॥ जैमिनीय साम सङ्ग्रहः ॥
संस्करणम्: 2.05 , निर्मितम्: 30-09-2026
श्राद्ध सामानि
भुक्त सामानि (१२)
॥ रौद्राणि आजिदोहानि मारुतानि वा मऋतनिधनम् ई निधनं त्रीणिधनं ऐन्द्राणि वा प्राजापत्यानिवा ॥
हा बु हा बु हातुबुश। हिकञ्चोचहिकञ्चोचहिकञ्चोच। मूकर्द्धा न न्दा इ वोकुआकर ता ईं पृ थि व्याःकू। वैकश्वा न राकिमृषत आ जा ता म ग्निंकू। का विं स म्रा जकुमषधि ता इं ज ना नाकूम् । आकस न्ना पा त्रंकीज न य न्त दे वाःकू। हा बु हा बु हातुबुश। हिकञ्चोचहिकञ्चोचहिकञ्चोटहा उ वाति। एतर्तचम् ॥१॥
हा बु हा बु हातुबुश। हि ञ्चिकादोचहि ञ्चिकादोचहि ञ्चिकादोच। मूकर्द्धा न न्दा इ वोकुआकर ता ईं पृ थि व्याःकू। वैकश्वा न राकिमृषत आ जा ता म ग्निंकू। का विं स म्रा जकुमाषति था इं ज ना नाकूम् । आकस न्ना पा त्रंकीज न य न्त दे वाःकू। हा बु हा बु हातुबुश। हि ञ्चिकादोचहि ञ्चिकादोच। हि ञ्चि दोटिहा उ वाति। ईख ॥२॥
हा बु हा बु हा वा जि दो ह मा जिषैदो ह मा जि दो हातू। मूकर्द्धा न न्दा इ वोकुआकर ता ईं पृ थि व्याःकू। वैकश्वा न राकिमृषत आ जा ता म ग्निंकू। का विं स म्रा जकुमषधि ता इं ज ना नाकूम् । आकस न्ना पा त्रंकीज न य न्त दे वाःकू। हा बु हा बु हा वा जि दो ह मा जिषैदो हाकमाथजि दोटाहाखऔ हो वाशि। एतआ जि दोकिह मेकाआ जि दोकिह मेकाआटजि दोटाहाखम् ॥३॥
ऋषभो वैराज ऋषभौ रैवत ऋषभश्शाक्वर इति ऋषभास्त्रयः ॥
हा बु हा बु हाचुवा इ हीकि। आ इ हीकि। आ इ हीकि। योटयोटयोट। त्रिः । इ या हाकि। वि या हाकि। वि या हाकिबुश। पीचबा सो मा मि न्द्र माकून्द तु त्वाकि। यकन्ते सु षा व ह र्याकूश्राचद्रिःश। सोकतु र्बा हु भ्यांकीसू य तो ना र्वाकु। हा बु हा बु हाचुवा इ हीकिआ इ हीकिआ इ हीकि। योटयोटयोट। त्रिः । इ या हाकिवि या हाकिवि याटाहा उ वाति। ईख ॥४॥
सु रू प कृ त्नु मूकूत येचा। सु रू प कृ त्नु मूकूत येचा। सु रू प कृ त्नु मूकूत येचा। सु दु घाकिमि व गोकिदु हे जु हूभीम साचाइश। द्याकवि द्य वाचिइश। द्याकवि द्य वाचिइश। द्या वि द्या व याकूआ उ वाटि। हिंटहिंटहिंट ॥५॥
ओंकच्ओंकच्ओंकच्। स्वा दो रेकिइ त्था एकि। वि षू एकिवा ताचाआच। ओंकओंटओखवाण। शंकय्यो शंकाय्योःच। ओंकच्ओंकच्ओंकच्। म धो रेकुपि बा एकिन्ति गा एकि। री याचाआच। ओंकओंटओखवाण। हा विचार्हा विःचा। ओंकच्ओंकच्ओंकच्। या या एकिन्द्रे णा एकि। स या एकिवा रीकाआच। ओंकओंटओखवाण। सूचव स्वाःचा। ओंकच्ओंकच्ओंकच्। वृ ष्णा एकिम दा एकिन्ती शो एकिभा थाकाआच। ओंकओंटओखवाण। ज्यो ती र्ज्यो तिः । ओंकच्ओंकच्ओंकच्। व स्वी रेकिआ नु एकिस्वा रा एकिजी याकामाच। ओंकओंटओखवाण। इ ट् इ ळाटिख् ॥६॥
॥ त्रय आतीषङ्गाः रौद्रः वासवः वैश्वदेवः ॥
ए पु रो जि तीकु। वो अ न्ध स स्सु ता य मा द याटूइशत्ना वाचाइश। इ ळाचा। उ च्चाकातेकजा त माटिन्धा साचा। अ थाचा। दा इ वि स त्भूकुमि याटाद दाचाइश। अ थाचा। उ ग्रंकाश र्माटाम हाचाइशश्रा वाचा। अ थाचा। आ प श्वा नं श्न थायूइ ष्टापानाश। सा खा यो दी र्घा जाटूइ हो ह्वा य माकुआ उ वाटि। इ ट् इ ळाटिख् ॥७॥
ए आ भीकिना व न्ता याटीद्रू ह याकि। आ उ वाटि। । ता र त्स म न्दी धाकूव तीखा। प्रा य मिकिन्द्र स्य काटिमी य माकि। । आ उ वाटि। धाकराचसू त स्याचिन्ध साःशा। वा त्सकान्न पू र्व आटीयू नि याकि। आ उ वाटि। ता र त्स म न्दी धाकूव तीखा। जा तंकारि ह न्ति माचीता र याटि। आ उ वाटि। इ ट् इ ळाटिख् ॥८॥
ए आ साकि। जीषव क्वा र थ्ये य थाटूजाचबुश। इ ळाचा। आ साकाव्यंकशु र्माटादाकयाच। अ थाचा। धा याका। माषनो त्ता प्र थ मा माटूनीकळाच। इ ळाचा। आचप्सु द क्षो गाटीइशरि ष्ठाचा। अ थाचादा श स्व सा रोषुअ धि सा नो आटुव्याचइशइ ळाचा। श्या इ नोकिचनाकयो नि माटिसा दाचात् । अ थाच। माचर्ज न्तीकाव न्हिंकासषद ना इ षु वा च्छाटूआ उ वाटि। इ ट् इ ळाटिख् ॥९॥
