| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 154 |
गोतमो राहूगणः |
इन्द्रः |
पंक्तिः |
| 155 |
गोतमो राहूगणः |
इन्द्रः |
पंक्तिः |
॥ गोतमो (सम्मदो वा) राहूगणः इन्द्रः पङ्क्त्तिः ॥
इ᳒न्द्रोमा᳒दायवावृधे । शावा॑सेवृत्रा᳸हा᳒नृ᳒र्भीः॑ । त᳒मिन्माहा᳒त्स्वाजीषु । ऊतीमर्भेहवामहे । सा᳸वा᳸जे॑षुप्रा᳒नो॑विषात् ॥ १ ॥
स्वादो᳒रित्था᳹वी॑षूवा᳒ताः । मा᳒धोः॑पिबन्तिगौर्याः१ । या᳒इ᳒न्द्रे॑णासा᳒याववा॑रिः । वृष्णामाद॑न्तीशो᳒भा᳒था । व᳒स्वीरा᳹नू॑स्वारा᳒ज्य॑म् ॥ २ ॥
इ न्द्रो म दाती। या वा वृ धे श व से वृ त्र हाटूनृ भाचाइःश। अ थाचा। ता मि न्म ह त्सु वायूजापइ षूशा। ऊकति म र्भे ह वाटुमाखहाणइश। सा वा जे षु प्र नाटूहो वा इ ष दाकुआ उ वाटि। आखथाण ॥१॥ ए स्वा दोःकि। इ त्था वि षू व तोषूम धोः पि ब न्ति गाटूबु र्याः । ईचळाश। या इ न्द्रे ण स यायूवापरीःश। वृ ष्णा म द न्ति शोटूभाखथाण। व स्वी र नू स्व राटूहो जा य माटीआ उ वाटि। इ ट् इ ळाटिख् ॥२॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 156 |
गोतमो राहूगणः |
इन्द्रः |
पंक्तिः |
॥ गोतमो (सम्मदो वा) राहूगणः इन्द्रः पङ्क्त्तिः ॥
स्वादो᳒रित्था᳹वी॑षूवा᳒ताः । मा᳒धोः॑पिबन्तिगौर्याः१ । या᳒इ᳒न्द्रे॑णासा᳒याववा॑रिः । वृष्णामाद॑न्तीशो᳒भा᳒था । व᳒स्वीरा᳹नू॑स्वारा᳒ज्य॑म् ॥ ३ ॥
ए स्वा दोःकि। इ त्थाषावि षु हो व त याटू। हा उ वोखिवाशहा उ वोखिवाशप्ल्हातओपवाशहा उ वाति। मा धोः पि ब न्ति गौकूर्यो या इ न्द्रे णाकुसा याकाव रीःका। वृ ष्णाकाम द न्ति शोकीभ थाका। व स्वीकार नु स्व राकिज्याचम् । । हा उ वोखिवाशहा उ वोखिवाशप्ल्हातओपवाशहा उ वाति। हौतआतऊतईख ॥३॥ ए स्वा दोकिरोखवाण। इ त्था वि षुटीच्वा ताःचा। अचथाश। ए म धोकिरोखवाण। पि ब न्ति गाटीबु रीचायाःश। अचथाश। ए या याकिओखवाण। द्रे णा स याटीवा राचाइःश। अचथाश। ए वृ ष्णाकिओखवाण। मा द न्ती शोटीभा थाचा। अचथाश। ए व स्वीकिरोखवाणआ नु स्व राटीजी यांचा। अ थाचा ॥४॥
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ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 157 |
गोतमो राहूगणः |
इन्द्रः |
पंक्तिः |
| 158 |
मेधातिथिः काण्वः |
इन्द्रः |
महा पंक्तिः |
॥ गोतमो (सम्मदो वा) राहूगणः इन्द्रः पङ्क्त्तिः ॥ ॥ मेधातिथिः काण्वः (मान्धाता यौवनाश्वः) इन्द्रः महापंक्तिः ॥
