॥ जैमिनीय साम संहिता ॥
संस्करणम्: 3.28 , निर्मितम्: 29-09-2026
आग्नेयपाठः
प्रथम खण्डः (ऋ-१३, सा-१९)
॥ गौतमस्यपर्कः ॥
॥ कश्यपस्यबर्हिषीयम् ॥
अ ग्न आ या ही वीतू। ता या इ गृ णा नोषूह व्य दा ताटीयातइश। नी हो ताचिस त्सी ब र्हाटीइ षीता। ब र्हाटाइ षाखाऔ हो वाशि। बचर्ही षीखा ॥२॥
॥ गौतमस्यचैवपर्कः ॥
अ ग्न आ या ही वातूइ ता यातिइश। गृ णा नो ह व्य दायूतापयेश। नि हो ताखिसाणत् । साटइ बाताॠ हापाआ इ षोप्लि। हा इशा ॥३॥
॥ सौपर्णञ्च ॥
॥ वैश्वमनसञ्चादित्यसामवा ॥
अ ग्नि न्दूटितातम् । वृ णी म हा इषूहो ता रांटिवीतश्वा वेचाद साचाम् । अ स्य याटिज्ञातओ औकाहोतवात। स्या सूचाकृ तू मि ळाटीभाखण। ओपइ ळाप्ला ॥५॥
॥ श्रौतर्षाणित्रीणि ॥
अ ग्नि र्वृ त्राती। णाटइ जाखाऔ हो वाशि। घाखनाशत् । द्रचविशणाकस्यु र्वी पकिन्या याटाओ इ स मि द्धाटुश्शूत। क्रा याचाहु ता इ ळाटीभाखण्। ओपइ ळाप्ला ॥६॥
अ ग्नीखारौ हो वाशिहा इ वृ त्रा णीशु। ज ङ्घाटानातदौ होटावातइश। द्र वि णापिस्यूःण। ओ इ वा इषीप न्या याटि। सा मा इ द्धाटीट्श्शूखऔ हो वाशि। क्रा या हूटिताःख ॥७॥
ओतग्नीःत। वृ त्रा णीकिज ङ्घ ना दौकीहो औ होखिवाश। द्र वीचाणाकस्यु र्वी पकिन्य याचाऔकहो औ होखिवाश। स मि द्धाचिश्शु क्र याचिऔकहो औ होखिबाप्लहू तोप्ला। हा इशा ॥८॥
॥ औशनञ्च ॥
प्रे ष्ठं वाःति। अ ताटाइ थीताम् । स्तु षेचामि त्र मि व प्राटुयातम् । अ ग्ना इ राभीथातन्ना वाटाहाखणइश। दापआ याप्लाम् । हा इशा ॥९॥
॥ शैरीषेच ॥
प्रे ष्ठं व योतीहातइश। अ ताटाइ थीताम् । स्तू षाताइशमी त्रातामी वाटाप्राखयाणम् । औथहोचइश। अ ग्नेथारा थाटान्नापवेश। दाखयाशम् । हा इशा ॥१०॥
प्रे ष्ठं वोतिहातबुश। आ ति था इं स्तूषुषे मि त्रा मी व प्राटूयातम् । अ ग्ना इ राटीट्थाखऔ हो वाशि। ना वे दीटियाखम् ॥११॥
॥ इन्द्रस्यसंवर्गौवात्रघ्नेद्वे ॥
त्व न्नो याति। ग्नेचमा होथाभिः पा हा इ वीटुश्वात। स्याचआ रा तेथिच्रू ताचाद्वायइ षाःटा। माकर्त्याथस्या इ ळाटिभाखण्। ओपइ ळाशा ॥१२॥
त्वां त्व न्नोषिअ ग्ने म होतीभातइःश। पाकहि वि श्वा औटीहोतस्या औटाहोतआ रा तेकिच्रू ताचाद्वायइ षाःटा। म र्तोटाट्याखऔ हो वाशि। स्याख ॥१३॥
॥ साकमश्वस्यशौनःशेपेःसामनी द्वे ॥
ए ह्यूफाषु ब्रा वाखिणा इ ता इशी। अ ग्न इ त्थेषीत रा गाटिइ राःचा। ए भाटाइ र्वा धाचि। स याटाहाखण्इश। दोपभोप्ल। हा इशा ॥१४॥
ए ह्यू षूषिब्र वौ हो णातीइ ताताइश। अ ग्न इ त्थे त रायूगीपराःश। ए भि र्वाखिर्द्धाण। स याटाहाखण्इश। दोपभोप्ल। हा इशा ॥१५॥
॥ वत्सस्यकाण्वस्यसामनीद्वे ॥
आ ते व त्साःती। माचनोशय म त्पा राचीमाथच्चि त्सा धाटिस्थातत् । अ ग्ना इ त्वाभीङ्कात। म योपाबाप्लगा इ रोप्लि। हा इशा ॥१६॥
आ ते व त्सोषीम नो य म द य्यातूहातइश। पा रा माषिच्चि त्स ध स्था द य्याटूहोकच्इ याशा। अ ग्ने त्वा ङ्काषीमा या अ य्याटूच्होकचइ याशा। गी राकाइ ळाटाभाखण्। ओपइ ळाशा ॥१७॥
॥ अग्नेश्चवैश्वानरस्यार्षेयम् ॥
त्वा म ग्ने पु ष्कातुरा द धीति। आचथ र्वाचाना इ रा माटीन्धाखताण। मूखर्ध्नोप्लवाखइ श्वाणा। स्या वोपाबाप्लघा तोप्ला। हा इशा ॥१८॥
॥ सुमित्रस्यचवार्द्धश्वेस्साम ॥
अ ग्ने वि वषीस्व दा भ रो वातूहातइश। अ स्माचाभ्या मूकाच्ता याचाइ म हाटिओ वाटाहातओ वाटाहातइश। दाचइ वोयाहि याटाओ वाटाहातओ वाटाहातइश। साटइ नाखाऔ हो वाशि। दृ शेताच् ॥१९॥
१ इ(श): Kerala Padhati, No swara marking in Thogur Padhati
२ इ(श): KL, इ in TP
३ Kerala Padhati (क)
४ Thogur Padhati (त)
द्वितीय खण्डः (ऋ-११, सा-१५)
॥ अग्नेश्चसंवर्गः ॥
न म स्तौ होतिग्नातइश। ओ जा साकिइ गृ णाटिन्ताखइ देणा। वाचकायरि ष्टा याःटि। आ मा इ राटीट्माखऔ हो वाशि। त्र म र्द याखी ॥१॥
॥ वैश्वमनसञ्च ॥
दूणतांफवोखवि श्व वे द साशुम् । हाथव्या वा हा म माटुर्त्ताखयणम् । याचजि ष्ठ मृ ञ्ज सेटुहातइश। गीचरा औटाहोखबाप्ल। होप्लइ ळाशा ॥२॥
॥ श्नाभाश्नौष्टेद्वे ॥
उ प त्वा जाती। म योटागी राःटा। ओ इ या यू र्दाषुइ दि श ती र्हातूवि ष्कृ ताःटि। ओकइ या यूटिच्र्वाकयो राटानीत। क या स्थाखिइ रात्रान् । अ श्वाथागाटवाःख ॥३॥
उ प त्वा जा मातुयो गी राःति। दाचइशदि शाकाता इ र्हा विटीष्काखर्ताःण। वा यो र नातीहा इ का याती। स्था इ राटिऔ होखावा इ ळाशि ॥४॥
॥ वैश्वामित्रञ्च ॥
ऊ पा त्वापिग्ने दि वे दि वा इशू। दो षाटावा स्ताटार्द्धी याचावा यचाम् । ना मोटाभा राटाच्न्ताचएकमाटसाखण्इश। ओपइ ळाशा ॥५॥
॥ अग्नेश्चजराबोधीये ॥
जा राता। बो धाटाबो धाटाता द्वीचावि ढ्ढाचाइश। वी शेकावा इ शेटिय ज्ञोटाया याखाऔ हो वाशि। स्तो मंकारू द्रा य दृ शीकूकाचम् ॥६॥
ज रा बो धोतीवात। ताचद्वी वि ड्ढाचिइश। वी शा इ वाटीइ शेता। याथज्ञीशया या स्तोकिच्मांचरूयद्रापयाणदृश। शी कोखाइ ळाशा ॥७॥
॥ मारूतञ्च ॥ मरुतो गायत्र्यग्निः ॥
प्रा ति त्यापिञ्चा रू म ध्व राशुम् । गो पीथाथा या प्राचिहुकयाखसाणइश। मा रूचात्भीकरा ग्ना याटिगचहा औटाहोखबाप्ल। होप्लइ ळाशा ॥८॥
॥ भार्गवेच ॥
आ श्वाटाऔ होखावाश। ना त्वाटाऔ होखावाश। वा र व न्तंषीव न्द ध्यैति। आ ग्नाटाऔ होखावाश। न मो भिषिस्स म्म्रा ज न्तातुम् । आ ध्व राकिणा मौपाहो बाप्ला। होप्लइ ळाशा ॥९॥
अ श्व न्न त्वाषीवा र व न्तातीम् । व न्द ध्याषिअ ग्नि न्न मो भाचुइःश। सकम्म्रा जथाच्न्ता माचाध्व राखाऔ हो वा इखुहो हाणइश। औकहोटयाखऔ हो वाशि। णाखम् ॥१०॥
॥ अग्नेश्चवारवन्तीयम् ॥
अ श्व न्न त्वा बु होतूहातइश। वा रा वाखिन्तंशव न्दकाध्योपहाणइश। अ ग्ना इ न्न मापुऔ हो वा इ होखुहाणइश। उ हु वाखिभीःण। सकम्म्रा जथान्ता मा ध्व रापीऔ हो वा इ होखुहाणइश। उ हु वापिणा मे हि याप्लीहाश। होप्लइ ळाशा ॥११॥
॥ और्वस्यवैधारेस्सामनीद्वे ॥
औ र्व भृ गु व दोचूहातइश। शोखचिशम् । आ प्ना वाटिनाकवा दाटाहु वाटाइ हु वा योचीइश। अ ग्नाटाइं सा मूटिच्सा मू ओचि। द्रा वाचासाकसातबुश। बाख ॥१२॥
औ र्व भृ गु वषुच्छु चि मेतिशु चिताम् । आ प्न वाकिनाचवा दाटाहु वाताइ हु वाटिइ हु वाटिएत। अ ग्ना इं साटीमूतसा मूटासा मूटाएत। द्राट्ट्वाखऔ हो वाशि। साचसाटमेख ॥१३॥
॥ अत्रेश्चासङ्गम् ॥
अ ग्नि मिषिन्धा नो म न सौ हो औ हो वातेहातइश। धी यं स चे त मौटूहोटहातहो वाटार्त्याःता। अ ग्ना इ माटीट्इ न्धाखाऔ हो वाशि। वी वा स्वाटिभीःख ॥१४॥
॥ प्रजापतेश्चनिधनकामम् ॥
आ दि प्र त्नाफीस्य रेशात साःका। ज्यो तिः प श्यषीन्ति वा साटिराचम् । पा रो याटिति ध्य ताचिइश। दि वि हो इ हो औकूहो औकाहो वापाहाप्लबुश। बाख ॥१५॥
तृतीय खण्डः (ऋ-१३, सा-२१)
॥ सैन्धुक्षितानित्रीणि ॥
अ ग्निं वो वृ धातुन्तातम् । आ ध्वाचारा णांथाच्पू रूकातायमौटहो वाटाहातइश। आ च्छाटाना प्त्रेटा। साकहोपबाप्लस्वा तोप्ला। हा इशा ॥१॥
अ ग्निं वातिएत। वृ ध न्ताषिम ध्व रा णां पु रूकूत म म च्छाटीच्होयइ नाटाप्त्रेत। सा हा स्वापितात्रइश। ईखतिश ॥२॥
अ ग्निं वोतिहातइश। वृ धाटान्तातम् । आ ध्व रा णां पु रूयूतापमाशम् । अ च्छा न प्त्रोखीहाणइश। साकहोपहाचइश। स्वाकता औटाहोखबाप्ल। होप्लइ ळाशा ॥३॥
॥ अग्नेर्हरसीद्वे ॥
आ ग्नाटाउ वोखावाश। ति ग्मेथाच्नाकशो चा इ षाटीउ वोखावाश। यं साटाउ वोखावाश। वा इ श्वा न्या त्रा इ णाटूउ वोखावाश। अ ग्नि र्नोटिवं स तेकिच्रा यीचाम् ॥४॥
ओ हा या ग्नीःती। ताखइ ग्मेशाना शो चाखिइ षाणा। यं साटाद्वाखइ श्वाशानी या त्राखिइ णणाम् । अ ग्नि र्नोटिवं साटाट्ताखऔ हो वाशि। राखयिशम् ॥५॥
॥ इहवद्वामदेव्यंतृतीयम् ॥
अ ग्नि स्ति ग्मेषीन शो चि षा इ हातू। यं स द्वि श्वषीन्न्य त्री णाटिमि हाता। अ ग्नि र्नो वं स ताटूइ हाता। रापआ या इंप्लि। हा इशा ॥६॥
॥ यामेद्वे ॥
अ ग्ना इ मृ ळाटुम हं याखिसीण। आ य आ दाटीइ व यु न्जाखीनणम् । ई ये था बाटीर्हि रा साखि। दात्रम् ॥७॥
आणग्नेफमृ ळा माफिहं या सिफिओ हाखाओखहाश। आणयाफआ दे वाफियु न्ज नाफिमोखहा ओखाहाश। इ या ई थाटीब र्हि रा साखा। दात्रम् ॥८॥
॥ अग्नेराक्षोघ्नेद्वे ॥
अ ग्ने रा क्षाखीणोशअं हा सःप्लि। प्रा ति स्म देकीवा री षाटिताःत। ता पा इ ष्ठाटीइ राता। ज रो दाटिहाखण्। ओपइ ळाशा ॥९॥
अ ग्ने यू ङ्क्ष्वाखीहीशये ता वाप्लि। अ श्वा सो देचीवा सा धाटिवाःत। आ रं वाटिहातन्तीकया शाटावाःखण्। ओपइ ळाशा ॥१०॥
॥ वैश्वमनसञ्च ॥
नि त्वा होखिइ न क्ष्याशि। वाचइ स्पा ताचिइशद्यूकम न्तथान्धा इ माचिहेकवाखयणम् । सु वोताहातइश। रा म ग्नाचिओपबा हू तोप्लि। हा इशा ॥११॥
॥ अग्नेश्चार्षेयम् ॥
अ ग्नि र्मू र्धा दीतुवः क कूतित् । पा तीःटापा र्त्थीटाव्या अ याचिम् । आ पांटारा इ तांटिसीकजि न्वाटाताखण्इश। ओपइ ळाप्ला ॥१२॥
॥ सोमसामच ॥
इ म मू षूती। त्वा मा स्माटिकातम् । सा निंटाहो इ गा याटीहोकतृथन्न व्यांटासाताम् । आ ग्नेटाहो इ दे वाटीहोकथ्षु प्रा वोटिचाःखण्। ओपइ ळाप्ला ॥१३॥
॥ गोपवनञ्च ॥
त न्त्वा गो पाती। वा नोटागाखइ राःणा। ज नाचाइ ष्ठा द ग्ना याटूङ्गाखइ राःणा। स पौ वा उ वोखुवाशकौ वा उ वोखिवाण। श्रु धी ह वांप्ली। होपइ ळाशा ॥१४॥
॥ सूर्यसामनीद्वे ॥
प रि यौ होषीइ वा जाति। पा ताचाइः कायावीःट। अ ग्नीचार्ह व्याथान्नाटयः क्र मीटित् । द धा द्राटिट्त्ना औ हो वाशि। नि दाताशू षेटाख् ॥१५॥
उ दु त्य मोतीहातइश। जा ता वेकिदाखसणम् । देकवं व ह न्ती केकुताखवाःण। दा र्शेपाहाणइश। वा इ श्वाकिच्याकसू र्या मौपिहो बाप्ला। होप्लइ ळाशा ॥१६॥
॥ कावञ्च ॥
क वि म ग्नीतीम् । उ पा स्तूटिट्हाखऔ हो वाशि। स त्याचाधकर्मा ण माचिध्वा रेचा। दे वा म मीती। वा चा ताटिनाखण्म् । ओपइ ळाप्ला ॥१७॥
॥ वसुरोचिषस्सौर्यवर्चस्यसामनीद्वे ॥
श न्नो दे वीःती। आ भी ष्टाटियाखइ श न्नो भु वाशुम् । तू पी ताटियाखइ श य्यो र भीःशु। श्रा वा न्तूटिट्नाखऔ हो वाशि। ऊखपाश ॥१८॥
हु वाताहोपइ श न्नो दे वीप्लुर भि ष्ट याङिइश। हु वाताहोपइ श न्नो भु वाप्लुन्तू पी ता याङीइश। हु वाताहोपइ श य्यो र भीप्लुस्र व न्तुङिनाःश। हु वाताहोटयाखऔ हो वाशि। ऊखपाश ॥१९॥
॥ गौराङ्गिरसस्यसामनीद्वे ॥
क स्या नू नाटीम्पा री णाखिसीण। धी यो जि न्वाटीसी सा त्पाखिताणइश। गोचषा ताचाया स्याटाट्ताखऔ हो वाशि। उ प्गीखाराःश ॥२०॥
ओकहो वाथाइ हु वाटिइ हु वाचिएत। क स्य नू नाखीम्पा रीचाणा सीफा। ओकहो वाथाइ हु वाटिइ हु वाचिएत। धी यो जि न्वाखीसी साचात्पा तीफाम् । ओकहो वाथाइ हु वाटिइ हु वाचिएत। गोषषा ता य स्य ता गाखूइश। राःत्र ॥२१॥
चतुर्थ खण्डः (ऋ-१५, सा-२२)
॥ भारद्वाजस्यौपहवौद्वौ ॥
य ज्ञा य ज्ञाती। वोतग्न याताई गी राटिगि राखाहाशप्लहातइ चाचाद क्षाखासाणइश। प्र प्राटाच्वाकय म मृ तषीन्जा ता वेयिदा साटाम् । प्री याचाम्मि त्राकिन्नाकिशं सि षा मेकीहि या औ हो औ होखूइ ळाप्ला ॥१॥
य ज्ञा य ज्ञाती। होतइ वोताग्ना याकाएखहि याणा। गी राकाच्गीचरा चाटादाचक्षा साचाइश। प्र प्राथाच्वा याचामाकमृ त न्जा ता वेटुदाखसणम् । प्री यचाम्मि त्रा न्नाकिशं सि षा मेकीहि या औ होखाइ ळाप्ला ॥२॥
॥ श्रुष्टीगवम् ॥
या ज्ञा या ज्ञाटीवो अ ग्ना याटीइश। गा इ रा गा इ राटूचा द क्षा साटीइश। प्र प्रा वा याटीच्माकमृ त न्जाकिता वेटादाखसणम् । प्राचयायम्मा इ त्रा न्नाचीशांयसाटइ षाखाण्म् । ओपइ ळाप्ला ॥३॥
॥ अग्नेश्चयज्ञायज्ञीयम् ॥
य ज्ञाणाय ज्ञाणावोफअ ग्नाखायाणइश। गा इ रा गी रा चाटूदा क्षापासा इशा। प्र प्राटाच्वाकय म मृ त न्जा तापूवाशहि म्माचाइश। दातसातम् । प्रा य म्मि त्रा न्ना शांकूसि षाकाबुश। बाख ॥४॥
॥ कार्तवेशञ्च ॥
पा हि नो आखीग्ना ए क याप्ली। पाचह्यु त चि ताचीइ यायायाट। पा ही गीटिर्भि स्ति सृ भी रूचुर्जांकपायताटइश। पा हीकाचा तौकाहोतवात। स्र भि र्वाटिसाखण्बुश। ओपइ ळाप्ला ॥५॥
॥ नार्मेधञ्च ॥
पा ही नोषिअ ग्न ए क यातुएत। पाकहा उ ताटिद्वि ता इ यापीयाश। पा हाटाइ गाखाइ र्भीःणा। ता इ सृ भी रूकुर्जा म्पा ताटिऔ हो औ होखीवाण। पापही हाचाइश। चाकता सृ भाटिऔ हो औ होखीवाण। वापसा वे हि या हाप्लु। होप्लइ ळाशा ॥६॥
॥ महाकार्तवेशञ्च ॥
पा हि नो अ ग्न एफूक यातापापह्यू त द्वी तीप्लीयाङयाश। पा हि गी र्भीषीस्ति सृ भि रू र्जा म्पाखूताणइश। पा हाचाइश। चाखता हा ओ वाशी। सृ भि र्व सोती। ऊटपाख ॥७॥
॥ भारद्वाजस्यपृश्नीद्वे ॥
बृ हा त्भीपिर ग्ने र र्च्चि भी र्हा बुशृ। शु क्रा इ णा देकुवा शो चि षाचीभा राकाद्वायजेटहो वाटाहातइश। स मीचाधा नोथायाचवीयष्ठि याटाहो वाटाहातइश। रे वाचात्पायवाटहो वाटाहातइश। का दी दिकिही इ ळाटिभाखण्। ओपइ ळाशा ॥८॥
बृ ह त्भी र ग्नेषुर र्च्चि भीतिरेत। शु क्रा इ णा देकुवा शो चि षाचीभाकराचद्वायजेटओ वाका। स मीचाधा नोथायाचवीयष्ठि याटाओ वाका। रे वाचात्पायवाटओ वाका। का दी दिकिही इ ळाटिभाखण्। ओपइ ळाप्ला ॥९॥
॥ उरोराङ्गिरसस्यसाम ॥
त्व य्यापाग्ने स्वा हु ता हा बुशृ। प्रि या सा सचीन्तु सूकारा योचाय न्ताकारोययापईफमा घा वा नोफीज नातानातम् । ऊचर्वायन्द याटाहातच्न्ताकगो नाकामी ळाटाभाखण्। ओपइ ळाशा ॥१०॥
॥ गौतमस्यपौरुमुद्गेद्वेपुरुमुद्गस्यवाङ्गीरसस्यदेवानांवा ॥
अ ग्ने ज रि त र्वि स्प तिषृरौ हो वा ए हि यातूहातबुश। त पाकानो देटावाचर क्ष साचिअ प्रोकाषायइ वाटान् । गा र्हा पा ताटीइ र्मा हंकियाखसीण। दी वाचास्पा यौकावा उ वोखिवाप्लहातहातइश। दु रो ण यूःप्ली। होप्लइ ळाशा ॥११॥
अ ग्ने ज रि ता र्वीफूस्प तीतास्तापपा नो दे व र क्ष साःशू। ता पा नो दे वषुर क्ष सा अ प्रो षीटूवातन् । गृ हाचाप ता इ र्माचीहंकयाखसीण। ओखहाप्लहातहातइश। दी व स्पाचियूःट। ओखहाप्लहातहातइश। दु रोटाच्णाकयूःच। ओखहाप्लहा हाखाण्इश। ओपइ ळाशा ॥१२॥
॥ मण्डोर्जामदग्न्यस्यसामनीद्वे ॥
अ ग्ने वी वातीहातबुश। स्वाकदू षाटासातश्चा इ त्रांटिहातइ रा धोटिहातअ माटार्ताखयणम् । आचदायशु षेटा। जा ताचावे दोथाच्वा हाकातूयवाटम् । अ द्या हो इ दाटुइ वताम् । ऊकषा र्बुटाट्धाखऔ हो वाशि। हु वेतावा सूःटाख् ॥१३॥
अ ग्ने वि वषीस्व दु षातिसाःत। चि त्रं रा धोकीअ माकार्क्त्या माकादायशू षेटा। जा ताचावे दोथाच्वा हाकातूयवाटम् । अ द्या दाटिइ वताम् । ऊकषा र्बूटाट्धाखऔ हो वाशि। वि दातावा सूःटाख् ॥१४॥
॥ भारद्वाजस्यगाधम् ॥
त्व न्नापाश्चि त्र ऊ त्याशी। वा सोचाराकधांचसि चोकादाययाटआ स्याकाराखयाणइश। त्वाचमा ग्नेकाच्रा थाकाइ रायासीटवी दाकागाखधणम् । तु चोताहातइश। तूकना औटाहोखबाप्ल। होप्लइ ळाशा ॥१५॥
॥ गौतमेद्वे ॥
हा बु त्व मिषीत्स प्र था य सि हातूबुश। अ ग्ने त्राचिताकॠ ताःकाक वापाइ र्हाप्लाहाङइश। त्वांचवि प्राकास स्साचामी धाकान दी दी वापीहाप्लहाङइश। आ वी वा सापीहाप्लहातच्न्तीकवोपबाप्लधा सोप्ला। हा इशा ॥१६॥
त्व न्त्वा मेति। इ त्साकीप्रा थाचाया सोकायाखसीण। अ ग्नेचात्राकताचॠ ताःचाका वाकाइः काखावीःण। त्वांचवि प्राकास स्सा मी धाकीनाचदी दी वोकिदाखइ वाःणा। आ वि वाकिसाटहातच्न्तीकवे धाटासाःखण्। ओपइ ळाशा ॥१७॥
॥ अग्नेरायुः ॥
आ नो अ ग्नेषीव यो वृ ध मेतुरा याखाइशम् । पातच्वा काकाशांयसाटयातम् । रा स्वाचाच न उ पाचीमा तेथापू रूयास्पृ हाटाम् । सू ना इ ता इ सूटूहातइश। या शाचास्ताकरा मौपाहो बाप्ला। होप्लइ ळाशा ॥१८॥
॥ अग्नेर्हरसीद्वे ॥
यो वी स्वा दाखीया ते वा सूशी। हो ताटाम न्द्रोटाच्ज नाचानाशम् । मा धोटार्ना पाटात्रा प्र थ मा न्य स्मैचू। प्रा स्तोटामा याटाचन्तूकवोपबाप्लग्ना योप्ला। हा इशा ॥१९॥
यो वि श्वा द य तेषूव सु हातिबुश। हो ताटाम न्द्रोटाच्ज ना ना मोचीवाकओ वाका। मा धोटार्ना पाटात्रा प्र थ मा न्य स्माचूओ वाकाओ वाका। प्रा स्तोटामा याटाच्न्तूकवोपबाप्लग्ना योप्ला। हा इशा ॥२०॥
॥ दैर्घश्रवसेद्वे ॥
यो वि श्वा द य तेषूव स्वो हा ओ हातुएत। हो ताटामकन्द्रो ज नाकिना मोटाहातओटहा एखाम धोखार्न पाता। त्रा प्राकाथ माकान्नाचया स्माकाओटहातओटहा एखाप्रा स्तोखामा याताच्न्तूकवोपवोपबाप्लग्ना योप्ला। हा इशा ॥२१॥
यो वि श्वा द य ते व सूतूएत। हो ताचाम न्द्रो ज नाचीम्माकधोचर्ना पौ वातित्। त्रा प्र थ मा न्य स्मैचूप्राकस्तोतमा यौ वातित्। त्व ग्नाचाया इ ळाटिभाखण्। ओपइ ळाशा ॥२२॥
पञ्चम खण्डः (ऋ-११, सा-१६)
॥ अग्नेराग्नेयेद्वे ॥
ए ना वो अ ग्नि न्नातूओ म साति। ऊ र्जो न पाकीता मायाहु वेटा। प्रा य न्चेचिति ष्ठाटामा र तिंचिसू आ ध्वा रांभि। वि श्वाचास्यायदूट। ताचमा मृचाताकमि ळाटाभाखण्। ओपइ ळाशा ॥१॥
ए ना वो अ ग्निषुन्ना म सातूहातबुश। ऊ र्जो न पाकीता मायाहु वेटाहातबुश। प्रा य न्चेचिति ष्ठाटामा र तिंचिसूटआ ध्वा रांभिहातबुश। वि श्वाचास्यायदूटहातबुश। ताचमा मृचाताकमि ळाटाभाखण्। ओपइ ळाशा ॥२॥
॥ गौतमस्यमनार्येद्वे ॥
ए ना वो अ ग्नि म्मेतून म साति। ऊकर्जो न पाटिच्ता माचाहु वेकाप्राटयातम् । चा इ तीचिष्ठा माकार तिंटाच्सू आकाध्वायराटम् । वि श्वाकास्यायदूट। ताचमा मृचाताकमि ळाटाभाखण्। ओपइ ळाशा ॥३॥
ए ना वो अ ग्नि न्नषूम स ऊ र्जो न पोतूवात। ता माचाहु वेकाप्राटयातम् । चा इ तीचिष्ठा माकाराटतींत। स्वाथध्वा रं वि श्व स्याटुदूत। ताचमा मृचाताकमि ळाटाभाखण्। ओपइ ळाशा ॥४॥
॥ दैवोराजञ्च ॥
शे षे व नाफीइ षु मा तृ षूकु। सा न्त्वाकामा र्ताकाच्साकइ न्धाटातातइश। आ त न्द्रोकिच्ह व्यंचाव हाकासा इ हा वीटीष्काखर्ताःण। आ दि द्देकिवाचइश। षू रा जाटिजाटिसाखण्इश। ओपइ ळाशा ॥५॥
॥ गाधिनश्चकौशिकस्यसाम ॥
अ द र्शि गाषीतु वि त्त मातुएत। या स्मि न्व्राकीता न्याटाच्द धु रूकिपोयषू जाटाहातहातइश। ता माचार्याकस्या वाचार्धा नाकाम ग्नाकाइ न्न क्षाटिहातहा न्तु नो गीचीरा इ ळाटिभाखण्। ओपइ ळाशा ॥६॥
॥ बार्हदुत्थेद्वे ॥
अ ग्नि रु क्थातीइश। पु रो हाखिइ ताःणा। ग्राकवा णोकाबचर्ही रा ध्वाखिराणइश। ऋ चा या मिषीम रु तो ब्र ह्माचुणायस्पा ताटाइश। दा इ वंटिआ वोटाच्वाकरोपबाप्लणा याप्लाम् । हा इशा ॥७॥
अ ग्नि रु क्था बु होतूहोतहातइश। पु रौ वा उ वोखुवा हि तःशि। ग्राकवा णोकाब र्हि रौकिवा उ वोखिवा ध्व रा इशी। ऋ चौटाहोतया मि म रु तोषुब्र ह्मा णायिस्पा ताटाइश। दा इ वंटिआ वोटाच्वाकरोपबाप्लणा याप्लाम् । हा इशा ॥८॥
॥ पौरुमीढञ्च ॥
अ ग्नि मीफिळि ष्वाखाऔणहोफवाश। अ व सेकिगा धा भीचिश्शीथराकशो चाटाइ षाताम् । अ ग्निं रा या इषपु रू माटिइ ढाता। श्रू त न्न रो अ ग्नि स्सूटूदीत। ता या इ च्छापीर्दीत्र। द क्षातायाटाख् ॥९॥
॥ कार्णश्रवसम् ॥
श्रु धीताश्रूपधि श्रु त्क र्ण व न्हि भा इःशृ। देकवै रा ग्नेकिसा या वाटिभीःत। आकसी द तु ब र्हि षिषूमि त्रो अ र्याटीमात। प्राकत र्याटावात। भाटइ राखाऔ हो वाशि। एतध्व रातायाख ॥१०॥
॥ दैवोदासञ्च ॥
प्रषदै वो दा सो अ ग्नीःतू। देकव इ न्द्रोकिना म ज्मा नाचीम् । आ नू माटिच्ताकरंचपृ थि वींटिवि वा वृ ताचीइश। त स्थौ नाभिकात। स्या शकार्म णि इ ळाटिभाखण। ओपइ ळाशा ॥११॥
॥ सौकृतवञ्च ॥
अ ध ज्मा ओ वातु। आचधा वाकादायइ वाःटा। बृ ह तो रो चाचुनायदा धिटा। आ यौ होकिऔ होतावात। वा र्ध स्वाचित न्वाथागाचइ रायम माटा। आ जा ता सौकीहो औ होतिवात। हाफहा उ वाति। कृ तो पृ णाखी ॥१२॥
॥ काण्वेद्वे ॥
का य मा नोफीव ना तु वाकीम् । यकन्मा तृटारा जा गकिन्नाखपाःण। न त त्त यातीग्नातइशप्र मृ षेटिहातइशनी वाटार्ताखनणम् । य द्दू राटिइ सातान् । इ हाकाच्भूकवा औटाहोखबाप्ल। होप्लइ ळाशा ॥१३॥
ए का याति। मा नोकाव नाकातूखवाप्लमो इ तूखीवा मु हु वा हा इशू। औटहोतइ य न्मा तृटीरा जा गकिन्नाखपाप्लआखपा उ हु वा हा इशू। औटहोतच्इ नाकात त्त याटिग्ना इ प्र मृटीषा इ नी वाटीर्ताखनाप्लआ न्ताखाना मु हु वा हा इशू। औटहोतच्इ य द्दू रेकीस न्नि हाटिभूखवाप्लआ भूखावा उ हु वा हा इशू। औटहोतयाटख्औ हो वाशि। ऊखपाश ॥१४॥
॥ मानवेद्वे ॥
नि त्वा म ग्नातीइश। म नु र्दाखिधाणइश। ज्यो ति र्ज नाकीयाचशायश्वा ताटाइश। दीकदा इ था ककीण्वा ऋ त जाटीत ऊटाक्षाखइ ताःणा। य न्ना माटिस्यातन्ताटट्इ कृखाऔ हो वाशि। ष्टाखयाःप्ल ॥१५॥
हो वा इ नि त्वा मषूग्ने म नु र्द धे होतूवातइश। ज्यो ति र्ज ना यषुश स्व ते दा इ देचूथा क ण्वाकिऋ त जाटिओ त ऊटिक्षाखइ ताःणा। य न्ना माचिस्यातन्ताटट्इ कृखऔ हो वाशि। ष्टाखयाःप्ल ॥१६॥
षष्ठ खण्डः (ऋ-८, सा-१०)
॥ अग्नेश्चद्रविणम् ॥
दे वोणफवोखद्र वि णो दाःशी। पूकर्णां वि व ष्ट्वाटीच्सीकच मू द्वायिसि न्चाटा। ध्वा मु पा वाटीपृ णाकाध्वा माचादीयद्वो देटा। वा ओचाह ता इ ळाटीभाखण्। ओपइ ळाप्ला ॥१॥
॥ बार्हस्पत्यञ्चब्राह्मणस्पत्यंवा ॥
प्रै तू ब्राखिह्मा णा स्पा तीःप्ली। प्रा दा इ व्येटीच्तूकसू नृ ताकिअ च्छाटावाखइ रणाम् । न र्यं पतिच्न्ती राचाधायसाटम् । दे वाटायाखज्ञणम् । नाटयाखऔ हो वाशि। तूखनाःश ॥२॥
॥ वसिष्ठस्यचवीङ्कम् ॥
ऊ र्ध्व ऊ षु णाकुऊ तापायाणइश। ति ष्ठा दे वो न सःषूवि ता ऊ र्ध्वो वाटुजात। स्याचसाकनि ताकायाचदायन्जी भीःटा। वाकघाटत्भीकर्वींचभा या माटिहाखण्इश। ओपइ ळाप्ला ॥३॥
॥ विस्पर्धञ्च ॥
प्र यो रा याफीइ नि नी ष तातुइश। म र्क्तो य स्तेकीवा सो दा शा त्साकुवी राटान्धात। ता य ग्ने उ क्था शंकूसी नंथात्मा ना साटिहात। स्रा पो षाटिइ णाखाण्म् । ओपइ ळाशा ॥४॥
॥ ऐतवृधञ्च ॥
प्र वाःता। य म्भं पु रूटीणातम् । वीकशा न्देटावा य ताटिइ नाताम् । अ ग्निं सू क्तेषीभि र्व चो भिकीर्वृ णी माटिहाताइश। यां साटामा इ दाटिन्या इकान्ध ता इ ळाटीभाखण्। ओपइ ळाप्ला ॥५॥
॥ मनसश्चदोहः ॥
अ य म ग्निषीस्सु वी र्य स्य हातुबुश। आ इ शेकिच्ही सौ भ स्याचुहो वाटाहातइश। रा य ईकिशे स्वा प त्याकीस्याकगोयमा ताटाहो वाटाहातइश। ईकशे हाटाइ वृताहो वाटाहातइश। त्रा हाचाथाथना मि ळाटाभाखण्। ओपइ ळाप्ला ॥६॥
॥ समन्तानित्रिणिअग्नेरेकमिन्द्राग्न्योर्वाप्रजापतेर्वावरुणस्यद्वे ॥
त्व म ग्नेषिगृ ह प तातीइःश। त्वंकहो ता नोकिअ ध्व रा इ त्वा म्पोटूतात। वा इ श्वा वा राकुप्र चा इ ताभीऔकहोफवाप्लहाणइश। य क्षा इ याटीसीतहो वाटाहातइश। चा वा राटीयाखण्म् । ओपइ ळाप्ला ॥७॥
त्व माखाग्ने गृ ह प ता इःशू। त्वंकहो ताकानो अ ध्व रेकीत्वापम्पो ताफाऔ होफाऔ होफावातहातइश। वा इ श्वा वा राकुप्र चा इ तापीऔ होफाऔ होफवातहातइश। य क्षा इ यायीसापऔ होफाऔ होफवातहातइश। चा वा राटियाखण्म् । ओपइ ळाप्ला ॥८॥
त्व म ग्ने गृ हातुप तीःता। त्वं होखाताशनो अ ध्वाखिराणइश। त्वा म्पोखाताशवि श्वा वाखिराण। प्रा चे ताकिथ्य क्षा इ याटीट्साखऔ हो वाश। चा वा रीटियाखम् ॥९॥
॥ वमृस्यवैखानसस्यसाम ॥
स खा य स्त्वा बु होतूहोतहातइश। व वृ माखिहाणइश। देकव म्म र्क्ताटिहातस ऊटाताखयाणइश। अ पाचान्न पाखातशम् सु भ गौ वातीहातइशसू दंकासाखसणम् । सु प्रा तूटिर्क्तीतम् । आ ने हाटिसाखण्म् । ओपइ ळाप्ला ॥१०॥
सप्तम खण्डः (ऋ-१०, सा-१६)
॥ श्यावाश्वञ्च ॥
आ जु हो ताती। ह वि षा म र्ज याटूचध्वांयवाट। नि हो ता रषीङ्गृ हा पा ति न्द धाटूचइचध्वांयवापइ ळाखास्पा ताताइश। ना म साचिरा ता हाटिओ व्याटाम् । सा प री याकीता या ज तकीम्पापस्त्यो बाप्ला। ओ नाप्लाम् । हा इशा ॥१॥
॥ ऋतुसामनीच ॥
ओ इषाचि त्र इ च्छा इ शोयूस्त रु णापिस्या वा क्षाकिथाःफ। ओ इ न यो मा ता रायूव नु वापिइ ती धा ताकीवेफ। ओ अ नु धा यायुद जी ज नापीद धाचाचीकदाफ। ओषइ व व क्ष सा द्योयूमा हीटाद्यू त्या न्चाखिरात्रन् । दु त्य न्च र न्माटुहीख ॥२॥
चि त्राताएत। एतएपइ च्छि शो स्त रू ण स्य व क्ष थषेक्ष थो ही ही ही यातूहातबुश। एतएपन यो मा त रा व न्वे ति धा तषेवे त वे ही ही ही यातूहातबुश। एतएपअ नू धा य द जी ज न द धा चिषैदा चि दा ही ही ही यातूहातबुश। एतएपव व क्ष स्स द्यो म हि द्यु त्य न्च रषैन्च र न्ही ही ही यातूहा उ वाति। एतऋ तूटाख् ॥३॥
॥ यामञ्च ॥
ओखहाशप्लहातहातइश। ई द न्त आ इ कांटूपा रा ऊकित एखाकशम् । तृ ती ये न ज्योटुती षाचासं वी शाखिस्वाश। संकवे श ना स्ताटीन्वे चाकारु रेखाधिश। ओखहाशप्लहातहातइश। प्रि यो दे वा नांटुप र मापिइ जा नाखिइश। त्रात्रइश ॥४॥
॥ अग्नेश्चाग्नेयम् ॥
इ मं स्तोखिमाशम र्हा तेखिजाण। ता वेकाद सेचाहो येटार था मीखिवाशस म्मा हेखिमाण। मा नीकाष याचाहो येटाभ द्रा हीखिनःशप्र मा तीखिराण। स्या संकास दीचाहो येटाअ ग्ना इ साखिख्याणइश। मा रा इ षाखिमाण। वा यकान्त वाटाव होखइ ळाशा ॥५॥
॥ अग्नेर्वैश्वानरस्यसामनीद्वे ॥
मू र्धा होतिहातइश। न न्दाखाइ वाःणा। आ र ता इ म्पृ थीटूव्याकवैथश्वाषन र मृ त आ जाकूता माटाग्नीतम् । का विं स म्म्राषीज मा ति था इकुन्ज नाटनातम् । आकस न्ना पा त्रटीन्ज न यापिन्ता दाखाइश। वाःत्र ॥६॥
हो वा इ मू र्धा होतूहातइश। न न्दाकाइ वोटाआ रा तिंकिपृ थीखाव्याःप्ल। इ होकाइ हाकाइटया वैथाश्वाषन र मृ त आ जाकूत माखाग्निशम् । इ होकाइ हाकाइटया काथाविं स म्म्रा जाकीमा ति थिकिन्ज नाखानाशम् । इ होकाइ हाकाइटयाकआथस न्ना पा त्रंकीजा ना यकिन्त देखावाःप्ल। इ होकाइ हाकाईटयाखाऔ हो वाशि। ईख ॥७॥
॥ ऐटतेद्वे ॥
वि त्व दोतिहातइश। आ पो न प र्व ताकूस्या पाटारि ष्ठातात् । उ त्थे भी र ग्नेषुज ना य न्ताकीदाटइ वाःता। त न्त्वा गी रषीस्सु ष्टु त यो वाकुज याटान्तीत। आकजि न्न गा इ र्व वाटूहोतजा इ ग्यूटिट्राखऔ हो वाशि। अ श्वाःटाख् ॥८॥
हाफया या इ दी वोखुहा इ वि त्वाशीत् । आ पोकाना पाकार्वा त स्य पाखीरि ष्ठाशात् । हाफया या इ दि वोखुहा इ उ क्था इशु। भी रा ग्नेटिजा ना यकिन्त देखावाःप्ल। हाफया या इ दी वोखुहा इ त न्त्वाशी। गी राकास्सु ष्टू त यो वाकुज याखान्तिश। हाफया या इ दी वोखुहा या जिशिम् । ना गा इ र्व वाटुहोत। जा इ ग्यूटिट्राखऔ हो वाशि। अ श्वाःटाख् ॥९॥
॥ वामदेव्यञ्च ॥
आ वो रा जाती। न म ध्वा र स्य रूखूद्रशम् । हो ताकराचम् । सषत्य य जं रो द सीखूयोःप्ल। अ ग्निंचापू राचात न इ त्नो रा चीखूक्ताशत् । हि रचाण्य रू पाटिम व सापिइ का र्णूखि। ध्वात्रम् ॥१०॥
॥ वैश्यज्योतिषेच ॥
इ न्धाताओपइ हाणाबु हा बु हा बुशुरा जा स म र्यो नषूमो भी यो भी यो भीःतू। य स्याताओपहाणबु हा बु हा बुशुप्र ती क मा हु त ङ्घृ ताषैइ ना इ ना इ नातू। न राताओपहाणबु हा बु हा बुशुह व्ये भी रि ढ ते सषृबा धा बा धा बा धाःतू। अ ग्नाताओपहाणबु हा बु हा उ वातू। अ ग्राचामू ष साटिम शोकाउ वाता। चीख ॥११॥
हा बु हो वाकीहा बु हो वाकीहा बु हो वाकी। इ न्धे रा जाषीस म र्योचिनाकमोकभीटयो भीटायो भीःटा। य स्य प्र ति कषुमा हु त ङ्घृकूताकइ नाटाआ इ नाटिआ इ नाटि। न रो ह व्ये भीषुरी ढ तेचिसाकबाकधाटबा धाटबा धाःटा। हा बु हो वाकीहा बु हो वाकीहा बु हो वाकी। अ ग्नि रा ग्राचीमू ष साटिम शोकाउ वाता। चीख ॥१२॥
॥ यामेद्वे ॥
प्रा के तु नाकीबृ ह ता याकीती य ग्ना इषीहो इ हो वाकीहोचइश। आ रोथाद साचाइश। वृ षा भो रोकीरा वि ता इषीहो इ हो वाटीहोचइश। दीकव श्चि दा न्ताकीदू पा माकिमु दा नाषिढ्ढो इ हो वाकीहोचइश। अ पाचामु पा स्थेकिमा ही षोकिवा व र्ध हो इषुहो इ हो वाकीच्हायउ वाटा। देतदि वाटाख्म् ॥१३॥
हा हा यौ हो वाषुइ प्राखाकेण। तु नाकाबृ ह ता या ति याखूग्निःप्ल। हा हा यौ हो वाषुआखरोण। द साचाइ वृ ष भो रो र वीखूतिश। हा हा यौ हो वाषुइ दीखावाःण। चि दा न्ताभिदू पा माकिमु दाखानाशट् । हा हा यौ हो वाषुआखपाणम् । उ पा स्थेभिमा हि षोकिवा वाखार्धाश। हा हा यौ हो वाषुहाखऔ हो वाशि। एतदि वाटाख्म् ॥१४॥
॥ प्रजापतेराशिमरायेद्वेमरायराशिनिवा ॥
हा बु हा बुषीहा वा ग्नीतीम् । न रो न रोषीन रो दीकिधि ति भीकिर राताण्योःच। हा बु हा बुषीहा बु हातिस्तातत् । च्यु ता न्चु ताषीन्चु ता न्जकिना या त प्राकीशातस्तचम् । हा बु हा बुषीहा बु दूतिरातइश। दृ शा न्दृ शाषीन्दृ शा न्गृकिहा प ती माकीथातव्यूचम् । हा बु हा बुषीहा उ वाति। ईख। ॥१५॥
हा बु हा बुषीहा वा ग्नीतिम् । न रो दीतिधी ति भीकिर राताण्योटण्योटण्योःच। हा बु हा बुषीहा बु हातिस्तातत् । च्यू ताचान्जकना या त प्राकीशातस्तंटस्तंटस्तचम् । हा बु हा बुषीहा बु दूतिरातइश। दृ शा न् गृकीहा प ती माकीथातव्यूंटव्यूंटव्यूचम् । हा बु हा बुषीहा उ वाति। ईख ॥१६॥
अष्टम खण्डः (ऋ-७, सा-९)
॥ श्येनञ्च ॥
अ बो धि याती। ग्ना इ स्स मी धाकुज नाभानातम् । प्र ता इ धेभीनूतम् । इ वाकाया तीचामूकषा संथाय ह्वा ईभिवात। प्र व या मु ज्जिचुहा नाःथाप्र भा न्नाभिवाःत। स स्रा तेकिना काकामाचच्छा इ ळाटिभाखण्। ओपइ ळाशा ॥१॥
॥ वासोक्रञ्च ॥
प्र भू र्ज य न्तातुम् । मा हांणाफ्वि बोखाधाशम् । मूकरै र मू र म्पु राषून्द र्माटाणातम् । ना याणाफ्न्त ङ्गीखार्भिःश। वा णाणाफ्धि याखान्धाःप्ल। ह रि श्म श्रु न्नषुव र्म णाफिहा उ वाशि। ध नातार्च्चीखम् ॥२॥
॥ पौष्णञ्च ॥
शु क्र न्ते अ न्यषुद्य ज त न्ते अ न्यातूत् । वि षु रू पेषीअ ह नी द्यौकीरी वाटासीत। वि श्वा हि मा याषुअ व सा इ स्व धाटूवातन् । भ द्रा तेटिपु षाटान्नी हा राकिती राखास्तुश। ती रा स्तु हाप्लीबुश। बाश ॥३॥
॥ कौत्सञ्च ॥
इ ळा म ग्नातीइश। पु रू दं सं स नीखूङ्गोःप्ल। श श्व क्त मंषीह व मा ना य साखूधाःप्ल। स्या न स्सूषिनु स्त न यो र्वी जाकूवाखग्ना इ सा ता इशु। सू माणाफ्ति र्भुखतु हा उ वाशी। स्माखइश ॥४॥
॥ काश्यपेद्वे ॥
प्र हो ता जा ताःतु। मा हा न्न भो वा इषूनृ ष द्माटिसीत। दातच्दकपां वि व र्ता इषुद ध द्योटिधात। या इ सू तेषीव यां सि य न्ताकुउ वाता। वा सू नी वीकीधाचतोटट्याखऔ हो वाशि। त नूतापाख ॥५॥
प्र हो ता जा तषुउ हु वातिहातइश। मा हाटान्न भोटावा इ नृ ष द्माटुसी द द पांकीवी वाटार्तातइश। ओ औकाहोतइ हाता। दा धाटाद्यो धाटाया इ सु तेषीव यां सि य न्ताकुवा सूट्नीत। ओ औकाहोतइ हाता। वी धाकाता इ त नूटीट्पाखऔ हो वाशि। हा वि ष्माटितेख ॥६॥
॥ घृताचेराङ्गिरसस्यसामनीद्वे ॥
प्र स म्म्रा जातीम् । आ सु र स्य प्रा शाखूस्तशम् । पुं सः कृ ष्टा इ नाटूमा नु माकिदी याखास्याश। इ न्द्र स्ये वाखीप्रा ता वा सः कृ ताखूनिश। व न्दचाद्वी राथाव न्दचामा नाथावि वाटाष्टूखऔ हो वाशि। दीखश आःप्ला ॥७॥
अ र ण्योःति। नि हि तो जाखीत वेखादाःप्ल। ग र्भ इ वेषीत्सु भृ तो गफुर्भि णाखाइ भीःप्ला। दी वे दी वषीई ढ्यो जाकिगृ वाटात्भीःत। हाखवीप्लष्माखत्भीःण। म नु ष्ये भी र ग्निषूरे हि या हाप्लू। होप्लइ ळाशा ॥८॥
॥ भारद्वाजस्यप्रासाहम् ॥
अ हा वो अ हा वोषूअ हाता। सा ना द ग्ना इकुमृ णा सी याकीतू धाखानाशन् । न त्वा र क्षां सीकुपा र्ता नाकिसु जीखाग्युःप्ल। अ नु द हाकीस ह मू राकीङ्क याखादाःप्ल। अ हा वो अ हा वोषूअ हाता। माकता इ हेकित्या मु क्ष त दापुइ वी याखि। याःत्र ॥९॥
नवम खण्डः (ऋ-१०, सा-१३)
॥ पाथेद्वे ॥
आ ग्नाटाउ वोखावाश। ओ जीचाष्ठा मा भा राटाउ वोखावाश। द्युकम्न म स्माचिभ्य म ध्रि गोतीओ इ प्रा नाटीउ वोखावाश। राकये पा नीकिय सेताओ इ रा त्सा उ वोखावाश। वा जाथाच्याकपटन्धाखम् ॥१॥
अ ग्नेताहातबुश। ओ जी ष्ठा मायीभा राटाऔ होखावाश। द्यु म्न म स्म भ्या मायूध्री गाटाऔ होखावाश। प्रा नो रा ये पा नीयूया साटाऔ होखावाश। रा त्सीटावा जाटाच्याकपोपबाप्लन्धा यांप्ला। हा इशा ॥२॥
॥ बृहच्चाग्नेयम् ॥
य दि वी रोषीअ नु ष्या द य्याखुईखयाश। अ ग्नि मि न्धी त मौचूहोटहातहो वाटार्त्याःत। आ जुटाबा क्ताटार्व्या माटानूखषाणत् । शकर्म भ क्षा इ ता दाटूहातइ वाताओपबाप्ल। व्याखम् ॥३॥
॥ कौन्मुदम् ॥
त्वेकषा स्तेपाधू म ऋ ण्व ती हा बुशृ। दि वि स न्शूचीक्रा आकातायतापसू रो न हि हा बुशू। द्यु ताचातूयवापङ्कृ पा प वा हा बुशृ। का रो चाटिसाखण्इश। ओपइ ळाप्ला ॥४॥
॥ बृहचैवाग्नेयम् ॥
त्वं हि क्षै त व द्यषूश इ य इ य्यातुहातइश। अ ग्ना इ मि त्रो नाकूपा त्याखासाणइश। ओ औकाहोखइ याप्लाहाणइश। त्वं वि चा र्ष णेकुश्राखवाःण। ओ औकाहोखइ याप्लाहाणइश। वा सोकाआपपु ष्टा इ न्ना पूकुष्याखसीण। ओ औकाहोखइ या हाप्लि। होप्लइ ळाशा ॥५॥
॥ कौन्मुदञ्चैव ॥
प्रा त र ग्ना इः पूतूरू प्री याःति। वी शाकास्त वेटाता अ ति थातीइःश। वा इ श्वे याकीस्मि न्ना माटिर्ताखयाणइश। हा व्यांटाहो इ म र्ताटीहोकथ्सा इ न्धाटिताखण्इश। ओपइ ळाप्ला ॥६॥
॥ अग्नेर्यद्वाहिष्ठीयेद्वे ॥
य द्वा हि ष्ठ न्त दातू। ग्ना या इषिबृ ह द र्चा वीतुभा वाटासातबुश। मा हीटाषा इ वाटित्व द्र यि स्त्वा द्वाटूजाःत। ऊ दी राटिताखण्इ । ओपइ ळाशा ॥७॥
य द्वा हि ष्ठ न्त दषुग्न ये य द्वा हि ष्ठोतूवात। ता द ग्न या इषुबृ ह दाटिर्चातच्वीकभाचवा साचाबुश। म ही षाटिइ वातात्व द्र यी स्त्वा द्वाटुजाःत। ऊ दी राटिताखण्इ । ओपइ ळाप्ला ॥८॥
॥ अग्नेश्चविशोविशीयम् ॥
वि शो वि शो हिं वोतूअ ति थाखिइशम् । वातचज यकान्ताः पूटारू प्रीपयाशम् । अ ग्निं वोटिदू रापायाशहि म्माचाइश। वातचातस्तूपषे हाणाइश। ओ होकावा इ शूखिषाणहि म्माचाइश। स्यातमातन्माखभा ए हि याप्लीहाश। होप्लइ ळाशा ॥९॥
॥ प्रजापतेःकनीनिकेद्वेअत्रेर्वा ॥
बृ ह द्व याःती। ही भा नाटिवातइश। अ र्चा दे वा या ग्नाटूयातइश। य म्मि त्र न्न प्रा शायूस्ता याटाइश। म र्ता सोपिदाश। धी रोखाबाप्लपू रोप्ला। हा इशा ॥१०॥
बृ ह द्व योषीहि भा न वातीएत। अ र्चाचादे वाथाच्याकअ ग्नाटायातइश। य म्मि त्रकिन्न प्राकाशायस्ताटाइश। माकर्क्ता सोथाद धा इ रेयीपु राटाऔ हो हाखिऔ हो वाशि। वातहाःटख् ॥११॥
॥ श्रौतर्वणञ्च ॥
अ ग न्म वृती। त्रातह न्तापामशम् । ज्या इ ष्ठाकिमा ग्नि मा नापीवशम् । या स्माटाच्होकइ श्रुकात र्व न्ना क्षाषीइ बृ हाटूच्द्धोचया नीकाक याताआ उ वा एभी। ध्याखतेश ॥१२॥
॥ कश्यपस्यसयोनिः ॥
जा ताःचाप रेटाच्णाकधा ईटाहाकथ्र्मा णा इटिहा योखानिशम् । यो नि मि न्द्राकीश्चकथ्ग च्छ थोकीय स्ताटावृ द्भिटासाकहा ईटाहाकथ्भू वा ईटिहा योखानिशम् । यो नि मि न्द्राकीश्चकथ्ग च्छ थाःकि। पि ता याटित्काकश्या पा ईटिहाकथ्स्या ग्ना ईटिहा योखानिशम् । यो नि मि न्द्राकीश्च ग च्छ था श्र द्धाकूमा ताथाच्माकना ईटाहाकथ्का वा ईटिहा योखानिशम् । यो नि मि न्द्राकीश्च ग च्छ थाःखी ॥१३॥
दशम खण्डः (ऋ-६, सा-७)
॥ बार्हस्पत्यञ्च ॥
सो मं रा जाषीनं व रु णातीम् । अ ग्नी म न्वाकीर भा म हेचीहो वाटाहातइश। आथदि त्यं वि ष्णुंकीसू र्यंकाहो वाटाहातइश। ब्र ह्मा णाटिञ्चातहो वाटाहातइश। बृ हाटाउ वाता। स्पाखतिशम् ॥१॥
॥ ऐषञ्चारूढवदाङ्गिरसम् ॥
आ रूटाच्हकन्ना रूटाहकन्ना रूटाच्ह न्क। इ त ए ताचीऊ दाकाच्रूयहाटन् । दी वाःचापृ ष्ठा न्नि याकीरूयहाटन् । प्रा भुकार्ज योकाच्या थाकापायथाट। उ द्याचाम ङ्गीकाच्रा सोकायाययूःट। आ रूटाच्हकन्ना रूटाहकन्ना रूटाट्हाखऔ हो वाशि। ऊखपाश ॥२॥
॥ आसीतेद्वे ॥
रा ये अ ग्ने मा हातूइश। त्वा दा ना य स मीकूधी माटाहीत। आ इ ळिटिष्वा हीटामाकहेचवृ षाचान् । द्या वाटाहो त्राटाच्याकप्रोपबाप्लथा वाप्लाइश। हा इशा ॥३॥
रा याकायापग्ने म हे त्वा हा बुशू। दा ना य स मीकुधी माटाहातइश। आ इ ळा इ ष्वाटूहातइशमा हेकावाखर्षाणन् । द्या वा होभित्रातयाकप्रोपबाप्लथा वाप्लाइश। हा इशा ॥४॥
॥ त्वाष्ट्रीसामच ॥
द ध न्वे वाफीय दी म नूकी। वो च त्ब्र ह्मेषीती वे रू त त्पातुरी वि श्वाटिच्नी काचाव्याश। ना इ मीषिच क्रा उ वाकूमीखवाश। भू वा दौपिहो बाप्ला। होप्लइ ळाशा ॥५॥
॥ मानवञ्च ॥
त्व व म ग्ने त्व म ग्नातूइश। वा सुं रि हाषीरु द्रं आटिदीतत्यंचऊ ताका। या जा सूटिआतध्वाकर न्ज नाचिमा नु जाटितातम् । घृ त प्रूचिषा मि ळाटिभाखण्। ओपइ ळाप्ला ॥६॥
॥ अगस्तस्यचराक्षोघ्नम् ॥
प्र त्या ग्नेफिप्लहो इ ह र साखुह रा एप्लि। श्रृ णा हि वाटीइ श्व ताःखाणफप्ल्। प्राखतीश। याटतू धा नाचि। स्य र क्ष सोचीबाटलातम् । न्यु ब्जाताओपबाप्ल। रीखयशम् ॥७॥
एकादश खण्डः (ऋ-११, सा-१८)
॥ तौदेद्वे ॥
पु रूता। त्वाकदा शि वं वो चा एपूदा री र ग्ना इशु। ताकव स्वि दाचि। तोकद स्ये व श र ण याटूहोचइश। म हाटाहो येटास्यो याखाऔ हो वाशि। ईख ॥१॥
पु रू त्वा दाषीशि वं वो चेतुत् । आ री राखिग्ना इशाता वा स्वाखिइ दाणा। तो द स्ये वषीश र ण याखीहाणइश। माटहातहो येटास्यो याखाऔ हो वाशि। ईख ॥२॥
॥ दैर्घतमसानित्रीणि ॥
पु रु त्वा दाषीशि वं वोतिचेतत् । आ रा इ रापीग्ना इशा। ता वा स्वाखिइ दाणा। तो दा स्याखिइ वाशाशा रा णाखियाण। मा हाखास्यात्र। एतच् ॥३॥
पु रू त्वाखिदा शि वं वो चेशुत् । अ रि र ग्नाषीइ त वाटिस्वाखइ दाणा। तोखदाप्लस्याखइ वाशाशा रा णाखियाण। मा हाखा। स्यात्र ॥४॥
। पु रू त्वापिदा शि वं वो चे द्धा बुशृ। हाकबु होटाहा उ वोखिवाण। अ रि र ग्नेकीत वा स्वीकिदाच। हाकबु होटाहा उ वोखिवाण। तोकद स्येकाव श राकिणा याचा। हाकबु होटाहा उ वोखिवात्र। एतचमाकहाटस्याख ॥५॥
॥ श्यावाश्वस्यप्रहितौद्वौ ॥
प्र हो त्रे पूती। व्यं व चो ग्न याटुइ भाचाराकताचबृ हाचात् । वी पा न्जोटितीतम् । षी बा इ भ्राटीट्ताखऔ हो वाशि। न वेताच्धाटसेख ॥६॥
प्र हो त्रा इ पूखुर्वी यं वा चाःप्ली। आ ग्न येटिभाचर ताकाच्बृकहाटत् । वी पा न्जो ती षी बीफूभ्र ताताइश। नापवेशधाखसोप्ल। हा इशा ॥७॥
॥ प्रजापतेःश्रुधीयेद्वे ॥
अ ग्ने वा जाफीस्या गो मा तोचीवाश। ईकशा न स्सा ह सोकुया होकाअ स्मेकादे हीकाजा ताचावे दोथाम हाटाइ श्र वाटिउ वाता। श्रोचधि याटाएटहि याखाण्। ओपइ ळाशा ॥८॥
अ ग्ने वा जषीस्य गो म तोतीहोतवात। ईकशा न स्सा ह सोकुयाखहोश। आचस्मेयदा इ हीपिजा ताप्लावे दोता। मापहीशश्राखवोप्ल। हा इशा ॥९॥
॥ प्रजापतेःसदोहविर्धानानित्रीणिसदःपूर्वंहविर्धाने उत्तरे ॥
अ ग्ने य जि ष्ठोषुअ ध्व रातिएत। दे वा न्दे वाचीया ताकाइ यायाजाटहु वाताहो वाका। हो ताचाम न्द्रोथाच्वी राकाजायसीटहु वाताहो वाका। आ ति स्राटिइ धाःखाण। ओपइ ळाशा ॥१०॥
आ ग्नाफाइ याखाईखयाश। या जि ष्ठो अ ध्वा राषूइ दे वा न्देतीवा य तेटिहा बु हो वाकी। या जाटाहो ताटाम न्द्रोथावीकरा जापासीश। आटती याखाऔ हो वाशि। स्रीखधाःप्ल ॥११॥
अ ग्नि या ओ वातु। या जि ष्ठो अ ध्व राषूइ दे वा न्दाटीइ वाता। आ या तेचिया जाटाहो तापाउ वाशा। म न्द्रोथाच्वी राकाजाटसाखऔ हो वाशि। आथति स्री धाःटिख् ॥१२॥
॥ त्वष्टुश्चातिथ्यम् ॥
ज ज्ञा न स्साती। प्त माकाच्तृकभा इ र्मे धाकीमाखशाण। सा त स्राचियाटअ याटान्ध्रुखवाःण। र याटाइ णाताञ्चि का इ ताटीट्दाखऔ हो वाशि। ऊखपाश ॥१३॥
॥ अदितेश्चसाम ॥
उ त स्या नोखीदी वा मा तिःप्ली। आकदी ति रूकिति याचागायमाटत्सा शा न्ताटितात। मा याफास्क रा उ वोखीवाश। अ पा स्रि धाःप्ली। होप्लइ ळाशा ॥१४॥
॥ अगस्तस्यचराक्षोघ्नम् ॥
ई ळाकाइ ष्वापाहि प्र ति व्याशिम् । या ज स्वाकिजा ता वेकिद साटाञ्च रि ष्णु धू माखुम ग्र भातिइश। ताटशोखऔ हो वाशि। चीखषशम् ॥१५॥
॥ वार्क्जभञ्च ॥
न तोतावात। स्याखमाश। या या चा नाटीरीचपु री शीकित माताआ उ वाटि। र्तीखयाःप्ल। यो अ ग्न येषीद दा श ह व्य दोपूबाप्ल। ताखयेश ॥१६॥
॥ बृहदाग्नेयञ्चसङ्कृतंवा ॥
अ प त्यं व्र जि नंषूरि पुं स्ते नाखीम ग्नाताइश। दू रा धाटियाखन्दि वि ष्ठ म त्स्या साफूत्प ताताइश। कापर्द्धीशसूखगाप्लम् । हा इशा ॥१७॥
॥ अगस्तस्यचैवराक्षोघ्नम् ॥
हा बु श्रु ष्ट्या ग्नेषुन व स्या मेतहातबुश। स्तोकमा स्य वाकिई र वि स्प ता येपूऐ हि हा बु हो वाशू। नी माकाई नाकास्ता प सा रापीऐ हि हा बु हो वाशू। क्षा सापऐ ही हा बु हो वाशू। द ह ए हि याप्लुहाश। होप्लइ ळाशा ॥१८॥
