॥ जैमिनीय साम सङ्ग्रहः ॥
संस्करणम्: 2.05 , निर्मितम्: 30-09-2026
प्रयोगमाला (पूर्व भागम्)
औपासनम् (२)
॥ गोषूक्तम् ॥
य दि न्द्रा हंषीय थौ हो औ हो वातूहा इ तु वातीम् । ईकशी या वाकिस्वा यौटाहु वाटाइ हु वाटिइ का ईटित् । स्तोकता मे गोटिसा खौटाहु वाटाइ हु वाटिइश। सा याटाद्धोटयाखऔ हो वाशि। अ ग्नि राकिहु ताःटाख् ॥१॥
॥ आश्वसूक्तञ्च ॥
आखबु हौ हो वा हा य दि न्द्रा हाशृम् । या था त्वा मैटीही ऐ हीतिच्। आ इ शीकिया वाकास्वा आ इ क इ दैटूही ऐ हीतिच्। ओटइ स्तो ताटिमा इ गोटिच्सा खाकासाटट्याखऔ हो वाशि। शु क्र आकिहु ताःटाख् ॥२॥
आत्मारोपणम् (३)
॥ श्यावाश्वञ्च ॥
आ जु हो ताती। ह वि षा म र्ज याटूचध्वांयवाट। नि हो ता रषीङ्गृ हा पा ति न्द धाटूचइचध्वांयवापइ ळाखास्पा ताताइश। ना म साचिरा ता हाटिओ व्याटाम् । सा प री याकीता या ज तकीम्पापस्त्यो बाप्ला। ओ नाप्लाम् । हा इशा ॥३॥
॥ ऋतुसामनीच ॥
ओ इषाचि त्र इ च्छा इ शोयूस्त रु णापिस्या वा क्षाकिथाःफ। ओ इ न यो मा ता रायूव नु वापिइ ती धा ताकीवेफ। ओ अ नु धा यायुद जी ज नापीद धाचाचीकदाफ। ओषइ व व क्ष सा द्योयूमा हीटाद्यू त्या न्चाखिरात्रन् । दु त्य न्च र न्माटुहीख ॥४॥
चि त्राताएत। एतएपइ च्छि शो स्त रू ण स्य व क्ष थषेक्ष थो ही ही ही यातूहातबुश। एतएपन यो मा त रा व न्वे ति धा तषेवे त वे ही ही ही यातूहातबुश। एतएपअ नू धा य द जी ज न द धा चिषैदा चि दा ही ही ही यातूहातबुश। एतएपव व क्ष स्स द्यो म हि द्यु त्य न्च रषैन्च र न्ही ही ही यातूहा उ वाति। एतऋ तूटाख् ॥५॥
उपाकर्म (०)
उदकशान्ति
॥ प्राजापत्यङ्गायत्रम ॥
त त्स वि तु व रेचूण्योंश। भ र्गोषादे व स्य धी मा हाटू। ईकधी यो यो नःटी। प्राषट्चा हिंचाभाट। ओसटवाचओसटवाचओसटवाच। हि म्भाटाओकवाच ॥१॥
॥ गौतमस्यपर्कः ॥
ओतग्नातइश। आ याथाच्ही वाचाइश। ता याटाइशता याटिइश। गृ णाचानोशह व्या दाचि। ता याटाइशता याटिइश। ना इ होकिताच। साटत्साटइ बाखाऔ हो वाशि। हीखषिश ॥२॥
॥ कश्यपस्यबर्हिषीयम् ॥
अ ग्न आ या ही वीतू। ता या इ गृ णा नोषूह व्य दा ताटीयातइश। नी हो ताचिस त्सी ब र्हाटीइ षीता। ब र्हाटाइ षाखाऔ हो वाशि। बचर्ही षीखा ॥३॥
॥ गौतमस्यचैवपर्कः ॥
अ ग्न आ या ही वातूइ ता यातिइश। गृ णा नो ह व्य दायूतापयेश। नि हो ताखिसाणत् । साटइ बाताॠ हापाआ इ षोप्लि। हा इशा ॥४॥
॥ बृहत्प्राजापत्यंभरद्वाजस्यवा ॥
औ हो इ त्वा मि द्धीषूह वा म हातीएत। सा तौ वा जा स्या काकुराखवाःण। तू वापाऔकहो वाथा। वृ त्रा इ षु वाषुवा इ न्द्रा साटीओ त्पा ति न्नाखराःण। तू व ङ्का ष्ठापीऔकहो वाथा। सूटव र्वाखाता हो वाशिहा उ वाति। हाचस् ॥५॥
औ हो इ तु वातीमेत। का ष्ठा सूकिव र्वाखाताःण। स त्वापाऔकहो वाथा। नषश्चा इ त्र वा ज्रा हाटु। ओ स्ता धृकिन्नाखराःण। तू व ङ्का ष्ठापीऔकहो वाथा। सूटव र्वाखाता हो वाशिहा उ वाति। हाचस् ॥६॥
औ हो इ म हातुएत। ता वा नोकिअ द्राखाइ वाःणा। ग मापाऔकहो वाथा। शू वं र था या माटुओ इ न्द्रा सकीङ्गाखराण। स त्रा वा जापीऔकहो वाथा। नाटजा इ ग्यूखाषा इ हो वाशीहा उ वाति। हाचस् ॥७॥
॥ अग्नेश्चरथंतरंवसिठस्यवा ॥
ओ भि त्वा शू र नोकूनू मोचावाश। आ दु ग्धा इ व धे न व ई शाषैन म स्य ज ग ताकूस्सु वाटादृ शाताम् । ईकशा न मापिइ न्द्राशा। ता स्थूटाटट्षा ओ वाचिहा उ वाकि। आचस् ॥८॥
ईकशोचवाश। ना मि न्द्र त स्थु षोषून त्वा वं अ न्यो दि व्योकूच्न पाटार्थि वाःता। ना जा तोकिनापजाश। ना इ ष्याटाटट्ता ओ वाचिहा उ वाकि। आचस् ॥९॥
नाकजोचवाश। तो न ज नि ष्य ते अषूश्वा य न्तो मा घ वकूच्न्वि न्द्र वाटिजी नाःता। ग व्य न्त स्त्वापीहाश। वा माटाटट्हा ओ वाचिहा उ वाकि। आचस् ॥१०॥
प्रतिसर बन्धनम् (रक्शाबन्धनम्) (३२)
॥ अग्नेश्चराक्षोघ्नम् ॥
अ ग्ने रा क्षाखीणोशअं हा सःप्लि। प्रा ति स्म देकीवा री षाटिताःत। ता पा इ ष्ठाटीइ राता। ज रो दाटिहाखण्। ओपइ ळाशा ॥११॥
अ ग्ने यू ङ्क्ष्वाखीहीशये ता वाप्लि। अ श्वा सो देचीवा सा धाटिवाःत। आ रं वाटिहातन्तीकया शाटावाःखण्। ओपइ ळाशा ॥१२॥
॥ गोतमस्यपौरुमुद्गेद्वे पुरुमुद्गस्यवाङ्गीरसस्यदेवानांवा ॥
अ ग्ने ज रि त र्वि स्प तिषृरौ हो वा ए हि यातूहातबुश। त पाकानो देटावाचर क्ष साचिअ प्रोकाषायइ वाटान् । गा र्हा पा ताटीइ र्मा हंकियाखसीण। दी वाचास्पा यौकावा उ वोखिवाप्लहातहातइश। दु रो ण यूःप्ली। होप्लइ ळाशा ॥१३॥
अ ग्ने ज रि ता र्वीफूस्प तीतास्तापपा नो दे व र क्ष साःशू। ता पा नो दे वषुर क्ष सा अ प्रो षीटूवातन् । गृ हाचाप ता इ र्माचीहंकयाखसीण। ओखहाप्लहातहातइश। दी व स्पाचियूःट। ओखहाप्लहातहातइश। दु रोटाच्णाकयूःच। ओखहाप्लहा हाखाण्इश। ओपइ ळाशा ॥१४॥
॥ मानवेद्वे ॥
नि त्वा म ग्नातीइश। म नु र्दाखिधाणइश। ज्यो ति र्ज नाकीयाचशायश्वा ताटाइश। दीकदा इ था ककीण्वा ऋ त जाटीत ऊटाक्षाखइ ताःणा। य न्ना माटिस्यातन्ताटट्इ कृखाऔ हो वाशि। ष्टाखयाःप्ल ॥१५॥
हो वा इ नि त्वा मषूग्ने म नु र्द धे होतूवातइश। ज्यो ति र्ज ना यषुश स्व ते दा इ देचूथा क ण्वाकिऋ त जाटिओ त ऊटिक्षाखइ ताःणा। य न्ना माचिस्यातन्ताटट्इ कृखऔ हो वाशि। ष्टाखयाःप्ल ॥१६॥
॥ भारद्वाजस्यप्रासाहम् ॥
अ हा वो अ हा वोषूअ हाता। सा ना द ग्ना इकुमृ णा सी याकीतू धाखानाशन् । न त्वा र क्षां सीकुपा र्ता नाकिसु जीखाग्युःप्ल। अ नु द हाकीस ह मू राकीङ्क याखादाःप्ल। अ हा वो अ हा वोषूअ हाता। माकता इ हेकित्या मु क्ष त दापुइ वी याखि। याःत्र ॥१७॥
॥ अगस्तस्यचराक्षोघ्नम् ॥
प्र त्या ग्नेफिप्लहो इ ह र साखुह रा एप्लि। श्रृ णा हि वाटीइ श्व ताःखाणफप्ल्। प्राखतीश। याटतू धा नाचि। स्य र क्ष सोचीबाटलातम् । न्यु ब्जाताओपबाप्ल। रीखयशम् ॥१८॥
॥ अगस्तस्यचराक्षोघ्नम् ॥
ई ळाकाइ ष्वापाहि प्र ति व्याशिम् । या ज स्वाकिजा ता वेकिद साटाञ्च रि ष्णु धू माखुम ग्र भातिइश। ताटशोखऔ हो वाशि। चीखषशम् ॥१९॥
॥ अगस्तस्यचैवराक्षोघ्नम् ॥
हा बु श्रु ष्ट्या ग्नेषुन व स्या मेतहातबुश। स्तोकमा स्य वाकिई र वि स्प ता येपूऐ हि हा बु हो वाशू। नी माकाई नाकास्ता प सा रापीऐ हि हा बु हो वाशू। क्षा सापऐ ही हा बु हो वाशू। द ह ए हि याप्लुहाश। होप्लइ ळाशा ॥२०॥
॥ अगस्तस्यचराक्षोघ्नम् ॥
य द्वा ऊपिवि श्प ति श्शि तःशु। सु प्री तोकिमा नु षोकिच्वी शेचावी श्वे दाटिग्नीःत। प्रा ति र क्षां सि सेकूच्धाकता औटाहोखबाप्ल। होप्लइ ळाशा ॥२१॥
॥ तिरश्चेराङ्गीरसस्यसामनीद्वेदेवानांवादेवपुरे ॥
श्रु धीकाहा वांटाहा वाटान्ती र श्च्याःचि। इकन्द्र याटास्त्वतस पाटाहातर्या तीटायात। सु वी र्य स्यषीगो म तो राकीया स्पूटार्द्धीत। म हंटाय सि याखिण्। ओपइ ळाशा ॥२२॥
श्रु धी हा वाखन्ती र श्च्याःप्लि। इकन्द्रा य स्त्वा स प र्याकूता एटासु वी र्या स्याखीगोणमा ताःटा। रा या स्पू र्द्धीटीहातहातइश। म हं य सीप्ली। होप्लइ ळाशा ॥२३॥
॥ हारिवर्णानि चत्वारि ॥
