खण्ड: 1 - सम्पूर्णम्

॥ गोषूक्तम् ॥
यदिन्द्रा हंषीयथौहोऔहो वातूहाइतु वातीम्  शीया वाकिस्वा यौटाहु वाटाइहु वाटिइका टित्  स्तोतामे गोटिसा खौटाहु वाटाइहु वाटि सा याटाद्धोयाऔहो वाशि अग्नि राकिहु ताःटाख्॥ १ ॥ 
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॥ आश्वसूक्तञ्च ॥
बुहौहोवाहायदिन्द्रा हाशृम्  याथात्वा मैटीहीऐ हीतिच् आइ शीकिया वाकास्वाआइकइ दैटूहीऐ हीतिच् इस्तो ताटिमाइ गोटिच्सा खाकासाटट्याऔहो वाशि शुक्र किहु ताःटाख्॥ २ ॥ 
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