द्वादश खण्डः (ऋ-१०, सा-१६)
॥ वसिष्ठस्यप्रमंहिष्ठीयानिचत्वारि ॥
प्र मं हाखिइ ष्ठा य गा य ताशू। ऋ ता व्नेटिच्बृ ह तेकिशु क्रापाशोशचातइ षाताइश। उ पा औपिहोशस्तु ता सोपिआशग्नाखयोप्ल। हा इशा ॥१॥
प्र मं हि ष्ठा य गातू। याचता ऋ ताटिव्नेटच्बृ हाकातायइ शूटाक्राकशो चाटाइ षाताइश। ऊ पाचास्तु तौटाच्हुकवा एटाहो वाका। साकवोपबाप्ल्ग्ना योप्ला। हा इशा ॥२॥
प्र मं हि ष्ठा या गाफुइ य्याखाईखयाश। याथता ऋ ता व्नेकीबृ ह ते शूटीक्रा शौटाहौटहु वाटीइ चा इ षाटीइश। उ पाकाहो इ स्तु ताकीहोकसोथअ ग्नाटायाखण्इश। ओपइ ळाशा ॥३॥
प्र मं हि ष्ठा य गाषूय त प्र मं हि ष्ठोतूवात। या गाकाय ता ऋ ताटीव्नेखई बृ ह तेणीशु क्रा शोफिचातइ षाताइश। उ पौफाहो वाताहातइश। स्तु तौफाहो वाताहातइश। स ओप्लाबा ग्ना योप्लि। हा इशा ॥४॥
॥ भरद्वाजस्यवाजभृत् ॥
प्रा सोटाहातआ ग्नेटाहातइश। त वाताआ उ वाटि। तीखभीःप्ल। सू वीचाराशभि स्ता राचिती वाचाज ककार्मा भि र्याचिस्याटहातइश। त्वं सापाख्य मो बाप्लिवा इ थोप्लि। हा इशा ॥५॥
॥ सौभराणित्रीणि ॥
त ङ्गूणाफ्र्धा याखास्व र्णाप्लारोङवाश। देकवा सोचादेकवा मा रा ताटीइ न्द धाटिहो इ न्वाटिइ राताइश। देथवा त्रा ह व्य मूटुहातहातइश। हाटइ षाखाऔ हो वाशि। ऊखक् ॥६॥
त ङ्गू र्ध या स्व र्णातूरातम् । देकवा सोकादाकइ वा माचिरा ताटाइ न्द ध न्वि रा उ वा इशॄ। देखवाशप्ल्त्रातहापव्य मो बाप्लिहा इ षोप्लि। हा इशा ॥७॥
त ङ्गू र्ध या स्वौकुहो आ र्णातिरातम् । दे वाटासोखदेण। वा मा र ताटीइ न्दाखाधाप्लन्वाखइ रा इशि। हा होखाहाणइश। दे वाटात्राखहाण। व्य मू हाखिणफप्ल्इश। षाखइश ॥८॥
॥ पथस्यसौभरस्यसामनीद्वे ॥
मा नाःता। हृ णीकाथाटआ ति थिंकिवा सुटाराखग्निःश। पु रौफाहो वाताहातइशप्र शौफाहो वाताहातइश। स्त ओ बाप्लिआ इ षोप्लि। हा इशा ॥९॥
मा नोताहातबुश। हापर्णी थाणाआणति थिंफाप्ल्वा सु राखिग्नाणइःश। पू रोचाहा होचाइशप्राकशोथहा होकाथ्स्ता येपाषा ए हि याप्लीहाश। होप्लइ ळाशा ॥१०॥
॥ दैवानीकञ्च ॥
भ द्रो नोफिओप्लहो अ ग्नि राखीहु ता एप्लि। भाकद्रा राथाताचइशसुकभ गाटाभ द्रोटाअ ध्वाखाराःण। भ द्रा ऊटितात। प्रापशाशस्ताखयोप्ल। हा इशा ॥११॥
॥ साध्रञ्च ॥
या जीणाष्ठ न्त्वाफावाखवृ म हा इशी। देकव न्दे व त्रा हो ताटूराचम् । आ माचार्क्त्याकमा स्य या ज्ञाटी। स्यापसुशक्राखतूप्लम् । हा इशा ॥१२॥
॥ जमदग्नेश्चसंवर्गः ॥
त द ग्ने द्यूफीम्ना मा भा रोचीवाश। य त्सा साटीहातसा दाटानातइश। कथञ्चि द त्राटिइ णाताम् । म न्यूकाञ्ज नाचास्य दूटाच्होयढापया मे हि याप्लीहाश। होप्लइ ळाशा ॥१३॥
॥ अगस्तयस्यचराक्षोघ्नम् ॥
य द्वा ऊपिवि श्प ति श्शि तःशु। सु प्री तोकिमा नु षोकिच्वी शेचावी श्वे दाटिग्नीःत। प्रा ति र क्षां सि सेकूच्धाकता औटाहोखबाप्ल। होप्लइ ळाशा ॥१४॥
॥ अग्नेश्चश्रैष्ठ्यम् ॥
आ यंचाअ ग्नि श्रेचिष्ठाकत मोचाहोटच्आ यचाम् । वाटम धु म त्त मोकुहोटच्आ यचाम् । सा हाचास्रा साचात मोटाहोटच्आ यचाम् । अ स्मि न्ना स्तुकीसु वीकाथ्र्या मौटाहोत। ओपइ ळाशा ॥१५॥
॥ आदित्यस्यचरुचिरोचनंवा ॥
आ दि त्य श्शूती। क्राचउ द गा त्पु रु राखूस्ताशत् । ज्योकतिः कृ ण्वाकिन्वि त मो बा ध माखूनाःप्ल। आकभा स मा नाःटीप्रा दी शोकिनु साखार्वाःप्ल। भ द्र स्य काकीर्तातरू च यापिन्ना याखा। गात्रत् ॥१६॥
तद्वपाठः
प्रथम खण्डः (ऋ-१४, सा-२३)
॥ मर्गीयवञ्च ॥
त द्वौ हो वाती। गा याटासु ता इखिचाण। पु रू हूकितातच्या साकात्वायनाटइश। श य्य दो औकीहो इ गाखिवाणइश। नाटट्शाखऔ हो वाशि। एतच्कीटनेख ॥१॥
॥ रौद्रेद्वे ॥
त द्वो गा याती। सु ताताइ स चातिपु रूटाहु ताखाहाशप्ल्हातइ याचास त्वाखानाणइश। शंकय त्गाटावेत। ना शौटाहौटच्हूकवोपबाप्लका इ नोप्लि। हा इशा ॥२॥
त द्वो गा यषीसु ते सा चातीएत। पु रु हूकिता य स त्वा नेकुपु रूचाहू ताथायाचसायत्वाटनाखइ शं याफित्गौ वा उ वोखीवाण। नापशाशकाखइ नोप्ला। हा इशा ॥३॥
॥ मार्गीयवञ्चैव ॥
त द्वौ गा यषीसु ते सा चातीएत। पू रू हुकिता य स त्व ना इषूशं य त्गाटिवेत। ऐचहाययाटऐ हिता। ना शा काटिट्इ नाखाऔ हो वाशि। ईख ॥४॥
॥ आश्वञ्च ॥
य स्ते नू नांफीश ता कृ ताकीबुश। इ न्द्र द्यु म्नीषीता मो माटिदाःच। तेकन नू नाभिम्मात। दा इ माटिउ वाता। देःख ॥५॥
॥ ऐटतेद्वे ॥
गा व ए गा वाःतु। उ पा व दातीवाटदाखऔ हो वाशि। वाखटेश। म ही याखिज्ञाण। स्य रातास्याटट्राखऔ हो वाशि। प्सुखदाशउ भा काखिर्णाण। हि राताहाटइ राखाऔ हो वाशि। ण्याखयाश ॥६॥
ओ इ गाखिवाःण। उ पाताच्वा दाकावा टाटाउ वोखावाश। मा हीचाय ज्ञाकास्या राताप्सू दाटाओ यूखाभाश। क र्णाटाउ वोखावाश। हि रकाण्य याटाख् ॥७॥
॥ श्रौतकक्षेद्वे ॥
अ राखाम श्वा य गाप्लीयाङताश। श्रू ता क क्षाटीरायङ्गा वाकाआखरणम् । हातहातइ न्द्रा स्यापिधाश। होकयेटम्नो याखाऔ हो वाशि। ईखतिश ॥८॥
अ र म श्वा यषूगा य त अ र म श्वोतूवात। या गाकायाचता श्रू ताकिक क्षाटाहातहातआ राकाङ्गाखवाणइश। आ रा मि न्द्राटीहातहातस्याकधाथम्ना औटाहोखबाप्ल। होप्लइ ळाशा ॥९॥
॥ तन्वस्यपाथस्यसामनीद्वे वसोवार्षेः ॥
ता मि न्द्रांपिवा ज या म सिशु। मा हेचावृ त्राथाच्या हाकान्तायवेट। सा वाचार्षायवृट। षाकभोपबापबाप्ल्भू वाप्लात् । हा इशा ॥१०॥
ता मि न्द्रांपिवा ज या म सि हा बुशू। मा हेचावृ त्राथाच्या हाकान्तायवेटहो वाटाहातइश। सा वाचार्षायवृटहोटावातहा इश। षा भो भूटिट्वाखऔ हो वाशि। ए दातावा सूटाख् ॥११॥
॥ अङगिरसान्निवेष्टौद्वौ इळा
त मि न्द्रंषिवा ज या म सीतुएत। म हाताहा इ वृ त्राचियाकहोचवाकहकन्त वेटाओ वाकाईटट्यात। ओ मो वा स हेकुवा र्षाटाओ वाकाईटट्यात। ओ मो वा वृकीषा भोटायाखऔ हो वाशि। भूखवाशत् ॥१२॥
औ हो वा इ हु वातूहो इ त मिकीन्द्रं वाखाजा याकामा सीफा। औ हो वा इ हु वातूहो इ म हेकीवृ त्राचाया हकान्ता वेफा। औ हो वा इ हु वातूहो इ स वाकीर्षाखवृण। षा भो भूटिट्वातदि ळाप्लाभा ए हि ळाप्ली। होप्लइ ळाशा ॥१३॥
॥ शय्यातानित्रीणि ॥
हा बु त्व मि न्द्रातु। ब ला द धि हाकुबु हाताबुश। स हाकासा जाथाताटओ जा साभिहा बु हातिबुश। त्वांचसायन्वा र्षाटान्हा बु हातिबुश। वृ षा इ दाटीट्साखऔ हो वाशि। वृ धेताच् ॥१४॥
त्व मि न्द्रषिब ला द धीतीएत। स हाकासा जाथाताटओ ज साभिइ याकाहो इ याकिइ योखावाश। त्वांचसायन्वा र्षाटान् इ याकाहो इ याकिइ योखावाश। वृ षा इ दाटीट्साखऔ हो वाशि। म हेताच् ॥१५॥
त्व मि न्द्रं ब लाषूद धी स ह सातु। जा ताकाओ जाकासाखइ हो इ हाशी। त्वां साकाच्न्वाकर्षाखनि हो इ हाशी। वृ षा इ दाटीट्साखऔ हो वाशि। ईखहाश ॥१६॥
॥ इन्द्राण्यास्साम ॥
य ज्ञ इ न्द्रषीम व र्धातियातत् । य त्भू मिं वा य वाटूर्ताखयाणत् । चाखक्राप्लणाखओण। पा शकाच्न्दीकवी च क्राकिच्णा ओकापा शाखाऔ हो वाशि। दीखविश ॥१७॥
॥ गोषूक्तम् ॥
य दि न्द्रा हंषीय थौ हो औ हो वातूहा इ तु वातीम् । ईकशी या वाकिस्वा यौटाहु वाटाइ हु वाटिइ का ईटित् । स्तोकता मे गोटिसा खौटाहु वाटाइ हु वाटिइश। सा याटाद्धोटयाखऔ हो वाशि। अ ग्नि राकिहु ताःटाख् ॥१८॥
॥ आश्वसूक्तञ्च ॥
आखबु हौ हो वा हा य दि न्द्रा हाशृम् । या था त्वा मैटीही ऐ हीतिच्। आ इ शीकिया वाकास्वा आ इ क इ दैटूही ऐ हीतिच्। ओटइ स्तो ताटिमा इ गोटिच्सा खाकासाटट्याखऔ हो वाशि। शु क्र आकिहु ताःटाख् ॥१९॥
॥ गौरीवितम् ॥
प न्य म्प न्यषीमि त्सो तातिराःत। प न्य म्प न्य मि त्सोयूतापराःश। आ धाकाव त मा द्याखीयाश। सो मंकावी राटाय शू राखि। यात्र ॥२०॥
॥ गौराणित्रीणि ॥
इ दं व सातीबुश। सू त माटिन्धाःत। पी बाचासु पूकार्णा मु दाटिराखम नाखाभ याताईशन् । र रोप्लाबा मा तोप्लि। हा इशा ॥२१॥
ई दांणाफ्व सोखासू त म न्धाःशी। पी बा सूटिपूतर्णा मूटादाखरणम् । आटनातभाटयाचइटन् । र राटाहा उ वाति। मा तेटाख् ॥२२॥
इ दं व सोषीसु त म न्धातीएत। पी बाकासु पूकार्णाकमूकद रौटाहोतवात। पी बा सु पू र्णाचुमू द रौथिहोतवात। आ ना भाभिईतन् । र रि माचिता औटाहोखबाप्ल्। होप्ल्इ ळाशा ॥२३॥
द्वितीय खण्डः (ऋ-११, सा-२२)
॥ सौपर्णानि त्रीणि ॥
उ त्घे द्भ्योतीवात। श्रू ताकामाखघणम् । वृ षा भ न्ना र्याटुपाखसणम् । आटस्ता राटामेत। षा इ सूकिर्या औटाहोखबाप्ल्व होप्लइ ळाशा ॥१॥
उ त्घे द भिषीश्रू ता मातघातम् । वृ षा भचिन्नकर्याफप्ल्हिंच। पापसशम् । आ स्ताप्लाउ वाशा। राकमा इ षि सूकीओपबाप्ल्रा योप्ला। हा इशा ॥२॥
उ त्घे द भि श्रू ताषूम घ मि य इ यातुहातइश। वृ षा भचिन्नकर्याफप्ल्हातहातइशपापसशम् । आ स्ताप्लाउ वाशा। राटमाखऔ हो वाशि। षि सू र्याटिख् ॥३॥
॥ शाकलम् ॥
य द द्य काफीच्च वृ त्र हाकीन् । ऊ द गा आ भीकुसू राटायात। सा र्वा न्ता दिकीन्द्र ता येटिहिंच। वाखशोप्ल। हा इशा ॥४॥
॥ आभरद्वसवेद्वेऐन्द्राग्नेर्वा ॥
य याताहातबुश। आ ना याटिदा ना याटित्पा राकावाखताःण। सू नी ती तूटीच्सूकनी ती तूटिच्र्वा शंकायाखदूणम् । इ न्द्रा स्सा नोटीच्इकन्द्रा स्सा नोटिच्यूटवाखऔ हो वाशि। साखखाश ॥५॥
य आ नषिय त्प रा वातीताःत। सू नी ति तु र्व शांयूयापदूशम् । इ न्द्र स्स नो यू वायूसापखाश। इ न्द्रोखाग्निःश। इकन्द्रा औकाहोखग्नाणइःश। आ इ न्द्रोकिग्नाटयाखऔ हो वाशि। ईखन्द्राःप्ल ॥६॥
॥ तान्वेद्वे ॥
मा न इ न्द्राषीभ्या दा इ शाःती। सू रो आ त्तुकीष्वा याटामाखतु वाखायू जाता। वा ना इ माटीताखण्त् । ओपइ ळाशा ॥७॥
माणनाफइ न्द्राखाभ्या दि शःशि। सू रो आखित्तुशष्वा याखामाणत् । त्वा यु जाकिवा नौटाहोथमा तौकाहू वा दौकिहोखवात्र। एतय यूःटाख् ॥८॥
॥ रौहितकूलियेद्वे ॥
ए न्द्र साति। ना सिं र यिंषीस जि त्वा नंकीसा दा साटिहातम् । वाटर्षीतष्ठा मूकात याताआ उ वा एभी। भाखराश ॥९॥
ए न्द्र सा न सातु। इं रा याटिइं स जि त्वा नंकुसा दा साटिहातम् । वा र्षीटाष्ठा मूटाच्ताचयोपबाप्लभा रोप्ला। हा इशा ॥१०॥
॥ इन्द्राण्यास्सामनीद्वे ॥
इ न्द्रा मि न्द्रं वा याटूमा हा म हा धा नाटूइश। इ न्द्रा मि न्द्रं म र्भाटूइषहा वा ह वा मा हाटूइश। यू जा यु जं वृ त्राटूइ षु वा षु व ज्री णापण्म् । ओपइ ळाशा ॥११॥
इ न्द्रं वा यातीम् । मा हा म हा धा नाटूओ औकाहोतइ हाता। ई ही बा लाटीउ वोखावाश। ईखहाशइ न्द्र म र्भा इशू। हा वा ह वा मा हाटूओ औकाहोतइ हाता। ई ही बा लाटीउ वोखावाश। ईखहाशयु जं वृ त्रा इशु। षू वा षू व ज्रि णांटूओ औकाहोतइ हाता। ई ही बा लाटीउ वोखावाश। ईखहाश ॥१२॥
॥ इन्द्रस्यसहस्रबाहवियम् ॥
अ पि ब त्का द्रूतुव स्सु तातिम् । इ न्द्रा होभिइ साकाहा हो वाकस्राकिवांयभेट। त त्रा दाटिदीतष्टाकपौटहौटहु वाटाईटयांतसीतया मौपाहो बाप्ला। होप्लइ ळाशा ॥१३॥
॥ धॄषतोमारूतस्यसामनीद्वे ॥
व य मापिइ न्द्राणा। त्वा याटाट्वाखऔ हो वाशि। आ भि प्र नोटिनु मो वृ षाखीन्वि द्धाखाइ तु वाति। स्याटट्नाखऔ हो वाशि। वाखसोश ॥१४॥
व य मि न्द्राती। त्वा याप्लावाःश। आ भि प्र नो नु मोप्लूवापर्षाशन् । वि द्धि तूखिवाप्ल्आ ओखाहाणइश। स्या नो बापिवा सोप्ला। हाप्लइश ॥१५॥
॥ भारद्वाजस्यदारसन्तित्रीणि ॥
व य मौ हो इ न्द्रातू। त्वा याप्लवाःश। आ भि प्र नो नु मोयूवापर्षाशन् । वि द्धि तु वोखीहाणइश। स्या नोप्लाहा इशा। वाकसा औटाहोखबाप्ल्। होप्लइ ळाशा ॥१६॥
वा याखामौ हो वा हाशीइ न्द्र त्वाखिऔ हो वा हा या वाःशू। आटभीतप्राटनोतओ इ नु मो वाटुर्षातन् । वाटइ द्धीतातूटवातस्याटनाखऔ हो वाशि। वाखसोश ॥१७॥
हा बु व य मि न्द्रातू। त्वाटवा याःटा। आ भि प्र नो नु मोटूवा र्षाटान् । वि द्धाटाइ तु वाटिस्या नो वाटिट्साखऔ हो वाशि। अ स्माचाभ्यकङ्गाततु वि त्तकिमाखम् ॥१८॥
॥ ऐध्मवाहानि त्रीणि ॥
आ घा ये आ ग्निषुमि न्धातातातइश। स्तृकण न्ति बटिर्हि रा नु षा ग्येकुषा मि न्द्रोचियु वाशा। इ हा उ वा उ वोपुबाप्लसा खोप्ला। हा इशा ॥१९॥
आ घा ये इ हातु। ग्नी मा इ न्धा ताटुउ वोखावाश। ईखहाश। स्तृ ण न्तीकिबतर्ही रा नु षाटीउ वोखावाश। ईखहाश। एकषा मा इ न्द्राटीउ वोखावाश। ईखहाश। यू वा यु वाटिसाखखात्र। ईखहाश ॥२०॥
औ हो आ घा यातुएत। ग्नी मा इ न्धा ताटुऔ होखावाशस्तृ ण न्तीकिबथर्ही रा नु षाटीऔ होखावाश। एकषा मा इ न्द्राटीऔ होखावाश। यू वाकासापखा उ वा हाप्लीबुश। बाश ॥२१॥
॥ अहेःपैण्वस्यसाम अहिहनोवाबैल्वस्य ॥
भि न्धि योतिहातइश। वा इ श्वाकिच्आ पाकाद्वा इ षाटिउ वोखावाश। पा राटाउ वोखावाश। बा धो ज हा इषुमा र्द्धाटाउ वोखावाश। वा सु स्पाकिर्ह न्त दाकिभ राखा ॥२२॥
तृतीय खण्डः (ऋ-१२, सा-२०)
॥ ऐषञ्च ॥
ई हे वापिश्रु ण्व ए षाशीम् । का शा ह स्ते षु यायूद्वापदाशन् । नि या मै श्चीखीत्रा मृकिन्जकताफइश। नी या मैषिश्चा इ त्रा माटीन्जाखताणइश। ए हि याखिऔ होता। एकहि यौ हो एकीहि यौ हो वाकी। एखहिश ॥१॥
॥ पौषञ्च ॥
इ मा उ त्वाषीवि च क्ष तेखीस खाखायाःश। इ न्द्र सो माभीइ नाताहो येटाहोटवात। पु ष्टा वाटिन्तोतहो येटाहोकवात। याकथोपबाप्ल्पा शुप्लाम् । हा इशा ॥२॥
॥ मरूताञ्चसंवेशीयम् ॥
सा म स्या माटीन्यातवे वी शाःचि। वि श्वे ना माटीन्तातकृ ष्टा याःचि। सा मु द्रा येटीचवाकसि न्धाटावाःखण्। ओपइ ळाशा ॥३॥
॥ हाविष्मतेद्वे ॥
दे वा नाफिमि दा उ वोखीवाश। आ वाटाउ वोखावाश। माखहाशत् । ता दा वृ णा इषमा हाटाउ वोखावाश। वाखयशम् । वृ ष्णा म स्मा भ्या माटूउ वोखावाश। ताखयेश ॥४॥
हा बु दे वा नाषुमि द वो म ह द्धातूबुश। ता दाकावा र्णाटाइ माचाहेकवाखयणम् । ऐटचहाययाटऐ हीता। वृ ष्णा माभिस्मात। भ्या मू ताटिट्याखऔ हो वाशि। हा वी ष्माटितेख ॥५॥
॥ हाविष्कृतेद्वे ॥
दे वा ना मि द वोषूहा बु मातिहातत् । ता दा वृ णा इषुमा हा इ वाटीयातम् । वृ ष्णांटाच्होययाटस्मात। भ्या मू ताटिट्याखऔ हो वाशि। हा वि ष्काटिर्तेख ॥६॥
दे वा ना मि द वोषूमातहातत् । ता दा वृ णीकीच्माकहा इ वाटियातम् । वृ ष्णा माभिस्मातच्भ्याकमोपबाप्लता योप्ला। हा इशा ॥७॥
॥ काक्षीवतञ्च ॥
सो माखानां स्व र णशीम् । कृ णू हिषिब्र ह्म ण स्पाकीता येटाओखहाप्लहातइश। क क्षा इ वाभीन्तातम् । य औ होतिच्औकहोखबाप्ल्शा इ जोप्लि। हा इशा ॥८॥
॥ उषसश्च साम ॥
बो ध न्म नाःती। इ दाटास्तू नोट्वृ त्र हाकिभू र्याट्सूखतीःण। श्रु णोखाऔ होता। तु शाचाक्राकआ शि षा मौपीहो बाप्ला। होप्लइ ळाशा ॥९॥
॥ भारद्वाजस्यमौक्षेद्वे ॥
अ द्य नो दे वषुस वि त रौ होतुवातइश। इ ह श्रु धा इषुप्र जा वाटित्सातवी स्सौटाभ गाचा। म्पायरा दूटाष्वातहो वाटाहातइश। प्नि यं सूपिवात्र। द क्षातायाटख् ॥१०॥
अ द्याखानो दे व स वि तःशू। प्र जाकाव त्सा वी सौकीभ गा म्पाटिरा दूखाष्वाण। प्नि यं सु वा उ वाकूओटट्वाखऔ हो वाशि। अ स्मा भ्यचिङ्गाततु वि त्तकमाखम् ॥११॥
॥ भारद्वाजानित्रीणि ॥
कोपव स्य वाफिर्ष भो यू वाशी। तु वि ग्रीचिवोकआकना न तोकिब्र ह्मा काटिस्तातम् । ऐटच्हाययाटऐ हीता। साकप र्याटाताखण्इश। ओपइ ळाशा ॥१२॥
कू वा कू वाती। स्या वृचाषा भो यू वाटीओखहाप्लहातइश। तु वीकाग्री वोथाच्आ ना न ताटीओखहाप्लहातइश। ब्र ह्मा काटिट्स्ताखऔ हो वाशि। स प र्या तीखी ॥१३॥
ऐ ही ऐ हीती। क्वा स्य वृ ष भोषुयू वा ऐ ही ऐ हीतू। तु वि ग्री वो आ नाषून ता ऐ ही ऐ हीतू। ब्र ह्मा क स्तं स पषूर्या ता ऐ ही ऐ हीतू। आटइ हाखाऔ हो वाशि। आखइ हीशा ॥१४॥
॥ शौक्तसामनीद्वे ॥
उ पाचाह्वा राकाई गि राटिच्ईकणाचम् । सकङ्ग मे चाथिना दाटाईकनाचम् । धी याटावि प्रोटाच्आ जाकाया ता याकिमा याताआ उ वाटि। ऊखपाश ॥१५॥
इ दा मीखिदंशई दाचामि द क मी दा मीखूदशम् । उ प ह्वा रेचीगी राचाइ णांटाइ दा मीखिदंश। ई दाचामि द क मी दा मीखूदशम् । सं ग मे चाचीना दा ई नाटीम् इ दा मीखिदंश। ई दाचामि द क मी दा मीखूदशम् । धि याटावि प्रोकाच्आ जाकाया ताकाइ दा मीखिदंश। ई दाचामि द क मि दा माखूइ दात्राम् । गोचष्पा देचाप्रशट् ॥१६॥
॥ वार्षाहरेद्वे ॥
प्र स म्रा जातीम् । च र्षाटाणा इ नाटिम् । आ इ न्द्राटिम् स्तो ताटान व्याटाङ्गाखइ र्भीःणा। ना राटान्ना र्षाटाच्हकम्मोपबा हा इ ष्ठाप्लीम् । हा इशा ॥१७॥
प्र स म्म्रा जोतीहातइश। च र्षा णीभिनातम् । आ इ न्द्रां स्तोटीतातन व्याटाङ्गाखइ र्भीःणा। ना र मोणिइशन्नृ षा ह मोणीइश। मं हा इ ष्ठाप्ली। होप्लइ ळाशा ॥१८॥
॥ कूत्सस्यप्रतोदौद्वौ ॥
प्र स म्म्रा ज ञ्च ॠतूषा णाखाइ नाशाम् । इ न्द्रां स्तोभितातन व्यांटागाखइ र्भीःणा। न र न्नृ षाषीह म्मं हि याफीहाप्लउ वाशा। ष्ठाखम् ॥१९॥
प्र स म्म्रा ज ञ्च र्ष णी ना मिषृन्द्रं स्तो ता न व्यं गातूइ र्भीःता। इ न्द्रं स्तो ताषीन व्य ङ्गाटिइ र्भीखान्न र नृ षा ह म्मां हि ष्ठाशॄम् । सा हचामै हाकाइ होटायाखऔ हो वाशि। मंथही ष्ठाटाख्म् ॥२०॥
चतुर्थ खण्डः (ऋ-१०, सा-१५)
॥ सौश्रवसेद्वे ॥
आ पा दु शीती। प्रि य न्ध सातीस्सू द क्षाटिस्यातप्र होकाषी णाःचा। इ न्दोकाराटइ न्द्राःता। या वा शाटिइ राःता। ऐकहि याटाइ हि याखिऔ हो वाशि। एतच्ऊटपाख ॥१॥
अ पाफादु शि प्रि याखीन्ध साःशा। सू द क्ष स्याषीप्र हो षि णाकीइ न्दौ हौटिहु वापाइ न्द्रो य वाफीशाङ्इ राःशा। ऐकहाटएटहि याखाऔ हो वाशि। एतऊ पाटाच् ॥२॥
॥ त्वाष्ट्रीसामच ॥
इ मा उ त्वाती। पु रोटाव साटाबुश। आ भि प्र नो न वूटूत्गा इ राःटि। औथहोचइश। गा वोथावा त्साटान्नापधेश। नाखवोप्ल। हा इशा ॥३॥
॥ त्वष्टुरातिथ्येद्वे ॥
अ त्राता। हाकगोषर म न्व ता उ वाटूहा उ वाटिहोचइश। ना म त्व ष्टुषीर पी च्या मु वाटुहा उ वाटिहोचइश। इ त्था च न्द्र म सोषीगृ हा उ वाटीहा उ वाटिहोटट्याखऔ हो वाशि। ऊखपाश ॥४॥
हा व त्राति। हाकगो रषाम न्व ता उ वाटुहो इ याटिहो वाथाउ वोचाइश। ना म त्व ष्टु रषुपी च्य मि या उ वाटूहो इ याटिहो वाथाउ वोचाइश। इ त्था च न्द्र म सोषूगृ हा उ वाटीहो इ याटिहो वाथाउ वोटायाखऔ हो वाशि। ऊखपाश ॥५॥
॥ पौष्णेद्वे ॥
य दि न्द्रो याती। ना याटादोंचओंटओखवाश। री तो म ही रा पाटूओंटओखवाश। वृ षा वृ षाटीन्त माखाऔ हो वाशि। त त्रा पूकिषाचभु वातात्साटचाख ॥६॥
य दि न्द्रो आ नाषुय द्री तातीएत। मा ही रा पोटीच्माकही रा पोटिवा र्षाकान्ताखमाःण। त त्रा पूटिषा पूटाट्षाखऔ हो वाशि। भु वातात्साटचाख ॥७॥
॥ श्यावाश्वेद्वे ॥
गौ र्ध यातिएत। ति म रू तांतीच्श्राकव स्यु र्माटिता म घोखिनाशम् । यु क्ता व न्हाचीइश। र थाकानाटमाखऔ हो वाशि। ऊखपाश ॥८॥
गौ र्ध य तिषीम रु तातिमेत। श्रा व स्यु र्मटीता म घो नाटीच्मु हु वाटिहातइश। यु क्ता वाचिन्हीथरू हु वाटिहातइश। र थाकाना मौपाहो बाप्ला। होप्लइ ळाशा ॥९॥
॥
॥ प्रजापतेस्सुतंरयिष्ठीयेद्वे ॥
उ पा नोपिह रि भीप्लिस्सू तोङावाश। या हि म दाटीना म्पा ताटिउ प नोतिहातओपबाप्ल। राखइ भीःप्ला। सू ता मौपिहो बाप्ला। होप्लइ ळाशा ॥१०॥
उ प नोषिहा बु हो रातीइ भीःता। सूटतातम् । या हि म दाकीना म्पाटाता उ पा नोखीहाण। राटइ भाखाऔ हो वाशि। सू तंकाराचइ ष्ठाःटाख् ॥११॥
॥ आप्सरसञ्च इष्टाहोत्रीयंवा आपांवानिधि ॥
इ ष्टा हो त्राती। आचसृ क्षाखाताण। इकन्द्रं वृ धा न्तोटीअ ध्वाखाराणइश। अ च्छा वाखिभाशर्त्थ मो जाखिसात्र। एतऊकद धि र्नि धीःटीख् ॥१२॥
॥ प्रजापतेर्निधन कामम् ॥
अ ह मि द्धाफीइ पि तुः प राकुइश। मेकधा मृ त स्य ज ग्र हाषृआ हं सू र्याकीइ वापाहाप्लहाङ्इश। ज नि हो इ हो औकूहो औकाहो वापाहा बुप्ला। बाश ॥१३॥
॥ वाजिदापर्यञ्च ॥
रे व ती र्णाःती। स धाटामाखदाणइश। इ न्द्राटाइ साखान्तूण। तू वि वाटिजाःच। क्षूटमातन्तोटयाक। भिकर्म्मोपबा दा इ मोप्ली। हा इशा ॥१४॥
॥ सोमापौष्णञ्च ॥
सो मः पू षाती। चा चा ईषित तू र याकीव योखावाश। वा इ श्वा सांकीसु क्षी ती ना म याटूव योखावाश। दाचइ वायात्रा राटाथी यो र्हाखिर् इ ताःत्रा। गा वोथाअ श्वाःटाख् ॥१५॥
पञ्चम खण्डः (ऋ-११, सा-३०)
॥ वैतहव्यानि त्रीणि ॥
पा न्त मा वोषीअ न्ध साःति। इकन्द्रा माकाभि प्रा गा या ताटुहातहातइश। वि श्वा सा हंकीच्शा ताकाक्रा तूंटाहातहातइश। मंकहा इ ष्ठा ञ्चाटीहातहातइश। र्ष णाटाइ नाखामौ हो वाशि। उ ऊखापाश ॥१॥
पा न्त मा ओषीअ न्ध स इ हातु। इथन्द्रा म भा इ प्र गाकूय ताटाइ हाता। वि श्वा साकिहं शा ताटिच्क्रा तूटामि हाता। मंकहा इ ष्ठाचिञ्चा इ हाटि। र्ष णाटाच्ई नाकामि हाटाख् ॥२॥
पा न्ताणामाफवोखअ न्ध साःशि। आ इ न्द्रा म भा इषूप्र गाटायाखताण। वि श्वाटासाखहणम् । शातता क्रापातुशम् । मं हि ष्ठ ञ्चकीथर्षा णाचाइश। नातमाटख्औ हो वाशि। ओतकाःख ॥३॥
॥ शौक्तानित्रीणि ॥
प्रा वा इ न्द्राटीया मा दाखिनणम् । प्र वाटाइ न्द्रा औपिहोश। याखमाप्लदाखनणम् । ह राटाअ श्वा औपिहोश। याखगाप्लयाखताण। स खाटाया स्सो औपिहोश। मा पोप्लाबाप्लवा व्नोप्ला। हा इशा ॥४॥
प्र वाटाइ न्द्रा औपिहोश। याखमाप्लदाखनणम् । ह राटाआ श्वा औपिहोश। याखगाप्लयाखताण। स खाटाया स्सो औपिहोश। मा पोप्लाबाप्लवा व्नोप्ला। हा इशा ॥५॥
प्रा वा ईटियातईटयात। इ न्द्रो ईटियातईटया याखामाप्लदाखनणम् । हा रा ईटयातईटयातआ श्वो ईटियातईटया याखागाप्लयाखताण। सा खा ईटियातईटयातया स्सो ईटियातईटयात। मा पोपाबाप्लवा व्नोप्ला। हा इशा ॥६॥
॥ गौरीवितानित्रीणि ॥
प्र वौकाहो वाटाइ न्द्रा औकिहो वाटा। याखमाप्लदाखनणम् । ह रौकाहो वाकाआ श्वा औकिहो वाटा। याखगाप्लयाखताण। स खौकाहो वाटाया स्सो औकिहो वाटा। मा पोपाबाप्लवा व्नोप्ला। हा इशा ॥७॥
प्रा वाचाद दा औटिहोतइ न्द्रो द दा औपुहोश। याखमाप्लदाखनणम् । हा रीचाद दा औटिहोतआ श्वो द दा औपुहोश। याखगाप्लयाखताण। स खाचाद दा औटिहोतया स्सो द दा औपुहोश। मा पोप्लाबा वाप्लाव्नोश। हा इशा ॥८॥
प्र व प्र वाःती। इ न्द्राताएकन्द्राथया माकादायनाटम् । ह राताइ ह रि य श्वाटुचया गाकायायताट। सा खा याभिस्सोत। मा पोप्लाबा वाप्लाव्नोप्ल। हा इशा ॥९॥
॥ काण्वेद्वे ॥
व यं वा यातीम् । ऊखत्वाशता दी दाखिर्त्थाःण। इ न्द्र त्वा यषीन्त स्स खाखियाःप्ल। क ण्वाताऊपक्थे भि र्ज र न्ते एप्लूहि या हाशि। होप्लइ ळाशा ॥१०॥
व य मूखित्वा त दि दा र्त्थाःशु। ऐ ही होटिइश। वा य मु त्वा त दिषूद र्त्था इ न्द्र त्वा यकून्त स्स खाटियाःत। काखण्वाःण। उ क्था इ भीकीर्जोपबाप्ल। र न्तातायाटाख् ॥११॥
॥ सौमित्रेद्वै दैवोदासं तृतीयं श्रौतकक्षाणिवा ॥
इ न्द्रा य म द्व नातूइश। सू ता मि न्द्राषीय म द्व नेचीसू ताशाम् । पाचरा इ ष्टोटिभातिच्न्तू नोचागि राःशा। अ र्क माटिर्च्चातच्न्तूकका राटावाःखण्। ओपइ ळाशा ॥१२॥
॥ इ न्द्रा य म द्व नेतूहातबुश। ओ इ सूटितातम् । पा रि ष्टोकिभा न्तु नोटिहातइ गा राःती। पा रि ष्टो भा न्तु नोटूहातइ गा इ राःटी। अ र्क माटिर्च्चाखऔ हो वाशि। एतन्तु काचारा वाःटाख् ॥१३॥
इ न्द्रा य म द्व नेषूसु त मि न्द्रा य मोतूवात। द्वातना इ सूपिताशम् । पा रि ष्टोकिभाटहातहातन्तु नोटागाखइ राःणा। अ र्का मा र्च्चाभिहातहातच्न्तुकका राटावाःखण्। ओपइ ळाप्ला ॥१४॥
॥ वैष्णवानि त्रीणि इहद्वाम दैवोदासन्तृतीयं और्ध्वसद्मनानिवा ॥
अ य न्त याती। द्रा सो मोटिहो वाकाहोचइश। नी पूकातो आटाधीचब र्हाखाइ षीणा। आचई हिथाम स्या द्राटिट्वाखऔ हो वाशि। पिखबाश ॥१५॥
अ य न्त इ न्द्र सोतूहोतमाःत। नी पू तो आकीधी ब र्हाटिइ षीटा। ऐ हाटाइ मा स्याचिद्रा वाकापा इ बाटि। आ इ हिषिमा स्या द्र वाकीपा इ बाटि। पीखबाश ॥१६॥
अ य न्त इ न्द्र सोफूमोतनापइ पू तोणिआ धीण्यब र्हि षीणि। नी पू तो आकीधी ब र्हाटिइ षीता। ऐकहा इ माटीस्यातद्र वाकापापइ बात्रा। ईखहाश ॥१७॥
॥ औदलेद्वे वैणवेद्वे वैणव औदलइतीवा ॥
सु रूता। पाचकृ त्नु मूचित याचाइश। सु दू घाचिमि व गोटिदु ह यातिआ उ वाटि। ऊखपाश। जु हू माटिसीतद्य वीचाद्य वि यातिआ उ वाटि। उ ऊखापाश ॥१८॥
सु रू हातिहातबुश। प कृ त्नु मूटीच्ता याटाइश। सु दु घाचिमि व गोटिदु हा ऐ ही ऐ हीतूच्। जु हौटाहु वा इ माटीसीटद्य वीचाद्य वीचाऐ ही ऐ हीतीच् ॥१९॥
सु रू प कृ त्नुतुमू तापायाणइश। ओ इषासु रू प कृ त्नु मूयूता याटाइश। ओ इषासु दु घा मि वा गोयूदू हाटाइश। जु हूकाम सापाइ द्य वि द्या वै हीशू। जु हुटामा सीटाच्द्याकवि द्य वीपिआ बु हो आ बु हो वाशृ। एतद्य वीताच् ॥२०॥
सु रू प कृती। त्नु मूटाता याचाइश। सु दु घाकिमीटवा गोटाच्दूखहा इ सु दु घाकुमाश। वा गोटाच्दू हाकाइश। जु हू माटिसीत। द्यापवीशद्याखवोप्ल। हा इशा ॥२१॥
॥ दैवोदासानित्रीणिआर्षभाणिवायदिवावार्ध्यश्वानि ॥
अ भि त्वा वृ ष भाषूसू ताताइश। सु तं सृ जाकीच्मी पाकाइ तायायाटइश। तृ म्पाकावाययाटश्नु हाताआ उ वा एभी। माखदशम् ॥२२॥
अ भि त्वा वृ ष भाषूसु ते भ्यातिहातबुश। त्वातच्वृ षाकाभायसू ताटाइश। सू तं सृ जाकीच्मी पाकाइ तायायाटइश। तृं पाकाहो इ वि याकीहोकथ्श्नु ही माटिदाखणम् । ओपइ ळाप्ला ॥२३॥
अ भि त्वा वृ ष भाषूसु ते सु तं सृ जोतूवात। मी पीकाताटयातइश। सु तंकासृ जाकाच्मीकपी ताटायातइश। तृटम्पातवाटट्याखऔ हो वाशि। श्नु हीथामाटदाखम् ॥२४॥
॥ कौत्सेद्वे पाञ्चवाजेवा ॥
या इथान्द्रापच म से ष्वा इ याशू। सो माकाश्चा मू षु तेकीच्सूकत स्सो म श्च मूकुच्षुकता इ सूटिताःत। पा इ बाटिहातइ दा स्योटिहातइश। त्वा मी शाटिइ षाखाण्इश। ओपइ ळाशा ॥२५॥
॥ य इ न्द्र चा मातुसे ष्वाता। सो म श्च मू षु ताथूइ सुपाताःश। सो म श्च मूतीषूतता इ सूपिताःश। ओटइ पि बे द स्योखुहाणइश। त्व मा इ शाखीणफप्ल्इश। षाखइश ॥२६॥
॥ सौमेधानित्रीणि पौर्वतिथानिवा ॥
यो गे यो गेषीत व स्ता रातीम् । वा जे वा जेकीह वाचाम हेकाच्सा खा याटिईतन्द्राकमोपबा ता योप्लि। हा इशा ॥२७॥
यो गे यो गेषीत व स्तातिरातम् । वा जे वा जेकीह वाचाम हेकाच्हो वाटाहातइश। सा खा याटिईतहो वाटाहातइश। न्द्रा मू ताटियाखऔ हो वाशि। उ ऊखापाश ॥२८॥
। यो गे यो गेषीत व हा बु स्तातुरातम् । वा जे वा जेकीह वाटामा हा एकिहू वा औकिहोतवात। सा खाथाच्याकइ न्द्र मूकिता या एकिहू वा औकिहोतवात। स खाकाय याटाहु वा औकिहोतवात। न्द्र मूकात येटाख् ॥२९॥
॥ दैवातिथम्मैधातिथं वा ॥
आ तूखाए ता नि षीप्लीदाङताश। इथन्द्रा म भा इ प्र गाषुय ता सा खाकीच्य स्तोकाम वा औपिहोशम वाटाहाखसाःण। हा या ई सा खाटुच्य स्तोकाम वा औपिहोश। हि म्माटाहाखसोप्ल। हा इशा ॥३०॥
षष्ठ खण्डः (ऋ-१३, सा-२४)
॥ माधूच्छन्दसङ्क्रौञ्चंसौपर्णंवा घृतश्चुन्निधनंआङ्गिरसानिवा ॥
इ दा मेति। ह्य नूटाओ जा साभि। सू तंकारा धाकानाचम्पायताटइश। पी बा त्व स्या गीयुर्वा णाःपापी बाखातु वाता। स्याटगाखऔ हो वाशि। र्वाखणाःप्ल ॥१॥
इ दं ह्यातिऔ होता। नूकओ जाखासाण। सू तंकारा धाकानाटओं पाखाताणइश। पि बा त्व स्यापीगाप्लहाङइश। र्वापणा ए हि याप्लीहाश। होप्लइ ळाशा ॥२॥
इ दं ह्य नूतीओ ज साति। सू तंकारा धाकानाचम्पायतौटहो वाताहातइश। पी बाचात्व स्या गाचिइ र्वायाणौटहो वाताहातइश। पि बा तु वौटीहो वाताहातइश। स्या गा इ र्वाटीट्णाखऔ हो वाशि। घृ ताताश्चू ताःटाख् ॥३॥
॥ प्रैयमेधानित्रीणि शौक्त सामानिवा उत्गातृदमनंवातृतीयम् ॥
म हं इ न्द्राःती। पू र श्च नोकीमायहीटत्वायमाटस्तूकव ज्रि णाचिइश। दाययूटर्णायप्राटथीकनाटशा वाःखाण्। ओपइ ळाप्ला ॥४॥
म हं हा इ न्द्राःतु। पूतरा श्चापानाःश। म हाटाइ त्वाखामाण। स्तु वौटाहौ हा होखिवा ज्री णा इशी। द्यौ र्न्ना प्र थीतीना श वाःति। द्यौ र्न्नाखाप्राण। थि नौटाहौ हा होखिबाप्लशा वोप्ला। हा इशा ॥५॥
म हं इ न्द्राःफीपू रा श्च नाःकी। मा हीथात्वाटट्मात। स्तुचव ज्राटाटट्इ णाताइश। द्यौकर्न्नाटटट्प्रात। थिकनाटशाटवाःखण्। ओपइ ळाप्ला ॥६॥
॥ गौरीवितेद्वे ॥
आ तू न याती। इ न्द्र क्षू माटीन्तातम् । चा इ त्रं रा भंटुहातइ स ङ्गृकिभा या मा हाटीह स्तोखाहाणइश। द क्षाटाच्इ णाकाइ नाचा। म हा हाटिट्स्ताखऔ हो वाशि। द क्षि णेकिनाटख् ॥७॥
आ तू नषिइ न्द्र क्षू मातीन्तातम् । चि त्रंटाराखभणम् । संकगृ भापायश। माटहातहाटट्स्ताखऔ हो वाशि। द क्षि णे नाखी ॥८॥
॥ आपालवैणवेद्वे ॥
आ तू नषिइ न्द्र क्षू मातीन्तातम् । चि त्रं रा भं स ङ्गृटूभाकयाथचिषत्रं रा भं स ङ्गृ औकूहो इ भाखियाण। ऐकहा इ म हा ह स्तीषूद क्षाटाहोचइश। औकहो वाकाहोपबा णाप्लाइ नोप्ला। हा इशा ॥९॥
आ तूणाना इणान्द्राफक्षु माखान्तशम् । चि त्रं रा भं स ङ्गृ भा या चाषेइ त्रं रा भं स ङ्गृकूईखहाप्लभाखयाण। ऐकहा इ म हा ह स्तीषूद क्षाटाहोचइश। औकहो वाकाहोपबाप्लणा इ नोप्लि। हा इशा ॥१०॥
॥ धुरश्शम्येद्वे ॥
अ भ्ये आ भीती। प्रा गोकापा तीथाङ्गी राःटा। इ न्द्र म र्च्चा या थायूवि दापाइ सू नूतिम् । ओ इ स त्योपीहाणइश। स्याटसाखऔ हो वाशि। पाचतीटमेख ॥११॥
अ भ्ये आ भीती। प्र गो प तीकीङ्गि राःटा। इ न्द्र म र्च्चाटीयाखथाण। हिंटहिंतओपईणवी दाणाइ स नुंफिसा त्याफास्या साता। हिंटहिंतओपबाप्लपा ताप्लाइंश। हा इशा ॥१२॥
॥ महागौरीवितं तृतीयम् ॥
आ भीफाप्र गोखाप तीखाङ्गि राःशा। इ न्द्र म र्च्चषीय था वि दा एटु। सू नुं सा त्याकीओपस्याशसाफत्पा ता इंशि। सू नुं सा त्याकीओपस्या सोप्लाबाप्लत्पा ताप्लाइशम् । हा इशा ॥१३॥
॥ वाचस्सामनीद्वे ॥
क या न श्चीती। त्रातया भूपावाशत् । ऊकता इ स दा वाकुर्ध स्साखाखाण। क या शाटिचातइश। ष्ठापयाशवाखर्तोप्ल। हा इशा ॥१४॥
हो वा इ हो वा इषूक या न श्चीती। त्रातया भूपावाशत् । हो वा इ हो वा इषूऊ तीचास्सा दाकाच्वृ धाकास्सापखाश। हो वा इ हो वा इषूक याताश चाताइश। ष्ठा या वाटिट्र्ताखऔ हो वाशि। ऊखपाश ॥१५॥
॥ महावामदेव्यंतृतीयम् ॥
काणयाफन श्चाफाइ त्राखाया भु वाशित् । ऊ तीकास्सा दाकावृ ध स्स खा औकुहो हाताइ क याटिश चाताइश। ष्ठ यौ होतिहि म्माटावाटर्तोख। हात्रइश ॥१६॥
काणस्त्वाफस त्योफामाखदा नाशाम् । मं हि ष्ठोकिम त्स दकीन्ध सा औकिहो हाताइ दृ ढाटिचि दाता। रू जौ होतिहि म्माटा। वाटसोख। हात्रइश ॥१७॥
आणभीफषू णाफास्साखखी नाशाम् । अ वि ताकिज रा इ तृकीणा मा औकिहो हाताई शा तांटिभ वाता। सि यौ होतिहि म्माटा। ताटयोख। हात्रइश ॥१८॥
॥ इन्द्रस्यसत्रासाहीयेद्वे ॥
त्य मू वाःति। स त्राथासा हाटाम् । वि श्वा सु गी रि षूटूआ या ताटिम् । आ च्या वाटिट्याखऔ हो वाशि। स्यूकत येटाख् ॥१९॥
त्याखमू व स्स त्रा सा ह म्मो वाशृ। वि श्वा सुषिगी रि ष्वा याटीताचम् । आ च्या वाटियात। सि यौटाहो वाखाहाणइश। ताखयोप्ल। हा इशा ॥२०॥
॥ माहावामदेव्यञ्च ॥
सा दाता। स स्प ताचिई मायात्भू ताटाउ वोखावाश। प्रा याटाउ वोखावाश। आ इ न्द्रा स्या काकूमाखयात्रम् । सा नि म्मेचिधा म याटिसि षाखाम् ॥२१॥
॥ वैर्यश्वञ्च ॥
हा वा प्सू दाखीक्षाशआ प्सू दाखिक्षाःण। ए तेकाप न्थाथाच्आ थो दी वाःटी। हा वा प्सू दाखीक्षाशआ प्सू दाखिक्षाःण। ए भिकार्व्याथच्श्वा मा इ रा याटुहा उ ता श्रोखीषाणन् । तू नो भूटिट्वाखऔ हो वाशि। ईखतिश ॥२२॥
॥ गौतमस्यच भद्रम् ॥
भ द्रं भातिद्रातम् । नाकआ भाटाराखइ षा मू र्जशीम् । शा ता क्राटिताखबू या दि न्द्रा मृशु। डाटयाखऔ हो वाशि। सीखनःश ॥२३॥
॥ अश्विनोश्च साम ॥
अ स्ति सो मो अ यंषूसु तो अ स्ते आ स्तीतू। सो मो अ यं सु तःषूपि ब न्त्य स्या माफुरु तोखहाणइश। उ त स्व रा जोपुअ श्वा इ नोप्ली। हा इशा ॥२४॥
सप्तम खण्डः (ऋ-१०, सा-१२)
॥ त्वाष्ट्रीसामच ॥
ई ङ्ख्य य न्तीःती। अ पाटास्यू वाःटा। आ इ न्द्र न्जाकीच्ता मूचापायसा ताटाइश। वकन्वा नाटासाःत। सू वी र्याकिआ उ वाशि। वृ धेताच् ॥१॥
॥ गोधासामच ॥
न कि दे वाःती। ई ना इ नी मा साटूइशमा सीकायाखन क्या योशि। पा या प या मा साटूइशमा सीकायाखम न्द्र श्रु त्यशीम् । चा रा च रा मा साटूइशमा सीखायाण ॥२॥
॥ सवितुश्चसाम ॥
दो षो आ गातीत् । बृ ह द्गा यषीद्यु म त्गाटिमात। अ थचार्व ण स्तु ही यौटुहोखइ दे वातिम् । साकवोपबाप्लता रांप्ला। हा इशा ॥३॥
॥ उषसश्चसाम ॥
ए षो ऊ षाःती। आ पूकार्व्यु व्यू च्छ तीकीहो वाटाहातइश। प्री या दाटिइ वाखास्तु षाखाइ वा माति। श्वीकनोपबाप्लबृ हाप्लात् । हा इशा ॥४॥
॥ त्वष्टुरातिथ्येद्वे ॥
इ न्द्रो द धी चोषुअ स्थ भि री याटुईटयात। वृ त्रा ण्यषिप्र ति ष्कृ त इ याटूईटयात। ज घा न नषीव ती र्न व इ याटूईटयाखऔ हो वाशि। ऊखपाश ॥५॥
इ न्द्रो द धातीइ चो अ स्थाखीभीःण। वृ त्रा ण्य प्राकीति ष्कृ ताःचि। ज घा नाटिनात। व तीकाच्र्न्नाकवा औटाहोखबाप्ल। होप्लइ ळाशा ॥६॥
॥ सौमित्रञ्च ॥
इ न्द्रे हि मातीहातबुश। स्ती या न्धापिसाःश। वा इ श्वेचिभि स्सोथाहातमाकप र्वाखाभीःण। म हंटाआटभाखऔ हो वाशि। ष्टि रो जाटिसाख ॥७॥
॥ इन्द्रस्यचमाया ॥
आ तूखाऔ होप्लाआ तूखाऔ होप्ला। ना इ न्द्र वृ त्राटुहाकथ्न्न स्मा का माकीर्द्धा मा गाटिहीत। मा हाटान्मा हीटाच्भीकरोपबाप्लता इ भोप्लिहा इशा ॥८॥
॥ वैश्वामित्रेच ॥
हाफहा उ वाति। ओ ज स्त दषीस्य ति द्वि षेकीख्। हाफहा उ वाति। ऊ भे य त्सा मषुव र्क्त याकिख्त् । हाफहा उ वाति। इ न्द्रा श्च र्मेकीच्वाकरो दाटासीख ॥९॥
ओ ज स्त दाफीस्य ति द्वि षाकीइश। ऊ भे य त्स म वषूर्क्त या दा इ न्द्रा श्चाटूट्र्म्माखऔ हो वाशि। एतच्वा रो दाटीसीख ॥१०॥
॥ शौनश्शेपञ्च ॥
आ याणामू ताणाफ्इ साखामा त सा इशी। का पो ता इ वाकुगाचर्भायधीटम् । वा चाटास्ता चीटाच्न्नाकओपबाप्लहा सोप्ला। हा इशा ॥११॥
॥ प्रतीचीनेषञ्च काशीतम् ॥
वा त आ वा तु भातूइ ष जातिम् । शंकभू म योकिच्भू नोकाहृ दापाइ हाप्लाहाङइश। प्रा न आ यूं षिपुताशरि षा दौपिहो बाप्ला। होप्लइ ळाशा ॥१२॥
अष्टम खण्डः (ऋ-९, सा-११)
॥ सौमित्रञ्च ॥
यं र क्ष न्तिषीप्र चे त साःती। वा रू णो मि त्रोषुअ र्याटामात। ना का इ स्साटीदात। हि म्मा इ भ्याटीट्ताखऔ हो वाशि। जाखनाःप्ल ॥१॥
॥ श्यावाश्वेद्वे ॥
ग व्यो षु णोषीय था पु राती। अ श्व योकित र था याकीवा रीकाव स्या म हो माटुहो नाखाऔ हो वाशि। ऊखपाश ॥२॥
ग व्यो षु णोषीय था पु रातीएत। अ श्व योकित र थाटियाकथ्वा रीटावा स्या म हो मा होटूटनाखऔ हो वाशि। ईख ॥३॥
॥ शैखण्डिनञ्च ॥
इ मा स्त याती। न्द्रा पृ श्न योकीघृ त न्तूटिहातबु होटाहातहातइ त याटिशाखइ रणाम् । ए नाखामृ ताता। स्याकपोपबाप्लप्यू षाप्लाइश। हा इशा ॥४॥
॥ वैतहव्यञ्च ॥
अ या धि या चषुग व्य यातिएत। पु रू नाकिम न्पूखारूण। ष्टू तौकावातत्। य त्सो मे सो म यातू। य त्सो मेटिसो म योपिबाप्लभू वोप्ला। हा इशा ॥५॥
॥ भारद्वाजञ्च ॥
पा व का न ई यातू। सा राचास्वायतीट। वा जेचाभि र्वाथाच्जी नाकाइ वायातीट। य ज्ञां वाटिट्ष्टूखऔ हो वाशि। धि यातावाटसूःख ॥६॥
॥ अरूणस्यचवैददश्वेस्साम ॥
क इ म्मु हु वातुहातइश। नातच्हू षाकाइ षूयावाट। आ इ न्द्रंकिसो माकास्या ता र्पायियाटत्स नोटाव सूटाच्नी याकाभायराटत्स नोटाव सूकानि याटाभ राकाउ वाता। आ ग ह्ये हीषीत इ मेटिख् ॥७॥
॥ सौभरञ्च ॥
आ या हि सूती। षू माचाहायइ तेटाच्षू माकाहायइ तेटा। आ इ न्द्राचिसो मंथापि बाकाआयइ मांटाच्पि बाकाआयइ मांटा। ए द म्बकिर्हा इ स्साकिदो माटामाखण्। ओपइ ळाप्ला ॥८॥
॥ पाष्ठौहेच ॥
म हा इ त्राखीइ णणाम् । आ वाटार स्तु द्यु क्षाकीर्माखइ त्राणा। स्याटर्य म्नाटादु राकाधाखर्षणम् । वाकरोपबाप्लणा स्योप्ला। हा इशा ॥९॥
म हि त्री णाषीम व र स्तुतीएत। द्यु क्ष र्म्मि त्रषीस्या र्य म्णाकिदु रा धाटिर्षातम् । वा रौ हो वाकीहि म्माटाणा स्योटाट्याखऔ हो वाशि। हातओ वाटाओ वाटाख् ॥१०॥
॥ साकमश्वन्धुरांवासाम ॥
त्वा वा तोकिहा बु होकिओचइश। पु रो व सोकीहा बु होकिओचइश। वा य मि न्द्राकीहा बु होकिओचइश। प्र णे त ॠकीहा बु होकिओचइश। स्म सि स्था त ॠकुहा बु होकिओचइश। हा री णांकिहा बु होकि। ओपइ ळाशा ॥११॥
नवम खण्डः (ऋ-९, सा-१२)
॥ यामञ्च ॥
उ त्वा म न्द न्तु सोतूहोतमाःत। कृ णौ होकिष्वा रौ हो धोकीअ द्रि वाःचि। आकथ्व ब्राटाह्मात। द्वि षाटाहोकवाथऔटहोयइ जाटाट्हाखऔ हो वाशि। एतय यूःटाख् ॥१॥
॥ आङ्गीरसञ्चइन्द्रस्यवा हरिश्रीर्निधनम् ॥
गि र्व णः प हि नषूस्सु त ङ्गि र्व णः पातू। ही ना स्सु ताटीच्म्मा धोकार्धा राकाभी रा हो वाकीज्या सेटाहा उ वाति। इ न्द्र त्वाटिदात। ता मा इ द्याटीट्शाखऔ हो वाशि। हाचरि श्रीःटाख् ॥२॥
॥ वैरूपञ्च ॥
सा दाता। व इ न्द्र श्च कृ षाखूताश। उ पो नु सातीसा प र्य न्न देकुवाःच। ॠ ताणाश्शूफराखइश। न्द्राःत्र ॥३॥
॥ असीतञ्चसिन्धुसामवा ॥
आ त्वा वि श त्वि न्दातूवाःत। सा मु द्र मीकीवा सि न्धा वाःकीसा मू द्र मीकीवाकसि न्धाटावाःत। न त्वा मि न्द्राषीति रि च्य तेकीन त्वाकामाटइ न्द्राता। ति रि च्याटिताखण्इश। ओपइ ळाशा ॥४॥
॥ यमस्यार्कौद्वौ ॥
इ न्द्र मि त्गाती। थी नो बृ हाषीदि न्द्र माटिर्केतच्भीकर र्की णाःचि। इकन्द्रं वाटाणीतरा नूकाष ता इ ळाटीभाखण्। ओपइ ळाप्ला ॥५॥
इ न्द्राफामि त्गा थि नोखीबृ हाशात् । इकन्द्रा म र्का इ भीकुर र्की णाःटि। आ इ न्द्रं वा णीटुर्हातहात। आ नूफाष ताप्ला। होप्लइ ळाशा ॥६॥
॥ सौमित्रेद्वे ॥
इ न्द्र इ षेषीद दा तु नातीएत। ॠ भु क्षा णाकीमृ भूंखाणफप्लराटयितम् । वाचजीथद दा तूकिवोपबा जाप्लाइ नाप्लाम् । हा इशा ॥७॥
इ न्द्र इ षेषीद दा तु न ओतूहातइश। ॠचभु क्ष णाटिमृ भुं राखियीणम् । वा जी द दा तु वातू। वाकजी द दाटितु वोपावाप्लजा इ नाप्लिम् । हा इशा ॥८॥
॥ इन्द्रस्याभयम् ॥
इ न्द्रो अ ङ्गाती। मा हा त्भाटियातम् । आ भीकाषा दचापा च्यु च्याटिवाखत्स हाखाइ स्थि राःति। वीकचोपबा र्षा णाप्लिइश। र्हा इशा ॥९॥
॥ त्वाष्ट्रीसामनीद्वे ॥
इ मा उ त्वाती। सू ताताइ सू ता इषीन क्ष न्ताटिइ गीखार्वा णोप्लगाखइ राःणा। गा वो वाभित्सातच्न्नाकधोपबा नाप्लावोप्ल। हा इशा ॥१०॥
इ न्द्रा नू पूती। षा णा वाटियातम् । सा ख्याकाय सू व स्ताटीयातइश। हु वेकामा वाटाच्जाकसोपबाप्लता योप्ला। हा इशा ॥११॥
॥ इन्द्राण्यास्सामा ॥
न क्ये ना कीती। आचइ न्द्र त्व दु त्व राचून्नाकज्या योथाअ स्तापाइ वृशा। हिंटहिं त्राखाहणन् । न क्येटाव य्यापाथा । हिंपहिंशतूखवांप्ल। हा इशा ॥१२॥
दशम खण्डः (ऋ-९, सा-१०)
॥ श्यावाश्वञ्च ॥
त र णिं वाःती। ज नाटाना मतम् । त्रा दं वा जाटीहातस्या गोकामाखताःण। स मा नाटिमूत। प्र शां सि षाःप्ली। होप्लइ ळाशा ॥१॥
॥ वैरूपञ्च ॥
अ सृ ग्र मा इ न्द्रातूते गि राःति। प्रा तीटात्वा मूटाद हाकास ताशा। सा जोटाषा वृटाष भांकाच्पा ति मोपिइ ळाप्ला ॥२॥
॥ सौमित्रञ्च ॥
सु नी थो घाफीस माशार्क्त्याःक। य म्म रू तोटीच्य मचार्या माचामि त्राः पाचिन्त्य द्रु हाटिउ उ वाटिच्हायउ वाटा। आथति द्वी षाःटिख् ॥३॥
॥ स्तौभञ्च ॥
औ हो वा औ होखुवाशओ हाप्लाइश। य द्वि ळा वीखीन्द्रा याकिस्थी राफाइश। औ हो वा औ होखुवाशओ हाप्लाइश। य त्प र्शा नेखुपा राकाभृ तंफा। औ हो वा औ होखुवाशओ हाप्लाइशव सु स्पा र्हाखीन्ता दाकाभा राफ। औ हो वा औ होखुवाशओ हाप्लाइश। होप्लइ ळाशा ॥४॥
॥ श्रौतञ्च ॥
श्रू ताताम् । वो वृ त्र ह न्त मंषूप्र श द्ध ञ्च ऋकुषा णाटाइ नाताम् । आ शाकाइ षाटाइ राता। ध सेकाच्माकहा औटाहोखबाप्ल। होप्लइ ळाशा ॥५॥
॥ आभीशवञ्च ॥
अ र न्त इ न्द्रषूश्र व सेतिएत। ग माचाइशमाथशू र त्वाकिव तोटाहो वाटाहातइश। आ रांचाशायक्राटहो वाटाहातइश। पा रे माटिणाखण्इश। ओपइ ळाप्ला ॥६॥
॥ ऐषञ्च ॥
धा नाफाव न्त ङ्क राखीम्भि णशाम् । आ पू प व न्त मूयूत्थीपनाशम् । इ न्द्रा प्राखिताशप्ल्ओखहाणइश। जु षो बाप्लिस्वा नोप्ला। हा इशा ॥७॥