॥ महावामदेव्यंतृतीयम् ॥
काणयाफन श्चाफाइ त्राखाया भु वाशित् । ऊ तीकास्सा दाकावृ ध स्स खा औकुहो हाताइ क याटिश चाताइश। ष्ठ यौ होतिहि म्माटावाटर्तोख। हात्रइश ॥१६॥
काणस्त्वाफस त्योफामाखदा नाशाम् । मं हि ष्ठोकिम त्स दकीन्ध सा औकिहो हाताइ दृ ढाटिचि दाता। रू जौ होतिहि म्माटा। वाटसोख। हात्रइश ॥१७॥
आणभीफषू णाफास्साखखी नाशाम् । अ वि ताकिज रा इ तृकीणा मा औकिहो हाताई शा तांटिभ वाता। सि यौ होतिहि म्माटा। ताटयोख। हात्रइश ॥१८॥
भोक्त सामानि (४)
॥ वासिष्ठाः पदस्तोभा ऐन्द्रावा प्राजापत्या वा चत्वारः ॥
हा ह हौ वा उ वोतूवाश। हा ह हौ वा उ वोतूवाश। हा ह हौ वा उ वोतूवाश। ए औ हो औ हो वाटूहा उ वाटिईचळाश। हा ह हौ वा उ वोतूवाश। हा ह हौ वा उ वोतूवाश। हा ह हौ वा उ वोतूवाश। ए औ हो औ हो वाटूहा उ वाटि। ध र्त्ताचादि वः प व तेकुकृ त्व्योकारा सा इ ळाकीईचळाश। द क्षो देकिवा नाकाम नु मा द्योकीनृ मी रि ळाकीईचळाश। हा रीकासृ जाकानो अ त्योकिन स त्व भी रि ळाकूईचळाश। वृ थाकापा जां सि कृ णु षेकूना दीकाषू वाटाख्। हा ह हौ वा उ वोतूवाश। हा ह हौ वा उ वोतूवाश। हा ह हौ वा उ वोतूवाश। ए औ हो औ हो वाटूहा उ वाटिईचळाश। ईचळाश ॥१०॥
॥ हा ह हा उ वोतूवाश। हा ह हा उ वोतूवाश। हा ह हा उ वोतूवाश। ए औ हो औ हो वाटूहा उ वाटि। ध र्त्ताचादि वः प व तेकुकृ त्व्योकारा साका। ईचळाश। द क्षो देकिवा ना माकिईचळाश। नु मा द्योकिनृ मीका। ईचळाश। हा रीकासृ जाकानो अ त्योकिन स त्वाकिभी रिचाळाश। वृ थाकापा जां सि कृकि। ईचळाश। णु षेकाना दीकाच्षू वाटाख्। हा ह हा उ वोतूवाश। हा ह हा उ वोतूवाश। हा ह हा उ वोतूवाश। ए औ हो औ हो वाटूहा उ वाटि। ईचळाश ॥११॥
औकहो औकाहो वाटाहो वाट। ए औ हो औ हो वाटूहा उ वाटि। ध र्त्ताचादिचवः पा वाकिईचळाश। ते कृ त्वीकियोचर साःशा। द क्षो देकिवा ना माकिईचळाश। नू मा द्योकिनृ भीःचा। हा री सृ जाकीन याकाईचळाश। ती योकान स त्व भीःची। वृ थाकापा जां सि कृकिईचळाश। औकहो औकाहो वाटाहो वाट। ए औ हो औ हो वाटूहा उ वाटि। णु षेकाना दीकाषू वाटाच् ॥१२॥
आतऔ हो वातिहात। ए औ हो औ हो वाटूहा उ वाटि। ध र्त्ता दीटिवः पाकावाटते कृ त्वीकियो र साःचि। द क्षो देकिवा ना माकिनु मा द्योकिनृ भीकाईचळाश। हा री सृ जाटीनो आकात्योटनाकस त्व भाटिइःश। वृ थाकापा जां सि कु णु षेकूच्ना दीकाषू वाटा। आतऔ हो वातिहात। ए औ हो औ हो वाटूहा उ वाटि। ईचळाश ॥१३॥
अभिश्रवणम् (६७)
॥ आश्वञ्च ॥
हो हो अ क्राटीन्साचमु द्राःचाप्र था मेचिवि ध र्म्माशिन् । हो हो इकिज न यकिन्प्रा जाकाभु व न स्य गोकुपाःच। हो हो इ वृ षाटुच्पा वि त्रेटिच्आ धि सा नोभिअ व्याचाइश। हो हो इकिबृ ह त्सो मो वाटुवृकधे स्वाथानो अ द्राटियौटहो वाताहा उ वाति। एतच्स्वाकनो अ द्रीःटिख् ॥२७॥
॥ सोमसामनीद्वे ॥
का नीता। क्र न्तीटाक्र न्तीटाह रीकाराथसृ ज्य माटिना साखाइ दणान् । वा नाटावा नाटास्य ज ठ रेकीपू नाटानो नृखाभीःण। या ताटाया ताःटाकृ णूकाते निथार्न्नि जांटागा माखाताःण। मा तिटाम्मा तिटान्ज नकाय ता स्वाटिधाखऔ हो वाशि। भीःख ॥२८॥
क नि क्र न्ती हाफूहोतइ ह रि रा सृफुज्य माखानाःप्ल। हातहो इ सी द न्व न स्यषूज ठ रेकिपू नाटानाःत। हातहो इ नृ भि र्य तःषूकृ णु तेकिनि र्न्नि जाटिङ्गात। हातहो अ तो म ता इषूज न य ता स्वाटुट्धाखऔ हो वाशि। भीःख ॥२९॥
॥ ऐषञ्च ॥
ए षा ए षाःती। स्य ताताओपइ म धू मं इ न्द्रषूसो मो वृ षा वृ षातूएत। वृ ष्णाताओःपप रि प वि त्रेषुअ क्षा स्स हा सा हातूएत। स्र दाताओपश्श त दा भू रिषुदा वा श श्व च्छ श्वातूदेत। त माताओंपब र्हि रा वा ज्येषुहि या हाप्लिउ वाशा। स्थाखत् ॥३०॥
॥ माधुच्छन्दसम् ॥
