॥ अञ्जश्च वैरूपम् ॥
य द्या व ईती। न्द्र ताताआ उ वाटिशाखतणम् । हा हाथाआ उ वाटि। ईखळाण। शा तं भूचिमीकरु ताताआ उ वाटि। सीखयूःण। हा हाथाआ उ वाटि। ईखळाण। न त्वा व ज्रिकिच्न् सा ह स्रं सूचिर्याकिआ उ वाटि। आखनूण। हा हाथाआ उ वाटि। ईखळाण। ना जा त माकीष्ट रोताआ उ वाटि। दाखसीण। हा हाथाआ उ वाटि। ईखळाण ॥७६॥
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