॥ इन्द्रस्यचक्षुरपवी ॥
अ पा म्फे नेषीन न मु चेःती। शी र इचिन्द्रो द वाटिर्क्ताखयाःण। वा इ श्वा याटीट्दाखऔ हो वाशि। ज यातास्पाटर्धाःख ॥८॥
॥ सौमित्रे ॥
इ मे त याती। न्द्रा सो मोटिहो वाकाहोचइश। सूकता सो येटिचा सोकातूखवाःण। तेखषांप्लहातहातइश। मा त्स्व प्र भूकीओपबाप्लवा सोप्ला। हा इशा ॥९॥
तु भ्यांताहातबुश। सू ता स स्सो माषुस्ती र्णां बाटिर्हीतवी भाटाच्होयइ वाटासोत। स्तो तृपाआशभ्याटइ न्द्र मृखिऔ हो वाशि। डाखयाश ॥१०॥
एकादश खण्डः (ऋ-९, सा-९)
॥ कौत्सञ्च ॥
आ व इ न्द्रातीम् । कृ वीं य थाषीवा ज याटिन्तातच्श्शा ताचाक्रा तुंशा। मं हि ष्ठांटिसीत। ञ्चा याटाउ वाता। दूखभिःप्ल ॥१॥
॥ ऐषञ्च ॥
अ त श्चि दि न्द्र नषूउ पाताएत। आ याचाहिशशा ता वा जाटीयाखई षाखास हाता। स्राकवोपबाप्लजा योप्ला। हा इशा ॥२॥
॥ उषसश्चसाम ॥
आ बु न्दं वृती। त्राचहा द दा इ जा ताःकूपाकच्छ र्द्वि माटिताखरणम् । का उ ग्राटिकेत। हा श्रुचाण्वि रा इ ळाटीभाखण्। ओपइ ळाशा ॥३॥
॥ बार्हदुक्थञ्च ॥
ब्र ब दु क्थं हातुवा म हातिइश। स प्राटाका राटास्ना मूकाता याचाइश। सा धाःटाका र्ण्वाटाच्न्ताकमोपबाप्लवा सोप्ला। हा इशा ॥४॥
॥ वरुणसामच ॥
ऋ जु नी ती नोषुव रू ण इ हातु। मि त्रोचाना याचाती वि द्वांटिसा इ हाति। अ र्याथामा दाटाइ वा इ हाती। सा जो षाटिउ वाता। ईखहाश ॥५॥
॥ उषसश्चैवसाम ॥
दू राकादीपहे व य त्सा ताःशु। आ रूचाणाचप्सू रा शि श्वाटीइ तातात् । वी भा नूंटिवीत। श्वा थाचात ना दि ळाटीभाखण्। ओपइ ळाप्ला ॥६॥
॥ मित्रावरुणयोश्चसंयोजनम् ॥
आ नो मि त्रा व रुकूणा औथाहो वाटा। घृ तैतार्ग व्यू ति मु क्षाकुता मौथाहो वाटा। मा ध्वाथारा जांटासीकसु औथाहो वाटा। कृ तूकाइ ळाटाभाखण्। ओपइ ळाप्ला ॥७॥
॥ ऋतुसामच ॥
उ दु त्ये सू नातुवो गि राःति। का ष्ठाथाच्य ज्ञाकाइ षु वाटित्नाखताण। वाकश्रा आटाभीत। ज्ञूपयाशताखवोप्ल। हा इशा ॥८॥
॥ विष्णोश्चसाम ॥
इ दा मेति। वि ष्णूटार्वि चा क्राखिमाणइश। त्रा इ धाचिनि दकाधाचइ पायादांटस मूटाहोयढाटमात। स्याटपाखऔ हो वाशि। एंतसू लेताच् ॥९॥
द्वादश खण्डः (ऋ-७, सा-१२)
॥ कौत्सञ्च ॥
अ ती हि माती। न्यू षाटावा इ णांटि। सू षू वांचिसाटचहोकउ पैयारा याटा। आ स्य राकिता बु सूटिताखऔ हो वाशि। पीखबाश ॥१॥
॥ काश्यपञ्चआप्सुरसंवा ॥
क दू प्रा चेचिताकसेफम हाताइ वापाचोशदे वा हा बु व चो दे वाशृ। या श स्याटिताखइ त दाखिइ धि याति। स्याकवोपवाप्लर्धा नांप्ला। हा इशा ॥२॥
॥ बार्हदुक्थेद्वे ॥
उ क्थ ञ्च नोतीहातइश। श स्य मा नाषीन्ना गो राटिच्इ राचाचि केखाताश। ना गा याटित्रांत। गीकया माटानाखऔ हो वाशि। ऊखपाश ॥३॥
इ न्द्र उ क्थातीइशु। भ्यकर्म न्दा इ ष्ठोटीवा जा नाखिञ्चाण। वाचज पाचाति र्ह राटिई वाखान्सूण। ता नांकाच्साकखा औटाहोखबाप्ल। होप्लइ ळाशा ॥४॥
॥ और्ध्वसद्मनेद्वे प्रहितोर्वा संयोजने ॥
ब्रा ह्म णा दीती। न्द्र राकाध साः पि बाकीसो माटामृ तूंकार नूचा। ता वेकादू साटाख्यापमाशस्ताखर्त्ताप्ल। हा इशा ॥५॥
व य ङ्घा तेफीअ पीशास्म साकाइश। स्तोकता र इ न्द्र गि र्व णाषृउ व उ वाटीहोचइश। तूचवायन्नो जीटाउ व उ वाटीहोकथ्न्वाशसो माटाट्पाखऔ हो वाशि। एतऊ पाटाख् ॥६॥
॥ कौत्सानिचत्वारि ॥
आ या हीति। ऊचपा नाचास्सू तंशाहो वाटाहातइश। वा जे भिकिमा हृ णीकिय थाताहो वाटाहातइश। मा हंचाई वा यु वाटीहो वाटाहातइश। जाटट्नाखऔ हो वाशि। उ ऊखापाश ॥७॥
ओटच्होचइशका दाकाव सोफास्तो त्रांटाह र्य ताखियाश। ओटच्होचइशया वाकाश्मा शाफारू धा दूखिवाःण। ओटच्होचइशदी र्घंकासू तंफावा तापापी याखायात्र। ईख ॥८॥
का दाखाऔकहो वाथावा सो स्तो त्रांटीह र्य ताखियाश। अ वाखाऔकहो वाथा। । श्म शाकारू धा दूखिवाःण। दी र्घाखाऔकहो वाथा। सू तांटा। वा ताखापी याखा। यात्र ॥९॥
औचहो वा इशिका दा वाकिसोफस्तो त्रांटाह र्या ताखियाश। औचहो वा इशिया वाकाश्मा शाफारू धा दूखिवाःण। औचहो वा इशिदी र्घंकासू तंफावा तापापी याखायात्र। एतच् ॥१०॥
॥ अभिवादस्यचऔदलस्यसाम ॥
ए न्द्र पृ क्षुषीका सु चीतिदेत। नृ म्णाचात नूकाच्षू धाकाहायइ नाःटा। साचत्राशजि दूचाग्रा पाटापुं सि याकिउ वाता। ऊखपाश ॥११॥
॥ सोमसामच ॥
अ य मे नंषीस च तांतिहातबुश। ओ इ सूटितोतम न्दि मिकिन्द्रा य माटिन्दाखइ नाणाइश। च क्रा इं वाटीट्इ श्वाखाऔ हो वाशि। नी चा क्राटियेख ॥१२॥
बृहतिपाठः
प्रथम खण्डः (ऋ-२०, सा-३१)
॥ इन्द्रस्यार्कौद्वौ ॥
अ भि त्वा शूती। रा नो नूटिमातओ नूटामाःत। आ दु ग्धाकिइ वाचाधा इ नाटिवाखओ इ नाटिवाःत। आ इ शाकिच्न म स्य ज ग ताचूस्सू वाचाद्र शाकामो दृटाशातम् । आ इ शाकिन मिकान्द्रा त स्थूचिषाःकओ स्थूटाट्षाखऔ हो वाशि। स्थु षातास्थू षाःटाख् ॥१॥
आ भि त्वा शूखीरा नो नू माःप्ली। आ दु ग्धाचिइ वाकाधाटई नाटावाःत। आ इ शाकिन म स्य ज ग ताचूस्सु वाटाद्रखशाणम् । ईकशा नाटामीतद्रा ताचास्थु षा इ ळाटीभाखण्। ओपइ ळाप्ला ॥२॥
॥ भारद्वाजेद्वे ॥
त्वा मि द्धीति। ह वाटामा हाचाआचऔकहो वा हा उ वाशु। ऊखपाश। सा तौ वाचिजकस्या काटारा वाटाआचऔकहो वा हा उ वाशु। ऊखपाश। त्वां व्र त्रा इ षूटुइथन्द्राटसाटत्पा तीकामाचऔकहो वा हा उ वाशु। ऊखपाश। ण र स्त्वाकिङ्काकथ्ष्ठा सु वाटिर्वा ताकाआचऔकहो वा हा उ वाशु। उ ऊखापाश ॥३॥
त्वा मि द्धि ह वा मषूहे सा तौ वा जोतुवात। स्याचकायरा वाःटा। त्वां व्र त्रा इ षूषुइ न्द्रा सा तकीत्पाचतीयन्ना राःटा। तू वा ङ्काटिष्ठात। सू व र्वाटिताःखण। ओपइ ळाप्ला ॥४॥
॥ सन्नतेद्वे ॥
अ भि प्र वाःती। सू रा धाटिसातम् । इ न्द्र म र्च या थायूवि दापाइ यो जाखिरि तृता। भ्यो म घ वा पू रोयूवा सूःटा। सा ह स्राटिट्इ णाखाऔ हो वाशि। वा शी क्षाटितीख ॥५॥
आ भा इ प्र वाटुस्सु रा धाखिसणम् । इ न्द्र म र्चा याटुट्थाखऔ हो वाशि। वीखदेश। यो ज रि तृ भ्योकुच्मा घ वाटिपु रोतावा सूःटाख्। स हाताश्रेकणे वाकाशा इ क्षाटिट्ताखऔ हो वाशि। सु भूकात येटाख् ॥६॥
॥ शैतन्त्रृतीयम् ॥
अ भि प्र व स्सु राफूध साखाऔणहोफवाप्ल। आ इ न्द्रा माटीर्चा या थाचिवि दाटाओखहाणइश। योचज रीकातृ भ्योचामा घापावाशपु रोटावाखसूःण। सा ह स्रेफिणातइ वापाशाशहि म्मा इ क्षाटीट्ताखऔ हो वाशि। वाखसूश ॥७॥
॥ नाविकञ्च ॥
तं व ए दा स्मातुम् । ऋ तीकाषा हांचाहो वाकाओ औकाहोतइ हाता। वा सो र्म न्दाकीच्न म न्ध साकीओ औकाहोतइ हाता। आ भी व त्सकीन्न स्वा स रेटीषु धेचान वाटाओ औकाहोतइ हाता। । इ न्द्रंकाओ औकाहोतइ हाता। गी र्भा इ र्न्नाखीऔ हो वाशि। वा माटाहेख ॥८॥
॥ प्रजापतेश्चाभीवर्तः ॥
तं वोणादाफस्माखमृ ती षाप्लिहो वाङा। वा सो र्म न्दाकीच्ना माक्यन्धायसाटआ भी व त्साकीओपना स्वाफस रेफाप्ल्षू धाचाइ नायावाःट। इ न्द्राकाङ्गायइ र्भिटार्न्न वातामाखणफप्ल्। हाखइश ॥९॥
॥ भागञ्च ॥
तं वो द स्म मृ तीफूष हा उ वोखीवाश। वा सो र्म न्दाकीन मचान्धा साकाआ भी व त्स न्न स्वषूस रा इ षू धायुइ नापवाःश। ओ वा इकिन्द्र ङ्गाटाइ र्भीताच्न्न वातामापहात्रइश। भ गातायाटख् ॥१०॥
॥ इन्द्रस्याभीवर्तः ॥
तं वो द स्मा मृ तीफूष हांतावापसो र्म न्दा न मप्लुन्धाङसाश। आ भी व त्सषीन्ना स्वा सा रेकीच्षू धाकाइ नापावाःश। इ न्द्र ङ्गी र्भायीइ र्न्नापावाश। हिंटहिंतहिंटहिंख। न वा न वोप्लीवाप्लमा मोप्ला। हा इशा ॥११॥
॥ नौधसम् ॥
तांपवो द स्मा मृ तीप्लुषाङहाशम् । वा सो र्म न्दाटीनाटम न्धापासाश। आटभीतव त्स न्न स्व स राषूइ षूयाधेकनाखवाःण। आटइ न्द्राता। गा इ र्भि र्न्नाकीवोपओ बाप्ला। माखहेश ॥१२॥
॥ लौशेद्वे ॥
ता राःता। भाचइ र्वोकावि दाताआ उ वाटिद्वाखसुशम् । इ न्द्रांटाच्साचबा ध ऊकित येटाबृ हाचात्बृ हाताआ उ वाटा। गा यचान्ताकस्सू ता सोकिमे आचाध्वा रेचा। हु वे भाटिरातन्ना काचारि णा मि ळाटीभाखण्। ओपइ ळाप्ला ॥१३॥
ता राःता। भाचइ र्वोशावि दाताआ उ वाटि। द्वाखसुशम् । इ न्द्राटाच्सा बाचाध ऊकात येटाच्बृ हाचात्गाययाटन्त स्सू ता सोटीमेतआ ध्व राचिइश। हु वे भाटिरातन्ना काचारि णा मि ळाटीभाखण्। ओपइ ळाप्ला ॥१४॥
॥ धानाकेद्वे ॥
त रो भि र्वोषीवि द द्वातिसूतम् । इ न्द्रातामि न्द्रंचास बाकाच्धाकऊचताययाटइश। बृ हातात्बृ ह त्गा य न्त स्सूतूत सोकाच्माचयायध्वा राटाइश। हू वाचाइशहू वे भ र न्ना काचूरि णा मि ळाटीभाखण। ओपइ ळाप्ला ॥१५॥
त रो भि र्वोषीवि दा ओ द्वा सूतुम् । इ न्द्रं स बाचीध ऊटाताखयाणइश। बृ हाचात्बृ हाताआ उ वाटि। गा य न्ताचिस्सू ता सोचिमे आचाध्वा रेचाहू वेकाहो इ भाटिरातन्ना काचारि णा मि ळाटीभाखण्। ओपइ ळाप्ला ॥१६॥
॥ कालेयानित्रीणि ॥
त रोटाभि र्वो वि दाखीद्व सूशाम् । इ न्द्रं स बाचीधाटऊ ताचायाकओखवाशप्ल्ओखवाण। बृ ह त्गा य न्तःषुसू त सोकिमाचयायध्वा राटाओखवाशप्ल्ओखवाण। हू वा इ भ र न्नाचूकाकराखइ णणाम् । ओखवाशप्ल्ओखइ ळाशा ॥१७॥
ता रो भि र्वोटीवि दाखाद्व सूशाम् । इ न्द्रंचास बाकाच्धा ऊकाताययाटऔटहोतवा औटाहोतवात। बृ ह त्गा य न्तषुस्सू त सोचिमाकयायध्वा राटाऔटहोतवा औटाहोतवात। हू वाचाइ भायाराटऔटहोतवा औटाहोतवात। ना काचारि णा मि ळाटीभाखण्। ओपइ ळाशा ॥१८॥
त रो भा इ र्वोखुवी द द्व सूप्लीम् । इकन्द्रं स बाचिध ऊकाच्ताकयापइ बृ हाप्लित्गा यातान्तापसू ता सोणिमे आफाध्वातरातइश। हू वाचाइ भ रौकिवाखओखवाण। न का रि णांप्ली। होप्लइ ळाशा ॥१९॥
॥ ऐषिरेद्वे ॥
त र णि रीतीत् । सि षा साखितीण। वाकजांचपु राचान्धि यातायु जाटाआ वाटाइखन्द्रणम् । पु रू हू ताचीन्न मेकागा इ राःटिना इ मिटिन्ताखष्टेण। वाकसु द्रू वाटिख्म् ॥२०॥
ता राताहातबुश। णी रि त्सीचीषा स ती हा याकुइ हा यातिइश। वा जंचापु रकाच्न्धी याचायुयजौटहो वाताहातइश। आ व इ न्द्रं प रुकूहू तथान्ना माकाइ गायाइ रौटाहो वाताहातइश। ने मिचान्त ष्टेकाच्वा साचाऔकहो वा हाखिऔ हो वाशि। द्रूखवशम् ॥२१॥
॥ गौश्रृङ्गेद्वे ॥
त र णि रि त्सी षाफूस तीतावापज म्पु र न्ध्याप्लीयूङजाश। वा जं पु रषीन्ध्या यू जा वाटीइ न्द्रांखापु रु हू त न्न मेफूप्ल्गातइ राःता। नेकमा इ न्ताटिष्टेत। व सू द्रूचिवा मि ळाटिभाखण्। ओपइ ळाप्ला ॥२२॥
त र णि रि त्सी षाफूस तीतावापजं पु र न्ध्याप्लीयूङजाश। वा जं पु र न्ध्या यू जा व इ न्द्रषै पु रु हू त न्न माटेइ गा इ रा होकुवातउ उ वो इचीइश। ने मि न्त ष्टे व साचूउ वाकाओपबाप्लद्रू वांप्ला। हा इशा ॥२३॥
॥ प्रष्ठमेकम् ॥
पि बाताच्सु त स्य र सि नाःचू। म त्स्वा नषिइ न्द्र गो म ताटुहोकइ याचा। आकपि र्न्नो बो धिषीस ध माकिद्ये वृ धाटिहोकइ याचा। अ स्मं आटिवात। न्तू ता इ धाटीट्याःखण्। ओपइ ळाप्ला ॥२४॥
॥ शुक्लएकम् ॥
पि बा सु त स्य र सि नोतुहातबुश। म त्स्वा न इचीन्द्रा गो माटितो हा उ वोखीवाश। आकपि र्न्नो बोकिधी सा ध माकीद्ये वाटार्धे हा उ वोखीवाश। अ स्मं आ वचीन्तू ते धाटियो हा उ वोखीवाश। ईख ॥२५॥
॥ जमदग्नेरभिवर्तएकम् ॥
पि बा सु तषीस्य र सि नो म त्स्वातूहातबुश। नाटाइ न्द्रा गो म तोटिहातबुश। आकपि र्न्नो बोकिच्धीकस ध माटिद्ये वृ धाटिहातइश। अ स्मंचाअ वाचाहा न्तु तेटिहोटयाखऔ हो वाशि। धि य ऊखि ॥२६॥
॥ कौन्मुलबर्हिषेद्वे ॥
तू वांणाफ्हाखए हि चे र वा इशू। वी दा भा गं व सूटूक्ता यापाउ द्वा वृ ष स्व मा घ वाशृन् । ऐकहा इ गाटिवि ष्ट याचिइश। ऊ दि न्द्रोषिअ श्व मा उ वाकुओपबा ष्टा योप्लि। हा इशा ॥२७॥
त्वं ह्ये ही चे रातुवातइश। वी दा भा गं व सूयूक्ता यापाउ द्वा वृ ष स्व मा घ वाशृन् । आचइ ही ओचिइशग वि ष्ट याटीइशया इ । ऊ दि न्द्रोटिआ श्व मीचिओंतओंचओखवाप्लष्टा योप्ला। हा इशा ॥२८॥
॥ वसिष्ठस्यजनित्रेद्वे ॥
न हि वा श्चाखीरा म न्चा नाप्ली। हु वेटाहो वाकाइशव सि ष्ठःषिप रा इ मांयीसा ताटाइश। अ स्मा का म द्याषुम रू ताटिस्सू ता इ साखिचाण। वा इ श्वेकिहो इ पि बाकीहोकथ्न्तू का माटिट्इ नाखाऔ हो वाशि। जतनि त्राटाख्म् ॥२९॥
न हि वा श्चा रा मफून्न्च नाखाव सि ष्ठाःकि। हो इ हो इषीप रा इ मांयीसा तापाइशआ स्माफाका माफाद्या माफारू ताफासु ता इ साखिचाण। वा इ श्वेकिपी बटाच्न्तूककौटहोतमाटट्इ नाखाऔ हो वाशि। जतनि त्राटाख्म् ॥३०॥
॥ मैधातिथम् ॥
मा चि द न्य दोतुहातइश। वि शां साखिताण। सा खा योटिच्होयइ मा औपिहोश। रा इ षाकिउ वाकाण्या ताकाउ वाका। इ न्द्र मि त्स्तो ताषुवृ ष णा औपीहोश। सा चाकाउ वाकासू ताकाउ वाका। मु हू रु त्था औपुहोश। चा शा औकिहो वाकाहोखबांप्लसा तोप्ला। हा इशा ॥३१॥
द्वितीय खण्डः (ऋ-१२, सा-२५)
॥ वैखानसम् ॥
न कि ष्टा ङ्काखीर्म्मा णा ना शाप्लीत् । य श्च का राखीस दाकाच्वृकधांपस दाप्लावृ धाताम् । इकन्द्राचन्न याचाज्ञै र्वि श्वा गूकीर्क्ता मृकाभ्वा सापान्ता मृफाभ्वा साताम् । आ धा रि ष्ट न्धाचुष्णु मोकाच्जा सापाष्णु मोप्लाज साखण्। ओपइ ळाप्ला ॥१॥
॥ प्राकर्षम् ॥
न कि ष्ट ङ्क र्म्म णाषून श द्धोतिइश। य श्च का राखीसा दा वृ धाप्लीम् । आ इ न्द्राटिन्ना याटाज्ञै र्वि श्वा गू र्क्ता मायूभ्वा साटाम् । आ धृटाच्हो ष्टा न्ध्रखिहा ओ वाशि। ष्णु मोताजाटसाख ॥२॥
॥ सात्यम् ॥
या ॠ ता इ चीखुदा भी श्री षाःप्ली। पु राटाजा त्रूटाभ्या आ तृ दाचीहो वाटाहातइश। स न्धाटाता साटान्धा इ मा घ वाटुपु रो वाचिसु र्हो वाटिहातइश। ना इ ष्काटिर्क्ता वीटाह्रु त म्पूकिना र्होटाहाखऔ हो वाशि। ऊखपाश ॥३॥
॥ भारद्वाजानिचत्वारि कण्वब्रहद्वाद्वितीयम् ॥
आ त्वा स हाती। स्रा माचाशायताटम् । यु क्ताचार थेकाच्हि र ण्य येचीब्र ह्माकायूयजोट। हा र य इकिचन्द्रा काक्यइ शायाइ नाःटा। वा हाकान्तूयसोटमाटपाखऔ हो वाशि। ताखयेश ॥४॥
औ होषाआ त्वा सा हातीएत। स्रा माचाशायतांपहाप्लहाङइश। यु क्ताकार थेकाहि र ण्य येकीच्ब्र ह्माकायूयजोपहाप्लहाङइश। हा र य इकीच्न्द्रा काकाइ शायाइ नाःपहाप्लहाङइश। वा हाचान्तूयसोपहाप्लहाङइश। मा पीकातापया उ हु वाप्लीहाप्लबुश। बाश ॥५॥
आ त्वा स ह स्र माषूश त माति। यु क्ता र थे हि र ण्य ये ब्र ह्म यू जोषोह र य इचीन्द्रा के हाटिशा इ नाटिहा उ वाति। वा ह न्तु सोचीम पौकाहोतहि म्माटा। त याताओपबाप्ल। ऊख ॥६॥
आ त्वा स ह स्रा माफश ताखामा त्वा सा हाशी। स्रा मा श त माटुइ हि योखिहाणइश। यु क्ताचार थेकाहि र ण्य येकीच्ब्र ह्माकायूयजोटआटइ हि योखिहाणइश। हा र य इकीच्न्द्रा काकाइ शायाइ नाटाआटइ हि योखिहाणइश। वा हाचान्तूयसोटआटइ हि योखिहाणइश। मा पी ताटियाखण्इश। ओपइ ळाप्ला ॥७॥
॥ वाम्राणित्रीणि ॥
आ म न्द्रै रातीइ न्द्र ह रि भातुइःश। याकही म यूकिच्राकरोकमा भापाइशर्म्मा त्वा काकिइ चीशात् । नी ये मूखिर्वीश। नाकपा शि नोचिती ध न्वेटिच्वाकतंटआटइ हाखाऔ हो वाशि। वाखयाःप्ल ॥८॥
आ म न्द्रै रि न्द्र हातूरि भाताइःश। याकही म यूचिराकरो म भाषिइ र्म्मा त्वा काटीइ चीतात् । नी येकामु र्वीकान्नाकपा शाटाइ नाःता। आ ता इ धाटीन्वेतच्। वाकतंटआटइ हाखाऔ हो वाशि। व योताभीःख ॥९॥
आ म न्द्रै रि न्द्र हातूरी भीःता। याकहि म यूचिराकरो म भी रा उ वाशू। मा त्वाटाच्केकचि न्नि ये मु र्विकुन्ना पा शि नो उ वाटू। आ तीटाध न्वेचाव तंताआ उ वाटि। ईखहिश ॥१०॥
॥ गौङ्गवम् ॥
त्व मा ङ्गाखिप्रा शं सी षाःप्ली। दा इ वाचिश्श वि ष्ट मा र्क्ताखुयणम् । न त्वा द न्योचीमा घ वचिन्नाटस्ति मा र्धाखिइ ताणा। आ इ न्द्राखिबृशवा औपाहोश। मीकतोपबाप्लवा च्योप्ला। हा इशा ॥११॥
॥ साध्राणि त्रीणि ॥
त्व मि न्द्राति। या शा य सीचीऋ जीकाषी श वाचिस स्प ताचिइश। त्वं व्र त्रा णीतीहं स्याता। प्रा ती ना येकीच्का ई त्पूकिरूभरा नूटाहो क्ता श्चाटिर्षाटट्णाखऔ हो वाशि। धाखर्क्तिःप्ल ॥१२॥
त्व मा इ न्द्राखीया शा य साप्लीइश। ॠकजा इ षीकिशाटवा साखाणफप्ल्। स्पाखतिःश। त्वंकव्र त्रा णीकिहं स्याचाप्रा तिचान्येशका ईचात्पु रू रा नाभीउ वोखावाश। क्ता श्चाटाउ वोखावाशर्ष णा इ धृ तिःप्लु। होप्लइ ळाशा ॥१३॥
हा बु त्व मि न्द्रातु। या शा याखिसी हा बुशि। ॠ जी षीखिशाशवा स स्पाखिती र्हा बुशि। त्वंकवृ त्राकाणी हं स्या हाभीबुश। प्रा ती नाखियेण। का ई त्पूपिरूप्लर्हाङबुश। आ नु क्तापिश्चाप्लर्हाङबुश। षाटणाखऔ हो वाशि। धाखर्क्तिःप्ल ॥१४॥
॥ विरूपस्य समिचीन प्राचीनेद्वे ॥
हा बु त्व मि न्द्रातु। या शाचाय सीकाहो इ हो इ हो येपूहा बु हा बु हा बुशू। ॠ जीकाषी श वाचिस स्पा तिचिर्हो इ हो इ हो येपूहा बु हा बु हा बुशू। त्वं वृ त्रा णिकीहं स्याचाप्रा तीचान्येशका ईचात् पु रूकार्हो इ हो इ हो येपूहा बु हा बु हा बुशू। आ नु क्त श्च र्षा णिकूधृचतीकर्हो इ हो इ हो येपूहा बु हा बु हाप्लुउ वाशा। स्वकर्म हाःटाख् ॥१५॥
हो त्व मि न्द्राती। या शाचाय सीकाहो येटाहोख। ॠ जीकाषी श वाचिस स्पाचातिटर्हो येटाहोख। त्वं वृ त्रा णीकीहं स्याचाप्रा ती न्येचिका ईचात्पु रूकार्हो येटाहोख। आ नु क्तषिश्च र्षा णि धृ तीटुर्हो येटाहोखहा उ वाति। स्वकर्म याःटाख् ॥१६॥
॥ यौक्तास्रजमिन्द्रस्येन्द्रियंवा ॥
इ न्द्र मि द्दे व तातू। ता या इ न्द्र प्रा याकूती य ध्वाटिरातइश। आ इ न्द्राटिस मीकाके वा नी नोचीहा वा माटिहातइश। आ इ न्द्राटिधा ना स्य सोपीबाप्ल। ताखयेश ॥१७॥
॥ आत्राणित्रीणि ॥
इ मा उ क्त्वा पु रोषूव सो गि र एतुगि राःता। वा र्ध न्तु याकीम माटापा व क व र्णातुश्शु च यो वीपीपाश। हिंटहिं श्चाखाइ ताःणा। आ भि स्तो मैकीर नूटाच्हू वाकाएकहो वाटा। षाकता औटाहोखबाप्ल। होप्लइ ळाशा ॥१८॥
इ मा उ क्त्वाषीपु रो व सो हातुबुश। गी रोचाव र्धकान्तुचयायम माटाइ हाताहातहोचइ होखावाश। पाथवा क व र्णाकीश्शु च योकिइ हाताहातहोचइ होखावाश। वी प श्ची तोचीआ भि स्तो मैकीरि हाताहातहोचइ होखावाश। आ नू षाटिट्ताखऔ हो वाशि। ऊखपाश ॥१९॥
इ मा उ क्त्वा पु रोफूव साताबु गापाइ रो व र्ध न्तु याप्लूमाङमाश। पाथवा क व र्णाकीश्शु च योटिच्वी प श्चि ता औभूहोतआ औटाहोत। आ भि स्तो मैचीर नूटाच्हू वाकाएटहो वाका। षा ता औटिहोखबाप्ल। होप्लइ ळाशा ॥२०॥
॥ वासिष्ठानित्रीणि ॥
उ दु त्ये माती। धूकम क्त माटिगा इ रा स्तोखीमाण। साकई र ता एभीसा त्रा जाखिइ तोशाधा ना साखियाण। क्षीकतो त योटिवा जा याखिन्ताःण। र था आखिइश। वात्रा ॥२१॥
उ दु त्ये माफीधु मा क्त माःकी। गी र स्तो मा स याटूई राटाता इशा। स त्रा जि तो ध नाटूसा या क्षि तोकीता योटा। वा ज य न्तो र थातूआ उ वाति। ईखवाश ॥२२॥
हातउ दु त्ये म धू माफूक्त मोखाहा इशा। गाचइ र स्तो माटीस याखाणफप्ल्इश। राखतेश। स त्रा जि तो ध नाकूसा या क्षि तोकीता याःखा। हातवा ज य न्तो र थाफूइ वोखाहा इशा। वा ज य न्तोकीर थाताच्ईकवा औटाहोखबाप्ल। होप्लइ ळाशा ॥२३॥
॥ वत्सस्यकाण्वस्य सामनीद्वे गौतमस्यवामनार्ये ॥
या था गौपिरो अ पा कृ ताशुम् । तृ ष्य न्ये तीकीया वे राटिइ णाताम् । आकपि त्वे नषिप्र पि त्वे तुचीया मा गाटिहीत। क ण्वेटाच्षूकसू साटाट्चाखऔ हो वाशि। पीखबाश ॥२४॥
ओ वा योखिवा या थाशि। गौ रोथाआचपा कृकाता मोखाहाप्लहातइश। तृ ष्य न्ने तीचीया वाचाइ रिशाणा मोखाहाप्लहा याखापीण। त्वे न प्र पि त्वे तूचूयाकमाचग हिशाओखहाप्लहातइश। क ण्वेटाच्षूकसू साटाट्चाखऔ हो वाशि। पि बाताईटख् ॥२५॥
तृतीय खण्डः (ऋ-१२, सा-२५)
॥ हारायणानि त्रीणि ॥
श ग्ध्यू षूति। शा चा इ पाचीताकईखन्द्राश। वि श्वाथाच्भी रू ती भाकीइ र्भाखागशम् । न हि त्वा याचीशा संचावा सूकावाखइ दशाम् । आ नू शूटिट्राखऔ हो वाशि। च राटाम सीखा ॥१॥
श ग्ध्यू षौ होफीश ची प ताकीइश। आ इ न्द्रं वि श्वा भी रूषूती भी र्भ गा न्नाटूहीत। त्वा याचाशा संकावा सूटाहातइ वा इ दाटीम् । आ नू शू र च राषूउ वाकाओपबाप्लमा सोप्ला। हा इशा ॥२॥
श ग्ध्यू षु शा चीफुप ताखाइ श ग्ध्यु षूशी। शा चा इ पा ताटुइ हि माखिहाणइश। आ इ न्द्रं वि श्वाकुचभी रूकाती भी राटिइ हि माखिहाणइश। भा ग न्न हीषीत्वा या शा संकीच्वा सूकावी दा माटिइ हि माखिहाणइश। आ नूचाशूयराटइ हि माखिहाणइश। चा रा माटिसाखण्इश। ओपइ ळाशा ॥३॥
॥ वाम्राणित्रीणि ॥
या याताहो इखान्द्राश। भूचजा आकाभायराट। सु वाताहा र्वं याचिसू राकाइ भायायाःट। स्तो ताटाहातच्राकमि न्म घ व न्न स्याचूवायर्धा याटा। या इ चाटिहातइश। त्वे वृचाक्ता ब र्हाटिइ षाःखाण। ओपइ ळाशा ॥४॥
या इ न्द्र भु जा आटूभातराःत। स्व र्वंथाच्आटसू रेटाभाखयाशहा होखाहाणइश। स्तो ताथाच्रा मा इ न्माचीघ वकान्ना स्य वाटिर्धाखयाशहा होखाहाणइश। येकच त्वाकाइ वृताहा होखाहाणइश। क्ता ब र्हाटिइ षाःखाण्। ओपइ ळाशा ॥५॥
या इ न्द्र भु जषुआ भ र उ हु वातूहातइश। स्व र्वंथाच्आटसु रेटाभ्याचउ हु वाटिहातइश। स्तोकता र मि न्म घ वषून्न स्य वायिर्धा याटाच्उ हु वाटिहातइश। येचच त्वाटाइ वृताच्उ हु वाटिहातइश। क्ताचब र्हाटाइ षाःखाण्। ओपइ ळाशा ॥६॥
॥ वरुणसामानित्रीणि ॥
प्र मि त्रा य प्रातुहातबुश। आटर्य म्नाचाइ स चाटिहोकथ्धि यौटाहु वा र्ताटिव साचाबुश। व रौटाहोकथ्धी यौटाहू वा इषिव रू णे छा न्दीकुयं व चाःचि। स्तो त्रांटाहो इ राटिजौटहू वा सूकिगा या ताटिआ उ वाटि। ऊखपाश ॥७॥
प्र मि त्रा य प्रौ होतूवात। अ र्य म्णा बु होकुच्औकहो वाका। सा चा थ्य मृकीता वाचासा बु होकिच्औकहो वाका। वा रू थ्ये व रू णेचूछकन्दी यं वाकिचा बु होकिच्औकहो वाका। स्तोकत्रं राकाजा बु होकिच्औ हो वा । सूकगा याकाता बु होकिच्औकहो वाःपाण्। ओपइ ळाशा ॥८॥
प्र मि त्रा यषीप्रा र्य म्नोतिवा ओतावात। सा चाचाथ्य मृचाता वायासाटबुश। वाटरूतथाटयातइ व रू णेकीच्छकन्दा यांटाहातइ व चोटिआत। स्तोकत्रं राकाज सु गाचिय त स्तोटित्रातम् । राकजचसूकगौटहोतओपबा या तोप्ल। हा इशा ॥९॥
॥ वषट्कारनिधनञ्च साकमश्वम् ॥
अ भि त्वा पू र्वषुपी त ये आ भीफुत्वा पूखार्वा पी त याप्लीइश। इ न्द्रा स्तो मैथीच्भि राकाय वोचाभी राकायायवाटओ मो वाकि। स मी ची नाषीसा ॠ भा वाचीस माकास्व राटान् सा माचास्वायराटनो मो वाकि। रु द्राचागृ णकाच्न्ता पूकार्वा याटाच्न्ता पूचार्वाययाटमो मोकावाखऔ हो वाशि। ऊखपाश ॥१०॥
॥ बृहतश्चमारूतस्यसाम ॥
प्र व इ न्द्रा यषुब्र ह ते प्र वाःतु। इ न्द्राथाच्या बृचाहायतेटओ मो वाकि। म रू तो ब्रचीह्मा आकार्चायताटओ मो वाकि। वृ त्रं हा नाटीती वृ त्रचिहाटओ मो वाकि। शा ता क्रा तुकीर्वाखज्रेण। ण शाताहातहात। त पा र्व णाप्ली। होप्लइ ळाशा ॥११॥
॥ संश्रवसे वीश्रवसे सत्यश्रवसे श्रवस इतिवार्यानां सामानिचत्वारी सांशानानिवा ॥
स न्त्वाचाहि न्वथाच्न्ती धाकाइ तायाइ भीटास्ता इ भीःटी। बृ हाकादि न्द्राथाच्या गाकायायताटया ताटा। म रू तो वृचीत्रा हाकान्तायमाटन्ता माटाम् । ये न ज्योचिति र ज न यकुच्न्नृ ताकावायर्धाटवा र्धाःटा। दे वकान्दे वाथाच्या जाकागृयवीटङ्गृ वीटाम् । स न्त्वाचाहि न्वथान्ती धा इ ताटीइ भी स्ताटिइ भाखाऔ हो वाशि। संचश्र व सेखि ॥१२॥
स न्त्वा रि णकीच्न्ती धाकाइ तायाइ भीटास्ता इ भीःटी। बृ हाकादि न्द्राथाच्या गाकायायताटया ताटा। म रू तो वृचीत्रा हाकान्तायमाटन्ता माटाम् । ये न ज्योचिति र ज न यकुच्न्नृ ताकावायर्धाटवा र्धाःटा। दे वकान्दे वाथाच्या जाकागृयवीटङ्गृ वीटाम् । स न्त्वा रि णकीच्न्ती धा इ ताटीइ भि स्ताटिइ भाखाऔ हो वाशि। वीचश्र व सेखि ॥१३॥
स न्त्वाकाता ताचाक्षु र्धाकाइ तायाइ भीटास्ता इ भिःटि। बृ हाकादि न्द्राथाच्या गाकायायताटया ताटा। म रू तो वृचीत्रा हाकान्तायमाटन्ता माटाम् । ये न ज्योचिति र ज न यकुच्न्नृ ताकावायर्धाटवा र्धाःटा। दे वकान्दे वाथाच्या जाकागृयवीटङ्गृ वीटाम् । स न्त्वा ता ताचाक्षु र्धा इ ताटखइ भी स्ताटिइ भाखाऔ हो वाशि। स त्याचाश्र व सेटिख् ॥१४॥
स न्त्वा शि शकीच्न्ती धाकाइ तायाइ भीटास्ता इ भीःटी। बृ हाकादि न्द्राथाच्या गाकायायताटया ताटा। म रू तो वृचीत्रा हाकान्तायमाटन्ता माटाम् । ये न ज्योचिति र ज न यकुच्न्नृ ताकावायर्धाटवा र्धाःटा। दे वकान्दे वाथाच्या जाकागृयवीटङ्गृ वीटाम् । स न्त्वा शि शकीच्न्ती धा इ ताटीइ भी स्ताटि इ भाखाऔ हो वाशि। श्र व सेटिख् ॥१५॥
॥ वासिष्ठानि त्रीणि भार्गवं वा तृतीयम् ॥
इ न्द्रा औभिहोत। क्र तुचान्ना आकाभायराट। पि ता औभिहोत। पु त्रेथाच्भी योकायायथाट। शि क्षा औभिहोत। णो अ स्मि न्पु रू हूकूता याकामायनीट। जी वा ज्योटिताखऔ हो वाशि। अ शी म हीखी ॥१६॥
इ न्द्र क्र तुफीन्न आ भ राकी। पि ता पु त्रेकीभी यो य थाषीशा इ क्षा णोटीआत। स्माकइ न्पु रु हूकीताचयायमा नीटाऔटहौटहू वा औकिहोतवात। जी वा ज्यो याटितीःत। अ शी माटिहाखइण। ओपइ ळाप्ला ॥१७॥
इ न्द्र क्र तु न्न आफूभ रा उ वोखीवाश। पि ता पु त्रेखाभी योचाया थाप्ला। हातपि ता पु त्रे भि योचूयाकथापहा बु शा इ क्षा णो आशृ। स्मा इकान्पु रू हूकित याचामा नीपाहा बु जी वा ज्यो तीःशू। आकशोपवा मा होप्लि। हा इशा ॥१८॥
॥ स्ववस आञ्जीकस्यसामनीद्वे ॥
मा न इ न्द्राती। प रा वापिर्णाशत् । भा वा न स्सा ध मायूदीपयाःश। त्व न्न ऊ तीषीस्त्व मि न्न आयुपीपयाशम् । मा न इ न्द्राकीप रा वृकिणातआ उ वाटि। ऊखपाश ॥१९॥
मा न इ न्द्रा पा राफूवृ णाखान्मा न इ न्द्राशी। पा रा वाटिर्णातत् । भा वा न स्स धाकुमा दाटायाःत। त्व न्न ऊ तीटीस्वा मि न्नाटिआ पि याचिम् । मा नाताइ न्द्राता। पा रा वाटिर्णाखआणत् । ओपइ ळाशा ॥२०॥
॥ काण्वम् ॥
व य ङ्घाखित्वा सु ता व न्ताःशु। आ पो न वृ क्ताकुबाटर्हि षाकाउ वाता। पा वि त्र स्याचीप्र स्राचावा णाचाइश। षू वृ त्राटिहातन्पाटरीतस्तो ता र आकीसापतात्रइश। आचर्षश ॥२१॥
॥ वैष्टम्भेद्वे ॥
औ हो वा इ व य ङ्घ त्वाषृसु ता व न्त औ होतूवात। औ हो वा या पो वृ क्त ब र्हि षःषेप वा इ त्रापीस्याश। प्र स्र व णे षु वायूत्रापहाशन् । औ होतावातऔ हो वा इ प रि स्तो र आ स तेषोप रा इ स्तोटीतात। र आकासाकता औटाहोखबाप्ल। होप्लइ ळाशा ॥२२॥
व य ङ्घ त्वोतीहा इ सु ता व न्तोतूवात। आ पो न वृ क्ताकुबाचर्हायइ षाटाहो वाटाहातइश। पा वि त्र स्यकीप्र स्र व णेकीच्षू वाकात्रायहाटन्हो वाटाहातइश। प राचाइ स्तोयाताटहो वाटाहातइश। र आ साटिट्ताखऔ हो वाशि। दीखशाःश ॥२३॥
॥ काण्वञ्चैव ॥
औ होताहोतहा आ इ हि वातुयातम् । घाखत्वाशसू ता वाखिन्तोशआ पो नाखिवृण। क्ताकब र्हि षाकिऐकहा याखाइ हिशापा वि त्राखिस्याशप्र स्रा वाखिणेण। षूकवृ त्र हाकिनै हा याखिइ हीशापा री स्तोखिताण। र आ साखितात्रइश। आखभिश ॥२४॥
॥ श्रुष्टिगवञ्च ॥
ओतहा इ य दि न्द्र नाषूहु षी षूतिवात। ओ जोटानृ म्णाटाञ्चाककृ ष्टि षुचिऐटही आ इ हीशीहोकवाथच्उ उ वोचिइश। य द्वाटाप ञ्चाटाक्षि तीटानाशमै हीटाऐटही आ इ हीशीहोकवाथच्उ उ वोचिइश। द्यु म्न मा भ राकुऐटही आ इ हीशीहोकवाथच्उ उ वोचिइश। सा त्राटावा इ श्वाटिच्नी पौंकास्या ऐ हीटिआ इ हीकिहोकवाथच्उ उ वोटिट्याखऔ हो वाशि। ऊखपाश ॥२५॥
चतुर्थ खण्डः (ऋ-१०, सा-१७)
॥ इन्द्रस्यचवृषकम् ॥
स त्य मि त्था वृ षातूइ द सातिइश। वृ ष जू ति नोषुर्वि ताटावृ षाचाह्यु ग्राचाशायण्वि षाटाइ प राकिवा ताचाइश। वृ षो आटिर्वात। वा ता इ श्रूटीताःख। ओपइ ळाशा ॥१॥
॥ द्वैगतेच ॥
य च्छा क्रा सीखीपा रा वा तीप्ली। या द र्वा वाटीच्ती वाकात्रायहाटन् । अ ताताऔटहोतवात। स्त्वा गी र्भिटिद्यु ग दिकिन्द्रा केयाशी भीःटा। सू ताचावंटआखआ औ हो वाशि। एतवि वाटास तीखा ॥२॥
य च्छ क्रा सिषीप रा व ति य दोतूवात। अ र्वाथाच्वा ताकाइ वायात्रा हापान्न ताखास्त्व गाताइश। भाकइ र्द्यु ग दिकीन्द्रा केयाशी भीःटा। सू ताटावंटट्आखऔ हो वाशि। वि वाटास तीखा ॥३॥
॥ कार्तवेशञ्च ॥
आ भी वो वी रषुम न्ध साति। म देकाच्षुकगा याटागीकरा मा हाटिवी चेकाताखसणम् । इ न्द्र न्ना माती। श्रु त्यंकाशा काटाइ नाखामौ हो वाशि। व चोता। ऊटपाख ॥४॥
॥ इन्द्रस्यच शरणम् ॥
इ न्द्र त्रि धाफीतु शा र णाशीम् । त्री व रू थंषीस्व स्त याचिइ छ र्दि र्याटीच्छात। मा घ व त्भ्याकीश्चाकम ह्याटाञ्चात। याकव याटादीतद्यू मेकाभ्या औटाहोखबाप्ल। होप्लइ ळाशा ॥५॥
॥ श्रायन्तीयञ्च ॥
श्रा य न्त ई व सूषूओ रातायातम् । वि श्वाटाइ दि न्द्राटिस्य भाटाक्षा ताटा। वा सू नि जाकीतो ज नि माकीच्नी योकाजायसाट। प्रा ती भाकिग न्ना दीकिधी मः प्राटितीत। भा गा न्नापिदा हिशाम् । धि माताओपबाप्ल। हेख ॥६॥
॥ आक्षीलन्चबाभ्रंवा ॥
न सी माचिदेकवाफयाप्लहातहातइशपापत त्प तो वाशी। इ षं होटिइ दी र्घा होभीयोचमायर्क्त्याःट। आ इ त ग्वाटीचीतद्या याकाइ ता शोकियू यो उ वाकी। ऊखपाश। जा ताटाआ इ न्द्रोटि हा रीटाच्यूकयो जाटाजाटताखऔ हो वाशि। उ ऊखापाश ॥७॥
॥ शौक्तानि त्रीणि शुक्लानिवा आश्वानिवा ॥
आ न ए वि श्वातु। सु हाटाओ व्याटाम् । आ इ न्द्रं स मा त्सूकूभू षा ताकिऊखपाशप्ल्हातहातइश। ब्र ह्माकाणी स व नाचीनी वृ त्र हाचीन्पाकरा माटाज्याःत। आ र्चाटाहातइशषाकमा औटाहोखबाप्ल। होप्लइ ळाशा ॥८॥
आ नो वि श्वा सु हातूहातव्यातम् । इकन्द्रं स मा त्सूकीभू षा ताकिऊ प ब्राटिह्मात। णी स व नाचीनि वृ त्र हाचीन्पाकर माटाज्याःत। आ र्चाटाहातइशषाकमा औटाहोखबाप्ल। होप्लइ ळाशा ॥९॥
आ नो वि श्वा सु हातूव्यातम् । इ न्द्रं स मा त्सुषुभु षा ताचिऊ पाकाब्रायह्माट। णी स व ना निषुवृ त्र हाचिन्पा राकामायज्याःट। ऋ चि षाटिमाखण्। ओपइ ळाशा ॥१०॥
॥ प्रजापतेर्निधन कामम् ॥
त वे दि न्द्राफीव मं व सूकी। त्वं पु ष्य सि माकुध्या मं सा त्राटीवाखइ श्वाणा। स्याकप रा म स्य राषुज सीकान कि ष्ट्वाखिगोण। षूटवृ ण्वाटातातइश। हो वाटाहोचइ हो वाटिच्हाकच्बुश। बाख ॥११॥
॥ गौतमस्यमनार्याणित्रीणि ॥
क्वे य थाति। क्वेकद साटाऔ हो वाकिऔ हो औकिहोखवाश। पु रूकात्रा चाकाइ द्धि तेकिम नाटाऔ हो वाकिऔ हो औकिहोखवाशआ लाकार्षी यू ध्माकिख ज क्रशिदौ हो वाकिऔ हो औकिहोखवाश। पु रकान्द रा प्र गाकीया त्राटाऔ हो वाकिऔ हो औकिहोखवाश। अ गातासाटइ षूखाऔ हो वाशि। प्सू शंटासाःख ॥१२॥
कू वा कू वाती। ई या था क्वेकीद साशाउ वा औटिहोत। पु रू त्रा चाकीइ द्धि तेकिम नाकाउ वा औटिहोत। आ लाकार्षि यू ध्माकिख ज कृशिदु वा औटिहोत। पु रकान्द रा प्र गाकीया त्राटाउ वा औटिहोत। अ गातासाटइ षूखाऔ हो वाशि। प्सूतशंटसाःख ॥१३॥
क्वे य थाति। कू वा इ दापीसीण। पु रू त्रा चीतीद्धी ताचाइ मापानाःण। आ ला र्षी यू ध्माकुख ज क्र द्धाटिउ वाता। पू र न्दापिराण। प्र गाकाया त्राटाच्अ गाकासाटइ षूखाऔ हो वाशि। प्सूख ॥१४॥
॥ वैरूपाणित्रीणि ॥
व य मे नातीम् । आटइ दाखाऔ हो वाशिहीखयोश। अ पीचापे मेथाहा व ज्रि ण न्ता स्माकूऊ आटा। द्य स व नाषीइ सू तांयिभा राटा। आकनू नांटाभूत। षा ताकाश्रु ता इ ळाटीभाखण्। ओपइ ळाशा ॥१५॥
व य मे नातीम् । इ दाटाहा याःटा। आ पौ हो इ पेकुमौ हो इ हाकीव ज्रि णाचिम् । त स्माथाऊ आ द्याकिस व ना इ सूकुतं भ राशि। आकनौ हो नांकिभौ हो षाकिता श्रू ताकिआ उ वाटि। ऊखपाश ॥१६॥
व य मे ना मि दाफुही या उ वोखीवा इ या हा इशु। हु वे हो वाकीय पि पे मे हा वायूज्री णांटा। त स्मा ऊ आ द्यषुस व ना इ सू तांयूभा राटाइटयात। आकनू नांथाभूतच्षा ताकाश्रूपतात्रइश। श्राचवाटसाखइश ॥१७॥
पञ्चम खण्डः (ऋ-११, सा-१६)
॥ पौरूहन्मनञ्च ॥
यो रा जा चाखीर्षा णा इ नाप्लीम् । या ता र थेकीच्भी राकाध्रायइ गूःटाध्रा इ गूःटि। वा इ श्वा साटीन्ता रू ताटिता रू ताटिपा र्ताकानाखनाणम् । ज्या इ ष्ठा योटीवा त्रा हाकिगाखर्णाणइश। त्र हा गृ णाप्लीइश। होप्लइ ळाशा ॥१॥
॥ प्राकर्षञ्च ॥
यो रा जा च ऋतुषा णाखाइ नाशाम् । या ता र थेकीभी रा ध्राटिइ गूःता। वि श्वा सा न्त रु ताषूपृ त नाटिनातम् । ज्याटइ ष्ठाताय्यो वृकात्रा हा उ वाकी। ओपबा गा र्णोप्लि। हा इशा। ॥२॥
॥ इन्द्रस्यचाभयङ्करम् ॥
य त आ न्द्राखीभा या म हाप्लीइश। ता तो नोकिअ भा य ङ्काटिर्द्धीत। मा घ व न्श ग्धिषुत व तकिन्ना ऊ ताटियातइश। वि द्वा इ षोटीवीतमा र्धोकाज हि इ ळाटीभाखण्। ओपइ ळाशा ॥३॥
॥ कावर्षेद्वे ॥
वा स्तो ष्प तातीइश। ध्रू वा स्थू णाटीउ वोखावाश। अं स त्रंकिच्सोकम्या नाटाम् । द्र प्सः पु रां भे क्ताषूश श्व ताटिइ ना माखिइ न्द्राःणा। मू नी नांकिआ उ वाटि। साखखाश ॥४॥
वा स्तो ष्प ते ध्रू वाफूस्थूतणांपस त्रं सोप्लिम्याङनाशम् । द्र प्सः पु रां भे क्ताषूश श्व ताटिइ नाताम् । आटइ न्द्राःता। मू नीटानाखणफप्ल्म् । साखखाश ॥५॥
॥ सूर्यसामच ॥
ब ण्म हंखिअ सि सू र्याशी। बा ळा दि त्याकीच्मा हंकाआयसापईणमा ह स्तेणिसा तोफामा हिफामा पाप्लानीपष्टातमात। म न्हा दाटिइ वाता। माकहोपबाप्लआ सोप्ल। हा इशा ॥६॥
॥ नैपातिथेद्वे वाशेवा ॥
य दि न्द्र प्रा ग पातूत् । ऊ दाकान्या ग्वा हू या सेकुनृ भाटाइःश। सि माटाच्पू रूचानृ षू तोथिअ स्या न वेटी। आ सीटाप्रा शाटाच्द्धाकतोपबाप्लर्वा शोप्ला। हा इशा ॥७॥
य दि न्द्र प्राषीग पा गु दातीगेत। ना य ग्वा हूकीच्याकसा इ नृ भिटीर्हा बु होखिहाणइश। सि माटाच्पूकरूचनृ षू तोथिअ स्या न वेटीर्हा बु होखिहाणइश। आ सा इ प्रा शाटुच्र्हा बु होखिहाणइश। द्धाटट्तूखऔ हो वाशि। र्वाखशेश ॥८॥
॥ कौन्मुदेद्वेस्वर्जोतिषीवा ॥
क स्त मि न्द्राती। तु वाटावा साटाबुश। आ म र्क्त्योषीद ध र्ष ताचीइशश्र द्धाथाहा इ तेटि। मा घ वकिन्पा र्या इ दायीइ वीटा। वा जीटावा जांटासीकषा साटाट्ताखऔ हो वाशि। उ ऊखापाश ॥९॥
क स्त मि न्द्रा त्वाफुव साताबू आपाम र्क्त्यो द ध र्ष ता इशृ। श्र द्धाथाहा इ तेटि। मा घ वकिन्पा र्या इ दा इ वाटूउ वोखावाश। वा जीथावा जांटाच्सीकषा साटाट्ताखऔ हो वाशि। उ ऊखापाश ॥१०॥
॥ अनूपेद्वे ॥
अ श्वी अ श्वीती। र थीकाच्सू रूकापाययूःट। गोकम य्य दिकिन्द्रा तेयासा खाटा। श्वा त्राटाभा जाटाव य साचिस चा ते साटिदात। च न्द्रा इ र्याभीतीत। सापभाशऊखपोप्ल। हा इशा ॥११॥
अ श्वी र थी सु रू पातूयूःत। गोकिम य्य दिकिन्द्रा ते स खाकीउ वाटाहा उ वाटिहोकवाथइ याचा। श्वा त्रा भा जाषीव य साकिस चा ते स दाकुउ वाटाहा उ वाटिहोकवाथइ याचा। च न्द्राचाइ र्यायातीत। सा भाकाऊ पा इ ळाटीभाखण्। ओपइ ळाप्ला ॥१२॥
॥ वैरूपञ्च ॥
य द्या वापिइ न्द्र ते श ताशुम् । शा तं भू मीकीरू ता स्यूःटि। न त्वा व ज्रिषीन्सा ह स्रं सू र्याकुआ नूटा। ना जाटाता माटाच्ष्टाकरोपबाप्लदा सोप्ला। हा इशा ॥१३॥
॥ वाचश्चसाम ॥
इ न्द्रा ग्नीषीय पा दि यातीमेत। पू र्वा गाटित्प द्वा दाचिइ भायायाःट। हि त्वा शि रोटीजि ह्वा या रा रा पायूश्चा राटात् । त्रिंकश त्प दा न्या क्राटुट्माखऔ हो वाशि। उ ऊखापाश ॥१४॥
॥ आक्षीलेद्वे ॥
इ न्द्र ने दीषय ए दि हातीइ मि त मे धातु। भि रू ति भि राषीश न्ताटामातश न्त मा भी राकुभि ष्टि भि रा स्वाटुपेत। स्वा औपाहोश। पि भि रोखिइ ळाशा ॥१५॥
। इ न्द्र ने दीषीय ए दि हातृइ मि त मे धाषीभि रू ति भातीइःश। आकश न्त म श न्त माटूभा इ रा भीयीष्टी भी रा स्वा पाचुइश। स्वापहाश। पि भि रोखिइ ळाप्ला ॥१६॥
षष्ठ खण्डः (ऋ-१०, सा-१७)
॥ गौरीवितेःप्रहितौद्वौ ॥
इ त ऊ तीती। वोतओ जाटारा मौटाहोतवा औटाहोतवात। प्र हे ताथिच्राकम प्रा हीभिता मौटाहोतवा औटाहोतवात। आ शु ञ्जेकिताथरं हा इ ताटीरा मौटाहोतवा औटाहोतवात। रा था ईषित म म तू र्ताटून्तूत। ग्री यातावाटट्र्धाखऔ हो वाशि। स्तु षेताच् ॥१॥
इ त ऊ तिषीवो आ जातिरातम् । प्र हेकाता र म प्रा हि ताषूमु हु वाटिहो आकाशु न्जे ता रंषीहे ता र मु हु वाटूहोचइश। र थिकात माटाम तू र्क्ताखिन्तूण। ग्री यातावाटट्र्धाखऔ हो वाशि। स्तोतषाखइश ॥२॥
॥ आत्रेद्वे ॥
मो षु त्वा वाती। घा तापाणफप्ल्। श्चाखनाश। आकरे अ स्मि न्नि री र मकन्नाचरायक्ता द्वाटा। सा ध मा दाटीन्ना य गकिह्या इ ह वा साटुन् । ऊ पाकाश्रू धीकाइ ळाटाभाखण्। ओपइ ळाशा ॥३॥
मो षु त्वा वा घाषुता च ना एती। आ रे अ स्मिषीन्नि री र मटीन् होकवाथउ उ वाटिऊट। आचरायक्ता द्वाटासा ध मा दांटीहोकवाथउ उ वाटिऊट। ना या गाखिहीण। आ इ ह वा सकुन्ना उ वोखिवाण। ऊ प श्रूटिधीखण्। ओपइ ळाशा ॥४॥
॥ गौतमेद्वे ॥
सु नो त सो म पा व्नातुएत। सो म मि न्द्राकीहो वाटाहातच्याकव ज्राटाइ णाताइश। प च ताकिच्प क्ता इ र व सेकूच्कृ णूकाध्वायमीटद्धातइश। पृ णाचान्नायइ त्पृटाहातइश। णा ता इ माटीयाःखण्। ओपइ ळाशा ॥५॥
सु नो त सो म पाफूव्ना उ वोखिवा इ या हा इशु। सो म मि न्द्राटीहु वे हु वेटीहो या वायिज्रि णाटाइश। प च ताचिप क्ता इ र व सेटूकृ णूकाध्वायमीटद्धातइश। पृ णाचान्नायइ त्पृटाहातइश। णा ता इ माटीयाःखण्। ओपइ ळाशा ॥६॥
॥ वामदेव्यञ्च ॥
य स्स त्रा हाषीवि च र्ष णि रि द्रंफूतां हूखामा हे व यप्लीम् । इ न्द्र न्तं हूकीमा हे वाटियातम् । सा ह स्र म न्योषुतु वि नृकिम्णा स त्पाटितातइश। भा वा साटिमातत्सू नोचावृ धा इ ळाटीभाखण्। ओपइ ळाशा ॥७॥
॥ अश्विनोश्चसाम ॥
श ची भि र्न्नाफीश्श ची व सूकी। दि वा न क्तषीन्दि श स्य त म्माटुवांकराकति रु प द साचुत्काकदा च ना स्माशी। द्रा तीः क दोपीबाप्ल। चाखनाश ॥८॥
॥ वसिष्ठस्य वज्राणि त्रीणि ॥
य दा क दाती। चाटट्माखऔ हो वाशि। ढूखषेश। स्तो ता ज रेकीत मा र्क्त्याकिआ दी द्व न्दषीत वा रू णांखीवि पाखागि राता। ध र्क्ताटारं विटा। व्राटट्ताखऔ हो वाशि। नाखम् ॥९॥
य दा क दा च मातूहातबुश। ढू षाटाइ स्तो ताटिज राताइशत मा र्क्त्याःचि। आ दी द्व न्दौ होटुहोटहातहातइशत वाटारूखणणम् । वि पाकागि राकाध र्क्ता रं वि यौकुहोटहातहातइश। व्र ताकाना मि ळाटिभाखण्। ओपइ ळाशा ॥१०॥
या दाणाका दाणाचा मीफाढू षा इ स्तोखीताण। ज राताइशता मा र्क्तायियाःट। आ दी द्व न्दाकीई त वाटिरूखणणम् । वी पाफागि रौ वा उ वोखुवाश। ध र्क्ता रंफिवि यौ वा उ वोखुवाश। व्र ता नांप्लि। होप्लइ ळाशा ॥११॥
॥ सौबभ्रवेद्वे ॥
पा ही गा याती। न्धा सा माटिदातइश। आ इ न्द्रा य मेकुच्धीकया ताटाइ थाताइश। य स्स म्मि श्योटीह र्यो र्यो हा इ रायूण्या याःटा। इ न्द्रो वाभिज्रितच्हीकरोपबाप्लण्या योप्ला। हा इशा ॥१२॥
पा ह्ये पा हीती। गा याथान्धा सातामाटदातइश। इ न्द्रा य मेकीचधीकया ताटाइ थाताइश। य स्स म्मि श्योटीह र्यो र्यो हा इ रायूण्या याःटा। आ इ न्द्रो वाभीज्रीतच। हीकरोपबाप्लण्या योप्ला। हा इशा ॥१३॥
॥ वैर्यश्वम् ॥
उ भ यं श्रु णषुव च नातिएत। आ इ न्द्रोटिच्अ र्वाताच्गीकदं व चाकिहो वाटाहातइश। स त्राटाच्या माचाक्घ व सो मा पाटुहा इ ताखियाणइश। धी या श वि ष्ट याटुहोचइश। ग मा दौपिहो बाप्ला। होप्लइ ळाशा ॥१४॥
॥ इन्द्रस्यसहस्रायुतेद्वे प्रजापतेर्वा महोविशीये ॥
म हे च नोतीवात। त्वा द्राखाइ वाःणा। पा राचाशु ल्काकाच्या दाकाइ यायासापइशना साप्लाह स्राता। या ना यू ताकीया वाकाज्रायइ वोपाना शाप्लता याता। शापताशमाखघोप्ल। हा इशा ॥१५॥
म हे च नाखीत्वा आ द्री वाःप्ली। पा राचाशु ल्काथाया दाकाइ यायासाटइश। ना स ह स्राकीया ना यू ता या वायूज्री वाःटा। ना शा ताटियात। शा ता माटिघाखऔ हो वाशि। मा हो वी शेटीच् ॥१६॥
॥ इन्द्राण्यास्साम ॥
व स्यं इ न्द्रा सि मेषूहा बु पि तूःती। उ ता भ्राखितूःप्ल। आ भु न्जा तौकीवा उ वोखिवाश। माकता चा मौकिवा उ वोखिवाश। छ द या था स्साकुमा वा सौकिवा उ वोखिवाश। वाकसू त्वा नौकिवा उ वोखिवाश। याकरोपबाप्लधा सोप्ला। हा इशा ॥१७॥
सप्तम खण्डः (ऋ-१०, सा-१०)
॥ सौभरञ्च ॥
इ माखाइ म इ न्द्रा य सुप्लून्वाङइ रा इशि। सो मा सो द ध्याषुशि राकास्तंखआ म दा यषीव ज्र ह स्त पीप्लुताङया इशा। ह राटाइ हो भ्या इ याटुओ इ हीकिओ काटाट्याखऔ हो वाशि। ऊखपाश ॥१॥