हा ओखाहाण। इ हाताओचपाकव स्व सो माटीमा धू मंकिॠ ताखावाश। आ पो व सा नोटुआ धी साकिनोखअ व्या इशि। आ व द्रो णा नीटुघा र्क्ता वकिन्ती रोखाहाश। हा ओखाहाण। इ हाताओचमकदि न्त मो माटीत्स र यापिइ न्द्रा पाखि। नाःत्र ॥३१॥
॥ सोमसामानिचत्वारि ॥
सो मः प व तेचुज नि ताकिच्मा ताकाइ नाटाम् । ज नि तातिदी वोचाज नी ताकिच्पृ थाकाइ व्याःटा। ज नि ता ग्नेषीर्ज नि ता सूकीरी याटायातस्या । ज नि तेकिन्द्रा स्याटाज नि तोपिता वाखाइश। ष्णोःत्र ॥३२॥
सो मः प व तेषुज नि ता एतीऔ होखावात्र। मा तापइशनात्रम् । ज नि ताकिदी वोकाज नी ताकिप्र थि व्याःचि। ज नाटाइ ताखाग्नेःण। ज नि ता सूखीरी याखास्यात्र। ज नि तेकिन्द्रा स्य ज नि तोकुत वि ष्णोःटिख् ॥३३॥
हा बु ज न द्धा बु ज न द्धा बु ज नषोज्ज न द्धा बु ज न द्धा बु ज न द्धातोबुशहो इ ज न द्धो इषूज न द्धो इ ज नाचूत् । सोकमः प वा तेटीजा नी तोकिम तीखानाशम् । ज नि ताकिदा इ वोटिजा नी ताकिपृ थीखाव्याःप्ल। ज नि ताकिग्ना इ र्जकिनि ता सूकिर्याखस्याश। हा बु ज न द्धा बु ज न द्धा बु ज नषोज्ज न द्धा बु ज न द्धा बु ज न द्धातोबुश। हो इ ज न द्धो इषूज न द्धो इ ज नाचूत् । ज नि तेकिन्द्रा स्याटाजा नी तोपिता वाखाइश। ष्णोःत्र ॥३४॥
ज न द्धा बु ज न द्धा बु ज न द्धा बुषौज न दा बु ज न दा बु ज न दातोबुशज न द्धो इ ज नषूद्धो इ ज न द्धोचुइश। सोकमः प वा तेटीजा नी ताकिम तीखानाशम् । ज नि ताकिदा इ वोटिजा नी ताकिपृ थीखाव्याःप्ल। ज नि ताकिग्ना इ र्जकिनि ता सूकिर्याखस्याश। ज न द्धा बु ज न द्धा बु ज न द्धा बुषौज न दा बु ज न दा बु ज न दातोबुश। ज न द्धो इ ज नषूद्धो इ ज न द्धोचुइश। ज नि तेकिन्द्रा स्याटाजा नी तोपिता वाखाइश। ष्णोःत्र ॥३५॥
॥ अगस्तयस्यचराक्षोघ्नम् ॥
य द्वा ऊपिवि श्प ति श्शि तःशु। सु प्री तोकिमा नु षोकिच्वी शेचावी श्वे दाटिग्नीःत। प्रा ति र क्षां सि सेकूच्धाकता औटाहोखबाप्ल। होप्लइ ळाशा ॥१४॥
॥ भारद्वाजस्यप्रासाहम् ॥
अ हा वो अ हा वोषूअ हाता। सा ना द ग्ना इकुमृ णा सी याकीतू धाखानाशन् । न त्वा र क्षां सीकुपा र्ता नाकिसु जीखाग्युःप्ल। अ नु द हाकीस ह मू राकीङ्क याखादाःप्ल। अ हा वो अ हा वोषूअ हाता। माकता इ हेकित्या मु क्ष त दापुइ वी याखि। याःत्र ॥९॥
॥ यामेद्वे ॥
अ क्ष न्ना मीचीमाकदफन्त हीतायापव प्रि या धु ष ताशु। आ स्तोकाष त स्व भा न वोकूवि प्रा न्नाभिवीत। ष्ठा या म तीकीयो जा नूटिवातइ न्द्राटाट्ताखऔ हो वाशि। हाखरीश ॥१४॥
॥ मरूतांव्रतोपोहस्सम्पद्वा ॥
ओकहा ओटाहाकओ हाटाइ याटाओटहातएत। आ भि त्रि प्रा ष्ठांटुवा र्षा णंकिव योखाधाशम् । अचङ्गो षी णाकिमाकवा वा शकिन्त वाखाणीःप्ल। वा ना व सा नोटुवा रू णोकिन सीखान्धूःप्ल। ओकहा ओटाहाकओ हाटाइ याटाओटहातएत। वी र त्न धाकीद य ते वापीरी याखा। णात्रइश ॥३६॥
॥ बृहत्प्राजापत्यंभरद्वाजस्यवा ॥
औ हो इ त्वा मि द्धीषूह वा म हातीएत। सा तौ वा जा स्या काकुराखवाःण। तू वापाऔकहो वाथा। वृ त्रा इ षु वाषुवा इ न्द्रा साटीओ त्पा ति न्नाखराःण। तू व ङ्का ष्ठापीऔकहो वाथा। सूटव र्वाखाता हो वाशिहा उ वाति। हाचस् ॥५॥
औ हो इ तु वातीमेत। का ष्ठा सूकिव र्वाखाताःण। स त्वापाऔकहो वाथा। नषश्चा इ त्र वा ज्रा हाटु। ओ स्ता धृकिन्नाखराःण। तू व ङ्का ष्ठापीऔकहो वाथा। सूटव र्वाखाता हो वाशिहा उ वाति। हाचस् ॥६॥
औ हो इ म हातुएत। ता वा नोकिअ द्राखाइ वाःणा। ग मापाऔकहो वाथा। शू वं र था या माटुओ इ न्द्रा सकीङ्गाखराण। स त्रा वा जापीऔकहो वाथा। नाटजा इ ग्यूखाषा इ हो वाशीहा उ वाति। हाचस् ॥७॥
॥ शैतन्त्रृतीयम् ॥
अ भि प्र व स्सु राफूध साखाऔणहोफवाप्ल। आ इ न्द्रा माटीर्चा या थाचिवि दाटाओखहाणइश। योचज रीकातृ भ्योचामा घापावाशपु रोटावाखसूःण। सा ह स्रेफिणातइ वापाशाशहि म्मा इ क्षाटीट्ताखऔ हो वाशि। वाखसूश ॥७॥
॥ रौहिणकम् ॥