त न्ते म द ङ्गृ णिटूमा सीचा। वृ षा णं पृ क्षु साटूचसाकहाचइशम् । ऊ लो का कृ त्नुषुम द्राटाइ वोताहाटरीतश्राटयाखण्म् । ओपइ ळाशा ॥२४॥
त न्ते म दषीङ्गृ णी म सीतीएत। वृ षा औकिहोखणं प्र क्षु सायीस हीशाम् । ऊ लो औकिहोखक कृ त्नु म द्रि वाःशु। हाकरोपबाप्लश्रा यांप्ला। हा इशा ॥२५॥
ताणन्तेफप्ल्हो इ म दांखीगृ णी म सी एप्लु। वृ षा होटिणं प्र क्षु सायीसा हिंटा। ऊ लो क कृ त्नुषुम द्रि वो हायीरीटच्श्रीकया मौपाहो बाप्ला। होप्लइ ळाशा ॥२६॥
त न्दे म दांफीगृ णी म साकीइश। वा र्षा णं प्र क्षूकुसा साटाहींतहो वाटाहातइश। ऊ लो काटिकृतहो वाटाहातइश। त्नु मा द्राटिट्इ वाखाऔ हो वाशि। हाचरि श्री याटिख्म् ॥२७॥
॥ वैश्वमनसम् ॥
ए तो न्वि न्द्रं स्त वातूमात। सा खाकाच्य स्तोटाम्याखणफप्ल्ना र मा कृ ष्टी योषूर्वि श्वाचाआ भी या स्त्याटीइ का ईटित् । आखऔ हो वाशि। ऊख ॥२८॥
॥ श्येनञ्च ॥
अ बो धि याती। ग्ना इ स्स मी धाकुज नाभानातम् । प्र ता इ धेभीनूतम् । इ वाकाया तीचामूकषा संथाय ह्वा ईभिवात। प्र व या मु ज्जिचुहा नाःथाप्र भा न्नाभिवाःत। स स्रा तेकिना काकामाचच्छा इ ळाटिभाखण्। ओपइ ळाशा ॥२९॥
॥ पाष्ठौहेच ॥
म हा इ त्राखीइ णणाम् । आ वाटार स्तु द्यु क्षाकीर्माखइ त्राणा। स्याटर्य म्नाटादु राकाधाखर्षणम् । वाकरोपबाप्लणा स्योप्ला। हा इशा ॥३०॥
म हि त्री णाषीम व र स्तुतीएत। द्यु क्ष र्म्मि त्रषीस्या र्य म्णाकिदु रा धाटिर्षातम् । वा रौ हो वाकीहि म्माटाणा स्योटाट्याखऔ हो वाशि। हातओ वाटाओ वाटाख् ॥३१॥
॥ साकमश्वंधुरांवासाम ॥
त्वा वा तोकिहा बु होकिओचइश। पु रो व सोकीहा बु होकिओचइश। वा य मि न्द्राकीहा बु होकिओचइश। प्र णे त ॠकीहा बु होकिओचइश। स्म सि स्था त ॠकुहा बु होकिओचइश। हा री णांकिहा बु होकि। ओपइ ळाशा ॥३२॥
॥ वैदन्वतञ्च ॥
इ न्द्र न्नाखिरोशने मा धाखिइ ताणा। हा व न्ताटिइ य त्पा राखीयाशयू ना जाखिन्ताणइश। थि या स्ताटिशू रो नाखि र्षाशता श्रा वाखिसाःण। चा का माटिइ या गो माखीतिशव्र जा इ भाखीजाण। तू व न्नाटिउ वाता। एतऊ पाटाख् ॥३३॥
॥ इन्द्रस्यचत्रातम् ॥
त्राकता र मि न्द्रषीम वि ताकिरा मीटान्द्रातम् । हा वे ह वे सूषुहा वं शुकिरा मीटान्द्रातम् । हू वा इ नु श क्रंषूपु रू हूकिता मीटा न्द्रातम् । ई दंथाहा वाचाइशमा घ वा वापीइ तू वाखिइश। न्द्राःत्र ॥३४॥
॥ बार्हस्पत्ये द्वे अग्नेर्वाराक्षोघ्ने ॥
अ हा वो हाखीवोप्लअ हा वो हाखीवोप्लअ हा वो हाखीवाःण। अ ग्नि ष्टा पा तीटुच्प्र ति द हाकीख्त्य ग्निं हो ताकीर म्माखान्ये दाचास्वकन्तफम् । वा सो स्सूकीनुं स ह साकीजाखता वेचादकसफम् । वि प्राचान्न जाखाता वेचादाकसफम् । या ऊचार्ध्व याखासू आचाध्वाकराःफ। दे वो देकवाखची याचाकृकपाफ। घृ ताकास्या बि भ्राकिष्टि म नु शूखीक्रा शोचाचीकषाःफ। आ जु ह्वाकिन्वाखस्या साचार्पीकषाःफ। अ हा वो हाखीवोप्लअ हा वो हाखीवोप्लअ हा वो हाखीवाःण। अ ग्नि ष्टा पा तीटुच्प्र ती द हाकीख्आ तात्राइश। एतवि श्वंकास म त्री ण न्द हाखू। एतवि श्वंकास म त्री ण न्द हाखू। एतवि श्वंकास म त्री ण न्द हाखू ॥३५॥
त्य ग्नाखाइःशप्र ति द हाफितीप्लहा बु होखिहा बुशा। अ ग्निं हो ताकीर म्माखान्ये दाचास्वकन्तफम् । वा सो स्सूकीनुं स ह साकीजाखता वेचादकसफम् । वि प्राचान्न जाखाता वेचादाकसफम् । या ऊचार्ध्व याखासू आचाध्वाकराःफ। दे वो देकवाखची याचाकृकपाफ। घृ ताकास्या बि भ्राकिष्टि म नु शूखीक्रा शोचाचीकषाःफ। आ जु ह्वाकिन्वाखस्या साचार्पीकषाःफ। त्य ग्नाखाइःशप्र ति द हाफितीप्लहा बु होखिहा उ वाशि। एतवि श्वंकास म त्री ण न्द हाकूख्। एतवि श्वंकावि य त्री ण न्द हाकूख्। एतवि श्वंकानि य त्री ण न्द हाकूख् ॥३६॥
॥ आदित्यासामनी द्वे तार्क्षसामनीद्वे ॥
त्य मू षूखिवा जि नाखिन्देखव जूखातशम् । स होकावा नथान्ता रू ताकिरं र थाखिनाशम् । अ रि ष्ट नाखीइ मींशापृ त नाखिज माखाशूशम् । स्व स्त या इ ताकुर्क्ष मि हाखिहू वाखाइश। मात्रम् ॥३७॥
इ य इ यातीहा इ त्य मु षुषुवा जि नाखिन्देखव जूखातशम् । ई याफाई याफाआप्लहातइश। स होकावा नथान्ता रू ताकिरं र थाखिनाशम् । इ य इ यातीआकरि ष्ट ना इ मिंटुपा र्ता नाकिज माखाशूशम् । ई याफाई याफाआप्लहातइश। स्व स्त या इ ताकुर्क्ष मि हाखिहू वाखाइश। मात्र ॥३८॥
॥ आतीषातीयेद्वे ॥
सो माःचापूकनाफप्ल्ओ न ऊखिर्म्मि णा एप्लि। अ व्यं वा रं वि धायूवापतीश। अ ग्रे वाखिणफप्ल्चाःतच्पाकव माटानाःत। काटट्नाखऔ हो वाशि। क्र द देखि ॥३९॥
॥ दीर्घे द्वे ॥
सा सूता। न्वे योकावा सूटानातम् । यो राटाया मा नेचिताथया इ ळाटिनातम् । सोटमाःत। या स्सूकाक्षी तापाआ इ नांप्लि। हा इशा ॥४०॥
स सु हातिबुश। न्वे यो वा सू नांटुहातबुश। यो राचाया मा नेचिताथया इ ळा नांटीहातबुश। सो मो या स्सूटीहातबुश। क्षि तीकाना मौपाहो बाप्ला। होप्लइ ळाशा ॥४१॥
॥ वसिष्ठस्याभरेद्वे ॥
वि श्व तोतिहातबुश। दाकवथन्वि श्व तोकिन याताहा ओखाहाण। आ भ राकिभाटरात। य न्त्वाटाश वीकाष्ठा माचाइश। मा हाटाऔ हो औ होखीवाश। ऐ ही ऐ हीतीच् ॥४२॥
इ ति प्र ति स र ब न्ध न म् - र क्शा ब न्ध न म् ।
॥ वामदेव्यञ्च ॥
आ वो रा जाती। न म ध्वा र स्य रूखूद्रशम् । हो ताकराचम् । सषत्य य जं रो द सीखूयोःप्ल। अ ग्निंचापू राचात न इ त्नो रा चीखूक्ताशत् । हि रचाण्य रू पाटिम व सापिइ का र्णूखि। ध्वात्रम् ॥४३॥
॥ वसिष्ठस्याभरे द्वे ॥
वि श्व तो दा वषुन्वि श्व तो न यातु। भ राकाभाटरात। य न्त्वाटाश वीकाष्ठा माचाइश। मा हा औटिहोखबाप्ल। होप्लइ ळाशा ॥४४॥
॥ बार्हस्पत्यञ्चब्राह्मणस्पत्यंवा ॥
प्रै तू ब्राखिह्मा णा स्पा तीःप्ली। प्रा दा इ व्येटीच्तूकसू नृ ताकिअ च्छाटावाखइ रणाम् । न र्यं पतिच्न्ती राचाधायसाटम् । दे वाटायाखज्ञणम् । नाटयाखऔ हो वाशि। तूखनाःश ॥४५॥
॥ रौरवम् ॥
वि श्वे ता वि ष्णूतुरा भापाराणत् । ओ रू क्रा म स्त्वे षि त श्श तं म हिषैषां क्षी र पा क मोटूद नातामो हापाउ वाशा। व रा ह मि न्द्रा एटूहातओ हापाउ वाशा। ओकषा औटाहोखबाप्ल। होप्लइ ळाशा। ॥४६॥
व रा ह मि न्द्रातुए मूपाषूशम् । ओ रा ह मि न्द्र ए मु ष न्त्वि ष न्तेषैसु कृ तं सू म याटून्ध नूता। रो हापाउ वाशा। सा धु र्बु न्दो हि राटूहादृतओ हापाउ वाशा। ओकया औटाहोखबाप्ल। होप्लइ ळाशा ॥४७॥
सा धु र्बु न्दो हातुइ रा ण्यापियाःण। ओ धु र्बु न्धो हि र ण्य य उ भा तेषैबा हु र ण्यां सु सांटूस्कृ ताताओ हापाउ वाशा। ऋ दु पे चि दृ दूटूहातओ हापाउ वाशा। ओकधा औटाहोखबाप्ल। होप्लइ ळाशा ॥४८॥
॥ यौधाजयम् ॥
वि श्वेचातायविपष्णूप्लरा भाखाराणत् । ओकरु क्र माटिस्तु वाखाणफप्ल्इश। षीखताःप्ल। ओ तांकाम हि षांकिक्षीकर पाटाक मोखाणफप्ल्। दाखनंश। व राखाओसमाटइ न्द्र एखिणफप्ल्मूखष म् । ॥४९॥
वा राचाहायमीपन्द्राप्लए मूखाषणम् । ओ राकाह माटाइ न्द्र एखिणफप्ल। मूखषशम् । ओ वाकाइ क्ष न्तेकिसु कृ तंकिसूटम यांखाणफप्ल्। धाखनुःश। सा धूःखाओसन्दोटहि राखाणफप्ल्। ण्याखयाःप्ल ॥५०॥