॥ गात्समदञ्च ॥
इ म इ न्द्राफीम दा य ताकीइश। सो मा श्चि कि त्रषुउ क्थि नो मायीधोःटपायपाटना उ पा नो गि राःशु। शायर्णूटच्राकस्वा स्तोटात्रात। या गि र्वाटिणाःखण्। ओपइ ळाशा ॥२॥
॥ वाचश्चसाम ॥
आ त्वा द्या सातीब र्दु घातिम् । हू वे गाकिय त्र वे प संकुआ इ न्द्रा न्धटीनूत। सू दू घाचिमा नि याटिमाखइ षणाम् । ऊ रू धाटिरात। मा र ङ्काटिर्क्तांखण्। ओपइ ळाशा ॥३॥
॥ बार्हदुक्थञ्च ॥
न त्वा बृ ह न्तोतुअ द्रि याःति। वा र न्त इकीन्द्रा वी ळाटिवाःत। याचच्छियक्षा सिटास्तु व ता इ माटुच्वा तेचावा सूचा। ना कि ष्टाटिदात। मी ना ताटिइ ताखाण्इश। ओपइ ळाशा ॥४॥
॥ नैपातिथञ्च ॥
क ईं वे दाती। सू ताचाइ सायाचाट। पि ब न्तः क द्वा योयूदा धूःटा। आ यं यः पु रोषुवि भि न क्ता योयुजा साटा। मकन्दा नाटाश्शीत। प्राटयाखऔ हो वाशि। न्धाखसाश ॥५॥
॥ तौरश्रवसञ्च ॥
या दि न्द्रापिशा सो व्र ताशीम् । च्या व या साचीद साकास्पा रौकावातत्। अ स्मा का मौकीवातत्। अं शु र्माचिघ वकान्पू रू स्प हौकीवातत्। वा सा व्या यौकीवातत्। धीकबोपबाप्लर्हा योप्ला। हा इशा ॥६॥
॥ त्वष्टार्याश्चसाम ॥
त्व ष्टाखानो दै व्यं व चाःशु। प र्ज न्यो ब्रंकीह्मा ण स्पाटितीःत। पु तै र्भा त्रषीभि रा दी तिकीर्न्नू पा तूटिनाःत। दु ष्टा राटिन्त्रात। मा णं वाचिचाःखण्। ओपइ ळाशा ॥७॥
॥ अदितेश्चसाम ॥
क दा च ना स्तातुरी र सातिइश। ना इ न्द्रं साखीश्चाशसा इ दा शूखीषाणइश। उ पो पे न्नुषीम घ व न्भू याकुइ द्धोटाइ नूखाता इशा। दा न न्दाखिइ वाणा। स्या प्रोपाबाप्लच्या तोप्ला। हा इशा ॥८॥
॥ आजीक्तञ्च ॥
आ इ हीटिआ इ हीटिहोचइश। युं क्ष्वा हि वृखीत्रा ह न्ताकिमाफ। हा री इ न्द्राकीच्पा राकावायतापअ र्वाखाची नाःता। मा घ व न्सोकिमा पा इ तायीयापउ ग्राचारि ष्वाता। भीपरो बाप्लागा होप्ला। हा इशा ॥९॥
॥ माधुच्छन्दसञ्च ॥
त्वाचमीकदाफाप्ल्हो इ हि योखीन रा एशि। आ पा इ प्यषीन्वा ज्रा इ न्भूकीर्णाखयाःण। साकइथन्द्र स्तो म वाटीहा साचाइकहा श्रू धाटिऔ होकावाफहाणइश। ऊ पा स्वा साटीऔ होकावाफहाणइश। रा मा गाटिहाखण्इश। ओपइ ळाशा ॥१०॥
अष्टम खण्डः (ऋ-१०, सा-११)
॥ उषसश्चसाम ॥
प्रा ता ईटिच्हायईटहा वोकाद र्शीथाया य तीटिया य तीटि। उ च्छा ईटिच्हायईटहा न्तीकादूथही ता दी वाटीआ दी वाःटि। आ पा ईटिच्हायईटहा मा हि व्र णु तेचूचाचक्षु षा त माटीआ त माःटि। ज्यो ताकाईटच्हायईटहाचकृ णोकाती सू ना रीटीओ ना रीपिण्। ओपइ ळाशा ॥१॥
॥ अश्विनोश्चसाम ॥
इ मा उ वाषीन्दि वि ष्ट याखुऐ हीप्ला। उ स्रा ह व न्तेषुअ श्वि नाखिऐ हीप्ला। अ यं वा म ह्व यषूव से श ची व सूखूऐ हीप्ला। वि शं वि शंषीही ग च्छ थाखीऐ हीप्ला। होप्लइ ळाशा ॥२॥
॥ अश्विनोश्चसंयोजनम् ॥
कु ष्ठः को वाषीम श्वी नाति। ता पा नो देकीवा म र्क्ता याटीहो वाकाहाखइ घ्न ताखिवा माता। अ श्ना याटिहो वाकाहाखइ क्ष पाखिमा णाःता। अं शू नाटिहो वाकाहाखइ त्थाखामु वातादु वाटान्य थाखाऔ हो वाशि। ऊखपाश ॥३॥
॥ अश्विनोश्चैवसाम ॥
अ याखाम यं वा म्म धूप्लीमा क्ताङामाःश। सू त स्सो मोटीदि विकाष्टि षुटाओटहाखओ हाता। ता मा श्वि नाषीपि ब त न्ती रो अकून्ह्या मोटाहाखओ हाता। ध र्तांचारायत्नाटओटहाखओ हाता। नी दा शूटिट्षाखऔ हो वाशि। ऊखपाश ॥४॥
॥ सोमसामच ॥
आ त्वा सो माती। स्या गा द्दाटिट्याखऔ हो वाशि। स दाटाया चकान्ना ह ञ्ज्याकिभू र्णाटाउ वोखावाश। मृ गकान्न स व नेचीषु चु क्रू धंकीच्क ई शाटिनातन्ना याचाचि षा दि ळाटीभाखण्। ओपइ ळाशा ॥५॥
॥ आजामायवञ्च ॥
आ ध्व र्यो अ द्राफुव या तु वाकीम् । सो माचामि न्द्राःथापी बाकासायतीट। ऊ पो नूचिनंकयु यु जेकिच्वृ षाकाणायहा रीटा। आकचा जाटागात। मा वृचात्राकहा औटाहोखबाप्ल। होप्लइ ळाशा ॥६॥
॥ समुद्रस्यच प्रैयमेधस्य साम ॥
आ भी ष त स्त दातूहातबुश। भा रा इ न्द्रा ज्याकुयः का नी याटिसाःत। पू रोकाव सु र्हि म घ वकून्ब भू वाटिइ थाता। भा रा इ भाटीरेत। चा हाचाव्या इ ळाटिभाखण्। ओपइ ळाशा ॥७॥
॥ वैरूपेच ॥
या दि न्द्रापिया व त स्त्वाकम् । ए ता व दषीह मी शी या स्तो ताटूरा मीतत् । दा धि षेकिच्राकदा वाटासातबुश। ना पा पाटित्वात। या रौकावा उ वोखिबांप्लसा इ षोप्लि। हा इशा ॥८॥
या दि न्द्राफिया व ताखिस्त्वशम् । आ इ ताटिवा दाटाह मीकाशी याथाओ वाका। स्तो ताटारा मीटात्द धि षेचिर दाकावा साकाओ वाका। ना पाटापा त्वाटाच्याकरोपबांप्लसा इ षोप्लि। हा इशा ॥९॥
॥ वैश्वदेवञ्च ॥
त्व मि न्द्रोतिहा इ प्र तू र्क्ति ष्वोतूवात। आ भि वि श्वाकीच्आ साकाइ स्पायार्धाःट। आ श स्ति हाषीज नि ताकिच्वृ त्राकातूयरा साटाइश। तू वाचान्तूयर्याट। ता रूचाष्याकता औटाहोखबाप्ल। होप्लइ ळाशा ॥१०॥
॥ पुरीषञ्चाथर्वणम् ॥
प्र यो रि रि क्षषुओ ज सातिएत। दी वा स्स दोटीच्भ्य स्पा रि न त्वाषूवि व्या औकिहो वाका। चा रा जा औकीहो वाकाइ न्द्रा पा र्थि वाकुम ति वाटिइ श्वाताम् । वा वाकाक्षि था इ ळाटीभाखण्। ओपइ ळाशा ॥११॥
असाविपाठः
प्रथम खण्डः (ऋ-१२, सा-१९)
॥ प्राकर्षञ्च ॥
अ सौताहो वाताहा वीखादेश। वा ङ्गो ऋ जीकीक माखान्धाःप्ल। नि यौताहो वाताहा स्मीखानिश। द्रो जा नू षेकीमु वोखाचाश। बो धौताहो वाताहा माखासिश। त्वा हा री याकीश्व याखाज्ञैःप्ल। बो धौताहो वाताह नाखास्तोश। मा म न्धाकिसाखमा दाखाइश। षूत्र ॥१॥
॥ वसिष्ठस्यचनिन्हवम् ॥
आ इ हिटिआ इ हिटिए हि या उ वोखुवाप्लहातइश। अ सा वि दे व ङ्गोचूऋ जीकाच्काकम न्धोटाअ न्धोटाअ न्धाटाउ वोखवाप्लहातइश। न्य स्मि न्नि न्द्रोचीज नु षेकिच्मूकवो चाटीवो चाटावो चाटाउ वोखावाप्लहातइश। बो धा म सि त्वाचुह रि याकिच्श्वाकया ज्ञैःटार्या ज्ञैटार्य ज्ञाटाउ वोखावाशहातइश। बो धा न स्तो माचुम न्धा साकिच्माकदा इ षूटिदा इ षूटिदे ष्वाटाउ वोखावाशहातइश। आ इ हिटिआ इ हिटिए हि या उ वोखुवाप्लहाखऔ हो वाशि। ईख ॥२॥
॥ गृत्समदस्ययोनिनीद्वे ॥
यो नीःता। त आ इ न्द्राटीसा दा नाकिय काखारी ता माशि। नृ भा इः पू रू हूकूता प्र याखिही आ साःशि। य था नोभिआ वी ताकिवृ धाखाश्चि दा दाःशि। व सू नि मीभीम दापाश्चा सोखा। मात्रइःश ॥३॥
योचनि ष्ट आखिइ न्द्र स द ना इ हो वाशृ। आ काकाराखइ त मा नृ भि र्हो वाशृ। पू रूकाहूखता प्र याखिही हो वाशि। आ सोकाय थाखानो वि ता हो वाशु। वाकर्ध श्चाखाइ त्द दो व सू हो वाशृ। ना इ मा मा दभुश्च सोखामै र्हो वाशि। होप्लइ ळाशा ॥४॥
॥ औरूक्षयेद्वे ॥
अ द र्द रूतीत् । स म सृ जोकीच्वीकखा निकात्वा म र्णाटिवातन्ब ल्बचाधा नंथाआ रा म्णाःभि। मा हा न्ताटिमितन्द्र प र्व तंकीवीकया द्वाकासृ जा द्धाटिराःत। अ व य द दाकुच्नाकवाटन्हाखण्। ओपइ ळाशा ॥५॥
अ द र्द रू त्स म सृ जाःतृ। वी खा नि त्व म र्णाषूवा न्ब ल्ब धा नंकुआ राटाम्णाःत। मा हा न्त मिषन्द्र प र्व तंकीवि याटाद्वाःत। स्र जा द्धाटिरातअ व य द दाकुच्नाकवोटयाखऔ हो वाशि। हाखन् ॥६॥
॥ पाथेद्वे ॥
सु ष्वा णा साःती। इ न्द्रा स्तु म सीखुत्वाश। स नि ष्य न्त श्चिषुक्तू न्वि नृ म्णा वाखुजशम् । आखनोशभ रा उ वोखीवाण। सु वि त य्य स्यषुको ना ता ना त्म नातू। स ह्या माखितू वोखा। ताःत्र ॥७॥
ओतहोतहो इ सूखिष्वाण। णा साकाइ न्द्रा स्तु म सीखुत्वाश। ओतहोतहो इ साखिनीणष्य न्ता श्चीभितू वी नृ म्णा वाखुजशम् । ओतहोतहो आखानोणभ राकासु वि त य्य स्य कोखूनाश। ओतहोतहो इ ताखिनाणत्म नाकास ह्य मापितू वोखा। ताःत्र ॥८॥
॥ सौमित्रेद्वे ॥
ज गृ ह्मा ते द क्षि ण मो हा ओ हातेएत। इ न्द्र हाटिस्तातम् । व सूकाय वो वायिसू पापाता इ व सू नांशुओतहातएत। वि द्मा हि त्वा गोयुपा तिंपाशू र गो नांशीओतहातएत। अ स्मा भ्य ञ्चा इ त्रांटूवा र्षाचाणं राकायिफन्दाशओतहातएत। रा या इ न्दाटूउ वाता। ऊखपाश। औकहो औकाहो वापाहा उ वाशि। ईख ॥९॥
ज ग्र ह्मा ते द क्षिषूण मौ हो औ हो वातूहातइश। इ न्द्र हाखिस्तशम् । व सूकाय वो वायिसू पापाता इ व सू नौशुवा उ वोखिवाप्लहातइश। वि द्मा हि त्वा गोयुपा तिंपाशू र गो नौशीवा उ वोखिवाशहातइश। अ स्म भ्य ञ्चा इ त्रांटूवा र्षाचाणंकरा यिंफादौ वा उ वोखीवाप्लहाखऔ हो वाशि। ईख ॥१०॥
॥ वात्सप्राणित्रीणि ॥
हो येटाहो येटाहो येटा। ज गृ ह्मा तेथीद क्षि णा मिकीच्न्द्राकहा स्तांटाहा स्तांटाहा स्ताटाम् । व सू य वोषीव सु प तेकीच्वाकसू नांटासू नांटासू नाटाम् । वि द्मा हि त्वाकीच्गो प तिं शूकीच्राकगो नांटागो नांटागो नाटाम् । अ स्म भ्यकिञ्चि त्रं व्र ष णंकूच्राकया इ न्दाटिआ इ न्दाटिआ इ न्दाःटि। हो येटाहो येटाहो याटावाखऔ हो वाशि। ईख ॥११॥
हा बु हा बु हातुबुश। ओ हो हो वाकीओ हो हो वाकीओ हो हो वाकी। ज गृ ह्माकिता इ दाकिच्क्षीकणाखमि न्द्र ह स्त न्द्र ह स्त न्द्र ह स्तशेम् । व सूकाय वो वाटिच्सूकपाखता इ व सू नां व सू नां व सू नाशोम् । वि द्मा हि त्वा गोकुच्पाकतींखशू र गो नां र गो नां र गो नाशेम् । अ स्म भ्य न्चा इ त्रांटूच्वा र्षाचाणंखर यि न्दा र यि न्दा र यि न्दाःशे। हा बु हा बु हातुबुश। ओ हो हो वाकीओ हो हो वाकी। ओ हो होटिट्वाखऔ हो वाशि। ईख ॥१२॥
आ बु हो आ बु होषूआ बु होतिवा औटाहो औटाहोतवात। ज ग्र ह्माकिता इ दाकिच्क्षीकणाखमि न्द्र ह स्त न्द्र ह स्त न्द्र ह स्तशैम् । व सूकाय वो वाकिच्सूकपाखता इ व सू नां व सू नां व सू नाशोम् । वि द्मा हि त्वा गोकुच्पाकतींखशू र गो नां र गो नां र गो नाशैम् । अ स्म भ्य न्चा इ त्राटूवा र्षाकाणंखर यि न्दा र यि न्दा र यि न्दाःशै। आ बु हो आ बु होषूआ बु होतिवा औटाहो औटाहोटटवाखऔ हो वाशि। ईख ॥१३॥
॥ वैदन्वतञ्च ॥
इ न्द्र न्नाखिरोशने मा धाखिइ ताणा। हा व न्ताटिइ य त्पा राखीयाशयू ना जाखिन्ताणइश। थि या स्ताटिशू रो नाखि र्षाशता श्रा वाखिसाःण। चा का माटिइ या गो माखीतिशव्र जा इ भाखीजाण। तू व न्नाटिउ वाता। एतऊ पाटाख् ॥१४॥
॥ सौपर्णञ्च ॥
व यो हातिहातबुश। सू प र्णाषिउ प से दू राचुइ न्द्रंकाप्रि य मे धाषीऋ षा योकिनाकधा माटानाःत। आ प ध्वा न्तषीमू र्णू हि पूकीर्धी चाटाक्षूःत। मूचमु ग्धि योटिहोतआ स्माटान्नि ध येपिवा बाखा। ध्नात्रन् ॥१५॥
॥ यामञ्च ॥
आ या म याकीय मौटाहो वाथाऊट। ना के सु प र्णाषुमु प या त्प तकुन्तं प तकिन्त मौटाहो वाथाऊट। आ या म याकीय मौटाहो वाथाऊट। हृ दा वे न न्तोषुअ भ्या चाकिक्ष त त्वाटिक्ष त त्वौटिहो वाथाऊट। आ या म याकीय मौटाहो वाथाऊट। हि र ण्य प क्षंषुव रू णा स्य दूकुतं स्य दूकित मौटाहो वाथाऊट। आ या म याकीय मौटाहो वाथाऊट। या म स्य यो नौषुश कु नां भु रकुण्युं भु रकिण्यु मौटाहो वाथाऊट। आ या म याकीय मौटाहो वाथाऊट। वाटच्हायउ वाटा। एतदि व मेकिदि व मेकिदि वाटाख्म् ॥१६॥
॥ ऋतुसामनिच ॥
ब्र ह्मा ब्राटिह्मात। ज ज्ञा नंचिप्रा था मंकिपु रा स्ताभित् । वी सा इ वाटिइ सीता। म त स्सु रूकीचो वेथान आ वाभित् । सा बू साटिबूत। ध्न्या उ पाचिमाकआटस्य वा इ ष्ठाःभी। सा ता स्साटिताःत। च यो नी मा साचुता श्च वाकिइ वाःपाण्। ओपइ ळाप्ला ॥१७॥
हु वेटाहातइ हु वेटिहातइ हे षाटियात। ब्र ह्म ज ज्ञाकीनांटप्रा था मंकिपु राखास्ताशत् । वी सी म ताकीस्सु रू चो वेकीन आखावाशत् । सा बु ध न्या उकुप मा आकिस्य वाखाइ ष्टाःप्ला। सा त श्च यो नीकुमा साकात श्च वीखिवाःप्ल। हु वेटाहातइ हु वेटिहातइ हे षाटियाखऔ हो वाशि। एतऋ त म मृ त मेकूऋ त म मृ त मेकूऋ त म मृ ताटुख्म् ॥१८॥
॥ इन्द्रस्यवारवन्तीयम् ॥
आ पू र्व्या बु होतूहोतहातइश। पू रू त मा नि याखूस्मैश। मा हे वी रा याटुता वा साकिइ तु राखियाश। वि र प्शी नाखीइ व ज्रि णे शाखुन्त माखानिश। वा चां स्या स्माटीइ स्था वी राकीय ताखाक्षूःप्ल। स्थ वि रा य त क्षुषूस्थ वि राखिया ताखाक्षूःत्र। स्था वी राकियाकता क्षूःखा ॥१९॥
द्वितीय खण्डः (ऋ-१०, सा-१७)
॥ इन्द्रस्यचक्षुरपविनीद्वे ॥
आ वा द्राखिप्सोशअं शू माखितीणम् । आ ताकाष्ठाखदी या नाःखिकाशष्णो दा शाखिभीःण। सा हाकास्राखइ राशावा र्क्ताखामीशन्द्रा श्शा चीखियाण। धा माकान्ताखमा पा स्नीखिहीशति न्नृ माखिणाःण। अ धाटाद्राखऔ हो वाशि। आचध द्राःटाख् ॥१॥
अ व द्र प्सातीएत। अं शु म तिकीम ति ष्ठाटिदी या नाःचिका र्ष्णाःचा। दा शा भीकिसा हा स्रा येटीआ व क्ता मीचीन्द्राःक। श्शा च्या धा मकन्ताटम पा स्नी ही तीकुच्नृकम णापाअ धा द्राःप्लि। होप्लइ ळाशा ॥२॥
॥ सौरश्मेद्वे ॥
अ व द्र प्सोषीअं शु म तीचीमौटहोखऔ होता। आ तीकाष्ठा दौटाहोखऔ होता। इ या नः कृ ष्णाचुऔटहोखऔ होता। दा शा भी स्साकीह स्रैथारौटहोखऔ होता। आ वा क्ताचिमि न्द्राचाऔटहोखऔ होता। शा च्या धा म न्ताचुमौटहोखऔ होता। अ पा स्नि ही तिचुनौटहोखऔ होता। नृ माटाट्णाखऔ हो वाशि। आचध द्राःटाख् ॥३॥
अ व द्र प्सोषीअं शु म ती मेतुऔ होखावात्र। आ तापइ ष्ठात्रात् । इ या नाःचिकृ ष्णोचादा शा भीचिस्सा ह स्रैचिराकवाचक्ता माकाइ न्द्रोटाशा ची याकिध माखान्त म पा स्नि ही तिषूनृ मा णा ओ वाशु। अ ध द्राःतिच् ॥४॥
॥ बृहतोमारूतस्यसामनीद्वे ॥
हाकओटच्हाकओचहातहातच्इशवृ त्र स्य त्वाकीश्वा स था दीकीष माखाणाःप्ल। वि श्वे दे वाटीआ जाकाहु र्ये स खाखीयाःप्ल। मा रू त्भि रा इ न्द्राटूसा खी यकिन्तेखस्तुश। आ थे मा वा इ ष्वाःटूपा र्क्ता नाकिज याखासिश। हाकओटच्हाकओटहातहाखऔ हो वाशि। ओ औकाहोटच्औकहोख ॥५॥
हो येटाच्हा याकायेटह या औचिहोकवाफहातइशवृ त्र स्य त्वाचीश्वा स था दीकीष माखाणाःप्ल। वि श्वे दे वाटिआ जा हु र्येकीस खाखायाःप्ल। मा रू त्भि रा इ न्द्राटूसा खि यकिन्तेखस्तुश। आ थे मा वा इ श्वाःटूपा र्क्ता नाकिज याखासिश। हो येटाच्हा याकायेटह या औचिहोकवाफहाखऔ हो वाशि। ओ औकाहोख ॥६॥
॥ सोमसामनीद्वे ॥
वी धूताम् । द द्रा द द्रा णांटुसा मा नाकिइ ब हूखिनां यु वाशि। नं सा नं सा न्ताटुपा ली तोकिज गाखारा दे वाशि। स्य पा स्य पा श्याटुका वी यकिम्म हीखात्वा द्याशा। म मा म मा राटुस ह्यापास्सा माखा। नात्र ॥७॥
आतआखहाप्लहातइशवीकधु न्द द्रा णांटीसा मा नाकिइ ब हूखिनाशम् । यू वा नं सा न्ताटुपा ली तोकिज गाखाराश। देकव स्य पा श्याटीका वी यकिम्म हीखात्वाश। आतआखहाप्लहात। अ द्या म मा राटूस ही यापिस्सा माखा। नात्र ॥८॥
॥ इन्द्रस्यवज्रेद्वे ॥
औ हो इ त्वतीम् । ह त्याचास्स प्त भ्योकिजा य माकिनाःख। औ हो अ शाती। त्र भ्योकाअ भाकाव श्श त्रू रिकीन्द्राख। औ हो इ गू ढेतु। द्या वा प्र थि वीकुअ न्व विकिन्दाःख। औ हो इ वि भूतु। म त्भ्योकाभु व ने भ्योकीर णकान्धाःख ॥९॥
त्वोतहा इ ह त्यौशीवा उ वोखिवाण। स प्त भ्योकिजा य माकिना उ वाकिओ वापाअ शोशाहाङइश। त्र भ्यौ वा उ वोखुवाण। अ भा वकिश्श त्रू रिकिन्द्रा उ वाकिओ वापागू ढेशाहाङइश। द्यौ वा उ वोखुवाण। पृ थि वीकिअ न्व विकिन्दा उ वाकिओ वापावि भूशाहाङइश। म त्भ्यौ वा उ वोखुवाण। भु व नेकिभ्या उ वाकिओ वापार णा न्धाःप्लि। होप्लइ ळाशा ॥१०॥
॥ भृष्टिमतस्यस्सौर्यवर्चस्यसामनीद्वे ॥
मे ळीताम् । न त्वा व ज्रि णं भृकूष्टी माटान्तातम् । पू रूचाधाकस्मा नं वृ ष भंकुस्थी राटाप्सू नूताम् । का रोचाष्य र्य स्त रू षीटुर्दू वाटास्यूःत। आ इ न्द्रकिन्द्यु क्षं वृ त्रा हाटुट्णाखऔ हो वाशि। गृ णीकाषेटख् ॥११॥
मे ळि न्न त्वा वाखुऔ होता। ज्रा इ णंकीभृ ष्टा इ मौकीवातन्तंख। पु रूखाऔ होता। ध स्मा नं वृ ष भंकूस्था इ रौकिवातप्सुखनुशम् । का रोखाऔ होता। ष्य र्य स्त रु षा इषूर्दू वौकावाखस्यूःप्ल। इ न्द्राखाऔ होता। द्यु क्षं वृ त्रा हाटुट्णाखऔ हो वाशि। गृ णी षेखि ॥१२॥
॥ वसिष्ठस्यां कुशौद्वौ ॥
प्र वाःता। मा हेकामाकहे वृ धेचिभा रा धूभिवातम् । प्रा चा त साषीइ प्रा सूकिमाखतीणम् । कृ णू ध्वाचिमी हा वाखिइ शाःणा। पूटर्वीःतप्र चा राभिचातर्षा णाकाइ प्रा औटिहोखबाप्ल। होप्लइ ळाशा ॥१३॥
हाख। प्र वो म हा इ माखूहेशवृ धाणाफ्इ भ राखिध्वशम् । हाख। प्रा चे त सा इ प्राखूसूश। मा ताणाफ्इ ङ्कृ णुखिध्वशम् । हाख। वि शः पू र्वा इ प्राखूचाश। रा चाणाफ्र्षा णाखाइ प्राःप्ला। हाखबु हौ हो वा हाप्लुउ वाशा। ईख ॥१४॥
॥ भारद्वाजञ्च ॥
शु नं हु वेषीम घ वा न मि न्द्रातूम् । अ स्मि न्भ रेषीनृ त मं वाकीज साटातौत। श्र ण्व न्त मु ग्रषुमू त येकिसा माटात्सूत। घ्न न्तां वाभिर्त्रातहो वाटाहातइश। नी सकान्जी त न्ध नाकीनीतहो वाटाहाखण्इश। ओपइ ळाशा ॥१५॥
॥ वासिष्ठञ्च ॥
दी व याकिहो वाकाऔटहोतवाकथ्ऊ दु ब्र ह्मा णीटूऐ रा त श्र वाखुस्याश। इकन्द्रं स मा र्येटीमा हा याकिव सीखाष्ठश। आकयो र्वि श्वा नीटीश्रा वा साकित ताखानाश। दी व याकिहो वाकाऔटहोतवाकथ्ऊ प श्रो ता माटुइ व तोपिवा चांखा। सात्रइश ॥१६॥
॥ पुरीषञ्चाथर्वणम् ॥
च क्रं य द स्य प्सूषूआ नि नि ष क्तातुम् । ऊ तो त द स्मैषुम ध्वी च च्छाटीद्यातत् । पृ थि व्या मषीति षी तंकिया दूटाधाःत। पा यो गोटिषूतआ द धाटिओचषा धीथाषू इ ळाटिभाखण्। ओपइ ळाशा ॥१७॥
तृतीय खण्डः (ऋ-१०, सा-१८)
॥ आदित्याः सामनीद्वे तार्क्ष्यसामनिवा ॥
त्य मू षूखिवा जि नाखिन्देखव जूखातशम् । स होकावा नथान्ता रू ताकिरं र थाखिनाशम् । अ रि ष्ट नाखीइ मींशापृ त नाखिज माखाशूशम् । स्व स्त या इ ताकुर्क्ष मि हाखिहू वाखाइश। मात्रम् ॥१॥
इ य इ यातीहा इ त्य मु षुषुवा जि नाखिन्देखव जूखातशम् । ई याफाई याफाआप्लहातइश। स होकावा नथान्ता रू ताकिरं र थाखिनाशम् । इ य इ यातीआकरि ष्ट ना इ मिंटुपा र्ता नाकिज माखाशूशम् । ई याफाई याफाआप्लहातइश। स्व स्त या इ ताकुर्क्ष मि हाखिहू वाखाइश। मात्र ॥२॥
॥ इन्द्रस्यचत्रातम् ॥
त्राकता र मि न्द्रषीम वि ताकिरा मीटान्द्रातम् । हा वे ह वे सूषुहा वं शुकिरा मीटान्द्रातम् । हू वा इ नु श क्रंषूपु रू हूकिता मीटा न्द्रातम् । ई दंथाहा वाचाइशमा घ वा वापीइ तू वाखिइश। न्द्राःत्र ॥३॥
॥ वाक्तत्रतुरम् ॥
य जा म होतीवात। आ इ न्द्रं वाकीज्रा द क्षाटिइ णाताम् । हा री णांकिच्र थ्याचावि व्र ताटिनातम् । प्रा श्माकाश्रू भि र्दो धू वाटुदू र्ध्वा धाकिभूखवाणत् । वी साचाइ ना भिकिर्भ य मा नोभीवापइ राशाधाखसोप्ल। हा इशा ॥४॥
॥ द्युतानस्य मारूतस्य सामनीद्वे ॥
सा त्राफाह णाखाऔणहोफवाप्ल। दा धृ षींटितू म्र मी न्द्राटीउ वोखावाश। माकहा म पाकिरं वृ षा भंकीसू व ज्राटिह न्ताटायोखवृण। त्रं स नि तोपीता वाखाजात्रम् । दा ताथाच्माकघा नि माकिघ वाटाच्सू राकाधाःटख् ॥५॥
सा त्राफाह ण न्दाफिधृ षीफाइ न्तू मृ मीखीन्द्रशम् । माकहा म पाकिरंकवृ षा भंचिसू व ज्राटिह न्ता योखिवृण। त्रं स नि तोपीता वाखाजात्रम् । दा ताथाच्माकघा नि माकिघ वाटाच्सू राकाधाःटख् ॥६॥
॥ आत्रम् ॥
यो नो व नु ष्यषुन्न भि दा ति माखुर्क्ताःप्ल। ऊ ग णा वाषीम न्य मा ना स्तु रोटूवात। क्षी धी यू धाषीश व सा वाकीता माटाइ न्द्राताम् । आ भा इ ष्याभीमातवृ ष माभिणातस्तु वोटाताःखण्। ओपइ ळाप्ला ॥७॥
॥ गृत्समदस्यसमिधौदौ ॥
हा बु यं वृ त्रे षूतू। क्षि त य स्प र्ध माखूनाःप्ल। धा मा नाकिईटया इटायाखहा बु यं यु क्ते षुशू। तु र य न्तो ह वाखून्ता इशा। हा वा न्ताकिईटया ईटायाखहा बु यं शू र साःशु। तौ य म पा मु पाखूज्माशन् । ऊ पा ज्माकीनीटया ईटायाखहा बु यं वि प्रा साःशू। वा ज य न्ता ईकुस ईखान्द्राःप्ल। सा इ न्द्रोकिईटया ईटायाखहाप्लउ वाशा। ईख ॥८॥
य य्य यातिहा बु यं वृ त्रे षूतू। क्षि त य स्प र्ध माखूनाःप्ल। धा मा ना यैकीय य्यैटाय य्य याचि। य य्य यातिहा बु यं यु क्ते षूतू। तु र य न्तो ह वाखून्ता इशा। हा व न्ता यैकीय य्यैटाय य्य याचि। य य्य यातिहा बु यं शू र साःतू। तौ य म पा मु पाखूज्माशन् । उ पा ज्मा न्यैकीय य्यैटाय य्य याचि। य य्य यातिहा बु यं वि प्रा साःतू। वा ज य न्ता ईकुस ईखान्द्राःप्ल। सा इ न्द्रो यैकीय य्यैटाय य्य यातिहा उ वाति। ईख ॥९॥
॥ वैश्वामित्रम् ॥
इ न्द्राताहातबुश। हाकहो इ प र्व ताषुबृ ह ता र थाटूइ नाकाउ वाता। ऊखपाश। वा मीतार्हातबुश। हाकहो इ षषिआ व ह तं सु वाटूइ राकाउ वाता। ऊखपाश। वी तांताहातबुश। हाकहो इ ह व्याषीन्य ध्वा रे षु दाटुइ वाकाउ वाता। ऊखपाश। व र्धेताहातबुश। हाकहो थां गी र्भिषीरि ळा या म दाटुन्ता हा उ वाती। ऊ ऊखापाश ॥१०॥
॥ सावित्राणिषट्प्रैय्यमेधानिवा ॥
हातहा इथान्द्रा य गा इ रोटूआ नी शीकित साखार्गाःप्ल। आ पः प्रै रा याटूत्सा गकार स्य बूखिध्नाशत् । यो आ क्षे णा इ वाटूचा क्री यौकिश चीखाभिःप्ल। वी ष्व क्त स्तं भाःटुपा र्थी वीपिमू ताखा। द्यात्रम् ॥११॥
अ सातावाकसा विथान्द्रा य गा इ रोटूआ नी शीकित साखार्गाःप्ल। आ पः प्रै रा याटूत्सा गकार स्य बूखिध्नाशत् । यो आ क्षे णा इ वाटूचा क्री यौकिश चीखाभिःप्ल। वी ष्व क्त स्तं भाःटुपा र्थी वीपिमू ताखा। द्यात्रम् ॥१२॥
कू वाताकूकवा इथान्द्रा य गा इ रोटूआ नी शीकित साखार्गाःप्ल। आ पः प्रै रा याटूत्सा गकार स्य बूखिध्नाशत् । यो आ क्षे णा इ वाटूचा क्री यौकिश चीखाभिःप्ल। वी ष्व क्त स्तं भाःटुपा र्थी वीपिमू ताखा। द्यात्रम् ॥१३॥
अ यातामाकया मिथान्द्रा य गा इ रोटूआ नी शीकित साखार्गाःप्ल। आ पः प्रै रा याटूत्सा गकार स्य बूखिध्नाशत् । यो आ क्षे णा इ वाटूचा क्री यौकिश चीखाभिःप्ल। वी ष्व क्त स्तं भाःटुपा र्थी वीपिमू ताखा। द्यात्रम् ॥१४॥
अ वि दाकिद वि द विकीन्द्रा य गा इ रोटूआ नी शीकित साखार्गाःप्ल। आ पः प्रै रा याटूत्सा गकार स्य बूखिध्नाशत् । यो आ क्षे णा इ वाटूचा क्री यौकिश चीखाभिःप्ल। वी ष्व क्त स्तं भाःटुपा र्थी वीपिमू ताखा। द्यात्रम् ॥१५॥
ई हाटाईखहाणन्द्रा य गा इ रोटूआ नी शीकित साखार्गाःप्ल। आ पः प्रै रा याटूत्सा गकार स्य बूखिध्नाशत् । यो आ क्षे णा इ वाटूचा क्री यौकिश चीखाभिःप्ल। वी ष्व क्त स्तं भाःटुपा र्थी वीपिमू ताखा। द्यात्रम् ॥१६॥
॥ कूतिवारस्यवैरूपस्यसाम ॥
आ त्वा स खा यषुस ख्या य व वृ त्यूःतू। ती रः पु रूषीचि द र्न वा ज गटूम्या बु होचिऔकहो वाका। पी तु र्न्ना पाषीत मा द धी त वाटूइ धा बु होचीऔकहो वाका। अ स्मि न्क्ष येषीप्र त रा न्दी दि याटूना बु होचिऔकहो वाका। औकहो वाकाईटहाख ॥१७॥
॥ वामदेव्यम् ॥
को अ द्य युं क्तेषुधु रि गा ऋ त स्यातूएत। शि मी व तोषीभा मी नो दुकिहृ णाटायूतन् । आ स न्ने षाषीम प्सु वा होकीमा योटाभूतन् । या ए षां भृ त्याषुमृ णा धाकित्सा जाटाइ वाकाउ वाता। ऊखपाश ॥१८॥
चतुर्थ खण्डः (ऋ-१३, सा-२८)
॥ शैखण्डिनेद्वे ॥
गा याता। ओचन्ति त्वाताओपगा याप्लात्रातइ णाःता। अ र्चाताओचन्ति याताओपर्का माप्लार्कातइ णाःता। ब्र ह्माताओचण स्त्वाताओपशा ताप्लाक्राततातबुश। उ द्वाताओंचश माताओपव याप्लाइ मि राप्लिइश। होप्लइ ळाशा ॥१॥
गा या न्ति त्वोतीहा इ गा या त्रीखुणाःण। अ र्च न्त्य र्क मायुर्कीपणाःश। अ र्च न्ती योखीहाशर्क मा र्कीखिणाःण। ब्र ह्मा ण स्त्वा श तायूक्रापता बुशा। ब्र ह्मा ण स्तोखीहा इशा। श ता क्राखिताणबुश। उ द्वं श मी व यायूइ मीपारेश। उ द्व श मोखीहाणइश। व या इ माखीणफप्ल्इश। राखइश ॥२॥
॥ उद्वंशीयन्तृतीयम् ॥
गा या न्ति त्वाषीगा या त्रि ण यातु। अ र्च न्त्य र्क म र्कटूइ णाःता। ब्र ह्मा ण स्त्वाटीहोचइशशा ता क्राटितातबुश। उ द्व श मी व यायूइ मीपारेश। उ द्वं शाखिमीण। व याटाउ वाता। उ प्माटाइ रोखा। हात्रइश ॥३॥
॥ शैखण्डिनीत्रीणि ॥
इ न्द्र वि श्वाःती। अ वीटावृ धाचान् । सा मु द्राकिव्या चाटाच्सा ङ्गि राःचि। रा थीकात माताहा उ वाटिच्रा थाचाइ नाशाम् । वाचजा नांटासातत्पा तींकाप ति मि ळाटीभाखण्। ओपइ ळाशा ॥४॥
हो इ न्द्रं वि श्वाःतु। अ वीकावृ धा न्साथिमूटच्द्रायव्याटच संकागि राःचा। रायथीटच्तायमांटच्रा थाकाइ नाचाम् । वायजाचनांयसाटच्त्पा तींकापाटतीखण्म् । ओपइ ळाशा ॥५॥
इ न्द्रं वि श्वा अ वीषूवृ ध न्स मू द्राखुव्याण। चाकसा ङ्गीपाराःश। रा थीकाथ्ताकमाटऊटहो वाथाऊटच्रा थाचाइ नाशाम् । वाचजा नांथासाटऊटहो वाथाऊटत्पा तींकापाटतीखण्म् । ओपइ ळाशा ॥६॥
॥ आष्टादंष्ट्रेद्वे ॥
इ न्द्रं वि श्वा अ वीषूवृ ध न्न य्यातीहातइश। सा मूचाद्रायव्यांटच्चाकसाकङ्गायइ राटाअ य्याटाहातइश। रा थाचाइ तायामांटच्रा था इ नाकीम य्याटाहातइश। वा जाचानांयसाटच्त् पा ताकाइ म्पाटातीटम य्याटाहाखण्इ । ओपइ ळाशा ॥७॥
इ न्द्रं वि श्वा अ वीषूवृ ध न्न य्या दौ होखूवात्र। स मु द्र व्या च सकूङ्गा इ राटिअ य्याटादौटहोतवात। र थी त मांचीराकथाकइ नाटाम य्याटादौटहोतवात। वाचजा नांथासा त्प तीकिम्पा तीटाम य्य दौटिहोटवाःखण्। ओपइ ळाशा ॥८॥
॥ महावैश्वामित्रेद्वे ॥
ह या इ ह याखुओ हाफाओ हाफा। ह या इ ह याखुओ हाफाओ हाफा। ह या इ ह याखुओ हाफाओ हाफा। इ न्द्रं वि श्वातीअ वीचावा र्धाटान् । स मु द्र व्यातीच सचाङ्गा इ राःटि। र थी त मांतीरा थाकाइ नाटाम् । वा जा नां सातीत्पा तींचापा तीटाम् । ह या इ ह याखुओ हाफाओ हाफा। ह या इ ह याखुओ हाफाओ हाफा। ह या इ ह याखुओ हाफाओ हाफा। हो इ ळा हफिहो इ ळाफिप्ल्होखइ ळाशा ॥९॥
हा या येटिच्हाकया येटाह याताहातआपइ न्द्रं वि श्वाकीच्अ वीफावृ धातान् । सापमु द्रा व्या च सणुफ्ङ्गि राःता। रापथी ता मं र थीणुफ्नातम् । वापजा नां सा त्पा तींणुफ्प ताताइश। हा या येटिच्हाकया येटाह याताहातआपहो इ ळाफिहो इ ळाफिप्ल्होखइ ळाशा ॥१०॥
॥ गृत्समदस्यवींकानिचत्वारिवसिष्ठस्यवाप्रियाणी ॥
इ म मापिइ न्द्राणा। सू तां पाटिट्इ बाखाऔ हो वाशि। ज्ये ष्ठा म माटीर्क्त्य म्म दंकिशु क्राता। स्य त्वाथाभीकया क्षाटाट्राखऔ हो वाशि। धाकराटॠ त स्य सा दाटुनेख ॥११॥
इ म मीणिफ्न्द्र सु तांखिपि बाशा। ज्येकष्ठा म माकिर्क्त्य म्म दंटिशु क्रा उ वोखीवाश। स्य त्वाकाभ्य क्ष र न्धा राषुउ वोखावाश। ॠ ता उ वोखीवाश। स्य सा द नाप्लीइश। होप्लइ ळाशा ॥१२॥
इ म मि न्द्राफीसु त म्पीणिबाफ। ज्येचष्ठा माकाम र्क्त्याकामायम्मा दाटामौटहौटहु वा औकिहोतवात। शु क्रा स्य त्वाचीभा याकक्षायराटनौटहौटहु वा औकिहोतवात। धा राथाऋ ताटाऔटहौटहु वा औकिहोतवात। स्या सा दाटिनाखण्इश। ओपइ ळाशा ॥१३॥
इ म मिपिन्द्र सु तं पि ब ज्ये ष्ठाशृम् । आचम र्क्ताकायायम्मा दाटाम् । शु क्रा सि याकीत्वा भि याटिक्षाखरणन् । धा राटाउ वोखावाश। आ र्क्ताटाउ वोखावाश। स्य सा द नाप्लीइश। होपइ ळाशा ॥१४॥
॥ वसिष्ठस्यवींकानिचत्वारिइन्द्रस्यवाप्रियाणिआकूपाराणिवा ॥
य दि न्द्रोतिहातइश। चीचत्रा माचाईटह नापाअ स्ति त्वा दाफीप्ल्होतइश। ता म द्राचिइ वोटारापध स्त न्नोणिवी दाफाप्ल्होतइश। वा सा उ भ याटुह स्ति याकिउ वाता। भा रोप्ला। हा इशा ॥१५॥
य दि न्द्र चि त्रषूमौ होतावा इ हाखिनाश। अ स्ति त्वा दाषीत मा उ वाकीआ उ वाकि। द्राखइ वाःप्ला। रा ध स्त न्नोषीवि दा उ वाकीआ उ वाकि। द्वाखसोश। उ भ या ह स्त याषूउ वाकाआ उ वाकि। भा रोप्ला। हाप्लइश ॥१६॥
या दि न्द्रापिचि त्राप्लामा इ हाखिनाणअ स्ताटाइ त्वा दाकिता म द्रा इ वोचुराथध स्त न्नोटिवीचद द्व साचिबुश। ऊ भाचाया हाटास्तापयाशभाखरोप्ल। हा इशा ॥१७॥
य दि न्द्र चि त्रषूमा ईफाह नाखास्तिश। त्वा दा त म द्रि वोषूरा ध स्ताटून्नोतवी वीटाद द्व साचिबुश। ऊ भाचाया हाटास्ता याटाभाटराखण्। ओपइ ळाशा ॥१८॥
॥ तिरश्चेराङ्गिरसस्यसामनीद्वेदेवानांवादेवपुरे ॥
श्रु धीकाहा वांटाहा वाटान्ती र श्च्याःचि। इकन्द्र याटास्त्वतस पाटाहातर्या तीटायात। सु वी र्य स्यषीगो म तो राकीया स्पूटार्द्धीत। म हंटाय सि याखिण्। ओपइ ळाशा ॥१९॥
श्रु धी हा वाखन्ती र श्च्याःप्लि। इकन्द्रा य स्त्वा स प र्याकूता एटासु वी र्या स्याखीगोणमा ताःटा। रा या स्पू र्द्धीटीहातहातइश। म हं य सीप्ली। होप्लइ ळाशा ॥२०॥
॥ वैश्वामित्रम् ॥
अ सा वि सो म इचून्द्रा तेफाश वा इ ष्ठाखीधृश। ष्णातवा गापाहिश। आ त्वा पृ णाटीहातक्तू वीटान्द्राखयणम् । रा ज स्सू र्यौकीवा उ वोखिवाश। न रा श्मि भीःप्ली। होप्लइ ळाशा ॥२१॥
॥ काण्वेद्वे ॥
ए न्द्र याखिहीशह ह री भाप्लीइःश। उ पाताक ण्वातास्याचसू ष्टूखातिणम् । दे वाताअ मूताष्या शाकासाखताःण। दा इ वकिय्य याताआ उ वाटि। दाखइ वाशावाखसोप्ल। हा इशा ॥२२॥
ए न्द्र या हीषीह रि भी रू हु वातूहातइश। ऊ पाकाक ण्वा स्याकिसु ष्टु ति मु हु वाटूहातइश। देकवा अ मूकिष्या शाकासाखताःण। दा इ व य्य याकुउ वाशा। दीखवाश। व सो हाप्लि। होप्लइ ळाशा ॥२३॥
॥ वैश्वामित्रञ्च ॥
आ त्वा गा इ रोखुरा थी री वाप्ली। अ स्तु स्सु तेचीषुकगियर्वा णाटाओखवाशप्ल्ओखवाण। अ भि त्वाकिच्सा माकानूयषा ताटाओखवाशप्ल्ओखवाण। गा वो वाभित्सातच्न्नाकधोपबाप्लना वोप्ला। हा इशा ॥२४॥
॥ इन्द्रस्यशुद्धाशुद्धीयेद्वे ॥
ए तो न्वि न्द्रं स्त वातूमात। शु द्धं शु द्धेकीना साटाम्नात। शु द्धै रु क्थै र्वाकुवृ द्ध्वांटासातम् । शु द्धै राटिशीतर्वाचन्म माखाऔ हो वाशि। तूख ॥२५॥
ए तो न्वि न्द्रं स्त वातूमात। शु द्धं शु द्धेकीनाचसाकओ म्नाटा। शु द्धा इ रूभीक्थातइ र्वाचावृ द्ध्वांखासणम् । शु द्धै राटिशीतर्वाचन्मा माचातू इ ळाटिभाखण्। ओपइ ळाशा ॥२६॥
॥ गौतमस्यरयिष्ठेद्वे ॥
यो र यिं वो र याकूहातबुश। ताखमाःप्ल। यो द्यु म्नैषिद्यु म्न वा क्त माकुसो म स्सु त स्सा याटूहो इ न्द्र ताटीइश। आ स्ति स्व धा पा ताटूइ हो येटिम दोखाइ ळाप्ला ॥२७॥
यो र यिं वो र यिफून्त मोखाहा इशा। यो द्यु म्नै र्द्यु म्ना वाफूक्त मोखाहा इशा। सो म सु त स्स इफून्द्र तोखाहा इशा। अ स्ति स्वा धाचीपाकतेफम दोखाहाप्ल। होप्लइ ळाशा ॥२८॥
पञ्चम खण्डः (ऋ-९, सा-११)
॥ कौल्मलबर्हिषेद्वे ॥
प्र त्य स्मै पी बातुहातबुश। ओ इ षातितातइशइ । वा इ श्वाकिनीचक्वा इ दू षेटीहातइ भातारातआ राटाच्ङ्ग माकाया जाटाहातग्मा याथाय पा श्चाटिट्द्दाखऔ हो वाशि। घ्व नेटान राःखा ॥१॥
प्र त्य स्मै पीतीपी ष तातिइश। वा इ श्वाकिच्नीकवा इ दू षेटिभा राटाआ राटाच्ङ्गाकमा य ज ग्मा याषूय प श्चा द्द घ्व नाटूहोचइश। ना रा औटिहोखबाप्ल। होप्लइ ळाशा ॥२॥
॥ नानदन्तृतीयम् ॥
प्र त्य स्मै पी पीफुष ताताइ वापाइ श्वा नि वि दु षेप्लूभाङराश। अ र ङ्ग मा या जफूग्म योखाहा या पा श्चा द्दाःटु। घ्वाकनोपबाप्लना रोप्ला। हा इशा ॥३॥
॥ शाकपूतञ्च ॥
आ नो व योषीव य श्शातियातम् । मा हा न्त ङ्ग ह्व राखूइ ष्ठाशाम् । मा हा न्तं पू र्वी नाखूइ ष्ठाणाम् । उ ग्रं वाटिचो अ पा वाखी। धीःत्र ॥४॥
॥ कौल्मलबर्हिषेद्वे ॥
आ त्वा र थंषीय थौ होतिवात। ता याकाइ सूखाम्नाण। या व र्क्त या म सीषूतु वि कूटुर्मीटच्माखर्क्तीण। ष हांकामा इ न्द्रंकिशाखवीण। ष्ठा सा त्पाटितींखण्। ओपइ ळाशा ॥५॥
आ त्वा र थं य थोफूता याखाआ त्वा र थाशीम् । या थो ता याटीऔ होखावाश। ईखहाश। सु म्ना याचिवाकर्क्ता या म सी यौकुच्होययौटहोखवाश। ईखहाश। तु वि कु र्मीचीमृकता इ ष ह मौकुच्होययौटहोखवाश। ईखहाश। इ न्द्रं श वीचीष्ठा सा त्प ति मौकुच्होययौटहोखवाश। ईखहाश ॥६॥
॥ मधुश्चुन्निधनञ्च प्राजापत्यम् ॥
स पू र्व्यो म हो नातूमेत। वे नाः क्राचितूकभा इ रा ना जेटुहातहा औटाहोतवा आटाइ हीता। य स्याकाद्वा राथामा नूः पी ताटीहातहा औटाहोतवा आटाइ हीता। दा इ वा इ षूटुहातहा औटाहोतवा आटाइ हीता। धी याकाआ नाटाट्जाखऔ हो वाशि। म धूताश्च्यू ताःटाख् ॥७॥
॥ उषसश्चसाम ॥
य दी व ह न्त्या शषूवो य द्ये या दीतु। ओ इ व ह न्ता यायूशा वाःटा। ओ इ भ्रा ज मा नाषूर था इ षूयेवाट। ओ इ पि ब न्तोषुम दी रा म्मायीधूट। ओ इ त त्र श्रा वांषूसि क्रा उ वाकीओपबाप्लण्वा तोप्ला। हा इशा ॥८॥
॥ गौतमम् ॥
त्य मु वोषिअ प्रा हाखीणणम् । गृ णीकाषे श वाकिस स्पा ता इ मि न्द्राटूवाखइ श्वाणा। सा हंकाहो येपाना र मोतिइश। श चा इ ष्ठांपीवीण। श्वा वाटाहोखबाप्लदा सांप्ला। हा इशा ॥९॥
॥ अग्नेश्चदधिक्रम् ॥
ओतहा इ द धि क्राषूवि ण्णो अ का र्षा मोतूहातइश। ओतहा इ जि ष्णोषीर श्व स्य वा जि नाटूओ हाचाइश। सु राकाभी नोकामु खा काटिरातत् । प्र णाटाच्होयआ यूंटाहोयषी ता राटिइ षाखाण्त् । ओपइ ळाशा ॥१०॥
॥ मारूतंवैश्वामित्रंवा आङ्गीरसानांवा साम मैधातिथंवा ॥
पू रांफाभि न्दु र्यु वाखीक विःशा। आ मी तौ जाकीआ जा याटितात। आ इ न्द्रो वि श्वाटुस्या ककार्माखणाःण। ध र्क्ता वा ज्रौकीवा उ वोखिवाश। पु रू ष्टुप्लिताःश। होप्लइ ळाशा ॥११॥
षष्ठ खण्डः (ऋ-१०, सा-१३)
॥ वामदेव्यञ्च ॥
प्र प्र व स्त्र ष्टु भषुमि ष मो हा ओ हातूएत। व न्दकाद्वी राथाच्या आकाइ न्द वाटिओटहातओटहातएत। धी या वो मे ध सायूतापयेशओटहातओटहातएत। पु रा न्धीभियात। वीकवोपबाप्लसा तोप्ला। हा इशा। ॥१॥
॥ काश्यपञ्च ॥
क श्य प स्यषीस्व र्वि दातिएत। या आ हु स्साचीयू जाकावायइ तीपाया योफार्वी श्वाफामा पीफाव्र ताताइश। य ज्ञा न्धीभिरोत। नी चा याटिट्याखऔ हो वाशि। ऊखपाश ॥२॥
॥ अग्नेर्वैश्वानरस्यसामनीद्वे ॥
वि श्वा न राती। स्य वाटास्पा तीटाम् । आ ना न त स्याकुशाचवायसाःट। एकवैचश्च च र्ष णाटीच्ई नाचाम् । ऊ तीकाहू वाकाइ र थापिनाप्लम् । हा इशा ॥३॥
वि श्वाखान र स्य वौ होप्लूस्पाङतिशम् । आ ना न ताटीहातस्या शाकावाखसाःण। एकवैचश्च च र्ष णापीइ नात्राम् । ऊ तीकाहू वाकाइ र थापिनाप्लम् । हा इशा ॥४॥
॥ शाकपूतेद्वे ॥
सा घा या स्ताटीएत। दि वो ना राटीएत। धि या मा र्क्ताटीएत। स्या शा र्म्मा ताटीएत। ऊ ता इ सा बृटुएत। हा तो दी वाटीएत। द्वि षो आं हाटीएत। ना ता राचिति इ ळाटिभाखण्। ओपइ ळाप्ला ॥५॥
स घा य स्तातीइश। दी वोकान रो धि योकीमा र्क्ताटास्या शकार्म्मा ताःचा। ऊ तीथासा बृटाहा तोकादि वाःचा। द्वि षोकाआं होटा। ना ता राचिति इ ळाटिभाखण्। ओपइ ळाप्ला ॥६॥
॥ प्रैय्यमेधञ्च ॥
अ र्च त प्रा र्च ताषूनाखराःप्ल। प्रि य मे धाखीसो आचार्चा ताफा। अ र्च न्तु पूखीत्रा काचाऊकताफ। पूकर मि द्धाटिष्णु वा र्चाखि। तात्र ॥७॥
॥ बार्हदुक्थञ्च ॥
उ क्थ मि न्द्राती। या शं साटियातम् । वा र्धा नंकिपु रू नि ष्षाटीइ धाताइश। श क्रो याभिथातसू तेकाषूखनाःण। राकर णाटात्सात। खी याकाइ षूटाचाखण्। ओपइ ळाशा ॥८॥
॥ वरूणान्याश्चसाम ॥
वि भो ष्ट इषिन्द्र रा धातिसाःत। वि भ वी राटीति श्श तो कृ तोकुश ताटाक्र ताचाबुश। आ थाकानो वि श्व च र्ष णेचूश्व चाटार्षा णाचाइश। द्यु म्नं सू द त्र मंकूह य त्र मां हाखु। यात्र ॥९॥
॥ उषसश्चसाम ॥
व य श्चाखिइ क्ते प त त्रि णाःशू। द्बि पा श्च तूषीष्प द र्जूकिना येपाउ षः प्रा राशीन् । ॠ तूंकार नू दि वोकीआ न्तेटा। भापयाशस्पाखरोप्ल। हा इशा ॥१०॥
॥ देवानाञ्चरुचिरोचनंवा ॥
आ मि येषिदे वा स्थ नाती। म ध्ये ये रोषीच ने दि वाः काचुद्वा ऋ ता ङ्काकीद मा र्क्ताटिम् । का प्र त्नाकिवा आ हूटितीःखण्। ओपइ ळाशा ॥११॥
॥ ऋक्सामयोस्सामनीद्वे ॥
ॠ चं सा म य जातू। म हा इ या भ्याषुङ्क र्माकिणी कृ ण्वाटितातइश। वी ते स दकीसि रा जाटिताःत। य ज्ञा न्दाटिइ वेता। षू वाकाक्ष ताकाइ ळाटाभाखण्। ओपइ ळाप्ला ॥१२॥
ॠ चं सा माखीया जा म हाप्लीइश। या भ्यांचाक र्माथाच्णी काकाण्वायताटइ ण्व ताटिइश। वा इ ते स दकुच्सी राकाजायतोटजा ताःटा। य ज्ञाकान्दायइ वेटा। षू वाकाक्ष ताकाइ ळाटाभाखण्। ओपइ ळाशा ॥१३॥
ऐन्द्रपाठः
प्रथम खण्डः (ऋ-१३, सा-२४)
॥ त्रैशोकम् ॥
वि श्वोताहातइश। पा र्क्त नाटिआ भि भूकित रकाच्न्नाकराःच। सा जूचास्ता त क्षूचिरा इ न्द्रकिन्ज जकानु श्च राचिजा सोपाहाणइश। क्र त्वौ हो इ वाकुरौ हो इ स्थेकीम न्याटामूखरीणम् । उ तोताहातइश। उ ग्रा मोपिजिशष्ठ न्ता राखिसणम् । ओ इ त राखिस्वी न मो वाशि। ओ इ जीखिवाश ॥१॥
॥ शैखण्डिनेद्वे ॥
श्र क्तेताहोतइश। द धाटाहोतमि प्र थ माटीय माकान्यायवाटइशन्या वाटाइश। अ हतान्होतइश। य द दाटिहोत। स्यु न्न र्यंटिवि वेचारायपाटआ पाःटा। उ भेताहोतइश। य त्वाटाहोतरो द सीटिधा व ताकिमायनूटआ नूटा। भ्य साताद्धोतइश। ते शुकाहोथच्ष्माकत् । पृ थि वीटिची दाचाद्रीयवोटद्री वाःटा। द्रीटट्। वाखऔ हो वाशि। हाकहा उ वाति। ईख ॥२॥
श्र क्ताताइश। द धाथाच्मि प्र थ माटीय माकान्यायवाटइशन्या वाटाइश। अ हकान्न्य द दाथिच्स्यु न्न र्यंटिवी वेकारायपाटआ पाःटा। उ भाताइशय त्वाथारो द सीटिधा व ताकिमायनुटआ नुटा। भ्य साताक्ते शुथाच्ष्माकत्पृ थि वीटिची दाचाद्रीयवोटद्री वाःटा। द्री वाकाएखहि याप्लाहाश। होप्लइ ळाशा ॥३॥
॥ अत्रेर्विवर्क्तोद्वौ ॥
आ योचावाटआ या योचिवाट। श्रापक्ता इशा। दाखधाण। मि प्र थ माटीय माकान्यायवाटइशन्या वाटाइश। आ योचावाटआ या योचिवाट। आपहशन्न्याखद दाण। स्यु न्न र्यंटिवि वेचारायपाटआ पाःटा। आ योचावाटआ या योचिवाट। ऊपभा इशायाखत्वाण। रो द सीटिधा व ताकिमायनुटआ नूटा। आ योचावाटआ या योचिवाट। भ्यापसाशक्ताखइ शूणा। ष्माकत्पृ थि वीटिची दाचाद्रीयवोटद्री वाःटा। द्रीटटवाखऔ हो वाशि। हातहा उ वाति। द्रि व औचिहोटहतच्म् ॥४॥
ई योचावाटई या योचिवाट। श्रापक्ता इशा। दाखधाण। मि प्र थ माटीय माकान्यायवाटइशन्या वाटाइश। ई योचावाटई या योचिवाट। आपहशन्याखद दाणा। स्यु न्न र्यंटिवी वेचारायपाटआ पाःटा। ई योचावाटई या योचिवाट। ऊपभा इशायाखत्वाणरो द सीटिधा व ताकिमायनूटआ नूटा। ई योचावाटई या योचिवाट। भ्यापसाशक्ताखइ शूणा। ष्माकत्पृ थि वीटिची दाचाद्रीयवोटद्री वाःटा। द्रीटट् खऔ हो वाशि। हातहा उ वाति। द्री व ईचियोटहतच्म् ॥५॥
॥ महासावेदसेद्वे ॥
आतयातम् । श्रापक्ता इशा। दाखधाण। मि प्र थ माटीय माकान्यायवाटइशन्या वाटाइश। आतयातम् । आपहशन्याखद दाणा। स्यु न्न र्यंटिवी वेचारायपाटआ पाःटा। आतयातम् । ऊपभा इशायाखत्वाण। रो द सीटिधा व ताकिमायनूटआ नूटा। आतयातम् । । भ्यापसाशक्ताखइ शूणा। ष्माकत्पृ थि वीटिची दाचाद्रीयवोटद्री वाःटा। द्रीटट् खऔ हो वाशि। हातहा उ वाति। द्रि वोचाद्रीटवाःख ॥६॥
अ य य्याःति। श्र क्ताचाइशा। द धाथाच्। मि प्र थ माटीय माकान्यायवाटइशन्या वाटाइश। अ य य्याःति। अ हचान्या द दाथिस्यु न्न र्यंटिवी वेचारायपाटआ पाःटा। अ य य्याःति। उ भाचाइशय त्वाथाच्रो द सीटिधा व ताकिमायनूटआ नूटा। अ य य्याःति। भ्य साचाक्ते शुथाच्ष्माकत्पृ थि वीटिची दाचाद्रीयवोटद्री वाःटा। द्रीटट् खऔ हो वाशि। हातहा उ वाति। द्री वाटाईख ॥७॥
॥ शैरीषेद्वे ॥
औ होताहोतहातइश। श्राखक्ता इशा। दा धाफामि प्र था माफीय म न्याखिवेशय म न्याखिवाणइश। अ हणान्न्या द दाफिस्यु न्न र्यंफिवी वे राखिपोशवी वे राखिपाःण। उ भाणाइ या त्वाफिरो द सी धाफीव ता माखिनूशव ता माखिनूण। भ्य साणाक्ता इ शूफिष्मा त्पॄ थी वीफीची दा द्रीखिवोशचि द्र द्राखिइ वाःणा। द्रीटट्वाखऔ हो वाशि। हाकहा उ वाति। एतद्री वाकाईटहाख ॥८॥
श्र क्ता औटिहोतहोतहातइश। द धाथाच्मि प्र थ माटीय माकान्यायवाटइशन्या वाटाइश। अ हा औटिहोतहोतहातइश। य द दाथिच्स्यु न्न र्यंटिवी वेचारायपाटआ पाःट। उ भा औटिहोतहोतहातइश। य त्वाथाच्रो द सीटिधा व ताकिमायनूटआ नूटा। भ्य सा औटिहोतहोतहातइश। ता इ शूथिच्ष्माकत्पॄ थी वीटिची दाचाद्रीयवोटद्री वाःटा। द्रीटट्वाखऔ हो वाशि। हाकहा उ वाति। द्री व एचिद्री वाःटाख् ॥९॥
॥ इन्द्रस्येन्द्रियाणीत्रिणि ॥
स माताहातइश। आ इ त वि श्वाषुओ जा साकिप ति मोकिइ दि वापिहाप्लहाङइश। य आचाइ कायाईटत्भूचरा तिचाथि र्ज नाटिनांखहाप्लहाङइश। सा पू र्वी योटीनू ताकान माचाजि गाटाइ षाखान्हाप्लहाङइश। तंकवा र्क्तायानीटच्राकनु वाटावृ त आचिएटक याकाउ वाता। वृ धेताच् ॥१०॥
