॥ जैमिनीय साम सङ्ग्रहः ॥
संस्करणम्: 2.05 , निर्मितम्: 30-09-2026
॥ जैमिनीय साम सूक्तमाला ॥
॥ गणपती सूक्तम् ॥ (८)
॥ औरूक्षयेद्वे ॥
अ द र्द रूतीत् । स म सृ जोकीच्वीकखा निकात्वा म र्णाटिवातन्ब ल्बचाधा नंथाआ रा म्णाःभि। मा हा न्ताटिमितन्द्र प र्व तंकीवीकया द्वाकासृ जा द्धाटिराःत। अ व य द दाकुच्नाकवाटन्हाखण्। ओपइ ळाशा ॥१॥
अ द र्द रू त्स म सृ जाःतृ। वी खा नि त्व म र्णाषूवा न्ब ल्ब धा नंकुआ राटाम्णाःत। मा हा न्त मिषन्द्र प र्व तंकीवि याटाद्वाःत। स्र जा द्धाटिरातअ व य द दाकुच्नाकवोटयाखऔ हो वाशि। हाखन् ॥२॥
॥ पाथेद्वे ॥
सु ष्वा णा साःती। इ न्द्रा स्तु म सीखुत्वाश। स नि ष्य न्त श्चिषुक्तू न्वि नृ म्णा वाखुजशम् । आखनोशभ रा उ वोखीवाण। सु वि त य्य स्यषुको ना ता ना त्म नातू। स ह्या माखितू वोखा। ताःत्र ॥३॥
ओतहोतहो इ सूखिष्वाण। णा साकाइ न्द्रा स्तु म सीखुत्वाश। ओतहोतहो इ साखिनीणष्य न्ता श्चीभितू वी नृ म्णा वाखुजशम् । ओतहोतहो आखानोणभ राकासु वि त य्य स्य कोखूनाश। ओतहोतहो इ ताखिनाणत्म नाकास ह्य मापितू वोखा। ताःत्र ॥४॥
॥ आपलवैणवे द्वे ॥
आ तू नषिइ न्द्र क्षू मातीन्तातम् । चि त्रं रा भं स ङ्गृटूभाकयाथचिषत्रं रा भं स ङ्गृ औकूहो इ भाखियाण। ऐकहा इ म हा ह स्तीषूद क्षाटाहोचइश। औकहो वाकाहोपबा णाप्लाइ नोप्ला। हा इशा ॥५॥
आ तूणाना इणान्द्राफक्षु माखान्तशम् । चि त्रं रा भं स ङ्गृ भा या चाषेइ त्रं रा भं स ङ्गृकूईखहाप्लभाखयाण। ऐकहा इ म हा ह स्तीषूद क्षाटाहोचइश। औकहो वाकाहोपबाप्लणा इ नोप्लि। हा इशा ॥६॥
॥ रौद्रेद्वे ॥
त द्वो गा याती। सु ताताइ स चातिपु रूटाहु ताखाहाशप्ल्हातइ याचास त्वाखानाणइश। शंकय त्गाटावेत। ना शौटाहौटच्हूकवोपबाप्लका इ नोप्लि। हा इशा ॥७॥
॥ सौभराणित्रीणि ॥
त ङ्गू र्ध या स्वौकुहो आ र्णातिरातम् । दे वाटासोखदेण। वा मा र ताटीइ न्दाखाधाप्लन्वाखइ रा इशि। हा होखाहाणइश। दे वाटात्राखहाण। व्य मू हाखिणफप्ल्इश। षाखइश ॥८॥
॥ वाक्सूक्तम् ॥ (२)
॥ वाचोव्रते द्वे ॥
हु वे वा चातीम् । वा चंकावा चंथाहु वेटावातक् । श्रु णो तुचिश्रु णोटातु वाटागु वाताक् । स मे तुचिस मैटातु वाटागु वातक् । र म तांकिर म तांकिर माटाट्ताखऔ हो वाशि। ई हा ई हा ई हातू ॥९॥
हू वाचाइशवा चाचाम् । वा चंकाहू वाचाइश। वातच्क् । श्रु णोचातुशश्रु णोकाच्तु वाफाप्लग्वातक् । सा मैचातुशसा मैकतु वाफाप्ल्ग्वातक् । र म तांटिर म तू वाखीऔ हो वाशि। मा यि मा यि मातुयिश ॥१०॥
॥ सरस्वती सूक्तम् ॥ (१)
॥ भारद्वाजञ्च ॥
पा व का न ई यातू। सा राचास्वायतीट। वा जेचाभि र्वाथाच्जी नाकाइ वायातीट। य ज्ञां वाटिट्ष्टूखऔ हो वाशि। धि यातावाटसूःख ॥११॥
॥ भाग्यसूक्तम् ॥ (१)
॥ श्रायन्तियञ्च ॥
श्रा य न्त ई व सूषूओ रातायातम् । वि श्वाटाइ दि न्द्राटिस्य भाटाक्षा ताटा। वा सू नि जाकीतो ज नि माकीच्नी योकाजायसाट। प्रा ती भाकिग न्ना दीकिधी मः प्राटितीत। भा गा न्नापिदा हिशाम् । धि माताओपबाप्ल। हेख ॥१२॥
॥ पुण्याहवाचनम् ॥ (१६)
॥ वरूणसामानित्रिणी ॥
प्र मि त्रा य प्रातुहातबुश। आटर्य म्नाचाइ स चाटिहोकथ्धि यौटाहु वा र्ताटिव साचाबुश। व रौटाहोकथ्धी यौटाहू वा इषिव रू णे छा न्दीकुयं व चाःचि। स्तो त्रांटाहो इ राटिजौटहू वा सूकिगा या ताटिआ उ वाटि। ऊखपाश ॥१३॥
प्र मि त्रा य प्रौ होतूवात। अ र्य म्णा बु होकुच्औकहो वाका। सा चा थ्य मृकीता वाचासा बु होकिच्औकहो वाका। वा रू थ्ये व रू णेचूछकन्दी यं वाकिचा बु होकिच्औकहो वाका। स्तोकत्रं राकाजा बु होकिच्औ हो वा । सूकगा याकाता बु होकिच्औकहो वाःपाण्। ओपइ ळाशा ॥१४॥
प्र मि त्रा यषीप्रा र्य म्नोतिवा ओतावात। सा चाचाथ्य मृचाता वायासाटबुश। वाटरूतथाटयातइ व रू णेकीच्छकन्दा यांटाहातइ व चोटिआत। स्तोकत्रं राकाज सु गाचिय त स्तोटित्रातम् । राकजचसूकगौटहोतओपबा या तोप्ल। हा इशा ॥१५॥
॥ तरन्तस्यच वैददश्वेसाम ॥
त र त्स मातीन्दीतधा वायाताटइश। धा राटासूखताण। स्या न्धाटाट्साखऔ हो वाशि। ता र त्स म न्दी धाकुव तीखी ॥१६॥
॥ इन्द्रस्य शुद्धाशुद्धीये द्वे ॥
ए तो न्वि न्द्रं स्त वातूमात। शु द्धं शु द्धेकीना साटाम्नात। शु द्धै रु क्थै र्वाकुवृ द्ध्वांटासातम् । शु द्धै राटिशीतर्वाचन्म माखाऔ हो वाशि। तूख ॥१७॥
ए तो न्वि न्द्रं स्त वातूमात। शु द्धं शु द्धेकीनाचसाकओ म्नाटा। शु द्धा इ रूभीक्थातइ र्वाचावृ द्ध्वांखासणम् । शु द्धै राटिशीतर्वाचन्मा माचातू इ ळाटिभाखण्। ओपइ ळाशा ॥१८॥
॥ अग्नेश्चदधिक्रम् ॥
ओतहा इ द धि क्राषूवि ण्णो अ का र्षा मोतूहातइश। ओतहा इ जि ष्णोषीर श्व स्य वा जि नाटूओ हाचाइश। सु राकाभी नोकामु खा काटिरातत् । प्र णाटाच्होयआ यूंटाहोयषी ता राटिइ षाखाण्त् । ओपइ ळाशा ॥१९॥
॥ वसूरोचिशस्सौर्यवचस्य सामनीद्वे ॥
श न्नो दे वीती। आ भी ष्टाटियाखइ श न्नो भु वाशुम् । तू पी ताटियाखइ श य्यो र भीःशु। श्रा वा न्तूटिट्नाखऔ हो वाशि। ऊखपाश ॥२०॥
हु वाताहोपइ श न्नो दे वीप्लुर भि ष्ट याङिइश। हु वाताहोपइ श न्नो भु वाप्लुन्तू पी ता याङीइश। हु वाताहोपइ श य्यो र भीप्लुस्र व न्तुङिनाःश। हु वाताहोटयाखऔ हो वाशि। ऊखपाश ॥२१॥
॥ आदित्यसार्कपुष्पेद्वे देवानांवा ॥
पा वि त्र न्तेकीवि त तंकिब्र ह्म ण स्प तेकुहु वेटाहु वेटाहो वाटाहातहातइश। प्रा भु र्गा त्राटीच्णीकप र्येटाषी वि श्व ताचीहु वेटाहु वेटाहो वाटाहातहातइश। अ त प्त त नूकुर्न्न त दाकिमो अ श्नु तेकीहु वेटाहु वेटाहो वाटाहातहातइश। श्र ताकास इ द्व हकीन्त स्स न्त दा श ताकूहु वेटाहु वेटाहो वाटाहातहाखऔ हो वाशि। अ र्को देटिवा नांटाप रा मेचिव्योटमाखन् ॥२२॥
पा वि त्र न्तेकीवि त तंकिब्र ह्म ण स्प तेकीच्हू वाकाऔटहो वाटा। प्रा भु र्गा त्राकीणी प र्येकिषी वि श्व तोकीच्हू वाकाऔटहो वाटा। अ त प्त त नुकुर्न्न त दाकिमो अ श्नु तेकीच्हू वाकाऔटहो वाटा। श्र ता स इ द्व हकून्त स्स न्त दा श ताकूहू वा औटिहोटवाखऔ हो वाशि। अ र्क स्य देकिवाःकच्प रा मेचिव्योटमाखन् ॥२३॥
॥ वाचस्सामनी द्वे महावामदेव्यं तृतीयम ॥
क या न श्चीती। त्रातया भूपावाशत् । ऊकता इ स दा वाकुर्ध स्साखाखाण। क या शाटिचातइश। ष्ठापयाशवाखर्तोप्ल। हा इशा ॥२४॥
हो वा इ हो वा इषूक या न श्चीती। त्रातया भूपावाशत् । हो वा इ हो वा इषूऊ तीचास्सा दाकाच्वृ धाकास्सापखाश। हो वा इ हो वा इषूक याताश चाताइश। ष्ठा या वाटिट्र्ताखऔ हो वाशि। ऊखपाश ॥२५॥
काणयाफन श्चाफाइ त्राखाया भु वाशित् । ऊ तीकास्सा दाकावृ ध स्स खा औकुहो हाताइ क याटिश चाताइश। ष्ठ यौ होतिहि म्माटावाटर्तोख। हात्रइश ॥२६॥
काणस्त्वाफस त्योफामाखदा नाशाम् । मं हि ष्ठोकिम त्स दकीन्ध सा औकिहो हाताइ दृ ढाटिचि दाता। रू जौ होतिहि म्माटा। वाटसोख। हात्रइश ॥२७॥
आणभीफषू णाफास्साखखी नाशाम् । अ वि ताकिज रा इ तृकीणा मा औकिहो हाताई शा तांटिभ वाता। सि यौ होतिहि म्माटा। ताटयोख। हात्रइश ॥२८॥
॥ पुरुषसूक्तम् ॥ (७)
॥ पुरुषव्रतं सप्त ॥
उ हु वा हाकी। बु हु वा हाकी। बु हु वा हाकीबुश। सषह स्र शी र्षा पू रूटूषाःत। सषह स्रा क्ष स्स ह स्राटूपातत् । साषभू मिं स र्व तो वाटूत्वात। अषत्य ति ष्ठ द्द शा ङ्गूटूलातम् । उ हु वा हाकी। बु हु वा हाकी। बु हु वाटिहा उतिवा । इ ट् ई ळाटिख् ॥२९॥
उ हु वौ हो वाटुच्। उ हु वौ हो वाटुच्। उ हु वौ हो वाटुच्। त्री पाषादू र्ध्वा उ दै त्पू रुटूषाःत। पाषदो स्ये हा भ व त्पूटूनाःत। ताषथा वि ष्वं वि य क्राटूमा त् । अषश ना न श ने आटूभीत। उ हु वौ हो वाटुच्। उ हु वौ हो वाटुच्। उ हु वौ होटीट्वाखओ हो वाशि। ईखळाण। उ हु वौ हो वाटुच्। उ हु वौ हो वाटुच्। उ हु वौ होटीट्वाखओ हो वाशि। सुखवाःण। उ हु वौ हो वाटुच्। उ हु वौ हो वाटुच्। उ हु वौ होटीट्वाखओ हो वाशि। ऊख ॥३०॥
इ हि यौ हो वाटुच्। इ हि यौ हो वाटुच्। इ हि यौ हो वाटुच्। पुषरु ष ए वे दं साटूर्वातम् । यषत्भू त य श्च भा वाटूयातम् । पाषदो स्य स र्वा भू ताटूनीत। त्रिषपा द स्या मृ त न्दाटूइ वीता। इ हि यौ हो वाटुच्। इ हि यौ हो वाटुच्। इ हि यौ होटीट्वाखऔ हो वाशि। । इ हि यौ हो वाटुच्। इ हि यौ हो वाटुच्। इ हि यौ होटीट्वाखऔ हो वाशि। ईखळाण। इ हि यौ हो वाटुच्। इ हि यौ हो वाटुच्। इ हि यौ होटीट्वाखऔ हो वाशि। ज्योखतीःण। इ हि यौ हो वाटुच्। इ हि यौ हो वाटुच्। इ हि यौ होटीट्वाखऔ हो वाशि। ईख ॥३१॥
ऊ र्घाकाबु हा बु हाती। बू र्घाकाबु हा बु हाती। बू र्घाकाबु हा बु हातीबुश। ता वा न स्या म हाटूइ माता। ताषतो ज्या यां श्च पू रूटूषाःत। ऊषता मृ त त्त्व स्ये शाटूनाः । याषद न्ने ना ति रो हाटूती । ऊ र्घाकाबु हा बु हाती। बू र्घाकाबु हा बु हाती। बू र्घाकाबु हा बु हा उ वातू। इ ट् इ ळाटिख् ॥३२॥
हा बु हा बु हातुबुश। ताषतो वी रा ड जा याटूतात। वीषरा जो अ धि पू रूटूषाःत। साषजा तो अ त्य रि च्याटूतात। पषश्चा त्भू मि म थो पूटूराःत। हाषबु हा बु हा उ वातू। ईख ॥३३॥
हा बु हा बु हातुबुश। यषत्पू रु षे णा हा वाटूइ षाता। देषवा य ज्ञ म त न्वाटूतात। वाषस न्तः ए षा मा सी दाटूज्यातम् । ग्रीषष्म इ ध्म श र द्धाटूवातइःश। हाषबु हा बु हा उ वातू। ईख ॥३४॥
हा बु हा बु हातुबुश। सषप्ता स्या स्य न्प रि धाटूयाःत। त्रिषस प्त स मि धः काटूर्त्ताःत। देषवा य द्य ज्ञ न्त न्वाटूनाःत। आषब ध्न न्पु रु षं हाटूवातइःश। । हाषबु हा बु हा उ वातू। ईख ॥३५॥
॥ विष्णूसूक्तम ॥ (३)
॥ विष्णोश्च साम ॥