सा धूचार्बूयन्दोपहीप्ल्रा ण्याखायाःण। ओकधु र्बु न्धोटिहि राखा। ण्याखयाःप्ल्। ओकभा तेकाबाकहु र ण्याटिसु सांखाणफप्ल्। स्काखर्त्ताशम् । ऋ दूखाओ चा इ दृ दूखिणफप्ल्। वाखर्द्धाश ॥५१॥
॥ अग्नेश्चवारवन्तीयम् ॥
इ दंकावि ष्णू रौथिहो हाटाइश। ओ चाकाक्राखमाणइश। त्रा इ धापिहाचइश। नी द धे पापीऔ हो वा इ होखुहाणइश। उ हु वाखिदाणम् । ओ मू ढाकिम स्य पां सूपीऔ हो वा इ होखुहाणइश। उ हु वापिला ए हि याप्लीहाश। होप्लइ ळाशा ॥५२॥
त्री णी पाकिदा औथाहो हाटाइश। ओ चाकाक्राखमाणइश। वि ष्णु र्गोपिहाचइश। पा अ दा भापीऔ हो वा इ होखुहाणइश। उ हु वाखियाःण। ओ तो धकिर्मा णि धा रापीऔ हो वा इ होखुहाणइश। उ हु वापिना ए हि याप्लीहाश। होप्लइ ळाशा ॥५३॥
वि ष्णोः ककिर्म्मा औथाहो हाटाइश। ओ पाकाश्याखताण। य तो व्रापिहाचइश। ता नि प स्पापीऔ हो वा इ होखुहाणइश। उ हु वाखिशेण। ओ न्द्रा स्य यूकीज स्सापाऔ हो वा इ होखुहाणइश। उ हु वापिखा ए हि याप्लीहाश। होप्लइ ळाशा ॥५४॥
॥ यौक्ताश्वेद्वे ॥
औ होताहोतहा इ वृ षाती। पाकव स्व धा रा याटुमाचरूकत्वाखताणइश। ओ इ चा माटिचाकम त्साखाराःण। औ होताहोतहा इ वि श्वाती। द धाटानाखओशजा साखाऔ हो वाशि। ओ इ ज्व राखी ॥५५॥
वृ षा बु होतीहोतहातइश। पाकव स्व धा रा याटुमा रूटात्वाखताणइश। च माताच्ओ चाकाम त्साखाराःण। वि श्वा बु होतीहोतहातइश। द धाटानाखओशजाटसाखऔ हो वाशि। ओ इ जूखिवाश ॥५६॥
॥ कावञ्च ॥
क वि म ग्नीतीम् । उ पा स्तूटिट्हाखऔ हो वाशि। स त्याचाधकर्मा ण माचिध्वा रेचा। दे वा म मीती। वा चा ताटिनाखण्म् । ओपइ ळाप्ला ॥५७॥
॥ विष्णोर्व्रतम् ॥
हा बु हा बु हातुबुश। ऊटऊटऊ उ वाटिहा उ वातिहाचस् । आतहाचस् । अ र्चि शो चि स्त पो ह रः प्रष्लक्ष स्य वि ष्णो अ रू ष स्य नू माटेहाःत। प्रा नू वो चो वि दषूथा जा त वे दाटुसातइश। वै श्वा न रा य मषूति र्न व्य से शूटुचीःत। सो म इ व प वषूते चा रु र ग्नाटुयातइश। हा बु हा बु हातुबुश। ऊटऊटऊ उ वाटिहा उ वातिहाचस् । आतहाचस् । अ र्चि शो चि स्त पोषूह रोटाहा उ वाति। ईख ॥५८॥
॥ प्रजापतेर्हिकनिकविकानित्रीणि ॥
क ईं व्य क्ताःती। ना र स्सा नाचीइ ळाटाच्रू द्र स्य म र्या याटूट्थाखऔ हो वाशि। स्वतश्वाःटख् ॥५९॥
का ईंणाफ्वि याखाक्ताःप्ल। ना राणाफ्स्साखना इ ळाःप्लि। रू द्र स्य म र्या याटूट्थाखऔ हो वाशि। सु वाताश्वाःख ॥६०॥
का ईंथावि याटाओकवाखक्ता ना राःशि। स नाटाओकवाखइ ळा रू द्राशी। स्य माटाओकवाखर्या या थाशि। सु वाटाओकवाखश्वाःप्ल। होप्लइ ळाशा ॥६१॥
॥ अग्नेश्चजराबोधीये ॥
जा राता। बो धाटाबो धाटाता द्वीचावि ढ्ढाचाइश। वी शेकावा इ शेटिय ज्ञोटाया याखाऔ हो वाशि। स्तो मंकारू द्रा य दृ शीकूकाचम् ॥६२॥
ज रा बो धोतीवात। ताचद्वी वि ड्ढाचिइश। वी शा इ वाटीइ शेता। याथज्ञीशया या स्तोकिच्मांचरूयद्रापयाणदृश। शी कोखाइ ळाशा ॥६३॥
॥ शौक्तसामनी द्वे ॥
ओतहा इ स खा य याषूनी षी दातितात। पु नाकानौ हो इ पु नाकुनौ हो एपिया प्रा या प्राशी। गाकय तौ हो इशीगाकय तौ हो एपीशा इ शूं शा इ शूशूम् । ना य ज्ञौ होतीइशना य ज्ञौ हो एपुपा रीतापा राखाऔ हो वाशि। एतच्भू ष त श्रि येतुच् ॥६४॥
स खाफाय या उ वोखीवाश। नी षा इ दा ताटुउ वोखावाश। पु नाकाना य प्र गाकीय ताताशा इ शाटिउ वोखावाश। ना य ज्ञैः पा रि भूटूषा ताटाउ वोखीवाश। श्रि येताच् ॥६५॥
॥ महावामदेव्यंत्रृतीयम् ॥
काणयाफन श्चाफाइ त्राखाया भु वाशित् । ऊ तीकास्सा दाकावृ ध स्स खा औकुहो हाताइ क याटिश चाताइश। ष्ठ यौ होतिहि म्माटावाटर्तोख। हात्रइश ॥६६॥
काणस्त्वाफस त्योफामाखदा नाशाम् । मं हि ष्ठोकिम त्स दकीन्ध सा औकिहो हाताइ दृ ढाटिचि दाता। रू जौ होतिहि म्माटा। वाटसोख। हात्रइश ॥६७॥
आणभीफषू णाफास्साखखी नाशाम् । अ वि ताकिज रा इ तृकीणा मा औकिहो हाताई शा तांटिभ वाता। सि यौ होतिहि म्माटा। ताटयोख। हात्रइश ॥६८॥
ऋतुशान्ति (५९)
॥ इन्द्रस्यहरिश्रीःनिधनम् ॥
उ च्चाषाते जा त म न्धा साकूउ च्चा तेकिजाथच्। ओ अ न्ध साटीच्दि व स त्भूचीम्या हो वाकिदा देटाहा उ वाति। उ ग्रं शाटिर्म्मात। ओ हा इ श्राटीट्वाखऔ हो वाशि। हाचरि श्रीःटाख् ॥१॥
स नषाइ न्द्रा य य ज्य वेकूच्स न इकिन्द्राच। ओ य ज्य वाटीच्इ व रू णाकीय मा रू हो वाकूत्भा याटाहा उ वाति। व रि वोटिवीतत् । ओ हा इ श्राटीट्वाखऔ हो वाशि। हाचरि श्रीःटाख् ॥२॥
ए ना वि श्वाषीन्य र्य आकीए नाकावि श्वाथाच्। ओ अ र्य आटीच्द्यु म्ना नि माकीनु हो वाकिषा णांटाहा उ वाति। सी षा साटिन्ताःत। ओ ना माटिट्वाखऔ हो वाशि। हाचरि श्रीःटाख् ॥३॥
॥ आङ्गीरसञ्चइन्द्रस्यवा हरिश्रीर्निधनम् ॥
गि र्व णः प हि नषूस्सु त ङ्गि र्व णः पातू। ही ना स्सु ताटीच्म्मा धोकार्धा राकाभी रा हो वाकीज्या सेटाहा उ वाति। इ न्द्र त्वाटिदात। ता मा इ द्याटीट्शाखऔ हो वाशि। हाचरि श्रीःटाख् ॥४॥
॥ घृताचेराङ्गिरसस्यसामनीद्वे ॥
प्र स म्म्रा जातीम् । आ सु र स्य प्रा शाखूस्तशम् । पुं सः कृ ष्टा इ नाटूमा नु माकिदी याखास्याश। इ न्द्र स्ये वाखीप्रा ता वा सः कृ ताखूनिश। व न्दचाद्वी राथाव न्दचामा नाथावि वाटाष्टूखऔ हो वाशि। दीखश आःप्ला ॥५॥
अ र ण्योःति। नि हि तो जाखीत वेखादाःप्ल। ग र्भ इ वेषीत्सु भृ तो गफुर्भि णाखाइ भीःप्ला। दी वे दी वषीई ढ्यो जाकिगृ वाटात्भीःत। हाखवीप्लष्माखत्भीःण। म नु ष्ये भी र ग्निषूरे हि या हाप्लू। होप्लइ ळाशा ॥६॥
॥ ऋष्यस्य व्रतं भूतेच्छन्दसं वा ॥
हा री त इ न्द्र श्माटूश्रूखणीण। ऊ तो ते ह रि ताटूहाखरीण। तषन त्वा स्तु व न्ती काटूराखवाःण। पा र्षाचासो व ना गाखीर्वाःण। ऋ ष्या स इ न्द्र भुंटूआखइ तीणा। मा घ व न्नि न्द्र भुंटूआखइ तीणा। भुं इ तीकिप्रा भुं इ तीकी। इ न्द्र स्त स र पूकूताःख ॥७॥
॥ दिशाञ्च दशानुगानं दश ॥
हा बु हा बु हातुबुश। अ हचाम न्नकाम हचाम न्नकाम हचाम न्नाका। दोचह म न्नाकिदोचह म न्नाकिदोचह म न्नाकि। दोचअ हं वि धाकीर योचाअ हं वि धाकीर योचाअ हं वि धाकीर याःचा। हा बु हा बु हातुबुश। य द्व र्चोकिहि र ण्या स्याकी। य द्वाचाव र्चोकाग वाकामु ताचा। स त्या स्याकिब्र ह्म णोकिव र्च्चाःचा। ते न माकिसं सृ जाकिम साचाइश। हा बु हा बु हातुबुश। अ हचाम न्नकाम हचाम न्नकाम हचाम न्नाका। दोचह म न्नाकिदोचह म न्नाकिदोचह म न्नाकि। दोचअ हं वि धाकीर योचाअ हं वि धाकीर योचाअ हं वि धाकीर याःचा। । हाषबु हा बु हा उ वातू। एतच्अ ह मचिन्न म ह म न्ना दोकूअ हंचावि धाकीर याःकाएतच्अ ह मचिन्न म ह म न्ना दोकूअ हंचावि धाकीर याःका। एतच्अ ह मचिन्न म ह म न्ना दोकूअ हंचावि धाकीर याःका। एतआ हंकाच्स्व र्ज्योटातीःख ॥८॥