स मे त वि श्वा ओ ज साषृप ति मे पा तीतूम् । दि व याकिहौटहौटहोतवा ईटायात। य आतई कायाईटत्भूटरा तीथाथि र्ज नाटिनांकहौटहौटहोतवा ईटायात। सा पू र्व्योटिनू ताकान माचाजि गाचाइ षाकान्हौटहौटहौटहोतवा ईटायात। तंकवा र्क्तायानीटच्राकनु वाटावृ ताचाआचयेटक याकाउ वाता। म हेताच् ॥११॥
स मे त वि श्वा ओ ज साषृप ति मे पा तीतुम् । दा इ वायियाटऔटहौटहोतवा ओ मोचिवाश। य आचाइ कायाईटत्भूचरा तीचाथि र्ज नाटिना औटाहौटहोतवा ओ मोचिवाश। सा पूचार्वाययोटनू ताकान माचाजि गाटाइ षा न्हौटिहौटहोतवा ओ मोचिवाश। तं वाकार्क्तायनीटच्राकनु वाटावृ त आचिएटक याकाउ वाता। ध र्माटाणेख ॥१२॥
॥ वैरूपाणित्रीणि ॥
इ मे त याती। न्द्रा ते व य म्पु रूटूष्टू ताटा। ये त्वा र भ्यषीच रा म सि प्र भूटूवा साटाबुश। ना हि त्वा द न्योषुगि र्व णो गि राटुस्सा घाटात् । क्षोकणी रि वषिप्र ति त द्ध र्य नोटूवा चापाव चा उ वो वाप्लु। होप्लइ ळाशा ॥१३॥
इ मे त याती। न्द्रा तेकाव य म्पु रू ष्टू ताकूयायइ त्वाटाच्। रायभ्याटच्। चा रा म सी प्र भूकूवा साटाबुश। नायहीटच्त्वायदाटच्न्यो गि र्व णोचीगि राकास्सा घाचात् । क्षोयणीटच्रायइ त्वाटाच्प्रा तीकात द्ध रीकिया नो वाटिचाखण्। ओपइ ळाप्ला ॥१४॥
इ मे तापिइ न्द्र ते व यंषुपु रू ष्टूप्लितोङवाश। ये त्वा रा भ्याटीच रा म सीखीप्रा भूचावा साफाबुश। ना हि त्वा दाटीन्यो गि र्वा णोखीगी राचासा घाफात् । क्षो णी रा इ वाटुच्प्रा ती त द्धाटीर्य नो वा चाःप्ली। होप्लइ ळाशा ॥१५॥
॥ बार्हदुक्थञ्च ॥
च र्ष णी धृ तांतुहातबुश। मा घ वाकिना मु क्थाटियातम् । इ न्द्र ङ्गी रोषुबृ ह ती राकीभ्या नू षाटितात। वा वृ धा नाटीम्पू रू हूटिच्तां सु वाटिर्क्ताखइ भीःणा। आ माटाच्र्ती याकाज र मा णाटीन्दापइ वेशादाखइ वोप्ला। हा इशा ॥१६॥
॥ त्रासदस्यवेच ॥
अ च्छा व इ न्द्रषुम्म त य स्व र्यू वातूएत। स द्ध्री ची र्वि श्वषुउ श ती र नूकुषा ताटा। पा री ष्व ज न्तषुज न यो य थाकुपा ति म्टा। म र्य न्नाटिशूतन्ध्यू र्म्म घ वाटीन मूखाऔ हो वाशि। त याताच्ईख ॥१७॥
आपच्छा व इ न्द्र म्माप्लुत याःङा। सूकवा र्यू वाटिट्सापध्री ची र्वि श्वा ऊप्लुश तीःङा। आकनू ष ताटिपापरि ष्व ज न्ता जप्लुन याःङा। याकथा प ता एभीमापर्य न्न शु न्द्ध्यु र्म्माप्लुघ वाङा। नाकमू ताकायाचबुश। बाटख् ॥१८॥
॥ सौभरेद्वे ॥
अ भि त्याखिम्मे ष म्पूप्लिरूङहूश। ता मृचाग्मा याटाम् । ई न्द्राताङ्गी र्भाताइ र्म द ता व स्वोचूअ र्णाकावा मोपाहाप्लहातइश। य स्य द्या वोचीन वि च रकीच्न्तीशमा नू षाकिमोपहाप्लहातइश। भु जे मं हि ष्ठ मषूभि वि प्र म र्च ताकूदु राटाति नाखाऔ हो वाशि। ऊखपाश ॥१९॥
त्यं सूखामे ष म्माप्लिह याङा। सू व र्वाटिइ दाताम् । श तांताय स्य सूचिभु व स्साचिका माकाइ रायाताटइश। अ त्य न्न वा जंषूहा वाचान स्याकादांचरायथांट। आ इ न्द्रंकिच्व वृकात्या म व सा इ सूटूट्वृखऔ हो वाशि। क्तीखभीःश ॥२०॥
॥ वरूणसामनीद्वे द्यावापृथिव्योर्वासामनी ॥
घृ त व ती भु वषूना ना म भातीइ श्रि याति। उ र्वी पृ थ्वी मषुधु दु घे सु पे शाकूसाच। द्या वा पृ थि वीषूव रू णा स्याकीध र्म्म णाचि। वा इ ष्क भीकीताचया ज रेकिभू रि राटिई त साकिउ वाता। इ न्दुकास्स मु द्र मू र्वीकुया वि भाकितीख ॥२१॥
घृ ताणावा ताफाइ भु व नाखीना म भा इ श्रि याशू। उ र्वी पृ थ्वी म धुषूदु घे सु पे श साटूहोचइश। द्या वा पृ थ्वीषीव रू णा स्याकीध र्म्म णाटिहोचइश। वि ष्का भाटिइ तेता। आ ज रेकिभू रि राचिई त साकिउ वाता। एतइ न्दुकासा मू द्र मू र्वीकुया वी भाकितीख ॥२२॥
॥ इन्द्रस्यचश्येनः ॥
उ भे य दि न्द्र रोतूद साताइश। आ पाटाप्रा थाकाइ षाताआ उ वाटि। ईखवाश। मा हा न्त न्त्वाटीम हा इ नांटीस म्रा औपिहोश। ज ञ्च ॠकिष णाताआ उ वा एभी। नातमाख। देकवी ज न त्र या जीयूजा नाटात्भ द्रा औपिहोश। जा नि त्रटिय जाताआ उ वाटि। एतज नाकादाख ॥२३॥
॥ वैरूपम् ॥
प्र म न्दाखिइ ना इशिपि तु र्म दाखीर्चा ताचावा चाःफा। याः कृटाओखवाण। ष्णा ग र्भाचिनी रा हकिन्नृ जा इ श्वा नाटुअ व स्याखिवाःण। वृ षा णंकिवा ज्राकाद क्षाखाइ णणाम् । मा रौकावा उ वोखिवाश। त्व न्तं स ख्या यषुउ हु वाप्लिइ म हाप्लिबुश। बाश ॥२४॥
द्वितीय खण्डः (ऋ-१२, सा-२१)
॥ यामम् ॥
स्वा दो रि त्था वि षूफूव तोतामापधोः पि ब न्ति गौ र्याःश्रू। या इ न्द्रे णाकीसा या वाटिरीःत। वृ ष्णाचाम दकाच्न्तीकशो भाटाथात। व स्वाचाइ रायानूटस्वा राकाज्या मि ळाटिभाखण्। ओपइ ळाशा ॥१॥
॥ गृत्समदस्यमदौद्वौ ॥
इ त्था हि सोती। मा इ म्माटिदाःत। ब्र ह्मा चा काकीराचव र्द्धाटानातम् । शा वि ष्ठ व ज्रिकुन्नो जाटासात। पृ थि व्याकिनि श्श शाकिआ हीकाम र्च्चाचान्नायनूटच्स्वा रौ होचिवाकच्जीकय मोप्लाइ ळाशा ॥२॥
इ त्था हि सोफीम इ म्म दाःकी। ब्र ह्मा चा काकीरा व र्धाटिनाखम् । श वा इ ष्ठाखीवाशज्रि न्नो जाखिसाण। पृ थि व्याकिनि श्श शाकिआकही म र्च्चाकिन्हो इ नोटिहो इ स्वा राकीज्या मि ळाटिभाखण्। ओपइ ळाशा ॥३॥
॥ आभीशवेद्वे ॥
इ न्द्रो म दाती। य वा वाखिर्द्धा इशा। श व से वृकीत्र हा नृखिभीःप्ल। त मि न्म ह त्स्वा जाखूइ षूशा। ऊ ति म र्भेषीह वा माखिहा इ सा वाशी। जा इ षु प्र नोपुबाप्लवा इ षाप्लित् । हा इशा ॥४॥
इ न्द्रो म दाफीय वा वृ धाकीइश। श व से वृकीत्रा हाकानृयभीपस्ता मि न्मा हा त्साषुहा बु जा इ षुशु। ऊकति म र्भे ह वाटुच्माख। हा इ सा वाशी। जा इ षू प्र नोपुबाप्लवा इ षाप्लित् । हा इशा ॥५॥
॥ आभीकेद्वे ॥
इ न्द्रो म दाफीय वा वृ धाकीइश। श व सेकिवृचत्रा हाटानृ भीकाराशऔ हो औटिच्होकवाटहाख। ता मि न्म ह त्स्वाटुजि षुकाआशऔ हो औटिच्होकवाटहाख। ऊकति म र्भेकिह वाटामा हाकाआशऔ हो औटिच्होकवाटहाख। सा वा जे षूयीप्रापनोश। वाखइ षाप्लात् । हा इशा ॥६॥
इ न्द्रो म दा य वाषूवृ धे श व से वृतू। त्रा हाचानृयभीःट। ता मिकान्म ह त्सुटिआ जि षुटिऊ तीकामाखर्भाणइश। ह वाटामा हाचाइश। सा वा जे षूयीप्रापनोश। वाखइ षाप्लात् । हा इशा ॥७॥
॥ बार्हगिराणित्रीणी ॥
इ न्द्रो ओतिप्म दाता। या वा वृ धे श वाटूसाखइ वृणा। त्रा हाटाऔ होतावातट्औ होखावा नृ भा इःशी। ता मि न्म हकीत्स्वा जि षू ति माटूर्भातइश। हा वाटाऔ होतावातट्औ होखावा म हा इशी। सा वा जे षु प्र नाटूऔ होतावातट्औ होखाबाप्लवा इ षाप्लित् । हा इशा ॥८॥
इ न्द्रोखाम दा य वाप्लीवाङर्द्धा इशा। श व से वृकीत्रा हाकानृयभीःपहा बु हौफिहोतवात। ता मि न्म ह त्सूकुवाटजि षूपाऊकति म र्भेकिहा वाकामायहेपहा बु हौफिहोतवात। सा वा जे षूयीप्रापनोशवाखइ षाप्लात् । हा इशा ॥९॥
ओ हाफाइ न्द्रोखाम दा य वाप्लीवाङर्द्धा इशा। श व से वृकीच्त्रा हाकानृयभीःपआ बु औफिहोतवात। ता मि न्म ह त्सूकुवाटजि षुपाआ बु औफिहोतवात। ऊकति म र्भा इ ह वौकूहो वाथामा हेटा। सा वा जे षुयप्रापनोशवी षा दौपिहो बाप्ला। होप्लइ ळाशा ॥१०॥
॥ इन्द्रस्यचस्वाराज्यम् ॥
इ न्द्र तु भ्यषीमि द द्री वातीएत। आ नु क्तं व ज्रिकुच्न्वी र्य्यकाय्य द्धाकात्यायम्माट। या इ न म्मृ गाकुच्न्ता वाकात्यायम्माट। या या व धीकीच्र र्च्चाकान्नायनूटस्वा राकाज्या मि ळाटिभाखण्। ओपइ ळाशा ॥११॥
॥ कश्यपस्यचधृष्णुम् ॥
प्रा इ हिटिच्आकभि हि धृ ष्णु हाकुऔटहोत। ना ताटाच्इ व ज्रोषिनि यं स ता औटुहोत। आ इ न्द्रोटिच्नृ म्णं हि तेषीश वा औटिहोत। हा नोटाच्वृ त्र न्ज याषीअ पा औटिहोत। आ र्च्चाटान्ना नूटास्वा राकाज्या मि ळाटिभाखण्। ओपइ ळाशा ॥१२॥
॥ वैदन्वतम् ॥
य दु दी राफीत आशाज याःका। धृ ष्ण वे धीकीचया ताकाइ धायानटम् । युकङ्क्ष्वा म द च्यु ताटुहाखरीण। कंकह नः कं व साटुबु दाखाधाःण। अ स्मंताइ न्द्रातावा सौ दाटिधाःखण्। ओपइ ळाशा ॥१३॥
॥ यामेद्वे ॥
अ क्ष न्ना मीचीमाकदफन्त हीतायापव प्रि या धु ष ताशु। आ स्तोकाष त स्व भा न वोकूवि प्रा न्नाभिवीत। ष्ठा या म तीकीयो जा नूटिवातइ न्द्राटाट्ताखऔ हो वाशि। हाखरीश ॥१४॥
उ पो षु श्रु णु हीषूगि र एतिऔ होखावात्र। मा घ वकन्मा त थाटिइ वाप्लाक दाखान स्सुता। ना र्क्ताकाव तः क राकीइ द र्थाचियायसा ईपाद्यो जाखान्वाताइ न्द्राटाताखऔ हो वाशि। हाखरीश ॥१५॥
॥ त्रैतानित्रीणि ॥
चकन्द्र मा या उ वाकुच्प्सूकआ न्ता रा उ वाकु। सुकप र्णो धा उ वाकुच्। वाकते दि वि न वोषुहा इ राकिच्उ वाका। ण्याकना इ मा या उ वाकूच्। पा दं वि न्दा उ वाकूच्न्तिकवि द्यु तोकिवि क्त म्मा या उ वाकू। स्या रोकादाटसाखण्इश। ओपइ ळाशा ॥१६॥
च न्द्र मा याती। प्सूतआ न्तापाराश। सु प णो र्धाकीच्वाकताटइ दीचावि याता। न वोटाच्हि रकाण्य नेकाम यः पा दं वि न्दकून्ति वि द्यु तोपीहाणइश। वि क्तं हो इ मा याटूहोकथ्स्या रो दाटिसाखण्इश। ओपइ ळाशा ॥१७॥
च न्द्र मा याखीप्सूशअ न्त राप्लि। सू प णो र्धाकीच्वा ता इ दायीइ विटा। न वोटाच्ही रकाण्य नेकाम यः पा दंषीवि न्द न्तिकिवि द्यु ताःटि। वि क्तं हो इ मा याटूहोकथ्स्या रो दाटिसाखण्इश। ओपइ ळाशा ॥१८॥
॥ सौपर्णेद्वे ॥
च न्द्र मा य प्सु आतू। न्ता रा सु प णो र्धाकूच्वा ते दाटिइ वीता। न वोटाहोचइशहि रकाण्य नेकाम यःशापा दं वि न्द न्तिकुवि द्यु ताःटि। वि क्तं हो इ मा याटूहोकथ्स्या रो दाटिसाखऔ हो वाशि। उ ऊखापाश ॥१९॥
च न्द्रौ हो मा य प्सुषूअ न्त रा ओ वातु। सु पकाणो र्धाकावा ते दा इ वा एटूहो वाकाहोखइ हु वोतिइश। ना वो हा इ र ण्यषूना इ मा याटीहो वाकाहोखइ हु वोतिइश। पा दं वि न्द न्तिषुवा इ द्यु ताटीहो वाकाहोखइ हु वोतिइश। वि क्त म्मे अ स्य रोषूदा सा एटिहो वाकाहोखइ हु वोखिवात्र। उ ऊखापाश ॥२०॥
॥ लौशम् ॥
प्रापति प्र य त मंप्लुराङथाशम् । वाकर्ष णं वाकिसू वा हाटिनातम् । स्तो ता वाभिमातश्वि नाटावाखर्षीःण। स्तो मा भीःभीभू षाकाति प्राखातीण। म ध्वा इ माभीमात। श्रूपतांश। हाखआ वांप्ला। हा इशा ॥२१॥
तृतीय खण्डः (ऋ-८, सा-१०)
॥ इन्द्रस्यसञ्चयेद्वे सेनुदेवा वामदेव्येवा ॥
आपते अ ग्न इ धी माप्लूहाङइश। द्यू म न्त न्देतीच्वाकआटजचरा माता। य द्ध्या स्याभितातइशपा नीकायाखसीण। सा मी द्दि दकीय ताटाइ द्याचावि याता। ई षं स्तोटितृत। भ्यापयाशभाखरोप्ल। हा इशा ॥१॥
आ ते अ ग्न इ धीफूमा हाखाइ द्यु म न्ताप्लीन्देखवा आ ज रप्लीम् । य द्ध स्या ते प नी य सीषृस मि द्दि द य तातूइश। हिंटहि न्द्याखावीण। इ षं स्तोटितृशभ्यापयाश। हिंपहिंशभाखरोप्ल। हा इशा ॥२॥
॥ अङ्गिरसान्निवेष्टौद्वौ ॥
आ बु औफिहोतवात। अ ग्नि न्न स्वषीवृ क्ति भीःकिख्। आ बु औफिहोतवात। हो ता र न्त्वाषीवृ णी म हेकीख्। आ बु औफिहोतवात। शीकर म्पाथाच्वाकका शो चि षंकीवि वो माखिदाणइश। आ बु औफिहोतवात। य ज्ञा इ षु स्तीकुर्णा ब र्हि षांकीख्। आ बु औफिहोतवात। विचव क्ष सेखि ॥३॥
अ ग्निकान्न स्व वृ क्ति भिःकुइ ह इ हातीहातइश। हो ता र न्त्वाषीवृ णीकाम हेकाइ ह इ हातीहातइश। शीकर म्पाथाच्वाकका शो चि षंकीइ ह इ हातीहातइश। वि वो माखिदाणइश। इ ह इ हातीहातइश। य ज्ञा इ षु स्तीषुर्णा ब र्हि षंकीइ ह इ हातीहातइश। वाटइ वाखाऔ हो वाशि। क्षाखसेश ॥४॥
॥ सत्यश्रवसोवार्यश्चसाम ॥
म हाखाइ म हो नोषीअ द्य बोप्लिधाङयाश। ऊ षो रा येकीच्दिकवि त्माटातीत। य था चीभिन्नोतआ बोकाधाखयाःण। स त्या श्राभिवातसि वाटाय्याखण्इश। सु जा तेभिआत। श्वापसुशनाखर्क्तोप्ल। हा इशा ॥५॥
॥ उषसश्चसाम ॥
भ द्र न्नोपिअ पि वा त याशु। मा नोटाद क्षा मू ताकीक्राखतूणम् । आचथा तेथास ख्येकाअ न्धा साटिवी वो माखिदाणइश। र णाटागा वोटाच्नाकय व सा इ वाटुट्इ वाखाऔ हो वाशि। क्षाखसेश ॥६॥
॥ लौशञ्च ॥
कृ त्वा म हंषीअ नु ष्वा धातीएत। भी माचाआ वाथाच्वृ ताकाइ शायावाःट। श्री याताऋ ष्वाताऊ पाकाकाखयोःण। नी शि प्री हाचीरी वाकान्दायधाटइश। ह स्ता योभिर्वातच्। ज्राकमोपबाप्लया सांप्ला। हा इशा ॥७॥
॥ यामञ्च ॥
स घाफातं वृ ष णंफीर थाखाऔणहोफवाश। आकधी ति ष्ठाचिती गोकावायइ दाटाम् । यः पा त्रंकिहा रि योटिजाखनणम् । पूकर्णा मि न्द्रा चि केकुताखतीण। यो जा नूभिवातइ न्द्राटाट्ताखऔ हो वाशि। हाखरिश ॥८॥
॥ अङ्गिरसाञ्चैवनिवेष्टः ॥
अ ग्नि न्त म्माखीन्ये यो वा सूःप्ली। अ स्तं य य्याटीन्ती धेटानाखवाःण। अ स्ता म र्वाटीन्ता याटाशाखवाःण। अ स्ता न्नि त्याटीसो वाटाजाखइ नाःणा। इ षं स्तो तृटीहा होखाहाणइश। भ्यापयाशभाखरोप्ल। हा इशा ॥९॥
॥ गौरयश्चाङ्गिरसस्यसाम ॥
न त मं हो न दुषूरि त मि य इ यातूहातइश। दा इ वा सोकीअ ष्टा मा र्क्त्याकुमि य इ याटिहातइश। सा जो ष सोकीय म र्या माकीइ य इ याटीहातइश। मा इ त्रो नाकीया न्ति वाटिरूखणाःत्र। आथति द्वीटाषाःख ॥१०॥
चतुर्थ खण्डः (ऋ-९, सा-२१)
॥ वसिष्ठस्यसङ्क्रमौद्वौसौहविषाणित्रीणि सर्वाणिवासौहविषाणि ॥
प रि प्र ध व न्वातु। इ न्द्रा य सो मा स्वायूदूपर्हाणइशमि त्रा याचिपूकष्णे भापाहाणइश। गापयोप्ल। हा इशा ॥१॥
प रि प्र ध न्वातु। इ न्द्रा य सो मा ओटूहातओटहातइश। स्वा दु र्मि त्रा याटूओटहातओटहातइश। पू ष्णाखाऔ हो वाशि। भ गातायाख ॥२॥
प रीताहोचइशप्र धाखान्वाश। इ न्द्राताहोचय सोखामाश। स्वा दूतार्होचइशमि त्राखायाश। पू ष्णेताहोचइशभ गाखायाश। पू ष्णे भ गा यषुपू ष्णेटाहोखइ भ गाखियात्र। एतस्व र्वा तेखि ॥३॥
हातहा इ पा रीचीप्रा ध न्वाटिएखहि याप्लाहातहातइश। हातहाकइकथ्न्द्रा य सोकिमाटएखहि याप्लाहातहातइश। हातहा इ स्वाकिदूथच्र्मि त्राकायाटएखहि याप्लाहातहातइश। हातहातहा इकापू ष्णेथाच्भा गाकायाटएखहि याप्लाहातहाखण्इश। ओपइ ळाशा ॥४॥
प र्ये पा रीती। प्रा ध न्वा हो वाकुहो इकान्द्रा य सो मा हो वाकु। हो इ स्वाकिदु र्मि त्रा या हो वाकूहो येटापू ष्णौकावा उ वोखिवाश। भ गा याप्लिबुश। बाश ॥५॥
॥ वाकानित्रीणि ॥
प र्यू षुषिप्र ध न्वा वाती। ज सा ता याकीओ इ पा रीकीओ इ वृ त्राटीच्णीकस र्क्ष णी द्वा इ षायूस्ता राटा। धी याटाऋ णा याभिनाक। ई रा साभिआटइ रा साखिण्इश। ओपइ ळाप्ला ॥६॥
प र्यू षूति। प्रा धा न्वा वाटीज साकाताखयाणइश। प रि वृ त्रा णिषुसा क्षाचाणि द्वि षाकिस्तापराश। धि य्याचाऋ णायाया नापाईशहिंच। राखसोप्ल। हा इशा ॥७॥
प र्ये पा रीती। ऊ षु प्र ध न्वा वा ज सा त येषेप रि वृ त्रा णि साकूक्षा णि द्वाटिइ षातास्ताटरात। धी य ऋ ण याषुन या उ वाकीओपबा रा सोप्लि। हा इशा ॥८॥
॥ प्रजापतेर्धर्मविधर्माणिचत्वारि ॥
प व स्व सो मातु। माचहाकन्सा मू द्राःकिपी ता दे वा नां वाटूइ श्वाखाऔ हो वाशि। भी धाटामाख ॥९॥
औ हो वा औ होकुवा औथाहोटवाखऔ हो वाशि। पा वा स्व सोचीम मा हाचिन्सा मु द्राःचिपी ताकादे वा नांटिवि श्वाकाच्भिकधाटमाख। औ हो वा औ होकुवा औथाहोटवाखऔ हो वाशि। एतधटर्माख ॥१०॥
ओ हो वा ओ होकुवा ओथाहोटवाखओ हो वाशि। पा व स्व सो मा माकूहे द क्षाचिया श्वोकाना नि क्तोचिवाटजी ध नाकियाख। ओ हो वा ओ होकुवा ओथाहोटवाखऔ हो वाशि। एतवि धकार्माख ॥११॥
प व स्व सो मातु। माकहेथद क्षा याटिआ श्वो न नि क्तोकुवा जाखाऔ हो वाशि। ध नातायाख ॥१२॥
॥ भागञ्च ॥
इ न्दुः प वि ष्टातु। चाटरू र्मा दाकिया अ पाकिमु पाटास्थातइश। काटट्वाखऔ हो वाशि। भ गातायाटख् ॥१३॥
॥ वाजिनाञ्चसाम ॥
अ न्व नूति। हा इ त्वाकिसू तं सोकिमा म दाचिम सि म दाकीच्मा साकाएटम हा इ साखीमाण। री याचारा ज्येटावा जंटाच्आकभी प व मा नषुप व माकिनाःच। प्रा गाटाच्हाकसा औटाहोखबाप्ल। होप्लइ ळाशा ॥१४॥
॥ प्रजापतेर्हिकनिकविकानित्रीणि ॥
क ईं व्य क्ताःती। ना र स्सा नाचीइ ळाटाच्रू द्र स्य म र्या याटूट्थाखऔ हो वाशि। स्वतश्वाःटख् ॥१५॥
का ईंणाफ्वि याखाक्ताःप्ल। ना राणाफ्स्साखना इ ळाःप्लि। रू द्र स्य म र्या याटूट्थाखऔ हो वाशि। सु वाताश्वाःख ॥१६॥
का ईंथावि याटाओकवाखक्ता ना राःशि। स नाटाओकवाखइ ळा रू द्राशी। स्य माटाओकवाखर्या या थाशि। सु वाटाओकवाखश्वाःप्ल। होप्लइ ळाशा ॥१७॥
॥ आश्वेद्वे ॥
अ ग्ने त म द्यातु। अ श्वथान्न स्तो मा इः कृ तूकूच्न्नाकभा द्राटाम् । हा र्द्दिटास्पृकशाचमृ द्ध्याटाट्माखऔ हो वाशि। ता ओटाहैःख ॥१८॥
आ ग्नेफाहोफइ त माखिद्याश। अ श्वथान्न स्तो मा इः कृ तुकूच्न्नाकभा द्रांटा। हा र्द्दाथाओचइशस्पृ शाचामृ द्ध्याटाट्माखऔ हो वाशि। एतच्ताकओटहैःख ॥१९॥
॥ वाजिनाञ्चसाम ॥
आकवि र्मापार्याःण। आ वा जंषिवा जि नो ग्मा न्देटु। वाचस्य स वी तु स्साटुवातइश। स्व र्गाटाअ र्वाखान्ताःत्र। जकय ताटाख् ॥२०॥
॥ आदित्यानाञ्चपवित्रम् ॥
प व स्व सो मातु। द्यु म्नीणाफ्सू धाखाराःप्ल। मा ही नाटिमा नू पूटिर्वी योखाप्ल्इ ळाशा ॥२१॥
पञ्चम खण्डः (ऋ-११, सा-२८)
॥ इन्द्रस्यक्रोशानुक्रोशेद्वे ॥
इ न्द्राता। सू ते षु सो मेकुषू हो येटिहूसट्हो इ क्र तुंषीपु नि ष उ क्थ्यांचु। वी दाचाइ वायार्द्धाटस्यातद क्षापास्याश। म हंटाहि षाःखाण्। ओपइ ळाशा ॥१॥
इ न्द्राताहो इ ह वेकीहोचइशसु ते षु सो मे षु कृ तुंषृपु नी ष उ क्थ्याचूम् । वी दाचाइ वायार्द्धाटस्याकद क्ष स्याचि। मा हं हीफि। षाःख ॥२॥
॥ कौत्सन्तृतीयम् ॥
इ न्द्र सु ते षुषुसो मेताषूत। क्रा तूंटापू ना इ षाकीउ क्थ्यांचावी देकावा र्द्धाटास्याकद क्ष स्याचि। म हं हा इ षाःटु। म हंटाहि षाःखाण्। ओपइ ळाशा ॥३॥
॥ प्रहितोःसंयोजनेद्वे ॥
ताणमूफआ भि प्र गाखीय ताशा। पु रू हू तं पू रूटूष्टू ताटाम् । इ न्द्राटाच्ङ्गा इ र्भीकिस्ता वि षाटिमात। वी वा साटिट्ताखऔ हो वाशि। ओखकाःप्ल ॥४॥
ताणमूफअ भि प्र गाचीय ते दाशिम् । पु रू हू ता म्पु रूटूष्टू ताटाम् । आ इ न्द्र ङ्गीटीच्र्भि स्त वि ष माकुच्वी वाकासायताट। आ इ न्द्राकिङ्गाखइ र्भीताच्स्ताकवि षाटामात। वाटइ वाखाऔ हो वाशि। स त एखि ॥५॥
॥ दैवोदासेद्वे ॥
हा बु त मू अ भीतू। प्र गाकाय ता हाभिबुशपु रू हूखितणम् । पु रूकाष्टु तां हाभिवि न्द्रा ङ्गाखिइ र्भीताच्स्ताकवि षापामाफहाणबुश। वि वा साखितात्र। दीखविश ॥६॥
ता मूफाअ भीणाफप्ल्हो इ प्र गाखीय ता एप्लि। पु रू हूभितातम्पु रू ष्टुभितातम्पु रूटाष्टुखतणम् । इ न्द्रा ङ्गीभिर्भातच्इशस्त वा इ षाभीमात। वी वाभिसातवि वाटासाखताण। आ इ न्द्र ङ्गीकीर्भातच्इ स्त वि ष मा वि वाटृवातहातस ताटाउ वोखावाश। ऊख ॥७॥
॥ हारिवर्णानिचत्वारि ॥
त न्ते म द ङ्गृ णिटूमा सीचा। वृ षा णं पृ क्षु साटूचसाकहाचइशम् । ऊ लो का कृ त्नुषुम द्राटाइ वोताहाटरीतश्राटयाखण्म् । ओपइ ळाशा ॥८॥
त न्ते म दषीङ्गृ णी म सीतीएत। वृ षा औकिहोखणं प्र क्षु सायीस हीशाम् । ऊ लो औकिहोखक कृ त्नु म द्रि वाःशु। हाकरोपबाप्लश्रा यांप्ला। हा इशा ॥९॥
ताणन्तेफप्ल्हो इ म दांखीगृ णी म सी एप्लु। वृ षा होटिणं प्र क्षु सायीसा हिंटा। ऊ लो क कृ त्नुषुम द्रि वो हायीरीटच्श्रीकया मौपाहो बाप्ला। होप्लइ ळाशा ॥१०॥
त न्दे म दांफीगृ णी म साकीइश। वा र्षा णं प्र क्षूकुसा साटाहींतहो वाटाहातइश। ऊ लो काटिकृतहो वाटाहातइश। त्नु मा द्राटिट्इ वाखाऔ हो वाशि। हाचरि श्री याटिख्म् ॥११॥
॥ त्रैतानिचत्वारि ॥
औचहोययौटहोखवाश। य त्सो म मीखीन्द्रा वी ष्णाकिवाफइश। औचहोययौटहोखवाश। य द्वा घ त्रीखीता या प्तीकियाफइश। औचहोययौटहोखवाश। य द्वा म रूखीत्सू म न्दकिसाफइश। औचहोययौटहोखवात्र। सा मि न्दुटिभीःख ॥१२॥
हा यो हा य त्सोषुम माता। न्द्राटट्वाखऔ हो वाशि। ष्णाखवेश। य द्वाटाघा त्रीकात आचाप्ती येकाय द्वा म रू त्सु माटूहो न्द साटिइश। स माटाहो येटान्दु भि रोखिइ ळाशा ॥१३॥
य त्सो म मि न्द्रषुवि ष्णातावातइश। य द्वा घ त्रीषीत आ प्ता याचीइश। य द्वा म रू त्सू मचून्दा सोपाहाणइश। साटट्माखऔ हो वाशि। एतन्दु भीःटाख ॥१४॥
य त्सो म माफीइ न्द्र वी ष्ण वाकुइश। । य द्वाटाघचत्री ताचाआ प्तेकाय द्वा माटिरूतत् । सू माटान्दाखसाणइश। सातट्माखऔ हो वाशि। न्दुखभिःप्ल ॥१५॥
॥ सराधसःप्रराधस्यश्चाङ्गिरसयोस्सामानित्रीणि ॥
ए दूफामा धोफार्म दाखाइ न्ताखारशम् । सिकञ्चा ध्व र्यो अ न्ध साटूधाखसाण। एकवा हि वी राषीस्त व ताटिइ वाखाताणइश। स दा वाखि। र्धाःत्र ॥१६॥
ए दु म धौ होपुर्म दि न्त राकीम् । सि ञ्चा होभिअ ध्व र्योटिअ न्धा साभि। आ इ वायिहि वीटाराचस्त व ताचिइश। स दाटाच्वृवृधा औटाहोखबाप्ल। होप्लइ ळाशा ॥१७॥
ए न्दु मिफिन्द्राफाय सीखाञ्च ताशा। पि बाटात सोचाम्य म्मा धूकिप्रा रा धांटिसीत। चो द य तायीमापहीश। त्वा ना औटिहोखबाप्ल। होप्लइ ळाशा ॥१८॥
॥ वैश्वमनसम् ॥
ए तो न्वि न्द्रं स्त वातूमात। सा खाकाच्य स्तोटाम्याखणफप्ल्। ना र मा कृ ष्टीषुयो र्वि श्वाचि। आ भि या स्त्याटीइ का ईटित् । आखऔ हो वाशि। ऊख ॥१९॥
॥ सौमित्राणित्रीणि ॥
इ न्द्रा य साती। मा गा य ताकिवा इ प्राचिया बृटाहा तेकाबृ हाचात्ब्र ह्मा कृ तेटीच्वीकपा श्चाटाट्इ ताखाऔ हो वाशि। पाचन स्य वेटिख् ॥२०॥
इ न्द्राखाय सा म गाप्लीयाङताश। वा इ प्राकिच्या बृटाह ताखाणफप्ल्इश। बृखहाशत् । ब्रथह्मा कृ तेटिच्वी पा श्चि तेटीओ इ पाटिट्नाखऔ हो वाशि। स्याखवेश ॥२१॥
औकहो औ हो औकीहोखवात्र। इ न्द्राटाच्याकसा म गाटियाकता वि प्राटिया बृचाहाकते बृकाहाशत् । ब्रथह्मा कृ तेटिवीचीपा श्चि तेटि। औकहो औ हो औकीहोखवात्र। एतपाचन स्य वेटिख् ॥२२॥
॥ त्रैककूभानित्रीणि ॥
याखएप्लकाखइ द्वी द याखीताणइश। वाचसु म र्क्ताटिहातया दाकाशूखषाणइश। आ इ शाकिनो अ प्रा ताटीहा इ ष्कृखिताःण। आ इ न्द्रोकिअ ङ्गाटाट्याखऔ हो वाशि। ईखन्द्राःप्ल ॥२३॥
य ए क इ दि हातूहातइश। वी द य ता इषुव सु माटिर्क्तातच्या दाचाशू षा इशि। ई शा नोभिआतप्राकति ष्कृ ताकिआ उ वाटि। ईखन्द्राःप्ल। अकङ्गा औटाहोखबाप्ल। होप्लइ ळाशा ॥२४॥
य ए क इषीद्वि द यातितातइश। वा सु म र्क्ता यापुदा हिंशा। शूतषातइश। आ इ शाकिनो अ प्र तीचीष्कृ ताःका। आ इ शा नोयीअ प्र ताचिइश। ष्कृतताःत। आ इ न्द्रोकिअ ङ्गाटाट्याखऔ हो वाशि। ईखन्द्राःप्ल ॥२५॥
॥ औक्षोरन्धराणित्रीणिऔक्षोनिधनानिवा ॥
स खा य यातीहातबुश। शि षाखाम हे हा बुशी। ब्र ह्माखाइ न्द्रा हा बुशी। या व ज्र णा स्तु त ऊ षुटॄहातइश। वो नृ त माटीहातच्याकधा र्ष्णाटाट्वाखऔ हो वाशि। ऊखपाश ॥२६॥
स खा य या शि षा म हे ब्रषेह्मे न्द्रा य व ज्रि णोतूवात। आ इ तिटिवातहो वाटाहातइश। स्तु ष ऊचिषुपवो होप्लाहाङइश। ना र्क्तामामातहो वाटाहातयाचधा र्ष्णाटाट्वाखऔ हो वाशि। ईख ॥२७॥
साफखा य याणिशि षा माफिहाखइशब्र ह्मे न्द्रा य व ज्रिप्लूणोटहाङइश। स्तु ष ऊचिषू वोकाना र्क्ता माकियाखधृप्लहातहाचइ वोकाना र्क्ता माकियाखधृप्लहातहाचइ ष्णा वाटिऔ होताऔ होतावातहाकथ्धृ ष्णा वाटिऔ होताऔ होतावातहातहाखऔ हो वाशि। उ ऊखापाश ॥२८॥
षष्ठ खण्डः (ऋ-१०, सा-१५)
॥ इन्द्राण्यास्सामनीद्वेइन्द्रस्यवासांवर्क्ते संवर्तस्यवाङ्गीरसस्य ॥
ए न्द्न नाःति। गकधि प्राटायाख। सा त्रा जि ताकीगो हाटायाखागि रा इ र्न्न वातिइश। श्वा ताः पातिर्त्थूः पाटाट्र्ताखऔ हो वाशि। र्दीखवाःप्ल ॥१॥
ए न्द्न नोफिग धि प्राणियाश। सा त्रा जि ताकीगो हायायौटहो वाताहातइश। गि रा इ र्न्न वौटीहो वाताहातइश। श्वा ताः पाटिर्त्थूःखऔ हो वाशि। पा ती र्दी वाःती ॥२॥
॥ दैवोदासानिचत्वारि ॥
य स्याताओपत्या च्छाताओंपब रप्लाम्मातदातइश। दि वोताओकदा साताओपय रप्लान्धातयातयाशन् । अ याताओंकस सोताओपमप्लइ न्द्रातातातइश। सु ताःताओःकपि बाताओपबाप्ल। ऊखपाश ॥३॥
य स्या त्य च्छांफीब र म्मा दाकीइश। दी वो दा साषीय र न्धा य न्ना यांकूच्साकसोखम इ न्द्रातितातइश। सूटताखऔ हो वाशि। पीखबाश ॥४॥
य स्या त्या च्छांखीब र म्मा दाप्लीइश। दी वोटाच्दाकसा य रषिन्ध य न्न यांकीच्साकसोखम इ न्द्रातितातइश। सु ताकाओः पाटाट्इ बाखाऔ हो वाशि। ईखतिश ॥५॥
याफस्या त्याप्लाच्छ द्धो इ शं ब राखूम्म दा एप्लि। दी वो दा साषीय र न्ध यचीन्न यां साभिसोखम इ न्द्रा ताखीऔ हो वाशि। सूखताःप्लपि बोखाइ ळाशा ॥६॥
॥ रेवञ्च ॥
हा बु गृ णातीइश। त दा इ न्द्रोखीताणइश। श वाटाओ वाकाउ पा माखिन्देण। वा ता त या इषुय द्धं साटिइ वाखात्र मो ज सा शा चीशू। पा ताटाऔटहो वा हाखिऔ हो वाशि। द्यूखभीःप्ल ॥७॥
॥ आक्षारञ्च ॥
गृ णे त दाखी। औ होखाइ न्द्र तेचिश वाःणा। उ पाचामा न्देथावा ताकाताटयाखइ य द्धांचिसि वातात्र मोकाज साचाशा चीचापाफ। ताखइश ॥८॥
॥ रेवञ्चैव ॥
गृ णे त दौ होफुइ न्द्र तेशिश वाःका। उ पाचामा न्देटाच्वा ताकाता य उ पाचीमाटन्देथच्वा ताकाताटयातइश। य द्धं सीकिवृ त्र मोटिज साकाउ वाता। शाखचीप्लपाखता इ होखिइ ळाशा ॥९॥
॥ आक्षारञ्चैव ॥
या इ न्द्र सोती। मा पाटाताखमाःण। मा द श्श वाषीइ ष्ठ चेकित ताचाइश। या इ नाटिहांखसीण। नी य त्रि णाकीन्ताचमीकमाफ। हाखइश ॥१०॥
॥ यामम् ॥
तु चे तु नाषीय ता त्सूखिनाःण। द्रा घीकाय आखायूःण। जी वाचासा आ दिटित्या साटास्स म्म ह साःटी। कृ णो ताखि। नात्र ॥११॥
॥ भारद्वाजस्यशुन्ध्यु ॥
वे त्था हिषिनि ॠ ती नांती। वा ज्र हा स्ताकीपा रीकाव्र जा माकिहा राकाहा शुकान्ध्युः पा रीकिप दाटामाख। इ वात्रा ॥१२॥
॥ आदित्यानाञ्चापामीवम् ॥
अ पा मी वा म पातू। स्री धा म प सेषुध ताकादु र्म्माटातीतम् । आ दीटात्या सोटाच्यूकयो त ना नाषीआ उ वाकिओपबांप्लहा सोप्ला। हाप्लइशा ॥१३॥
॥ वसिष्ठस्यचवैराजे ॥
पी बाता। सो म मि न्द्र मषुन्द तु त्वाटियकन्ते सु षा व ह र्याकूश्वाटद्रीःत। सोट तर्बा हु भीटियांतसू याटाट्ताखऔ हो वाशि। एतच्ना र्वाटाख् ॥१४॥
हा बु पि बाती। सो मा मि न्द्र मषुन्द तु त्वाकिद तु त्वाचियकन्ते सु षा व ह र्यायूश्वा द्रीटाश्वा द्रीःटा। सोकतु र्बा हु भ्यांकीसू य ताकिस्सू य तोकिनाटट्र्वाखऔ हो वाशि। ईख ॥१५॥
सप्तम खण्डः (ऋ-९, सा-१८)
॥ इन्द्रस्याभ्रातृव्यम् ॥
आ भ्रा तृ व्योफीअ ना तु वाकीम् । आ ना पि रा इ न्द्राकूच्जकनु षाSटास नाखाणफप्ल्। दाखसीशयू धेचादाकपि त्वा मि च्छ सेकुयु धाताच् ॥१॥
॥ शार्करेद्वे ॥
यो नोताहातबुश। ई दा मि द म्पू राटूहातबुश। प्रा वा प्र व स्य याटूहातइश। नी ना नी नाषीय त मु वोटीहातबुश। स्तु षा इषिस खा य याटीहातइश। न्द्रा मू ताटियाखण्इश। ओपइ ळाशा ॥२॥
यो नाणाफ्इ द मि दाखीम्पू राशा। यो न इ द मि दायूम्पूपराश। प्रा व स्य या नी नाकूय ताखामू वा स्तुकिषाफइश। नीचना य ताखिमू वा स्तूकिषा इफाइश। सा खा याटियाटइ न्द्र मू ताखी। यात्रइश ॥३॥
॥ बृहत्कम् ॥
आ ग न्ताति। मातच्रीकष ण्याटातात। प्र स्थाकावा नोकामा पाचास्था ताथासाचमायन्य वाःटा। द्र ढा श्चीभिद्यात। म यो वाप्लिष्णा वोप्ला। हा इशा ॥४॥
॥ सौयवसानिचत्वारिपुनरींळवातृतीयम् ॥
आ या हीति। आ य मि न्दषीवे श्व पाटितातइश। गो पा ताकिउ र्वाकारायपा तापाइ सो मातिम् । सो मा पाटिट्ताखऔ हो वाशि। पीखबाश ॥५॥
अ या हि याती। यातमा इ न्दापिवेश। आ श्व प तेकीगो प ताकिउ र्व राटिहा इ पाखिताणइश। सोपमं हाणाइश। सो म प तेटीहातइ पापाई बा एप्लिहि या हाशि। होप्लइ ळाश ॥६॥
आ या ह्य य मि न्दातूवातइश। अ श्वाचापायताटइ गो पा ताचीउ र्व राटिपाखताणइश। सो मं सो माकीओ पाकाता इ पी बाकीओपबाप्ल। ऊखपाशप्ल्ऊखपाण ॥७॥
त्व या ह स्वीतीत् । यू जा व यंकीप्रा तीयाश्वा साटान्तं वृकाषा भकाब्रू वीयामा हापाइ सं स्थातिइश। जा ना स्य गोपीबाप्ल। माखताःप्ल ॥८॥
॥ मरुताञ्चसंवेशीयंककूभंवा ॥
गा व श्चि त्घा सातुम न्य वाःति। स जा त्ये न मषुरू त स्स ब न्ध वाटूहोचइश। री ह तेकिका कुपाभोशमी था औटिहोखबाप्ल। होप्लइ ळाशा ॥९॥
॥ इन्द्रस्याभरेद्वे ॥
त्व न्न ईति। न्द्रा भाटारात। ओ जोचानृ म्णांथाश ता क्रा तोटीच्वीकच र्षाखाणाणइश। आकवी रां पृभिहातइश। ताटनाखऔ हो वाशि। साखहाशम् ॥१०॥
त्व न्न इ न्द्राती। आ भाटारात। ओ जोचानृ म्णांथाशा ता क्रा तोटीवी च र्षाखिणाणइश। आकवी रांटापातर्क्ता नाकाच्साकहा मौपाहो बाप्ल। होप्लइ ळाशा ॥११॥
॥ ऐषिराणित्रीणि ॥
अ था हि याती। न्द्रा गि र्वाटिणाःत। उ प त्वाकिकातच्मा ईकामाटहातइशसाकसृ ग्माटाहातइश। ऊ देकावा ग्माटान्ताःत। उ दापाभि रि ळा ह भीःप्लु। होप्लइ ळाशा ॥१२॥
अ धा ही न्द्र गि र्वातूणाःत। ऊ प त्वा काकीमा ईयामा हाटाइ साचासृयग्मा हाटाइश। ऊचदेयवा ग्माटाच्न्ताकओपबाप्लदा भोप्ला। हा इशा ॥१३॥
अ धा ही न्द्रषीगि र्व णातिएत। ऊ प त्वाचिकायमाटई मा हाटिइ साचासृ ग्माखाहाणइश। उ दौटाहोतइ वाटाहातग्माटन्ताखऔ हो वाशि। ऊ दचाभि रेटाख् ॥१४॥
॥ प्रजापतेस्सीदन्तीयेद्वे ॥
सापई द न्त स्ते व योप्लूयाङथाश। गोकश्रा इ स्तेकिम धोकाच्र्म्माकदि रो वापिई वाप्लाक्ष णाःता। आ भी त्वा माचीइ न्द्ना नोकिनूफमाःख ॥१५॥
सी द न्त स्ते व योफूय थातागोपश्री स्ते र्म धो र्म्माप्लीदि राःङा। वि वाताहातबुशक्षापणाःश। अ भीताहोतइशइ त्वापामाशइ न्द्न नोतिनूपमाशउ हु वा हाप्लीबु । बाश ॥१६॥
॥ पथस्यसौभरस्यसामनीद्वे ॥
वा याणाफ्मु त्वा मा पूखीर्वि याशा। स्थुकर न्न क श्ची त्भ राकूचता आकावायस्या वाःपा। व ज्रिं श्चि त्रांतीहापवाशमाप्खहोप्ला। हा इशा ॥१७॥
व य मु त्व म पू र्व्य स्थू र न्नषोक श्चि त्भ र न्त ओतूवात। हातहा अ वाचिस्यापवाःश। हातहा इ व ज्रिं श्चि त्राटूम् । हातहा इ ह वाचीमापहा उ हु वा हाप्लुबुश। बाश ॥१८॥
अष्टम खण्डः (ऋ-९, सा-१६)
॥ वसिष्ठस्याभरेद्वे ॥
वि श्व तोतिहातबुश। दाकवथन्वि श्व तोकिन याताहा ओखाहाण। आ भ राकिभाटरात। य न्त्वाटाश वीकाष्ठा माचाइश। मा हाटाऔ हो औ होखीवाश। ऐ ही ऐ हीतीच् ॥१॥
वि श्व तो दा वषुन्वि श्व तो न यातु। भ राकाभाटरात। य न्त्वाटाश वीकाष्ठा माचाइश। मा हा औटिहोखबाप्ल। होप्लइ ळाशा ॥२॥
॥ वासुमन्देद्वे ॥
ए षाःता। ब्र ह्माकाय याताआ उ वाटि। एतत्वि यातायाख। आटइ न्द्रातानाकम श्रू तातिआ उ वाटि। एतगृ णातायाख ॥३॥
ए षा ए षाःती। ब्र ह्माटाच्ब्र ह्माटाच्याकऋ त्वि या उ वाकूआ उ वाकि। आ इ न्द्रोटिआ इ न्द्रोटिनाकम श्रू ताकिउ वाकाआ उ वाकि। गृ णा औटिहोखबाप्ल। होप्लइ ळाशा ॥४॥
॥ कावर्षाणित्रीणि ॥
ए षा ओ वाती। ब्र ह्माकायाटऋ त्वि याःचि। आ इ न्द्रोटिहातइशनातमातश्रूपतोशगृ णा औटिहोखबाप्ल। होप्लइ ळाशा ॥५॥
ओटहाखओखहाण। एकष ब्र ह्मापियाशऋ त्वि याःखि। ओटहाखओखहाण। इकन्द्रो ना मापिश्रुशतो गृ णाखिइश। ओटहाखओखहाण। एतस्व र्व तेटिख् ॥६॥
एथष ब्र ह्मौ हो याकुऋ त्वि याःचि। इ न्द्रोथाना मौ हो श्रूकीतो गा र्णाकिआ उ वाटि। ऊखपाश ॥७॥
॥ प्रजापतेःश्योकानुश्योकानित्रीणि ॥
हा बु स्व र तातु। ब्र ह्मा णाटिओ वाकाइ न्द्र म्माकिह याटान्तोखर्कैःण। आ वाटाच्र्धा याचान्न ह ये हकीन्ता वाखाऊत्र। श्योखकाःप्ल ॥८॥
हा व भि स्व र तातू। ब्र ह्मा ण आ इ न्द्राटूचमाकह याटान्तोखर्कैःण। आ व र्धाचियाटन्न ह ये हकीन्ता वापाऊत्र। श्योतच्काकय ताःटाख् ॥९॥
हा बु स्व र तातु। स्वा राचात स्वा राटितात। आ ना व स्तेकीर थ म श्वाकीयाचतायक्षूपर्हा बु स्व र ताशु। स्वा राचात स्वा राटितात। त्व ष्टाकाव ज्रकाम्पु रु हूकिता द्यु मा न्तांपीहा बु स्व र ताशु। स्वा राचात स्वा राटिताखऔ हो वाशि। स्वा राचाताटख् ॥१०॥
॥ वाचस्सामनीद्वे ॥
औ हो इ शचीम्पाकदंफमा घं रा याकीओपई षी णातिइश। ना का म म व्र तोषूहि नो ति न स्पृ शाकूद्र यि मोखिइ ळाशा ॥११॥
सा दाता। गा व श्शु च योकुवि श्वा धा याटीसा स्साखादात्रन् । दा इ वाटिअ रोपाबाप्ल। पाखसाःप्ल ॥१२॥
॥ मरुताञ्चसाम् ॥
आ या हीति। व नाटासाचस हाशा। गा व स्स चकीन्ताचवायर्ता नीटाम् । या दूटाध भि रोखिइ ळाशा ॥१३॥
॥ वैश्वामित्रञ्च ॥
ओ वा उ प प्र क्षे म धु म तिषेक्षि य न्त ओतीवात। ओ वा इ पु ष्येषुम र इ न्धी म हेकूता आटाइ न्द्राता। ओ वा या उ वाकुओ वाटाच्हायउ वाटा। ऊखपाश ॥१४॥
॥ मारूतञ्चैव ॥
अ र्च न्ति याती। र्क म्म रू ताकीस्सू वाटार्काःत। आ स्तोटाभा ताचाइश। श्रूकतो यु वा स आकुइ न्द्राकाउ वाता। ऊखपाश ॥१५॥
॥ उद्वंशपुत्रञ्च ॥
प्र वाःताआ इ न्द्रा यषीवृ त्र हा न्त माटुयात। वि प्रा य गा था ङ्गायूयापताश। य ञ्जू जोकिउ वाकि। उ प षाटितोख। हात्रइश ॥१६॥
नवम खण्डः (ऋ-१३, सा-१७)
॥ धुरश्शम्येद्वे ॥
अ चे तीति। अ ग्नि श्ची काटीइ तीतार्हाटव्यातवाटट्ण्णाखऔ हो वाशि। सू मा द्राटिथाःख ॥१॥
अ चे ति याती। ग्ना इ श्चाषिइ का इ तीटीर्हौ हो औटिहोत। ह व्या वाटिट्ण्णाखऔ हो वाशि। एतच्सू मा द्राटिथाःख ॥२॥
॥ प्रजापतेर्गूर्दः ॥
ओतग्नातइश। त्व नोपायाशहि म्मा न्ताखिमाःप्ल। ऊ त त्रा ता शि वोकूभू वाःखा। शि वो भु वापीवा रोप्लाबा था योप्लि। हा इशा ॥३॥
॥ विश्वामित्रस्यचार्दः ॥
अ ग्नौ हो इ त्वौ होतूइश। न्नोतआ न्ता माकिआ उ वाटि। ऊखताशत्रा ता उ वोखीवाण। शि वो भू वाःटीख् ॥४॥
॥ प्रजापतेश्चैवगूर्दः ॥
अ ग्ने तू वाखीन्नो अ न्ता माःप्ली। ऊ त त्रा ताषीशि वो भु वोकीव रा बु हौकीहा होखाबाप्लथा योप्ला। हा इशा ॥५॥
॥ विश्वामित्रस्यचैवात्यर्दः ॥
अ ग्ने हो इ तू वाखून्नो अ न्ता माःप्लु। उ ताटाहो वाथाऔटच्होयइ त्रा ताटिशि वोखाणफप्ल्। भूखवाःप्ल ॥६॥
॥ प्रजापतेस्सन्तनीकेद्वे ॥
भा गाःता। ना चि त्रोषिअ ग्नि र्म होटीनातन्दाटट्धाखऔ हो वाशि। ती राटात्नाखम् ॥७॥
भ गो न चि त्राःतु। अ ग्नि र्म होटीनातन्दाटट्धाखऔ हो वाशि। एतच्ती राटात्नाखम् ॥८॥
॥ प्रजापतेर्धनधर्मेद्वे ॥
वि श्व स्याति। प्र स्तो भाकिपु रो वा साटीन्य दि वेति। हाकनू नाटाट्माखऔ हो वाशि। धाखनशम् ॥९॥
औ हो इ वि श्व स्यातू। प्र स्तो भाटिपु रौ हो वातीहातइश। वा साटाच्न्याकदि वेकाहा नू नाटिट्माखऔ हो वाशि। धाखर्माश ॥१०॥
॥ उषसश्चसाम ॥
उ षा अ पाती। स्वाकसु ष्टाखामाःण। सं वाटार्क्ताकय ति वाटिर्क्ताखनीणम् । सूटट्जाखऔ हो वाशि। एतताटताख ॥११॥
॥ वैश्वामित्रञ्च ॥
इ मा नू क म्भूतुव नाता। सीकष धाटाई माकाउ वाता। ईखहाश। इथन्द्रा श्च वा इकुउ वाता। ईखहाश। च देकावाटट्याखऔ हो वाशि। वीखशाःप्ल ॥१२॥
॥ भारद्वाजञ्च ॥
ऊ र्जाता। मि त्रो वा रू णः पिकून्वा त आटिइ ळाता। पि बा री मि ष ङ्कृषूणु ही न आ इ न्द्राखूउ वाता। ऊखपाश ॥१३॥
॥ इन्द्रस्यचरातिः ॥
वि स्रू वि स्रूती। ता याटास्ता याटाय थाकापा थाःचा। आ इ न्द्राटित्वा द्याटाच्न्तूकरोपबाप्लता योप्ला। हा इशा ॥१४॥
॥ भारद्वाजञ्चैव ॥
अ या वा जातीम् । दा इ वाकिच्ही तंचास नेखामाश। मा दे माकिश्शा ताचाहि म्माटाश्शाकता हाटाट्इ माखाऔ हो वाशि। सू वीकाराःटख् ॥१५॥
॥ इन्द्रस्यचवैराजे ॥
इ न्द्रोखावि श्व स्य राप्लीज तीशा। होखइ ळाशा ॥१६॥
इ न्द्रोटाच्होयइ वाटाइ श्वाचा। स्या राकाच्ज ती हो वाती। होखइ ळाशा ॥१७॥
दशम खण्डः (ऋ-११, सा-१६)
॥ प्रजापतेर्वाजसनी ॥
ओ ईचात्रीककाफद्रू का इ षूटीमा हि षोचिया वकाशीकरफन्तू वी शूकष्माःफओ इ त्रंखिपाणत् । सो मा म पी ब द्वीकूष्णू नाचासूकतंफया थाचावाकशंफओ इ साखिईणम् । म मा दचिमा हि ककिर्म्मा काचार्क्ताकवेफमा हा मूकिरूंफओ इ साखिइ नणाम् । स श्चा द्देटिवो देकावांचस त्य इ न्दू स्स त्याटूमिकन्द्राथबुश। बाख ॥१॥
॥ गौराङ्गीरसस्यसामनीद्वे ॥
अ यं स होतीहातइश। स्र मा नाखिवाःण। दृ शाः क वीकीना म्म ति र्जोकीति र्वी धाखिर्माश। ब्र ध्न स्स मा इ चीटूरू षाकास स्सा माचिइ रायायाटत् । अ राताओ वाका। पाखस स्स चेप्लित साःता। स्वा स रेकिम न्यू माटिन्ताःत। चि ता याखिऔ हो वाशि। गोःख ॥२॥
अ यं स ह स्रषुमा नातावाःत। दृ शाः क वीषीना म्म ति र्जोकीति र्वि धाटिर्मात। ब्र ध्न स्स मा इ चीटूरू षाचास स्सा माचिइ रायायाटत् । ओ वाकाअ रेटापाकस स्स चेकित स स्वा स रेकुम न्यु माटिन्ताःत। ओ वाकाचि ताकागोटट्राखऔ हो वाशि। वोख ॥३॥
॥ प्रयस्वच्चप्राजापत्यम् ॥
ए न्द्र या ह्यु प नाःतू। प राटावाखताःण। ना य म च्छाकीवी द था ना इ वाकूस त्पाखाताणइःश। अ स्ता राभिजेतवाकस त्पाखाताणइःश। हा वा म हे त्वाषुप्र य स्व न्ताःती। सू ता इ षूटीआकथ्पु त्रा सो नाकीपी त रं वा जा साकूताखयाणइश। मं हा इ ष्ठांभिवात। जापसाशताखयोप्ल। हा इशा ॥४॥
॥ अक्षय्यञ्चरेवत् ॥
त मि न्द्र न्जो ह वीषूमी मा घ वा नातुम् । ऊखग्रशम् । स त्रा हो इ द धाषूना म प्रा ताटीई ष्कृखातणम् । श्र वांटासाटइ भूखारिशम् । मं हि ष्ठो गी र्भिषुरा चा याटिज्ञाखयाःण। वा व र्क्ताकिराट। ये हो इ नोकीवि श्वा सु पाखीथाश। कृ णोतातूटवाखऔ हो वाशि। ऊखपाश ॥५॥
॥ सवितुश्चसाम ॥
अ भि त्य न्दे वं स वि ताषृर मौ हो औ हो वातूहातइश। ओ णापायोःणका वि क्रापितूणम् । औकहो औकाहो वापाहा इशाअ र्चा मीखिसाशत्या सा वांखिराण। त्ना धा मापिभीणप्री य म्मापितीणम् । औकहो औकाहो वापाहा बुशाऊ र्ध्वा याखिस्याणआ मा तीखिर्भाःण। आ दी द्यूपिताणत्सा वी मापिनीण। औकहो औकाहो वापाहा इशाही रा ण्याखिपाशणी रा मीखिमीण। ता सु क्राचितूःण। औ होकाऔ होपाहा उ वाशि। एतच्कृकपाटस्वाःख ॥६॥
॥ वाक्त्रतुरञ्च ॥
तापवशत्य न्नाप्लार्य न्नृ ताङिबुश। आ पा आ इ न्द्राटुच्प्राकथ म म्पूपिर्वी यंचादीकवीफप्र वा च्यचिकृकतफम् । यो दे वा स्याटीच्स्या शाकव सा प्रापिरी णाचायाकसूंफरी णाचान्नाकपाःफ। भू वो वि श्वा माटुभ्य दापाइ व मोचिजकसाफवी देचादूकर्जंफश ता क्राखिताणबुश। वि दा इ दि षाप्लुबुश। बाश ॥७॥
॥ ऐषञ्च ॥
अ स्तु श्रौतिषातट् । पू रो अ ग्निषीन्धी या द धेकीहो औकाहोतवात। अ नु त्य च्छ र्धोकुच्दिकव्यं वृ णाटिहा इ माखिहाणइश। इ न्द्रां वाभियूतवृ णीटामाखहाणइश। य द्धा क्रा णा वि वाटूस्वाखताणइश। नाकभा स न्दा या नाटुव्याखसाणइश। अ ध प्र नूषीन मु प य न्ती धीकूता योटाहो औकाहोतवात। दा इ वंटिअ च्छाटाहो औकाहोतवात। नाकधोपबाप्लता योप्ला। हा इशा ॥८॥
॥ यामम्मरूताञ्चसाम ॥
प्रापवो म हे म त योषूय न्तु वि ष्णाप्लीवोङहा इशा। म रू त्व तातीइ गि रि जाटीहातहा एथाव या माखिरूणत् । प्राचशायद्धा याटाप्राचयायज्या वाटाइशसू खाकादाखयाणइश। त वाकासे भथान्द दि ष्ट येकीधु ना इ व्राभीतात। याटट्शाखऔ हो वाशि। वाखसेश ॥९॥
॥ भारद्वाजस्यविषमाणित्रीणि इन्वकंवातृतीयम् ॥
आ याता। रू चा हा रि ण्याकुपु नाखानाःश। वि श्वा द्वे षांषीसि त र तीपीसा यु ग्वाकिभिःप्ल। सू रोकाना साटाट्यूखऔ हो वाशि। ग्वाखभिःप्ल ॥१०॥
आ याफारू चा हा रीखीण्याश। पु नाकानो वि श्वा द्वाटीइ षाताम् । सा इ त र त्यौकुहो वाताहातइश। सा यूटाग्वाखभीःण। सू रोटाना स यू ग्वाखी। भात्रइःश ॥११॥
अ या रू चाकीहा री ण्याथिपूपना नो वि श्वा द्वे षाशूम् । सा ईचाता राकाती साकायूयग्वा भीःटा। सू रोकाना साटायूखग्वा भि र्धा रा पृ ष्ठाशूस्या रोटाच्चाकताचइश। पु ना नो आटीरू षोकाहाखरि र्वि श्वा य द्रूशू। पाकप रि याकिसा या क्वायिभीःट। स प्ता सीभियेत। भापइ राशाक्वाखभोप्ल। हा इशा ॥१२॥
॥ पारूच्छेपेद्वे ॥
अ ग्निं हो ताती। रकम्म न्येथादा स्वकन्त मोतावात। वा सोकास्सूखनुणम् । स हाकासा जाथाताचवेयदा साटाम् । वि प्रा न्न जातीओतवातता वेटादाखसणम् । या ऊ र्ध्वा याचीसूकआ ध्वा राःभि। दे वो दे वातीओतवातची याचाकृखपाण। घृ तोताओतवात। स्या वि भ्राटिष्टि म नु शु क्र शातूओतवात। ची ष आ जु ह्वा नाटूस्य साताओतवात। र्पाटइ षाखाऔ हो वाशि। ऊखपाश ॥१३॥
अ ग्निं हो ता रंकुम न्येथादाचस्व न्तं व सो स्सू नुशूम् । स हाकासा जाथाताचवेयदा साटाम् । वि प्र न्न जाचीताचवेयदा साटाम् । या ऊ र्ध्व याचीसू आ ध्वा राःभी। दे वोकादे वाथाचाचयायकृ पाटा। घृ तातास्य बि भ्रा ष्टी मा नूचूशु क्राकाशोयचि षाःटा। आ जु ह्वाटिनात। स्यापसाशर्पाखइ षोप्ला। हा इशा ॥१४॥