हा बु हा बु हाचुवा इ हीकिआ इ हीकिआ इ हीकि। आ इ हि याकीआ इ हि याकीआ इ हि याकी। आ साकावा साकावा साकाबुश। आ याकामा याकामा याका। न्ना मोकाना मोकानाचमःश। की ट् की ट् की ट् की ट् की ट् की ट् की ट् की ट् की ट् की ट्षेकी ट् की ट् की ट् की ट् की ट्शु। । इ न्द्र न रो नेषुम धि ता ह वाटुन्तातइश। य त्पा र्या यूषीन ज न्ता इ धि याटूस्ताःत। शू रो नृ षा ताषुश्र व स श्च काटुमातइश। आ गो म तिषीव्रे जे भ जा तू वाटून्नाःत। हा बु हा बु हाचुवा इ हीकिआ इ हीकिआ इ हीकि। आ इ हि याकीआ इ हि याकीआ इ हि याकी। आ साकावा साकावा साकाबुश। आ याकामा याकामा याका। न्ना मोकाना मोकानाचमःश। की ट् की ट् की ट् की ट् की ट् की ट् की ट् की ट् की ट् की ट्षेकी ट् की ट् की ट् की ट् की ट्शु। मा नोचावा हो इ प्रा णो वा हो इ च क्षो वा हो इषौश्रो त्रो वा हो इ घो षो वा हो इशे। व्रा तोचावा हो इ चि त्तो वा हो इ भू तो वा हो इषौधी तो वा हो इ पा नो वा हो इशे। सु वो वा हो इषुज्यो तोचावाकहोटवाखओ हो वाशि। ऊख ॥१०॥
॥ ऐन्द्र षोडशी तवश्शाव्यं ज्येष्ठ साम सुभेषजं वा ॥
हा बुणाहा बुणाहा बुणा। भ्रा जाणाभ्रा जाणाभ्रा जाणा। आ युणारा युणारा यूःणा। उ दु त्य ञ्जाकीउ दु त्य ञ्जाकीउ दु त्य ञ्जाकी। चि त्रं दे वाषीना मु द गा द नीटूकाचम् । हा बुणाहा बुणाहा बुणा। भ्रा जाणाभ्रा जाणाभ्रा जाणा। आ युणारा युणारा यूःणा। स्त वे द संकीस्त वे द संकीस्त वे द सकीम् । च क्षु र्मिषित्र स्य व रु ण स्याटूग्नाचइःश। हा बुणाहा बुणाहा बुणा। भ्रा जाणाभ्रा जाणाभ्रा जाणा। आ युणारा युणारा यूःणा। दे वंकाव हाशा। दे वंकाव हाशा। दे वंकाव हाशा। आ प्रा द्या वाषीपृ थि वी आ न्त रिटूक्षाचम् । हा बुणाहा बुणाहा बुणा। भ्रा जाणाभ्रा जाणाभ्रा जाणा। आ युणारा युणारा यूणा। स्ति केकात व स्ति केकी। त व स्ति केकीत वःचा। सू र्य आ त्माषीज ग त स्त स्थु षाटूश्चाच। हा बुणाहा बुणाहा बुणा। भ्रा जाणाभ्रा जाणाभ्रा जाणा। आ युणारा युणारा यूणा। दृ शे वि श्वाकीदृ शे वि श्वाकीदृ शे वि श्वाकी। सू र्य आ त्माकीज ग त स्त स्थु षाटूश्चाच। हा बुणाहा बुणाहा बुणा। भ्रा जाणाभ्रा जाणाभ्रा जाणा। आ युणारा युणारा यूणा। र्य्य सूकार्य्य य्य सूकिर्य्य य्य सूकिर्य्याखओ हो वाशि। ईख। हा बुणाहा बुणाहा बुणा। भ्रा जाणाभ्रा जाणाभ्रा जाणा। आ युणारा युणाराटयाखओ हो वाशि। इचन्दु रि ळाचिस त्यंचाद्यौ र्भूचातंकपृ थि वीचिसा ह स्तेचिजा आ पाचिऊ षा दि शोचीज्योकतीःख ॥१॥
॥ त्रिसन्धि च ॥
औ हो इ त्व मि न्द्रषीप्र तू र्त्ती षूतीएत। आ भा इ वा इ श्वाटूआकसि र्स्पाखादाःण। आषश स्ति हा ज नि ताकूवृ त्र तूटिर साताइश। तू व न्तूटिर्यातत रौ होतिहि म्माटाष्याटतोखहाणइश ॥१॥
॥ विष्णोर्व्रतम् ॥
॥ अ त्रे श्च र क्षो घ्न म् ॥ हा बु हा बु हा बु स हो हा बु बषैलं हा बु र क्षो हा बु ज हि हातेबुश। एकवा ह्य सि वाटीइ राखायूःण। एतच्रा यु रेकिरा यु रेकिराचयुःश। हा बु हा बु हा बु स हो हा बु बषैलं हा बु र क्षो हा बु ज हि हातेबुश। एकवा शू रा उ ताकुस्थाखइ राःणा। एतच्स्थी र येकिस्थी र येकिस्थीचरःश। हा बु हा बु हा बु स हो हा बु बषैलं हा बु र क्षो हा बु ज हि हातेबुश। एकवा ते रा ध्याकीम माखानाःण। एतच्मा न एकिमा न एकिमाचनःश। हा बु हा बु हा बु स हो हा बु बषैलं हा बु र क्षो हा बु ज हि हाकेउ वाता। हो ह हाकिह हाकाहाचस् हो ह हाकिह हाकाहाचस् हो ह ह ह हाकुउ वाता। ईख ॥६॥
॥ आयास्यञ्च ॥
पु ना न स्सो मषुधा र या एतुऔ होखावात्र। आ पोकाव साटान याखाणफप्ल्। र्षातसीटख्। आ र त्न धा यो नीषूमृ ता स्या साकीओ औपाहोश। दातसीटख्। उ त्सो औपिहोशदा इ वोचिहि राखाणफप्ल्। ण्यातयाटख् ॥१३॥
॥ भद्रश्रैयां सि त्रीणि ॥