इ दा मेति। वि ष्णूटार्वि चा क्राखिमाणइश। त्रा इ धाचिनि दकाधाचइ पायादांटस मूटाहोयढाटमात। स्याटपाखऔ हो वाशि। एंतसू लेताच् ॥३६॥
॥ विष्णोर्व्रतम् ॥
हा बु हा बु हातुबुश। ऊटऊटऊ उ वाटिहा उ वातिहाचस् । आतहाचस् । अ र्चि शो चि स्त पो ह रः प्रष्लक्ष स्य वि ष्णो अ रू ष स्य नू माटेहाःत। प्रा नू वो चो वि दषूथा जा त वे दाटुसातइश। वै श्वा न रा य मषूति र्न व्य से शूटुचीःत। सो म इ व प वषूते चा रु र ग्नाटुयातइश। हा बु हा बु हातुबुश। ऊटऊटऊ उ वाटिहा उ वातिहाचस् । आतहाचस् । अ र्चि शो चि स्त पोषूह रोटाहा उ वाति। ईख ॥३७॥
॥ निधिसाम ॥
अ स्मीकान स्मीथाअ स्मीकान स्मीथाअ स्मीकान स्मीथान् । नृ म्णाकाइ न्नृ म्णंचि। नृ म्णाकाइ न्नृ म्णंचि। नृ म्णाकाइ न्नृ म्णंचि। नी धा इ माटीहाट। नी धा इ माटीहाट। नी धा इ माटीहाट। अ ग्नाकाआ याथाही वाकाइ तायायाटइश। गु णा नो हाचीव्या दाकाताययाटइश। नी हो ता साचीत्सी बाकार्हायइ षीटा। अ स्मीकान स्मीथाअ स्मीकान स्मीथाअ स्मीकान स्मीथान् । नृ म्णाकाइ न्नृ म्णंचि। नृ म्णाकाइ न्नृ म्णंचि। नृ म्णाकाइ न्नृ म्णंचि। नी धा इ माटीहाट। नी धा इ माटीहाट। नी धा इ माटीहाखओ हो वाशि। एतस्व र्ज्योटातीःख ॥३८॥
॥ विष्णूचमकम् ॥ (९)
॥ अग्ने स्वरणि वायोस्वर्यांस्थयवा वायोर्नुवानुगान मिन्द्रस्य द्यनु गान मृत्योश्चतुर्गानं इति त्रीणि ॥
हा बु होटिहा इशाहा बु होटिहा इशाहा बु होटिहा इशा। अकन्त रि क्षाकित्सुषर्व दि व ज ग म्माकून्त रि क्षाकित्सुषर्व दि व ज ग म्माकून्त रि क्षाकित्सुषर्व दि व ज ग म्माकू। प राकात्प र मै र य न्ताकू। प राकात्प र मै र य न्ताकू। प राकात्प र मै र य न्ताकू। औ होकावाटहा उ वाति। एतच्य ज्ञोचादि वोचामूकर्द्धा देकावा मा द नोकीघचर्मो ज्योटातीःख। हा बु होटिहा इशाहा बु होटिहा इशाहा बु होटिहा इशा। अकन्त रि क्षाकित्सुषर्व दि व ज ग म्माकून्त रि क्षाकित्सुषर्व दि व ज ग म्माकून्त रि क्षाकित्सुषर्व दि व ज ग म्माकू। प राकात्प र मै र य न्ताकू। प राकात्प र मै र य न्ताकू। प राकात्प र मै र य न्ताकू। औ होकावाटहा उ वाति। एतच्पृ थिकाव्य न्त रि क्षंकीद्यौ र पाःकि। क नि क्र दाकीत् । सि न्धु रा पोकीमाषरु तो मा द य न्तांकूघकर्मो ज्योटातीःख। हा बु होटिहा इशाहा बु होटिहा इशाहा बु होटिहा इशा। अकन्त रि क्षाकित्सुषर्व दि व ज ग म्माकून्त रि क्षाकित्सुषर्व दि व ज ग म्माकून्त रि क्षाकित्सुषर्व दि व ज ग म्माकू। प राकात्प र मै र य न्ताकू। प राकात्प र मै र य न्ताकू। प राकात्प र मै र य न्ताकू। औ होकावाटहा उ वाति। दी वोकामूथर्द्धा नं स मैकीर य द्धो येकीहोखवाण। याकशो घथामो ज्योटातीःख। या श स्स मैकीर य द्धो येकीहोखवाण। तेकजो घथामो ज्योटातीःख। ते ज स्स्मैकीर य द्धो येकीहोखवाण। सूकवा घथामों ज्योटातीःख। सु व स्स मैकीर य द्धो येकीहोखवाण। ज्योकति र्घथामों ज्योटातीःख। ज्यो ति स्स मै र य द्धो येकीहोखवाण। घ र्मोकाघ र्मोथाज्योटतीःख। हा बु होटिहा इशाहा बु होटिहा इशाहा बु होटिहा इशा। अकन्त रि क्षाकित्सुषर्व दि व ज ग म्माकून्त रि क्षाकित्सुषर्व दि व ज ग म्माकून्त रि क्षाकित्सुषर्व दि व ज ग म्माकू। प राकात्प र मै र य न्ताकू। प राकात्प र मै र य न्ताकू। प राकात्प र मै र य न्ताकू। औ होकावाटहा उ वाति। एतइ ळा या च्छाकीह स्तु ति या च्छाकु। एतच्म नोकाम हि मा नं या च्छाकू। एतच्त्वि षिकामो जो या च्छाकी। एतआ युःकाप्रा णं य्या च्छाकी। एतच क्षुकाश्रो त्रं य्या च्छाकी। ए प्रा जांकाव र्च्चो याचिच्छाश। एतपा शुचान्वि शं य्याचिच्छाश। एतब्र ह्माटाक्ष त्रं य्याचिच्छाश। एतचस्व ज्यो ति र्या च्छाटूख्। हा बु होटिहा इशाहा बु होटिहा इशाहा बु होटिहा इशा। अकन्त रि क्षाकित्सुषर्व दि व ज ग म्माकून्त रि क्षाकित्सुषर्व दि व ज ग म्माकून्त रि क्षाकित्सुषर्व दि व ज ग म्माकू। प राकात्प र मै र य न्ताकू। प राकात्प र मै र य न्ताकू। प राकात्प र मै र य न्ताकू। औ होकावाटहा उ वाति। य ज्जा य था अ पूटूर्वाचयाश। मा घ व न्वृ त्र हाटूथाचयाश। त त्पृ थि वी म प्राटूथाचयाश। ता द स्त भ्ना उ ताटूदाचइ वांशा। हा बु होटिहा इशाहा बु होटिहा इशाहा बु होटिहा इशा। अकन्त रि क्षाकित्सुषर्व दि व ज ग म्माकून्त रि क्षाकित्सुषर्व दि व ज ग म्माकून्त रि क्षाकित्सुषर्व दि व ज ग म्माकू। प राकात्प र मै र य न्ताकू। प राकात्प र मै र य न्ताकू। प राकात्प र मै र य न्ताकू। औ होकावाटहा उ वाति। एतते जो घकिर्म स्सं स्क्री ळ न्तेकुशि शु म तीकीर्वा यु गो पाकीस्ते ज स्व तीकी। मा रु त्मीकिभु व ना नि चा क्रकूदुःश। इ ट् इ ळाटिख् ॥३९॥
हा बु होटिहा हा बु होटीहाचहा बु होटिहा प राकात्प र मै र य न्ताकूप राकात्प र मै र य न्ताकूप राकात्प र मै र य न्ताकू। औकहो वाटाहा उ वाटि। एतच्इ न्द्रोकाधेकनु रि न्द्रोकिधेचनु रि न्द्रोकिधेकनु रा पोकिधेकनु रा पोकिधेकनु रा पोकिधेकनुःच। द्यौ र्धेकानुचद्यौ र्धेकानुचद्यौ र्धेकानुच। र न्त रि क्षंकीधेचनु र न्त रि क्षंकुधेचनु र न्त रि क्षंकुधेचनुःश। भू मि र्द्धेकिनुचभू मि र्द्धेकिनुचभू मि र्द्धेकिनुच। स्व र न्धेकिनुचस्व र न्धेकिनुचस्व र न्धेकिनुःच। व्र तं धेकिनुचव्र तं धेकिनुचव्र तं धेकिनुःच। ऋ त न्धेकिनुचऋ त न्धेकिनुचऋ त न्धेकिनुच। स त्य न्धेकिनुचस त्य न्धेकिनुचस त्य न्धेकिनुच। र र्को धेकिनुचर र्को धेकिनुचर र्को धेकिनुच। इ ळा धेकिनुचइ ळा धेकिनुचइ ळा धेकिनुच। स्व र्धे नुःकिस्व र्धे नुःकिस्व र्धे नुःकि। ज्यो ति र्धेकिनुचज्यो ति र्धेकिनुचज्यो ति र्धेकिनुच। धेकनुःचधेकनुःचधेकनुःच। हा बु होटिहा हा बु होटीहाचहा बु होटिहा प राकात्प र मै र य न्ताकूप राकात्प र मै र य न्ताकूप राकात्प र मै र य न्ताकू। औकहो वाटाहा उ वाटि। यषज्जा य था अ पू होटूर्वाचयाश। माषघ व न्वृ त्र हा होटूथाचयाश। तषत्पृ थि वी म प्रा होटूथाचयाश। ता द स्त भ्ना उ ता होटूदाचइ वाशाम् । हा बु होटिहा हा बु होटीहाचहा बु होटिहा प राकात्प र मै र य न्ताकूप राकात्प र मै र य न्ताकूप राकात्प र मै र य न्ताकू। औकहो वाटाहा उ वाटि। एतते जो घकिर्म स्सं स्क्री ळ न्तेकुशि शु म तीकीर्वा यु गो पाकीस्ते ज स्व तीकी। मा रु त्मीकिभु व ना नि चा क्रकूदुःश। इ ट् इ ळाटिख् ॥४०॥
॥ होचवाकऊकृ। होचवाकऊकृ। होचवाकऊकृ। हो वा हो वा हो वाकूच्हायउ वाटा। एतआ पा पाकिपाःख। होचवाकऊकृ। होचवाकऊकृ। होचवाकऊकृ। हो वा हो वा हो वाकूच्हायउ वाटा। एतआ पा पाकिपाःख। होचवाकऊकृ। होचवाकऊकृ। होचवाकऊकृ। हो वा हो वा हो वाकूच्हायउ वाटा। एतआ पा पाकिपाःख। एततोकका मषाप्र जां ग र्भो म नाकूय म द म ह्या चाकूपा रा चाकिपा थि भिकिश्च रकान्तांख। होचवाकऊकृ। होचवाकऊकृ। होचवाकऊकृ। हो वा हो वा हो वाकूच्हायउ वाटा। एतआ पा पाकिपाःख। होचवाकऊकृ। होचवाकऊकृ। होचवाकऊकृ। हो वा हो वा हो वाकूच्हायउ वाटा। ए भि र्व्यातिश्व मैचारा याःटा। ते भि र्व्यातिश्नु हीचामा दाटाम् । ए भि र्भू तांतीसा ह स्साचिहाःटी। ते भि स्ते जोतीअ पोटाअ पाःचा। होचवाकऊकृ। होचवाकऊकृ। होचवाकऊकृ। हो वा हो वा हो वाकूच्हायउ वाटा। एतआ पा पाकिपाःख। होचवाकऊकृ। होचवाकऊकृ। होचवाकऊकृ। ए भि र्व्यातिअ न्त रि क्ष मैकुरा याःटा। होचवाकऊकृ। होचवाकऊकृ। होचवाकऊकृ। हो वा हो वा हो वाकूच्हायउ वाटा। एतआ पा पाकिपाःख। होचवाकऊकृ। होचवाकऊकृ। होचवाकऊकृ। हो वा हो वा हो वाकूच्हायउ वाटा। आ यं सं शि ङ्क्तेकुहो इ य स्माकीत् द्या वा पृ थि वीकुभु व ना नि चाकुक्र दुचार्हो इशा। आ यं सं शि ङ्क्तेकुहो इ य स्माकीत् द न्त रि क्षाकीभु व ना नि चाकुक्र दुचार्हो इशा। आ यं सं शि ङ्क्तेकुहो इ य स्माकीदा पा ओ ष ध योकूभु व ना नि चाकुक्र दुचार्हो इशा। आ यं सं शि ङ्क्तेकुहो इ य स्माकीत्स मु द्रि या आ पोकूभु व ना नि चाकुक्र दुचार्हो इशा। आ यं सं शि ङ्क्तेकुहो इ य स्माकीत् वि श्वा भू ताकीभु व ना नि चाकुक्र दुचार्हो इशा। होचवाकऊकृ। होचवाकऊकृ। होचवाकऊकृ। हो वा हो वा हो वाकूच्हायउ वाटा। एतआ पा पाकिपाःख। होचवाकऊकृ। होचवाकऊकृ। होचवाकऊकृ। हो वा हो वा हो वाकूच्हायउ वाटा। य ज्जा य थाचीअ पू र्वि याचीअ पू र्वि याची। आ पूकार्वाखयाण। मा घ व न्वृचीत्रा ह थ याचीत्रा ह थ याची। त्रा हाकाथाखयाण। ता त्पृ थि वीचीमा प्र था याकीआ प्र था याकीआ प्राकाथाखयाःण। ता द स्त भ्नाचीऊ त दि वाचीमू त दि वाचीमू ताकादाखइ वंणा। होचवाकऊकृ। होचवाकऊकृ। होचवाकऊकृ। हो वा हो वा हो वाकूच्हायउ वाटा। एतआ पा पाकिपाःख। होचवाकऊकृ। होचवाकऊकृ। होचवाकऊकृ। एतते जो घकिर्म स्सं स्क्री ळ न्तेकुशि शु म तीकीर्वा यु गो पाकीस्ते ज स्व तीकी। मा रु त्मीकिभु व ना नि चा क्रकूदुःश। इ ट् इ ळाटिख् ॥४१॥
॥ सोमसोमानि ॥
सो मः प व तेचुज नि ताकिच्मा ताकाइ नाटाम् । ज नि तातिदी वोचाज नी ताकिच्पृ थाकाइ व्याःटा। ज नि ता ग्नेषीर्ज नि ता सूकीरी याटायातस्या । ज नि तेकिन्द्रा स्याटाज नि तोपिता वाखाइश। ष्णोःत्र ॥४२॥
सो मः प व तेषुज नि ता एतीऔ होखावात्र। मा तापइशनात्रम् । ज नि ताकिदी वोकाज नी ताकिप्र थि व्याःचि। ज नाटाइ ताखाग्नेःण। ज नि ता सूखीरी याखास्यात्र। ज नि तेकिन्द्रा स्य ज नि तोकुत वि ष्णोःटिख् ॥४३॥
॥ विष्णोर्ररणी द्वे ॥
त वा हं सोती। म राटाच्रा णाचार णाशा। स ख्य इ न्दो दि वाटूच्इशदि वाचाइ दि वेशि। पू रू णि ब भ्रो निषूच र न्ति माटीमा वाचाअ वाशा। पा री धीं र ति तंकूइ हाटाट्इ हाखाऔ हो वाशि। ऊ उखापाश ॥४४॥