हा बु हा बु हातुबुश। आ हं स होटी। आ हं स होटी। आ हंचास हःशा। आ हं साचिस हि र हं साचुस हि र हं साचुस हिशा। र हं साकास हाशा। नो अ हं साकीस हाशा। नो अ हं साकीस हाचानःश। हा बु हा बु हातुबुश। य द्व र्चोकिहि र ण्या स्याकी। य द्वाचाव र्चोकाग वाकामु ताचा। स त्या स्याकिब्र ह्म णोकिव र्च्चाःचा। ते न माकिसं सृ जाकिम साचाइश। हा बु हा बु हातुबुश। आ हं स होटी। आ हं स होटी। आ हंचास हःशा। आ हं साचिस हि र हं साचुस हि र हं साचुस हिशा। र हं साकास हाशा। नो अ हं साकीस हाशा। नो अ हं साकीस हाचानःश। हाषबु हा बु हा उ वातू। एतआ हं स हो हषुम् सा स हि र हं साकूस हाचानःशएतआ हं स हो हषुम् सा स हि र हं साकूस हाचानःश। एतआ हं स हो हषुम् सा स हि र हं साकूस हाचानःश । एतआ हंकास्व र्ज्योटातीःख ॥९॥
हा बु हा बु हातुबुश। आ हं व र्च्चोटीच्। आ हं व र्च्चोटीच्। आ हंचाव र्च्चाःशा। हा बु हा बु हातुबुश। य द्व र्चोकिहि र ण्या स्याकी। य द्वाचाव र्चोकाग वाकामु ताचा। स त्या स्याकिब्र ह्म णोकिव र्च्चाःचा। ते न माकिसं सृ जाकिम साचाइश। हा बु हा बु हातुबुश। आ हं व र्च्चोटीच्। आ हं व र्च्चोटीच्। आ हंचाव र्च्चाःशा। हाषबु हा बु हा उ वातू। एतआ हंचाव र्च्चाका। एतच्आ हंचाव र्च्चाका। एतच्आ हंचाव र्च्चाका। एतच्आ हंचास्व र्ज्योटातीःख ॥१०॥
हा बु हा बु हातुबुश। आ ह न्ते जोटीच्। आ ह न्ते जोटीच्। आ ह न्तेचिजःश। हा बु हा बु हातुबुश। य द्व र्चोकिहि र ण्या स्याकी। य द्वाचाव र्चोकाग वाकामु ताचा। स त्या स्याकिब्र ह्म णोकिव र्च्चाःचा। ते न माकिसं सृ जाकिम साचाइश। हा बु हा बु हातुबुश। आ ह न्ते जोटीच्। आ ह न्ते जोटीच्। आ ह न्तेचिजःश। हाषबु हा बु हा उ वातू। एतच्आ हचान्ते ज एतिच्। आ हचान्ते ज एतिच्। आ हचान्ते ज एतिच्। आ हंकाच्स्व र्ज्योटातीःख ॥११॥
हा बु हा बु हातुबुश। म नो जैकि। न्म नो जैकि। न्म नो जैकि। द्धृ त य म जैकु। द्धृ त य म जैकु। द्धृ त य म जैकु। दि न्द्रो जैकि। दि न्द्रो जैकि। दि न्द्रो जैकि। दा ह म जैकी। ष मा ह म जैकु। ष मा ह म जैचुषशम् । । हा बु हा बु हातुबुश। य द्व र्चोकिहि र ण्या स्याकी। य द्वाचाव र्चोकाग वाकामु ताचा। स त्या स्याकिब्र ह्म णोकिव र्च्चाःचा। ते न माकिसं सृ जाकिम साचाइश। हा बु हा बु हातुबुश। म नो जैकि। न्म नो जैकि। न्म नो जैकि। द्धृ त य म जैकु। द्धृ त य म जैकु। द्धृ त य म जैकु। दि न्द्रो जैकि। दि न्द्रो जैकि। दि न्द्रो जैकि। दा ह म जैकी। ष मा ह म जैकु। ष मा ह म जैचुषशम् । हाषबु हा बु हा उ वातू। एतच्म नो जै द्धृ त य म जै दि न्द्रोषेजै दा ह म जै षकूम् । एतच्म नो जै द्धृ त य म जै दि न्द्रोषेजै दा ह म जै षकूम् । एतच्म नो जै द्धृ त य म जै दि न्द्रोषेजै दा ह म जै षकूम् । आ हंकाच्स्व र्ज्योटातीःख ॥१२॥
। हा बु हा बु हातुबुश। दि शचान्दु हेका। दि शचान्दु हेका। दि शचान्दु हेका। दि शो दु हेकी। दि शो दु हेकी। दि शो दु हेकी। दि शो दु हेकीदि शो दु हेकी। दि शो दु हेकी। दि शो दु हेकी। स र्वा दु हेकी। स र्वा दु हेकी। स र्वा दु हेकी। । हा बु हा बु हातुबुश। य द्व र्चोकिहि र ण्या स्याकी। य द्वाचाव र्चोकाग वाकामु ताचा। स त्या स्याकिब्र ह्म णोकिव र्च्चाःचा। ते न माकिसं सृ जाकिम साचाइश। हा बु हा बु हातुबुश। दि शचान्दु हेका। दि शचान्दु हेका। दि शचान्दु हेका। दि शो दु हेकी। दि शो दु हेकी। दि शो दु हेकी। दि शो दु हेकी। दि शो दु हेकी। दि शो दु हेकी। दि शो दु हे । स र्वा दु हेकी। स र्वा दु हेकीस र्वा दु हेकी। हाषबु हा बु हा उ वातू। एतच्दि शचान्दु हेशादि शौ दु हेषीदि शो दु हे स र्वा दु हेकू। एतच्दि शचान्दु हेशादि शौ दु हेषीदि शो दु हे स र्वा दु हेकू। एतच्दि शचान्दु हेशादि शौ दु हेषीदि शो दु हे स र्वा दु हेकू। एतच्आ हंकाच्स्व र्ज्योटातीःख ॥१३॥
हा बु हा बु हातुबुश। व योटाव योटावचयाःश। वा योचाव योटा। वा योचाव योटा। वा योटाव याःशा। हा बु हा बु हातुबुश। य द्व र्चोकिहि र ण्या स्याकी। य द्वाचाव र्चोकाग वाकामु ताचा। स त्या स्याकिब्र ह्म णोकिव र्च्चाःचा। ते न माकिसं सृ जाकिम साचाइश। हा बु हा बु हातुबुश। वा योचाव योटा। वा योचाव योटा। वा योटाव याःशाहाषबु हा बु हा उ वातू। एतच्वा योचाव यो व यकी। एतच्वा योचाव यो व यकी। एतच्वा योचाव यो व यकी। आ हंकाच्स्व र्ज्योटातीःख ॥१४॥
हा बु हा बु हातुबुश। रू पंकारू पंकारू पकाम् । रूकपं रू पंकिरूकपं रू पंकिरूकपं रू पकिम् । हा बु हा बु हातुबुश। य द्व र्चोकिहि र ण्या स्याकी। य द्वाचाव र्चोकाग वाकामु ताचा। स त्या स्याकिब्र ह्म णोकिव र्च्चाःचा। ते न माकिसं सृ जाकिम साचाइश। हा बु हा बु हातुबुश। रू पंकारू पंकारू पकाम् । रूकपं रू पंकिरूकपं रू पंकिरूकपं रू पकिम् । हाषबु हा बु हा उ वातू। एतच्रू पंकारू पं रू प मेतिच्। रू पंकारू पं रू प मेतिच्। रू पंकारू पं रू प मेतिच्। आ हंकाच्स्व र्ज्योटातीःख ॥१५॥
हा बु हा बु हातुबुश। ही हीचाया औटा। ही हीचाया औटा। ही हीचाया औटा। उ द पा प्ताकी। मु द पा प्ताकी। मु द पा प्त मुकु। र्द्धो न भां स्य कृ ष्यूकू। र्द्धो न भां स्य कृ ष्यूकू। र्द्धो न भां स्य कृ ष्यीकू। व्य त्यौ क्षंकी। व्य त्यौ क्षंकी। व्य त्यौ क्षाकि। म ता त नाकी। म ता त नाकी। म त त नकीम् । । हा बु हा बु हातुबुश। य द्व र्चोकिहि र ण्या स्याकी। य द्वाचाव र्चोकाग वाकामु ताचा। स त्या स्याकिब्र ह्म णोकिव र्च्चाःचा। ते न माकिसं सृ जाकिम साचाइश। हा बु हा बु हातुबुश। ही हीचाया औटा। ही हीचाया औटा। ही हीचाया औटा। उ द पा प्ताकी। मु द पा प्ताकी। मु द पा प्त मुकु। र्द्धो न भां स्य कृ ष्यूकू। र्द्धो न भां स्य कृ ष्यूकू। र्द्धो न भां स्य कृ ष्यीकू। व्य त्यौ क्षंकी। व्य त्यौ क्षंकी। । व्य त्यौ क्षाकि। म ता त नाकी। म ता त नाकी। म त त नकीम् । हाषबु हा बु हा उ वातू। एतच्उचद पा प्तकिमु र्द्धो न भां स्य कृषूषी व्य त्यौ क्षाकुम त त नकीम् । एतच्उचद पा प्तकिमु र्द्धो न भां स्य कृषूषी व्य त्यौ क्षाकुम त त नकीम् । एतच्उचद पा प्तकिमु र्द्धो न भां स्य कृषूषी व्य त्यौ क्षाकु। म त त नकीम् । एतच्पि न्व साटिख्इश ॥१६॥
हा बु हा बु हातुबुश। प्र थेटाप्र थेटाप्र थेटा। प्र त्य ष्टांकिप्र त्य ष्टांकिप्र त्य ष्टाकिम् । । हा बु हा बु हातुबुश। य द्व र्चोकिहि र ण्या स्याकी। य द्वाचाव र्चोकाग वाकामु ताचा। स त्या स्याकिब्र ह्म णोकिव र्च्चाःचा। ते न माकिसं सृ जाकिम साचाइश। हा बु हा बु हातुबुश। प्र थेटाप्र थेटाप्र थेटा। प्र त्य ष्टांकिप्र त्य ष्टांकिप्र त्य ष्टाकिम् । हाषबु हा बु हा उ वातू। एतच्प्र थेचाप्र त्य ष्टाकिमेतच्प्र थेचाप्र त्य ष्टाकिमेतच्प्र थेचाप्र त्य ष्टाकिमेतच्। त्रिः । आ हंकाच्स्व र्ज्योटातीःख ॥१७॥
॥ पुरुष व्रतं सप्त ॥
उ हु वा हाकी। बु हु वा हाकी। बु हु वा हाकीबुश। सषह स्र शी र्षा पू रूटूषाःत। सषह स्रा क्ष स्स ह स्राटूपातत् । साषभू मिं स र्व तो वाटूत्वात। अषत्य ति ष्ठ द्द शा ङ्गूटूलातम् । उ हु वा हाकी। बु हु वा हाकी। बु हु वाटिहा उतिवा । इ ट् ई ळाटिख् ॥१८॥