हो इ याति। हो इ याति। हो इ याति। इ हो इ याती। इ हो इ याती। इ हो इ याती। औटहो इ याटि। औटहो इ याटि। औकहो इ याखिऔ हो वाशि। ई माचानु कंशाभु व ना सी ष धेकूमाचइ याशा। इ न्द्रा श्चाकिवि श्चे च देकीवाःचइ याशा। हो इ याति। हो इ याति। हो इ याति। इ हो इ याती। इ हो इ याती। इ हो इ याती। औटहो इ याटि। औटहो इ याटि। औकहो इ याखिऔ हो वाशि। एतच्श्रे याःचा ॥८॥
॥ कण्वरथन्तरम् ॥
पु ना न स्सो मषुधा र याति। आ पो व सा नोकुअ र्षापासीश। आ र त्न धा यो निषूमृ त स्य सी द सातूऐ हीता। उ त्सो दाटिइ वोता। हि राताआ उ वाटि। एतण्य यातायाख ॥१२॥
॥ अग्नेश्चरथंतरंवसिठस्यवा ॥
ओ भि त्वा शू र नोकूनू मोचावाश। आ दु ग्धा इ व धे न व ई शाषैन म स्य ज ग ताकूस्सु वाटादृ शाताम् । ईकशा न मापिइ न्द्राशा। ता स्थूटाटट्षा ओ वाचिहा उ वाकि। आचस् ॥८॥
ईकशोचवाश। ना मि न्द्र त स्थु षोषून त्वा वं अ न्यो दि व्योकूच्न पाटार्थि वाःता। ना जा तोकिनापजाश। ना इ ष्याटाटट्ता ओ वाचिहा उ वाकि। आचस् ॥९॥
नाकजोचवाश। तो न ज नि ष्य ते अषूश्वा य न्तो मा घ वकूच्न्वि न्द्र वाटिजी नाःता। ग व्य न्त स्त्वापीहाश। वा माटाटट्हा ओ वाचिहा उ वाकि। आचस् ॥१०॥
॥ भारद्वाजानिचत्वारि कण्वब्रहद्वाद्वितीयम् ॥
औ होषाआ त्वा सा हातीएत। स्रा माचाशायतांपहाप्लहाङइश। यु क्ताकार थेकाहि र ण्य येकीच्ब्र ह्माकायूयजोपहाप्लहाङइश। हा र य इकीच्न्द्रा काकाइ शायाइ नाःपहाप्लहाङइश। वा हाचान्तूयसोपहाप्लहाङइश। मा पीकातापया उ हु वाप्लीहाप्लबुश। बाश ॥५॥
॥ गौरीवितेद्वे ॥
आ तू न याती। इ न्द्र क्षू माटीन्तातम् । चा इ त्रं रा भंटुहातइ स ङ्गृकिभा या मा हाटीह स्तोखाहाणइश। द क्षाटाच्इ णाकाइ नाचा। म हा हाटिट्स्ताखऔ हो वाशि। द क्षि णेकिनाटख् ॥७॥
॥ अग्ने व्रतम् ॥
भ्रा जा उ वोतीवाश। भ्रा जा उ वोतीवाश। भ्रा जा उ वोतीवाश। अ ग्निकार्मू र्धाथाच्दी वाःकाकायकूटत् । प तिःकापृथथि व्याकाआययाटम् । अ पांकारे तांथाच्सी जाकाइ न्वायाताटइश। भ्रा जा उ वोतीवाशभ्रा जा उ वोतीवाशभ्रा जा उ वोखीवात्र। एतवि श्वा स्याकिज ग तोकिज्योटतीःख ॥३॥
॥ वैष्णवानि त्रीणि इहद्वाम दैवोदासन्तृतीयं और्ध्वसद्मनानिवा ॥
अ य न्त इ न्द्र सोफूमोतनापइ पू तोणिआ धीण्यब र्हि षीणि। नी पू तो आकीधी ब र्हाटिइ षीता। ऐकहा इ माटीस्यातद्र वाकापापइ बात्रा। ईखहाश ॥१७॥
॥ भारद्वाजञ्च ॥
पा व का न ई यातू। सा राचास्वायतीट। वा जेचाभि र्वाथाच्जी नाकाइ वायातीट। य ज्ञां वाटिट्ष्टूखऔ हो वाशि। धि यातावाटसूःख ॥६॥
॥ पुरुष व्रतं सप्त ॥
उ हु वा हाकी। बु हु वा हाकी। बु हु वा हाकीबुश। सषह स्र शी र्षा पू रूटूषाःत। सषह स्रा क्ष स्स ह स्राटूपातत् । साषभू मिं स र्व तो वाटूत्वात। अषत्य ति ष्ठ द्द शा ङ्गूटूलातम् । उ हु वा हाकी। बु हु वा हाकी। बु हु वाटिहा उतिवा । इ ट् ई ळाटिख् ॥१०॥
उ हु वौ हो वाटुच्। उ हु वौ हो वाटुच्। उ हु वौ हो वाटुच्। त्री पाषादू र्ध्वा उ दै त्पू रुटूषाःत। पाषदो स्ये हा भ व त्पूटूनाःत। ताषथा वि ष्वं वि य क्राटूमा त् । अषश ना न श ने आटूभीत। उ हु वौ हो वाटुच्। उ हु वौ हो वाटुच्। उ हु वौ होटीट्वाखओ हो वाशि। ईखळाण। उ हु वौ हो वाटुच्। उ हु वौ हो वाटुच्। उ हु वौ होटीट्वाखओ हो वाशि। सुखवाःण। उ हु वौ हो वाटुच्। उ हु वौ हो वाटुच्। उ हु वौ होटीट्वाखओ हो वाशि। ऊख ॥११॥
इ हि यौ हो वाटुच्। इ हि यौ हो वाटुच्। इ हि यौ हो वाटुच्। पुषरु ष ए वे दं साटूर्वातम् । यषत्भू त य श्च भा वाटूयातम् । पाषदो स्य स र्वा भू ताटूनीत। त्रिषपा द स्या मृ त न्दाटूइ वीता। इ हि यौ हो वाटुच्। इ हि यौ हो वाटुच्। इ हि यौ होटीट्वाखऔ हो वाशि। । इ हि यौ हो वाटुच्। इ हि यौ हो वाटुच्। इ हि यौ होटीट्वाखऔ हो वाशि। ईखळाण। इ हि यौ हो वाटुच्। इ हि यौ हो वाटुच्। इ हि यौ होटीट्वाखऔ हो वाशि। ज्योखतीःण। इ हि यौ हो वाटुच्। इ हि यौ हो वाटुच्। इ हि यौ होटीट्वाखऔ हो वाशि। ईख ॥१२॥