॥ बार्हस्पत्येद्वेअग्नेर्वाराक्षोघ्ने ॥
अ हा वो हाखीवोप्लअ हा वो हाखीवोप्लअ हा वो हाखीवाःण। अ ग्नि ष्टा पा तीटुच्प्र ति द हाकीख्त्य ग्निं हो ताकीर म्माखान्ये दाचास्वकन्तफम् । वा सो स्सूकीनुं स ह साकीजाखता वेचादकसफम् । वि प्राचान्न जाखाता वेचादाकसफम् । या ऊचार्ध्व याखासू आचाध्वाकराःफ। दे वो देकवाखची याचाकृकपाफ। घृ ताकास्या बि भ्राकिष्टि म नु शूखीक्रा शोचाचीकषाःफ। आ जु ह्वाकिन्वाखस्या साचार्पीकषाःफ। अ हा वो हाखीवोप्लअ हा वो हाखीवोप्लअ हा वो हाखीवाःण। अ ग्नि ष्टा पा तीटुच्प्र ती द हाकीख्आ तात्राइश। एतवि श्वंकास म त्री ण न्द हाखू। एतवि श्वंकास म त्री ण न्द हाखू। एतवि श्वंकास म त्री ण न्द हाखू ॥१५॥
त्य ग्नाखाइःशप्र ति द हाफितीप्लहा बु होखिहा बुशा। अ ग्निं हो ताकीर म्माखान्ये दाचास्वकन्तफम् । वा सो स्सूकीनुं स ह साकीजाखता वेचादकसफम् । वि प्राचान्न जाखाता वेचादाकसफम् । या ऊचार्ध्व याखासू आचाध्वाकराःफ। दे वो देकवाखची याचाकृकपाफ। घृ ताकास्या बि भ्राकिष्टि म नु शूखीक्रा शोचाचीकषाःफ। आ जु ह्वाकिन्वाखस्या साचार्पीकषाःफ। त्य ग्नाखाइःशप्र ति द हाफितीप्लहा बु होखिहा उ वाशि। एतवि श्वंकास म त्री ण न्द हाकूख्। एतवि श्वंकावि य त्री ण न्द हाकूख्। एतवि श्वंकानि य त्री ण न्द हाकूख् ॥१६॥
पवमानपाठः
प्रथम खण्डः (ऋ-४३, सा-६९)
॥ आजीकञ्च ॥
उ च्चाता। ते जाथाताचमायन्धा साटा। दि वि स त्भू म्याषुद दाकाउ ग्रं शाटिर्म्मात। माटट्हाखऔ हो वाशि। उ प्श्राखावाःप्ल ॥१॥
॥ आभीकञ्च ॥
उ च्चा तेपिजाण। ता मा न्धापिसाण। दि वा इ सापीत्भूण। मि याचाद दाशाउ ग्रं शापिर्म्माण। मा हा इ श्राटीट्वाखऔ हो वाशि। वाखइश ॥२॥
॥ ऋषभश्पपवमानः ॥
हा हा उ च्चा ते जातू। हातहातइ त माटिन्धाखसाण। दि वि स त्भू मि यायूदापदेश। उ ग्रं शाखिर्म्माण। ओंचओंटम होखाबाप्लश्रा वोप्लाहा इशा ॥३॥
॥ आभीकञ्चैव ॥
ऊपच्चा ते जाशिप्ल्त मौ हो न्धाङीसाश। दि वि स त्भू मि यायूदापदेश। उ ग्रं शाखिर्म्माण। म हाटाउ वा इ श्राखीवोप्लहा इशा ॥४॥
॥ बाभ्रवेद्वे ॥
उ च्चा ते जाती। ता म न्धा साटीओ मो वाकि। दि वि स त्भूकुच्मि याकादायदेटओ मो वाकि। उ ग्रांचाशायर्म्माटओ मो वाकि। माटट्हाखऔ हो वाशि। श्र वाताईटख् ॥५॥
उ च्चा ते जाती। ता म न्धाटिसात। दि वि स त्भूकीमी या दाटिदातइश। ऊ ग्रांटाहातइ श र्म्मोटिहातइश। म हाकाहो इ श्राटिट्वाखऔ हो वाशि। ग्वाखभीःप्ल ॥६॥
॥ इन्द्राण्यास्साम ॥
उ च्चा ते जा त मातू। न्धा साटाओ मो वाकि। दि वि स त्भूकुमि याकादायदेटओ मो वाकि। उ ग्रंचाश कयर्म्माटओ मो वाकि। म हा इ श्राटीट्वाखऔ हो वाशि। उ ऊखापाश ॥७॥
॥ शैशवेद्वे ॥
उ च्चा ते जाषीत म न्धातिसात। दि वि स त्भू म्याषुद दाकाउ ग्रं शापिर्म्माण। म हा इ श्राखीवात्र ॥८॥
उ च्चा ते जाषीत म न्धातिसात। दि वि स त्भू म्याटुदा दाथाउ ग्रं शाटिर्म्मात। म हाटाहो वाथाऔटच्होयइ श्र वाटिहो वाथा। औटच्होयइ याटाच्होकइ योखावात्र। ऊख ॥९॥
॥ प्रजापतेदोर्होदोहीयेद्वे ॥
उ च्चाखाऔ होता। ते जाटात माखाणफप्ल्। न्धाखसाश। दि वि स त्भू म्याषुद देकाआथउ ग्रं शाटिर्म्मात। मा हीचाश्रा वाकाऔटहोखबाप्ल। होप्लइ ळाशा ॥१०॥
उ च्चा ते जाषीत म न्ध सा दोतुहा इ दोतिहातएत। दि वि स त्भू म्याषुद देकादोटहातइ दोटाहातएत। उ ग्रं शाटिर्म्मातदोटहातइ दोटाहातएत। मा हि श्राटिवाःखण्। ओपइ ळाशा ॥११॥
॥ इन्द्राण्याश्चैवसाम ॥
उ च्चाणाते जाणाफ्त माखान्धा साशा। दी वा इ सापीत्भूणम्याटद दाटाओटवातओटवातउ व उ वाटीहोचइश। उ ग्रं शाटिर्म्मातओटवातओटवातउ व उ वाटीहोचइश। मा हीचाश्रा वोटाट्याखऔ हो वाशि। य यु रेखि ॥१२॥
॥ आमहीयवञ्च ॥
उ च्चा ताखिइ जा त म न्ध साशू। दी वाचाइ सायात्भूटमि याटाद दाताइश। उ ग्रंचाशकर्म्माच। माकहाटइ श्र वाकिउ वाखा। स्तौतषेख ॥१३॥
॥ आजीकञ्च ॥
स्वा दा इ ष्ठा याकुमा दा इ ष्ठा याकु। पा वा स्व सोकीमा धा राटियात। इ न्द्रा या पाकी। ता वा इ सूटीताःखण्। ओपइ ळाशा ॥१४॥
॥ सूरूपेद्वे ॥
स्वाथदि ष्ठ याटिइ याटाइ या म दिकीष्ठा याटा। पाचवा स्व सोटिइ याटाइ या म धाकीरा याटा। इ न्द्राथाय पाटाइ याटाइ याचा। ता वा इ सूटीताःखण्। ओपइ ळाप्ला ॥१५॥
स्वाथदि ष्ठ यौ हो वाकुइ याकाम दि ष्ठा याटी। पाचव स्व सौ हो वाकुइ या म धाकीरा याटा। इ न्द्राचाय पौ हो वाकीइ याचा। ता वा इ सूटीताःखण्। ओपइ ळाशा ॥१६॥
॥ जमदग्नेश्शिल्पेद्वे ॥
ओ इ स्वाखिदीण। ष्ठ याकामा दिथाष्ठा याटाउ वोखावाश। पा वा स्व सोकीच्मा धाकारा याटाओ ईखान्द्राश। याटपाखऔ हो वाशि। त वे सु ताःतीच् ॥१७॥
उ हु वा इ स्वाखुदीण। ष्ठ याकामा दीयाष्ठा याटाऔ होखावाश। पा वा स्व सोकीमा धाचार याखाउ हु वा इ न्द्रा या पाशृ। ताटट्वाखऔ हो वाशि। सूखताःप्ल ॥१८॥
॥ संहितञ्च ॥
स्वा दाताइ ष्ठा यातिम दि ष्ठा याती। पा वाटास्वाखसोशम धा र याती। आकइ न्द्राखाया पा हा बुशीत वाप्लाइ सु ताप्लिबुश। बाश ॥१९॥
॥ वसिष्ठस्यशकूनः ॥
स्वा दि ष्ठ या म दि ष्ठ या प व स्व सोषौम धा र या इ न्द्रातूय पाता। ता वाटाऊटताचवाकऊटत वा उ वाखीऔ हो वाशि। सूखताःप्ल ॥२०॥
॥ जमदग्नेश्चगम्भीरम् ॥
औ हो हिं भा एकुहि याताहातहातइश। स्वा दा इ ष्ठ याकुमाखदीशओ इ माखिदीण। औ हो हिं भा एकुहि याताहातहातइश। ष्ठाकया प वाकिस्वाखसोशओ स्वाखासोण। औ हो हिं भा एकुहि याताहातहातइश। माकधा र याकिईखन्द्राशओ ईखान्द्राण। औ हो हिं भा एकुहि याताहातहातइश। याकपा त वाकिइ सूखाताशओ इ सूखिताःण। औ हो हिं भा एकुहि याताहातहाखऔ हो वाशि। ईख ॥२१॥
॥ संहितञ्चैव ॥
स्वा दि ष्ठ या म दातूइ ष्ठ याति। पा वाटास्वाटसोतम धाटाराचयाश। आटइ न्द्रातायाटपा त वाटिहा उ वाति। सूखताःप्ल ॥२२॥
॥ सोमसामनीद्वे ॥
वृ षा प वाती। स्व धाकारा याटाच्माकरूटत्वा ता इ चा म त्साटूराःत। वा इ श्वा दाटीट्धाखऔ हो वाशि। ना ओ जाटिसाख ॥२३॥
वृ षाताहातबुश। पाखवाशस्वा धा राखियाण। माखरूप्लत्वाखताशइ चा म त्साखीराःण। वा इ श्वाकिच्द धाकानाटट्ओखऔ हो वाशि। जाखसाश ॥२४॥
॥ आशुभार्गवंतृतीयम् ॥
वृ षा प व स्वषुधा रातायात। मा रु त्वा ताटीइ चाचाम त्साखाराःण। वि श्वाचादायधाटन ओताजापसोप्ल। हा इशा ॥२५॥
॥ वैश्वदेवेद्वे ॥
आ इ वृ षाती। पा वा ईटिच्हायऔटहोथस्वा धा राटियात। मा रू त्व तेटीहातइशचा माचात्सायरापहा इ वि श्वा द धा हा बु न ओ ज सा हा बुशौ। ओ वाणाफ्ओखवा ओ वाशि। अ स्मे रा याकीऊ ताटाश्र वाःखा ॥२६॥
वृ षा पा व एखुहि याणा। स्व धाटारा याखाऔकहो वाशा। मा रूपाऔकहो वाथा। त्वा ते चा मायीत्सापराःश। औटच्होययेटऔ होखावात्र। वि श्वाचाद धाकाच्नाकओ जाटासाख ॥२७॥
॥ इन्द्रसामनीद्वे ॥
वृ षा पा वाटीहौ हो औटिहोत। स्वा धा रा याटीहौ हो औटिहोत। मा रू त्वा तेटीहौ हो औटिहोतचा मा त्सा राटीहौ हो औटिहोत। वि श्वा दा धाटीहौ हो औटिहोत। ना ओ जा साटीहौ हो औटिहोखण्। ओपइ ळाशा ॥२८॥
वृ षा पा वाटीऔ हो औ होखीवाश। स्वा धा रा याटीऔ हो औ होखीवाश। मा रू त्वा ताटीऔ हो औ होखीवाश। चा मा त्सा राटीऔ हो औ होखीवाश। वि श्वा दा धाटीऔ हो औ होखीवाश। ना ओ जा साटीऔ हो औ होचीबाप्ल। होप्लइ ळाशा ॥२९॥
॥ यौक्ताश्वेद्वे ॥
औ होताहोतहा इ वृ षाती। पाकव स्व धा रा याटुमाचरूकत्वाखताणइश। ओ इ चा माटिचाकम त्साखाराःण। औ होताहोतहा इ वि श्वाती। द धाटानाखओशजा साखाऔ हो वाशि। ओ इ ज्व राखी ॥३०॥
वृ षा बु होतीहोतहातइश। पाकव स्व धा रा याटुमा रूटात्वाखताणइश। च माताच्ओ चाकाम त्साखाराःण। वि श्वा बु होतीहोतहातइश। द धाटानाखओशजाटसाखऔ हो वाशि। ओ इ जूखिवाश ॥३१॥
॥ भासञ्च ॥
य स्ताताइश। मा दो वा राटीउ वोखावाश। णीखया स्ता इ नाशी। पा वा स्वा आटीउ वोखावाश। न्धाखसा दा इ वाशी। वा इ रा घ शाटुउ वोखावाश। साखहाश ॥३२॥
॥ सोमसामच ॥
य स्ते म दाःती। व राताइ णी यातिस्ता इ ना पा वाटुस्वा आतान्ध साता। दा इ वा वाकीइ राखाहा बुशा। घ शांप्लास हाशा। होप्लइ ळाशा ॥३३॥
॥ प्रजापतेश्चसहोरयिष्ठीयम् ॥
य स्ताताओ इ माखिदाःण। वा रा इ णा याटुउ वोखावाशहा उ वोखिवाशहातइश। ता इ ना पाकीवा स्वाकाआ न्धा साटिउ वोखावाशहा उ वोखिवाशहातइश। दा इ वा वा इ राटुउ वोखावाशहा उ वोखिवाशहातइश। घाटट्शाखऔ हो वाशि। स होताराचयि ष्ठाःटाख् ॥३४॥
॥ मादिलम् ॥
य स्ते मा दोखीवाशइ याप्ला। रा इ णायियाःट। ता इ नाकिपा वाकास्वा औटाहोकवा हाथान्धा साटा। दा इ वाचिवाटइ राखाऔ हो वाशि। घ शं स हातीच् ॥३५॥
॥ सोमसामचैव ॥
य स्ता इ मापीदो व रे णी याःशु। ता इ ना पाकीवाचस्वा आकान्धायसाट। दा इ वाटिवा इ राटिघाकशोपबांप्लसा होप्ला। हा इशा ॥३६॥
॥ प्रजपतेश्चैवसहोरयिष्ठीयंसोमसामवा ॥
य स्ते म दो व रे णि यातूएत। तेकना प वषिस्वा न्ध सा देकीवा वी रापिहाणइश। घा शाकाउ वाकासा हाकाउ वाका। उ ऊखापाश ॥३७॥
॥ वैष्टम्भेद्वे ॥
ति स्रो वा चाःती। उ दाचाउ दाताआ उ वा एभी। राखते गा वो मि माशु। ती धाकाइ ति धातिआ उ वा एभी। नाखवो ह रि रे तिशुक नाचाइ क नातिआ उ वाट। क्राखदाशत् ॥३८॥
ति स्रो वा चाःती। उ दा इ रापीतेश। गा वो मि मा न्ति धायूइ नापावाःश। हा रि रे त्योखीहाणइश। काटटनाखऔ हो वाशि। क्राखदाशत् ॥३९॥
॥ पाष्ठौहेद्वे ॥
ति स्रोथावा चोप्लाहाचउ दीकारा ताचाइश। गा वोथामि माप्लाहाचन्ती धेकान वोकाह रशारा इ तोपिहाणइश। का ना इ क्राटीटदाखऔ हो वाशि। अ स्मा भ्यकिङ्गाततु वि क्त माखीम् ॥४०॥
ति स्रो वा चाषीउ दी र तो वातुहातइश। गा वो मि मातीन्ती धेकानाखवो ह रि रे तिशु। काटट्नाखऔ हो वाशि। क्राखदाशत् ॥४१॥
॥ वैष्टम्भञ्चैव ॥
ति स्रोणवा चाणाफ्उ दीखार ता इशि। गा वो मि माकीच्न्ती धाकाइ नायावाटहो वाटाहातइश। हा राचाइ रायाइ तीटाहो वाटाहातइश। का ना इ क्राटीट्दाखऔ हो वाश। दीखशाःप्ला ॥४२॥
॥ पाष्ठौहञ्चैव ॥
ति स्रो वा चाफीउ दी र ताकीइश। गाकवो मि मकिन्ती धे न वोषीह रि राटिइ तीता। का नौटाच्हू वाकाएटहो वाका। क्राटट्दाखऔ हो वाशि। हातओ वाटाओ वाटाख् ॥४३॥
॥ इषोवृधीयञ्च ॥
इ न्द्रा ये न्दातीबुश। मा रूकात्व ताकाइ पा व स्व माटुधु म क्त माःची। आथर्का स्या योटिच्नी मा साटिट्दाखऔ हो वाशि। इ षो वृ धेटीच् ॥४४॥
॥ इन्द्रसाम ॥
आखइ न्द्राशाप्ल्याखइ न्दोणा। मा रू त्वाकिताखइश। पाखवाशप्ल्स्वाखमाण। धू मा क्ताकिमाःख। आखर्काशप्ल्स्याखयोण। नी मा साकिदाःख ॥४५॥
॥ वैश्वदेवेच ॥
इ न्द्राकाये न्दोकाहो औकहोतवात। मा रू त्व तेकहो औकहोतवात। पाचवा स्व माटिहो औकाहोतवात। धूचम क्त माटिहो औकाहोतवात। आथर्का स्या योटिहो औकाहोतवात। नि माकास दाटाहो औकाहोतवाखण्। ओपइ ळाशा ॥४६॥
इ न्द्रा ये न्दो एतुम रूता। त्वा ता इषाप वा स्व म धूकुम क्ताटामातच्हू वाकएटहोतवात। आ र्का स्याटियोतच्हू वाकएटहोतवात। नी मा साटिदाःखण्। ओपइ ळाशा ॥४७॥
॥ इन्द्रसामचैव ॥
इ न्द्रा ये न्दोषीम रू त्व त ओतुहातइश। प वा स्वाकिम धु म क्त माकुओटहाखओखहाण। आ र्काथास्या योटा। नाटइ माखाऔ हो वाशि। उ प्साखादाःप्ल ॥४८॥
॥ आग्नेयानित्रीणि ॥
इ न्द्रा ये न्दोतीहातबुश। मा रू त्व तेटीहातबुश। पा वा स्व माकीहातबुश। धू मा क्त माटीहातबुश। आ र्का स्य योटीहातबुश। नि माटाहोखबाप्लसा दोप्ला। हा इशा ॥४९॥
इ न्द्रा ये न्दोतीवा ओतावात। मा रूकात्व ता उ वाकीआ उ वाकि। पा वाकास्व मा उ वाकीआ उ वाकि। धू माकाक्त मा उ वाकीआ उ वाखिअ र्का हा बु स्य यो हा बुशृ। नी मा उ वाकीहोपबाप्लसा दोप्ला। हा इशा ॥५०॥
इ न्द्रा ये न्दोषीम रू त्वातितातइश। प वा स्व मकीधूशमाचक्तायमापअ र्क स्य यो नि मा हा बुशृ। सा दोप्ला। हा इशा ॥५१॥
॥ आश्वानिचत्वारि ॥
आ साता। व्यंकशु र्म्माताआ उ वाटि। दाखया प्सु दा क्षाःशी। गि राताआ उ वा एभी। ष्ठाःख। श्ये नोकानाटयोत। नि माताआ उ वाटि। साखदाशत् ॥५२॥
अ सा वि याती। शु र्म दाटिच्याकप्सु द क्षोषिगा इ रि ष्ठाःकी। श्या इ नोयिना योटाच्नीकमोपबाप्लसा दाप्लात् । हा इशा ॥५३॥
अ साफाव्या उ वोखिवाश। शुकर्म्म दा याटिउ वोखावाश। आ प्साटाउ वोखावाश। द क्षो गि रा इ ष्ठाटूउ वोखावाश। श्येकनो न यो नि मा साटू। दाखत् ॥५४॥
अ साफाव्यौ वा उ वोखीवाश। शुकर्म दा यौकिवा उ वोखिवाश। आ प्सूफाद क्षौ वा उ वोखुवाश। गी रा इ ष्ठौकीवा उ वोखिवाश। श्ये नोफान यौ वा उ वोखुवाश। नी मा सा दौकीवा उ वोखिबाप्ल। होप्लइ ळाशा ॥५५॥
॥ च्यावनानिचत्वारि ॥
अ सा व्यु हु वातुहातइश। अंकशु र्म दा या प्सु द क्षोषृगि रि ष्ठा उ हु वाटूहोचइश। श्याकइ नोतानाटयोखऔ हो वाशि। नी मा साटिदाचत् ॥५६॥
अ सा व्यं शुषीरौ हो वातिहातइश। म दाटाच्या प्सु द क्षोषीगि रि ष्ठाःकि। श्या इ नोयिना योटा। नाटइ माखाऔ हो वाशि। उ प्साखादाशत् ॥५७॥
इ हाताओ वापाइ हा अ सा व्यंषुशु र्म दा ये हाशु। आ प्सु द क्षो गि रिकूष्ठाःखणफप्ल्। ईखहाश। श्येकनो न योटिनि माखाणफप्ल्। ईखहाश। आटस दाखाणफप्ल्त् । ईखहाश ॥५८॥
अ साखाव्यं शुप्लार्म दाखाया हा बुशि। आ प्सु दाखिक्षाःण। गि रा इ ष्ठोपीहाणइश। श्या इ नो नाभीयोत। ना इ माटिहाखण्इश। सापदाप्लत् । हा इशा ॥५९॥
॥ प्राजापत्येद्वे ॥
प वा स्वाफिदौ होफाऔ होफावातहातइश। क्षा साथाच्धाकनाटऔ होताऔ होतावातहातइश। देकवेथभ्यः पा इ त येकुच्हाकराटऔ होताऔ होतावातहातइश। मा रू त्भ्योचिवाटऔ होताऔ होतावातहातइश। याटट्वाखऔ हो वाशि। माखदाःप्ल ॥६०॥
प व स्व द क्षषूसा ध न ओतीवात। देकवे भ्यः पी त याटुहो इ ह राटीइश। मा रू त्भ्योचिवाटऊपय वोप्लाबा मा दोप्लि। हा इशा ॥६१॥
॥ वैदन्वतानिचत्वारि ऋषभोवावैदन्वतश्चतुर्थः ॥
पा रीतास्वा नो गी रि ष्ठाःचु। प वाटाइ त्रेखासोकमोथअ क्षा राटित् । म दा इ षूकीसा ईटायातर्वाकधोपबाप्लआ सोप्ला। हा इशा ॥६२॥
प र्ये पा रीती। स्वा नो गि रि ष्ठाःचुप वाटाइ त्रेखासोकमोथअ क्षा राटित् । म दा इ षू साटुहातर्वाटट्धाखऔ हो वाशि। एतआ सीटाख् ॥६३॥
पा रीफास्वा नोफागाखइ रि ष्ठाःशि। पा विचात्रेकसो मोकाअ क्षा राकित्पा वि त्रेकिसो मोटाअ क्षाखाराणत् । ओ इ म दौकीवाखओखवा षु वाशि। साथर्वा धा य सा इ माटूट्दाखऔ हो वाशि। एतच्षु साकार्वा धा याटिसीख ॥६४॥
औटहो इ हाचिहाकच्हा होकायौटहोखवाश। प रा इ स्वाखीनोशगी राखाइ ष्ठाःणा। प वा इ त्रेखीसोशमो अ क्षाखिराणत् । म दा इ षूखीसाशर्वा धा याखिसीण। औटहो इ हाचिहाकच्हा होकायौटहोखवात्र। एतऊ पाटाख ॥६५॥
॥ रजेराङ्गीरसस्यपदस्तोभौद्वौ ॥
प र्ये स्वा नाःती। गाटइ रि ष्ठाःचिइ याटाच्हा हाथाउ वाटाहोचइश। पा वि त्रेकिसो मोटाअ क्षा राचित् इ याटाच्हा हाथाउ वाटाहोचइश। म दाटाइ षूकासाच। हा हाथाउ वाटाहोटर्वाकधोपबा आ सोप्लि। हा इशा ॥६६॥
प यौ हो वा हा इषूस्वा नाःता। गाटइ रि ष्ठाःचि। इ याटाच्ओखहाशप्ल्हातइश। हा हाथाओ वाकाओ वाका। पा वि त्रेकिसो मोटाअ क्षा राचित् । ओखहाशप्ल्हातइश। हा हाथाओ वाकाओ वाका। म दाटाइ षूकासाच। ओखहाशप्ल्हातइश। हा हाथाओ वाकाओ वाकार्वाकधोपबा आ सोप्लि। हा इशा ॥६७॥
॥ और्णायवेद्वे ॥
प रि प्रि याषीदि वः का वीःती। वा यां सि न प्त्योषुर्हि ता स्वाकिनै र्याटातीत। आ याकाउ वा इ याशीईटयात। का वीःचाक्रा तोटाट्याखऔ हो वाशि। ईख ॥६८॥
प रि प्रि याफीदि वःशाक वाकाइःश। व याटाच्हाकउ वां सिकिन प्त्यो वा र्हीकीताःच। स्वाकनै र्याटातीत। हु वाकाहो वाकाहो वाकाहु वाटाईटयात। का वीःचाक्रा तोटाट्याखऔ हो वाशि। ईतयाटख्म् ॥६९॥
द्वितीय खण्डः (ऋ-८, सा-१९)
॥ सौभरेद्वे ॥
प्र सो माखिसाःण। म द च्यूचिता औटाहोतवातइ श्र वाटिसाखइ नाःणा। ओ इ म घो नाटुम् । सू ता वाटिट्इ दाखाऔ हो वाशि। थे अ क्र मूःखी ॥१॥
प्र सो मा साःती। वा इ पा श्चीकीताशआचपोयना याटान्ता ऊ र्म योकीवाचनायनि माटाओ औकाहोत। हि षा ईचिवा इ ळाटिभाखण्। ओपइ ळाशा ॥२॥
॥ इन्द्रस्यवृषकाणित्रिणि ॥
प व स्वे न्दोफीवृ षाशासु ताःका। कृ धी नो य श सोषुज ना एपिवा इ श्वा या पाशु। द्वाटइ षाखाऔ हो वाशि। जाखहिश ॥३॥
वृ षा हि याती। सि भा नूभिनात। द्यु म न्त त्वा ह वायूमा हापाइ पा वाति। मा ना सु वोटीओपबाश। दृखशशम् ॥४॥
वृ षा हि याफीसि भा नु नाकी। द्यु म न्त न्त्वाटीह वा म हेकीहो वाकाऔटहो वाका। पा व माटिनाचसु व दृ शंटीहो वाकाऔटहो वाका। हू वोखाइ ळाप्ला ॥५॥
॥ बभ्रोःकुम्भस्यसामानित्रीणि ॥
इ न्दूखारौ हो वा हा इ पा वीशृ। ष्ट चाटाई त नोखिहाणइश। हाकहो एटाहोटवात। प्री याः क वीकीना म्म ति रोपीहाणइश। हाकहो एटाहोटवात। सृ जाटाद श्वांखाहाणइश। हाकहो एटाहोटवात। राटथाखऔ हो वाशि। ईखवाश ॥६॥
इ न्दुः प वि ष्ट चेषूत नः प्रि यः क वातूइश। हिंटहि न्ना म्माखितीःण। सृ ज दापिश्वाशम् । हिंटहिंतराटट्थाखऔ हो वाशि। ईखवाश ॥७॥
इ न्दुः प वि ष्ट चे त नः प्रि यः क विषोना म्म तिं सृ जातुद श्वांता। ओ वाकाओ वाकाराटट्थाखऔ हो वाशि। ईखवाश ॥८॥
॥ बभ्रोःकार्तवेशानित्रीणि ॥
अ सृ क्षा ताखीप्राशवा जी नाःप्लि। ग व्याटासो माटासोतआ श्व याचि। शु क्राटासो वीटार याकाच्शाकव ओपाइ ळाशा ॥९॥
अ सृ क्ष ता प्रातुवा जी नाःति। ग व्या सो मा सोषुआ श्व याटिहोचइश। शु क्रातासो वाटाहोचइश। राकया शाटाट्वाखऔ हो वाशि। ग्वाखभीःश ॥१०॥
अ सृ क्ष तषीप्र वा जि न एखुग व्या सो माशी। सोतआ श्वापायाश। शु क्राटासोखवीण। राकयोपबाप्लशा वोप्ला। हा इशा ॥११॥
॥ शार्म्मदे द्वे ॥
पा वा स्वा देती। व यातावाटयाखऔ हो वाशि। यूखषा गा इ न्द्र ङ्ग च्छाशू। तु ताताइ तुटाताखऔ हो वाशि। माखदाःप्ल। वा यूंटाच्होयआटरोत। ह धाताहाटधाखऔ हो वाशि। र्म्माखणाश ॥१२॥
प व स्व दे वाफुऐ हि ऐ हीखीयाश। आ यु षा गैटीही ऐटाहीटयात। इ न्द्र ङ्ग च्छषीन्तु ते म दा ऐटुही ऐटाहीटयात। वा यू मा रोकीओ हाकाधोपबाप्लर्म्मा णोप्ला। हा इशा ॥१३॥
॥ वसिष्ठस्यजनित्रेद्वे ॥
पा वाता। मा नो अ जीकीजाखनाणत् । दी वाचाश्चि त्राचान्न्य ता न्य तूशीम् । ज्यो ती र्वैकिश्वा नाटाराखऔ हो वाशि। बृखहाशत् ॥१४॥
प व मा नाःती। अ जा इ जापीनाशत् । दी वाचाश्चि त्रांटाहातहातइशना तकान्याखतूणम् । ज्योखतीशर्वाखइ श्वाणा। न रोप्लाबा बृ हाप्लित् । हा इशा ॥१५॥
॥ मरूताम्प्रकीळास्त्रयःसङ्क्रीळावानिक्रिळावा ॥
पा रीता। स्वा ना स इ न्द वोषूम दा याचिब र्ह णाटिगि राखाम धोखाअ र्षाताम् । तीकधोपबाप्लरा योप्ला। हा इशा ॥१६॥
प र्ये पा रीती। स्वा ना स इ न्द वाषूउ वाटाहा उ वाटिहोकवाथइ याचा। म दा य ब र्ह णाषूगि रा उ वाटीहा उ वाटिहोकवाथइ याचा। मा धो अ र्ष न्तिषुधा र या उ वाटुहा उ वाटिहोकवाथइ योटाट्याखऔ हो वाशि। ऊखपाश ॥१७॥
पा रीफास्वा नाणाफ्साखइ न्द वाःशि। म दाटायाचब र्ह णाचिगीकरा म धो आटीर्षातन् । ऊ र्म्मि रि वाटीईटयात। ति धाकाच्राकया औटाहोखबाप्ल। होप्लइ ळाशा ॥१८॥
॥ औशनम् ॥
प रि प्रा सीती। ष्या द त्काचिवीःट। सि न्धो रू र्म्मा वा धीयूश्री ताःटा। का रू म्बाटिट्इ भ्राखाऔ हो वाशि। पू रूतास्पृ हाटाख्म् ॥१९॥
तृतीय खण्डः (ऋ-१०, सा-१६)
॥ यामानित्रीणि ॥
इ हाटाच्इकहाशउ पो षु जा त माटूच्प्तूकराचमि हाशा। इ हाटाच्इकहाशगो भि र्भ ङ्ग म्प राटूच्इ ष्कृकाताचमि हाशा। इ हाटाच्इकहाशइ न्दु न्दे वा अ याटूच्सीकषूःचइकहाश ॥१॥
आषउ पो षु जा त माटूच्प्तुकराचमु पाशा। गो भाटाइ र्होकाच्इश। भ ङ्ग म्प राटीइ ष्कृ ताचिमु पाशा। इ न्दुंटाच्होकइश। दे वा अ याटीसि षु रातिआ उ वाटि। उ ऊखापाश ॥२॥
उ पो ष्वौ हो इषुजा ताताम् । आ प्तूटारातमौ होटावातइ गोचाभि र्भाखागणम् । ओ इ पा रीयीष्कृ ताटाम् । इ न्दूटान्दे वाखाऔ हो वाशि। अ या सि षूःखी ॥३॥
॥ अङ्कतेवैररूपस्यसाम ॥
पु ना नो याती। क्रा मी दाखिभीःण। वि श्वाटामाखर्द्धोशवी च र्षाखिणाणइःश। शु म्भाटान्ताखवीण। प्राटट्न्धाखऔ हो वाशि। तीखभीःप्ल ॥४॥
॥ औशनेच ॥
आ वि श न्का लातुशं सु ताःति। वा इ श्वाकिअकर्षथन्नाकभा इ श्रा याटीओटहातओ वाटाओखहाण। इ न्दू राटिट्इ न्द्राखाऔ हो वाशिय धी य तेखी ॥५॥
आ वीफाश ङ्काफाल शंफाप्ल्सु तो वाखिइ श्वाणा। अ र्षथाच्न्नाकभा इ श्रा याटीऔ हो औ होखीवाश। औटहो औ होतिच्इ न्दूकारायइ न्द्राटा। या धी याटिट्ताखऔ हो वाशि। ऊखपाश ॥६॥
॥ सोमसामच ॥
अ स र्जि राती। थि यो यापिथाश। पा वि त्रेचिचा मु वोटिस्सूखताःण। काकर्ष्म न्न्वाटाजीत। नि याचाक्राकमा इ दौपिहो बाप्ला। होप्लइ ळाशा ॥७॥
॥ कार्ष्णेच ॥
प्र य द्धातिबुश। गा वोथाच्ना भूकार्णाययापस्त्वे षाता। अ या सो अ क्राकुमु घ्नाचान्ताः काटार्ष्णातम् । आ पा त्व च मौकुहोटट्हाखऔ हो वाशि। उ ऊखापाश ॥८॥
प्र य त्गाकिवोखन भू र्णा याःशी। त्वा इ षाचिअ याकासोटअ क्र मूकिघ्नापतो हाणाइश। काटट्र्ष्णाखऔ हो वाशि। आथप त्वाटाचाखम् ॥९॥
॥ भारद्वाजञ्च ॥
अ प घ्न न्हो इषुपा वाता। साचइ मायार्धाःट। क्र तू वि त्सोकीच्मा माकात्सायराःट। नु द स्वाटिट्दाखऔ हो वाशि। व युकान्ज नाटाख्म् ॥१०॥
॥ वैश्वामित्रञ्च ॥
ए आ या प वातु। स्व धाकारा याटाच्हायउ वाटाच्ऊखपाश। या या सूकिर्य म रोकिचा याटाच्हायउ वाटाच्। ऊखपाश। हि न्वा नो मा नु षाटूइ र्होकाच्याकप याताआ उ वाटि। उ ऊखापाश ॥११॥
॥ इन्द्रस्यवात्रघ्नम् ॥
स होताइ प व स्वाशी। या याटावीकथा इथान्द्र वृ त्राटिया हकान्ताखवाणइश। ओ वाटाओखवाण। व ब्री वांटिसांत। मा हीकाराकपा औटाहोखबाप्ल। होप्लइ ळाशा ॥१२॥
॥ सोमसामानित्रीणि ॥
अ या वी तीती। पाकरि स्र वा य स्ताकुइ न्दो मा दाकीइ षु वाटिअ वा हाभिन्नात। वाततोपबाप्लना वोप्ला। हा इशा ॥१३॥
अ या वीकिता औथाहो वाटा। औ होथाच्औकहोटट्वाखऔ हो वाशि। प रिकास्रा वाकाय स्त इ न्दोकीच्औकहो वाटा। औ होथाच्औकहोटट्वाखऔ हो वाशि। म देटाच्षु वाकाअ वाकाहा न्नाकाच्औकहो वाटा। औ होथाच्औकहोटट्वाखऔ हो वाशि। व ती र्न वाटीख् ॥१४॥
आ याणावी ताणाफ्इ पाखारि स्र वाशि। या स्ताचाइ न्दोथाच्मा दाकाइ षूयावाट। अ वा हाभिन्नात। व तीकार्न्नाकवा औटाहोखबाप्ल। होप्लइ ळाशा ॥१५॥
॥ भारद्वाजञ्चैव ॥
प रि द्यु क्षातीम् । ओ इ स न द्रा यीटूम् । ओ इ भ र द्वा जाटूम् । ओ इ नो अ न्ध सापूस्वा नोखाअ र्षाता। वाकवोपबाप्लत्रा योप्ला। हा इशा ॥१६॥
चतुर्थ खण्डः (ऋ-१४, सा-२०)
॥ वार्षाहरम् ॥
अ चि क्र दातीदा चीकाच्क्राकदाखद चि क्र दा देप्लु। वृ षा ह रातीइशवा र्षाकाच्हाकराखइ वृ षा ह रा एप्लू। म हा न्मि त्रोतीमा हाकान्मिकत्रोखाम हा न्मि त्रा एप्लु। न द र्श तातीना दकार्शाकताखन द र्श ता एप्लु। सं सू र्यातिइशसं सूकाच्रीकयाखइ सं सू र्या एप्ल। ण दि द्यु तातीइशणा दीकाच्द्यूकताखइ णा दाशिइ द्यु ता बूप्ली। बाश ॥१॥
॥ वार्शानित्रीणि ॥
आ ते द क्षातीम् । म यो भूभिवातम् । व न्हि म द्या वृ णीटूमाखहाणइश। पा न्ताकामा ईटायात। पू रू स्पृटिट्हाखऔ हो वाशि। उ ऊखापाश ॥२॥
आ ते दाखिक्षांशमा यो भूखिवणम् । व न्हि म द्या वृ णिफूम होखाहा इशा। पा न्ताटामातईटयातपूटट्रूखऔ हो वाशि। स्पृखहशम् ॥३॥
आ ते द क्ष म्म योफूभु वांखाहा इशा। व न्हि म द्या वृ णीफूम होखाहा इशा। पा न्तायामाटपू रूकास्पृ हा मी ळाटीभाखण्। ओपइ ळाशा ॥४॥
॥ वैरूपेचदेवानांवाञ्जसायिनी ॥
अ ध्व र्योपिआण। द्रि भा इ स्सूभीतांतसो मंकापाखवीण। त्रा आयाना याटा। पु नाटाही न्द्राखाऔ हो वाशि। या पा ताटिवेख ॥५॥
अ ध्व र्योषिऔ हो अ द्री भीःतु। सूचत मौटाहोतवातइशसो मंकापाखवीण। ओ इ त्रा यायीना याटा। पु ना हाटिट्इ न्द्राखाऔ हो वाशि। एतच्याकपा ताटावेख ॥६॥
॥ तरन्तस्यचवैददश्वेस्साम ॥
त र त्स मातीन्दीतधा वायाताटइश। धा राटासूखताण। स्या न्धाटाट्साखऔ हो वाशि। ता र त्स म न्दी धाकुव तीखी ॥७॥
॥ सोमसामच ॥
आ प व स्वाती। साचह स्रि णांटिहु वाटाइ हु वाटिहोचइश। र यिंकासो माकासु वी र्यांटिहु वाटाइ हु वाटिहोचइश। अ स्मैथाश्र वां सि धाकीरा याटाहु वाटाइ हु वाटिहोटट्याखऔ हो वाशि। ऊखपाश ॥८॥
॥ सूर्यसामच ॥
आ नु प्र त्नाषीस आ यातिवाःत। पा द न्न वीषीयो अ क्र मूःची। रू चे ज ना न्तापुसूशहि म्मा एभि। रीखयशम् ॥९॥
॥ दार्ढ्यच्युतानित्रीणि ॥
आ र्षाचाइ हाशा। सो मा द्यु माटीक्ता माचाइ हाशा। आ भाचाइशइ हाचा। द्रो णा नि रोटीच्रूकवाचदि हाशा। सीकदाचनि हाशा। यो नौ व नाटीच्इशषू वाचाइ हाशा ॥१०॥
आ र्षाकाहातबुश। सो म द्यु म क्त मोषूअ भि द्रोटिणातनि रो औभिहोतरू वाटात्सी दा उ वाती। यो नौ वापिनेशहि म्मा एभि। षूखवाश ॥११॥
अ र्षा सो मा द्यु माफूक्त मोखाअ र्षा सो माशी। द्यु म क्त मोकीअ भि द्रोकिणाटहातहातइश। नी रोचारू व त्साकिइ द न्यो नौटीहातहातइश। वा ना इ षुटीवाखण्। ओपइ ळाशा ॥१२॥
॥ इन्द्रस्यचवृषकम् ॥
वृ षा सो माती। द्यू मंचाआयसाटइश। वृ षा दा इ वोटुहातइशवा र्षाकाव्राखताःण। वृ षा ध र्माकीइटयात। णा इ दकिद्रि षा इ ळाटीभाखण्। ओपइ ळाशा ॥१३॥
॥ ऐषञ्च ॥
इ षे प वाती। स्व धा र यौकीहो वा हाखिऔ हो वाशि। मृ ज्य मा नोकीम नी षी भीःटीख्। इ न्दोचारूकचाफभि गा औशिहो वा हाखिऔ हो वा हीख ॥१४॥
॥ श्यावाश्वञ्च ॥
म न्द्र या सोती। मा धा र याषीवृ ष पाटिवातच्। स्वाकदा इ वाटियूःत। अ व्या वाटिट्राखऔ हो वाशि। भि र स्म यूःतीच् ॥१५॥
॥ सोमसामच ॥
आ याणाफ्सोखम सू कृ त्य याशु। मा हा न्स न्ना भ्य वाटूर्द्धाखथाःण। मायन्दाटनायईटद्वृ षा याखि। सात्रइश ॥१६॥
॥ आग्नेयञ्च ॥
आखबु हौ हो वा हाषुअ या वि चाशी। र्ष णा इ र्हाटीइ ताःखा। आखबु हौ हो वा हाषुइ प व मा नाःशु। सा चा इ ताटीताखइश। आखबु हौ हो वा हाषुइ हि न्वा न याशु। पि यौटाहौ हा होखिबाप्लबृ हाप्लात् । हा इशा ॥१७॥
॥ आयास्येच ॥
प्र ण इ न्दोफीऐ ही ऐ हीखीयाश। मा हे तु न ऐटुही ऐटहीटयात। ऊकर्म्मि न्न बि भ्रषीद र्ष सी ऐटूऐ ही ऐ हीखीयाश। आ भा इ दाटीट्इ वंखाऔ हो वाशि। आ याटास्याःख ॥१८॥
प्र ण इ न्दोफीइ याखाईखयाश। मा हे तु न इ याटूईटयात। ऊकर्म्मि न्न बि भ्रषीद र्ष सी याटीईटयात। आ भा इ दाटीइ वंखाऔ हो वाशि। एतच्आकयाटस्याःख ॥१९॥
॥ भारद्वाजञ्च ॥
हो ईखायाप्लहो ईखाया ई या हा इशु। अ प घ्नाटिन्पाखहो ईखायाप्लहो ईखाया ई या हा इशु। वा ता इ माटीट्र्द्धाखऔ हो वाशि। अ प सोकिमो अ राटिवि ण्णाःखाहो ईखायाप्लहो ईखाया ई या हा इशु। ग च्छ न्नाटिइ न्द्राखाहो ईखायाप्लहो ईखाया ई या हा इशु। स्या ना इ ष्काटीट्र्क्ताखऔ हो वाशि। ईख ॥२०॥
पञ्चम खण्डः (ऋ-४६, सा-७६)
॥ आयास्यञ्च ॥
पु ना न स्सोती। माटट्धाखऔ हो वाशि। राखयाश। आ पो व सातीनोकअथर्ष स्या रा त्नाटीधाःत। यो ना इ माटीर्क्तातस्याटट्साखऔ हो वाशि। दाखसीश। उ त्सो देभिवोतहाटइ राखाऔ हो वाशि। ण्याखयाश ॥१॥
॥ वसिष्ठस्यचापदासे ॥
पु ना न स्सो मषुधा र याति। आ पो व साकीनोकअथर्ष स्योटाहातओटहातइश। अ राकात्ना धा योकिनि मृ त स्याचीसीथद स्योटाहातओटहातइश। उ त्सोचादायइ वाटाओटहातओटहातइश। हि र ण्याटियाखण्। ओपइ ळाशा ॥२॥
पु ना न स्सोफीम धा र याकीआ पोटावा साटानोतअ र्ष सीचि। अ राटात्ना धाटायो नीथामा र्क्ताटास्यातसी द सीचि। ऊ त्सोटादा इ वोटिचहीकर ण्याटायाखण्। ओपइ ळाशा ॥३॥
॥ माण्डवञ्च ॥
पु ना न स्सो मषुधा र या पो व सोतूवात। नो अ र्षकिस्या राकात्ना धा उ वाकीओटहातइश। योचनि मृ ता स्यचीसीथद स्यु त्सो देटीवा उ वाकिओटहातइश। ही र ण्याटियाखण्। ओपइ ळाशा ॥४॥
॥ उद्वच्च ॥
पु ना न स्सोषीम धा होतिर याता। आ पो व साकीना या होटिर्षा सीटा। आ र त्न धा योषुनि मृ ताकिस्या सा होटिइ दा सीटि। ऊ त्सोटाच्होयइ दाटाइ वोता। हीकरोपबाप्लण्या योप्ला। हा इशा ॥५॥
॥ माण्डवञ्चैव ॥
इ याटाईटयात। पू ना न स्सोटीम धा राखियाण। आ पो व साकीनो अ र्षाटिसीत। आ र त्न धा योषुनि मृ ताकिस्या सि दाटिसीत। ऊकत्सो देथावो हाटाट्इ राखाऔ हो वाशि। ण्यातयाटख् ॥६॥
॥ प्रजापतेश्चसदोविशीयम् ॥
पु ना न स्सो म धाषूर या ओ हा ओ हातूए औटाहो औटाहोतवात। आ पो व साकीनोकअथर्ष स्योटाहातओटहातए औटाहो औटाहोतवात। आ राकात्ना धा योकिनि मृ ता स्याचीसीथद स्योटाहातओटहातए औटाहो औटाहोतवात। उ त्सोचादायइ वा ओटिहातओटहातए औटाहो औटाहोतवात। ही र ण्याटिट्याखऔ हो वाशि। स दोतावीटशाःख ॥७॥
॥ जमग्नेस्सवासिनी द्वे ॥
ओटहोयवा ओटाओटहोयवा ओटाओटहोकच्वाकओ वाकाओटट्वाखऔ हो वाशि। पु ना न स्सोकीम धा र याकीआ पो व साकीनोकअथर्ष स्या राटित्ना धा योकिनि मृकात स्याचासीथद स्यु त्सो देटीवाःच। ओटहोयवा ओटाओटहोयवा ओटाओटहोकच्वाकओ वाकाओटट्वाखऔ हो वाशि। एतहि रकाण्य याटाख् ॥८॥
ओतच्होचवाकओ वाकाओटट्वाखऔ हो वाशि। पु ना न स्सोकीमा धा र याकीपो व साकिनोकअथर्ष स्या राकित्ना धा योकिनि मृकाता स्य सीचिद सीखा। ओतच्होचवाकओ वाकाओटट्वाखऔ हो वाशि। उ त्सो देकिवो हि र ण्य याकुइ ळाटाभाखण्। ओपइ ळाशा ॥९॥
॥ आयास्येद्वेसोमसामनीवा ॥
आ यि पु नाती। ना स्सो माकिधा र या अ पो वा साकूओ नोकाअ र्ष सीचि। आ रा त्ना धाकीओ यो नि मृ त स्याकूसी द सीचि। उ त्सो दा इ वाकुओचइश। ही र ण्याटियाखण्। ओपइ ळाशा ॥१०॥
पु ना न स्सोषीम धा हा बु होतुवात। रा यापापो व साटिन याखाणफप्ल्। र्षाखसीश। अ रापाऔकहो वाथा। त्ना धा योकिनि मृ ताटिस्य साखाणफप्ल्इश। दाखसीश। उ त्सोपाऔकहो वाथा। दा इ वोटिहि राखाणफप्ल्। ण्याखयाश ॥११॥
॥ कण्वरथन्तरम् ॥
पु ना न स्सो मषुधा र याति। आ पो व सा नोकुअ र्षापासीश। आ र त्न धा यो निषूमृ त स्य सी द सातूऐ हीता। उ त्सो दाटिइ वोता। हि राताआ उ वाटि। एतण्य यातायाख ॥१२॥
॥ आयास्यञ्च ॥
पु ना न स्सो मषुधा र या एतुऔ होखावात्र। आ पोकाव साटान याखाणफप्ल्। र्षातसीटख्। आ र त्न धा यो नीषूमृ ता स्या साकीओ औपाहोश। दातसीटख्। उ त्सो औपिहोशदा इ वोचिहि राखाणफप्ल्। ण्यातयाटख् ॥१३॥
॥ रौरवम् ॥
पु ना न स्सो मातुधा रापायाण। आ पो व सा नो अ र्ष स्या र त्न धाषौयो नि मृ ता स्य साटूइ द सातिओ हापाउ वाशा। उ त्सो दे वो हि राटूहातओ हापाउ वाशा। ण्याकया औटाहोखबाप्लहोप्लइ ळाशा ॥१४॥
॥ यौधाजयञ्च ॥
पूचनायनापसोशमाप्लधा राखायाण। आ पोकाव साकानटयाखणफप्ल्। र्षाखसीश। आ राकात्ना धा योकिनि मृ ताटिस्य साखाणफप्ल्इश। दाखसीश। उ त्सोटादा इ वोटिहि राखाणफप्ल। ण्याखयाश ॥१५॥
॥ वसिष्ठस्यचप्लवम् ॥
हा उ वातिहा उ वातिहातहा उ वोखिवाप्लहातइश। पू ना नाखिस्सोशम धा राखियाण। आ पो वाखिसाशनो आ र्षाखिसीण। आ रा त्नाखिधाशयो ना इ माखीर्क्ताशस्या सि दाखिसीण। उ त्सो दाखिइ वोशाहा इ रा ण्याखीयाण। हा उ वातिहा उ वातिहातह उ वोखीवाप्लहाखऔ हो वाशि। एतआ तिकावि श्वाकानी दू रीकिता त रेकिमाख ॥१६॥
॥ अच्छिद्रञ्च ॥
प री तो षीती। ञ्च ताताआ उ वाटि। सूखतशम् । सो मोटाया ऊचाक्ता मंचाहा वीःचा। सो मो य ऊती। क्त मांताआ उ वा । हाखवीःश। द धकान्वा यो न र्योटीच्अ प्स्व न्त राची। द ध न्वा याःती। न र्योटाच्आचप्सु आताआ उ वाटि। न्ताखराश। सू षाचाव सोशामाकम द्रि भीःटिख्। सू षा व सोती। म माताआ उ वा । द्राखइ भीःप्ला ॥१७॥
॥ रयिष्ठञ्च ॥
प रि तो षीती। ञ्च ता सूभिता मौटाहोतवा औटाहोतवा यीटायातयीटयाखहाप्लहा उ वाति। सो मोटाय ऊचाक्ता मंचाहा वीःचा। सो मो य ऊती। क्त मां हाभिवी रौटाहोतवा औटाहोतवा यीटायातयीटयाखहाप्लहा उ वाति। द धकान्वा यो न र्योटीच्अ प्सचान्ता राचा। द ध न्व याःती। न र्योटाअ प्सुटाअ न्ताटारा औटाहोतवा औटाहोतवा यीटायातयीटयाखहाप्लहा उ वाति। सू षाचाव सो माकिमा म द्रि भीःटीख्। सू षा व सोती। म मा द्राभिइ भि रौटिहोतवा औटाहोतवा यीटायातयीटयाखहाप्लहा उ वाति। उ ऊखापाश ॥१८॥
॥ भारद्वाजेद्वे ॥
औ हो इषिप रि तो षीती। ञ्ज ताताच्सू त मौटिहो औ होतिच्वाकऔकहोखवाश। सो मोटाय ऊचाक्ता मंकाहा वि रौटीहो औ होतिच्वाकऔकहोखवाश। द धकान्वा यो न र्योटीच्अ प्स न्ताकिरा औटाहो औ होतिच्वाकऔकहोखवाश। सू षाचाव सो मा माचीद्रि भि रौटिहो औ होतिच्वाकऔकहोपवा उ हु वा हाप्लीबुश। बाश ॥१९॥
प र्ये प रीती। तोकषि ञ्च ताटिच्सू त मा उ वाप्लुहा बु हातिबु हो वाकि। सो मोटाय ऊचाक्ता मंचाहा वि रा उ वाफुहा बु हातिबु हो वाकि। द धकान्वा यो न र्योटीच्अ प्स न्ताकिरा उ वाटिहा बु हातिबु हो वाकि। सू षा वाटिसोतहा बु हातिबु हो वाकि। माचम द्राप्लइ भि रू हु वाप्लुहा बुशा। बाश ॥२०॥
॥ आभिशवेद्वे ॥
प रि तो षि ञ्च ताषूसु तं एति। सो मोचायाकउ क्ता मं हाकीवि र्दाखाधाप्लहातइश। न्वा यो न र्यो अ प्सुटूआ न्ता राकिसूखषाप्लहातइश। वा सोकामा मोपाबाप्लद्रा इ भोप्लि। हा इशा ॥२१॥
प रि तो षि ञ्च ताषूसु तं एतिएत। सो मोचायाकउ क्ता मं हातीवि र्दाखाधाप्लहातहातइश। न्वा यो न र्यो अ प्सुटूआ न्ता राकिसूखषाप्लहातहातइश। वा सोकामा मोपाबाप्लद्रा इ भोप्लि। हा इशा ॥२२॥
॥ अङ्गिरसामधीवासपरीवासौद्वौ ॥
प रि तो षि ञ्च ताषूसु तं इ हाती। सो मो यषिउ क्ता मं हाटीवी रि हाति। द धकान्वा यो न र्योषीअ प्स न्ताटिरा ई हाति। सु षा वाटिसो इ हाति। मा मा द्राटिट्इ भाखाऔ हो वाशि। ईखहाश ॥२३॥
इ हा प री तो षिषूञ्च ता सु तं इ हातू। सो मो यषिउ क्त मं हाटीवी रि हाकिउ वाशा। ऊखपाश। द धकान्वा यो न र्योषीअ प्स न्ताटिरा इ हाकिउ वाशा। उखपाश। सू षा वाटिसो इ हाकिउ वाशा। ऊखपाश। माचम द्राटाइ भी रि हाकीउ वाशा। उ ऊखापाश ॥२४॥
॥ माण्डवेद्वे ॥
प री तो षि ञ्च ताषूसु ताताम् । सोकमोकया उ क्ता मंकीच्हा वाकाइ र्दा धाटिउ वोखावाश। ऊखपाश। न्वा यो न र्योषीअ प्स न्ताटिरात। सू षा वाटिसोत। मा माकाद्रि भि रि ळाटीभाखण्। ओपइ ळाशा ॥२५॥
प री तो षि ञ्च ताषूसु तं ओतिवात। सो मो यटिऊचक्ता मंचाहा वि र्द धाचीन्वाययोटहातहातइश। न र्योटाच्अ प्स्वचान्ता राचासू षाचावायसोटहातहातइश। मा माकाद्रि भी रि ळाटीभाखण्। ओपइ ळाशा ॥२६॥
॥ वैनसोमकृतवेद्वे ॥
प री तो षि ञ्ज तातूसु ताताम् । सो मो य उ क्त मांटूट्हा वीःटा। द धकान्वा यो न र्यो अ प्साटूट्न्ता राटा। सू षा वाटिसोत। माकमोपबाप्लद्रा इ भोप्लि। हा इशा ॥२७॥
पा री तो षाटीइ ञ्च ता सु ताभुमै हिटाऐ हीटाऐचहि हो वाथिउ वाटाईटयात। सो मोटाच्य ऊकाक्ता मं हा वीभीरै हीटाऐ हीटाऐचहि हो वाथिउ वाटाईटयात। द धकान्वा यो न र्योटीच्अ प्स्व न्ता राभीऐ हिटाऐ हीटाऐचहि हो वाथिउ वाटाईटयात। सू षा व सोटीमाकम द्री भीभिरै हीटाऐ हीटाऐ हीटाऐचहि हो वाथिउ वाटाईटयाखण्। ओपइ ळाप्ला ॥२८॥
॥ प्रजापतेर्गूर्दौद्वौ गौतमस्यवाप्रतोद्वौ ॥
ऊ पाचाऊचपाफउ पाताओपऊ पाचाऊकपाफ। प री तो षि ञ्च ताषूसु त मू पाचीऊचपाफउ पाताओपऊ पाचाऊकपाफ। सो मो य उ क्त मंषूह वि रू पाचीऊचपाफउ पाताओपऊ पाचाऊकपाफ। द ध न्वा यो न र्योषूअ प्स्व न्त रा ऊ पाचूऊचपाफउ पाताओपऊ पाचाऊकपाफ। सु षा व सो म मषूद्रि भि रू पाचीऊकपाफउ पाताओपउ प ऊखिपात्र। ऊखपाश ॥२९॥
हा बु हा बुषीहा उ वाति। पा रि तो षि ञ्च ताकूच्सूकता मु पाटिख्। हा बु हा बुषीहा उ वाति। सो मो य उ क्त मंकूच्हाकवि रू पाटिख्। हा बु हा बुषीहा उ वाति। द ध न्वा यो न र्योषूअ प्स्वकाच्न्ताकरा उ पाटिख्। हा बु हा बुषीहा उ वाति। सु षा व सो माकूद्रीकच्भि रू पाटिख् ॥३०॥
॥ मरूताङ्गोष्ठापुंसिनिद्वे ॥
हा बु हा बुषीहा उ वाति। पा रि तो षि ञ्च ताकूसू ताचामि हा उ पाटीख्। हा बु हा बुषीहा उ वाति। सो मो य उ क्त मंकूह विचारि हा उ पाटीख्। हा बु हा बुषीहा उ वाति। द धा यो न र्योषुअ प्स्व न्त राचाइ हा उ पाटीख्। हा बु हा बुषीहा उ वाति। सु षा व सो म माकूद्री भिकारि हा उ पाटीख् ॥३१॥
हा बु हा बुषीहा उ वाति। पा री तोकिषि ञ्च ताटिच्सू तंकाश्र वोटाच्बृ ह दु पाटीख्। हा बु हा बुषीहा उ वाति। सो मो याकिउ क्त मंकिच्हाकवि श्र वोटिच्बृ ह दु पाटीख्। हा बु हा बुषीहा उ वाति। द ध न्वा यो न र्योकूअ प्स्वटाच्न्ताकरा श्र वोटिच्बृ ह दु पाटीख्। हा बु हा बुषीहा उ वाति। सू षा वाकिसो म माटिच्द्रीकभि श्र वोटिचबृ ह दु पाटीख् ॥३२॥
॥ महारौरवञ्च ॥
हा बु हा बुषीहा उ वाति। पा री तो षि ञ्च ताकूचसूकतं सो मोकिच्य ऊकाक्ता मंकाहा वि र्द धकीन्वा यो न र्योटीच्अ प्स्वचान्ता राचासू षा व सोटीख्। हा बु हा बुषीहा उ वाति। एतच्मा मा द्राटिइ भीःखा ॥३३॥
॥ महायौधाजयञ्च ॥
हा उ वोखिवाशहा उ वोखिवाशप्ल्हातओपवाप्लहा उ वाति। पा रि तो षि ञ्च ताकूचसूकतं सो मोकिचय ऊकाक्ता मंकाहा वि र्द धकीन्वा यो न र्योटीअ प्स न्ता राचीसू षा व सोचीम माखा। हा उ वोखिवाशहा उ वोखिवाशप्ल्हातओपवाप्लहा उ वाति। द्रातइ भीःटाख्। ॥३४॥
॥ आश्वानिचत्वारि ॥
आखसोण। माकस्वा नोथाअ द्रा इ भाटीउ वोखावाश। ति रो वा राटीणिचअ व्य याटिजा नाटाना पाटाउ वोखावाश। रि चा मु वोटीर्वीचशा द्ध रीटिस्सा दाटाउ वोखावाशवा नाटाउ वोखावाश। षु दा द्ध्रि षाप्लीइश। होपइ ळाशा ॥३५॥
हा वा सो म स्वातु। नो अ द्राखिइ भिशास्ती रो वाखिराण। णि याताआ उ वाटि। व्याखयाशज नो नाखिपूशरी चा मूखिवोःण। वि शाताआ उ वाटि। र्द्धाखरिशस्सा दा वाखिनेण। षु दाताआ उ वाटि। ध्रिखषेश ॥३६॥
आ सो म स्वा नोतुअ द्रि भातिइःश। ती रो वा राषीणि या व्यायियाट। ज नो न पूषीरि चा मूयिवोटर्वी शाकार्द्धायरीःट। स दाटाच्वा ना इ षूटीद ध्रि षोखिप्ल्इ ळाशा ॥३७॥
आ सो म स्वा नोषुअ द्रि भि स्ति रोफुवा राखाणी य व्य याप्ली। ज नो न पुषीरि च म्वो र्वि शाकुर्द्धा री रौटिच्हू वा एटिहो वाचा। सा दा व नेकीषू दौटाच्हू वा एटिहो वा होखबाप्ल। होप्लइ ळाशा ॥३८॥
॥ आग्नेयञ्च ॥
प्र सो म दाती। इ वा वी तखीयाणइश। सिकन्धु र्न पाकिइ प्य यातिआ उ वाटि। र्णाखसाशअं शोः पाखियाण। साकम दा इ रोकीन जाताआ उ वाटि। ग्रखवीशरा च्छा कोखिशणम् । म धाताआ उ वाटि। श्चूचतशम् ॥३९॥
॥ सोमसामच ॥
प्र सो म दे व वीफूत योखाहा इशा। सि न्धु र्न्न पि प्ये आफूर्णा सोखाहा इशा। आं शाटाउ वोखावाश। पा याटाउ वोखावाश। साफम दि रोणिन जाफाग्र वीखाहाणइश। आ च्छाटाउ वोखावाश। को शाटाउ वोखावाश। म धू श्चू ताप्ली। होप्लइ ळाशा ॥४०॥
॥ द्विहिङ्कारञ्चवामदेव्यम् ॥
प्रा सो मापिदे व वी त या इशू। सा इ न्धू र्न्ना पि प्य अ र्णा सा अं शोः प यषौसा म दि रो न जौकूहोतहि म्माटा। ग्रटवीतरा च्छा को शं म धौकूहोतहि म्माटा। श्चू ता मौपिहो बाप्ला। होप्लइ ळाशा ॥४१॥
॥ अङ्गिरसामुत्सेधनिषेधौ द्वौ ॥
प्र सो म दे वषुवी त ये सि न्धूफुर्न्न पाखाऔणहोफवाप्ल। प्येकअ र्णा साटिच्हायउ वाटा। ऊखपाशअं शोः प या औ हो वा हा इशृ। साकम दि रोकिन जा गृकिवि र्हायाउ वाटा। ऊखपाशअ च्छा को शं औ हो वा हा इशृ। म धू श्चूखितात्रम् । ऊख ॥४२॥
प्र सो म दा इ वातूवी त यातिइश। सि न्धू र्न्न पा इ प्येचूअथर्णा साटाइ हाता। आं शोःटापाखयाशहा होखाहाणइश। साकम दि रोकिन जाटागॄ वी रि हाती। आ च्छाटाकोखशांशहा होखाहाणइश। म धू श्चूखितात्रम् । हेख ॥४३॥
॥ सोमसामानिषट् ॥
हा बु सो माःती। उ ष्वाथाच्ण स्सो तृयिभीःट। आ धि ष्णु भीकीराचवायइ नाटाम् । आ श्वाटाऔटहोतये व ह रि ता याषूता इ धायिरा याटा। म न्द्रा याकियाखहा ओ वाशि। ती धा राटियाख ॥४४॥
सो म उ ष्वाखीण स्सो तृ भाप्लीइःश। आ धी ष्णु भीकीराकवी नाथामा श्व येपिवाण। हा रि ता या ति धायूरापयाश। म न्द्रा याखियाशताखइ धाणा। रा या औटिहोखबाप्ल। होप्लइ ळाशा ॥४५॥
सो म उ ष्वा णषुस्सो तृ भि रेतीअ धीता। ष्णु भि रातिआ उ वाटि। वीखनाशम् । आटश्वातये व ह रि ता याकूति धाताआ उ वाटि। राखयाश। माटन्द्रातया याकाति धाताआ उ वाटि। राखयाश ॥४६॥