उ हु वौ हो वाटुच्। उ हु वौ हो वाटुच्। उ हु वौ हो वाटुच्। त्री पाषादू र्ध्वा उ दै त्पू रुटूषाःत। पाषदो स्ये हा भ व त्पूटूनाःत। ताषथा वि ष्वं वि य क्राटूमा त् । अषश ना न श ने आटूभीत। उ हु वौ हो वाटुच्। उ हु वौ हो वाटुच्। उ हु वौ होटीट्वाखओ हो वाशि। ईखळाण। उ हु वौ हो वाटुच्। उ हु वौ हो वाटुच्। उ हु वौ होटीट्वाखओ हो वाशि। सुखवाःण। उ हु वौ हो वाटुच्। उ हु वौ हो वाटुच्। उ हु वौ होटीट्वाखओ हो वाशि। ऊख ॥१९॥
इ हि यौ हो वाटुच्। इ हि यौ हो वाटुच्। इ हि यौ हो वाटुच्। पुषरु ष ए वे दं साटूर्वातम् । यषत्भू त य श्च भा वाटूयातम् । पाषदो स्य स र्वा भू ताटूनीत। त्रिषपा द स्या मृ त न्दाटूइ वीता। इ हि यौ हो वाटुच्। इ हि यौ हो वाटुच्। इ हि यौ होटीट्वाखऔ हो वाशि। । इ हि यौ हो वाटुच्। इ हि यौ हो वाटुच्। इ हि यौ होटीट्वाखऔ हो वाशि। ईखळाण। इ हि यौ हो वाटुच्। इ हि यौ हो वाटुच्। इ हि यौ होटीट्वाखऔ हो वाशि। ज्योखतीःण। इ हि यौ हो वाटुच्। इ हि यौ हो वाटुच्। इ हि यौ होटीट्वाखऔ हो वाशि। ईख ॥२०॥
ऊ र्घाकाबु हा बु हाती। बू र्घाकाबु हा बु हाती। बू र्घाकाबु हा बु हातीबुश। ता वा न स्या म हाटूइ माता। ताषतो ज्या यां श्च पू रूटूषाःत। ऊषता मृ त त्त्व स्ये शाटूनाः । याषद न्ने ना ति रो हाटूती । ऊ र्घाकाबु हा बु हाती। बू र्घाकाबु हा बु हाती। बू र्घाकाबु हा बु हा उ वातू। इ ट् इ ळाटिख् ॥२१॥
हा बु हा बु हातुबुश। ताषतो वी रा ड जा याटूतात। वीषरा जो अ धि पू रूटूषाःत। साषजा तो अ त्य रि च्याटूतात। पषश्चा त्भू मि म थो पूटूराःत। हाषबु हा बु हा उ वातू। ईख ॥२२॥
हा बु हा बु हातुबुश। यषत्पू रु षे णा हा वाटूइ षाता। देषवा य ज्ञ म त न्वाटूतात। वाषस न्तः ए षा मा सी दाटूज्यातम् । ग्रीषष्म इ ध्म श र द्धाटूवातइःश। हाषबु हा बु हा उ वातू। ईख ॥२३॥
हा बु हा बु हातुबुश। सषप्ता स्या स्य न्प रि धाटूयाःत। त्रिषस प्त स मि धः काटूर्त्ताःत। देषवा य द्य ज्ञ न्त न्वाटूनाःत। आषब ध्न न्पु रु षं हाटूवातइःश। । हाषबु हा बु हा उ वातू। ईख ॥२४॥
॥ त्वष्टार्याश्चसाम ॥
त्व ष्टाखानो दै व्यं व चाःशु। प र्ज न्यो ब्रंकीह्मा ण स्पाटितीःत। पु तै र्भा त्रषीभि रा दी तिकीर्न्नू पा तूटिनाःत। दु ष्टा राटिन्त्रात। मा णं वाचिचाःखण्। ओपइ ळाशा ॥२५॥
॥ पाथेद्वे ॥
आ ग्नाटाउ वोखावाश। ओ जीचाष्ठा मा भा राटाउ वोखावाश। द्युकम्न म स्माचिभ्य म ध्रि गोतीओ इ प्रा नाटीउ वोखावाश। राकये पा नीकिय सेताओ इ रा त्साटीउ वोखावाश। वा जाथाच्याकपटन्धाखम् ॥२६॥
॥ अग्नेर्हरसीद्वे ॥
ओ हा या ग्नीःती। ताखइ ग्मेशाना शो चाखिइ षाणा। यं साटाद्वाखइ श्वाशानी या त्राखिइ णणाम् । अ ग्नि र्नोटिवं साटाट्ताखऔ हो वाशि। राखयिशम् ॥२७॥
॥ इहवद्वामदेव्यंतृतीयम् ॥
अ ग्नि स्ति ग्मेषीन शो चि षा इ हातू। यं स द्वि श्वषीन्न्य त्री णाटिमि हाता। अ ग्नि र्नो वं स ताटूइ हाता। रापआ या इंप्लि। हा इशा ॥२८॥
॥ वामदेव्यञ्च ॥
य स्स त्रा हाषीवि च र्ष णि रि द्रंफूतां हूखामा हे व यप्लीम् । इ न्द्र न्तं हूकीमा हे वाटियातम् । सा ह स्र म न्योषुतु वि नृकिम्णा स त्पाटितातइश। भा वा साटिमातत्सू नोचावृ धा इ ळाटीभाखण्। ओपइ ळाशा ॥२९॥
॥ वामदेव्यम् ॥
को अ द्य युं क्तेषुधु रि गा ऋ त स्यातूएत। शि मी व तोषीभा मी नो दुकिहृ णाटायूतन् । आ स न्ने षाषीम प्सु वा होकीमा योटाभूतन् । या ए षां भृ त्याषुमृ णा धाकित्सा जाटाइ वाकाउ वाता। ऊखपाश ॥३०॥
॥ बार्हस्पत्यञ्चब्राह्मणस्पत्यंवा ॥
प्रै तू ब्राखिह्मा णा स्पा तीःप्ली। प्रा दा इ व्येटीच्तूकसू नृ ताकिअ च्छाटावाखइ रणाम् । न र्यं पतिच्न्ती राचाधायसाटम् । दे वाटायाखज्ञणम् । नाटयाखऔ हो वाशि। तूखनाःश ॥३१॥
॥ सूर्यसामनीद्वे ॥
उ दु त्य मोतीहातइश। जा ता वेकिदाखसणम् । देकवं व ह न्ती केकुताखवाःण। दा र्शेपाहाणइश। वा इ श्वाकिच्याकसू र्या मौपिहो बाप्ला। होप्लइ ळाशा ॥३२॥
॥ प्रजापतेश्चनिधनकामम् ॥
आ दि प्र त्नाफीस्य रेशात साःका। ज्यो तिः प श्यषीन्ति वा साटिराचम् । पा रो याटिति ध्य ताचिइश। दि वि हो इ हो औकूहो औकाहो वापाहाप्लबुश। बाख ॥३३॥
॥ प्रजापतेःश्रुधीयेद्वे ॥
अ ग्ने वा जाफीस्या गो मा तोचीवाश। ईकशा न स्सा ह सोकुया होकाअ स्मेकादे हीकाजा ताचावे दोथाम हाटाइ श्र वाटिउ वाता। श्रोचधि याटाएटहि याखाण्। ओपइ ळाशा ॥३४॥
॥ प्रजापतेःसदोहविर्धानानित्रीणिसदःपूर्वंहविर्धाने उत्तरे ॥
अ ग्ने य जि ष्ठोषुअ ध्व रातिएत। दे वा न्दे वाचीया ताकाइ यायाजाटहु वाताहो वाका। हो ताचाम न्द्रोथाच्वी राकाजायसीटहु वाताहो वाका। आ ति स्राटिइ धाःखाण। ओपइ ळाशा ॥३५॥
॥ प्रजापतेस्सुतंरयिष्ठीयेद्वे ॥
उ प नोषिहा बु हो रातीइ भीःता। सूटतातम् । या हि म दाकीना म्पाटाता उ पा नोखीहाण। राटइ भाखाऔ हो वाशि। सू तंकाराचइ ष्ठाःटाख् ॥३६॥
॥ प्रजापतेर्निधन कामम् ॥
अ ह मि द्धाफीइ पि तुः प राकुइश। मेकधा मृ त स्य ज ग्र हाषृआ हं सू र्याकीइ वापाहाप्लहाङ्इश। ज नि हो इ हो औकूहो औकाहो वापाहा बुप्ला। बाश ॥३७॥
॥ प्रजापतेश्चाभीवर्तः ॥
तं वोणादाफस्माखमृ ती षाप्लिहो वाङा। वा सो र्म न्दाकीच्ना माक्यन्धायसाटआ भी व त्साकीओपना स्वाफस रेफाप्ल्षू धाचाइ नायावाःट। इ न्द्राकाङ्गायइ र्भिटार्न्न वातामाखणफप्ल्। हाखइश ॥३८॥
॥ शौक्तानि त्रीणि शुक्लानिवा आश्वानिवा ॥
आ नो वि श्वा सु हातूहातव्यातम् । इकन्द्रं स मा त्सूकीभू षा ताकिऊ प ब्राटिह्मात। णी स व नाचीनि वृ त्र हाचीन्पाकर माटाज्याःत। आ र्चाटाहातइशषाकमा औटाहोखबाप्ल। होप्लइ ळाशा ॥३९॥
॥ इन्द्रस्यसहस्रायुतेद्वे प्रजापतेर्वा महोविशीये ॥
म हे च नाखीत्वा आ द्री वाःप्ली। पा राचाशु ल्काथाया दाकाइ यायासाटइश। ना स ह स्राकीया ना यू ता या वायूज्री वाःटा। ना शा ताटियात। शा ता माटिघाखऔ हो वाशि। मा हो वी शेटीच् ॥४०॥
॥ अग्नेश्चवैश्वानरस्यार्षेयम् ॥
त्वा म ग्ने पु ष्कातुरा द धीति। आचथ र्वाचाना इ रा माटीन्धाखताण। मूखर्ध्नोप्लवाखइ श्वाणा। स्या वोपाबाप्लघा तोप्ला। हा इशा ॥४१॥
॥ अग्नेश्चार्षेयम् ॥
अ ग्नि र्मू र्धा दीतुवः क कूतित् । पा तीःटापा र्त्थीटाव्या अ याचिम् । आ पांटारा इ तांटिसीकजि न्वाटाताखण्इश। ओपइ ळाप्ला ॥४२॥
॥ अग्नेश्चयज्ञायज्ञीयम् ॥
य ज्ञाणाय ज्ञाणावोफअ ग्नाखायाणइश। गा इ रा गी रा चाटूदा क्षापासा इशा। प्र प्राटाच्वाकय म मृ त न्जा तापूवाशहि म्माचाइश। दातसातम् । प्रा य म्मि त्रा न्ना शांकूसि षाकाबुश। बाख ॥४३॥
॥ अग्नेरायुः ॥
आ नो अ ग्नेषीव यो वृ ध मेतुरा याखाइशम् । पातच्वा काकाशांयसाटयातम् । रा स्वाचाच न उ पाचीमा तेथापू रूयास्पृ हाटाम् । सू ना इ ता इ सूटूहातइश। या शाचास्ताकरा मौपाहो बाप्ला। होप्लइ ळाशा ॥४४॥
॥ अग्नेर्हरसीद्वे ॥
