आवोरा जाती। नमध्वारस्य रूखूद्रशम् । हो ताकराचम् । सषत्ययजंरोद सीखूयोःप्ल। अ ग्निंचापू राचातनइत्नोरा चीखूक्ताशत् । हि रचाण्यरू पाटिमव सापिइका र्णूखि। ध्वात्रम् ॥ ४३ ॥
विश्वतोदा वषुन्विश्वतोन यातु। भ राकाभाटरात। य न्त्वाटाश वीकाष्ठा माचाइश। माहा औटिहोखबाप्ल। होप्लइ ळाशा॥ ४४ ॥
प्रैतू ब्राखिह्माणास्पा तीःप्ली। प्रादाइ व्येटीच्तूकसूनृ ताकिअ च्छाटावाखइ रणाम् । नर्यं पतिच्न्ती राचाधायसाटम् । दे वाटायाखज्ञणम् । नाटयाखऔहो वाशि। तूखनाःश॥ ४५ ॥
विश्वेतावि ष्णूतुरा भापाराणत् । ओरूक्रामस्त्वेषितश्शतंम हिषैषांक्षीरपाक मोटूद नातामो हापाउ वाशा। वराहमिन्द्रा एटूहातओ हापाउ वाशा। ओकषा औटाहोखबाप्ल। होप्लइ ळाशा। ॥ ४६ ॥ वराहमि न्द्रातुए मूपाषूशम् । ओराहमिन्द्रएमुषन्त्विष न्तेषैसुकृतंसूम याटून्ध नूता। रो हापाउ वाशा। साधुर्बुन्दोहि राटूहादृतओ हापाउ वाशा। ओकया औटाहोखबाप्ल। होप्लइ ळाशा॥ ४७ ॥ साधुर्बुन्दो हातुइरा ण्यापियाःण। ओधुर्बुन्धोहिरण्ययउभा तेषैबाहुरण्यां सु सांटूस्कृ ताताओ हापाउ वाशा। ऋदुपेचिदृ दूटूहातओ हापाउ वाशा। ओकधा औटाहोखबाप्ल। होप्लइ ळाशा॥ ४८ ॥
वि श्वेचातायविपष्णूप्लरा भाखाराणत् । ओकरुक्र माटिस्तु वाखाणफप्ल्इश। षीखताःप्ल। ओ तांकामहि षांकिक्षीकर पाटाक मोखाणफप्ल्। दाखनंश। व राखाओसमाटइन्द्र एखिणफप्ल्मूखषम् । ॥ ४९ ॥ वा राचाहायमीपन्द्राप्लए मूखाषणम् । ओ राकाह माटाइन्द्र एखिणफप्ल। मूखषशम् । ओ वाकाइक्ष न्तेकिसुकृ तंकिसूटम यांखाणफप्ल्। धाखनुःश। सा धूःखाओसन्दोटहि राखाणफप्ल्। ण्याखयाःप्ल॥ ५० ॥ सा धूचार्बूयन्दोपहीप्ल्रा ण्याखायाःण। ओकधुर्बु न्धोटिहि राखा। ण्याखयाःप्ल्। ओकभा तेकाबाकहुर ण्याटिसु सांखाणफप्ल्। स्काखर्त्ताशम् । ऋ दूखाओचाइदृ दूखिणफप्ल्। वाखर्द्धाश॥ ५१ ॥
इ दंकाविष्णू रौथिहो हाटाइश। ओ चाकाक्राखमाणइश। त्राइ धापिहाचइश। नीदधे पापीऔहोवाइ होखुहाणइश। उहु वाखिदाणम् । ओमू ढाकिमस्यपां सूपीऔहोवाइ होखुहाणइश। उहु वापिलाएहि याप्लीहाश। होप्लइ ळाशा॥ ५२ ॥ त्रीणी पाकिदा औथाहो हाटाइश। ओ चाकाक्राखमाणइश। विष्णु र्गोपिहाचइश। पाअदा भापीऔहोवाइ होखुहाणइश। उहु वाखियाःण। ओतो धकिर्माणिधा रापीऔहोवाइ होखुहाणइश। उहु वापिनाएहि याप्लीहाश। होप्लइ ळाशा॥ ५३ ॥ विष्णोः ककिर्म्मा औथाहो हाटाइश। ओ पाकाश्याखताण। यतो व्रापिहाचइश। तानिप स्पापीऔहोवाइ होखुहाणइश। उहु वाखिशेण। ओन्द्रास्य यूकीज स्सापाऔहोवाइ होखुहाणइश। उहु वापिखाएहि याप्लीहाश। होप्लइ ळाशा॥ ५४ ॥
