| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 44 |
भर्गः प्रागाथः |
इन्द्रः |
बृहती |
| 45 |
वसिष्ठो मैत्रावरुणिः |
इन्द्रः |
त्रिष्टुप् |
॥ भर्गः प्रागाथः इन्द्रः बृहती ॥ ॥ वसिष्ठो मैत्रावरुणिः इन्द्रः त्रिष्टुप् ॥
याता॑इन्द्राभाया॑महे । ता᳸तो॑नोआ᳒भा॑यंकृ॑धि । मा᳒घा॑वन्शग्धिता᳹वा॑तन्नाऊता᳒ये॑ । वि᳒द्वि᳒षोविमृधो॑जहि ॥ १ ॥
इ᳒न्द्रन्ना᳹रो॑नेमा᳒धी॑ताहवन्ते । यत्पार्यायू॑ना᳹ज॑न्तेधीयस्ताः᳒ । शू᳒रोनृ᳹षा॑ताश्रावा॑साश्चका᳒मे । आ᳒गो᳒मा॑तीव्रा᳸जे᳹भाजात्व᳒न्नाः॑ ॥ २ ॥
ऐकरा याटाच्त्सा मै र याभी। दैकरा याटाच्त्सा मै र याभी। दैकरा याटाच्त्सा मै र याभीत् । भ्राकज न्नषाश त्रु भो ज स एकूअ ध एकिसु व र्य्य त इ न्द्रषूभ या म हा इशु। त तो नोषिअ भ यं कृ धा इशू। म घ व न्श ग्धि तषूव त न्न ऊ त या इशू। वि द्वि षोषिवि मृ धो ज हा इशू। ऐकरा याटाच्त्सा मै र याभी। दैकरा याटाच्त्सा मै र याभी। दैकरा याटाच्त्सा मै र याभीत् । भ्राकज न्नषाश त्रु भो ज स एकूअ ध एकिसू वाःटाख् ॥१॥ भ्राकजाचभ्राकजाचभ्राकजाच। इ या होचिइ या होचिइ या होचि। इकन्द्र न रो नेकीम धि ता ह व न्ताकूइश। य त्पा र्याचियूषन ज न्ता इ धी याकूस्ताःश। शूकरो नृ षा ताकीश्र व स श्च का माकूइश। आकगो म ता इ व्रा जेकूभ जाचात्वचन्नःश। भ्राकजाचभ्राकजाचभ्राकजाच। इ या होचिइ या होचिइ या होटिइ याखाओ हो वाशि। ईख ॥२॥
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ऋषिः (Rishi) |
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छन्दः (Chandas) |
| 46 |
अनानतः पारुच्छेपिः |
पवमानः सोमः |
अत्यष्टिः |
॥ अनानतः पारुच्छेपिः पवमानः सोमः अत्यष्टिः ॥
आ᳒या᳒रूचा᳒हा᳒रिण्यापूना᳒नः᳒ । वि᳒श्वा᳒द्वेषांसितरतीसायूग्वा॑भिः । सूरोना᳒सायूग्वा॑भिः । धा᳸रा॑पृष्ठास्या॑रोचते । पु᳒नानो᳹आ॑रुषोहा᳒रिःवि᳒श्वा॑यद्रूपा᳹पा॑र्या᳒स्यऋत्वा॑भिः । सप्ता᳹स्ये॑भिऋ᳒त्वा॑भिः ॥ ३ ॥
भ्रा जा भ्रा जाकी। भ्रा जाथाआ उ वाटि। आ याचारु चा ह रि ण्याकुपु ना नो वि श्वाकुद्वे षांशासि त र तीकीसा यू ग्व भीःकी। सू रोकानाकसा यू ग्व भि र्धा राकूपृ ष्ठ स्य रो च तेकूपु ना नोकिआ रु षोकिहा रिकार्विशश्वा य द्रूकिपाकपा रि याकिस्य र्क्व भीःकि। स प्ता स्येकिभी रू क्व भीःकी। भ्रा जा भ्रा जाकीभ्रा जाथाआ उ वाटि। एतवि श्व स्मैकिज ग तोकिज्योकति र्ज्योटाताखओ हो वाशि। इ ट् इ ळाटिख् ॥३॥