यो वि श्वा द य तेषूव सु हातिबुश। हो ताटाम न्द्रोटाच्ज ना ना मोचीवाकओ वाका। मा धोटार्ना पाटात्रा प्र थ मा न्य स्माचूओ वाकाओ वाका। प्रा स्तोटामा याटाच्न्तूकवोपबाप्लग्ना योप्ला। हा इशा ॥४५॥
॥ अग्नेराग्नेयेद्वे ॥
ए ना वो अ ग्नि न्नातूओ म साति। ऊ र्जो न पाकीता मायाहु वेटा। प्रा य न्चेचिति ष्ठाटामा र तिंचिसू आ ध्वा रांभि। वि श्वाचास्यायदूट। ताचमा मृचाताकमि ळाटाभाखण्। ओपइ ळाशा ॥४६॥
॥ अग्नेश्चद्रविणम् ॥
दे वोणफवोखद्र वि णो दाःशी। पूकर्णां वि व ष्ट्वाटीच्सीकच मू द्वायिसि न्चाटा। ध्वा मु पा वाटीपृ णाकाध्वा माचादीयद्वो देटा। वा ओचाह ता इ ळाटीभाखण्। ओपइ ळाप्ला ॥४७॥
॥ अग्नेश्चाग्नेयम् ॥
इ मं स्तोखिमाशम र्हा तेखिजाण। ता वेकाद सेचाहो येटार था मीखिवाशस म्मा हेखिमाण। मा नीकाष याचाहो येटाभ द्रा हीखिनःशप्र मा तीखिराण। स्या संकास दीचाहो येटाअ ग्ना इ साखिख्याणइश। मा रा इ षाखिमाण। वा यकान्त वाटाव होखइ ळाशा ॥४८॥
॥ बृहचैवाग्नेयम् ॥
त्वं हि क्षै त व द्यषूश इ य इ य्यातुहातइश। अ ग्ना इ मि त्रो नाकूपा त्याखासाणइश। ओ औकाहोखइ याप्लाहाणइश। त्वं वि चा र्ष णेकुश्राखवाःण। ओ औकाहोखइ याप्लाहाणइश। वा सोकाआपपु ष्टा इ न्ना पूकुष्याखसीण। ओ औकाहोखइ या हाप्लि। होप्लइ ळाशा ॥४९॥
॥ अग्नेर्यद्वाहिष्ठीयेद्वे ॥
य द्वा हि ष्ठ न्त दषुग्न ये य द्वा हि ष्ठोतूवात। ता द ग्न या इषुबृ ह दाटिर्चातच्वीकभाचवा साचाबुश। म ही षाटिइ वातात्व द्र यी स्त्वा द्वाटुजाःत। ऊ दी राटिताखण्इ । ओपइ ळाप्ला ॥५०॥
॥ बृहदाग्नेयञ्चसङ्कृतंवा ॥
अ प त्यं व्र जि नंषूरि पुं स्ते नाखीम ग्नाताइश। दू रा धाटियाखन्दि वि ष्ठ म त्स्या साफूत्प ताताइश। कापर्द्धीशसूखगाप्लम् । हा इशा ॥५१॥
॥ वसिष्ठस्यचवीङ्कम् ॥
ऊ र्ध्व ऊ षु णाकुऊ तापायाणइश। ति ष्ठा दे वो न सःषूवि ता ऊ र्ध्वो वाटुजात। स्याचसाकनि ताकायाचदायन्जी भीःटा। वाकघाटत्भीकर्वींचभा या माटिहाखण्इश। ओपइ ळाप्ला ॥५२॥
॥ समन्तानित्रिणिअग्नेरेकमिन्द्राग्न्योर्वाप्रजापतेर्वावरुणस्यद्वे ॥
त्व म ग्नेषिगृ ह प तातीइःश। त्वंकहो ता नोकिअ ध्व रा इ त्वा म्पोटूतात। वा इ श्वा वा राकुप्र चा इ ताभीऔकहोफवाप्लहाणइश। य क्षा इ याटीसीतहो वाटाहातइश। चा वा राटीयाखण्म् । ओपइ ळाप्ला ॥५३॥
॥ वरुणसामच ॥
ऋ जु नी ती नोषुव रू ण इ हातु। मि त्रोचाना याचाती वि द्वांटिसा इ हाति। अ र्याथामा दाटाइ वा इ हाती। सा जो षाटिउ वाता। ईखहाश ॥५४॥
॥ मित्रावरुणयोश्चसंयोजनम् ॥
आ नो मि त्रा व रुकूणा औथाहो वाटा। घृ तैतार्ग व्यू ति मु क्षाकुता मौथाहो वाटा। मा ध्वाथारा जांटासीकसु औथाहो वाटा। कृ तूकाइ ळाटाभाखण्। ओपइ ळाप्ला ॥५५॥
॥ वरुणसामानित्रीणि ॥
प्र मि त्रा य प्रातुहातबुश। आटर्य म्नाचाइ स चाटिहोकथ्धि यौटाहु वा र्ताटिव साचाबुश। व रौटाहोकथ्धी यौटाहू वा इषिव रू णे छा न्दीकुयं व चाःचि। स्तो त्रांटाहो इ राटिजौटहू वा सूकिगा या ताटिआ उ वाटि। ऊखपाश ॥५६॥
प्र मि त्रा य प्रौ होतूवात। अ र्य म्णा बु होकुच्औकहो वाका। सा चा थ्य मृकीता वाचासा बु होकिच्औकहो वाका। वा रू थ्ये व रू णेचूछकन्दी यं वाकिचा बु होकिच्औकहो वाका। स्तोकत्रं राकाजा बु होकिच्औ हो वा । सूकगा याकाता बु होकिच्औकहो वाःपाण्। ओपइ ळाशा ॥५७॥
प्र मि त्रा यषीप्रा र्य म्नोतिवा ओतावात। सा चाचाथ्य मृचाता वायासाटबुश। वाटरूतथाटयातइ व रू णेकीच्छकन्दा यांटाहातइ व चोटिआत। स्तोकत्रं राकाज सु गाचिय त स्तोटित्रातम् । राकजचसूकगौटहोतओपबा या तोप्ल। हा इशा ॥५८॥
॥ वरूणान्याश्चसाम ॥
वि भो ष्ट इषिन्द्र रा धातिसाःत। वि भ वी राटीति श्श तो कृ तोकुश ताटाक्र ताचाबुश। आ थाकानो वि श्व च र्ष णेचूश्व चाटार्षा णाचाइश। द्यु म्नं सू द त्र मंकूह य त्र मां हाखु। यात्र ॥५९॥
पयःपुण्याह सामानि (४)
॥ वासिष्ठानि त्रीणि भार्गवं वा तृतीयम् ॥
इ न्द्रा औभिहोत। क्र तुचान्ना आकाभायराट। पि ता औभिहोत। पु त्रेथाच्भी योकायायथाट। शि क्षा औभिहोत। णो अ स्मि न्पु रू हूकूता याकामायनीट। जी वा ज्योटिताखऔ हो वाशि। अ शी म हीखी ॥६०॥
इ न्द्र क्र तुफीन्न आ भ राकी। पि ता पु त्रेकीभी यो य थाषीशा इ क्षा णोटीआत। स्माकइ न्पु रु हूकीताचयायमा नीटाऔटहौटहू वा औकिहोतवात। जी वा ज्यो याटितीःत। अ शी माटिहाखइण। ओपइ ळाप्ला ॥६१॥
इ न्द्र क्र तु न्न आफूभ रा उ वोखीवाश। पि ता पु त्रेखाभी योचाया थाप्ला। हातपि ता पु त्रे भि योचूयाकथापहा बु शा इ क्षा णो आशृ। स्मा इकान्पु रू हूकित याचामा नीपाहा बु जी वा ज्यो तीःशू। आकशोपवा मा होप्लि। हा इशा ॥६२॥
॥ धेनुपयसी ॥
इ यो इ याचीइ योटाइ याकाईचयाश। अ ग्ने यूं क्ष्वा हीतुये त वाःति। अ ग्ने यू क्ष्वा हीकुये त वाःचि। अ ग्ने यूं क्ष्वा हीतूये त वाःति। इ यो इ याचीइ योटाइ याकाईचयाश। अ श्वा सो दे वातुसा ध वाःति। अ श्वा सो दे वाकुसा ध वाःचि। अ श्वा सो दे वातुसा ध वाःति। इ यो इ याचीइ योटाइ याकाईचयाश। आ रं व ह न्त्वीतुया श वाःति। आ रं व ह न्तीकुया श वाःचि। आ र व ह न्तीतुया श वाःति। इ यो इ याचीइ योटाइ याकाईचयाश। आटहाचस्श। एतप याःटाख् ॥६३॥
उपाकरणम् (०)
गौदानिक व्रतम् (९)
॥ गौतमस्यपर्कः ॥
ओतग्नातइश। आ याथाच्ही वाचाइश। ता याटाइशता याटिइश। गृ णाचानोशह व्या दाचि। ता याटाइशता याटिइश। ना इ होकिताच। साटत्साटइ बाखाऔ हो वाशि। हीखषिश ॥६४॥
॥ आदित्यस्यचरुचिरोचनंवा ॥
आ दि त्य श्शूती। क्राचउ द गा त्पु रु राखूस्ताशत् । ज्योकतिः कृ ण्वाकिन्वि त मो बा ध माखूनाःप्ल। आकभा स मा नाःटीप्रा दी शोकिनु साखार्वाःप्ल। भ द्र स्य काकीर्तातरू च यापिन्ना याखा। गात्रत् ॥६५॥
॥ मर्गीयवञ्च ॥
त द्वौ हो वाती। गा याटासु ता इखिचाण। पु रू हूकितातच्या साकात्वायनाटइश। श य्य दो औकीहो इ गाखिवाणइश। नाटट्शाखऔ हो वाशि। एतच्कीटनेख ॥६६॥
॥ रौद्रेद्वे ॥
त द्वो गा याती। सु ताताइ स चातिपु रूटाहु ताखाहाशप्ल्हातइ याचास त्वाखानाणइश। शंकय त्गाटावेत। ना शौटाहौटच्हूकवोपबाप्लका इ नोप्लि। हा इशा ॥६७॥
॥ मार्गीयवञ्चैव ॥
त द्वौ गा यषीसु ते सा चातीएत। पू रू हुकिता य स त्व ना इषूशं य त्गाटिवेत। ऐचहाययाटऐ हिता। ना शा काटिट्इ नाखाऔ हो वाशि। ईख ॥६८॥
॥ बार्हस्पत्येद्वेअग्नेर्वाराक्षोघ्ने ॥
अ हा वो हाखीवोप्लअ हा वो हाखीवोप्लअ हा वो हाखीवाःण। अ ग्नि ष्टा पा तीटुच्प्र ति द हाकीख्त्य ग्निं हो ताकीर म्माखान्ये दाचास्वकन्तफम् । वा सो स्सूकीनुं स ह साकीजाखता वेचादकसफम् । वि प्राचान्न जाखाता वेचादाकसफम् । या ऊचार्ध्व याखासू आचाध्वाकराःफ। दे वो देकवाखची याचाकृकपाफ। घृ ताकास्या बि भ्राकिष्टि म नु शूखीक्रा शोचाचीकषाःफ। आ जु ह्वाकिन्वाखस्या साचार्पीकषाःफ। अ हा वो हाखीवोप्लअ हा वो हाखीवोप्लअ हा वो हाखीवाःण। अ ग्नि ष्टा पा तीटुच्प्र ती द हाकीख्आ तात्राइश। एतवि श्वंकास म त्री ण न्द हाखू। एतवि श्वंकास म त्री ण न्द हाखू। एतवि श्वंकास म त्री ण न्द हाखू ॥६९॥