ऊ र्घाकाबु हा बु हाती। बू र्घाकाबु हा बु हाती। बू र्घाकाबु हा बु हातीबुश। ता वा न स्या म हाटूइ माता। ताषतो ज्या यां श्च पू रूटूषाःत। ऊषता मृ त त्त्व स्ये शाटूनाः । याषद न्ने ना ति रो हाटूती । ऊ र्घाकाबु हा बु हाती। बू र्घाकाबु हा बु हाती। बू र्घाकाबु हा बु हा उ वातू। इ ट् इ ळाटिख् ॥१३॥
हा बु हा बु हातुबुश। ताषतो वी रा ड जा याटूतात। वीषरा जो अ धि पू रूटूषाःत। साषजा तो अ त्य रि च्याटूतात। पषश्चा त्भू मि म थो पूटूराःत। हाषबु हा बु हा उ वातू। ईख ॥१४॥
हा बु हा बु हातुबुश। यषत्पू रु षे णा हा वाटूइ षाता। देषवा य ज्ञ म त न्वाटूतात। वाषस न्तः ए षा मा सी दाटूज्यातम् । ग्रीषष्म इ ध्म श र द्धाटूवातइःश। हाषबु हा बु हा उ वातू। ईख ॥१५॥
हा बु हा बु हातुबुश। सषप्ता स्या स्य न्प रि धाटूयाःत। त्रिषस प्त स मि धः काटूर्त्ताःत। देषवा य द्य ज्ञ न्त न्वाटूनाःत। आषब ध्न न्पु रु षं हाटूवातइःश। । हाषबु हा बु हा उ वातू। ईख ॥१६॥
॥ वसिष्ठस्य प्राणापानौ ॥
हा बु हा बु हातूबुश। आ युचारा युचारा युःचा। स त्यंचा। स त्यंचा। स त्यचाम् । इकन्द्रं न रो नेकीम धि ता ह व न्ताकूइश। य त्पा र्याचियू न ज न्ताचीइ धि य स्ताःची। शूकरो नृ षा ताकीश्र व स श्र का माकूइ । आकगो म ता इकीव्रा जे भ जाकीत्वचन्नःश। हा बु हा बु हातूबुश। आ युचारा युचारा युःचा। स त्यंचा। स त्यंचा। स त्याखाऔ हो वाशि। ईख ॥१॥
हा बु हा बु हातूबुश। आ नोकाह्या नोचाह्या नोका। ह्य म न दोकी। ह म न दोकी। ह म न दोकी। हाकमि न्द्रं न रो नेकुम धि ता ह व न्ताकूइश। य त्पा र्याचियू न ज न्ताचीइ धि य स्ताःची। शूकरो नृ षा ताकीश्र व स श्र का माकूइ । आकगो म ता इकीव्रा जे भ जाकीत्वचन्नःश। हा बु हा बु हातूबुश। आ नोकाह्या नोचाह्या नोका। ह्य म न दोकी। ह म न दोकी। ह म नाटिदो हा उ वाती। ईख ॥२॥
॥ वसिष्ठस्य शफौ ॥
हा बु प्रा थाःकी। चा यषास स्य प्र थ श्च नाटूमायउ वाटा। ई ळाचाई ळा ई ळाशी। हो इ हो वाकीहायउ वाटाईखहाश। आ नुषाष्टु भ स्य ह वि षोकूह वाटाइ र्यायाउ वाटा। ई ळाचाई ळा ई ळाशी। हो इ हो वाकीहायउ वाटाईखहाश। धाकतु र्द्यु ताकिनाचत्स वि तु श्च वाटूइ ष्णायाउ वाटा। ई ळाचाई ळा ई ळाशी। हो इ हो वाकीहायउ वाटाईखहाश। राकथथन्ता र माजिजशभ राथाव साटाइ ष्ठायाउ वाटा। ई ळाचाई ळा ई ळाशी। हो इ हो वाकीहायउ वाटाईखहाश। एतद्यू ताःटाख् ॥१०॥
प्रा थाःका। चा यषास स्य प्र थ श्च नाटूमायउ वाटा। इ हाचाइ हा इ हाशी। उ हु वा योखिवाणईखळाश। आ नुषाष्टु भ स्य ह वि षोकूह वाटाइ र्यायाउ वाटा। इ हाचाइ हा इ हाशी। उ हु वा योखिवाणईखळाश। धाकतु र्द्यु ताकिनाचत्स वि तु श्च वाटूइ ष्णायाउ वाटा। इ हाचाइ हा इ हाशी। उ हु वा योखिवाणईखळाश। राकथथन्ता र माजिजशभ राथाव साटाइ ष्ठायाउ वाटा। इ हाचाइ हा इ हाशी। उ हु वा योखिवाणईखळाश। एतद्यूचत् ॥११॥
॥ मरूतान्धेनुनीद्वे ॥
प्रा देता। वा म च्छा म धु मकूच्न्ताकआटइकथ्न्दा वाःटा। आचसि ष्याखादकन्ताथगा व आटिच्नाकधाटच्इ ना वाःचि। ब र्हि षाखिदाःण। वा चाचाना वा न्ता ऊटीच्धाकभा इः पाकिरि स्रूखातणम् । उ स्रि या नि र्णि जषून्धा इ रा एटीधा इ राखिऔ हो वाशि। धातइ राटाख्इश ॥२७॥
त्रापइ र स्मै स प्तषुधे न वो दु दौ होप्लूह्राङइ रा इशि। स त्या मा शी रषुम्प र मे व्योकीमा नीटा। च त्वा र्य न्याषीभु व ना नि निकुर्णा इ जाटिइश। चा रू णाखिइ चाणा। क्रेकअ द्रु ताटिइशरा वाटा। र्द्धाखतात्र ॥२८॥
॥ दिशाञ्च दशानुगानं दश ॥