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ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 47 |
विश्वामित्रो गाथिनः |
आत्मा अग्निर्वा |
त्रिष्टुप् |
| 48 |
विश्वामित्रो गाथिनः |
अग्निः |
त्रिष्टुप् |
| 49 |
वामदेवो गौतमः |
अग्निः |
पंक्तिः |
| 50 |
वसिष्ठो मैत्रावरुणिः |
इन्द्रः |
त्रिष्टुप् |
॥ विश्वामित्रो गाथिनः आत्मा अग्निर्वा त्रिष्टुप् ॥ ॥ विश्वामित्रो गाथिनः अग्निः त्रिष्टुप् ॥ ॥ वामदेवो गौतमः अग्निः पंक्तिः ॥ ॥ वसिष्ठो मैत्रावरुणिः इन्द्रः त्रिष्टुप् ॥
अग्नी᳒राश्मीज᳒न्मा॑नाजाता᳒वे॑दाः । घृतम्मे᳒चाक्षु॑रामृत॑म्माआसन् । त्रिधा᳒स्त्वा᳹र्कोरा᳒ज॑सोविमा᳒नः॑ । आज॑सृञ्ज्यो᳹तिर्हा॑वीरास्मिसा᳒र्व॑म् ॥ ४ ॥
पात्य᳹ग्नीर्वीपो᳹अ ᳹ग्रं॑पादं᳒वोः । पातीयह्न᳹श्चा᳹राणंसू᳒र्या॑स्या । पा᳒तीना᳹भा॑सप्ता᳒शी॑र्षाणामग्नीः᳒ । पा᳒तीर्देवा᳒ना॑मूपामा᳸द॑मृष्वा᳒ ॥ ५ ॥
भ्रा᳒ज॑न्त्यग्नेसमीधानादी᳒दीवः᳒ । जिह्वा᳒चारत्यन्ता᳒रासा᳒नी । सत्व᳒न्नो॑अग्नेपा᳒यासावासूवी᳒त् । रायिंवर्चोंदृशे᳒दाः॑ ॥ ६ ॥
इ᳒न्द्रन्ना᳹रो॑नेमा᳒धी॑ताहवन्ते । यत्पार्यायू॑ना᳹ज॑न्तेधीयस्ताः᳒ । शू᳒रोनृ᳹षा॑ताश्रावा॑साश्चका᳒मे । आ᳒गो᳒मा॑तीव्रा᳸जे᳹भाजात्व᳒न्नाः॑ ॥ ७ ॥
हा बु हा बु हातुबुश। ऊटऊटऊट। हु ग्नुटाहु ग्नुटाहु ग्नुटा। इ या हाकिवि या हाकिवि या हाकिबुश। हाषबु हा बु हा उ वातू। इ ट् इ ळाटिख् ॥४॥ हाषबु हा बु हा उ वातू। अ ग्नी राकिस्मि ज न्म नाकीजा त वे दाकीइ ळाकास्व रि ळाटिख्। हाषबु हा बु हा उ वातू। घृ त म्मेकिच क्षूकारा मृ तं आकीस मि ळाकिस्व रि ळाटिख्। हाषबु हा बु हा उ वातू। त्री धाचात्व र्कोचार ज सोशिवी माचाना इ ळाकिस्व रि ळाटिख्। हाषबु हा बु हा उ वातू। अ ज स्रंकिज्यो ति र्हाकिवि राचास्मीशसा र्वाकामि ळाचास्व रि ळाटिख् ॥५॥ हा बु हा बु हा बुषूपा त्य ग्नि र्वि पोचुअ ग्रंचापा दंकावेचर्हायउ वाटासूखवाःण। इ हाकाच्हायउ वाटाज्योखतीःण। हा बु हा बु हा बुषूपा ति य ह्व श्च राकूणं सुथार्या स्याचाहायउ वाटासूखवाःण। इ हाकाच्हायउ वाटाज्योखतीःण। हा बु हा बु हा बुषूपा ति ना भाचीस प्त षीकिर्शाचना माचाग्नीकर्हायउ वाटासूखवाःण। इ हाकाच्हायउ वाटाज्योखतीःण। हा बु हा बु हा बुषूपा ती दे वा नाचुमु प माकिच्द मा र्ष्वोकिहायउ वाटासूखवाःण। इ हाकाच्हायउ वाटाज्योखतीःण ॥