त वा त वाती। आ हं सो मषीरा र ण स ख्या इटून्दोतदि वा औभिहोतदा इ वेटि। पू रू णि ब भ्रो निषूच र न्ति मायीमापवाश। प रा औभिहोत। धा इं र तीकीतोपबाप्ल। आ इ होप्लि। हा इशा ॥४५॥
॥ बार्हस्पत्यञ्च ॥
सो मं रा जाषीनं व रु णातीम् । अ ग्नी म न्वाकीर भा म हेचीहो वाटाहातइश। आथदि त्यं वि ष्णुंकीसू र्यंकाहो वाटाहातइश। ब्र ह्मा णाटिञ्चातहो वाटाहातइश। बृ हाटाउ वाता। स्पाखतिशम् ॥४६॥
॥ प्राजापत्यङ्गायत्रम् ॥
त त्स वि तु व रेचूण्योंश। भ र्गोषादे व स्य धी मा हाटू। ईकधी यो यो नःटी। प्राषट्चा हिंचाभाट। ओसटवाचओसटवाचओसटवाच। हि म्भाटाओकवाच ॥४७॥
॥ श्री सूक्तम् ॥ (७)
॥ आङ्गिरसञ्च इन्द्रस्य वा हरिश्रीःनिधनम् ॥
गि र्व णः प हि नषूस्सु त ङ्गि र्व णः पातू। ही ना स्सु ताटीच्म्मा धोकार्धा राकाभी रा हो वाकीज्या सेटाहा उ वाति। इ न्द्र त्वाटिदात। ता मा इ द्याटीट्शाखऔ हो वाशि। हाचरि श्रीःटाख् ॥४८॥
॥ शौक्तानी साम ॥
ओतहा इ स खा य याषूनी षी दातितात। पु नाकानौ हो इ पु नाकुनौ हो एपिया प्रा या प्राशी। गाकय तौ हो इशीगाकय तौ हो एपीशा इ शूं शा इ शूशूम् । ना य ज्ञौ होतीइशना य ज्ञौ हो एपुपा रीतापा राखाऔ हो वाशि। एतच्भू ष त श्रि येतुच् ॥४९॥
स खाफाय या उ वोखीवाश। नी षा इ दा ताटुउ वोखावाश। पु नाकाना य प्र गाकीय ताताशा इ शाटिउ वोखावाश। ना य ज्ञैः पा रि भूटूषा ताटाउ वोखीवाश। श्रि येताच् ॥५०॥
॥ इन्द्रस्यहरिश्रीःनिधनम् ॥
उ च्चाषाते जा त म न्धा साकूउ च्चा तेकिजाथच्। ओ अ न्ध साटीच्दि व स त्भूचीम्या हो वाकिदा देटाहा उ वाति। उ ग्रं शाटिर्म्मात। ओ हा इ श्राटीट्वाखऔ हो वाशि। हाचरि श्रीःटाख् ॥५१॥
स नषाइ न्द्रा य य ज्य वेकूच्स न इकिन्द्राच। ओ य ज्य वाटीच्इ व रू णाकीय मा रू हो वाकूत्भा याटाहा उ वाति। व रि वोटिवीतत् । ओ हा इ श्राटीट्वाखऔ हो वाशि। हाचरि श्रीःटाख् ॥५२॥
ए ना वि श्वाषीन्य र्य आकीए नाकावि श्वाथाच्। ओ अ र्य आटीच्द्यु म्ना नि माकीनु हो वाकिषा णांटाहा उ वाति। सी षा साटिन्ताःत। ओ ना माटिट्वाखऔ हो वाशि। हाचरि श्रीःटाख् ॥५३॥
॥ हारीवर्णानि ॥
त न्दे म दांफीगृ णी म साकीइश। वा र्षा णं प्र क्षूकुसा साटाहींतहो वाटाहातइश। ऊ लो काटिकृतहो वाटाहातइश। त्नु मा द्राटिट्इ वाखाऔ हो वाशि। हाचरि श्री याटिख्म् ॥५४॥
॥ भूसूक्तम् ॥ (१)
॥ पुरिषिञ्चाथर्वणम् ॥
च क्रं य द स्य प्सूषूआ नि नि ष क्तातुम् । ऊ तो त द स्मैषुम ध्वी च च्छाटीद्यातत् । पृ थि व्या मषीति षी तंकिया दूटाधाःत। पा यो गोटिषूतआ द धाटिओचषा धीथाषू इ ळाटिभाखण्। ओपइ ळाशा ॥५५॥
॥ लक्ष्मीसूक्तम् ॥ (६)
॥ अञ्जश्चवैरूपम् ॥
य द्या व ईती। न्द्र ताताआ उ वाटिशाखतणम् । हा हाथाआ उ वाटि। ईखळाण। शा तं भूचिमीकरु ताताआ उ वाटि। सीखयूःण। हा हाथाआ उ वाटि। ईखळाण। न त्वा व ज्रिकिच्न् सा ह स्रं सूचिर्याकिआ उ वाटि। आखनूण। हा हाथाआ उ वाटि। ईखळाण। ना जा त माकीष्ट रोताआ उ वाटि। दाखसीण। हा हाथाआ उ वाटि। ईखळाण ॥५६॥
॥ ह्रस्वाच बृहतोपशा ॥
य द्या व इ न्द्र तेकुशा त मेचिशा तं भू मिचीरू त स्योचिवाश। न त्वा व ज्रिकीच्न् सा ह स्रं सू र्याकुआ नूटा। ना जाचाता माचाष्टा रो दाटिसाखऔ हो वाशि। दी शंचावि शं हाशिस् । अ शा शि शु म तीकीच्। इ ट् इ ळाटिख् ॥५७॥
॥ पञ्चनिधनञ्चवैरूपम् ॥
य द्या व इ न्द्र तेकूच्शा त मेकिशा तं भू मिकीरू त स्यो वाकी। ओ वाटाहाटहाटओ वाटाहा उ वाति। न त्वा व ज्रिकीच्न् सा ह स्रंकिसू र्याकाअ नुटाख्। ओ वाटाहाटहाटओ वाटाहा उ वाति। ना जा त माकीष्टा रो द सीटीख्। ओ वाटाहाटहाटओ वाटाहा उ वाति। दी शंचावि शं हाचिस् । ओ वाटाहाटहाटओ वाटाहा उ वाति। अ श्वाटाशि शु म तीटीख्। ओ वाटाहाटहाटओ वाटाहा उ वाति। इ ट् ई ळाटिख् ॥५८॥
॥ षण्णिधनञ्च ॥
य द्या व इ न्द्र तेकूच्शा त मेचिशा तं भूचिमीशरू त स्योचिवाश। हाषबु हा बु हा उ वातू। न त्वा व ज्रिकीन् सा ह स्त्रं सू र्याकुआ नुचा। हाषबु हा बु हा उ वातू। ना जा त माकीष्ट रो द सीटी। हाषबु हा बु हा उ वातू। दी शंचावि शं हाचिस् । हाषबु हा बु हा उ वातू। अ श्वा शि शु म तीटू। हाषबु हा बु हा उ वातू। यू वाकाति श्च कु माकीरि णीचा। हाषबु हा बु हा उ वातू। इ ट् ई ळाटिख्स्वाःच। हाषबु हा बु हा उ वातू। इ ट् ई ळाटिख्ज्योचतिःश। हाषबु हा बु हा उ वातू। इ ट् ई ळाटिख् ॥५९॥
॥ सप्तनिधनञ्च ॥
य द्या व इ न्द्र तेकूच्शा त मेकिशा तं भू मीकीरू त स्योचिवाश। ओ हाटाहा बु हा बु हातुबुश। ओ हाटाहा उ वाति। न त्वा व ज्रिकीच्न् सा ह स्रंकिसू र्याकाअ नुचा। ओ हाणाओ हाका। ओ हाणाओ हाका। ओ हाणाओ हाका। हा उ वाति। ना जा त माकीष्टा रो द सीटी। ओ हाटाहा बु हा बु हातुबुशओ हाटाहा उ वाति। दी शंचावि शं हाशिस् । ओ हाणाओ हाका। ओ हाणाओ हाका। ओ हाणाओ हाका। हा उ वाति। अ श्वा शि शु म तीटी। ओ हाटाहा बु हा बु हातुबुशओ हाटाहा उ वाति। ईचळाश। ओ हाणाओ हाका। ओ हाणाओ हाका। ओ हाणाओ हाका। हा उ वाति। स्वाःच। ओ हाटाहा बु हा बु हातुबुशओ हाटाहा उ वाति। ज्योचतिःश। ओ हाणाओ हाका। ओ हाणाओ हाका। ओ हाणाओ हाका। हा उ वाति। इ ट् इ ळाटिख्। ओ हाटाहा बु हा बु हातुबुशओ हाटाहा उ वाति। हौतआतऊतईख ॥६०॥
॥ अष्टनिधनञ्च ॥
य द्या व इ न्द्र तेकूच्शा त मेचिशा तं भूचिमीशरू त स्योचिवाश। हा उ वोतिवाश। हा उ वोतिवाश। हु वे हाकिउ वोतिवाश। हु वे हाकिउ वोतिवाश। न त्वा व ज्रिकीच्न् सा ह स्रंकिसू र्याकाआचनूश। हा उ वोतिवाश। हा उ वोतिवाश। हा उ वोतिवाश। हु वे हाकिउ वोतिवाश। हु वे हाकिउ वोतिवाश। हु वे हाकिउ वोतिवाश। ना जा त माकीष्टा रो द सीटी। हा उ वोतिवाश। हा उ वोतिवाश। हा उ वोतिवाश। हा उ वोतिवाश। हु वे हाकिउ वोतिवाश। हु वे हाकिउ वोतिवाश। हु वे हाकिउ वोतिवाश। हु वे हाकिउ वोतिवाश। ना जा त म ष्ट रोकूद सा एकिहा या इ हीकी। ना जा त म ष्ट रोकूद सा एकिहा या इ हीकी। ना जा त म ष्ट रोकूद सा एकिहा या इ हीकी। ना जा त म ष्ट रोकूद सा एकिहा या इ हीकी। । हा उ वोतिवाश। हा उ वोतिवाश। हा उ वोतिवाश। हा उ वोतिवाश। हा उ वोतिवाश। हु वे हाकिउ वोतिवाश। हु वे हाकिउ वोतिवाश। हु वे हाकिउ वोतिवाश। हु वे हाकिउ वोतिवाश। हु वे हाकिउ वोतावाश। हैतहैतहैतहैतहैत। हो वाटाहो वाटाहो वाटा। हा उ वाति। ऊख ॥६१॥
॥ श्रीरूद्रम् ॥ (१२)
॥ वामदेव्यञ्च ॥
आ वो रा जाती। न म ध्वा र स्य रूखूद्रशम् । हो ताकराचम् । सषत्य य जं रो द सीखूयोःप्ल। अ ग्निंचापू राचात न इ त्नो रा चीखूक्ताशत् । हि रचाण्य रू पाटिम व सापिइ का र्णूखि। ध्वात्रम् ॥ ॥६२॥
॥ मार्गीयवञ्च ॥
त द्वौ हो वाती। गा याटासु ता इखिचाण। पु रू हूकितातच्या साकात्वायनाटइश। श य्य दो औकीहो इ गाखिवाणइश। नाटट्शाखऔ हो वाशि। एतच्कीटनेख ॥६३॥
॥ रौद्रेद्वे ॥
त द्वो गा याती। सु ताताइ स चातिपु रूटाहु ताखाहाशप्ल्हातइ याचास त्वाखानाणइश। शंकय त्गाटावेत। ना शौटाहौटच्हूकवोपबाप्लका इ नोप्लि। हा इशा ॥६४॥
त द्वो गा यषीसु ते सा चातीएत। पु रु हूकिता य स त्वा नेकुपु रूचाहू ताथायाचसायत्वाटनाखइ शं याफित्गौ वा उ वोखीवाण। नापशाशकाखइ नोप्ला। हा इशा ॥६५॥
॥ मार्गीयवञ्चैव ॥
त द्वौ गा यषीसु ते सा चातीएत। पू रू हुकिता य स त्व ना इषूशं य त्गाटिवेत। ऐचहाययाटऐ हिता। ना शा काटिट्इ नाखाऔ हो वाशि। ईख ॥६६॥
॥ रौद्राणि आजिदोहानि मारुतानि वा मऋतनिधनम् ई निधनं त्रीणिधनं ऐन्द्राणि वा प्राजापत्यानिवा ॥
हा बु हा बु हातुबुश। हिकञ्चोचहिकञ्चोचहिकञ्चोच। मूकर्द्धा न न्दा इ वोकुआकर ता ईं पृ थि व्याःकू। वैकश्वा न राकिमृषत आ जा ता म ग्निंकू। का विं स म्रा जकुमषधि ता इं ज ना नाकूम् । आकस न्ना पा त्रंकीज न य न्त दे वाःकू। हा बु हा बु हातुबुश। हिकञ्चोचहिकञ्चोचहिकञ्चोटहा उ वाति। एतर्तचम् ॥६७॥
हा बु हा बु हातुबुश। हि ञ्चिकादोचहि ञ्चिकादोचहि ञ्चिकादोच। मूकर्द्धा न न्दा इ वोकुआकर ता ईं पृ थि व्याःकू। वैकश्वा न राकिमृषत आ जा ता म ग्निंकू। का विं स म्रा जकुमाषति था इं ज ना नाकूम् । आकस न्ना पा त्रंकीज न य न्त दे वाःकू। हा बु हा बु हातुबुश। हि ञ्चिकादोचहि ञ्चिकादोच। हि ञ्चि दोटिहा उ वाति। ईख ॥६८॥
हा बु हा बु हा वा जि दो ह मा जिषैदो ह मा जि दो हातू। मूकर्द्धा न न्दा इ वोकुआकर ता ईं पृ थि व्याःकू। वैकश्वा न राकिमृषत आ जा ता म ग्निंकू। का विं स म्रा जकुमषधि ता इं ज ना नाकूम् । आकस न्ना पा त्रंकीज न य न्त दे वाःकू। हा बु हा बु हा वा जि दो ह मा जिषैदो हाकमाथजि दोटाहाखऔ हो वाशि। एतआ जि दोकिह मेकाआ जि दोकिह मेकाआटजि दोटाहाखम् ॥६९॥
॥ त्रिणीरेवस्यदेवस्यव्रताणि ॥
अ धी पाफिता इशामि त्रा पाफिता इशाक्ष त्रा पाफिता इशासु वाः पाफिता इशा। म न्यू नाणिवृ त्रा हाणिसू र्ये णाणिस्वा रा ड्य ज्ञे नाणु। म घ वाणिदशक्षी णा स्याणीप्रि या ताणिनू रणान्ये नाशाग याःणा। पृ थि व्याणिसृ णीफाक त्स मी त्याफीप र मेशिष्ठी राफाज्ञा वि श न्दा धा राफू। वृ षा भः स्व ष्टाणुवृ त्रेणाण शा चीणिपा ति र्व षा ट् काफुरे णा र्द्धाफिभाफक् । सो मे ना सोफीमा पाणाअ ग्नि नाणिवि श्वं भूणिताणम भ्य मा वोफीवा यू नाणिवि श्वाःणाप्रा जाणाअ भ्याणाप व थाःशि। ए दे वाफिदे वाकादि वि षाशिद स्थाफाते भ्यो वोफिदे वाणादे वे भ्योकिन मःटा। ए दे वाफिदे वाकाअ न्त रि क्षाशीद स्थाफाते भ्यो वोफिदे वा दे वेणीभ्योकन मःटा। ए दे वाफिदे वा पृ थि वि षाशूद स्थाफाते भ्यो वोफिदे वा दे वेणीभ्योकन मःटा। ए दे वाफिदे वा अ प्सु षाशुद स्थाफाते भ्यो वोफिदे वा दे वेणीभ्योकन मःटा। ए दे वाफिदे वा दि क्षु षाशुद स्थाफाते भ्यो वोफिदे वा दे वेणीभ्योकन मःटा। ए दे वाफिदे वा भू त साशुद स्थाफाते भ्यो वोफिदे वा दे वेणीभ्योकन मःटा। आ व ज्ज्या मी वाकुच्ध न्वि नोकिवि ते मकिन्न्यु न्न याकिम सीशामू ळाकाता न इ हाशी। अ स्म भ्या मि ळाटुच्भाकय इ दंकिवि श्वं भू तकीय्यु योताआ उ वाटि। नाखमाःण ॥७०॥