हा बु हा बु हातुबुश। अ हचाम न्नकाम हचाम न्नकाम हचाम न्नाका। दोचह म न्नाकिदोचह म न्नाकिदोचह म न्नाकि। दोचअ हं वि धाकीर योचाअ हं वि धाकीर योचाअ हं वि धाकीर याःचा। हा बु हा बु हातुबुश। य द्व र्चोकिहि र ण्या स्याकी। य द्वाचाव र्चोकाग वाकामु ताचा। स त्या स्याकिब्र ह्म णोकिव र्च्चाःचा। ते न माकिसं सृ जाकिम साचाइश। हा बु हा बु हातुबुश। अ हचाम न्नकाम हचाम न्नकाम हचाम न्नाका। दोचह म न्नाकिदोचह म न्नाकिदोचह म न्नाकि। दोचअ हं वि धाकीर योचाअ हं वि धाकीर योचाअ हं वि धाकीर याःचा। । हाषबु हा बु हा उ वातू। एतच्अ ह मचिन्न म ह म न्ना दोकूअ हंचावि धाकीर याःकाएतच्अ ह मचिन्न म ह म न्ना दोकूअ हंचावि धाकीर याःका। एतच्अ ह मचिन्न म ह म न्ना दोकूअ हंचावि धाकीर याःका। एतआ हंकाच्स्व र्ज्योटातीःख ॥५॥
॥ वामदेव्यञ्च ॥
आ वो रा जाती। न म ध्वा र स्य रूखूद्रशम् । हो ताकराचम् । सषत्य य जं रो द सीखूयोःप्ल। अ ग्निंचापू राचात न इ त्नो रा चीखूक्ताशत् । हि रचाण्य रू पाटिम व सापिइ का र्णूखि। ध्वात्रम् ॥१०॥
॥ वैश्वानर व्रते द्वे ॥
ओंकच्ओंकच्ओंकच्। आकयूचराकयूचराकयूच। र्ज्योकच्तिशर्ज्योकच्तिशर्ज्योकच्तिःश। ज्यो तोकावाच। ज्यो तोकावाच। ज्यो तोकावाच। ज्यो तो वा हाकीइश। ज्यो तो वा हाकीइश। ज्यो तो वाकिहायउ वाटा। इ ह स्व र्वै श्वाकुच्ना राचायशप्रा दि शोचिज्योकति र्बृ हाचित् । इ न्दुचारि ळाशास त्यंचास त्यंचास त्यचाम् । स त्योचावाश। स त्योचावाश। स त्योचावाश। स त्यो वा हाकीइश। स त्यो वा हाकीइश। स त्यो वाकिहायउ वाटा। इ ह स्व र्वै श्वाकुच्ना राचायशप्रा दि शोचिज्योकति र्बृ हाचित् । का य मा नो व नाचूतु वाचातु वाचातु वाचा। तू वोचावाश। तू वोचावाश। तू वोचावाश। तू वो वा हाकीइश। तू वो वा हाकीइश। तू वो वाकिहायउ वाटा। इ ह स्व र्वै श्वाकुच्ना राचायशप्रा दि शोचिज्योकति र्बृ हाचित् । द्यौ र्भूकातचम् । पृ थि वीचि। पृ थि वीचि। पृ थि वीचि। पृ थि व्योचिवाश। पृ थि व्योचिवाश। पृ थि व्योचिवाश। पृ थि व्यो वा हाकुइश। पृ थि व्यो वा हाकुइश। पृ थि व्यो वाकीहायउ वाटा। इ ह स्व र्वै श्वाकुच्ना राचायशप्रा दि शोचिज्योकति र्बृ हाचित् । य न्मा त्र र ज गचून पाचाअ पाचाअ पाचा। आ पोचावाश। आ पोचावाश। आ पोचावाश। आ पो वा हाकी। आ पो वा हाकी। आ पो वा हायीउ वाटा। इ ह स्व र्वै श्वाकुच्ना राचायशप्रा दि शोचिज्योकति र्बृ हाचित् । । स ह स्ते जा अ पाचाअ पाचाअ पाचा। आ पोचावाश। आ पोचावाश। आ पोचावा । आ पो वा हाकी। आ पो वा हायीउ वाटा। । इ ह स्व र्वै श्वाकुच्ना राचायशप्रा दि शोचिज्योकति र्बृ हाचित् । । न त क्ते अ ग्ने प्रषूमृ षे नि व र्त्त नाचून्त नाचान्त नाचाम् । ता नोचावाश। ता नोचावाश। ता नोचावाश। । ता नो वा हाकुइश। ता नो वा हाकुइश। ता नो वा हायीउ वाटा। । इ ह स्व र्वै श्वाकुच्ना राचायशप्रा दि शोचिज्योकति र्बृ हाचित् । । ऊ षा दी शोकीज्यो ति र्ज्यो ति र्ज्यो तिः । ज्यो तोचावाशज्यो तोचावाशज्यो तोचावाश। ज्यो तो वा हाकीइश। ज्यो तो वा हाकीइश। ज्यो तो वा हायीउ वाटा। । इ ह स्व र्वै श्वाकुच्ना राचायशप्रा दि शोचिज्योकति र्बृ हाचित् । य द्दू रे स न्नि हाचुभु वाचाभु वाचाभु वाचा। भू वोचावाशभू वोचावाश। भू वोचावाश। भू वो वा हाकीइश। भू वो वा हाकीइश। भू वो वा हायीउ वाटा। । इ ह स्व र्वै श्वाकुच्ना राचायशप्रा दि शोचिज्योकति र्बृ हाचित् । ओंकच्ओंकच्ओंकच्। आकयूचराकयूचराकयूच। र्ज्योकच्तिशर्ज्योकच्तिशर्ज्योकच्तिःश। ज्यो तोकावाचज्यो तोकावाचज्यो तोकावाच। ज्यो तो वा हाकीइशज्यो तो वा हाकीइश। ज्यो तो वाकिहायउ वाटा। घकर्मो मा रू त्भीकीर्भु व ना नि चाकुक्र दशात् । इ ट् इ ळाटिख् ॥४॥
॥ ऋतुष्ठा यज्ञा यज्ञीयम ॥
वा सफान्ताफइ न्नूखार न्त्याःशा। ग्रीकष्म इ न्नू रायिन्तीपयाःश। वाचर्षा णि इ न्नु शाटूहि म्माचाइश। रातदाःत। हे म न्त शि शि र इषृन्नुकृराटन् ति याकाबुश। बाख ॥३॥
॥ ऊर्जश्च भागः ॥