६॥ भ्रा जाकाऔचक्हो हो हाकिइश। त्यषग्रे स मि धा ना दीयूदि वाःटा। जि ह्वाकाऔचक्हो हो हाकिइश। चा र न्त्य न्ता रायुसा निटा। स त्वाकाऔचक्हो हो हाकिइश। नो अषिग्ने प य सा व सूटूवीतत् । रा यिं व र्चो दृ शौकूहोतहि म्माटादा औटाहोखबाप्ल। हो इप्लाळाश ॥७॥ इ याटाइ याटाइ याटा। इ या हाकिइ या हाकिइ या हाकि। विकन्द्र न रो नेकुम धि ताचि। हा व न्तेणि। हा व न्तेणि। हा व न्तेणि। ह व न्तेणिहा हाचाहाकहाफहाप्ल। ह व न्तेणिहा हाचाहाकहाफहाप्ल। ह व न्तेणिहा हाचाहाकहाफहाप्ल। हा वचान्तेश। हा वचान्तेश। हा वचान्तेश। य त्पाचार्याकयू न ज न्ताकीइश। धी या स्ताःणिधी या स्ताःणि। धी या स्ताःणि। धी या स्ताणिहा हाचाहाकहाफहाप्ल। धी या स्ताणिहा हाचाहाकहाफहाप्ल। धी या स्ताणिहा हाचाहाकहाफहाप्ल। धी या स्ताःचि। धी या स्ताःचि। धी या स्ताःचि। शूकरो नृ षा ताकीश्र व साःचि। चा का मेणि। चा का मेणि। चा का मेणि। । च का मेणिहा हाचाहाकहाफहाप्ल। च का मेणिहा हाचाहाकहाफहाप्ल। च का मेणिहा हाचाहाकहाफहाप्ल। चा का मेचि। चा का मेचि। चा का मेचि। आकगो म ता इकीव्रा जेकाभ जाचास्तू व न्नाणि। स्तू व न्नाणि। स्तू व न्नाणि। त्व न्नोणाहा हाचाहाकहाफहाप्ल। त्व न्नोणाहा हाचाहाकहाफहाप्ल। त्व न्नोणाहा हाचाहाकहाफहाप्ल। त्व न्नाचा। स्त्व न्नाचा। स्त्व न्नाःचा। इ याटाइ याटाइ याटा। इ या हाकिइ या हाकिइ या हाकि। एतच्व्रा त मेचिसु व रेचिश कु नाःचि ॥८॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 51 |
वसिष्ठो मैत्रावरुणिः |
इन्द्रः |
त्रिष्टुप् |
॥ वसिष्ठो मैत्रावरुणिः इन्द्रः त्रिष्टुप् ॥
इ᳒न्द्रन्ना᳹रो॑नेमा᳒धी॑ताहवन्ते । यत्पार्यायू॑ना᳹ज॑न्तेधीयस्ताः᳒ । शू᳒रोनृ᳹षा॑ताश्रावा॑साश्चका᳒मे । आ᳒गो᳒मा॑तीव्रा᳸जे᳹भाजात्व᳒न्नाः॑ ॥ ८ ॥
हिं हिं हिंषि। हो हो हो । हा हा हाकू। ओ हा ओ हा ओ हा ओ हातू। एषऔ हो औ हो औ होतुवात। इकन्द्र न रो नेकीम धि ता ह व न्ताचू। इकन्द्र न रो नेकीम धि ता ह व न्ताचू। इकन्द्र न रो नेकीम धि ता ह व न्ताचूइश। व योकाबृ ह द्ब योकी। बृ हचाद्ब योका। बृ ह द्भि भ्रा ष्टेचूवि धकार्म णिशा। बि भ्रा ष्टेकिवि धकार्म णिशा। बि भ्रा ष्टेकिवि धकार्म णिशा। य त्पाचार्याशयू न