औ होताहोतहाइवृ षाती। पाकवस्वधारा याटुमाचरूकत्वाखताणइश। ओइचा माटिचाकम त्साखाराःण। औ होताहोतहाइवि श्वाती। द धाटानाखओशजा साखाऔहो वाशि। ओइज्व राखी॥ ५५ ॥ वृषाबु होतीहोतहातइश। पाकवस्वधारा याटुमा रूटात्वाखताणइश। च माताच्ओ चाकाम त्साखाराःण। विश्वाबु होतीहोतहातइश। द धाटानाखओशजाटसाखऔहो वाशि। ओइ जूखिवाश॥ ५६ ॥
कविम ग्नीतीम् । उपा स्तूटिट्हाखऔहो वाशि। स त्याचाधकर्माण माचिध्वा रेचा। देवाम मीती। वाचा ताटिनाखण्म् । ओपइ ळाप्ला॥ ५७ ॥
हाबु हाबु हातुबुश। ऊटऊटऊउ वाटिहाउ वातिहाचस् । आतहाचस् । अर्चिशोचिस्तपोहरः प्रष्लक्षस्य विष्णो अरूषस्य नू माटेहाःत। प्रानूवोचो वि दषूथा जातवे दाटुसातइश। वैश्वानराय मषूति र्नव्यसे शूटुचीःत। सोम इव प वषूते चारुर ग्नाटुयातइश। हाबु हाबु हातुबुश। ऊटऊटऊउ वाटिहाउ वातिहाचस् । आतहाचस् । अर्चिशोचिस्त पोषूह रोटाहाउ वाति। ईख॥ ५८ ॥
कईंव्य क्ताःती। नारस्सा नाचीइ ळाटाच्रूद्रस्यमर्या याटूट्थाखऔहो वाशि। स्वतश्वाःटख्॥ ५९ ॥ का ईंणाफ्वि याखाक्ताःप्ल। ना राणाफ्स्साखनाइ ळाःप्लि। रूद्रस्य मर्या याटूट्थाखऔहो वाशि। सु वाताश्वाःख॥ ६० ॥ का ईंथावि याटाओकवाखक्ताना राःशि। स नाटाओकवाखइळारू द्राशी। स्य माटाओकवाखर्याया थाशि। सु वाटाओकवाखश्वाःप्ल। होप्लइ ळाशा॥ ६१ ॥
जा राता। बो धाटाबो धाटाता द्वीचावि ढ्ढाचाइश। वी शेकावाइ शेटिय ज्ञोटाया याखाऔहो वाशि। स्तो मंकारूद्रायदृ शीकूकाचम् ॥ ६२ ॥ जराबो धोतीवात। ताचद्वीवि ड्ढाचिइश। वीशाइ वाटीइ शेता। याथज्ञीशयाया स्तोकिच्मांचरूयद्रापयाणदृश। शी कोखाइ ळाशा॥ ६३ ॥
ओतहाइसखाय याषूनीषी दातितात। पु नाकानौहोइपु नाकुनौहो एपियाप्राया प्राशी। गाकयतौहो इशीगाकयतौहो एपीशाइशूंशाइ शूशूम् । नायज्ञौ होतीइशनायज्ञौहो एपुपा रीतापा राखाऔहो वाशि। एतच्भूषतश्रि येतुच्॥ ६४ ॥ स खाफाययाउ वोखीवाश। नीषाइदा ताटुउ वोखावाश। पु नाकानायप्र गाकीय ताताशाइ शाटिउ वोखावाश। नायज्ञैःपारि भूटूषा ताटाउ वोखीवाश। श्रि येताच्॥ ६५ ॥
काणयाफन श्चाफाइ त्राखायाभु वाशित् । ऊ तीकास्सा दाकावृधस्सखा औकुहो हाताइक याटिश चाताइश। ष्ठयौ होतिहि म्माटावाटर्तोख। हात्रइश॥ ६६ ॥ काणस्त्वाफस त्योफामाखदा नाशाम् । मंहि ष्ठोकिमत्स दकीन्धसा औकिहो हाताइदृ ढाटिचि दाता। रूजौ होतिहि म्माटा। वाटसोख। हात्रइश॥ ६७ ॥ आणभीफषू णाफास्साखखी नाशाम् । अवि ताकिजराइ तृकीणामा औकिहो हाताईशा तांटिभ वाता। सियौ होतिहि म्माटा। ताटयोख। हात्रइश॥ ६८ ॥