त्य ग्नाखाइःशप्र ति द हाफितीप्लहा बु होखिहा बुशा। अ ग्निं हो ताकीर म्माखान्ये दाचास्वकन्तफम् । वा सो स्सूकीनुं स ह साकीजाखता वेचादकसफम् । वि प्राचान्न जाखाता वेचादाकसफम् । या ऊचार्ध्व याखासू आचाध्वाकराःफ। दे वो देकवाखची याचाकृकपाफ। घृ ताकास्या बि भ्राकिष्टि म नु शूखीक्रा शोचाचीकषाःफ। आ जु ह्वाकिन्वाखस्या साचार्पीकषाःफ। त्य ग्नाखाइःशप्र ति द हाफितीप्लहा बु होखिहा उ वाशि। एतवि श्वंकास म त्री ण न्द हाकूख्। एतवि श्वंकावि य त्री ण न्द हाकूख्। एतवि श्वंकानि य त्री ण न्द हाकूख् ॥७०॥
॥ आजीकञ्च ॥
उ च्चाता। ते जाथाताचमायन्धा साटा। दि वि स त्भू म्याषुद दाकाउ ग्रं शाटिर्म्मात। माटट्हाखऔ हो वाशि। उ प्श्राखावाःप्ल ॥७१॥
॥ सन्तनिच ॥
ए षाताहातबुश। स्य धाकार याताआ उ वाटि। सूखताःप्ल। अ व्या वा रेषीभिः प व तेकीच्माकदि न्ता माःभि। क्री ळातान्हातबुश। ऊ र्म्मीकार पाताआ उ वाटि। मीखवाश। ॥७२॥
व्रातिकम् व्रतम् (३)
॥ वाचो व्रते द्वे ॥
हु वे वा चातीम् । वा चंकावा चंथाहु वेटावातक् । श्रु णो तुचिश्रु णोटातु वाटागु वाताक् । स मे तुचिस मैटातु वाटागु वाताक् । र म तांकिर म तांकिर माटाट्ताखओ हो वाशि। ई हा ई हा ई हातू ॥७३॥
हू वा इ वाचीचा म्चा। वा चंकाहू वाचाइश। वातक् । श्रु णोचातुशश्रु णोचाक्तु वाफाप्लग्वातक् । सा मैचातुशसा मैचाक्तू वाफाप्लग्वातक् । र म तांटिर म तू वाखीओ हो वाशि। मा यि मा यि मातुयिश ॥७४॥
॥ कश्यपस्य व्रते द्वे ॥
हा बु हा बु हातुबुश। ओकह हाथा। ओकह हाथा। ओकह हाथा। ऐचहिश। ऐचहिश। ऐचहिश। ऐ हि हा उ वाकू। ऐ हि हा उ वाकू। ऐ हि हा उ वाकू। हा हाकाबुश। हा हाकाबुश। हा हाकाबुश। हाषबु हा बु हा उ वातू। प्राकजा तोथाक म जी ज नेकुहाचस् । ईटहाख। हा बु हा बु हातुबुश। ओकह हाथा। ओकह हाथा। ओकह हाथा। ऐचहिश। ऐचहिश। ऐचहिश। ऐ हि हा उ वाकू। ऐ हि हा उ वाकू। ऐ हि हा उ वाकू। हा हाकाबुश। हा हाकाबुश। हा हाकाबुश। आ यु रा यु रा यु र ग्नि रषेस्मि ज न्म ना औ होटूहो वाथा। इ या औ होटीहो वाथा। इ या औ होटीहो वाथाइ याचा। हा बु हा बु हातुबुश। ओकह हाथा। ओकह हाथा। ओकह हाथा। ऐचहिश। ऐचहिश। ऐचहिश। ऐ हि हा उ वाकू। ऐ हि हा उ वाकू। ऐ हि हा उ वाकू। हा हाकाबुश। हा हाकाबुश। हा हाकाबुश। हाषबु हा बु हा उ वातू। ई हाचाप्रा जाचामी हाचारा यिंचार रा णोकिहाचस् । ईटहाख। हा बु हा बु हातुबुश। ओकह हाथा। ओकह हाथा। ओकह हाथा। ऐचहिश। ऐचहिश। ऐचहिश। ऐ हि हा उ वाकू। ऐ हि हा उ वाकू। ऐ हि हा उ वाकू। हा हाकाबुश। हा हाकाबुश। हा हाकाबुश। आ यु रा यु रा यु र्जा त वे दा औ होटूहो वाथा। इ या औ होटीहो वाथा। इ या औ होटीहो वाथाइ याचा। हा बु हा बु हातुबुश। ओकह हाथा। ओकह हाथा। ओकह हाथा। ऐचहिश। ऐचहिश। ऐचहिश। ऐ हि हा उ वाकू। ऐ हि हा उ वाकू। ऐ हि हा उ वाकू। हा हाकाबुश। हा हाकाबुश। हा हाकाबुश। हाषबु हा बु हा उ वातू। राचयशस्पो षाचायशसु कृ ताकियशभू य सेकिहाचस् । ईटहाख। हा बु हा बु हातुबुश। ओकह हाथा। ओकह हाथा। ओकह हाथा। ऐचहिश। ऐचहिश। ऐचहिश। ऐ हि हा उ वाकू। ऐ हि हा उ वाकू। ऐ हि हा उ वाकू। हा हाकाबुश। हा हाकाबुश। हा हाकाबुश। आ यु रा यु रा यु घृ त म्मे च क्षु रा मृषौत म्म आ स न्न औ होटूहो वाथा। इ या औ होटीहो वाथा। इ या औ होटीहो वाथाइ याचा। हा बु हा बु हातुबुश। ओकह हाथा। ओकह हाथा। ओकह हाथा। ऐचहिश। ऐचहिश। ऐचहिश। ऐ हि हा उ वाकू। ऐ हि हा उ वाकू। ऐ हि हा उ वाकू। हा हाकाबुश। हा हाकाबुश। हा हाकाबुश। हाषबु हा बु हा उ वातू। आ ग न्वाकिम मि दंकिबृ ह द्धाचिस् । ईटहाख। । हा बु हा बु हातुबुश। ओकह हाथा। ओकह हाथा। ओकह हाथा। ऐचहिश। ऐचहिश। ऐचहिश। ऐ हि हा उ वाकू। ऐ हि हा उ वाकूव ऐ हि हा उ वाकू। हा हाकाबुश। हा हाकाबुश। हा हाकाबुश। आ यु रा यु रा यु त्रि धा त्व र्कौ र ज सोषौवि मा ना औ होटूहो वाथा। इ या औ होटीहो वाथा। इ या औ होटीहो वाथाइ याचा। हा बु हा बु हातुबुश। ओकह हाथा। ओकह हाथा। ओकह हाथा। ऐचहिश। ऐचहिश। ऐचहिश। ऐ हि हा उ वाकू। ऐ हि हा उ वाकू। ऐ हि हा उ वाकू। हा हाकाबुश। हा हाकाबुश। हा हाकाबुश। हाषबु हा बु हा उ वातू। ई द्दं वाकिम मि दंकिबृ ह द्धाकिस् । ईटहाख। । आ यु रा यु रा यु र ज स्रंषेज्यो ता इ रा औ होटूहो वाथा। इ या औ होटीहो वाथा। इ या औ होटीहो वाथाइ याचा। हा बु हा बु हातुबुश। ओकह हाथा। ओकह हाथा। ओकह हाथा। ऐचहिश। ऐचहिश। ऐचहिश। ऐ हि हा उ वाकू। ऐ हि हा उ वाकू। ऐ हि हा उ वाकू। हा हाकाबुश। हा हाकाबुश। हा हाकाबुश। हाषबु हा बु हा उ वातू। च राकाचा रा यकिबृ ह ताकिइ दं वाकिम मि दंकिबृ ह द्धाचिस् । ईटहाख। हा बु हा बु हातुबुश। ओकह हाथा। ओकह हाथा। ओकह हाथा। ऐचहिश। ऐचहिश। ऐचहिश। ऐ हि हा उ वाकू। ऐ हि हा उ वाकूऐ हि हा उ वाकू। हा हाकाबुशहा हाकाबुश। हा हाकाबुश। आ यु रा यु रा यु र्ह वि र स्मि स र्व मा औ होटूहो वाथाइ या औ होटीहो वाथा। इ या औ होटीहो वाथा। इ याचा। हा बु हा बु हातुबुश। ओकह हाथा। ओकह हाथा। ओकह हाथा। ऐचहिश। ऐचहिश। ऐचहिश। ऐ हि हा उ वाकू। ऐ हि हा उ वाकू। ऐ हि हा उ वाकू। हा हाकाबुश। हा हाकाबुश। हा हाकाबुश। हाषबु हा बु हा उ वातू। एतच्य शो क्राकित्भू त म त त नाकूत्प्रा जा ऊकिथ्स मू चू कू पाकुत्प शु भ्योकिहाचस् । ईटहाख ॥७५॥
आदित्य व्रातिक व्रतम् (९)
॥ अञ्जश्च वैरूपम् ॥
य द्या व ईती। न्द्र ताताआ उ वाटिशाखतणम् । हा हाथाआ उ वाटि। ईखळाण। शा तं भूचिमीकरु ताताआ उ वाटि। सीखयूःण। हा हाथाआ उ वाटि। ईखळाण। न त्वा व ज्रिकिच्न् सा ह स्रं सूचिर्याकिआ उ वाटि। आखनूण। हा हाथाआ उ वाटि। ईखळाण। ना जा त माकीष्ट रोताआ उ वाटि। दाखसीण। हा हाथाआ उ वाटि। ईखळाण ॥७६॥
॥ हृस्वा च बृहतोपशा ॥
य द्या व इ न्द्र तेकुशा त मेचिशा तं भू मिचीरू त स्योचिवाश। न त्वा व ज्रिकीच्न् सा ह स्रं सू र्याकुआ नूटा। ना जाचाता माचाष्टा रो दाटिसाखऔ हो वाशि। दी शंचावि शं हाशिस् । अ शा शि शु म तीकीच्। इ ट् इ ळाटिख् ॥७७॥
॥ आदित्यस्य व्रत शुक्रियाणि षट् भ्राजा भ्राजे विकर्ण भासे महा दिवा कीर्त्यम् आदित्य व्रतमिति ॥
भ्रा जा भ्रा जाकीभ्रा जाथाआ उ वाटि। अ ग्राकाआ यूं षि पा व साकूआकसु वोकार्ज्ज मि ष ञ्च न आकूरे बा धाकिस्वा दु च्छ नाटीख्। भ्रा जा भ्रा जाकीभ्रा जाथाआ उ वाटि। ए भ्रा जाकि। ए भ्रा जाकिए भ्रा जाकि ॥७८॥
आ भ्रा जाकि। आ भ्रा जाकि। आ भ्रा जाकि। । अ ग्निकामू र्धाथादी वाःकाकायकूटत् । प तिःकापृथथि व्याकाआययाटम् । अ पांकारे तांथासि जाकाइ न्वायाताटइश। आ भ्रा जाकि। आ भ्रा जाकि। आ भ्राटाजाखऔ हो वाशि। एतआ भ्रा जाकिएतआ भ्रा जाकि। एतआ भ्राटाजाःख ॥७९॥