ज न्ताचीइ धी या स्ताःकीच्। य त्पाचार्याशयू न ज न्ताचीइ धी या स्ताःकीच्। य त्पाचार्याशयू न ज न्ताचीइ धी या स्ताःकीच्। स त्य मोचिजाक। स्स त्य मोचिजाक। स्स त्य मोचिजाक। । र ज स्वोचिर ज स्वोचिर ज स्वाःचि। शूकरो नृ षा ताकीश्र व स श्च का माकूइश। शूकरो नृ षा ताकीश्र व स श्च का माकूइश। शूकरो नृ षा ताकीश्र व स श्च का माकूइश। भ द्रंचासु धाशा। भ द्रंचासु धाशा। भ द्रंचासु धेशा। षा मूचार्जं मिशाषा मूचार्जं मिशाषा मूचार्जशम् । हिं हिं हिंषि। हो हो हो । हा हा हाकू। ओ हा ओ हा ओ हा ओ हातू। एषऔ हो औ हो औ होतुवात। आकगो म ता इ व्राकुजे भ जा त्व न्नाकु। आकगो म ता इ व्राकुजे भ जा त्व न्नाकु। आकगो म ता इ व्राकुजे भ जा त्व न्नाःकु। बृ ह द्य शोची। बृ ह द्य शोची। बृ ह द्य शोची। दि वि द धेकीहाचस् । दि वि द धेकीहाचस् । दि वि द धेकीहा उ वाति। वाकगी ळा सु वोकीबृ ह द्भाःखि ॥९॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 52 |
वसिष्ठो मैत्रावरुणिः |
इन्द्रः |
त्रिष्टुप् |
॥ वसिष्ठो मैत्रावरुणिः इन्द्रः त्रिष्टुप् ॥
इ᳒न्द्रन्ना᳹रो॑नेमा᳒धी॑ताहवन्ते । यत्पार्यायू॑ना᳹ज॑न्तेधीयस्ताः᳒ । शू᳒रोनृ᳹षा॑ताश्रावा॑साश्चका᳒मे । आ᳒गो᳒मा॑तीव्रा᳸जे᳹भाजात्व᳒न्नाः॑ ॥ ९ ॥
हा बु हा बु हाचुवा इ हीकिआ इ हीकिआ इ हीकि। आ इ हि याकीआ इ हि याकीआ इ हि याकी। आ साकावा साकावा साकाबुश। आ याकामा याकामा याका। न्ना मोकाना मोकानाचमःश। की ट् की ट् की ट् की ट् की ट् की ट् की ट् की ट् की ट् की ट्षेकी ट् की ट् की ट् की ट् की ट्शु। । इ न्द्र न रो नेषुम धि ता ह वाटुन्तातइश। य त्पा र्या यूषीन ज न्ता इ धि याटूस्ताःत। शू रो नृ षा ताषुश्र व स श्च काटुमातइश। आ गो म तिषीव्रे जे भ जा तू वाटून्नाःत। हा बु हा बु हाचुवा इ हीकिआ इ हीकिआ इ हीकि। आ इ हि याकीआ इ हि याकीआ इ हि याकी। आ साकावा साकावा साकाबुश। आ याकामा याकामा याका। न्ना मोकाना मोकानाचमःश। की ट् की ट् की ट् की ट् की ट् की ट् की ट् की ट् की ट् की ट्षेकी ट् की ट् की ट् की ट् की ट्शु। मा नोचावा हो इ प्रा णो वा हो इ च क्षो वा हो इषौश्रो त्रो वा हो इ घो षो वा हो इशे। व्रा तोचावा हो इ चि त्तो वा हो इ भू तो वा हो इषौधी तो वा हो इ पा नो वा हो इशे। सु वो वा हो इषुज्यो तोचावाकहोटवाखओ हो वाशि। ऊख ॥१०॥