सो म उ ष्वा णषुस्सो तृ भि रेतीअ धीता। ष्णु भि र वीकीना मा श्व येकीवा ह रि ता याकुता इ धा र याकुम न्द्रा यौ वाशु। तिखधाश। रा या औटिहोखबाप्ल। होप्लइ ळाशा ॥४७॥
सो म उ ष्वा ण स्सो तृ भा इः रषैधि ष्णु भि र वी नातूम् । आ धि ष्णु भि र वीषूना मा श्व ये वा हाकूरी ता या तापीइ धाशा। र याताआ उ वाटि। माखन्द्राशया या तीखिधाण। रा याणाऔचहोकवाफ। होप्लइ ळाशा ॥४८॥
सो म उ ष्वा णषुस्सो तृचाभि रौटाहोतआपधि ष्णु भी र वी नाशूम् । आकश्व ये वा हाकीरि ता याथिच्तीकधा रा यौकिवा उ वोप्लिवाश। माकन्द्र या या तीपीधाशहिंच। राखयोप्ल। हा इशा ॥४९॥
॥ विष्णोररणीद्वे ॥
त वा हं सोती। म राटाच्रा णाचार णाशा। स ख्य इ न्दो दि वाटूच्इशदि वाचाइ दि वेशि। पू रू णि ब भ्रो निषूच र न्ति माटीमा वाचाअ वाशा। पा री धीं र ति तंकूइ हाटाट्इ हाखाऔ हो वाशि। ऊ उखापाश ॥५०॥
त वा त वाती। आ हं सो मषीरा र ण स ख्या इटून्दोतदि वा औभिहोतदा इ वेटि। पू रू णि ब भ्रो निषूच र न्ति मायीमापवाश। प रा औभिहोत। धा इं र तीकीतोपबाप्ल। आ इ होप्लि। हा इशा ॥५१॥
॥ आङ्गिरसानित्रीणि ॥
त वा हं सो मातुरा र णाति। स ख्या इखिन्दोशदी वे दाखिइ वेणा। पु रू णि ब भ्रो निषूच र न्ति माचिमा वापहा इ प रि धा इं राश्रृ। तीततोपबाप्लआ इ होप्लि। हा इशा ॥५२॥
त वा हं सो म रौ होतूर णाता। साचख्या इ न्दोटिदि वाखाणफप्लइश। दीखवेश। पू रूटाणा इ बाटिभ्रो नि च राटीन्ति माखाणफप्ल्। माखवाश। पा रीटाधा इं राटिति तंखाणफप्ल्। आखइ हिशा ॥५३॥
त वा हं सो मषीरा र ण सा ख्याफुइ न्दोखादि दे दि वा इशु। स ख य इ न्दोकीदि वे दाटिइ वेता। पू रू णि ब भ्रो निषूच रकान्ति मा माटिवात। पा रा इ धाटीइं राता। ती तंटाआटइ हाखाण्इश। ओपइ ळाशा ॥५४॥
॥ औक्ष्णोरन्ध्राणित्रीणि ॥
मृ ज्य मा नाःती। सु ह स्ति यातीसा मूटाद्राखइ वाशाच मि न्व सातीइशरा यींटापाखइ शांशाग म्ब हु लांतीपू रूटास्पृखहणम् । पा व माचिना औपाहोश। भीकयोपबाप्लर्षा सोप्ला। हा इशा ॥५५॥
मृ ज्य मा नाःती। सू ह स्ताचियाटस मुचाद्रे वाथाचा मियान्वा सापाइ र याखिइं पि शांतिग म्ब हु लकीम् पूचरूयस्पृ हाटाम् । पा वा माटिट्नाखऔ हो वाशि। भ्य र्षाटासीख ॥५६॥
मृ ज्य मा नाःती। सूचह स्ति याचिसायमूटच्द्रायइ वाटाच मीकान्वा साचाइश। रायइंटच्पायइ शांटागकम्ब हु लंचिपू रू स्पृ हाचीम् । पायवाटच्मायनाटभाटयाखऔ हो वाशि। र्षाखसिश ॥५७॥
॥ औक्ष्णोनिधनानित्रीणि ॥
मृ ज्याताएत। मा न स्सु ह स्ति याषूऔटहोत। सा मु द्रे वा च मिकून्व सा औभिहोत। रा यिं पि शंकीगंकब हु लंकिपू रू स्पृ हा औभुहोत। पा व माटिनात। भीकयोपबाप्लर्षा सोप्ला। हा इशा ॥५८॥
मृ ज्य मा नषीस्सु ह स्ते या वातूहातइश। सा मु द्रा इषीवा च मिटिन्वाखसीण। रा याखाइं पि शांतिगंकब हु लंकिपू रूयास्पृ हापापा वाखामा नाता। भीकयोपबाप्लर्षा सोप्ला। हा इशा ॥५९॥
मृ ज्य मा नाफीस्सु हशास्ति याका। स मूटाद्रे वाटाच माटाइ न्वा सीटि। रा यिं पि शांकीग म्ब हु लंकीपू रू स्पृ हा औभुहोत। पा व माटिनात। भीकयोपबाप्लर्षा सोप्ला। हा इशा ॥६०॥
॥ वाजजिच्चा ॥
मृ ज्य मा न स्सु हातू। स्ति याटास मूटाच्होयद्रे वाटाहो चाथामि न्वा साचिइश। र याटाच्होयइं पी शाटिहो गंथाब हु लां पूकीरू स्पृ हाचिम् । प वाटाच्होयमा नाटाहो भीथाअ र्षा साकिआ उ वाटि। वाकजी जी गीकिवातच् ॥६१॥
॥ द्वभ्यासञ्चसौहविषंवसिष्ठस्यवापिप्पलि ॥
मृ ज्य मा न स्सु हषूस्त्या स मु द्रे वोतुवात। चा मि न्व सीकीरा यिं पि शाटीहाटहातहातङ्ग म्ब हु लंकीपू रू स्पृ हकीच्म् । पा वाकामा नाटाहातहातइश। भ्य र्षाटासाखण्इश। ओपइ ळाशा ॥६२॥
॥ वैश्वदेवेच ॥
हातहा अ भीकिसो माथाच्सा आकायायवाःट। हातहा इ प व न्ते माचूदी याकाम्मायदांट। हातहा इ स मु द्र स्याषूधि वि ष्ट पेचीमाकच्नाकइ षायाइ णाःटा। हातहा इ म त्साकीरा सोथाच्मा दाकाच्यूयताःट। हातहाखण्इश। ओपइ ळाशा ॥६३॥
आ भि सोकिमाखस आ य वाःकी। प व न्तेकिम द्य म्म दा मा औटूहोतआ औटाहोत। सा मु द्र स्याकीधि वि ष्ट पेकीम णी षि णा औभुहोतआ औटाहोत। माथत्सा रा सोकिम द च्यु ता औभुहोतआ औटाहोखण्। ओपइ ळाशा ॥६४॥
॥ इन्द्रसामच ॥
अ भि सो माती। स याताआ उ वाटि। याखवाः प व न्ता इ माशू। दी याताआ उ वाटि। माखदं सा मू द्रा स्याशू। धि वि ष्ट पेकीम नाकाआ उ वाटिएभ। षीखणो मा त्सा रा साःशु। म दाताआ उ वाटि। च्यूखताःप्ल ॥६५॥
॥ वैश्वदेवञ्चैव ॥
अ भि सो मा सषुआ होताय वाःता। प व न्तेकिम द्य म्म दंषीप व न्ते म दि यांटूच्होयइ माटादातम् । सा मु द्र स्याकीधिशवि ष्ट पे म नीकुच्षि णोकाम नाटाच्होयषाटइ णाःता। माथत्साशरा सो म द च्युकुतोशम दाटाच्होयच्यूटताःखण्। ओपइ ळाशा ॥६६॥
॥ इन्द्रसामानित्रीणि ॥
औ हो वा अ भि सो मा सषृआ य व औ होतुवात। प वाटान्ते माखावात्र। द्यकम्म दं स मूटीद्र स्याखावात्र। धीचवि ष्ट पे म नीकुच्षि णाकऔटच्होयइ म त्साटिरा सोखावात्र। म दाताच्यू ताःटाख् ॥६७॥
अ भि सो मा सषुआ यातावाःत। प वाटान्ते माखावात्र। द्यकम्म दं स मूटीद्र स्याखावात्र। धि वि ष्टाकिपे म नी षी णोकुम त्साटारा सोखावात्र। म दाताच्यू ताःटाख् ॥६८॥
अ भि सो मा सषुआ यातावाःत। प वकान्ता इ मा दि यटुम्माखदणम् । सा मु द्र स्याकीधि वि ष्ट पा इषुम नाटाइ षाखाइ णाःणा। मा त्सा राकिसो माटाट्दाखऔ हो वाशि। च्यूखताःप्ल ॥६९॥
॥ स्वःपृष्ठमाङ्गिरसम् ॥
अ भाटाइ सो माखिऔ होखास आफाय वाःका। प वाटान्ते माखाऔ होखाद्यकम्म दकाम् । स मूटाद्र स्याखाऔ होखाधि विफाष्ट पाकाइश। ओ इ माटिट्नाखऔ हो वाशि। षीखणाःप्ल। ऊखपाशप्ल्ऊखपाण। मा त्सा राकिसो माटाट्दाखऔ हो वाशि। च्यूखताःप्ल ॥७०॥
॥ सोमसामच ॥
पु ना न सो म जाषूजा गृ वि र व्याःती। वा रैः पा रीयीप्री याःटा। त्वं वि प्रो अ भ वोषूगा इ रापिस्त माःता। मा ध्वाकाच्य ज्ञाकाम्माटट्इ माखाऔ हो वाशि। क्षाखणाःप्ल ॥७१॥
॥ आदित्यानाञ्चपवित्रम् ॥
प व मा नषीअ सृ क्ष त प वातूइश। त्रा म ति धा र या म रू त्व न्तोषेम त्स रा इ न्द्रीटुयातचहा या माटिइ धाताम् । अ भा इ प्राटीट्याखऔ हो वाशि। सीखचाश ॥७२॥
॥ सोमसामनीद्वे ॥
प व स्व वा ज साषूइ हाता। ताखमाःप्ल। आ भि वि श्वाकीच्नीकन वा र्या स्त्वं साटीट्मूखऔ हो वाशि। द्राः प्र थाकिमेचवी ध र्मथिन्दा इ वा इ भ्याटुट्स्सोखऔ हो वाशि। म म त्स राःतीच् ॥७३॥
इ न्द्रा या पाती। वा ताटाइ मा दाःटि। सो मो म रु त्व ताटूइ सू ताःटि। सा ह स्र धा रोषुअ त्य व्य माटुर्षा तीटा। त माटाइ मा र्जाटिच्न्तीकया याटावाःखण्। ओपइ ळाप्ला ॥७४॥
॥ स्वःपृष्ठञ्चैवाङ्गिरसम् ॥
इ न्द रा य पाती। व तेकाम दाचास्सो मोथामा रूटाच्त्वाकते होटाइ सू ताःटि। सा ह स्रा धा रोषुअ त्य व्य मा र्षा ताटूउ वोखावाश। ऊखपाश। ता मी होटिइ मा र्जाटिच्न्तिकया याटावाःखण्। ओपइ ळाशा ॥७५॥
॥ सोमसामचैव ॥
इ न्द्रा या पाखीवा ता इ मा दाःप्लु। सो मो म रू त्व ताटूइ सूखाताःण। सा ह स्र धाकीरोशअ त्य व्य माटीर्षाखतीण। त मा औकिहो इ माखिर्जांणताटट्याखऔ हो वाशि। याखवाःप्ल ॥७६॥
षष्ठ खण्डः (ऋ-१५, सा-३६)
॥ औशनानित्रीणि ॥
ओ ईचाप्रा तूफाइ हाताओ द्र वा पा री कोकूशा न्नी षीखिदाश। ओ ईचानृ भीफारि हाकाओ पु ना नोकीआ भी वाकिज माखार्षश। ओ आचाश्वाफइ हाताओ न त्वा वाटीजी न म्माकिर्ज याखान्ता इशा। ओ आचाच्छाफइ हाताओ बकार्हा इ राकिश ना भापिइ र्न्ना याखि। न्तात्रइश ॥१॥
हा ओकाहाफउ हु वा ओखिहाण। प्रा तु द्र वाषीपा री कोकिशा न्नि षीखिदाश। नृ भिः पु ना नोटुआ भी वाकिज माखार्षाश। अ श्व न्न त्वा वाटुजी न म्माकिर्ज याखान्ता इशा। हा ओकाहाफउ हु वा ओखिहाण। अ च्छा बकिर्हा इ राकिश ना भापिइ र्न्ना याखि। न्तात्रइश ॥२॥
प्रा तूता। द्रा वा प रि कोषुशा न्नि षीटिदाथ। नृ भिः पु ना नोटुआ भी वाकिज माखार्षाण। अ श्व न्न त्वाषीवा जि न म्मा र्ज याटून्तातइश। अ च्छा बकिर्हा इ राकिश ना भापिइ र्न्ना याखि। न्तात्रइश ॥३॥
॥ प्रशस्यजानस्याभीवर्तौद्वौ ॥
प्र त्वेकाप्र तुता। द्रा वा द्र वाषीपा री कोकिशा न्नी षीखिदाश। नृ भि रेतिनृ भीःताव पू ना पु ना नोटुआ भी वाकिज माखार्षाश। अ श्व मेतिअ श्वाताम् । न त्वा न त्वा वाटुजी न म्माकिर्ज याखान्ता इशा। अ च्छ येतिअ च्छाता। ब र्हा बकिर्हा इ राकिश ना भापिभा इ र्न्ना याखि। न्तात्रइश ॥४॥
प्र तू द्राति। वा प रि कोषीशा न्नी षीटूदातसा इ दाकि। श बु होकाच्औकहो वाका। नृ भिः पु ना नोषुअ भी वा ज माटुर्षातआ र्षाकाबु होकाच्औकहो वाका। अ श्व न्न त्वा वाषुजि न म्मा र्ज याटुन्तातइशय न्ताकाबु होकाच्औकहो वाका। अ च्छा बकिर्हा इ राकिश ना भिटिर्न्ना याकाएखहि या हाप्लिउ वाशा। न्ताखइश ॥५॥
॥ प्रजापतेर्वाजसनिनीद्वे वाजजितौद्वौ वाराहाणिवा ॥
प्राकका व्याटाच्मू श ने वाभीब्रू वाटाणाःत। दे वो दे वाटीना न्ज नि माटीच्वि वाटाक्तीत। मा हि व्रा ताटीच्श्शु छी बा न्धूःभीपा वाटाकाःत। पा दा वा राटीहो अ भि याटीइ ति राखिऔ हो वाशि। भाखन् ॥६॥
प्र का व्याटिच्मू श ने वाभीब्रू वा णाःटि। दे वो दे वाटीना न्ज नि माटीच्वि वा क्तिटि। मा हि व्रा ताटीश्शु चि बा न्धूःभीपा वा काःटि। पा दा वा राटीहोटभि याखाऔ हो वाशि। ती रेटाभाखन् ॥७॥
प्र का व्या मु श नेचूवा ब्रूशावा णोकादेखवोश। दे वा नाचिन्ज निचामाकवी वा क्तिकिमाखहीश। वृ त श्शु ची ब न्धूःथूप वा काःकिपाखदाश। व रा होचिअ भ्येकाति राटाहा उ वाति। भाखन् । ॥८॥
हा बु हातिबू हूचाप्रा क व्याकिमू श ने वाकीब्रु वाखाणाःप्ल। देकवो दे वा नाटीन्ज नी माकिवि वाखाक्तिश। मा हि व्रा ताकीश्शु चि बा न्धूःकीपा वाखाकाःप्ल। हा बु हातिबू हूचा। पाचदाकव रा होटिअ भि यापिइ ति राखिइश। भात्रन् ॥९॥
॥ अङ्गिरसांसङ्क्रोशास्त्रयः देवानांवा सामसुरसे द्वे ॥
हो येटाहो वाटाहातहोतइशति स्रो वा चा ईटुरा याकाति प्र वाखिन्हीःप्ल। ओ हाणाफ्होखहा ओ हाशि। ऋ त स्य धा इ तींटूब्रा ह्मा णोकिमा नीखाषाशम् । आ हाकाहो इ आकिहा हाकाच्हाकहोचइश। गाकवो य न्ता इ गोटुपा ति म्पाकिर्च्छा माखानाःप्ल। इ हाकाहो इ ईकिहा हाकाच्हाकहोचइश। सोकम य्य न्ता इ माकुत यो वापिवा शाखा। नाःत्र ॥१०॥
हो इ याटिहोचइशति स्रो वा चा ईटुरा याकाति प्र वाखिन्हीःप्ल। ओ हाणाफ्होखहा ओ हाशि। ऋ त स्य धा इ तींटूब्रा ह्मा णोकिमा नीखाषाशम् । आ हाकाहो इ आकिहा हाकाच्हाकहोचइश। गाकवो य न्ता इ गोटुपा ति म्पाकिर्च्छा माखानाःप्ल। इ हाकाहो इ ईकिहा हाकाच्हाकहोचइश। सोकम य्य न्ता इ माकुत यो वापिवा शाखा। नाःत्र ॥११॥
हाकहो इ याटिहोकच्इशति स्रो वा चा ईटुरा याकाति प्र वाखिन्हीःप्ल। ओ हाणाफ्होखहा ओ हाशि। ऋ त स्य धा इ तींटूब्रा ह्मा णोकिमा नीखाषाशम् । आ हाकाहो इ आकिहा हाकाच्हाकहोचइश। गाकवो य न्ता इ गोटुपा ति म्पाकिर्च्छा माखानाःप्ल। इ हाकाहो इ ईकिहा हाकाच्हाकहोचइश। सोकम य्य न्ता इ माकुत यो वापिवा शाखा। नाःत्र ॥१२॥
॥ वेणोर्विशालेद्वे ॥
हो इ या ईकीहो इ या औटीहो इ याकिच्ति स्रो वा चा ईटुरा याकाति प्र वाखिन्हीःप्ल। ओ हाणाफ्होखहा ओ हाशि। ऋ त स्य धा इ तींटूब्रा ह्मा णोकिमा नीखाषाशम् । आ हाकाहो इ आकिहा हाकाच्हाकहोचइश। गाकवो य न्ता इ गोटुपा ति म्पाकिर्च्छा माखानाःप्ल। इ हाकाहो इ ईकिहा हाकाच्हाकहोचइश। सोकम य्य न्ता इ माकुत यो वापिवा शाखा। नाःत्र ॥१३॥
हो इ हा ईकीहो इ हा औटीहो इ हाकिच्ति स्रो वा चा ईटुरा याकाति प्र वाखिन्हीःप्ल। ओ हाणाफ्होखहा ओ हाशि। ऋ त स्य धा इ तींटूब्रा ह्मा णोकिमा नीखाषाशम् । आ हाकाहो इ आकिहा हाकाच्हाकहोचइश। गाकवो य न्ता इ गोटुपा ति म्पाकिर्च्छा माखानाःप्ल। इ हाकाहो इ ईकिहा हाकाच्हाकहोचइश। सोकम य्य न्ता इ माकुत यो वापिवा शाखा। नाःत्र ॥१४॥
॥ गौतमस्यतन्त्रातन्त्रेद्वे ॥
ई होचाई हाफाइ हो इ हातीहो वाकाच्हो इफहाण। ति स्रो वा चा ईटुरा याकाति प्र वाखिन्हीःप्ल। ओ हाणाफ्होखहा ओ हाशि। ऋ त स्य धा इ तींटूब्रा ह्मा णोकिमा नीखाषाशम् । आ हाकाहो इ आकिहा हाकाच्हाकहोचइश। गाकवो य न्ता इ गोटुपा ति म्पाकिर्च्छा माखानाःप्ल। इ हाकाहो इ ईकिहा हाकाच्हाकहोचइश। सोकम य्य न्ता इ माकुत यो वापिवा शाखा। नाःत्र ॥१५॥
इ हा उ वाटीइखहा इ हाप्लिङ्ति स्रो वा चा ईटुरा याकाति प्र वाखिन्हीःप्ल। ओ हाणाफ्होखहा ओ हाशि। ऋ त स्य धा इ तींटूब्रा ह्मा णोकिमा नीखाषाशम् । आ हाकाहो इ आकिहा हाकाच्हाकहोचइश। गाकवो य न्ता इ गोटुपा ति म्पाकिर्च्छा माखानाःप्ल। इ हाकाहो इ ईकिहा हाकाच्हाकहोचइश। सोकम य्य न्ता इ माकुत यो वापिवा शाखा। नाःत्र ॥१६॥
॥ अगस्तयस्ययमिकेद्वे ॥
इ हाकाउ वाताइ हा उ वाटीइ हाकाउ वात्रईखहा ईप्लाहाङ। ति स्रो वा चा ईटुरा याकाति प्र वाखिन्हीःप्ल। ओ हाणाफ्होखहा ओ हाशि। ऋ त स्य धा इ तींटूब्रा ह्मा णोकिमा नीखाषाशम् । आ हाकाहो इ आकिहा हाकाच्हाकहोचइश। गाकवो य न्ता इ गोटुपा ति म्पाकिर्च्छा माखानाःप्ल। इ हाकाहो इ ईकिहा हाकाच्हाकहोचइश। सोकम य्य न्ता इ माकुत यो वापिवा शाखा। नाःत्र ॥१७॥
ईखहा हा ईप्लहाङति स्रो वा चा ईटुरा याकाति प्र वाखिन्हीःप्ल। ओ हाणाफ्होखहा ओ हाशि। ऋ त स्य धा इ तींटूब्रा ह्मा णोकिमा नीखाषाशम् । आ हाकाहो इ आकिहा हाकाच्हाकहोचइश। गाकवो य न्ता इ गोटुपा ति म्पाकिर्च्छा माखानाःप्ल। इ हाकाहो इ ईकिहा हाकाच्हाकहोचइश। सोकम य्य न्ता इ माकुत यो वापिवा शाखा। नाःत्र ॥१८॥
॥ मरूताङ्कालकाक्रन्तौ ॥
ओ औकाहोखऔ होफावातहातच्। ति स्रो वा चा ईटुरा याकाति प्र वाखिन्हीःप्ल। ओ हाणाफ्होखहा ओ हाशि। ऋ त स्य धा इ तींटूब्रा ह्मा णोकिमा नीखाषाशम् । आ हाकाहो इ आकिहा हाकाच्हाकहोचइश। गाकवो य न्ता इ गोटुपा ति म्पाकिर्च्छा माखानाःप्ल। इ हाकाहो इ ईकिहा हाकाच्हाकहोचइश। सोकम य्य न्ता इ माकुत यो वापिवा शाखा। नाःत्र ॥१९॥
ओ औ होटिच्औकहोखऔ होफाऔ होफावातहातहातचइशति स्रो वा चा ईटुरा याकाति प्र वाखिन्हीःप्ल। ओ हाणाफ्होखहा ओ हाशि। ऋ त स्य धा इ तींटूब्रा ह्मा णोकिमा नीखाषाशम् । आ हाकाहो इ आकिहा हाकाच्हाकहोचण इश। गाकवो य न्ता इ गोटुपा ति म्पाकिर्च्छा माखानाःप्ल। इ हाकाहो इ ईकिहा हाकाच्हाकहोचइश। सोकम य्य न्ता इ माकुत यो वापिवा शाखा। नाःत्र ॥२०॥
॥ वासिष्ठानिषट् ॥
अ स्याखाऔकहो वाथा। प्रे षा हेटिमा ना पूकिय माखानाःप्ल। दे वोखाऔकहो वाथा। दे वा इ भीटीस्सा मा पृकिक्त राखासशम् । सु ताखाऔकहो वाथा। प वा इ त्रांटीपा री येकिति रेखाभशन् । मि ताखाऔकहो वाथा। व सा द्माभिपा शु मकिन्ति होखाताश। प शु मापिन्ति होखा। तात्र ॥२१॥
उ हु वा य स्याखुऔकहो वाथा। प्रे षा हेटिमा ना पूकिय माखानाःप्ल। उ हु वा दे वोखुऔकहो वाथा। दे वा इ भीटीस्सा मा पृकिक्त राखासशम् । उ हु वा सु ताखुऔकहो वाथा। प वा इ त्रांटीपा री येकिति रेखाभशन् । उ हु वा मि ताखुऔकहो वाथा। व सा द्माभिपा शु मकिन्ति होखाताश। प शु मापिन्ति होखा। तात्र ॥२२॥
हा उ हु वा य स्याखुऔकहो वाथा। प्रे षा हेटिमा ना पूकिय माखानाःप्ल। हा उ हु वा दे वोखूऔकहो वाथादे वा इ भीटीस्सा मा पृकिक्त राखासशम् । हा उ हु वा सु ताखूऔकहो वाथा। प वा इ त्रांटीपा री येकिति रेखाभशन् । हा उ हु वा मि ताखूऔकहो वाथा। व सा द्माभिपा शु मकिन्ति होखाताश। प शु मापिन्ति होखा। तात्र ॥२३॥
हा यौ हो वा य स्याखूऔकहो वाथा। प्रे षा हेटिमा ना पूकिय माखानाःप्ल। हा यौ हो वा इषुदे वोखाऔकहो वाथा। दे वा इ भीटीस्सा मा पृकिक्त राखासशम् । हा यौ हो वा इषुसु ताखाऔकहो वाथा। प वा इ त्रांटीपा री येकिति रेखाभशन् । हा यौ हो वा इषुमि ताखाऔकहो वाथा। व सा द्माभिपा शु मकिन्ति होखाताश। प शु मापिन्ति होखा। तात्र ॥२४॥
हा हा यौ हो वाषुय स्याखाऔकहो वाथा। प्रे षा हेटिमा ना पूकिय माखानाःप्ल। हा हा यौ हो वा इषूदे वोखाऔकहो वाथा। दे वा इ भीटीस्सा मा पृकिक्त राखासशम् । हा हा यौ हो वा इषूसु ताखाऔकहो वाथा। प वा इ त्रांटीपा री येकिति रेखाभशन् । हा हा यौ हो वा इषूमि ताखाऔकहो वाथा। व सा द्माभिपा शु मकिन्ति होखाताश। प शु मापिन्ति होखा। तात्र ॥२५॥
औटहोकव हाथाहो ईटाहाकथ्। अ स्य प्रे षा हेटुमा ना पूकिय माखानाःप्ल। दे वो दे वा इ भीटूस्सा मा पृकिक्त राखासशम् । सू तः प वा इ त्रांटूपा री येकिती रेखाभशन् । औटहोकव हाथाहो ईटाहाकथ्। मी ते व सा द्माटुपा शू मापिन्ति होखा। तात्र ॥२६॥
॥ आश्वञ्च ॥
हो हो अ क्राटीन्साचमु द्राःचाप्र था मेचिवि ध र्म्माशिन् । हो हो इकिज न यकिन्प्रा जाकाभु व न स्य गोकुपाःच। हो हो इ वृ षाटुच्पा वि त्रेटिच्आ धि सा नोभिअ व्याचाइश। हो हो इकिबृ ह त्सो मो वाटुवृकधे स्वाथानो अ द्राटियौटहो वाताहा उ वाति। एतच्स्वाकनो अ द्रीःटिख् ॥२७॥
॥ सोमसामनीद्वे ॥
का नीता। क्र न्तीटाक्र न्तीटाह रीकाराथसृ ज्य माटिना साखाइ दणान् । वा नाटावा नाटास्य ज ठ रेकीपू नाटानो नृखाभीःण। या ताटाया ताःटाकृ णूकाते निथार्न्नि जांटागा माखाताःण। मा तिटाम्मा तिटान्ज नकाय ता स्वाटिधाखऔ हो वाशि। भीःख ॥२८॥
क नि क्र न्ती हाफूहोतइ ह रि रा सृफुज्य माखानाःप्ल। हातहो इ सी द न्व न स्यषूज ठ रेकिपू नाटानाःत। हातहो इ नृ भि र्य तःषूकृ णु तेकिनि र्न्नि जाटिङ्गात। हातहो अ तो म ता इषूज न य ता स्वाटुट्धाखऔ हो वाशि। भीःख ॥२९॥
॥ ऐषञ्च ॥
ए षा ए षाःती। स्य ताताओपइ म धू मं इ न्द्रषूसो मो वृ षा वृ षातूएत। वृ ष्णाताओःपप रि प वि त्रेषुअ क्षा स्स हा सा हातूएत। स्र दाताओपश्श त दा भू रिषुदा वा श श्व च्छ श्वातूदेत। त माताओंपब र्हि रा वा ज्येषुहि या हाप्लिउ वाशा। स्थाखत् ॥३०॥
॥ माधुच्छन्दसम् ॥
हा ओखाहाण। इ हाताओचपाकव स्व सो माटीमा धू मंकिॠ ताखावाश। आ पो व सा नोटुआ धी साकिनोखअ व्या इशि। आ व द्रो णा नीटुघा र्क्ता वकिन्ती रोखाहाश। हा ओखाहाण। इ हाताओचमकदि न्त मो माटीत्स र यापिइ न्द्रा पाखि। नाःत्र ॥३१॥
॥ सोमसामानिचत्वारि ॥
सो मः प व तेचुज नि ताकिच्मा ताकाइ नाटाम् । ज नि तातिदी वोचाज नी ताकिच्पृ थाकाइ व्याःटा। ज नि ता ग्नेषीर्ज नि ता सूकीरी याटायातस्या । ज नि तेकिन्द्रा स्याटाज नि तोपिता वाखाइश। ष्णोःत्र ॥३२॥
सो मः प व तेषुज नि ता एतीऔ होखावात्र। मा तापइशनात्रम् । ज नि ताकिदी वोकाज नी ताकिप्र थि व्याःचि। ज नाटाइ ताखाग्नेःण। ज नि ता सूखीरी याखास्यात्र। ज नि तेकिन्द्रा स्य ज नि तोकुत वि ष्णोःटिख् ॥३३॥
हा बु ज न द्धा बु ज न द्धा बु ज नषोज्ज न द्धा बु ज न द्धा बु ज न द्धातोबुशहो इ ज न द्धो इषूज न द्धो इ ज नाचूत् । सोकमः प वा तेटीजा नी तोकिम तीखानाशम् । ज नि ताकिदा इ वोटिजा नी ताकिपृ थीखाव्याःप्ल। ज नि ताकिग्ना इ र्जकिनि ता सूकिर्याखस्याश। हा बु ज न द्धा बु ज न द्धा बु ज नषोज्ज न द्धा बु ज न द्धा बु ज न द्धातोबुश। हो इ ज न द्धो इषूज न द्धो इ ज नाचूत् । ज नि तेकिन्द्रा स्याटाजा नी तोपिता वाखाइश। ष्णोःत्र ॥३४॥
ज न द्धा बु ज न द्धा बु ज न द्धा बुषौज न दा बु ज न दा बु ज न दातोबुशज न द्धो इ ज नषूद्धो इ ज न द्धोचुइश। सोकमः प वा तेटीजा नी ताकिम तीखानाशम् । ज नि ताकिदा इ वोटिजा नी ताकिपृ थीखाव्याःप्ल। ज नि ताकिग्ना इ र्जकिनि ता सूकिर्याखस्याश। ज न द्धा बु ज न द्धा बु ज न द्धा बुषौज न दा बु ज न दा बु ज न दातोबुश। ज न द्धो इ ज नषूद्धो इ ज न द्धोचुइश। ज नि तेकिन्द्रा स्याटाजा नी तोपिता वाखाइश। ष्णोःत्र ॥३५॥
॥ मरूतांव्रतोपोहस्सम्पद्वा ॥
ओकहा ओटाहाकओ हाटाइ याटाओटहातएत। आ भि त्रि प्रा ष्ठांटुवा र्षा णंकिव योखाधाशम् । अचङ्गो षी णाकिमाकवा वा शकिन्त वाखाणीःप्ल। वा ना व सा नोटुवा रू णोकिन सीखान्धूःप्ल। ओकहा ओटाहाकओ हाटाइ याटाओटहातएत। वी र त्न धाकीद य ते वापीरी याखा। णात्रइश ॥३६॥
सप्तम खण्डः (ऋ-९, सा-२१)
॥ कूत्सस्याधिरथ्यानित्रीणि ॥
होखवाशउ हु वा होखिवाण। प्रा से नाकिना इ श्शू रोटिअ ग्रा इ र थाखुनाशम् । ग व्य न्नेकिता इ ह र्षा तेटुआ स्य सेखिनाश। भा द्रा न्कृकिण्व न्नि न्द्रा हाकीवा न्सा खीखिभ्याःप्ल। आ सो मोकिवा स्त्राटार भ साकिनि दाखाक्तात्रइश। होखवाशउ हु वा होखीवा हाप्लाबुश। बाश ॥१॥
औ होफाओतवात। प्रा से नाकिना इ श्शू रोटीअ ग्रा इ र थाखुनाशम । ग व्य न्नेकिता इ ह र्षा तेटुआ स्य सेखिनाश। भा द्रा न्कृकिण्व न्नि न्द रा हाकीवा न्सा खीखिभ्याःप्ल। औ होफाओतवात। आ सो मोकिवा स्त्राटार भ सापिनि दाखा। क्तात्रइश ॥२॥
ओ होफाओतवात। प्राकसे नाथाना इ श्शू रोटीअ ग्रा इ रा थाखुनाशम । गकव्य न्नेथाता इ ह र्षा तेटुआ स्य सेखिनाश। भाकद्रा न्कृथाण्व न्नि न्द्रा हाटीवा न्सा खीखिभ्याःप्ल। ओ होफाओतवात। आकसो मोथावा स्त्राटार भ सापिनि दाखाणफप्ल। क्ताखइश ॥३॥
॥ वैश्वज्योतिषाणित्रीणि ॥
हा बु होतिहा इशाप्र ते धा रा माभुधूचमाकता इ र सृ ग्राटुन् । हा बु होतिहा इ वा रंषीय त्पू तो आ तीचुया इ षी या व्याटुम । हा बु होतिहा इशाप व मा न पाचुव सेकाधा म गो नाटीम् । हा बु होतिहा इशाज न य न्सू र्याचुमाकपा इ न्वो अ र्का इःटू। हा बु होखिहाप्लबुश। बाश ॥४॥
प्रा गा य ताटीभ्या र्च्चाकाम देखावाशन् । सोकमं हि नो ताटीमा हा तेकिध नाखायाश। स्वाकदुः प वा ताटीमा ती वाकिर माखाव्यशम् । आकसी द तूकिका ल शा न्दापीइ वा याखिइश। न्दूःत्र ॥५॥
हा बु होतिहा इशाप्र हि न्वा नोषीज नि ता रोखीद सीखायोःप्ल। हा बु होतिहा इशार थो न वा जंषुस नि षाखिन्न याखासीशत् । हा बु होतिहा इशाइ न्द्र ङ्ग च्छषीन्ना यु धा सांखीशि शाखानाःप्ल। हा बु होतिहा इशावि श्वा व सुषीह स्त यो राखीद धाखानाःप्ल। द धाखानाप्लबुश। बाश ॥६॥
॥ वाचस्सामनीद्वे ॥
ता क्षाफाद्या दीफाहोफइ म नाणिसा वे न तोफीवाफक् । ज्ये ष्ठाफास्या धाफाहोफर्म्मणद्यु क्षो र नीफीकाफइश। आ दीफामा याफान्होफइ व राणिमा वा व शाफीनाःफ। जू ष्टंफापा तींफाहोफइ ङ्क ल शे गाप्लुव इ न्दा बुशी। बाश ॥७॥
त क्षा द्या दाकीओपइ म नाणिसा वे न तोफीवातक् । ज्ये ष्ठा स्या धाकीओपर्म्मणद्यु क्षो र नीफीकातइश। आकदा इ मा याकीओपन्व राणामा वा व शाफीनाःत। जु ष्ट म्पा ताकीओपइ ङ्क ल शे गाप्लुव इ न्दा बुशी। बाश ॥८॥
॥ दाशस्पत्यानिषट् ॥
सा काताम् । उ क्षोषाम र्ज य न्त स्वाकुसाटराःत। दा शाटाधी र स्य धी त योकूधा नूटात्रीःत। हा रीटाप र्य द्र व ज्जाकुस्सू र्याटास्यात। द्रो णाटाच्न्नाकन क्षे अ त्ये न वाटूहा उ वाति। जीख ॥९॥
सा क मु क्षातीएत। एतएपम र्ज य न्त स्वाषुसा रो द श धी रातूएत। एतएपस्य धी त योषीध नु त्रि र्ह रिः प र्यातूएत। एतएपद्र व ज्ज स्सू र्य स्यषूद्रो ण न्न नातीएत। एतएपक्षे अ त्ये न वा हाप्लूउ वाशा। जीख ॥१०॥
इ न्दूथार्वा जीटाच्पा व ते गो न्यो घाकूच्इकन्द्रा इ स्सोटिमाःत। स ह इ न्वषीन्म दा याकिच्हकन्ता इ राटिक्षाःत। बा ध तेषिप रि य रा तिंकुच्वाकरा इ पाः कृती। ण्वाथन्वृ ज नाटिस्या रापाजौ वा उ वो वाप्लु। होप्लइ ळाशा ॥११॥
इ न्दु र्वा जी पषुव तौ हो औ हो वातूहातइश। गो न्यो घौकिवा उ वोखिवाश। इ न्द्रेकास्सो म स्सा हाकीइ न्व न्म दा यौकुवा उ वोखिवाश। हकन्ती र क्षो बा ध तेटूच्प रि य रा तौकुवा उ वोखिवाश। व रि वः कृकीण्व न्वृ ज नाटीस्या रापाजौ वा उ वो वाप्लु। होप्लइ ळाशा ॥१२॥
इ न्दु र्वा जीषीप व ते गो न्योतुघाःत। इ न्द्रे स्सो मषीस्स ह इ न्व न्म दातूयाश। ह न्ति र क्षोषुबा ध ते प र्य रातूतिशम् । व रि वः कृ ण्वषुन्वृ ज न स्य रातुजा रा जाखिऔ हो वाशि। एतस्या राटाजाख ॥१३॥
इ न्दु रौ हो वाषुहा ईतायात। वा जा उ वातीहा उ वाति। प वाकाते गोथान्यो घाकाउ वाताहा उ वाति। इकन्द्रा इ सो माकीस्स ह इ न्वकीन् । उ वाताहा उ वाति। माटट्दाखऔ हो वाशि। याखहकन्ताचइश। र क्षो बाथिधा ता इ पाकीउ वाताहा उ वाति। री याटाट्राखऔ हो वाशि। तीखम् । वा राचाइ वः कृकिण्व न्वृ जा नाकीउ वाताहा उ वाति। स्याटट्राखऔ हो वाशि। जाख ॥१४॥
॥ कश्यपस्यचशोभनम् ॥
अ धी य दाती। स्मा इ न्वाटिजि नीकाच्वा शु भाःचि। स्पाकर्ध न्तेथाच्धी या स्सूकिराखई न वि शाःशी। आ पो पृ णा नःषुप व ता इ क वीटूयाकथ्न्व्रा ज न्न पा शुटुवा र्ध नापिया माखा। न्मात्र ॥१५॥
॥ आत्रम् ॥
म ह त्त त्सो मोषुम हि षाचिश्चा का राटि। अ पांताय त्ग र्भोचिवृ णीकाच्ता दाकाई वाटान् । आ द धातिदि न्द्रेकाप व माचिना ओकाजोटअ ज नाकिय त्सूकार्येटज्योकति रिटान्दाकउ वाता। एतअ ज नाकिय त्सू र्येकिज्यो ति रि न्दूःखी ॥१६॥
॥ अपांसाम ॥
अ पा मी वे दू र्मषूय स्तौ हो औ हो वातूहातइश। तु रा णाखिहाशप्ल्हातहातइश। प्रा म नीचिषा ईपार ते सोणिमाफमा च्छाफाप्लहातइश। ना म स्य न्ता इषुरू प चाटिय न्तीकासफञ्चातहातहातआकच वि श न्तु शा तीचूरूकशफन्तांतहातहाखऔ हो वाशि। वातहाःटख् ॥१७॥
॥ श्नौष्टाणित्रीणि ॥
औ हो हा अ योतुहातइश। पा वा प व स्वै नाकुवा सूटानीतऔटहोचइ हाकाईटयात। माकथ्श्च त्व इ न्दोषीस र सीकिप्र धाटान्वातन्वा औटहोचइ हाकाईटयात। बृ ध्न श्चि द्य स्यषुवा तोकाना जूटातींतऔटहोचइ हाकाईटयात। पु रूषामे ध श्चि क्त क वेकूना राटान्धातत् । औटहोचइ हाकाईटट्याखऔ हो वाशि। एतदी दि हीतिच् ॥१८॥
अ योताहा इ प वोतीहातइश। पा व स्वै नातीवा सूटानीतइ होकाइ हाकाईटयात। मां श्च त्व इ न्दोषुस र सीकिप्र धाटान्वातइ होकाइ हाकाईटयात। बृ ध्न श्चि द्य स्यषुवा तोकान जूटातींतइ होकाइ हाकाईटयात। पु रू मेषिध श्चि क्त क वेकुना राटान्धातत् । इ होकाइ हाकाईटट्याखऔ हो वाशि। एतदी दि याटिख् ॥१९॥
हा उ वोखिवाशहा उ वोखिवाशहातओपवाशहा उ वाति। आ याचापा वाचाप व स्वैकिना व सूकिनी होकाच्इकहि याटाई होटाइ हाटाख। मांकथ्श्च त्व ई न्दोकीस र सि प्र ध न्वाकूइ होचाइ हि याटिइ होटाइ हाखा। बृ ध्नाचाश्चि द्याचास्य वा तोकिन जू ति मि होकुच्इ हि याटिइ होटाइ हाखा। हा उ वोखिवाशहा उ वोखिवाशहातओपवाप्लहा उ वाति। पू रू मेकिध श्चि क्त क वेकुन रा न्धाकिदि होकाच्इ हि याटिइ होटाइ हाखा ॥२०॥
॥ वासिष्ठम् ॥
अ सा औभिहोत। जीकवा क्वाटार थ्या इ यापीथाश। जाखबुश। धि या औभिहोत। मा नो ताटिच्प्राकध मा मापिनीशषाख। द शा औभिहोत। स्वा सा रोटिच्धि सा नोपिआश। व्याखइश। मृ जा औभिहोत। न्ति वा न्हींटिच्साकद ना इ षूपीव च्छा बुशि। बाख ॥२१॥
अष्टम खण्डः (ऋ-१७, सा-३३)
॥ नकूलस्यवामदेवस्यप्रेंखौद्वौ ॥
पु रो जि तीती। वो अ न्धाखिसाःण। सू ता य माटीद याताआ उ वा एभि। त्नाखवेश। आ प श्वा नंटीश्न थाताआ उ वा एभि। ष्टाखनाश। सा खा यो दीटीर्घ जाताआ उ वाटि। ह्वीखयशम् ॥१॥
पू रो जि तीती। वोतआ न्धापासाःश। सू ताकाच्याकमाटऊटहो वाथाऊट। दातया इ त्नापिवेश। आचप श्वाथानाटऊटहो वाथाऊट। श्नातथा इ ष्टापिनाश। साचखा योथादाटऊटहो वाथाऊट। र्घाटट्जाखऔ हो वाशि। एतह्वी याटाख्म् ॥२॥
॥ महाकार्क्तवेशञ्च ॥
पु रो हातिहा बु जाखिइ तीणा। वोतआ औकाहो अ न्धाखिसाःण। सू ताचाऔकहोखया मा हा ओ वाशु। दाचइ त्ना वाकिऊकपाख। आ प श्वा नं श्न थायूइ ष्ठापानाश। सा खाचाऔकहोखयो दा हा ओ वाशु। र्घाकजि ह्व्य मूटिपाख ॥३॥
॥ और्ध्वसद्मनञ ॥
पु रो जि ती वोषुअ न्ध स उ वातुहातइश। सू ता य मा दषुइ त्न व उ वाटूहोचआ प श्वा नंषीश्न थि ष्ठ न उ वाटूहोचइश। साचखा योथादा इ र्घाकिजि ह्वाखायात्रम् । सू वृ क्ति भीकीच्न्नृकमा द नं भ रेटुषु वाताच् ॥४॥
॥ श्यावाश्वञ्च ॥
पू रोचाजीयतीपवोप्लअ न्धा स एखीहि याणा। सू ता य मा दाकुइ त्न वाटिए हि याटि। आ प श्वाकिनं श्नापाथीशष्टातनात। ऐकहाटए हि याटि। स खाकायो दा इ र्घापीजीशह्वाखयाप्लम् । हा इशा ॥५॥
॥ आन्धीगवञ्च ॥
पु रो जि तीषीव या ओ न्धातूसाःत। सू ता य मा दापुयाशहि माटाट्। त्न वेटाच्आ प श्वा नंकीश्न धि ष्ट नाती। सा खापाउ वाशा। योटदी र्घाटाजीतह्वीकया औटाहोखबाप्ल। होप्लइ ळाशा ॥६॥
॥ क्रौञ्चानित्रीणि ॥
अ यंकापू षौ हो इ राकुयि र्भ गाःचि। सो मः पु नातीनो आटार्षाख। तात्रइश। पा तिकार्वि श्वौ हो स्याकीभूचम नाःशा। व्य ख्य द्रोतिदा सीटाऊख। भात्रइश ॥७॥
अ यं पू षाषीअ यं पू षातू। राकयि र्भ गाचिस्सो माःथापू नाटानोकअथर्ष ताचाइश। पा ति र्वाचिइ श्वाटाओ स्या भूयिमा नाःटा। ओ इ व्य ख्याटीद्रोत। दा सीकाऊ भा इ ळाटीभाखण्। ओपइ ळाशा ॥८॥
आ यंचापूकषाफप्ल्हो इ र यिखीर्भ गा एप्लि। सोतमः पु नाटिन याखाणफप्ल। र्षाखतिश। पा ति र्विचिश्व स्य भू म नाःटुख। व्य ख्याटाद्रोत। दा सी उटिभाखण्इश। ओपइ ळाशा ॥९॥
॥ गृत्समदस्यसूत्राणि चत्वारि ॥
आ हाथाआपवाण। री याकाताकय धृ ष्ण वेटीध नूकाओपवाण। ष्ट न्वकाच्न्ती पौं स्यंकिशु क्राताओपवाण। वि य न्त्य सु राटुय निचार्न्नि जेटावि पांताओपवाण। अ ग्रेचाम हीटायु वाःटाख् ॥१०॥
हातहातआ ह र्या ताकीयाखधृशप्ल्हातहाखऔ हो वाशि। ष्णाखवेश। हातहातइ धा नु ष्टा न्वकुन्तीखपौःशप्ल्हातहाखऔ हो वाशि। सीखयशम् । हातहातइ शु क्रा वि यकुन्ता य सु राटीयाखनीशप्ल्हातहाखऔ हो वाशि। र्न्नीखजेश। हातहातइ वी पाकिमा ग्राटाइ माखाहीशप्ल्हातहाखऔ हो वाशि। यूखवाःप्ल ॥११॥
आ ह र्य ता यषुधृ ष्ण वा यातु। धा नूचाष्टायन्वाटती पाकापुं सायायांट। शु क्रा वि यकीन्ता य सु राकीया नीकार्न्नाखइ जाणाइश। वी पाचामायग्राटइश। ओ इ मापिहीशयूखवोप्ल। हा इशा ॥१२॥
आफह रीणाया ताप्लाया धृफाष्णा वेखाध नू ष्ट न्वाशीन् । ति पातापुं स्यंथाशु क्रा वि यकीन्ता य सु राकीय ना उ वाशी। र्न्नीखजेश। वा इ वांटिहातआ ग्रेटाहातइश। मा हीचायूटवाःखण्। ओपइ ळाशा ॥१३॥
॥ आकुपारम् ॥
प रि त्यं ह र्य तंचूह रिंकापापरि त्यं औ होप्लीर्य तं ह राङीइशम् । ब भ्रं पु न न्ति वाकूरेथच्णा बापाअ भ्रं पु नौ हौप्लन्ती वा रेङिणाश। यो दे वा न्वि श्वंषुइ त्पाचारीकयोपदे वा न्वौ होप्लीइ श्वं इ त्प राङुइश। म दे नषिस ह ग च्छाचीतीकमापदे न सौ होप्लीह ग च्छा तोप्ली। हा इशा ॥१४॥
॥ त्वाष्ट्रीसामनीद्वे ॥
सु ता सो माती। धू माताक्त माःतासो मा इकिन्द्रातय माताएतन्दि नातायाख। प वाचाइश। त्र वातान्त याताएतक्ष रकान्नाखदा इ वाचिन् । ग च्छातान्तु वाताएतम दातायाख ॥१५॥
सु ता सो मषीधु म क्त माःती। सो माटाइ न्द्राटाय माखाणफप्ल्। न्दीखनाःप्ल। पा वि त्र वाटीन्तो अ क्ष र न्दे वातून् । ग च्छाचान्तु वो माटिदाःखण्। ओपइ ळाशा ॥१६॥
॥ सोमसामानिचत्वारि वासिष्ठानिवा मदाईनिधनानिवा त्वाष्ट्रीसामानी ॥
सु ता सो माखाधू मा क्ता माःप्ली। सोकमा इ न्द्रा य मकुन्दी नाःकापा वाटाउ वोखावाश। त्र व न्तो अ क्ष रषून्दे वातान् । ग च्छाचान्तु वो माटिदाःखण्। ओपइ ळाशा ॥१७॥
सु ता सो म धू मषूक्त म स्सो मा इ न्द्रातू। य म न्दी नाः पायुवीटच्त्रायवाटन्तो अ क्ष र न्दाकुइ वा न्ग च्छाकीउ वाशा। तूखवाःप्ल। म दा औटिहोखबाप्ल। होप्लइ ळाशा ॥१८॥
सु ता सो मषीधु म क्त म स्सो मातूहातबुश। इ न्द्राथायाचमायन्दि नाःटा। इ न्द्राथाहो य माटिन्दाखइ नाःणा। पा वि त्र वाकीन्तोटअ क्षा राभिन् । त्र वाताहो न्तोटाअ क्षाखारणन् । दे वा न्ग च्छचीन्तुकवोयमा दाःटा। दे वाथान्हो इ ग च्छोखीहाणइश। तूटट्वाखऔ हो वाशि। म दातायाटख् ॥१९॥
सु ता सोषिम धु म क्त मातुएत। सो मा इ न्द्राचीयाकमायन्दि नाटादा इ नाःटि। पा वि त्र वाकीन्तोटअ क्ष राटिन्क्षा राटा। दे वा न्ग च्छचीन्तुकवोयमा दाटामा दाःटा। दे वाथान्हो इ ग च्छोपीहाणइश। तूटट्वाखऔ हो वाशि। मा दाताईटख् ॥२०॥
॥ त्वाष्ट्रीसामनीचैव ॥
सु ता सो माटीहा धुचाम क्ता माःटि। सो मा इ न्द्राटीहा य माचिन्दा इ नाःटि। पा वि त्र वाटीहाकन्तोथअ क्षा राटिन् । न्दे वा न्ग च्छाटीहातन्तु वोप्लाहोपबाप्लमा दोप्ला। हा इशा ॥२१॥
सू ताणासोचमाकफ्हातहा धूचाम क्ता माःपि। सो माफाइ न्द्राफाप्ल्हातहा य मचिन्दा इ नाःपि। पा वीणात्रा वाफाप्ल्हातहातन्तोथअ क्ष रापि। न्दे वाफान्ग च्छाफाप्ल्हातहातन्तू वोप्लाहोखबाप्लमा दोप्ला। हा इशा ॥२२॥
॥ क्रौञ्चेद्वेशार्मदेवा ॥
हा बु सो माःती। प वकान्दाटइ न्दा वाभिउ वाताहा उ वाति। अ स्माकाभ्य ङ्गाथातु वि क्ता माभीउ वाताहा उ वाति। मि त्राकास्वा नाथाआटरे पा साभिउ वाताहा उ वाति। स्वाफधि यातास्सूपवाशर्वाखइ दोप्ला। हा इशा ॥२३॥
सो माःफाप व न्त ईखीन्द वाःशा। अ स्मा भ्य ङ्गाकीतु वि क्ताकिमाःख। मा इ त्राटिउ वोखावाश। स्वाकना अ रेकिप साःटाख्। स्वातच्धि याःचा। सू व र्वाटिइ दाःखाण्। ओपइ ळाशा ॥२४॥
॥ सोमसामानि त्रीणि ॥
अ भि नो वाती। जाटट्साखऔ हो वाशि। ताखमशम् । र यि माटिर्ष शाकात स्पृ हाकिमि न्दो स ह स्र भाटूहो र्ण साटिम् । तु वि द्यु म्नं वि भाटूहो एटा। स ह मोखिइ ळाशा ॥२५॥
अ भि नो वाती। जा सा त मंकीरा यीचाम र्षाकाउ वाकाओटहातइश। श त स्पृचिहा मि न्दोटिच्साकहा उ वाटिओटहातइश। स्र भ र्ण सषीन्तु वा इ द्युटीट्म्नाखऔ हो वाशि। वि भातासाटहाखम् ॥२६॥
अ भीटाहो इ नोकिवा जा साशिहो ताखामशम् । र यिंटाहोकअचर्ष शाखाताशहो स्पृखाहशम् । इ न्दोटाहोचइशस ह स्राखिभाशहो र्णाखासशम् । तु वाटाहो इ द्युकिम्नं वि भा हो साखु। हात्रम् ॥२७॥
॥ क्रौञ्चञ्चैव उद्वद्ववा ॥
आ भि नो वाकीओपज साप्लात माताम् । रा यि म र्षाकीओपश ताप्लास्पृ हाताम् । इकन्दो स हाकिओपस्र भाप्लार्ण साताम् । तू वा इ द्यु म्नाकुओंपवि भा स हाप्ली। बुश। बाश ॥२८॥
॥ सोमसामचैव ॥
अ भि नो वौ होतुज सा त मातीम् । र यि म र्षौ होतुश त स्पृ हातीम् । इ न्दो स हौ होकुस्र भ र्णा सातीम् । तु वि द्यु म्नौ होकुवि भा स हातीम् । स ह न्तु वि द्यु म्नंषूवि भा हाप्लिउ वाशा। सा हाचामेटख् ॥२९॥
॥ प्रैय्यमेधानि त्रीणि ॥
आखभीण। ओ इषान व न्ता या दृयुहाःट। ओ इ प्रि यषीमि न्द्र स्य का मायुमा याटम् । ओ इ व त्स न्नषुपू र्व आ यूयीनीट। ओ इ जा तंषीरि ह न्ति मोपीबाप्ल। ताखराःप्ल ॥३०॥
आ भीफान व न्त याखीदृ हाःशा। प्री यातामि न्द्रातास्या काकामाखयाणम् । व त्स न्न पूतीर्वा आकायूखनीण। जा तंकाहो इ रि हाकीहोकथ्न्ती मा ताटिराःखण्। ओपइ ळाशा ॥३१॥
अ भि न व न्तषुअ द्रु हः ओतीहा इशा। प्रि य मि न्द्र स्य काषूमि य मोतिहा इशा। व त्स न्न पूतूर्वा यु न्यौ हो वातुहातइश। जा तं रि हाकीउ वाशा। न्तीखमाश। ता रा औटिहोखबाप्ल। होप्लइ ळाशा ॥३२॥
॥ औशनंवैरूपम् ॥
प्रा सु न्वापिना य आ न्धा साःशु। मा र्क्तोथान वाटाष्ट त द्वाखिचाःण। आ प श्वाषिन म रा धातीसातम् । हा ता माटिघ न्न भ्र ङ्गाखी। वाःत्र ॥३३॥
नवम खण्डः (ऋ-१८, सा-३५)
॥ कावम् ॥
आ भी प्रीखियाशणी पा वाखिताणइश। चाकनो हि तोटिना मा नीखियाशह्वो आ धीखियेण। षूकव र्ध ता एभिआ सू रीखियाशस्या बृ हाखिताःण। बृकह न्न धा एभीर थां वाखिइ श्वांशाचा मा रूखिहाणत् । वि चाताआ उ वाटि। क्षाखणाःप्ल ॥१॥
॥ प्रजापतेर्वाजसनिनीद्वे ॥
एतआ भीचाप्रीकयाफ। ओतणी पा वाचिता एताच नो हीचिता एताना माचानीकयाफ। ओतह्वो अ धीचिया एता। षु व र्धाचिता एता। आ सूचारीकयाफ। ओतस्य बृ हाचिता एताबृ हाचान्नाकधीफ। एतरा थांचावीकष्वाफ। ओतञ्च मा रूचिहा देता। वि च क्ष णाःप्लु। होप्लइ ळाशा ॥२॥
अ भ्यौ हो वा हा इषूप्रि या णीति। पा वा ताकिइ चाखानोण। हि तो नाटिमा नि य ह्वोकीअ धि यातिइशषू वाचार्धा ताचाइश। आटसू रि याकिस्य बृ हा तोचीबृ हचान्नाकधाचइश। रा थं वा इ ष्वा ञ्चाकूम रू हाकिद्वि चाताआ उ वाटि। क्षातणाःटख् ॥३॥
॥ वाजिजितौद्वौ ॥
आकभि प्र या णिकीच्पा व ता इशीहो इ हो वाकीहो एपाच नो हि ता हा इ हो वा हा इशै। ना माथानि या ह्वोकिच्आ धि या इशीहो इ हो वाकीहो एपाषु व र्ध ता हा इ हो वा इशे। आ सूथारि या स्यचिबृ ह तोशिहो इ हो वाकीहो एपाबृ ह न्न धी हा इ हो वा हा इशै। रा थंकावि ष्वा ञ्चाकिच्मा रू हाकिद्धो इ हो वाटीहो एपावि च क्ष णाःषीहा इ हो वाप्लीहा उ वाशि। वाकजी जी गीकवातच् ॥४॥
आकभि प्रि या णीकीप व ता इ चाकुनो हि ताशिहो वाकाहोचइश। ना माथानि या ह्वोकिअ धि या इ षूकुव र्द्ध ता इ हो वाकूहोचइश। आ सूथारि या स्याकिबृ ह तो बृकीह न्न धीशिहो इ हो वाकीहोचइश। रा थंकावि ष्वा ञ्चाकिम रू हा द्वीकीच क्ष णा होकीवा होटाट्वाखऔ हो वाशि। वाकजी जी गीकिवा वि श्वाकिध नाटानीख ॥५॥
॥ कावञ्चैव ॥
अ भ्योतावात। प्री या णिषिप व ता इ च नोकूहा इ ताःटि। ना मा नि य ह्वोषुअ धि या इ षूकुव र्ध ताटिइश। आ सू र्य स्यषीबृ ह तो बृ हकुन्ना धीटा। रा थां वाखिइ ष्वाशाञ्च मातारू हाटाद्वा इ चाटिक्षाख। णाःत्र ॥६॥
॥ सामराजानित्रीणि विशालानिवा उद्वन्तिवा सम्पद्वा तृतीयम् ॥
अ चोकादा सोटानोकथ्धाचनु वाटान्तूतइ न्द वाःचि। प्र स्वाथाना सोटाबृ ह द्दाचिइ वेटाषूतहा र याःचि। वी ची दाचिश्नाटनाकथ्इ ष योटिआतरा त याःचि। अ र्योथाना स्साटान्तू साचाना इ षाटिन्तूतनो धी याकिच्बुश। बाटख् ॥७॥
आ चोकादा सो नो ध न्वाखुन्तु वि न्द वाःशी। प्र स्वाकाना सो बृ ह द्दे वाचूख्इ षू ह र याःशु। वा इ ची द श्नाचुनाकच्इ ष योखिअ रा त याःशी। आ र्योकान स्स न्तुषिस नी ष न्तूकीनोफधी याप्लाबुश। बाश ॥८॥
हा बु होतिहा अ चो दाकीसो नोथानु वाखान्तुशइ न्द वाःचि। हा बु होतिहा इ प्र स्वाकीना स्सोथाच्बृकहा द्देकावाखइ षुशाह र याःखि। हा बु होतिहा इ वि चि द श्नाचूनाकइ ष योखिआकरा त याःखि। हा बु होतिहा अ र्योचिन स्सकाच्न्तूकसाचनि षाखान्तु नो धि या बुशु। बाख ॥९॥
॥ आङ्गीरसानित्रीणि ॥
अ चोताहातइश। दा सो नोषिध नु वा न्तु विकुन्दा वाःटा। प्र स्वा ना सोषीबृ ह द्देकिवा इ षूकिह र याःटि। वि चोखाहा इशाद श्नोखाहा इशाना इ ष यो अ रोखूहाणइश। ता याकाअ र्योखाहा इशान स्सोखाहाशन्तु सा नीखिषाणम् । तु नाटाउ वाता। धीखयाःप्ल ॥१०॥
अ चौ होतिवात। दा सो नोषिध नु वा न्तु विकान्दा वाःट। प्र स्व ना सोषीबृ ह द्दे वा इ षुकुहा रा याःटि। वा इ चीटिदाखश्नाशना इ षाखियोशहो अ रा ताखीयाःण। होतआ र्योटानाखस्साशन्तु सा नीखिषाण। हो न्तु नो धाखी। याःत्र ॥११॥
अ चौ हो वातीहातइश। दा सो नोषिध नु वा न्तु विकुन्दा वाःटा। प्र स्वा ना सोषीबृ ह द्दे वा इ षूकूहा रा याःटि। वाटइ चीतादाटश्नाखनाणइ ष यो अ राफुतातयाःत। आटर्योतनाटस्साखन्तूणस नी षाफिन्तु नो धाखि। याःत्र ॥१२॥
॥ औशनम् ॥
एकष प्र को शेटीच्माकधू मंटाअ चा इ क्राखीदाणत् । इ न्द्रा स्य वा ज्रोटुचवाकपू षांटाव पु ष्टाखिमाःण। अ भा इ मृ ता स्यांटूच्सूकदू घाटाघृ ता श्चूखिताःण। वाकश्रा अ र्षा न्तीटीपाकय साटाच धा इ नाखी। वाःत्र ॥१३॥
॥ प्रवत्भार्गवम् ॥
प्रोतअ या साचिइ दिफान्दू रि न्द्रा स्याटीनि ष्कृ ताचिम् । स खाकास ख्युकार्न्न प्र मि ना ताभुइ स ङ्गि राचीम् । म र्याथाइ वाकायु वाशाति भा इ स्साभीम र्ष ताचिइश। सोथमः क ला शेकीश त या माभीना पाचाथाचबुश। बाटख् ॥१४॥
॥ विरूपस्यचतन्त्रे ॥
प्रोतअ या साचिइ दिथान्दू रि न्द्रा स्याटीनि ष्कृ तांपिसा खाचासाकख्यूफर्न्न प्राचामिकनाफति स ङ्गाखिइ रशाम् । म र्याथाइ वाकायु वाशाति भा इ स्साभीम र्ष ता एपीसो माःचाकाकलाफशे शाचाताकयाफम ना पाखि। थात्र ॥१५॥
प्रो अ याखिसीणत् । इ न्दु रि न्द्रापीस्याशनि ष्कृकातंफसा खाचासाकख्यूफर्न्न प्र मि नापुतीशस ङ्गीकारफम् । म र्याचाईकवाफयु वा ति भा एपुसाशम र्षाकाताफइश। सो माःचाकाकलाफशे श त याटीम ना पाखि। थात्र ॥१६॥
॥ भार्गवञ्चैव ॥