अ धी पाफिता इशामि त्रा पाफिता इशाक्ष त्रा पाफिता इशासु वाः पाफिता इशा। न मो नी षंफीगी भ्या श्चोफिप वीणाति भ्या च्छाफि। न मफाउ त्त ति भ्या श्चफुउ त्त न्वा ते भ्या श्चाफू। न मोफास्य त्भ्या च्छाफिप्र ति द धाशीने भ्या श्चाफि। न मः प्राफिवि द्व्य त्भ्या श्चाफीप्र व्या धिणिभ्या श्चाफा। ना मो धाफिव त्भ्या श्चाफिभी धा व त्भ्या श्चाफु। ना मोफाघ्न त्भ्या श्चाफिजी घां स त्भ्या च्छाफु। न मः श्रीफिते भ्या च्छाफिश्रा ये भ्या च्छाफी। आ व ज्ज्या मी वाकुच्ध न्वि नोकिवि ते मकिन्न्यु न्न याकिम सीशामू ळाकाता न इ हाशी। अ स्म भ्या मि ळाटुच्भाकय इ दंकिवि श्वं भू तकीय्यु योताआ उ वाटिनाखमाःण ॥७१॥
अ धी पाफिता इशामि त्रा पाफिता इशाक्ष त्रा पाफिता इशासु वाः पाफिता इशा। न मो न्ना याफीन मो न्न प त याफूए का क्षाणियाशवा प न्ना दाणीयाश। न म स्थि रा याफुस्थि र ध न्वा ने चाफू। न मः स्त्र्यं ब काफुय चशाक प र्दि ने चाफु। न म स्ति ष्ठा ते चाफूउ प ति ष्ठा ते चाफू। न म स्स य्य ते चाफूवि य ते चाफी। न म स्सं वृ ते चाफूवि वृ ते चाफी। न मः पा थे चाफुवी पा था या चाप्लू। आ व ज्ज्या मी वाकुच्ध न्वि नोकिवि ते मकिन्न्यु न्न याकिम सीशामू ळाकाता न इ हाशी। अ स्म भ्या मि ळाटुच्भाकय इ दंकिवि श्वं भू तकीय्यु योताआ उ वाटिनाखमाःण ॥७२॥
॥ प्राजापत्यङ्गायत्रम् ॥
त त्स वि तु व रेचूण्योंश। भ र्गोषादे व स्य धी मा हाटू। ईकधी यो यो नःटी। प्राषट्चा हिंचाभाट। ओसटवाचओसटवाचओसटवाच। हि म्भाटाओकवाच ॥७३॥
॥ चमकम् ॥ (८)
॥ वैश्वानर व्रतम् ॥
ओंकच्ओंकच्ओंकच्। आकयूचराकयूचराकयूच। र्ज्योकच्तिशर्ज्योकच्तिशर्ज्योकच्तिःश। ज्यो तोकावाच। ज्यो तोकावाच। ज्यो तोकावाच। ज्यो तो वा हाकीइश। ज्यो तो वा हाकीइश। ज्यो तो वाकिहायउ वाटा। इ ह स्व र्वै श्वाकुच्ना राचायशप्रा दि शोचिज्योकति र्बृ हाचित् । इ न्दुचारि ळाशास त्यंचास त्यंचास त्यचाम् । स त्योचावाश। स त्योचावाश। स त्योचावाश। स त्यो वा हाकीइश। स त्यो वा हाकीइश। स त्यो वाकिहायउ वाटा। इ ह स्व र्वै श्वाकुच्ना राचायशप्रा दि शोचिज्योकति र्बृ हाचित् । का य मा नो व नाचूतु वाचातु वाचातु वाचा। तू वोचावाश। तू वोचावाश। तू वोचावाश। तू वो वा हाकीइश। तू वो वा हाकीइश। तू वो वाकिहायउ वाटा। इ ह स्व र्वै श्वाकुच्ना राचायशप्रा दि शोचिज्योकति र्बृ हाचित् । द्यौ र्भूकातचम् । पृ थि वीचि। पृ थि वीचि। पृ थि वीचि। पृ थि व्योचिवाश। पृ थि व्योचिवाश। पृ थि व्योचिवाश। पृ थि व्यो वा हाकुइश। पृ थि व्यो वा हाकुइश। पृ थि व्यो वाकीहायउ वाटा। इ ह स्व र्वै श्वाकुच्ना राचायशप्रा दि शोचिज्योकति र्बृ हाचित् । य न्मा त्र र ज गचून पाचाअ पाचाअ पाचा। आ पोचावाश। आ पोचावाश। आ पोचावाश। आ पो वा हाकी। आ पो वा हाकी। आ पो वा हायीउ वाटा। इ ह स्व र्वै श्वाकुच्ना राचायशप्रा दि शोचिज्योकति र्बृ हाचित् । । स ह स्ते जा अ पाचाअ पाचाअ पाचा। आ पोचावाश। आ पोचावाश। आ पोचावाश। आ पो वा हाकी। आ पो वा हाकी। आ पो वा हायीउ वाटा। । इ ह स्व र्वै श्वाकुच्ना राचायशप्रा दि शोचिज्योकति र्बृ हाचित् । । न त क्ते अ ग्ने प्रषूमृ षे नि व र्त्त नाचून्त नाचान्त नाचाम् । ता नोचावाश। ता नोचावाश। ता नोचावाश। । ता नो वा हाकुइश। ता नो वा हाकुइश। ता नो वा हायीउ वाटा। । इ ह स्व र्वै श्वाकुच्ना राचायशप्रा दि शोचिज्योकति र्बृ हाचित् । । ऊ षा दी शोकीज्यो ति र्ज्यो ति र्ज्यो तिः । ज्यो तोचावाशज्यो तोचावाशज्यो तोचावाश। ज्यो तो वा हाकीइश। ज्यो तो वा हाकीइश। ज्यो तो वा हायीउ वाटा। । इ ह स्व र्वै श्वाकुच्ना राचायशप्रा दि शोचिज्योकति र्बृ हाचित् । य द्दू रे स न्नि हाचुभु वाचाभु वाचाभु वाचा। भू वोचावाशभू वोचावाश। भू वोचावाश। भू वो वा हाकीइश। भू वो वा हाकीइश। भू वो वा हायीउ वाटा। । इ ह स्व र्वै श्वाकुच्ना राचायशप्रा दि शोचिज्योकति र्बृ हाचित् । ओंकच्ओंकच्ओंकच्। आकयूचराकयूचराकयूच। र्ज्योकच्तिशर्ज्योकच्तिशर्ज्योकच्तिःश। ज्यो तोकावाचज्यो तोकावाचज्यो तोकावाच। ज्यो तो वा हाकीइशज्यो तो वा हाकीइश। ज्यो तो वाकिहायउ वाटा। घकर्मो मा रू त्भीकीर्भु व ना नि चाकुक्र दशात् । इ ट् इ ळाटिख्। । ७१ । ।
॥ पञ्चनिधनञ्चवामदेव्यम् ॥
हो वाकाहाखइश। हा बु हा बु हातुबुश। ए हि या हाकीबुश। ए हि या हाकीबुश। ए हि याटिहाखऔ हो वाशि। इ हाचाप्रा जाचामी हाचारा यींचार रा णोकिहाचस् । हो वाकाहाखइश। हा बु हा बु हातुबुश। ए हि या हाकीबुश। ए हि या हाकीबुश। ए हि या हाकीबुश। काषया न श्चा इ त्र याटूभूखवाणत्श। हो वाकाहाखइश। हा बु हा बु हातुबुश। ए हि या हाकीबुश। ए हि या हाकीबुश। ए हि याटिहाखऔ हो वाशि। राथय स्पो षाचियाशसु कृ ताचिय भू य सेकीहाचस् । हो वाकाहाखइश। हा बु हा बु हातुबुश। ए हि या हाकीबुश। ए हि या हाकीबुश। ए हि या हाकीबुश। उ ता इ स्स दा वाटूर्ध स्साखाखाण। हो वाकाहाखइश। हा बु हा बु हातुबुश। ए हि या हाकीबुश। ए हि या हाकीबुश। ए हि याटिहाखऔ हो वाशि। आ ग न्वाकिम मि दंकिबृ ह द्धाचिस्श। हो वाकाहाखइश। हा बु हा बु हातुबुश। ए हि या हाकीबुश। ए हि या हाकीबुश। ए हि या हाकीबुश। का या श ची ष्ठ याटूवाखर्त्ताःण। हो वाकाहाखइश। हा बु हा बु हातुबुश। ए हि या हाकीबुश। ए हि या हाकीबुश। ए हि याटिहाखऔ हो वाशि। ई दं वाकिम मि दंकिबृ ह द्धाचिस्श। हो वाकाहाखइश। हा बु हा बु हातुबुश। ए हि या हाकीबुश। ए हि या हाकीबुश। ए हि या हाकीबुश। काषया श चा इ ष्ठ याटूवाखर्त्ताःण। हो वाकाहाखइश। हा बु हा बु हातुबुश। ए हि या हाकीबुश। ए हि या हाकीबुश। ए हि याटिहाखऔ हो वाशि। च राकाचा रा यचिबृ ह ताचिई दं वाचिम मि दंकिबृ ह द्धाचिस्श ॥७४॥
॥ सर्पसाम ॥
वि हाकायाचबुश। वि हाकायाचबुश। वि हाकायाचबुश। वि हाकायौच। वि हाकायौच। वि हाकायौच। का या ना श्चीचीत्रा आकाभूयवाटत् । ऊ ती स्सा दाचीवृ धाकास्सायखाट। क या श चीचीष्ठा याकावायर्त्ताःट। वि हाकायाचबुश। वि हाकायाचबुश। वि हाकायाचबुश। वि हाकायौच। वि हाकायौच। वि हाटायाखऔ हो वाशि। स य्य तकिन व्या य मकीन्या य तकिन स य्य मकीन्ये के चो द राकुस र्पि णाःटिख्। ते भ्योथान माःटाख् ॥७५॥
॥ स्वर्ज्योतिषी ॥
हा बु हा बु हातुबुश। स्व र्वि श्वंकि। स्व र्वि श्वंकि। स्व र्वि श्वाकिम रू रू चाकीद रु रू चाकीद रु रू चाकी। दूकष सः प्र श्नि राटुग्राचयुःश। उ क्षा मि माकी। उ क्षा मि माकी। उ क्षाषामि मा ति भु व नाकूइ षु वाटिजाचयुःश। मा या वि नोकी। मा या वि नोकी। माषया वि नो म मि रेकूय स्य माटियाचयाश। नृ चा क्ष सोकी। नृ चा क्ष सोकी। नृषच क्ष सः पि त रोकूग र्भ माटिदाचधुः । हा बु हा बु हातुबुश। स्व र्वि श्वंकि। स्व र्वि श्वंकि। सु वाटार्वि श्वाकाउ वाता। एतसु वाःटाख् ॥७६॥
। हा बु हा बु हातुबुश। ज्यो ति र्वि श्वंकी। ज्यो ति र्वि श्वंकी। ज्यो ति र्वीचिश्वाकम रू रू चाकीद रु रू चाकीद रु रू चाकी। दूकष सः प्र श्नि राटुग्राखयुःण। उ क्षा मि माकी। उ क्षा मि माकी। उ क्षाषामि मा ति भु व नाकूइ षु वाटिजाखयुःण। मा या वि नोकी। मा या वि नोकी। माषया वि नो म मि रेकूय स्य माटियाखयाण। नृ चा क्ष सोकी। नृ चा क्ष सोकी। नृषच क्ष सः पि त रोकूग र्भ माटिदाखधुःण। हा बु हा बु हातुबुश। ज्यो ति र्वि श्वंकी। ज्यो ति र्वि श्वंकी। ज्यो ताटाइ र्वि श्वाकिउ वाता। एतच्ज्योटतीःख ॥७७॥
उ द्य न्लोकिका न रो च योकुहो इ मा न्लोकीका न रो च योकुहो इ दि वं सूकुर्य म रो च योकु। हो इ वि श्वं भूकुत म रो च योकुहोटहाखओ हो वाशि। घकर्मो रोटाचीःख ॥७८॥
स्व यंचास्कु न्वाटाइश। स्व यंचास्कु न्वाटाइश। स्व यंचास्कु न्वाखाओ हो वाशि। एतस्कु न्व एकिस्कु न्व एकिस्कु न्वाखाइश ॥७९॥
॥ प्राजापत्यङ्गायत्रम् ॥
त त्स वि तु व रेचूण्योंश। भ र्गोषादे व स्य धी मा हाटू। ईकधी यो यो नःटी। प्राषट्चा हिंचाभाट। ओसटवाचओसटवाचओसटवाच। हि म्भाटाओकवाच ॥८०॥
॥ दुर्गासूक्तम् ॥ (९)
॥ शैखण्डिनेद्वे ॥
श्र क्तेताहोतइश। द धाटाहोतमि प्र थ माटीय माकान्यायवाटइशन्या वाटाइश। अ हतान्होतइश। य द दाटिहोत। स्यु न्न र्यंटिवि वेचारायपाटआ पाःटा। उ भेताहोतइश। य त्वाटाहोतरो द सीटिधा व ताकिमायनूटआ नूटा। भ्य साताद्धोतइश। ते शुकाहोथच्ष्माकत् । पृ थि वीटिची दाचाद्रीयवोटद्री वाःटा। द्रीटट्। वाखऔ हो वाशि। हाकहा उ वाति। ईख ॥८१॥
श्र क्ताताइश। द धाथाच्मि प्र थ माटीय माकान्यायवाटइशन्या वाटाइश। अ हकान्न्य द दाथिच्स्यु न्न र्यंटिवी वेकारायपाटआ पाःटा। उ भाताइशय त्वाथारो द सीटिधा व ताकिमायनुटआ नुटा। भ्य साताक्ते शुथाच्ष्माकत्पृ थि वीटिची दाचाद्रीयवोटद्री वाःटा। द्री वाकाएखहि याप्लाहाश। होप्लइ ळाशा ॥८२॥
॥ अत्रेर्विवर्तौ द्वौ ॥