स्वादो᳒रित्था᳹वी॑षूवा᳒ताः । मा᳒धोः॑पिबन्तिगौर्याः१ । या᳒इ᳒न्द्रे॑णासा᳒याववा॑रिः । वृष्णामाद॑न्तीशो᳒भा᳒था । व᳒स्वीरा᳹नू॑स्वारा᳒ज्य॑म् ॥ ४ ॥
ऊर्भे᳹या ᳹दिन्द्रारो᳒द॑सि । आपःप्रा᳒थोषा᳒ई॑वा । माहा᳒न्त॑न्त्वामाही᳒नां॑ । स᳒म्रा॑जन्वर्षाणीनां᳒ । दे᳒वी᳒जनीत्र॑यजीजनात् । भ᳒द्रा᳒ज᳒नीत्रयजीजना᳒त् ॥ ५ ॥
ए स्वा दोकिरे स्वा दोःकि। इ त्था वि षुटीवा ताःचा। इ ळाशा। ए म धोकिरे म धोःकि। पि ब न्ति गाटीबु र्याचाइ ळाशा। ए या याकिए या याकिन्द्रे णा स याटीवा राचाइःशइ ळाशा। ए वृ ष्णाकिए वृ ष्णाकिमा द न्ति शोटीभा थाचाइ ळाशा। ए व स्वीकिरे व स्वीःकि। आ नु स्व राटीजी यांचाइ ळाशा ॥५॥ ऊकभाचइश। या दि न्द्र रोटीच्दा साचाइश। इ ळाचा। आ पाकाप्रा थाकाउ षाटाच्ई वाचा। इ ळाचा। मा हा न्त त्वाटीच्म हाचाई नांशा। इ ळाचा। सा म्राकाज्यंकच र्ष णाटिच्इ नांचा। इ ळाचा। दे वीकाजकनि त्र्य जाटिच्इ जा नाचित् । इ ळाचा। भ द्राकाजाकनि त्र्य जाटिच्इ जा नाचित् । इ ळाचा ॥६॥
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ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 159 |
मधुच्छन्दा वैश्वामित्रः |
पवमानः सोमः |
गायत्री |
| 160 |
भरद्वाजो बार्हस्पत्यः |
अग्निः |
गायत्री |
॥ मधुच्छन्दा वैश्वामित्रः पवमानः सोमः गायत्री ॥ ॥ वसिष्ठो मैत्रावरुणिः अग्निः गायत्री ॥ ॥ भाद्वाजो बार्हस्पत्यः अग्निः गायत्री ॥
स्वा॑दी॑ष्ठायामा᳒दी॑ष्ठाया । पा᳒वा॑स्वसोमाधारा॑या । इ᳸न्द्रा॑यापा᳒तावेसूतः᳒ ॥ ६ ॥
अ᳸ग्नेयुंक्ष्वाहीयेता᳒वा॑ । अश्वा॑सोदेवासाधावाः । आ᳒रं॑वा᳹ह॑न्त्याशा᳒वाः॑ ॥ ७ ॥
हा बु हाषिबु हा वो हा ओ हाकाओ हाका। इ याटाइ याटाइ याटा। औकहोटच्औकहोटच्औकहोटच्इश। भू व दि ळाकीस्वा दि ष्ठ याकीमा दि ष्ठ याचीज न दि ळाचा। पा वा स्व सोचीमा धाकार याचावृ ध दि ळाची। इ न्द्रा य पाचीता वाकाइ सूचाताःश। का र दि ळाची। इ न्द्रा य पाचीता वाकाइ सूचाताःश। हा बु हाषिबु हा वो हा ओ हाकाओ हाका। इ याटाइ याटाइ याटा। औकहोटच्औकहोटच्औ होपाउ हु वा हा उ वातू। एतच्धेचनुःश ॥७॥ इ यो इ याचीइ योटाइ याकाईचयाश। अ ग्ने यूं क्ष्वा हीतुये त वाःति। अ ग्ने यू क्ष्वा हीकुये त वाःचि। अ ग्ने यूं क्ष्वा हीतूये त वाःति। इ यो इ याचीइ योटाइ याकाईचयाश। अ श्वा सो दे वातुसा ध वाःति। अ श्वा सो दे वाकुसा ध वाःचि। अ श्वा सो दे वातुसा ध वाःति। इ यो इ याचीइ योटाइ याकाईचयाश। आ रं व ह न्त्वीतुया श वाःति। आ रं व ह न्तीकुया श वाःचि। आ र व ह न्तीतुया श वाःति। इ यो इ याचीइ योटाइ याकाईचयाश। आटहाचस्श। एतप याःटाख् ॥८॥
