॥ गोषूक्तम् ॥
य दि न्द्रा हंषीय थौ हो औ हो वातूहा इ तु वातीम् । ईकशी या वाकिस्वा यौटाहु वाटाइ हु वाटिइ का ईटित् । स्तोकता मे गोटिसा खौटाहु वाटाइ हु वाटिइश। सा याटाद्धोटयाखऔ हो वाशि। अ ग्नि राकिहु ताःटाख् ॥१॥
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