आ योचावाटआ या योचिवाट। श्रापक्ता इशा। दाखधाण। मि प्र थ माटीय माकान्यायवाटइशन्या वाटाइश। आ योचावाटआ या योचिवाट। आपहशन्न्याखद दाण। स्यु न्न र्यंटिवि वेचारायपाटआ पाःटा। आ योचावाटआ या योचिवाट। ऊपभा इशायाखत्वाण। रो द सीटिधा व ताकिमायनुटआ नूटा। आ योचावाटआ या योचिवाट। भ्यापसाशक्ताखइ शूणा। ष्माकत्पृ थि वीटिची दाचाद्रीयवोटद्री वाःटा। द्रीटट्वाखऔ हो वाशि। हातहा उ वाति। द्रि व औचिहोटहतच्म् ॥८३॥
ई योचावाटई या योचिवाट। श्रापक्ता इशा। दाखधाण। मि प्र थ माटीय माकान्यायवाटइशन्या वाटाइश। ई योचावाटई या योचिवाट। आपहशन्याखद दाणा। स्यु न्न र्यंटिवी वेचारायपाटआ पाःटा। ई योचावाटई या योचिवाट। ऊपभा इशायाखत्वाणरो द सीटिधा व ताकिमायनूटआ नूटा। ई योचावाटई या योचिवाट। भ्यापसाशक्ताखइ शूणा। ष्माकत्पृ थि वीटिची दाचाद्रीयवोटद्री वाःटा। द्रीटट्वाखऔ हो वाशि। हातहा उ वाति। द्री व ईचियोटहतच्म् ॥८४॥
॥ महासावेदसे द्वे ॥
आतयातम् । श्रापक्ता इशा। दाखधाण। मि प्र थ माटीय माकान्यायवाटइशन्या वाटाइश। आतयातम् । आपहशन्याखद दाणा। स्यु न्न र्यंटिवी वेचारायपाटआ पाःटा। आतयातम् । ऊपभा इशायाखत्वाण। रो द सीटिधा व ताकिमायनूटआ नूटा। आतयातम् । । भ्यापसाशक्ताखइ शूणा। ष्माकत्पृ थि वीटिची दाचाद्रीयवोटद्री वाःटा। द्रीटट् खऔ हो वाशि। हातहा उ वाति। द्रि वोचाद्रीटवाःख ॥८५॥
अ य य्याःति। श्र क्ताचाइशा। द धाथाच्। मि प्र थ माटीय माकान्यायवाटइशन्या वाटाइश। अ य य्याःति। अ हचान्या द दाथिस्यु न्न र्यंटिवी वेचारायपाटआ पाःटा। अ य य्याःति। उ भाचाइशय त्वाथाच्रो द सीटिधा व ताकिमायनूटआ नूटा। अ य य्याःति। भ्य साचाक्ते शुथाच्ष्माकत्पृ थि वीटिची दाचाद्रीयवोटद्री वाःटा। द्रीटट्वाखऔ हो वाशि। हातहा उ वाति। द्री वाटाईख ॥८६॥
॥ शैरिषे द्वे ॥
औ होताहोतहातइश। श्राखक्ता इशा। दा धाफामि प्र था माफीय म न्याखिवेशय म न्याखिवाणइश। अ हणान्न्या द दाफिस्यु न्न र्यंफिवी वे राखिपोशवी वे राखिपाःण। उ भाणाइ या त्वाफिरो द सी धाफीव ता माखिनूशव ता माखिनूण। भ्य साणाक्ता इ शूफिष्मा त्पॄ थी वीफीची दा द्रीखिवोशचि द्र द्राखिइ वाःणा। द्रीटट्वाखऔ हो वाशि। हाकहा उ वाति। एतद्री वाकाईटहाख ॥८७॥
श्र क्ता औटिहोतहोतहातइश। द धाथाच्मि प्र थ माटीय माकान्यायवाटइशन्या वाटाइश। अ हा औटिहोतहोतहातइश। य द दाथिच्स्यु न्न र्यंटिवी वेचारायपाटआ पाःट। उ भा औटिहोतहोतहातइश। य त्वाथाच्रो द सीटिधा व ताकिमायनूटआ नूटा। भ्य सा औटिहोतहोतहातइश। ता इ शूथिच्ष्माकत्पॄ थी वीटिची दाचाद्रीयवोटद्री वाःटा। द्रीटट्वाखऔ हो वाशि। हाकहा उ वाति। द्री व एचिद्री वाःटाख् ॥८८॥
॥ शौक्तसामानि ॥
इ दा मीखिदंशई दाचामि द क मी दा मीखूदशम् । उ प ह्वा रेचीगी राचाइ णांटाइ दा मीखिदंश। ई दाचामि द क मी दा मीखूदशम् । सं ग मे चाचीना दा ई नाटीम् इ दा मीखिदंश। ई दाचामि द क मी दा मीखूदशम् । धि याटावि प्रोकाच्आ जाकाया ताकाइ दा मीखिदंश। ई दाचामि द क मि दा माखूइ दात्राम् । गोचष्पा देचाप्रशट् ॥८९॥
॥ स्कन्दसूक्तम् ॥ (११)
॥ वाम्राणि त्रिणी ॥
आ म न्द्रै रातीइ न्द्र ह रि भातुइःश। याकही म यूकिच्राकरोकमा भापाइशर्म्मा त्वा काकिइ चीशात् । नी ये मूखिर्वीश। नाकपा शि नोचिती ध न्वेटिच्वाकतंटआटइ हाखाऔ हो वाशि। वाखयाःप्ल ॥९०॥
आ म न्द्रै रि न्द्र हातूरि भाताइःश। याकही म यूचिराकरो म भाषिइ र्म्मा त्वा काटीइ चीतात् । नी येकामु र्वीकान्नाकपा शाटाइ नाःता। आ ता इ धाटीन्वेतच्। वाकतंटआटइ हाखाऔ हो वाशि। व योताभीःख ॥९१॥
आ म न्द्रै रि न्द्र हातूरी भीःता। याकहि म यूचिराकरो म भी रा उ वाशू। मा त्वाटाच्केकचि न्नि ये मु र्विकुन्ना पा शि नो उ वाटू। आ तीटाध न्वेचाव तंताआ उ वाटि। ईखहिश ॥९२॥
॥ शौक्तानि त्रिणी शुक्लानिवा आश्वानिवा ॥
आ न ए वि श्वातु। सु हाटाओ व्याटाम् । आ इ न्द्रं स मा त्सूकूभू षा ताकिऊखपाशप्ल्हातहातइश। ब्र ह्माकाणी स व नाचीनी वृ त्र हाचीन्पाकरा माटाज्याःत। आ र्चाटाहातइशषाकमा औटाहोखबाप्ल। होप्लइ ळाशा ॥९३॥
आ नो वि श्वा सु हातूहातव्यातम् । इकन्द्रं स मा त्सूकीभू षा ताकिऊ प ब्राटिह्मात। णी स व नाचीनि वृ त्र हाचीन्पाकर माटाज्याःत। आ र्चाटाहातइशषाकमा औटाहोखबाप्ल। होप्लइ ळाशा ॥९४॥
आ नो वि श्वा सु हातूव्यातम् । इ न्द्रं स मा त्सुषुभु षा ताचिऊ पाकाब्रायह्माट। णी स व ना निषुवृ त्र हाचिन्पा राकामायज्याःट। ऋ चि षाटिमाखण्। ओपइ ळाशा ॥९५॥
॥ कूत्सस्याधि रथ्यानि त्रिणी ॥
होखवाशउ हु वा होखिवाण। प्रा से नाकिना इ श्शू रोटिअ ग्रा इ र थाखुनाशम् । ग व्य न्नेकिता इ ह र्षा तेटुआ स्य सेखिनाश। भा द्रा न्कृकिण्व न्नि न्द्रा हाकीवा न्सा खीखिभ्याःप्ल। आ सो मोकिवा स्त्राटार भ साकिनि दाखाक्तात्रइश। होखवाशउ हु वा होखीवा हाप्लाबुश। बाश ॥९६॥
औ होफाओतवात। प्रा से नाकिना इ श्शू रोटीअ ग्रा इ र थाखुनाशम । ग व्य न्नेकिता इ ह र्षा तेटुआ स्य सेखिनाश। भा द्रा न्कृकिण्व न्नि न्द रा हाकीवा न्सा खीखिभ्याःप्ल। औ होफाओतवात। आ सो मोकिवा स्त्राटार भ सापिनि दाखा। क्तात्रइश ॥९७॥
ओ होफाओतवात। प्राकसे नाथाना इ श्शू रोटीअ ग्रा इ रा थाखुनाशम । गकव्य न्नेथाता इ ह र्षा तेटुआ स्य सेखिनाश। भाकद्रा न्कृथाण्व न्नि न्द्रा हाटीवा न्सा खीखिभ्याःप्ल। ओ होफाओतवात। आकसो मोथावा स्त्राटार भ सापिनि दाखाणफप्ल। क्ताखइश ॥९८॥
॥ आदित्यस्यार्क पूष्पेद्वे देवानांवा ॥
पा वि त्र न्तेकीवि त तंकिब्र ह्म ण स्प तेकुहु वेटाहु वेटाहो वाटाहातहातइश। प्रा भु र्गा त्राटीच्णीकप र्येटाषी वि श्व ताचीहु वेटाहु वेटाहो वाटाहातहातइश। अ त प्त त नूकुर्न्न त दाकिमो अ श्नु तेकीहु वेटाहु वेटाहो वाटाहातहातइश। श्र ताकास इ द्व हकीन्त स्स न्त दा श ताकूहु वेटाहु वेटाहो वाटाहातहाखऔ हो वाशि। अ र्को देटिवा नांटाप रा मेचिव्योटमाखन् ॥९९॥
पा वि त्र न्तेकीवि त तंकिब्र ह्म ण स्प तेकीच्हू वाकाऔटहो वाटा। प्रा भु र्गा त्राकीणी प र्येकिषी वि श्व तोकीच्हू वाकाऔटहो वाटा। अ त प्त त नुकुर्न्न त दाकिमो अ श्नु तेकीच्हू वाकाऔटहो वाटा। श्र ता स इ द्व हकून्त स्स न्त दा श ताकूहू वा औटिहोटवाखऔ हो वाशि। अ र्क स्य देकिवाःकच्प रा मेचिव्योटमाखन् ॥१००॥
॥ रात्री सूक्तम् ॥ (१)
॥ अहोरात्रयोर्व्रतम् ॥
होटवा इ होटिवा इ होटिवा इशा। आ प्रा गाकित्भ द्राकायु वा तीकिर्होटवा इ होटिवा इ होटिवा इशा। अ न्हः के तुकीन्स मी प्स तीकीर्होटवा इ होटिवा इ होटिवा इशा। अ भूकात्भ द्राकानि वेकाश नीकार्होटवा इ होटिवा इ होटिवा इशा। वि श्वा स्याकिज ग तोकिरा त्रिकाहोंटवा इ होटिवा इ होटिवाखओ हो वाशि। ईख ॥१०१॥
॥ ब्रह्माविष्णुरूद्र सूक्तम् ॥ (३)
॥ ऋतुसामनिच ॥
ब्र ह्मा ब्राटिह्मात। ज ज्ञा नंचिप्रा था मंकिपु रा स्ताभित् । वी सा इ वाटिइ सीता। म त स्सु रूकीचो वेथान आ वाभित् । सा बू साटिबूत। ध्न्या उ पाचिमाकआटस्य वा इ ष्ठाःभी। सा ता स्साटिताःत। च यो नी मा साचुता श्च वाकिइ वाःपाण्। ओपइ ळाप्ला ॥१०२॥
॥ विष्णोश्चसाम ॥
इ दा मेति। वि ष्णूटार्वि चा क्राखिमाणइश। त्रा इ धाचिनि दकाधाचइ पायादांटस मूटाहोयढाटमात। स्याटपाखऔ हो वाशि। एंतसू लेताच् ॥१०३॥
॥ अग्नेश्च रथन्तरंवसिठस्यवा ॥
ओ भि त्वा शू र नोकूनू मोचावाश। आ दु ग्धा इ व धे न व ई शाषैन म स्य ज ग ताकूस्सु वाटादृ शाताम् । ईकशा न मापिइ न्द्राशा। ता स्थूटाटट्षा ओ वाचिहा उ वाकि। आचस् ॥१०४॥
॥ वास्तुसूक्तम् ॥ (२)
॥ कावर्षेद्वे ॥
वा स्तो ष्प तातीइश। ध्रू वा स्थू णाटीउ वोखावाश। अं स त्रंकिच्सोकम्या नाटाम् । द्र प्सः पु रां भे क्ताषूश श्व ताटिइ ना माखिइ न्द्राःणा। मू नी नांकिआ उ वाटि। साखखाश ॥१०५॥
वा स्तो ष्प ते ध्रू वाफूस्थूतणांपस त्रं सोप्लिम्याङनाशम् । द्र प्सः पु रां भे क्ताषूश श्व ताटिइ नाताम् । आटइ न्द्राःता। मू नीटानाखणफप्ल्म् ॥१०६॥
॥ घृत सूक्तम् ॥ (२)
॥ घृताचेराङ्गिरसस्यसामनीद्वे ॥
प्र स म्म्रा जातीम् । आ सु र स्य प्रा शाखूस्तशम् । पुं सः कृ ष्टा इ नाटूमा नु माकिदी याखास्याश। इ न्द्र स्ये वाखीप्रा ता वा सः कृ ताखूनिश। व न्दचाद्वी राथाव न्दचामा नाथावि वाटाष्टूखऔ हो वाशि। दीखश आःप्ला ॥१०७॥
अ र ण्योःति। नि हि तो जाखीत वेखादाःप्ल। ग र्भ इ वेषीत्सु भृ तो गफुर्भि णाखाइ भीःप्ला। दी वे दी वषीई ढ्यो जाकिगृ वाटात्भीःत। हाखवीप्लष्माखत्भीःण। म नु ष्ये भी र ग्निषूरे हि या हाप्लू। होप्लइ ळाशा ॥१०८॥
॥
॥ अन्नसूक्तम ॥ (१)
॥ दिशाञ्चदशानुगानम् ॥
हा बु हा बु हातुबुश। अ हचाम न्नकाम हचाम न्नकाम हचाम न्नाका। दोचह म न्नाकिदोचह म न्नाकिदोचह म न्नाकि। दोचअ हं वि धाकीर योचाअ हं वि धाकीर योचाअ हं वि धाकीर याःचा। हा बु हा बु हातुबुश। य द्व र्चोकिहि र ण्या स्याकी। य द्वाचाव र्चोकाग वाकामु ताचा। स त्या स्याकिब्र ह्म णोकिव र्च्चाःचा। ते न माकिसं सृ जाकिम साचाइश। हा बु हा बु हातुबुश। अ हचाम न्नकाम हचाम न्नकाम हचाम न्नाका। दोचह म न्नाकिदोचह म न्नाकिदोचह म न्नाकि। दोचअ हं वि धाकीर योचाअ हं वि धाकीर योचाअ हं वि धाकीर याःचा। । हाषबु हा बु हा उ वातू। एतच्अ ह मचिन्न म ह म न्ना दोकूअ हंचावि धाकीर याःकाएतच्अ ह मचिन्न म ह म न्ना दोकूअ हंचावि धाकीर याःका। एतच्अ ह मचिन्न म ह म न्ना दोकूअ हंचावि धाकीर याःका। एतआ हंकाच्स्व र्ज्योटातीःख ॥१०९॥
॥ आयूष्यसूक्तम् ॥ (१५)
॥ शेनञ्च ॥
अ बो धि याती। ग्ना इ स्स मी धाकुज नाभानातम् । प्र ता इ धेभीनूतम् । इ वाकाया तीचामूकषा संथाय ह्वा ईभिवात। प्र व या मु ज्जिचुहा नाःथाप्र भा न्नाभिवाःत। स स्रा तेकिना काकामाचच्छा इ ळाटिभाखण्। ओपइ ळाशा ॥११०॥