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ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 161 |
मधुच्छन्दा वैश्वामित्रः |
इन्द्रः |
गायत्री |
| 162 |
मधुच्छन्दा वैश्वामित्रः |
इन्द्रः |
गायत्री |
| 163 |
मधुच्छन्दा वैश्वामित्रः |
इन्द्रः |
गायत्री |
| 164 |
अमहीयुराङ्गिरसः |
पवमानः सोमः |
गायत्री |
| 165 |
अहमीयुरांगिरसः |
पवमानः सोमः |
गायत्री |
| 166 |
अहमीयुरांगिरसः |
पवमानः सोमः |
गायत्री |
॥ मधुच्छन्दा वैश्वामित्रः इन्द्रः गायत्री ॥ ॥ अमहीयुराङ्गिरसः पवमानः सोमः गायत्री ॥
इ᳒न्द्रा᳸मित्गा॑थीनो॑बृहात् । इ᳸न्द्रा॑मर्केभीरर्कीणाः॑ । इ᳒न्द्रंवाणी॑रनूषत ॥ ८ ॥
इ᳒न्द्राइ᳒द्धरीयो᳸स्सा᳒चा॑ । सम्मिश्लोआ᳹वा॑चोयू᳒जा॑ । इन्द्रो॑वज्री᳹ही॑रण्यायाः ॥ ९ ॥
इ᳒न्द्रावाजेषुनोअव । साहा᳒स्राप्रथनेषुच । उग्रा᳒उग्रा᳹भीरू॑तीभीः॑ ॥ १० ॥
उच्चा॑ते॑जातमन्धा᳸सा᳒ । दिविसा᳒त्भूम्याद॑दे । उग्रं᳒शर्म्मा᳒माहिश्रा᳒वाः ॥ ११ ॥
साना॑इ᳹न्द्रा॑यायाज्या॑वे । वा᳒रू॑णा᳒यामारू᳒त्भ्यः । वरिवोवि᳒त्पारि॑स्रवा ॥ १२ ॥
एना᳹वि ᳹श्वा॑नर्या॑आ᳒ । द्युम्नानीमा᳒नूषाणां । सी᳒षा॑सन्तोवनामहे । ॥ १३ ॥
इ न्द्र मि त्गा थि नोषूबृ ह दि न्द्र म र्केकूभि र र्कि णोचिवाश। औषहो वा औ हो वा औकूहो हाथावौकहो हाथावौ हो हा वि न्द्र वा णीकूर णूटाष ता उ वाशी। ईखळाण। इचन्द्र इ द्ध र्योटिस्सा चाता। सं मि श्य आकीव चोटायु जाता। इ न्द्रो व ज्रीकीहि राटाण्य या उ वाशी। ईखळाण। इ न्द्रं वा जेकीषु नोटाआ वाता। सा ह स्राचिप्रा ध नाटिइ षु चाति। औषहो वा औ हो वा औकूहो हाथावौकहो हाथावौ हो हा । उ ग्र उ ग्राकीभि रूटाति भि राकिउ वाका। इ ट् इ ळाटिख् ॥९॥ ॥ हा बुषाहा बु हा बु उ च्चाकूते जाथात माटान्ध साका। हा बु हा बुषीहा बु दि वि स त्भूकूमि याटाद दाताइश। हा बुषाहा बु हा बु उ ग्रंकूश र्माथाम हाटाइ श्र वा उ वाशु। ईखळाण। हा बुषाहा बु हा बु स नाकूइ न्द्राथाय याटाज्या वाताइश। हा बु हाषिबु हा बु व रू णाचूया म रुटित्भि याःता। हा बुषाहा बु हा बु व रीकूवोथवि त्प राटिइ स्र वा उ वाशु। ईखळाण। हा बु हा बुषीहा बु ये ना वि श्वाचूनि याटार्य याता। हा बु हा बुषीहा बु द्यु म्ना नि माचूनू षाटाणातम् । हा बुषाहा बु हा बु सि षाकूस न्तोथाव नाटामा हा उ वाकी। इ ट् इ ळाटिख् ॥१०॥