प्रो अ या सी दि न्दुषूरि न्द्रा स्य नि ष्कृ तांतूकृ ताखाम् । स खाताओपण्स ख्यु र्न्न प्र मि नाषूति स ङ्गि रांतीगि राखाम् । म र्याताओपण्इ व यु व ति भिषूस्स म र्ष तातीइ ष ताखिइश। सो माताओपण्क ल शे श त याषूम ना पाखि। थात्र ॥१७॥
॥ यामम् ॥
ओ वाथाइ याचा। प्रो अ या सी दि न्दुषूरि न्द्रापास्या नीचाष्कृ ताफाम् । सा खा स ख्यु र्न्नषुप्र मि नापिती सचाङ्गीकरफम् । म र्य इ वषीयु व ति भा एपुसा मचार्षाकताफइश। ओ वाथाइ याचा। सो मः क ला शेयुश त याटिम ना पाखि। थात्र ॥१८॥
॥ दार्शशीर्षेद्वे ॥
ध र्क्ता दाकिइ वाखाअ वा एङि। प व तेचिकृकत्वि यो राकिसाखअ वा एङि। द क्षो दाकिइ वाखाअ वा एङि। नाचम नु माकिच्दि यो नृकिभाखइशअ वा एङि। हा रा इ स्साकीर्जाखअ वा एङि। नो अ त्योकिच्ना सा क्वाकिभाखअ वा एङि। वृ था पाकिजाखअ वा एङि। सि कृ णु षातीइ नाकादा इ षूकिवाखअ वा एप्लि। होप्लइ ळाशा ॥१९॥
ध र्क्ता बु होतीहोतहातइश। दी वः प व ताचुइ कृथाऔटहोतहातहातइश। त्वि योचारा सोचाद क्षोचादाथइ वा औटिहोतहातहातइश। ना मा नु माकीदी यो नृ भाकीइ र्हा राचिइ स्साचार्जाथऔटहोतहातहातइश। नो अ त्योकिना स क्वा भाकीइ वृ थाचिपाथजा औटाहोतहातहातइश। सि कृचाणूथषा औटाहोतहातहातइश। न दी षूकिवाकऔटहोतहातहाखऔ हो वाशि। एतच्ना दीकाषू वाटाख् ॥२०॥
॥ सैन्धुक्षितानित्रीणि ॥
वृ षाकामा तीटानाकथ्म्पा व ताटिएतवी च क्षाचिणाकएख। सो मोथाअ न्हाटाम्प्रा ताचारा इ ताटिएतउ ष सा न्दीचीवाकएख। प्रा णाथासा इ न्धूटिनांकथ्का ला शंटिएतअ चि क्राचिदाकदेख। इथन्द्रा स्याटाहाटर्द्या वा इ शाटीनेतम नी षीचिभीकरेखण्। ओपइ ळाशा ॥२१॥
वृ षाटाम ताटाई ना म्प व तेकुवी च क्षाटिणाःत। सो मोटाअ न्हाटाम्प्र त री तोकीषा सा न्दाटिइ वाःता। प्रा णाटासा इ न्धटिना ङ्क ल शंकीआ चि क्राटिदातत् । आ इ न्द्राटिस्या हाटाद्या वि शकिन्मा नी षाटिइ भाखाण्इःश। ओपइ ळाशा ॥२२॥
वृ षा म ती नांकुप व ताकिइ वायाइ चापाक्षा णाःता। सो मोकाअ न्हाकाम्प्र त रीकितो षायासापन्दि वाःका। प्राकणा सि न्धूकिच्नाकङ्क ल शंटिअ चापाइ कृ दातित् । आ इ न्द्रा स्याकीहा र्द्या वि शकीन्मायनापइ षीशाभाणबुश। बाख ॥२३॥
॥ यामानित्रीणि ॥
अ साकावि सो मोकिच्आकरू षोपावृ षाशाह राताइःश। रा जेथाव दा स्मोकिच्आकभी गापाचीप्लकृ दाकात् । पु नाकानो वा राकिच्माकति धा एपिषी याप्लाव्य याताम् । श्ये नोथान यो नीकिच्ङ्घृकत वापान्त मा स दाप्लीत् । होप्लइ ळाशा ॥२४॥
आ सा वीखिसोशमो आ रूखिषाःण। वाकर्षा ह रा एभीरा जे वाखिदाशस्मो आ भीखिगाण। आकचि क्र दाटित्पू ना नोखिवाशरा मा तीखियेण। षीकअ व्य यांटिश्ये नो नाखियोशनी ङ्घा र्क्ताखिवांण। त मातासाटट्दाखऔ हो वाशि। देतदी वीटाख् ॥२५॥
अ सा वि सो मोषुअ रु षो वृ षा ह रातूइःश। रा जे व द स्मो अषूभि गा अ चि क्र दातू। पु ना नो वा रषुम त्य ष्य व्य यातुम् । शे य नो न यो निंषूघृ त वातिन्त मातासाटट्दाखऔ हो वाशि। एतदी वीटाख् ॥२६॥
॥ मरूतान्धेनुनीद्वे ॥
प्रा देता। वा म च्छा म धु मकूच्न्ताकआटइकथ्न्दा वाःटा। आचसि ष्याखादकन्ताथगा व आटिच्नाकधाटच्इ ना वाःचि। ब र्हि षाखिदाःण। वा चाचाना वा न्ता ऊटीच्धाकभा इः पाकिरि स्रूखातणम् । उ स्रि या नि र्णि जषून्धा इ रा एटीधा इ राखिऔ हो वाशि। धातइ राटाख्इश ॥२७॥
त्रापइ र स्मै स प्तषुधे न वो दु दौ होप्लूह्राङइ रा इशि। स त्या मा शी रषुम्प र मे व्योकीमा नीटा। च त्वा र्य न्याषीभु व ना नि निकुर्णा इ जाटिइश। चा रू णाखिइ चाणा। क्रेकअ द्रु ताटिइशरा वाटा। र्द्धाखतात्र ॥२८॥
॥ वसिष्ठस्यापामीवेद्वे वायोर्वाभिकृन्दौ ॥
इ न्द्रा य सोकीम सु षु ताःखीपा रीचास्राकवाफ। आ पा मीकिवा भ व तु राखुक्षा साचासाकहाफ। मा ताकाइ र स स्यषीम त्स ताखिद्वा याचावीकनाःफ। न्द्रा वाचाइशण स्व न्त इ हषुस न्त्वा इ न्दाखू। वाःत्र ॥२९॥
इ न्द्रा य सो म सु षुषृतः प र्यौ हो इ स्रातूवात। आ पा मी वाषीभ व तु र क्ष सायूसापहाश। मा ते र स स्यषुम त्स त द्व यायुवीपनाःश। द्राखवीप्लणाखस्वाणन्ता ईकाह साटाहोटन्तु वा इ न्दाखी। वाःत्र ॥३०॥
॥ अञ्जतेव्यञ्जतेस्समञ्जतइति काक्षीवतानांसामानि त्रीणि शार्ङ्गाणिवा ॥
अकञ्ज ताकाइ व्य ञ्ज ता इषुस म ञ्ज ताटीइश। क्र तुंकारि हा न्तीकिम ध्वा भ्यकिञ्जा ताटाइश। सि न्धोथारू च्छा सेकिप त याकिन्ता मु क्षा णाटीम् । हि रकाण्य पा वाःकिप शु मा प्सूकीगृ ब्णा ताचिबुश। बाटख् ॥३१॥
अ ञ्जाताहोचत याताहो इ व्यकिञ्ज तेचासा मचाञ्जकताफइश। क्र तुंताहोचइशरि हाताहोटन्ति म ध्वाखिभी यचाञ्जकताफइश। सि न्धोतार्होचउ च्छ्वाताहो सेकाप त याखिन्ता मूचाक्षाकणफम् । हि राताहोचण्य पाताहो वाःकाप शु म प्सु गृ भ्णाखू। तात्रइश ॥३२॥
हा व ञ्जाति। तापइशव्य ञ्ज तेणिस म ञ्जचिता एटाहि याताएटहि याखाहा बु क्रा तुशीम् । रापइ हणान्ति म ध्वा भ्य ञ्जचुता एटाहि याताएटहि याखाहा बु सा इ न्धोःशु। ऊपच्छ्वा सेणाप त य न्त मु क्षाचूणा मेटाहि याताएटहि याखाहा बु हा इ राशु। ण्यापपा वाःणाप शु म प्सु गृ भ्णाचून्ता एटाहि याताएटहि याखाहाप्लबुश। होप्लइ ळाशा ॥३३॥
॥ आदित्यस्यार्कपुष्पे देवानांवा ॥
पा वि त्र न्तेकीवि त तंकिब्र ह्म ण स्प तेकुहु वेटाहु वेटाहो वाटाहातहातइश। प्रा भु र्गा त्राटीच्णीकप र्येटाषी वि श्व ताचीहु वेटाहु वेटाहो वाटाहातहातइश। अ त प्त त नूकुर्न्न त दाकिमो अ श्नु तेकीहु वेटाहु वेटाहो वाटाहातहातइश। श्र ताकास इ द्व हकीन्त स्स न्त दा श ताकूहु वेटाहु वेटाहो वाटाहातहाखऔ हो वाशि। अ र्को देटिवा नांटाप रा मेचिव्योटमाखन् ॥३४॥
पा वि त्र न्तेकीवि त तंकिब्र ह्म ण स्प तेकीच्हू वाकाऔटहो वाटा। प्रा भु र्गा त्राकीणी प र्येकिषी वि श्व तोकीच्हू वाकाऔटहो वाटा। अ त प्त त नुकुर्न्न त दाकिमो अ श्नु तेकीच्हू वाकाऔटहो वाटा। श्र ता स इ द्व हकून्त स्स न्त दा श ताकूहू वा औटिहोटवाखऔ हो वाशि। अ र्क स्य देकिवाःकच्प रा मेचिव्योटमाखन् ॥३५॥
दशम खण्डः (ऋ-१७, सा-३९)
॥ वसिष्ठस्यपदेद्वे ॥
इ न्द्र म च्छाती। सू ता ई माटीउ वोखावाश। वृ षाकाण य्यथान्तूटच्हाकर याटाउ वोखावाश। श्रू ष्टाचाइश। जा ता स इ न्दा वाःचू। सू व र्वाटिइ दाःखाण्। ओपइ ळाशा ॥१॥
इ न्द्र म च्छाती। सू ता ई माटीइ ता ईटिमातइश। वृ षाकाण य्यथान्तूचहाकर याटाहाकराटयाःत। श्रु ष्टेकाजा ताथासाटइ न्द वाटिआ इ न्दा वाःती। सु व राटिख्औ हो वाशि। वि दोतावीटदाःख ॥२॥
॥ वसिष्ठस्यानुपदेद्वे ॥
इ न्द्र मि न्द्राती। आचच्छाकसू तायाइ मेटाआ इ मेटि। वृ षाकान य्यथान्तु हाकार याटारा याःटा। श्रु ष्टेकाजा ताथासाटइ न्द वाटिदा वाःटा। सु व राकिख्औ हो वाशि। वि दोतावीटदाःख ॥३॥
इ न्द्र म च्छ सु ता इ मेषृवृ ष ण य्य न्तु हाफूहोतर यातायाःख। श्रु ष्टाकाउ वाकाजा ताकाउ वाका। स इ न्द वाचीस्सूकवाफप्ल्होत। र्वि दोखाइ ळाशा ॥४॥
॥ पौष्कलम् ॥
इकन्द्र मापाच्छा स्सूप्लाता ईखामाणइश। वृ षाचाण य्य न्तु हाकीराखयाःण। श्रु ष्टाचाइश। जा ता स इटीन्दाखवाःत्र। सु वातार्वि दाःटाख् ॥५॥
॥ ऐषिराणिपञ्च ॥
प्र धकान्वा सौशाहो औकाहोचवाण। म जाकाग्र वीःटा। इ न्द्राथाये न्दौशाहो औकाहोखवाण। प रीचास्रा वाटा। द्यु मकान्तां शौशाहो औकाहोखवाण। ष्म माकाभा राटा। सु वकार्वि दौ हो औकीहोखवात्र। ऊखपाश ॥६॥
प्र धकान्वा सौ हो वाकीहो म जाकिग्र वीःटा। इ न्द्राथाये न्दौ हो वाकीहो इ प रीकीस्रा वाटा। द्यु मकान्तां शौ हो वाकीहो ष्म माकिभा राटा। सु वकार्वि दौ हो वाकिहोटट्वाखऔ हो वाशि। ऊखपाश ॥७॥
औकहो औ होचिइशप्र धकान्वा सोटा। औकहो औ हो म जाकुग्र वीःटा। औकहो औ होचिइशइ न्द्राथाया इ न्दोटिच्। औकहो औ हो इ प रीकूस्रा वाटा। औकहो औ होचिइशद्यु मकान्तां शूटाच्। औकहो औ हो ष्म माकुभा राटा। औकहो औ होचिइ सूकावातर्वातट्इ दाखाऔ हो वाशि। ऊखपाश ॥८॥
हु वाटाइ हु वाटिहो इशाप्र धकान्वा सोटाम जाकाग्र वीःटा। इ न्द्राथाया इ न्दोटिपा रीचास्रा वाटा। द्यु मकान्तां शूटाष्मा माकाभा राटा। हु वाटाइ हु वाटिहो इशासूकवातर्वाटइ दाखाऔ हो वाशि। ऊखपाश ॥९॥
प्रा ध न्वापिसो म जा ग्र वीःशु। इ न्द्राटायाखइ न्दोणा। ओ इ पाटिरा इ स्रापिवाश। द्यु माटान्तांखशूण। ओ ष्म माटिभाखरात्र। सू वातार्वीटदाखम् ॥१०॥
॥ शौक्तानिपञ्च ॥
स खाकाया याटाच्नी षी द त पु ना नाटृयातच्प्रा गाचाय ताशा। शि शु न्नाटियातज्ञैकथ्पा रा इ भूटीच्षाकता श्राटायाखण्इश। ओपइ ळाशा ॥११॥
सा खा या याती। नी षी दाखिताण। पू नाटानाखयाणप्राटट्गाखऔ हो वाशि। याखताश। शि शु न्न या ज्ञैःचुप रीकाभू षाटाट्ताखऔ हो वाशि। श्रि येताच् ॥१२॥
स खा य याषीनी षी दाटितात। पु नाकाना य प्र गा य ता शि शु न्नाषेया ज्ञैः प राटीइ भू षाटितातश्राटयाखण्इश। ओपइ ळाशा ॥१३॥
ओतहा इ स खा य याषूनी षी दातितात। पु नाकानौ हो इ पु नाकुनौ हो एपिया प्रा या प्राशी। गाकय तौ हो इशीगाकय तौ हो एपीशा इ शूं शा इ शूशूम् । ना य ज्ञौ होतीइशना य ज्ञौ हो एपुपा रीतापा राखाऔ हो वाशि। एतच्भू ष त श्रि येतुच् ॥१४॥
स खाफाय या उ वोखीवाश। नी षा इ दा ताटुउ वोखावाश। पु नाकाना य प्र गाकीय ताताशा इ शाटिउ वोखावाश। ना य ज्ञैः पा रि भूटूषा ताटाउ वोखीवाश। श्रि येताच् ॥१५॥
॥ कार्णश्रवसानित्रीणिगौलोमानिवा ॥
तांखवाशप्ल्स्साखखाण। योकम दाटायात। पू ना ना म भीकुगा याटाट्तात। शा इ शू न्नाकीह व्यैकास्व द याटिन्त गू र्क्त भाखीण्इःश। ओपइ ळाशा ॥१६॥
ओ इ तं व स्स खातू। योकम दा याभिउ वोखावाश। पू नाकान म भि गाटीउ वोखावाश। य ताशाउ वोखावाश। शि शु न्नाकिह व्यैकास्व द याटिउ वोखावाश। न्त गाशाउ वोखावाश। र्क्तीखभीःप्ल् ॥१७॥
तं व स्स खाषीयो म दातियात। पू नाकान म भि गाटीया ताचाशा इ शूटिचन्नाकहाखव्यैशस्व द यातिन्तापगूशर्क्ताखइ भोप्ला। हा इशा ॥१८॥
॥ वैश्वदेवेद्वे ॥
प्रा णाता। शाखइ शूशाप्ल्र्म्मा हाखाइ नाणाम् । हि न्वाटान्नाखर्क्ताण। स्यातदा इ धीपितिशम् । वा इ श्वाकिप रि प्रि याकीभु वाटाद ध द्वि ताखीण्। ओपइ ळाशा ॥१९॥
प्रा णा प्रा णाती। शा इ शूटिश्शा इ शूटिर्म्म हाताआ उ वा एभी। नाखम् । हिकन्व न्ना र्क्ताकिस्य दाताआ उ वा एभी। धीखतिशम् । वि श्वाकाप रि प्रि यातीआ उ वाटि। भूखवाशत् । अ धौटाहौटहु वा इ द्वाटीट्इ ताखाऔ हो वाशि। उ ऊखापाश ॥२०॥
॥ इन्द्रसामनीद्वे ॥
प्रा णा शि शूःती। म हाटाइ न मौ होखीवात्र। हिकन्व न्नृ त स्यशीदी धि तिंकिवा इ श्वाकिउ वाकापा राकाउ वाका। प्रि याटाभु व द धाकीउ वाता। एतद्वि ताताच् ॥२१॥
प्रा णा होखिइ या हा इशी। शा इ शूटिच्र्म्म हा इ नाटीमाचबु होकाऔकहो वाका। हिकन्व न्नृ त स्यषीदी धि ता इ माटुबु होकाऔकहो वाका। वि श्वा वा राटीबु होकाऔकहो वाका। प्री या भूटिटवाखऔ हो वाशि। आचधा द्वि तातिच् ॥२२॥
॥ मरूताम्प्रेङ्खःवसिष्ठस्यवा ॥
प्रा णाफाहाप्लहो इ शाखिइशशूप्लर्हा होताइश। माकही नांटाहो वाकाहो एपा। हि न्वाप्लन्न ह हो याखीर्क्ताशप्ल्हा होताइश। स्या दीचाधि ताकाइं हो वाकिहो एपा। वी श्वाफाहाप्लहो इ पाखिरीशप्ल्हा ह होतिइश। प्री याचाभु वाटाद्धोकवाकहो एपा। आपधाशद्वाखइ तोप्ला। हा इशा ॥२३॥
॥ आग्नेयञ्च ॥
पा वा स्व दाटीइ वा वी ताखीयाणइश। इ न्दो धा राटीभी रो जाखिसाण। आ क ल श म्मा धूकूमाखन्सोण। मा न एचिमा नाःपास दा एप्लि। होप्लइ ळाशा ॥२४॥
॥ सोमसामच ॥
प व स्व दातीच्इ वा वी त याषुइ न्दोकाधाकराखभि रो ज सा एप्लु। आ काटाहातला शाटाम् । मा धुटाहोतमा न्सोटाच्माकनोपबाप्ल। स्वा दोप्ला। हा इशा ॥२५॥
॥ सुज्ञानेद्वे ॥
सो मः पु नाती। न ऊकार्म्मी णाचाव्यंथवा रांटावि धाकाव ताचाइश। अ ग्रेथावा चाःटाच्पाकव माटाट्नाखऔ हो वाशि। क नीकाकृ द देति। ऊटपाख ॥२६॥
सो मः पू नाती। न ऊकार्म्मि णाकाउ वाकाओटट्वाखऔ हो वाशि। अ व्यं वा रं वि धाटूव त्य ग्रातिउ वाकाओटट्वाखऔ हो वाशि। वाकचःषप व मा नः क नाचूउ वाकाओटट्वाखऔ हो वाशि। क्राखदाशत् ॥२७॥
॥ द्यौतेद्वे ॥
सो मः पु ना न ऊतू। र्म्मि णा व्यं वा रांकुवी धा वाटितीत। अ ग्रे वा चाःचीपा व मा नाःचीका नीकाक्राफदाखत् ॥२८॥
सो मः पु नाषीन ऊ र्म्मि णाखुऐ हीप्ला। अ व्यं वा रांकीच्वि धाकाव ताखाऐ हीप्ला। अ ग्रे वा चःषीप व मा नाखीऐ हीप्ला। का नीता। क्र द दे हि या हाप्लू। होप्लइ ळाशा ॥२९॥
॥ आतीषातीयेद्वे ॥
सो मः पु नाषीन ऊ र्म्मीखिणाण। अ व्यं वा रंकीच्वी धाकाव त्य ग्राटिओ इ वाखिचाःण। प वाटाओ माखानाःण। क ना इ क्राखीणफप्ल्। दाखत् ॥३०॥
सो माःचापूकनाफप्ल्ओ न ऊखिर्म्मि णा एप्लि। अ व्यं वा रं वि धायूवापतीश। अ ग्रे वाखिणफप्ल्चाःतच्पाकव माटानाःत। काटट्नाखऔ हो वाशि। क्र द देखि ॥३१॥
॥ सोमसामानिचत्वारि ॥
प्रा पु नापिना य वे ध सा इशू। हो इ हो इषीसो मा या वा चाटुउ च्या ताभिइश। भृ ति न्न भ राकुमा ति भाकिइ र्जू जो षाटीताखण्इश। ओपइ ळाशा ॥३२॥
प्र पु ना नौ होफुय वे ध साकीइश। सोकमा औकाहोखय व च उ च्य ता इशृ। भृ ता औकिहोखइ न्न भ राप्लीमा ति भाङिइःश। जु जोताआ उ वाटि। षाखतेश ॥३३॥
गो म न्नोफिप्ल्हो इ न्दोखिअ श्व वाप्लिदेश। सू तः सु द क्ष धायूनीपवाःश। शु चि ञ्च वाखीणफप्ल्र्णा म धि गोखीऔ होता। षु धाकाराकया औटाहोखबाप्ल। होप्लइ ळाशा ॥३४॥
हा वा स्माति। भ्याखन्त्वाशवा सु वाखिइ दणाम् । अ भाटाइ वाखाणीशर ना उ वोखीवाश। षाखताश। गो भि ष्टेचिव र्णाथाच्मा भि वाटिस या म सिशी। होखइ ळाप्ला ॥३५॥
॥ सोमस्ययशांसित्रीणि ॥
प व ते हाती। री याचातोटह रि रौकिच्होययौटहोखवाश। आ ति ह्व रांटीच्सीकरं ही याकिच्औशहोययौटहोखवाश। अ भ्य र्ष स्तो तृ भ्योकूवा औकाच्होययौटहोखवाश। राटट्वाखऔ हो वाशि। य शोताच्याकशाःटख् ॥३६॥
प वाखाप व ते हाशी। री याचातोटह रि रौकिच्होययौटहो औ होखि। आ ति ह्व रांटीच्सीकरं ह्याकाऔशहोययौटहो औ होखि। अ भ्यकार्ष स्तो तृ भ्योकीवा औकाहोययौटहो औ होखि। राटट्वाखऔ हो वाशि। य शोताच्याटशाःख ॥३७॥
प व ते ह र्य तोफूह रीतारापती ह्व रांप्लिसी रं ह्याङि। अ भ्य र्षापिस्तो तृप्लाभ्यो वाताइ राटाट्राखऔ हो वाशि। याखशाःप्ल ॥३८॥
॥ औशनंवासिष्ठंवा ॥
प री कोखिशं म धु श्चू तंशु। सो मः पु नाकीनो अ र्ष ती हो एटूअ भि वाखिणफप्लणीतर् ऋचषी णाथाम् स प्ता नाटिउ वोखावाश। षाखताश ॥३९॥
एकादश खण्डः (ऋ-१२, सा-३६)
॥ वासिष्ठेद्वे ॥
पा वाता। स्वा मा धु मा क्ता माटूउ वोखावाश। ईखन्द्राश। य सो माकिक्राकतूकवि क्ता माभिमा दाटाओ इ मा हाटीउ वोखावाश। द्यु क्षाचात मोतामा दाःटा ॥१॥
प व स्व मा एतु। धु माकाक्त मा इकिन्द्रा य सोतिओ औकाहोतवात। मा क्रा तू वीटीत्तातओ औकाहोखत मोखामा दाःता। म हा इ द्यूटीट्क्षाखऔ हो वाशि। त मोतामाटदाःख ॥२॥
॥ सभानित्रीणि ॥
प व स्व म धु माषूइ हाता। क्ता मा इ न्द्रा यषुसो मः कृ तु वीकुक्त मो माटिदा इ हाति। म हा इ द्यूटीक्षा इ हाति। ता मो माटिदाःखण्। ओपइ ळाशा ॥३॥
पाखव स्व म धू माप्लुक्ताङमाःश। आ इ न्द्रा य सो माटूक्राकतु वा इ त्तापीमोशमातदाःत। मा हि द्यु क्षा तापुमोशमाखदोप्ल। हा इशा ॥४॥
पा वा स्वापिम धूप्लाम क्ताखामाःण। इ न्द्रा य सो माटुचक्राकतु वा इ क्तापीमोशमातदाःत। म हा इ द्यु क्षा तापूमोशमाखदोप्ल। हा इशा ॥५॥
॥ ऐषिराणिचत्वारिच्यावनानिवा ॥
अ भा इ द्युकीम्नाखम्बृ हा द्याकिशाःफ। इ ळा स्प तेकीदि दी हि देखीवाशदे वाकायूफम् । वी को शकिम्म द्ध्य मांकि। यूखवात्र ॥६॥
अ भ्ये द्यू म्नातीम् । बृ हाचाद्यायशाःट। इ ळा स्प ताषीइ दि दीकिहाखइ देशावा दा इ वाखीयुंशवि कौ वा उ वोखुवाण। श र्म्माकाद्ध्या मांताआ उ वाटि। यूखवाश ॥७॥
अ भि द्यु म्नषीम्बृ ह दि हाती। या शा इ ळा स्प तेषूदि दी हि देकीवा दे वाटियूतम् । वि कौ हो वातीहातइश। श र्म्माटाच्द्ध्या मंकायू वाकाइ ळा भाखिण्। ओपइ ळाशा ॥८॥
अ भि द्यु म्न म्बृतुह द्य शाःति। ईकळा स्प ता इ दि दीकूहि दा इ वाकीदे व यूचिम् । वी को श म्म द्ध्य मांटूच्होययूपवा ए हि याप्लीहाश। होप्लइ ळाशा ॥९॥
॥ शौक्तानित्रीणि ॥
आ सो ता पाती। राटइ षाखाऔ हो वाशि। ञ्चाखताश। अ श्वथान्न स्तोकाम म प्तू रंकीर ज स्तुकिर मो एभिव नाताओ एटाप्र क्षाखाऔ हो वाशि। उ दाताप्रूटताखम् ॥१०॥
आ सो ता पाती। रि षिकाञ्च ताटाऊटहोकवाथऊट। अ श्वथान्न स्तोकाम म प्तु राटीऊटहोकवाथऊट। राचज स्तु राटिऊटहोकवाथऊट। वा न प्राचिक्षाटऊटहोकवाथऊट। उ दाताप्रूटताखऔ हो वाशि। उ ऊखापाश ॥११॥
आ सो ताटिपात। रि षा इ ञ्च ताटुअ श्व न्न स्तो म माकूप्तूखरंशर ज स्तूखिरं व नो हा बुशु। प्रा क्षा मूपिदाशहि म्मा एभि। प्रूखतशम् ॥१२॥
॥ वाचस्सामानित्रीणि ॥
आ सो ता पातीरी षि ञ्च ताती। आ श्वाटाऔ होखावाश। न स्तोकाम म प्तु रंकीर ज स्तु रंषीहो इ व नाटीऔ होखावाश। प्र क्षाकामु दाताप्रूटताखम् ॥१३॥
आ सोखाऔ होताता पा रा इ षीयुञ्चा ताटाआ श्व न्न स्तो म माकूप्तूखरशम् । र ज स्तूखिरं व नो हा बुशु। प्रा क्षाकामु दाताआ उ वाटि। प्रूखतशम् ॥१४॥
आ सोणाताचपाफप्ल्हो रि षीखिञ्च ता एप्लि। आ श्वचान्न स्तोथाच्माचमायप्तू रटाम् । रा ज स्तू रंकीवाचनायप्रा क्षांटा। ऊपदांशप्रूखतांप्ल। हा इशा ॥१५॥
॥ कौन्मलबर्हिषाणिपञ्च
ए ताताम् । उ त्य म्म दाटीश्चूखतणम् । सा हा स्रा धाकीरं वा र्षा भांटीदी वोटादूखहणम् । वि श्वाटाहो इ हो इ वाटुसूत। नाटइ बाखाऔ हो वाशि। भ्राखतशम् ॥१६॥
ए त मू त्यतीम् । म दाताआ उ वाटि। च्यूखतशम् । सा हा स्र धाकीरं वृ षाकिभ न्दि वोटिदूकहांखवा इ श्वा व सूशु। नि बाकाआ उ वा एभी। भ्राखतशम् ॥१७॥
ए त मु त्य मेकुम दाता। च्यू तां स ह स्र धाषूरं वृ षा भकीन्दी वो दूटिहातम् । वा इ श्वाटिवा सुटाच्नीकबोपबाप्लभ्रा तांप्ला। हा इशा ॥१८॥
ए त मु त्य मोकुहा इषाम द च्यु त मोतुहातइश। सा हा स्राखिधाशरं वा र्षाखिभणम् । दी वो दु ह मोखुहाणइश। वि श्वाटाहो इ वाटिसूत। नाटइ बाखाऔ हो वाशि। भ्राखतशम् ॥१९॥
ए ताफामु त्य म्म दाखीच्यु तशाम् । सा हा स्र धाकीरं वृ षा भटीन्दी वोटाच्दू ह मोचिइश। वि श्वा व सू नि बाटूच्होकच्इ भ्राकात माताआ उ वाटि। उ ऊखापाश ॥२०॥
ए ताखामु त्य म्म दाप्लीच्यू तशाम् । सा हा स्र धाटीरां वृ षाचिभ न्दि वोटिओ वाका। दूपहाशम् । वि श्वा व सू नि बाटूआ एटा। भ्रापता मे हि याप्लीहाश। होप्लइ ळाशा ॥२१॥
॥ दीर्घेद्वे ॥
सा सूता। न्वे योकावा सूटानातम् । यो राटाया मा नेचिताथया इ ळाटिनातम् । सोटमाःत। या स्सूकाक्षी तापाआ इ नांप्लि। हा इशा ॥२२॥
स सु हातिबुश। न्वे यो वा सू नांटुहातबुश। यो राचाया मा नेचिताथया इ ळा नांटीहातबुश। सो मो या स्सूटीहातबुश। क्षि तीकाना मौपाहो बाप्ला। होप्लइ ळाशा ॥२३॥
॥ सोमसामानित्रिणि ॥
स स्वे सा सूती। न्वे योकावा साताआ उ वाटि। नांख। यो राटाया मा नेचिताथया इ ळा नांटीसो मौ वा उ वोखुवाण। या स्सूकाक्षि ताताआ उ वा एभि। नाखम् ॥२४॥
स सू न्वे या एषुवा सूता। नाकयो रायायापमा नेकाताथया इ ळाटिनांखसो माःता। या स्सूकाक्षि ताखाणफप्ल्इश। नाखम् ॥२५॥
सा सू न्वेपियो व सू नाशीम् । योकराययापमा नेकाताथया इ ळापिनात्रम् । सो मोटाय स्सु क्षि तीकीनाखम् । सोटमाःख ॥२६॥
॥ शैतेष्याणिचत्वारि ॥
त्वं हि यातिम् । ग दा इ व्यषीप व मा न ज निचूमाकच्नि द्युकामाटक्ता माःटा। आ माटार्क्ता त्वाटायाकघोपबाप्लषा याप्ला। न्हा इशा ॥२७॥
त्वं हि यातिम् । ग दा इ व्यषीप व माकिनाकहो वाटाहातइश। ज नि माटिनीखद्यू मापार्क्तातमाःत। आ मा र्क्ताटिट्त्वाखऔ हो वाशि। य घोकाषा याटाख्न् ॥२८॥
त्वं ह्यं ग दाती। इ व्य प व मा नषूज नि माकिनि द्यू माटिक्ता माःता। आ मा र्क्ताटित्वातच्याकघोपबाप्लषा याप्लान् । हा इशा ॥२९॥
त्वं हा यांखिगा दा इ व्याप्लीम् । पा व माटिनाकथ्ज नि माटिच्नाकयेपद्यू मापाक्तातमाःत। आ मा र्क्ताभित्वातच्। याकघोपबाप्लषा याप्लान् । हा इशा ॥३०॥
॥ सोमसामानित्रीणि ॥
एकष स्य धा रा यायुसू ताःटा। अ व्याथाच्वाकरा इ भा इःषीप व ते म दिकुन्ता माःचा। क्री ळा न्नूटिर्म्मातइःश। आपपाशमाखइ वोप्ला। हा इशा ॥३१॥
एकषा स्यापधा र या सु ताःशु। अ व्या होभिइशवा रे भिःषिप व ते म दीयुन्ता माःटा। क्री ळाटाच्न्होयऊटर्म्मीःत। अ पाचामीकवा औटाहोखबाप्ल। होप्लइ ळाशा ॥३२॥
ए ष स्य धाफीर या सु ताःकी। अ व्याथाच्वाकरा इ भिः प वाकुतापइ म दीशिन्त माःका। क्री ळा न्नू र्म्मीषीर पा उ वाकीओपबाप्लमा इ वोप्लि। हा इशा ॥३३॥
॥ गायत्रपार्श्वञ्च ॥
ए षाःता। स्य धाकार याताआ उ वाटि। सूखताःप्ल। अ व्या वा रेषीभिः प व तेकीच्माकदि न्ताटामाःख। क्री ळा न्नूयिर्म्मीटर पाताहिंपबाश। मा इ वाटिख् ॥३४॥
॥ सन्तनिच ॥
ए षाताहातबुश। स्य धाकार याताआ उ वाटि। सूखताःप्ल। अ व्या वा रेषीभिः प व तेकीच्माकदि न्ता माःभि। क्री ळातान्हातबुश। ऊ र्म्मीकार पाताआ उ वाटि। मीखवाश। ॥३५॥
या उ स्रि याषीअ पि याकिआचन्ता र श्मा नीखी। नि र्गाताहातबुश। आ क्रकान्त दोताआ उ वाटि। जाखसाश। आ भि वृ जषीन्त न्ती षेकीग व्य म श्वि याटुख्म् । व र्म्मीताहातबुश। वा धृकाष्ण वाताआ उ वाटि। रूखजाश ॥३६॥
॥ संहिता सङ्ख्या ॥
॥ वर्णानुक्रमणिका ॥
- अक्षय्यञ्चरेवत्
- अगस्तयस्यचराक्षोघ्नम्
- अगस्तयस्ययमिकेद्वे
- अगस्तस्यचराक्षोघ्नम्
- अगस्तस्यचराक्षोघ्नम् (2)
- अगस्तस्यचैवराक्षोघ्नम्
- अग्नेराक्षोघ्नेद्वे
- अग्नेराग्नेयेद्वे
- अग्नेरायुः
- अग्नेर्यद्वाहिष्ठीयेद्वे
- अग्नेर्वैश्वानरस्यसामनीद्वे
- अग्नेर्वैश्वानरस्यसामनीद्वे (2)
- अग्नेर्हरसीद्वे
- अग्नेर्हरसीद्वे (2)
- अग्नेश्चजराबोधीये
- अग्नेश्चदधिक्रम्
- अग्नेश्चद्रविणम्
- अग्नेश्चयज्ञायज्ञीयम्
- अग्नेश्चवारवन्तीयम्
- अग्नेश्चविशोविशीयम्
- अग्नेश्चवैश्वानरस्यार्षेयम्
- अग्नेश्चश्रैष्ठ्यम्
- अग्नेश्चसंवर्गः
- अग्नेश्चाग्नेयम्
- अग्नेश्चार्षेयम्
- अङगिरसान्निवेष्टौद्वौ इळा
- अङ्कतेवैररूपस्यसाम
- अङ्गिरसांसङ्क्रोशास्त्रयः देवानांवा सामसुरसे द्वे
- अङ्गिरसाञ्चैवनिवेष्टः
- अङ्गिरसान्निवेष्टौद्वौ
- अङ्गिरसामधीवासपरीवासौद्वौ
- अङ्गिरसामुत्सेधनिषेधौ द्वौ
- अच्छिद्रञ्च
- अञ्जतेव्यञ्जतेस्समञ्जतइति काक्षीवतानांसामानि त्रीणि शार्ङ्गाणिवा
- अत्रेर्विवर्क्तोद्वौ
- अत्रेश्चासङ्गम्
- अदितेश्चसाम
- अदितेश्चसाम (2)
- अनूपेद्वे
- अपांसाम
- अभिवादस्यचऔदलस्यसाम
- अरूणस्यचवैददश्वेस्साम
- अश्विनोश्च साम
- अश्विनोश्चसंयोजनम्
- अश्विनोश्चसाम
- अश्विनोश्चसाम (2)
- अश्विनोश्चैवसाम
- असीतञ्चसिन्धुसामवा
- अहेःपैण्वस्यसाम अहिहनोवाबैल्वस्य
- आकुपारम्
- आक्षारञ्च
- आक्षारञ्चैव
- आक्षीलन्चबाभ्रंवा
- आक्षीलेद्वे
- आग्नेयञ्च
- आग्नेयञ्च (2)
- आग्नेयञ्च (3)
- आग्नेयानित्रीणि
- आङ्गिरसानित्रीणि
- आङ्गीरसञ्चइन्द्रस्यवा हरिश्रीर्निधनम्
- आङ्गीरसानित्रीणि
- आजामायवञ्च
- आजीकञ्च
- आजीकञ्च (2)
- आजीक्तञ्च
- आतीषातीयेद्वे
- आत्रम्
- आत्रम् (2)
- आत्राणित्रीणि
- आत्रेद्वे
- आदित्यस्यचरुचिरोचनंवा
- आदित्यस्यार्कपुष्पे देवानांवा
- आदित्याः सामनीद्वे तार्क्ष्यसामनिवा
- आदित्यानाञ्चपवित्रम्
- आदित्यानाञ्चपवित्रम् (2)
- आदित्यानाञ्चापामीवम्
- आन्धीगवञ्च
- आपालवैणवेद्वे
- आप्सरसञ्च इष्टाहोत्रीयंवा आपांवानिधि
- आभरद्वसवेद्वेऐन्द्राग्नेर्वा
- आभिशवेद्वे
- आभीकञ्च
- आभीकञ्चैव
- आभीकेद्वे
- आभीशवञ्च
- आभीशवेद्वे
- आमहीयवञ्च
- आयास्यञ्च
- आयास्यञ्च (2)
- आयास्येच
- आयास्येद्वेसोमसामनीवा
- आशुभार्गवंतृतीयम्
- आश्वञ्च
- आश्वञ्च (2)
- आश्वसूक्तञ्च
- आश्वानिचत्वारि
- आश्वानिचत्वारि (2)
- आश्वेद्वे
- आष्टादंष्ट्रेद्वे
- आसीतेद्वे
- इन्द्रसाम
- इन्द्रसामच
- इन्द्रसामचैव
- इन्द्रसामनीद्वे
- इन्द्रसामनीद्वे (2)
- इन्द्रसामानित्रीणि
- इन्द्रस्यक्रोशानुक्रोशेद्वे
- इन्द्रस्यच शरणम्
- इन्द्रस्यचक्षुरपविनीद्वे
- इन्द्रस्यचक्षुरपवी
- इन्द्रस्यचत्रातम्
- इन्द्रस्यचमाया
- इन्द्रस्यचरातिः
- इन्द्रस्यचवृषकम्
- इन्द्रस्यचवृषकम् (2)
- इन्द्रस्यचवैराजे
- इन्द्रस्यचश्येनः
- इन्द्रस्यचस्वाराज्यम्
- इन्द्रस्यचाभयङ्करम्
- इन्द्रस्यवज्रेद्वे
- इन्द्रस्यवात्रघ्नम्
- इन्द्रस्यवारवन्तीयम्
- इन्द्रस्यवृषकाणित्रिणि
- इन्द्रस्यशुद्धाशुद्धीयेद्वे
- इन्द्रस्यसंवर्गौवात्रघ्नेद्वे
- इन्द्रस्यसञ्चयेद्वे सेनुदेवा वामदेव्येवा
- इन्द्रस्यसत्रासाहीयेद्वे
- इन्द्रस्यसहस्रबाहवियम्
- इन्द्रस्यसहस्रायुतेद्वे प्रजापतेर्वा महोविशीये
- इन्द्रस्याभयम्
- इन्द्रस्याभरेद्वे
- इन्द्रस्याभीवर्तः
- इन्द्रस्याभ्रातृव्यम्
- इन्द्रस्यार्कौद्वौ
- इन्द्रस्येन्द्रियाणीत्रिणि
- इन्द्राण्याश्चैवसाम
- इन्द्राण्यास्साम
- इन्द्राण्यास्साम (2)
- इन्द्राण्यास्साम (3)
- इन्द्राण्यास्सामनीद्वे
- इन्द्राण्यास्सामनीद्वेइन्द्रस्यवासांवर्क्ते संवर्तस्यवाङ्गीरसस्य
- इन्द्राण्यास्सामा
- इषोवृधीयञ्च
- इहवद्वामदेव्यंतृतीयम्
- उद्वंशपुत्रञ्च
- उद्वंशीयन्तृतीयम्
- उद्वच्च
- उरोराङ्गिरसस्यसाम
- उषसश्च साम
- उषसश्चसाम
- उषसश्चसाम (2)
- उषसश्चसाम (3)
- उषसश्चसाम (4)
- उषसश्चसाम (5)
- उषसश्चसाम (6)
- उषसश्चसाम (7)
- उषसश्चैवसाम
- ऋक्सामयोस्सामनीद्वे
- ऋतुसामच
- ऋतुसामनिच
- ऋतुसामनीच
- ऋषभश्पपवमानः
- ऐटतेद्वे
- ऐटतेद्वे (2)
- ऐतवृधञ्च
- ऐध्मवाहानि त्रीणि
- ऐषञ्च
- ऐषञ्च (2)
- ऐषञ्च (3)
- ऐषञ्च (4)
- ऐषञ्च (5)
- ऐषञ्च (6)
- ऐषञ्चारूढवदाङ्गिरसम्
- ऐषिराणिचत्वारिच्यावनानिवा
- ऐषिराणित्रीणि
- ऐषिराणिपञ्च
- ऐषिरेद्वे
- औक्षोरन्धराणित्रीणिऔक्षोनिधनानिवा
- औक्ष्णोनिधनानित्रीणि
- औक्ष्णोरन्ध्राणित्रीणि
- औदलेद्वे वैणवेद्वे वैणव औदलइतीवा
- औरूक्षयेद्वे
- और्णायवेद्वे
- और्ध्वसद्मनञ
- और्ध्वसद्मनेद्वे प्रहितोर्वा संयोजने
- और्वस्यवैधारेस्सामनीद्वे
- औशनंवासिष्ठंवा
- औशनंवैरूपम्
- औशनञ्च
- औशनम्
- औशनम् (2)
- औशनानित्रीणि
- औशनेच
- कण्वरथन्तरम्
- कश्यपस्यचधृष्णुम्
- कश्यपस्यचशोभनम्
- कश्यपस्यबर्हिषीयम्
- कश्यपस्यसयोनिः
- काक्षीवतञ्च
- काण्वञ्चैव
- काण्वम्
- काण्वेद्वे
- काण्वेद्वे (2)
- काण्वेद्वे (3)
- कार्णश्रवसम्
- कार्णश्रवसानित्रीणिगौलोमानिवा
- कार्तवेशञ्च
- कार्तवेशञ्च (2)
- कार्ष्णेच
- कालेयानित्रीणि
- कावञ्च
- कावञ्चैव
- कावम्
- कावर्षाणित्रीणि
- कावर्षेद्वे
- काश्यपञ्च
- काश्यपञ्चआप्सुरसंवा
- काश्यपेद्वे
- कूतिवारस्यवैरूपस्यसाम
- कूत्सस्यप्रतोदौद्वौ
- कूत्सस्याधिरथ्यानित्रीणि
- कौत्सञ्च
- कौत्सञ्च (2)
- कौत्सञ्च (3)
- कौत्सन्तृतीयम्
- कौत्सानिचत्वारि
- कौत्सेद्वे पाञ्चवाजेवा
- कौन्मलबर्हिषाणिपञ्च
- कौन्मुदञ्चैव
- कौन्मुदम्
- कौन्मुदेद्वेस्वर्जोतिषीवा
- कौन्मुलबर्हिषेद्वे
- कौल्मलबर्हिषेद्वे
- कौल्मलबर्हिषेद्वे (2)
- क्रौञ्चञ्चैव उद्वद्ववा
- क्रौञ्चानित्रीणि
- क्रौञ्चेद्वेशार्मदेवा
- गात्समदञ्च
- गाधिनश्चकौशिकस्यसाम
- गायत्रपार्श्वञ्च
- गृत्समदस्यमदौद्वौ
- गृत्समदस्ययोनिनीद्वे
- गृत्समदस्यवींकानिचत्वारिवसिष्ठस्यवाप्रियाणी
- गृत्समदस्यसमिधौदौ
- गृत्समदस्यसूत्राणि चत्वारि
- गोधासामच
- गोपवनञ्च
- गोषूक्तम्
- गौङ्गवम्
- गौतमम्
- गौतमस्यच भद्रम्
- गौतमस्यचैवपर्कः
- गौतमस्यतन्त्रातन्त्रेद्वे
- गौतमस्यपर्कः
- गौतमस्यपौरुमुद्गेद्वेपुरुमुद्गस्यवाङ्गीरसस्यदेवानांवा
- गौतमस्यमनार्याणित्रीणि
- गौतमस्यमनार्येद्वे
- गौतमस्यरयिष्ठेद्वे
- गौतमेद्वे
- गौतमेद्वे (2)
- गौरयश्चाङ्गिरसस्यसाम
- गौराङ्गिरसस्यसामनीद्वे
- गौराङ्गीरसस्यसामनीद्वे
- गौराणित्रीणि
- गौरीवितम्
- गौरीवितानित्रीणि
- गौरीवितेःप्रहितौद्वौ
- गौरीवितेद्वे
- गौश्रृङ्गेद्वे
- घृताचेराङ्गिरसस्यसामनीद्वे
- च्यावनानिचत्वारि
- जमग्नेस्सवासिनी द्वे
- जमदग्नेरभिवर्तएकम्
- जमदग्नेश्चगम्भीरम्
- जमदग्नेश्चसंवर्गः
- जमदग्नेश्शिल्पेद्वे
- तन्वस्यपाथस्यसामनीद्वे वसोवार्षेः
- तरन्तस्यचवैददश्वेस्साम
- तान्वेद्वे
- तिरश्चेराङ्गिरसस्यसामनीद्वेदेवानांवादेवपुरे
- तौदेद्वे
- तौरश्रवसञ्च
- त्रासदस्यवेच
- त्रैककूभानित्रीणि
- त्रैतानिचत्वारि
- त्रैतानित्रीणि
- त्रैशोकम्
- त्वष्टार्याश्चसाम
- त्वष्टुरातिथ्येद्वे
- त्वष्टुरातिथ्येद्वे (2)
- त्वष्टुश्चातिथ्यम्
- त्वाष्ट्रीसामच
- त्वाष्ट्रीसामच (2)
- त्वाष्ट्रीसामच (3)
- त्वाष्ट्रीसामनीचैव
- त्वाष्ट्रीसामनीद्वे
- त्वाष्ट्रीसामनीद्वे (2)
- दार्ढ्यच्युतानित्रीणि
- दार्शशीर्षेद्वे
- दाशस्पत्यानिषट्
- दीर्घेद्वे
- देवानाञ्चरुचिरोचनंवा
- दैर्घतमसानित्रीणि
- दैर्घश्रवसेद्वे
- दैवातिथम्मैधातिथं वा
- दैवानीकञ्च
- दैवोदासञ्च
- दैवोदासानिचत्वारि
- दैवोदासानित्रीणिआर्षभाणिवायदिवावार्ध्यश्वानि
- दैवोदासेद्वे
- दैवोराजञ्च
- द्युतानस्य मारूतस्य सामनीद्वे
- द्यौतेद्वे
- द्वभ्यासञ्चसौहविषंवसिष्ठस्यवापिप्पलि
- द्विहिङ्कारञ्चवामदेव्यम्
- द्वैगतेच
- धानाकेद्वे
- धुरश्शम्येद्वे
- धुरश्शम्येद्वे (2)
- धॄषतोमारूतस्यसामनीद्वे
- नकूलस्यवामदेवस्यप्रेंखौद्वौ
- नानदन्तृतीयम्
- नार्मेधञ्च
- नाविकञ्च
- नैपातिथञ्च
- नैपातिथेद्वे वाशेवा
- नौधसम्
- पथस्यसौभरस्यसामनीद्वे
- पथस्यसौभरस्यसामनीद्वे (2)
- पाथेद्वे
- पाथेद्वे (2)
- पारूच्छेपेद्वे
- पाष्ठौहञ्चैव
- पाष्ठौहेच
- पाष्ठौहेद्वे
- पुरीषञ्चाथर्वणम्
- पुरीषञ्चाथर्वणम् (2)
- पौरुमीढञ्च
- पौरूहन्मनञ्च
- पौषञ्च
- पौष्कलम्
- पौष्णञ्च
- पौष्णेद्वे
- प्रजपतेश्चैवसहोरयिष्ठीयंसोमसामवा
- प्रजापतेःकनीनिकेद्वेअत्रेर्वा
- प्रजापतेःश्योकानुश्योकानित्रीणि
- प्रजापतेःश्रुधीयेद्वे
- प्रजापतेःसदोहविर्धानानित्रीणिसदःपूर्वंहविर्धाने उत्तरे
- प्रजापतेदोर्होदोहीयेद्वे
- प्रजापतेराशिमरायेद्वेमरायराशिनिवा
- प्रजापतेर्गूर्दः
- प्रजापतेर्गूर्दौद्वौ गौतमस्यवाप्रतोद्वौ
- प्रजापतेर्धनधर्मेद्वे
- प्रजापतेर्धर्मविधर्माणिचत्वारि
- प्रजापतेर्निधन कामम्
- प्रजापतेर्निधन कामम् (2)
- प्रजापतेर्वाजसनिनीद्वे
- प्रजापतेर्वाजसनिनीद्वे वाजजितौद्वौ वाराहाणिवा
- प्रजापतेर्वाजसनी
- प्रजापतेर्हिकनिकविकानित्रीणि
- प्रजापतेश्चनिधनकामम्
- प्रजापतेश्चसदोविशीयम्
- प्रजापतेश्चसहोरयिष्ठीयम्
- प्रजापतेश्चाभीवर्तः
- प्रजापतेश्चैवगूर्दः
- प्रजापतेस्सन्तनीकेद्वे
- प्रजापतेस्सीदन्तीयेद्वे
- प्रजापतेस्सुतंरयिष्ठीयेद्वे
- प्रतीचीनेषञ्च काशीतम्
- प्रयस्वच्चप्राजापत्यम्
- प्रवत्भार्गवम्
- प्रशस्यजानस्याभीवर्तौद्वौ
- प्रष्ठमेकम्
- प्रहितोःसंयोजनेद्वे
- प्राकर्षञ्च
- प्राकर्षञ्च (2)
- प्राकर्षम्
- प्राजापत्येद्वे
- प्रैयमेधानित्रीणि शौक्त सामानिवा उत्गातृदमनंवातृतीयम्
- प्रैय्यमेधञ्च
- प्रैय्यमेधानि त्रीणि
- बभ्रोःकार्तवेशानित्रीणि
- बभ्रोःकुम्भस्यसामानित्रीणि
- बाभ्रवेद्वे
- बार्हगिराणित्रीणी
- बार्हदुक्थञ्च
- बार्हदुक्थञ्च (2)
- बार्हदुक्थञ्च (3)
- बार्हदुक्थञ्च (4)
- बार्हदुक्थेद्वे
- बार्हदुत्थेद्वे
- बार्हस्पत्यञ्च
- बार्हस्पत्यञ्चब्राह्मणस्पत्यंवा
- बार्हस्पत्येद्वेअग्नेर्वाराक्षोघ्ने
- बृहचैवाग्नेयम्
- बृहच्चाग्नेयम्
- बृहतश्चमारूतस्यसाम
- बृहतोमारूतस्यसामनीद्वे
- बृहत्कम्
- बृहदाग्नेयञ्चसङ्कृतंवा
- भरद्वाजस्यवाजभृत्
- भागञ्च
- भागञ्च (2)
- भारद्वाजञ्च
- भारद्वाजञ्च (2)
- भारद्वाजञ्च (3)
- भारद्वाजञ्च (4)
- भारद्वाजञ्च (5)
- भारद्वाजञ्चैव
- भारद्वाजञ्चैव (2)
- भारद्वाजस्यगाधम्
- भारद्वाजस्यदारसन्तित्रीणि
- भारद्वाजस्यपृश्नीद्वे
- भारद्वाजस्यप्रासाहम्
- भारद्वाजस्यमौक्षेद्वे
- भारद्वाजस्यविषमाणित्रीणि इन्वकंवातृतीयम्
- भारद्वाजस्यशुन्ध्यु
- भारद्वाजस्यौपहवौद्वौ
- भारद्वाजानिचत्वारि कण्वब्रहद्वाद्वितीयम्
- भारद्वाजानित्रीणि
- भारद्वाजेद्वे
- भारद्वाजेद्वे (2)
- भार्गवञ्चैव
- भार्गवेच
- भासञ्च
- भृष्टिमतस्यस्सौर्यवर्चस्यसामनीद्वे
- मण्डोर्जामदग्न्यस्यसामनीद्वे
- मधुश्चुन्निधनञ्च प्राजापत्यम्
- मनसश्चदोहः
- मरुताञ्चसंवेशीयंककूभंवा
- मरुताञ्चसाम्
- मरूतांव्रतोपोहस्सम्पद्वा
- मरूताङ्कालकाक्रन्तौ
- मरूताङ्गोष्ठापुंसिनिद्वे
- मरूताञ्चसंवेशीयम्
- मरूतान्धेनुनीद्वे
- मरूताम्प्रकीळास्त्रयःसङ्क्रीळावानिक्रिळावा
- मरूताम्प्रेङ्खःवसिष्ठस्यवा
- मर्गीयवञ्च
- महाकार्क्तवेशञ्च
- महाकार्तवेशञ्च
- महागौरीवितं तृतीयम्
- महायौधाजयञ्च
- महारौरवञ्च
- महावामदेव्यंतृतीयम्
- महावैश्वामित्रेद्वे
- महासावेदसेद्वे
- माण्डवञ्च
- माण्डवञ्चैव
- माण्डवेद्वे
- मादिलम्
- माधुच्छन्दसञ्च
- माधुच्छन्दसम्
- माधूच्छन्दसङ्क्रौञ्चंसौपर्णंवा घृतश्चुन्निधनंआङ्गिरसानिवा
- मानवञ्च
- मानवेद्वे
- मारूतंवैश्वामित्रंवा आङ्गीरसानांवा साम मैधातिथंवा
- मारूतञ्च मरुतो गायत्र्यग्निः
- मारूतञ्चैव
- मार्गीयवञ्चैव
- माहावामदेव्यञ्च
- मित्रावरुणयोश्चसंयोजनम्
- मैधातिथम्
- यमस्यार्कौद्वौ
- यामञ्च
- यामञ्च (2)
- यामञ्च (3)
- यामञ्च (4)
- यामम्
- यामम् (2)
- यामम् (3)
- यामम्मरूताञ्चसाम
- यामानित्रीणि
- यामानित्रीणि (2)
- यामेद्वे
- यामेद्वे (2)
- यामेद्वे (3)
- यौक्ताश्वेद्वे
- यौक्तास्रजमिन्द्रस्येन्द्रियंवा
- यौधाजयञ्च
- रजेराङ्गीरसस्यपदस्तोभौद्वौ
- रयिष्ठञ्च
- रेवञ्च
- रेवञ्चैव
- रौद्रेद्वे
- रौरवम्
- रौहितकूलियेद्वे
- लौशञ्च
- लौशम्
- लौशेद्वे
- वत्सस्यकाण्वस्य सामनीद्वे गौतमस्यवामनार्ये
- वत्सस्यकाण्वस्यसामनीद्वे
- वमृस्यवैखानसस्यसाम
- वरुणसामच
- वरुणसामानित्रीणि
- वरूणसामनीद्वे द्यावापृथिव्योर्वासामनी
- वरूणान्याश्चसाम
- वषट्कारनिधनञ्च साकमश्वम्
- वसिष्ठस्य वज्राणि त्रीणि
- वसिष्ठस्यचनिन्हवम्
- वसिष्ठस्यचप्लवम्
- वसिष्ठस्यचवीङ्कम्
- वसिष्ठस्यचवैराजे
- वसिष्ठस्यचापदासे
- वसिष्ठस्यजनित्रेद्वे
- वसिष्ठस्यजनित्रेद्वे (2)
- वसिष्ठस्यपदेद्वे
- वसिष्ठस्यप्रमंहिष्ठीयानिचत्वारि
- वसिष्ठस्यवींकानिचत्वारिइन्द्रस्यवाप्रियाणिआकूपाराणिवा
- वसिष्ठस्यशकूनः
- वसिष्ठस्यसङ्क्रमौद्वौसौहविषाणित्रीणि सर्वाणिवासौहविषाणि
- वसिष्ठस्यां कुशौद्वौ
- वसिष्ठस्यानुपदेद्वे
- वसिष्ठस्यापामीवेद्वे वायोर्वाभिकृन्दौ
- वसिष्ठस्याभरेद्वे
- वसुरोचिषस्सौर्यवर्चस्यसामनीद्वे
- वाकानित्रीणि
- वाक्तत्रतुरम्
- वाक्त्रतुरञ्च
- वाचश्चसाम
- वाचश्चसाम (2)
- वाचस्सामनीद्वे
- वाचस्सामनीद्वे (2)
- वाचस्सामनीद्वे (3)
- वाचस्सामानित्रीणि
- वाजजिच्चा
- वाजिजितौद्वौ
- वाजिदापर्यञ्च
- वाजिनाञ्चसाम
- वाजिनाञ्चसाम (2)
- वात्सप्राणित्रीणि
- वामदेव्यञ्च
- वामदेव्यञ्च (2)
- वामदेव्यञ्च (3)
- वामदेव्यम्
- वाम्राणित्रीणि
- वाम्राणित्रीणि (2)
- वार्क्जभञ्च
- वार्शानित्रीणि
- वार्षाहरम्
- वार्षाहरेद्वे
- वासिष्ठञ्च
- वासिष्ठम्
- वासिष्ठानि त्रीणि भार्गवं वा तृतीयम्
- वासिष्ठानित्रीणि
- वासिष्ठानिषट्
- वासिष्ठेद्वे
- वासुमन्देद्वे
- वासोक्रञ्च
- विरूपस्य समिचीन प्राचीनेद्वे
- विरूपस्यचतन्त्रे
- विश्वामित्रस्यचार्दः
- विश्वामित्रस्यचैवात्यर्दः
- विष्णोररणीद्वे
- विष्णोश्चसाम
- विस्पर्धञ्च
- वेणोर्विशालेद्वे
- वैखानसम्
- वैतहव्यञ्च
- वैतहव्यानि त्रीणि
- वैदन्वतञ्च
- वैदन्वतम्
- वैदन्वतानिचत्वारि ऋषभोवावैदन्वतश्चतुर्थः
- वैनसोमकृतवेद्वे
- वैरूपञ्च
- वैरूपञ्च (2)
- वैरूपञ्च (3)
- वैरूपम्
- वैरूपाणित्रीणि
- वैरूपाणित्रीणि (2)
- वैरूपेच
- वैरूपेचदेवानांवाञ्जसायिनी
- वैर्यश्वञ्च
- वैर्यश्वम्
- वैश्यज्योतिषेच
- वैश्वज्योतिषाणित्रीणि
- वैश्वदेवञ्च
- वैश्वदेवञ्चैव
- वैश्वदेवेच
- वैश्वदेवेच (2)
- वैश्वदेवेद्वे
- वैश्वदेवेद्वे (2)
- वैश्वमनसञ्च
- वैश्वमनसञ्च (2)
- वैश्वमनसञ्चादित्यसामवा
- वैश्वमनसम्
- वैश्वामित्रञ्च
- वैश्वामित्रञ्च (2)
- वैश्वामित्रञ्च (3)
- वैश्वामित्रञ्च (4)
- वैश्वामित्रञ्च (5)
- वैश्वामित्रम्
- वैश्वामित्रम् (2)
- वैश्वामित्रेच
- वैष्टम्भञ्चैव
- वैष्टम्भेद्वे
- वैष्टम्भेद्वे (2)
- वैष्णवानि त्रीणि इहद्वाम दैवोदासन्तृतीयं और्ध्वसद्मनानिवा
- शय्यातानित्रीणि
- शाकपूतञ्च
- शाकपूतेद्वे
- शाकलम्
- शार्करेद्वे
- शार्म्मदे द्वे
- शुक्लएकम्
- शैखण्डिनञ्च
- शैखण्डिनीत्रीणि
- शैखण्डिनेद्वे
- शैखण्डिनेद्वे (2)
- शैतन्त्रृतीयम्
- शैतेष्याणिचत्वारि
- शैरीषेच
- शैरीषेद्वे
- शैशवेद्वे
- शौक्तसामनीद्वे
- शौक्तानि त्रीणि शुक्लानिवा आश्वानिवा
- शौक्तानित्रीणि
- शौक्तानित्रीणि (2)
- शौक्तानिपञ्च
- शौनश्शेपञ्च
- श्नाभाश्नौष्टेद्वे
- श्नौष्टाणित्रीणि
- श्यावाश्वञ्च
- श्यावाश्वञ्च (2)
- श्यावाश्वञ्च (3)
- श्यावाश्वञ्च (4)
- श्यावाश्वस्यप्रहितौद्वौ
- श्यावाश्वेद्वे
- श्यावाश्वेद्वे (2)
- श्येनञ्च
- श्रायन्तीयञ्च
- श्रुष्टिगवञ्च
- श्रुष्टीगवम्
- श्रौतकक्षेद्वे
- श्रौतञ्च
- श्रौतर्वणञ्च
- श्रौतर्षाणित्रीणि
- संश्रवसे वीश्रवसे सत्यश्रवसे श्रवस इतिवार्यानां सामानिचत्वारी सांशानानिवा
- संहितञ्च
- संहितञ्चैव
- सत्यश्रवसोवार्यश्चसाम
- सन्तनिच
- सन्नतेद्वे
- सभानित्रीणि
- समन्तानित्रिणिअग्नेरेकमिन्द्राग्न्योर्वाप्रजापतेर्वावरुणस्यद्वे
- समुद्रस्यच प्रैयमेधस्य साम
- सराधसःप्रराधस्यश्चाङ्गिरसयोस्सामानित्रीणि
- सवितुश्चसाम
- सवितुश्चसाम (2)
- साकमश्वन्धुरांवासाम
- साकमश्वस्यशौनःशेपेःसामनी द्वे
- सात्यम्
- साध्रञ्च
- साध्राणि त्रीणि
- सामराजानित्रीणि विशालानिवा उद्वन्तिवा सम्पद्वा तृतीयम्
- सावित्राणिषट्प्रैय्यमेधानिवा
- सुज्ञानेद्वे
- सुमित्रस्यचवार्द्धश्वेस्साम
- सूरूपेद्वे
- सूर्यसामच
- सूर्यसामच (2)
- सूर्यसामनीद्वे
- सैन्धुक्षितानित्रीणि
- सैन्धुक्षितानित्रीणि (2)
- सोमसामच
- सोमसामच (10)
- सोमसामच (2)
- सोमसामच (3)
- सोमसामच (4)
- सोमसामच (5)
- सोमसामच (6)
- सोमसामच (7)
- सोमसामच (8)
- सोमसामच (9)
- सोमसामचैव
- सोमसामचैव (2)
- सोमसामचैव (3)
- सोमसामनीद्वे
- सोमसामनीद्वे (2)
- सोमसामनीद्वे (3)
- सोमसामनीद्वे (4)
- सोमसामानि त्रीणि
- सोमसामानिचत्वारि
- सोमसामानिचत्वारि (2)
- सोमसामानिचत्वारि वासिष्ठानिवा मदाईनिधनानिवा त्वाष्ट्रीसामानी
- सोमसामानित्रिणि
- सोमसामानित्रीणि
- सोमसामानित्रीणि (2)
- सोमसामानिषट्
- सोमस्ययशांसित्रीणि
- सोमापौष्णञ्च
- सौकृतवञ्च
- सौपर्णञ्च
- सौपर्णञ्च (2)
- सौपर्णानि त्रीणि
- सौपर्णेद्वे
- सौबभ्रवेद्वे
- सौभरञ्च
- सौभरञ्च (2)
- सौभराणित्रीणि
- सौभरेद्वे
- सौभरेद्वे (2)
- सौमित्रञ्च
- सौमित्रञ्च (2)
- सौमित्रञ्च (3)
- सौमित्राणित्रीणि
- सौमित्रे
- सौमित्रेद्वे
- सौमित्रेद्वे (2)
- सौमित्रेद्वै दैवोदासं तृतीयं श्रौतकक्षाणिवा
- सौमेधानित्रीणि पौर्वतिथानिवा
- सौयवसानिचत्वारिपुनरींळवातृतीयम्
- सौरश्मेद्वे
- सौश्रवसेद्वे
- स्तौभञ्च
- स्वःपृष्ठञ्चैवाङ्गिरसम्
- स्वःपृष्ठमाङ्गिरसम्
- स्ववस आञ्जीकस्यसामनीद्वे
- हारायणानि त्रीणि
- हारिवर्णानिचत्वारि
- हाविष्कृतेद्वे
- हाविष्मतेद्वे