॥ पाष्ठौहेच ॥
म हा इ त्राखीइ णणाम् । आ वाटार स्तु द्यु क्षाकीर्माखइ त्राणा। स्याटर्य म्नाटादु राकाधाखर्षणम् । वाकरोपबाप्लणा स्योप्ला। हा इशा ॥१११॥
म हि त्री णाषीम व र स्तुतीएत। द्यु क्ष र्म्मि त्रषीस्या र्य म्णाकिदु रा धाटिर्षातम् । वा रौ हो वाकीहि म्माटाणा स्योटाट्याखऔ हो वाशि। हातओ वाटाओ वाटाख् ॥११२॥
॥ साकमश्वं धुरांवासाम ॥
त्वा वा तोकिहा बु होकिओचइश। पु रो व सोकीहा बु होकिओचइश। वा य मि न्द्राकीहा बु होकिओचइश। प्र णे त ॠकीहा बु होकिओचइश। स्म सि स्था त ॠकुहा बु होकिओचइश। हा री णांकिहा बु होकि। ओपइ ळाशा ॥११३॥
॥ वैदन्वतञ्च ॥
इ न्द्र न्नाखिरोशने मा धाखिइ ताणा। हा व न्ताटिइ य त्पा राखीयाशयू ना जाखिन्ताणइश। थि या स्ताटिशू रो नाखि र्षाशता श्रा वाखिसाःण। चा का माटिइ या गो माखीतिशव्र जा इ भाखीजाण। तू व न्नाटिउ वाता। एतऊ पाटाख् ॥११४॥
॥ आदित्यासामनी द्वे तार्क्षसामनीद्वे ॥
त्य मू षूखिवा जि नाखिन्देखव जूखातशम् । स होकावा नथान्ता रू ताकिरं र थाखिनाशम् । अ रि ष्ट नाखीइ मींशापृ त नाखिज माखाशूशम् । स्व स्त या इ ताकुर्क्ष मि हाखिहू वाखाइश। मात्रम् ॥११५॥
इ य इ यातीहा इ त्य मु षुषुवा जि नाखिन्देखव जूखातशम् । ई याफाई याफाआप्लहातइश। स होकावा नथान्ता रू ताकिरं र थाखिनाशम् । इ य इ यातीआकरि ष्ट ना इ मिंटुपा र्ता नाकिज माखाशूशम् । ई याफाई याफाआप्लहातइश। स्व स्त या इ ताकुर्क्ष मि हाखिहू वाखाइश। मात्र ॥११६॥
॥ इन्द्रस्यच त्रातम् ॥
त्राकता र मि न्द्रषीम वि ताकिरा मीटान्द्रातम् । हा वे ह वे सूषुहा वं शुकिरा मीटान्द्रातम् । हू वा इ नु श क्रंषूपु रू हूकिता मीटा न्द्रातम् । ई दंथाहा वाचाइशमा घ वा वापीइ तू वाखिइश। न्द्राःत्र ॥११७॥
॥ आतीषातीयम् ॥
सो माःचापूकनाफप्ल्ओ न ऊखिर्म्मि णा एप्लि। अ व्यं वा रं वि धायूवापतीश। अ ग्रे वाखिणफप्ल्चाःतच्पाकव माटानाःत। काटट्नाखऔ हो वाशि। क्र द देखि ॥११८॥
॥ दीर्घे द्वे ॥
सा सूता। न्वे योकावा सूटानातम् । यो राटाया मा नेचिताथया इ ळाटिनातम् । सोटमाःत। या स्सूकाक्षी तापाआ इ नांप्लि। हा इशा ॥११९॥
स सु हातिबुश। न्वे यो वा सू नांटुहातबुश। यो राचाया मा नेचिताथया इ ळा नांटीहातबुश। सो मो या स्सूटीहातबुश। क्षि तीकाना मौपाहो बाप्ला। होप्लइ ळाशा ॥१२०॥
॥ आयूर्नवस्स्तोभे ॥
वि श्व तोचिदा वशान्वि श्व तोचिनाचआश। भ रा उ वोतिवाश। भ रा उ वोतिवाश। भ रा उ वोतिवाश। हा उ वोतिवाश। हा उ वोतिवाश। हा उ वोतिवाश। हा ओटावाच। हा ओटावाच। हा ओटावाच। वि श्व तो दाचीवशन्वि श्व तोचिना आचाभ राशा। भ रा उ वोतिवाश। भ रा उ वोतिवाश। भ रा उ वोतिवाश। हा उ वोतिवाश। हा उ वोतिवाश। हा उ वोतिवाश। हा ओटावाच। हा ओटावाच। हा ओटावाच। य न्त्वा श वीकीष्ठा मीकाम हेचा। म हा उ वोतिवाश। म हा उ वोतिवाश। म हा उ वोतिवाश। हा उ वोतिवाश। हा उ वोतिवाश। हा उ वोतिवाश। हा ओटावाच। हा ओटावाच। हा ओटावाच। आ यूःटा। आ या उ वोतिवाश। आ या उ वोतिवाश। आ या उ वोतिवाश। हा उ वोतिवाश। हा उ वोतिवाश। हा उ वोतिवाश। हा ओटावाच। हा ओटावाच। हा ओटावाच। सू वाःटा। सू वा उ वोतिवाश। सू वा उ वोतिवाश। सू वा उ वोतिवाश। हा उ वोतिवाश। हा उ वोतिवाश। हा ओटावाच। हा ओटावाच। हा ओटावाच। ज्यो तीःटा। ज्यो ता उ वोतिवाश। ज्यो ता उ वोतिवाश। ज्यो ता उ वोतिवाश। हा उ वोतिवाश। हा उ वोतिवाश। हा उ वोतिवाश। हा ओटावाच। हा ओटावाच। हा ओटावाटहा उ वाति। इ ट् इ ळाटिख् ॥१२१॥
हाषबु हा बु हा उ वातू। वि श्व तो दातीवशन्वि श्व तोचिना आचाभ राशा। हाषबु हा बु हा उ वातू। य न्त्वाचाश वीकाष्ठा मीचाम हेशा। हाषबु हा बु हा उ वातू। ई ळाटा। हाषबु हा बु हा उ वातू। सू वाःटा। हाषबु हा बु हा उ वातू। ज्यो तीःटा। हाषबु हा बु हा उ वातू। ईख ॥१२२॥
॥ वरूणस्यार्कः ॥
हा बु हा बु हातुबुश। आ यु श्च क्षु श्रो त्रंषूज्यो ति रौ हो वाकुईटयात। उ दु त्त मंषीव रु ण पा श माटूस्मातत् । आ बा ध मंषीवि म ध्य मं श्न थाटूयात। आ था दि त्यषीव्र ते व य न्ताटुवात। आ ना ग सो अ दि त ये स्याटमात। हा बु हा बु हातुबुश। आ युः च क्षु श्रो त्रं ज्यो ति रौ हो वाकीईटयाखऔ हो वाशि। ईख ॥१२३॥
॥ प्राजापत्यङ्गायत्रम् ॥
त त्स वि तु व रेचूण्योंश। भ र्गोषादे व स्य धी मा हाटू। ईकधी यो यो नःटी। प्राषट्चा हिंचाभाट। ओसटवाचओसटवाचओसटवाच। हि म्भाटाओकवाच ॥१२४॥
॥ अष्टदिक्पाल सामानी ॥ (९)
॥ इन्द्रस्यच त्रातम् ॥
त्राकता र मि न्द्रषीम वि ताकिरा मीटान्द्रातम् । हा वे ह वे सूषुहा वं शुकिरा मीटान्द्रातम् । हू वा इ नु श क्रंषूपु रू हूकिता मीटा न्द्रातम् । ई दंथाहा वाचाइशमा घ वा वापीइ तू वाखिइश। न्द्राःत्र ॥१२५॥
॥ इहवद्वामदेव्यंत्रृतीयम् ॥
अ ग्नि स्ति ग्मेषीन शो चि षा इ हातू। यं स द्वि श्वषीन्न्य त्री णाटिमि हाता। अ ग्नि र्नो वं स ताटूइ हाता। रापआ या इंप्लि। हा इशा ॥१२६॥
॥ यमव्रतम् ॥
म नो हा बुषीव यो हा बु व र्चोतूहातबुश। अ ग्नी मी ळाभीइ पु रो हाखीइ तणाम् । ई ह हाषिवी ळा हा वा यूतुहातबुश। य ज्ञ स्य दाटीइ व मृ त्वीखीजणम् । ऋ तं हा बुषीस्व र्हा बु ज्यो तीतुर्हातबुश। हो ता रं राटीत्ना धा ताखिमात्र। एतमा हाःटाख् ॥१२७॥
॥ भारद्वाजस्यश्यून्ध्यू ॥
वे त्था हिषिनि ॠ ती नांती। वा ज्र हा स्ताकीपा रीकाव्र जा माकिहा राकाहा शुकान्ध्युः पा रीकिप दाटामाख। इ वात्रा ॥१२८॥
॥ वरूणसामच ॥
ऋ जु नी ती नोषुव रू ण इ हातु। मि त्रोचाना याचाती वि द्वांटिसा इ हाति। अ र्याथामा दाटाइ वा इ हाती। सा जो षाटिउ वाता। ईखहाश ॥१२९॥
॥ वसिठस्यजनित्रे द्वे ॥
पा वाता। मा नो अ जीकीजाखनाणत् । दी वाचाश्चि त्राचान्न्य ता न्य तूशीम् । ज्यो ती र्वैकिश्वा नाटाराखऔ हो वाशि। बृखहाशत् ॥१३०॥
प व मा नाःती। अ जा इ जापीनाशत् । दी वाचाश्चि त्रांटाहातहातइशना तकान्याखतूणम् । ज्योखतीशर्वाखइ श्वाणा। न रोप्लाबा बृ हाप्लित् । हा इशा ॥१३१॥
॥ कृष्णस्यचाङ्गिरसस्य व्रतम् ॥
सो माचास्सो माथासो माचास्सो माथासो माचास्सो माःथा। यषत्र च क्षु स्त दा भायुराट। यषत्र श्रो त्रं त दा भायूराट। यषत्र रू प न्त दा भायूराट। यषत्र आ यु स्त दा भायूराट। यषत्र व र्च स्त दा भायूराट। यषत्र ते ज स्त दा भायूराट। यषत्र ज्यो ति स्त दा भायूराट। सो माचास्सो माथासो माचास्सो माथासो माचारा जथान्होटहाखओ हो वाशि। इ ट् इ ळाटिख् ॥१३२॥
॥ वाचोव्रतम् ॥
हा बु हा बु हातुबुश। सो मो वाकियाचबुशश सो मो वाकियाचबुश। सो मो वाकियाचबुश। वा यो राकिजाच। न्वा यो राकिजाचन्वा यो राकिजाचन् । रा ज न्वाकियाचबुशरा ज न्वाकियाचबुशरा ज न्वाकियाचबुश। भू य मा नाकीय वाचाया वाचाइश। पू य मा नाकीय वाचाया वाचाइश। इ न्द्रो वाकियूचस म स्व राचीन् । हा बु हा बु हातुबुश। सो मो वाकियाचबुश। सो मो वाकियाचबुश। सो मो वाकियाचबुश। वा यो राकिजाच। न्वा यो राकिजाच। न्वा यो राकिजाचन् । रा ज न्वाकियाचबुश। रा ज न्वाकियाचबुश। रा ज न्वाकियाचबुश। भू य मा नाकीय वाचाया वाचाइश। पू य मा नाकीय वाचाया वाचाइश। ओ हो वाभिहा उ वाति। एतच्वा यु नाकिवि श्वाःकाप्रा जाचाअ भ्याचापा वा थाःखि ॥१३३॥
॥ षोढषोपचार सामानी ॥ (३६)
॥ आसनम् ॥
इ हि यौ हो वाटुच्। इ हि यौ हो वाटुच्। इ हि यौ हो वाटुच्। पुषरु ष ए वे दं साटूर्वातम् । यषत्भू त य श्च भा वाटूयातम् । पाषदो स्य स र्वा भू ताटूनीत। त्रिषपा द स्या मृ त न्दाटूइ वीता। इ हि यौ हो वाटुच्। इ हि यौ हो वाटुच्। इ हि यौ होटीट्वाखऔ हो वाशि। । इ हि यौ हो वाटुच्। इ हि यौ हो वाटुच्। इ हि यौ होटीट्वाखऔ हो वाशि। ईखळाण। इ हि यौ हो वाटुच्। इ हि यौ हो वाटुच्। इ हि यौ होटीट्वाखऔ हो वाशि। ज्योखतीःण। इ हि यौ हो वाटुच्। इ हि यौ हो वाटुच्। इ हि यौ होटीट्वाखऔ हो वाशि। ईख ॥१३४॥
॥ पाद्यं अग्नेश्चरथन्तरंवसिठस्यवा ॥
ओ भि त्वा शू र नोकूनू मोचावाश। आ दु ग्धा इ व धे न व ई शाषैन म स्य ज ग ताकूस्सु वाटादृ शाताम् । ईकशा न मापिइ न्द्राशा। ता स्थूटाटट्षा ओ वाचिहा उ वाकि। आचस् ॥१३५॥
॥ अर्घ्यं महावामदेव्यं त्रृतीयम ॥
काणयाफन श्चाफाइ त्राखाया भु वाशित् । ऊ तीकास्सा दाकावृ ध स्स खा औकुहो हाताइ क याटिश चाताइश। ष्ठ यौ होतिहि म्माटावाटर्तोख। हात्रइश ॥१३६॥
काणस्त्वाफस त्योफामाखदा नाशाम् । मं हि ष्ठोकिम त्स दकीन्ध सा औकिहो हाताइ दृ ढाटिचि दाता। रू जौ होतिहि म्माटा। वाटसोख। हात्रइश ॥१३७॥
आणभीफषू णाफास्साखखी नाशाम् । अ वि ताकिज रा इ तृकीणा मा औकिहो हाताई शा तांटिभ वाता। सि यौ होतिहि म्माटा। ताटयोख। हात्रइश ॥१३८॥
॥ आचमनीयम् बृहत्पाजापत्यंभरद्वाजस्यवा ॥
औ हो इ त्वा मि द्धीषूह वा म हातीएत। सा तौ वा जा स्या काकुराखवाःण। तू वापाऔकहो वाथा। वृ त्रा इ षु वाषुवा इ न्द्रा साटीओ त्पा ति न्नाखराःण। तू व ङ्का ष्ठापीऔकहो वाथा। सूटव र्वाखाता हो वाशिहा उ वातिहाचस् ॥१३९॥
॥ मधूपर्कमधूश्चून्निधनञ्च प्राजापत्यम् ॥
स पू र्व्यो म हो नातूमेत। वे नाः क्राचितूकभा इ रा ना जेटुहातहा औटाहोतवा आटाइ हीता। य स्याकाद्वा राथामा नूः पी ताटीहातहा औटाहोतवा आटाइ हीता। दा इ वा इ षूटुहातहा औटाहोतवा आटाइ हीता। धी याकाआ नाटाट्जाखऔ हो वाशि। म धूताश्च्यू ताःटाख् ॥१४०॥
॥ अग्नेश्च दधिक्रम् ॥
ओतहा इ द धि क्राषूवि ण्णो अ का र्षा मोतूहातइश। ओतहा इ जि ष्णोषीर श्व स्य वा जि नाटूओ हाचाइश। सु राकाभी नोकामु खा काटिरातत् । प्र णाटाच्होयआ यूंटाहोयषी ता राटिइ षाखाण्त् । ओपइ ळाशा ॥१४१॥
