ हा बु हा बु हातुबुश। सषप्ता स्या स्य न्प रि धाटूयाःत। त्रिषस प्त स मि धः काटूर्त्ताःत। देषवा य द्य ज्ञ न्त न्वाटूनाःत। आषब ध्न न्पु रु षं हाटूवातइःश। । हाषबु हा बु हा उ वातू। ईख ॥१६॥