इ हा उ वोतीवाशइ हे हा उ वोतुवाश। इ हा उ वोतीवाशइ हे हा उ वोतुवाश। इ हा उ वोतीवाश। इ हे हा उ वोतुवाश। त व त्ये पि तोषुद द ता उ वोतुवाश। इ हा उ वोतीवाशइ हे हा उ वोतुवाश। त व स्वा दि ष्ठ तेषूपि ता उ वोतीवाश। इ हा उ वोतीवाश। इ हे हा उ वोतुवाश। प्र स द्वा नोषीर स ना उ वोतुवाश। इ हा उ वोतीवाश। इ हे हा उ वोतुवाश। तु वि ग्री वाषीइ वे र ता उ वोतूवाश। इ हा उ वोतीवाशइ हे हा उ वोतुवाश। इ हा उ वोतीवाशइ हे हा उ वोतुवाश। इ हा उ वोतीवाशइ हे हा उ वोखुवात्र। ऊखक् ॥४॥
॥ वाचो व्याहृति सामानि सप्त दश ॥
भू रोंचा। भू र्होषाइ भू र्हो इ भू र्हाटूआ उ वाटि। एतस्व ज्योटातीःख ॥२॥
भु वोंचा। भु व हो इ भुषुव हो इ भु व हाटूआ उ वाटि। एतस्व ज्योटातीःख ॥३॥
सु वोंचा। सु व हो इ सुषुव हो इ सु व हाटूआ उ वाटि। एतस्व ज्योटातीःख ॥४॥
स त्योंचा। स त्य हो इ सषुत्य हो इ स त्य हाटूआ उ वाटि। एतस्व ज्योटातीःख ॥५॥
पु रु षोंचि। पु रु ष हो इ पु रु षषृहो इ पु रु षा हाटूआ उ वाटि। एतस्व ज्योटातीःख ॥६॥
गौ रोंचा। गौ र्होषाइ गौ र्हो इ गौ र्हाटूआ उ वाटि। एतस्व ज्योटातीःख ॥७॥
लो कोंच। लो क हो इ लोषुक हो इ लो क हाटूआ उ वाटि। एतस्व ज्योटातीःख ॥८॥
अ ग्ने हृ द योंचु। अ ग्ने हृ द य हो इ अ ग्ने हृ द्य हो इषौअ ग्ने हृ द य हाटूआ उ वाटि। एतस्व ज्योटातीःख ॥९॥
द्यौ र्होंचा। द्यौ र्होषाइ द्यौ र्हो इ द्यौ र्हाटूआ उ वाटि। एतस्व ज्योटातीःख ॥१०॥
अ न्त रि क्षोंची। अ न्त रि क्ष हो इ अ न्त रि क्ष होषैइ अ न्त रि क्ष हाटूआ उ वाटि। एतस्व ज्योटातीःख ॥११॥
पृ थि व्योंचि। पृ थि वी हो इ पृ थि वीषृहो इ पृ थि वी हाटूआ उ वाटि। एतस्व ज्योटातीःख ॥१२॥
अ ग्रोंचा। अ ग्र हो इ अषुग्र हो इ अ ग्र हाटूआ उ वाटि। एतस्व ज्योटातीःख ॥१३॥
वा योंचा। वा य हो इ वाषुय हो इ वा य हाटूआ उ वाटि। एतराटजाख ॥१४॥
सू र्योंचा। सू र्य हो इ सूषुर्य हो इ सू र्य हाटूआ उ वाटि। एतभ्राटजाख ॥१५॥
च न्द्रोंचा। च न्द्र हो इ चषुन्द्र हो इ च न्द्र हाटूआ उ वाटि। एतआ भ्राटाजाख ॥१६॥
ना गोंचा। ना ग हो इ नाषुग हो इ ना ग हाटूआ उ वाटि। एतपृ ष्ठचाम् ॥१७॥
॥ प्राजापत्यङ्गायत्रम ॥
त त्स वि तु व रेचूण्योंश। भ र्गोषादे व स्य धी मा हाटू। ईकधी यो यो नःटी। प्राषट्चा हिंचाभाट। ओसटवाचओसटवाचओसटवाच। हि म्भाटाओकवाच ॥१॥
सहनोस्तु । सहनो भुनक्तु । सहनो वीर्यवद्दस्तु ।
माविद्विषामहै । सर्वेषान्नौ वीर्य वदस्तु ॥
ओं शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥ हरिः ओम् ॥
श्रीमते जैमिन्याचार्याय नमः
श्री तलवकार गुरवे नमः
अस्तु गुरुभ्यो नमः ।
॥ सङ्ग्रह सङ्ख्या ॥
॥ वर्णानुक्रमणिका ॥
- अगस्तयस्यचराक्षोघ्नम्
- अग्ने व्रतम्
- अग्नेश्चरथंतरंवसिठस्यवा
- आयास्यञ्च
- आश्वञ्च
- ऊर्जश्च भागः
- ऋतुष्ठा यज्ञा यज्ञीयम
- ऋषभो वैराज ऋषभौ रैवत ऋषभश्शाक्वर इति ऋषभास्त्रयः
- ऐन्द्र षोडशी तवश्शाव्यं ज्येष्ठ साम सुभेषजं वा
- ऐषञ्च
- कण्वरथन्तरम्
- गौरीवितेद्वे
- त्रय आतीषङ्गाः रौद्रः वासवः वैश्वदेवः
- त्रिसन्धि च
- दिशाञ्च दशानुगानं दश
- पुरुष व्रतं सप्त
- प्राजापत्यङ्गायत्रम
- बृहत्प्राजापत्यंभरद्वाजस्यवा
- भद्रश्रैयां सि त्रीणि
- भारद्वाजञ्च
- भारद्वाजस्यप्रासाहम्
- भारद्वाजानिचत्वारि कण्वब्रहद्वाद्वितीयम्
- मरूतांव्रतोपोहस्सम्पद्वा
- मरूतान्धेनुनीद्वे
- महावामदेव्यंतृतीयम्
- माधुच्छन्दसम्
- यामेद्वे
- रौद्राणि आजिदोहानि मारुतानि वा मऋतनिधनम् ई निधनं त्रीणिधनं ऐन्द्राणि वा प्राजापत्यानिवा
- रौहिणकम्
- वसिष्ठस्य प्राणापानौ
- वसिष्ठस्य शफौ
- वाचो व्याहृति सामानि सप्त दश
- वामदेव्यञ्च
- वासिष्ठाः पदस्तोभा ऐन्द्रावा प्राजापत्या वा चत्वारः
- विष्णोर्व्रतम्
- वैश्वानर व्रते द्वे
- वैष्णवानि त्रीणि इहद्वाम दैवोदासन्तृतीयं और्ध्वसद्मनानिवा
- शैतन्त्रृतीयम्
- सोमसामनीद्वे
- सोमसामानिचत्वारि