॥ धेनूपयसी ॥
हा बु हाषिबु हा वो हा ओ हाकाओ हाका। इ याटाइ याटाइ याटा। औकहोटच्औकहोटच्औकहोटच्इश। भू व दि ळाकीस्वा दि ष्ठ याकीमा दि ष्ठ याचीज न दि ळाचा। पा वा स्व सोचीमा धाकार याचावृ ध दि ळाची। इ न्द्रा य पाचीता वाकाइ सूचाताःश। का र दि ळाची। इ न्द्रा य पाचीता वाकाइ सूचाताःश। हा बु हाषिबु हा वो हा ओ हाकाओ हाका। इ याटाइ याटाइ याटा। औकहोटच्औकहोटच्औ होपाउ हु वा हा उ वातू। एतच्धेचनुःश ॥१४२॥
इ यो इ याचीइ योटाइ याकाईचयाश। अ ग्ने यूं क्ष्वा हीतुये त वाःति। अ ग्ने यू क्ष्वा हीकुये त वाःचि। अ ग्ने यूं क्ष्वा हीतूये त वाःति। इ यो इ याचीइ योटाइ याकाईचयाश। अ श्वा सो दे वातुसा ध वाःति। अ श्वा सो दे वाकुसा ध वाःचि। अ श्वा सो दे वातुसा ध वाःति। इ यो इ याचीइ योटाइ याकाईचयाश। आ रं व ह न्त्वीतुया श वाःति। आ रं व ह न्तीकुया श वाःचि। आ र व ह न्तीतुया श वाःति। इ यो इ याचीइ योटाइ याकाईचयाश। आटहाचस्श। एतप याःटाख् ॥१४३॥
॥ स्नानमवरूणसामानीत्रिणी ॥
प्र मि त्रा य प्रातुहातबुश। आटर्य म्नाचाइ स चाटिहोकथ्धि यौटाहु वा र्ताटिव साचाबुश। व रौटाहोकथ्धी यौटाहू वा इषिव रू णे छा न्दीकुयं व चाःचि। स्तो त्रांटाहो इ राटिजौटहू वा सूकिगा या ताटिआ उ वाटि। ऊखपाश ॥१४४॥
प्र मि त्रा य प्रौ होतूवात। अ र्य म्णा बु होकुच्औकहो वाका। सा चा थ्य मृकीता वाचासा बु होकिच्औकहो वाका। वा रू थ्ये व रू णेचूछकन्दी यं वाकिचा बु होकिच्औकहो वाका। स्तोकत्रं राकाजा बु होकिच्औ हो वा । सूकगा याकाता बु होकिच्औकहो वाःपाण्। ओपइ ळाशा ॥१४५॥
प्र मि त्रा यषीप्रा र्य म्नोतिवा ओतावात। सा चाचाथ्य मृचाता वायासाटबुश। वाटरूतथाटयातइ व रू णेकीच्छकन्दा यांटाहातइ व चोटिआत। स्तोकत्रं राकाज सु गाचिय त स्तोटित्रातम् । राकजचसूकगौटहोतओपबा या तोप्ल। हा इशा ॥१४६॥
॥ तरन्तस्यच वैददश्वेसाम ॥
त र त्स मातीन्दीतधा वायाताटइश। धा राटासूखताण। स्या न्धाटाट्साखऔ हो वाशि। ता र त्स म न्दी धाकुव तीखी ॥१४७॥
॥ इन्द्रस्यशुद्धाशुद्धीयेद्वे ॥
ए तो न्वि न्द्रं स्त वातूमात। शु द्धं शु द्धेकीना साटाम्नात। शु द्धै रु क्थै र्वाकुवृ द्ध्वांटासातम् । शु द्धै राटिशीतर्वाचन्म माखाऔ हो वाशि। तूख ॥१४८॥
ए तो न्वि न्द्रं स्त वातूमात। शु द्धं शु द्धेकीनाचसाकओ म्नाटा। शु द्धा इ रूभीक्थातइ र्वाचावृ द्ध्वांखासणम् । शु द्धै राटिशीतर्वाचन्मा माचातू इ ळाटिभाखण्। ओपइ ळाशा ॥१४९॥
॥ वस्त्रम् ॥
प्र । उ त्साच्यप र्ण ॥१५०॥
॥ यज्ञोपवीतम् त्रिसन्धिच ॥
औ हो इ त्व मि न्द्रषीप्र तू र्त्ती षूतीएत। आ भा इ वा इ श्वाटूआकसि र्स्पाखादाःण। आषश स्ति हा ज नि ताकूवृ त्र तूटिर साताइश। तू व न्तूटिर्यातत रौ होतिहि म्माटाष्याटतोखहाणइश ॥१५१॥
॥ आभरणम् प्रजापतेस्सन्तनीकेद्वे ॥
भा गाःता। ना चि त्रोषिअ ग्नि र्म होटीनातन्दाटट्धाखऔ हो वाशि। ती राटात्नाखम् ॥१५२॥
भ गो न चि त्राःतु। अ ग्नि र्म होटीनातन्दाटट्धाखऔ हो वाशि। एतच्ती राटात्नाखम् ॥१५३॥
॥ गन्धम् ॥
स्व यंचास्कु न्वाटाइश। स्व यंचास्कु न्वाटाइश। स्व यंचास्कु न्वाखाओ हो वाशि। एतस्कु न्व एकिस्कु न्व एकिस्कु न्वाखाइश ॥१५४॥
॥ पुष्पम् प्रैय्यमेधञ्च ॥
अ र्च त प्रा र्च ताषूनाखराःप्ल। प्रि य मे धाखीसो आचार्चा ताफा। अ र्च न्तु पूखीत्रा काचाऊकताफ। पूकर मि द्धाटिष्णु वा र्चाखि। तात्र ॥१५५॥
॥ शैखण्डिने द्वे ॥
गा याता। ओचन्ति त्वाताओपगा याप्लात्रातइ णाःता। अ र्चाताओचन्ति याताओपर्का माप्लार्कातइ णाःता। ब्र ह्माताओचण स्त्वाताओपशा ताप्लाक्राततातबुश। उ द्वाताओंचश माताओपव याप्लाइ मि राप्लिइश। होप्लइ ळाशा ॥१५६॥
गा या न्ति त्वोतीहा इ गा या त्रीखुणाःण। अ र्च न्त्य र्क मायुर्कीपणाःश। अ र्च न्ती योखीहाशर्क मा र्कीखिणाःण। ब्र ह्मा ण स्त्वा श तायूक्रापता बुशा। ब्र ह्मा ण स्तोखीहा इशा। श ता क्राखिताणबुश। उ द्वं श मी व यायूइ मीपारेश। उ द्व श मोखीहाणइश। व या इ माखीणफप्ल्इश। राखइश ॥१५७॥
गा या न्ति त्वाषीगा या त्रि ण यातु। अ र्च न्त्य र्क म र्कटूइ णाःता। ब्र ह्मा ण स्त्वाटीहोचइशशा ता क्राटितातबुश। उ द्व श मी व यायूइ मीपारेश। उ द्वं शाखिमीण। व याटाउ वाता। उ प्माटाइ रोखा। हात्रइश ॥१५८॥
॥ धूपम् अगस्त्यच राक्षोघ्नम् ॥
ई ळाकाइ ष्वापाहि प्र ति व्याशिम् । या ज स्वाकिजा ता वेकिद साटाञ्च रि ष्णु धू माखुम ग्र भातिइश। ताटशोखऔ हो वाशि। चीखषशम् ॥१५९॥
॥ दीपम् वसिष्ठस्चजनित्रेद्वे ॥
पा वाता। मा नो अ जीकीजाखनाणत् । दी वाचाश्चि त्राचान्न्य ता न्य तूशीम् । ज्यो ती र्वैकिश्वा नाटाराखऔ हो वाशि। बृखहाशत् ॥१६०॥
प व मा नाःती। अ जा इ जापीनाशत् । दी वाचाश्चि त्रांटाहातहातइशना तकान्याखतूणम् । ज्योखतीशर्वाखइ श्वाणा। न रोप्लाबा बृ हाप्लित् । हा इशा ॥१६१॥
॥ नैवेद्यम्दिशाञ्चदशानुगानम् ॥
हा बु हा बु हातुबुश। अ हचाम न्नकाम हचाम न्नकाम हचाम न्नाका। दोचह म न्नाकिदोचह म न्नाकिदोचह म न्नाकि। दोचअ हं वि धाकीर योचाअ हं वि धाकीर योचाअ हं वि धाकीर याःचा। हा बु हा बु हातुबुश। य द्व र्चोकिहि र ण्या स्याकी। य द्वाचाव र्चोकाग वाकामु ताचा। स त्या स्याकिब्र ह्म णोकिव र्च्चाःचा। ते न माकिसं सृ जाकिम साचाइश। हा बु हा बु हातुबुश। अ हचाम न्नकाम हचाम न्नकाम हचाम न्नाका। दोचह म न्नाकिदोचह म न्नाकिदोचह म न्नाकि। दोचअ हं वि धाकीर योचाअ हं वि धाकीर योचाअ हं वि धाकीर याःचा। । हाषबु हा बु हा उ वातू। एतच्अ ह मचिन्न म ह म न्ना दोकूअ हंचावि धाकीर याःकाएतच्अ ह मचिन्न म ह म न्ना दोकूअ हंचावि धाकीर याःका। एतच्अ ह मचिन्न म ह म न्ना दोकूअ हंचावि धाकीर याःका। एतआ हंकाच्स्व र्ज्योटातीःख. ॥१६२॥
॥ ताम्बूलम् ऋशस्यव्रतम्भूतेश्छन्दसंवा ॥
हा री त इ न्द्र श्माटूश्रूखणीण। ऊ तो ते ह रि ताटूहाखरीण। तषन त्वा स्तु व न्ती काटूराखवाःण। पा र्षाचासो व ना गाखीर्वाःण। ऋ ष्या स इ न्द्र भुंटूआखइ तीणा। मा घ व न्नि न्द्र भुंटूआखइ तीणा। भुं इ तीकिप्रा भुं इ तीकी। इ न्द्र स्त स र पूकूताःख ॥१६३॥
॥ कर्पूरम्हारायणम् ॥
रा जा दे वौ होटूऋ तंकाबृ हाचात् । ओ जा दे वा ऋषुतं बृ ह द र्षा मीटूत्रात। स्या वा रू णाकीस्या धाटाहातर्मा णाटा। ओ हिषान्वा न ऋ ता उ वाकूओपबाप्लबृ हाप्लात् । हा इशा ॥१६४॥
उ द्य न्लोकिका न रो च योकुहो इ मा न्लोकीका न रो च योकुहो इ दि वं सूकुर्य म रो च योकु। हो इ वि श्वं भूकुत म रो च योकुहोटहाखओ हो वाशि। घकर्मो रोटाचीःख ॥१६५॥
॥ मन्त्रपूष्पम्आदित्यसार्कपुष्पेद्वे देवानांवा ॥
पा वि त्र न्तेकीवि त तंकिब्र ह्म ण स्प तेकुहु वेटाहु वेटाहो वाटाहातहातइश। प्रा भु र्गा त्राटीच्णीकप र्येटाषी वि श्व ताचीहु वेटाहु वेटाहो वाटाहातहातइश। अ त प्त त नूकुर्न्न त दाकिमो अ श्नु तेकीहु वेटाहु वेटाहो वाटाहातहातइश। श्र ताकास इ द्व हकीन्त स्स न्त दा श ताकूहु वेटाहु वेटाहो वाटाहातहाखऔ हो वाशि। अ र्को देटिवा नांटाप रा मेचिव्योटमाखन् ॥१६६॥
पा वि त्र न्तेकीवि त तंकिब्र ह्म ण स्प तेकीच्हू वाकाऔटहो वाटा। प्रा भु र्गा त्राकीणी प र्येकिषी वि श्व तोकीच्हू वाकाऔटहो वाटा। अ त प्त त नुकुर्न्न त दाकिमो अ श्नु तेकीच्हू वाकाऔटहो वाटा। श्र ता स इ द्व हकून्त स्स न्त दा श ताकूहू वा औटिहोटवाखऔ हो वाशि। अ र्क स्य देकिवाःकच्प रा मेचिव्योटमाखन् ॥१६७॥
॥ प्रैय्यमेधञ्च ॥
अ र्च त प्रा र्च ताषूनाखराःप्ल। प्रि य मे धाखीसो आचार्चा ताफा। अ र्च न्तु पूखीत्रा काचाऊकताफ। पूकर मि द्धाटिष्णु वा र्चाखि। तात्र ॥१६८॥
॥ परमेष्ठिनश्चप्राजापत्यम् ॥
हा बु हा बु हातुबुश। आ नोकाब्रू वाटाआ नोकाब्रू वाटाआ नोकाब्रू वाटायाखओ हो वाशि। रषक्ष त नो र क्षि ताकूराःख। हा बु हा बु हातुबुश। आ नोकाब्रू वाटाआ नोकाब्रू वाटाआ नोकाब्रू वाटायाखओ हो वाशि। गो पाकाय त गो पाकीइ ता राःखि। हा बु हा बु हातुबुश। आ नोकाब्रू वाटाआ नोकाब्रू वाटाआ नोकाब्रू वाटायाखओ हो वाशि। मा यीकाव र्च्चोकाअ थोकाभाकग म थोकिय ज्ञा स्याकिय त्प याःकिप र मे ष्ठीचीप्रा जाचाप तीशार्दि वि द्व्याचिमि व द्रंकिह तुखा। हा बु हा बु हातुबुश। आ नोकाब्रू वाटाआ नोकाब्रू वाटाआ नोकाब्रू वाटायाखओ हो वाशि। रषक्ष त नो र क्षि ताकूराःख। हा बु हा बु हातुबुश। आ नोकाब्रू वाटाआ नोकाब्रू वाटाआ नोकाब्रू वाटायाखओ हो वाशि। गो पाकाय त गो पाकीइ ता राःखि। हा बु हा बु हातुबुश। आ नोकाब्रू वाटाआ नोकाब्रू वाटाआ नोकाब्रू वाटायाखओ हो वाशि। एतर क्षषात नो र क्षि ता रोचूगो पाथाय त गो पाकीइ ता रःशि। एतर क्षषात नो र क्षि ता रोचूगो पाथाय त गो पाकीइ ता रःशि। एतर क्षषात नो र क्षि ता रोचूगो पाथाय त गो पाकीइ ता रःखि ॥१६९॥
॥ नवग्रह सूक्तम ॥ (ऋ-९, सा-९)
ऊदूत्यं᳒जाता᳒वे॑दसम् । दे᳒वं᳒वाहन्तींकेता᳒वाः॑ । दृशे᳹वि ᳹श्वा॑यासूर्यम् ॥ १ ॥
॥ सूर्यसामच् ॥
उ दु त्य मोतीहातइश। जा ता वेकिदाखसणम् । देकवं व ह न्ती केकुताखवाःण। दा र्शेपाहाणइश। वा इ श्वाकिच्याकसू र्या मौपिहो बाप्ला। होप्लइ ळाशा ॥१७०॥
चन्द्रा᳹मा॑प्सूआ॑टट्यन्तारा । सूपर्णोधा॑वतेदीवि᳒ । नावो॑हीरण्यनेमयः । पा᳒दं᳒वि᳒न्द॑न्तीवीद्यूताः । विक्त᳹म्मेअस्य᳒रो᳒दसि ॥ २ ॥
॥ त्रैतानि चत्वारि ॥
च न्द्र मा याती। प्सूतआ न्तापाराश। सु प णो र्धाकीच्वाकताटइ दीचावि याता। न वोटाच्हि रकाण्य नेकाम यः पा दं वि न्दकून्ति वि द्यु तोपीहाणइश। वि क्तं हो इ मा याटूहोकथ्स्या रो दाटिसाखण्इश। ओपइ ळाशा ॥१७१॥
अ᳒ग्नि᳒र्मूर्द्धादीवाःकाकू᳒त् । पा᳒तीःपृथिव्या᳒आ᳒यम् । आपांरेतांसिजिन्वति ॥ ३ ॥
॥ अग्नेश्चार्षेयम् ॥
अ ग्नि र्मू र्द्धा दीतुवः क कूतित् । पा तीटापा र्त्थीटाव्या अ याचिम् । आ पांटारा इ तांटिसीकजि न्वाटाताखण्इश। ओपइ ळाप्ला ॥१७२॥
ब्र᳒ह्मा॑जज्ञानं᳹प्राथामंपुरास्ता॑त् । वीसीमातस्सूरुचोवेनआ॑वात् । सा᳒बुध्न्याऊ॑पामाआस्याविष्ठाः । साताश्चा᳹योनी᳒मा᳒साताश्चावी᳒वाः ॥ ४ ॥
॥ ऋतुसामनिच ॥
ब्र ह्मा ब्राटिह्मात। ज ज्ञा नंचिप्रा था मंकिपु रा स्ताभित् । वी सा इ वाटिइ सीता। म त स्सु रूकीचो वेथान आ वाभित् । सा बू साटिबूत। ध्न्या उ पाचिमाकआटस्य वा इ ष्ठाःभी। सा ता स्साटिताःत। च यो नी मा साचुता श्च वाकिइ वाःपाण्। ओपइ ळाप्ला ॥१७३॥
सोमंरा᳹जा॑नंवा᳒रूणम् । अ᳒ग्नी᳒मन्वारा॑भामहे । आ᳒दित्यंविष्णुंसू᳒र्य॑म् । ब्र᳒ह्मा᳹ण॑ञ्चाबृहस्पा᳒तिम् ॥ ५ ॥
॥ बार्हस्पत्यञ्च ॥
सो मं रा जाषीनं व रु णातीम् । अ ग्नी म न्वाकीर भा म हेचीहो वाटाहातइश। आथदि त्यं वि ष्णुंकीसू र्यंकाहो वाटाहातइश। ब्र ह्मा णाटिञ्चातहो वाटाहातइश। बृ हाटाउ वाता। स्पाखतिशम् ॥१७४॥
अस्य᳒प्रत्ना᳒मा᳒नुद्युत॑म् । शुक्र᳒न्तु॑दुह्रेअह्रा॑यः । पा᳒या॑स्सहस्रासा᳒मृ᳒षिम् ॥ ६ ॥
॥ सैन्धूक्षितम् ॥
अ स्य प्र त्नोचीहाचइश। ओ नु द्यूटिता म्त। शु क्र न्दु दु ह्रे आयूह्रापयाःश। प य स्स होखीहाणइश। ओ सोपाहाचइश। मृकषा औटाहोखबाप्ल। होप्लइ ळाशा ॥१७५॥
श᳸न्नो॑देवी᳒राभीष्टा॑ये । श᳒न्नो॑भूवन्तूपीता᳒ये॑ । श᳒य्योराभि᳒स्रावन्तूनः ॥ ७ ॥
॥ वसूरोचिशस्सौर्यवचस्य सामानि द्वे ॥
श न्नो दे वीती। आ भी ष्टाटियाखइ श न्नो भु वाशुम् । तू पी ताटियाखइ श य्यो र भीःशु। श्रा वा न्तूटिट्नाखऔ हो वाशि। ऊखपाश॥ १८ हु वाताहोपइ श न्नो दे वीप्लुर भि ष्ट याङिइश। हु वाताहोपइ श न्नो भु वाप्लुन्तू पी ता याङीइश। हु वाताहोपइ श य्यो र भीप्लुस्र व न्तुङिनाःश। हु वाताहोटयाखऔ हो वाशि। ऊखपाश ॥१७६॥
कया᳒नश्चित्॑त्रा᳒ता॑भू᳒वा॑त् । ऊ᳒ती॑स्सा᳒दा॑वृ᳒धा॑स्सा᳒खा॑खा᳒ण॑ । कया᳒शा॑चा᳒स्था॑इ᳒षा॑ । वा᳒र्तो॑हा᳒इ॑षा᳒वाः॑᳒ ॥ ८ ॥
॥ वाचस्सामनि द्वे ॥
क या न श्चीती। त्रातया भूपावाशत् । ऊकता इ स दा वाकुर्ध स्साखाखाण। क या शाटिचातइश। ष्ठापयाशवाखर्तोप्ल। हा इशा ॥१७७॥
हो वा इ हो वा इषूक या न श्चीती। त्रातया भूपावाशत् । हो वा इ हो वा इषूऊ तीचास्सा दाकाच्वृ धाकास्सापखाश। हो वा इ हो वा इषूक याताश चाताइश। ष्ठा या वाटिट्र्ताखऔ हो वाशि। ऊखपाश ॥१७८॥
केतुं᳸कृण्वन्केतवे । पेशो᳒म᳒र्या᳒अपेशसे । समु᳒ष᳒द्भि᳒रजायथाः ॥ ९ ॥
॥ नक्षत्रसूक्तम् ॥ (२८)
एतेप᳹न्थाआथो॑दीवः । एभीर्व्या᳒श्वामै᳒राया । ऊता᳒श्रो॑षन्तूनोभुवाः ॥ १० ॥
नाकेसूपर्णा॑मूपा॑यत्पा॑त॑न्तं । हृ᳒दा᳒वेन॑न्तोअभ्या᳒चा॑क्षतत्वा । हिर॑ण्यपा᳸क्षंवारूणस्यादूतं᳒ । यामास्यायो᳒नू॑शाकूनं᳹भूरण्यूम् ॥ ११ ॥
अग्ना॑आ᳒याहीवी᳒ता᳒ये । गृ᳒णा᳒नोहव्यादा॑तये । नीहो᳒ता॑सत्सीबर्हीषि॑ ॥ १२ ॥
प्रजापतेनत्वदेतान्अन्योविश्वाजातानिपरिताबभूवयतःकामास्तेजुहुमःतन्नोऽस्तूवयंस्यामपतयोरयीणां ॥ १३ ॥
उच्चा॑ते॑जातमन्धा᳸सा᳒ । दिविसा᳒त्भूम्याद॑दे । उग्रं᳒शर्म्मा᳒माहिश्रा᳒वाः ॥ १४ ॥
आ᳒वोरा᳒जानमध्वर᳹स्या॑रूद्रं᳒ । हो᳒ता॑रंसत्याया᳒जंरो᳒द॑॑स्योः । अग्निंपूरा᳒तानाइत्नो᳒राचिक्तात् । हिरण्यरूपामा᳒वा॑सेकृणुध्वम् ॥ १५ ॥
माहि॑त्रीणा᳒मा᳒वा॑रस्तु । धुक्षंमित्र᳹स्या॑र्यम्णः । दूराध᳒ऋषंवा᳒रूणस्या ॥ १६ ॥
सोमंरा᳹जा॑नंवा᳒रूणम् । अ᳒ग्नी᳒मन्वारा॑भामहे । आ᳒दित्यंविष्णुंसू᳒र्य॑म् । ब्र᳒ह्मा᳹ण॑ञ्चाबृहस्पा᳒तिम् ॥ १७ ॥
आयं᳒गौःप्रश्नी॑रक्रामीत् । आ᳒सा᳒दन्माता᳹रं॑पूनः । पी᳒तार॑ञ्चाप्राया᳒न्स्वाः ॥ १८ ॥
ऊर्जंवहन्तीरमृतंघृतंपयःकीलालंपरिस्रुतम् । स्वधास्थतर्पयतमेपितॄन् ॥ १९ ॥
यं᳸रा॑क्ष᳹न्तिप्रा᳒चे॑तसःवा᳒रू॑णोमित्रो᳹अर्यामा᳒ । ना᳒कीस्सा᳒दभ्यातेज᳒नाः॑ ॥ २० ॥
भा᳒गोनाचित्रः । अग्निर्मा᳒हो᳒नां । द᳸धा॑तीरा᳒त्नम् ॥ २१ ॥
त᳸त्सावीतु᳒र्वा᳒रेण्यं । भ᳸र्गो॑देवा॑स्याधीमहि । धी᳒योयोनः॑प्राचोद᳒यात् ॥ २२ ॥
त्व᳸ष्टानोदै᳒व्यंवा᳒चाः॑ । पर्ज᳒न्योब्र᳹ह्मा॑ण᳒स्पा᳒तीः । पुत्रै᳹भ्रा᳹तृ॑भिरा᳹दीतीर्नूपातु॑नः । दुष्टा॑रन्द्रा᳹मा॑णंवा᳒चाः ॥ २३ ॥
वातआ᳒वा॑तूभेषाजं᳒ । शंभूमा᳒योभूनोहृदे । प्राणआयूंषि॑तारि॑षात् ॥ २४ ॥
इन्द्रा॑ग्नीआपा᳒दीय᳒म् । पूर्वागा᳸त्पद्वा᳒ती॑भ्यः । हित्वा᳹शि ᳹रो॑जिह्वा᳒या᳹रा॑रापच्चारात् । त्रिंशा᳒त्पादा᳒न्या॑क्रमीत् ॥ २५ ॥
ऊर्जा᳒मित्रोवारू॑णोपिन्वा᳒ताईळाठ॑ । पी᳸वा॑रीमीषं॑कृणू॑हीना॑इन्द्रा ॥ २६ ॥
य᳸स्ते॑नूनंशा॑तकृतो॑ । इन्द्र॑घुम्नीता॑मो᳒मा᳒दाः॑ । ते᳸ना॑नूनम्मादे॑मदेः ॥ २७ ॥
वे᳒त्थाहि᳒नि᳒रिऋ॑तीनां । वज्रा॑हस्तापारिव्रा᳒जं॑ । आहा॑रहश्शुन्धूः᳹पा॑रीपादा॑मिवा ॥ २८ ॥
यादाकादा᳹चामीढूषे॑ । स्तोता᳒जरेतमार्क्त्याः॑ । आदीद्व᳒न्दे᳒तावारुणंवीपा᳒गीरा॑ । धक्ता᳒रंवि᳒प्रा᳒तानाम् ॥ २९ ॥
य᳒द्वा᳒ऊविश्पा᳹तीश्शितः । सुप्रीतो॑मा᳒नुषोवीशे । विश्वेदग्निप्रा᳒तिर॑क्षांसिसेधति ॥ ३० ॥
ब्र᳒ह्मा॑जज्ञानं᳹प्राथामंपुरास्ता॑त् । वीसीमातस्सूरुचोवेनआ॑वात् । सा᳒बुध्न्याऊ॑पामाआस्याविष्ठाः । साताश्चा᳹योनी᳒मा᳒साताश्चावी᳒वाः ॥ ३१ ॥
ईदंविष्णुर्विचा॑क्रमे । त्रेधा᳒नी᳒दे॑थेपादंसा᳒मू॑ढमस्यपांसूले᳒ ॥ ३२ ॥
तामग्नीम᳒स्ते᳒वसवः । न्यू᳸कृ᳒ण्वन्सुप्रतिचक्षं । आ᳸वा᳒सेकुतश्चित् । दक्षय्यो᳒यो᳒दमाअ᳒सनित्यः ॥ ३३ ॥
प्रा᳒मित्रा᳒यप्रार्यम्णे॑ । सा᳒चात्थ्याठ॑मृतावसो । वरु᳒त्थ्येटट्य᳒वा᳹रूणेछन्द्यंवा᳒चाः॑ । स्तोत्रं॑रा᳒ज॑सुगायता ॥ ३४ ॥
अहिरसिबुध्नियारौद्रेणानीकेनपाहिमाग्नेपिपृहिमानमस्तेअस्तुमामाहिंसीः ॥ ३५ ॥
अज्योस्येकपातरौद्रेणानीकेनपाहिमाग्नेपिपृहिमानमस्तेअस्तुमामाहिंसीः ॥ ३६ ॥
सो᳹माः॑पूषा᳒चा॑चेततुः । वि᳒श्वा᳸सांसुक्षी᳒तीनां᳒ । देवात्रा᳒रथ्योरहितः॑ ॥ ३७ ॥
सहनोस्तु । सहनो भुनक्तु । सहनो वीर्यवद्दस्तु ।
माविद्विषामहै । सर्वेषान्नौ वीर्य वदस्तु ॥
ओं शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥ हरिः ओम् ॥
श्रीमते जैमिन्याचार्याय नमः
श्री तलवकार गुरवे नमः
अस्तु गुरुभ्यो नमः ।
॥ सङ्ग्रह सङ्ख्या ॥
॥ वर्णानुक्रमणिका ॥
- अग्ने स्वरणि वायोस्वर्यांस्थयवा वायोर्नुवानुगान मिन्द्रस्य द्यनु गान मृत्योश्चतुर्गानं इति त्रीणि
- अग्नेश्च दधिक्रम्
- अग्नेश्च रथन्तरंवसिठस्यवा
- अग्नेश्चदधिक्रम्
- अग्नेश्चार्षेयम्
- अञ्जश्चवैरूपम्
- अत्रेर्विवर्तौ द्वौ
- अर्घ्यं महावामदेव्यं त्रृतीयम
- अष्टनिधनञ्च
- अहोरात्रयोर्व्रतम्
- आङ्गिरसञ्च इन्द्रस्य वा हरिश्रीःनिधनम्
- आचमनीयम् बृहत्पाजापत्यंभरद्वाजस्यवा
- आतीषातीयम्
- आदित्यसार्कपुष्पेद्वे देवानांवा
- आदित्यस्यार्क पूष्पेद्वे देवानांवा
- आदित्यासामनी द्वे तार्क्षसामनीद्वे
- आपलवैणवे द्वे
- आभरणम् प्रजापतेस्सन्तनीकेद्वे
- आयूर्नवस्स्तोभे
- आसनम्
- इन्द्रस्य शुद्धाशुद्धीये द्वे
- इन्द्रस्यच त्रातम्
- इन्द्रस्यच त्रातम् (2)
- इन्द्रस्यशुद्धाशुद्धीयेद्वे
- इन्द्रस्यहरिश्रीःनिधनम्
- इहवद्वामदेव्यंत्रृतीयम्
- ऋतुसामनिच
- ऋतुसामनिच (2)
- औरूक्षयेद्वे
- कर्पूरम्हारायणम्
- कावर्षेद्वे
- कूत्सस्याधि रथ्यानि त्रिणी
- कृष्णस्यचाङ्गिरसस्य व्रतम्
- गन्धम्
- घृताचेराङ्गिरसस्यसामनीद्वे
- तरन्तस्यच वैददश्वेसाम
- तरन्तस्यच वैददश्वेसाम (2)
- ताम्बूलम् ऋशस्यव्रतम्भूतेश्छन्दसंवा
- त्रिणीरेवस्यदेवस्यव्रताणि
- त्रैतानि चत्वारि
- दिशाञ्चदशानुगानम्
- दीपम् वसिष्ठस्चजनित्रेद्वे
- दीर्घे द्वे
- धूपम् अगस्त्यच राक्षोघ्नम्
- धेनूपयसी
- निधिसाम
- नैवेद्यम्दिशाञ्चदशानुगानम्
- पञ्चनिधनञ्चवामदेव्यम्
- पञ्चनिधनञ्चवैरूपम्
- परमेष्ठिनश्चप्राजापत्यम्
- पाथेद्वे
- पाद्यं अग्नेश्चरथन्तरंवसिठस्यवा
- पाष्ठौहेच
- पुरिषिञ्चाथर्वणम्
- पुरुषव्रतं सप्त
- पुष्पम् प्रैय्यमेधञ्च
- प्राजापत्यङ्गायत्रम्
- प्राजापत्यङ्गायत्रम् (2)
- प्राजापत्यङ्गायत्रम् (3)
- प्राजापत्यङ्गायत्रम् (4)
- प्रैय्यमेधञ्च
- बार्हस्पत्यञ्च
- बार्हस्पत्यञ्च (2)
- भारद्वाजञ्च
- भारद्वाजस्यश्यून्ध्यू
- मधूपर्कमधूश्चून्निधनञ्च प्राजापत्यम्
- मन्त्रपूष्पम्आदित्यसार्कपुष्पेद्वे देवानांवा
- महासावेदसे द्वे
- मार्गीयवञ्च
- मार्गीयवञ्चैव
- यज्ञोपवीतम् त्रिसन्धिच
- यमव्रतम्
- रौद्राणि आजिदोहानि मारुतानि वा मऋतनिधनम् ई निधनं त्रीणिधनं ऐन्द्राणि वा प्राजापत्यानिवा
- रौद्रेद्वे
- रौद्रेद्वे (2)
- वरूणसामच
- वरूणसामानित्रिणी
- वरूणस्यार्कः
- वसिठस्यजनित्रे द्वे
- वसूरोचिशस्सौर्यवचस्य सामनीद्वे
- वसूरोचिशस्सौर्यवचस्य सामानि द्वे
- वस्त्रम्
- वाचस्सामनि द्वे
- वाचस्सामनी द्वे महावामदेव्यं तृतीयम
- वाचोव्रतम्
- वाचोव्रते द्वे
- वामदेव्यञ्च
- वाम्राणि त्रिणी
- विष्णोर्ररणी द्वे
- विष्णोर्व्रतम्
- विष्णोश्च साम
- विष्णोश्चसाम
- वैदन्वतञ्च
- वैश्वानर व्रतम्
- शेनञ्च
- शैखण्डिने द्वे
- शैखण्डिनेद्वे
- शैरिषे द्वे
- शौक्तसामानि
- शौक्तानि त्रिणी शुक्लानिवा आश्वानिवा
- शौक्तानी साम
- श्रायन्तियञ्च
- षण्णिधनञ्च
- सप्तनिधनञ्च
- सर्पसाम
- साकमश्वं धुरांवासाम
- सूर्यसामच्
- सैन्धूक्षितम्
- सोमसोमानि
- सौभराणित्रीणि
- स्नानमवरूणसामानीत्रिणी
- स्वर्ज्योतिषी
- हारीवर्णानि
- ह्रस्वाच बृहतोपशा