हा बु हा बु हातुबुश। हा हा बुकिहा हा बुकिहा हाकि। वि हा हाकिवि हा हाकिवि हा हाकि। वि या हा वि या हा । वि या हाकिबुश। इ ळाचाइ ळाचाइ ळाचा। हाचस् । हाचस् । हाचस् । ऋ तं ऋ तं ऋ तं मे बि भ्रा ट् बृ हषैत्पि ब तु सो म्यं माटूधूत। आ यु र्द ध द्य ज्ञषूप ता व वि ह्रूटुतातम् । वा त जू तोषीयो अ भि र क्ष ति त्माटूनात। प्रा जाः पि ब र्त्तिषूब हु धा वि रा जाटूतीत। हा बु हा बु हातुबुश। हा हा बुकिहा हा बुकिहा हाकि। वि हा हाकिवि हा हाकिवि हा हाकि। वि या हा वि या हा । वि या हाकिबुश। इ ळाचाइ ळाचाइ ळाचा। हाचस् । हाचस् । हाचस् । ऋ तं ऋ तंषीऋ त मौ हो वाटुहा उ वाति। फाचश्श। ऋ तं ऋ तंषीऋ त मौ हो वाटुहा उ वाति। फाचट्श। ऋ तं ऋ तंषीऋ त मौ हो वाटुहा उ वाति। भ्राचट्श ॥८०॥
हा बु हाषिबु हा वो हा ओ हाकूओ हाथा। इ हौ होकि। इ हौ होकि। इ हौ होकि। इ हि योकि। इ हि योकि। इ हि योकि। हिंट। हिंट। हिंट। होट। होट। होट। हाट। हाट। हाट। इ ळाचा। इ ळाचा। इ ळाचा। ऋ तं मेचि। ऋ तं मेचि। ऋ तं मेचि। हाचस् । हाचस् । हाचस् । प्र क्ष स्य वि ष्णोषुअ रू ष स्य नू माटूहाःत। प्रा नु वो चो विषुद था जा त वे दाटूसातइश। वै श्वा न रा यषुम ति र्ण व्य से शूटूचीःत। सो म इ व पषुव ते चा रु र ग्नाटूया इ । हा बु हाषिबु हा वो हा ओ हाकूओ हाथा। इ हौ होकि। इ हौ होकि। इ हौ होकि। इ हि योकि। इ हि योकि। इ हि योकि। हिंट। हिंट। हिंट। होट। होट। होट। हाट। हाट। हाट। इ ळाचा। इ ळाचा। इ ळाचा। ऋ तं मेचि। ऋ तं मेचि। ऋ तं मेचि। हाचस् । हाचस् । हाखऔ हो वाशि। इ हौ होचि। भ द्र मि हौ होचु। श्रे य इ हौ होचु। वाकम मि हौ होची। वाकर मि हौ होची। स्त व मि हौ होकु। अ स्त इ हौ होचु। आ भ्रा जीकिदि हौ होकि। ज्यो ति रा भ्रा जीकुदि हौ होकिदीकदि वाःचा। एटहि याताहा उ वाति। भाचस् ॥८१॥
आ यु रा युषीरा यु र्ज्यो ति र्ज्यो तिकूर्ज्यो ताखाओ हो वाशि। एतवा क् ज्योटितीःख। ए वा ह्ये वाखीओ हो वाशि। हा ह हा हा हाखुओ हो वाशि। ए वाकाह्य ग्नाकाइ ही न्द्राकिही पू षाकिन्हि देटावाःख। वाषय म नो वा यः प्राचूणाःट। वाषय श्च क्षु र्वा य श्रोचूत्रांट। व यो घो षो व यो व्राचूतांट। व योटाभू ताकाउ वाता। ईख। व योकामा नाटाहो इ हौकिवा उ वोखिवाण। वाचयः प्रा णाटिहो इ हौकिवा उ वोखिवाण। वाचय श्च क्षुटिहो इ हौकिवा उ वोखिवाण। वाचयः श्रो त्रांटिहो इ हौकिवा उ वोखिवाण। व योकाघो षाटाहो इ हौकिवा उ वोखिवाश। व योकाव्रा तांटाहो इ हौकिवा उ वोखिवाश। व योकाभू ताटाहो इ हौकिवा उ वोखिवात्र। ऊख ॥८२॥
ऊ र्घाचाबुशहा बु होखिवाण। ऊ र्घाचाबुशहा बु होखिवाण। ऊ र्घाचाबुशहा बु होखिवाण। ध र्मोचा। ध र्मोचा। ध र्मोचा। ध र्म वि ध र्माकु। ध र्म वि ध र्माकु। ध र्म वि ध र्माकु। । ऋ तंचाव दाशा। ऋ तंचाव दाशा। ऋ तंचाव दाशा। स त्यंचागा याशा। स त्यंचागा याशा। स त्यंचागा याशा। हा वौथावाचवौ वा वौ वाशी। हा वौथावाचवौ वा वौ वाशी। हा वौथावाचवौ वा वौ वाशी। हौ हौथाहो वाचाहोश। हौ हौथाहो वाचाहोश। हौ हौथाहो वाचाहायउ वाटा। भूखवाणत् । बि भ्रा ट् बृ ह त्पिषुब तु सो म्यं माकुधूख। हौ हौथाहो वाचाहोश। हौ हौथाहो वाचाहोश। हौ हौथाहो वाचाहायउ वाटा। जाखनाणत् । आ यु र्द धाकीद ज्ञ प ताकीव वि ह्रूकितांख। हौ हौथाहो वाचाहोश। हौ हौथाहो वाचाहोश। हौ हौथाहो वाचाहायउ वाटा। वाखर्द्धाणत् । वा त जू तोकीयोचअ भि र क्ष ति त्माकूनाख। हौ हौथाहो वाचाहोश। हौ हौथाहो वाचाहोश। हौ हौथाहो वाचाहायउ वाटा। काखराणत् । प्रा जाः पि ब र्त्तिकुब हु धाकिवि रा जा तीखी। हौ हौथाहो वाचाहोश। हौ हौथाहो वाचाहोश। हौ हौथाहो वाचाहायउ वाटा। एतआ भ्रा जीकिज्यो ति रा भ्राकीजीखत् । द्यौचर्द्यौचर्द्यौच। र न्त रि क्षकीम न्त रि क्षकीम न्त रि क्षंशी। भूकमिचर्भूकमिचर्भूकमाखओ हो वाशि। एतभू ताकायाटख्। भूकमिचर्भूकमिचर्भूकमिचर न्त रि क्षकीम न्त रि क्षकीम न्त रि क्षंशी। द्यौचर्द्यौचदीकयाखओ हो वाशि। एतआ यु षेटिख्। आ यु रा यु राषुयु र्ज्यो ति र्ज्यो ति ज्योकूताखओ हो वाशि। ईख ॥८३॥
स न्त्वा भूकिता न्यैकार य न्होचिइश। स न्त्वा भूकिता न्यैकार य न्होचिइश। स न्त्वा भूकिता न्यैकार य न्होचिइश। स न्त्वा भूकित मैकार य द्धोकिइश। स न्त्वा भूकित मैकार य द्धोकिइश। स न्त्वा भूकित मैकार य द्धोकिइश। स न्त्वाकाभ व्य मैकिर य द्धोचिइश। स न्त्वाकाभ व्य मैकिर य द्धोचिइश। स न्त्वाकाभ व्य मैकिर य द्धोचिइश। स न्त्वाकाभ वि ष्य दैकीर य द्धोचिइश। स न्त्वाकाभ वि ष्य दैकीर य द्धोचिइश। । स न्त्वाकाभ वि ष्य दैकीर य द्धोचिइश। वा ङ्म नःकिप्रा णःकाप्रा णःका। प्राकणोथपाकनोथ। व्याकनोथ। श्चाकक्षुथश्चाकक्षुथश्चाकक्षुःथ। श्रो त्रंकाथ्। श्रो त्रंकाथ्। श्रो त्रंकाथ्। श्र द्धाका। श्र द्धाका। श्र द्धाका। श्री राचायुशरा मृ तंकि। शकर्माथवकर्माथभूचतिःशप्र ति ष्ठाचि। हि गीटाहिचगीश। हि गीटाहिचगीश। त्रिः । हि गि हि गि हि गि हा हि गि । हि गीटाहिचगीश। ऊ वीटाउचविश। ऊ वीटाउचविश। ऊ वीटाउचविश। ई तिटाइचतिश। ई तिटाइचतिश। ई तिटाइचतिश। इ ती ती ति हाकुइचतिश। इ ती ती ति हाकुइचतिश। इ ती ती ति हाकुइचतिश। आ सीटाअचसिश। आ सीटाअचसिश। आ सीटाअचसिश। आ स्य स्य सि हाकुअचसिश। आ स्य स्य सि हाकुअचसिश। आ स्य स्य सि हाकुअचसिश। अ रू रु चोकीदि वं पृ थि वीकुम स्य सि हाकी। अ रू रु चोकीदि वं पृ थि वीकुम स्य सि हाकीअ सीशा। पा तिचाराशस्याकपा मो ष धी नाकुमो इ प ताटीइ राखासीण। पा तिचाराशस्याकपा मो ष धी नाकुमो इ प ताटीइ राखासीण। पा तिचाराशस्याकपा मो ष धी नाकुमो इ प ताटीइ राखासीण। चा इ त्र न्देकीवा नाकामु द गाकिद नीचाकशम् । वा इ श्वे षा न्देकुवा नांकासाकमी द ज स्रंकीज्यो ति रा त तकुन्दि वि होचिइश। वा इ श्वे षा न्देकुवा नांकासाकमी द ज स्रंकीज्यो ति रा त तकुन्दि वि होचिइश। वा इ श्वे षा न्देकुवा नांकासाकमी द ज स्रंकीज्यो ति रा त तकुन्दि वि होचि। आकयु र्यचान्नाचयु र्यचान्नाचयु र्येचान् । आ वाटाअ वाशा। आ वाटाअ वाशा। आ वाटाअ वाशा। च क्षुकार्मि त्राचास्याकव रु ण स्याकीग्नेःच। स्रृ वि प्र स्रृ वीतुऐ हीता। अ स्तोषाष त स्व भा न वातूऐ हीता। वि प्राषान्न वि ष्ठ या म तातूऐ हिता। अ न्तषार्दे वे षु रो च तातूऐ हिता। ग्रा वाषाणो ब र्हि षि प्रि यातूऐ हीता। इ न्द्रषास्य र न्त्यं बृ हातुदै हिता। आ प्राकाद्या वाचा। पृ थि वीकिआ न्त रि क्षकीम् । स्व स्संचासाचर्पाशस स र्पाःटि। स्व स्संचासाचर्पाशस स र्पाःटि। स्व स्संचासाचर्पाशस स र्पाःटि। ज ना व नं सु वाटूसु वाःचा। ज ना व नं सु वाटूसु वाःचा। ज ना व नं सु वाटूसु वाःचा। सू र्य आ त्माकीज ग त स्तकीस्थु षा श्चाकि। आ यंषागौः प्र श्नि र क्र मीतूदै हिता। अ सषाद न्मा त रं पु रातूदै हीता। पि तषार ञ्च प्रि य न्सु वातूऐ हीता। अ न्तषाश्च र ति रो च नातूऐ हीता। अ स्यषाप्रा ण द पा न तातूऐ हीता। व्य ख्यषान्म हि षो दी वातूऐ हीता। त्रिं शषाद्धा म वि रा ज तातूऐ हीता। वा क्पषाद ङ्गा य धी य तातूऐ हीता। प्र तिषाव स्तो र ह द्यु भातूऐ हीता। प्रा व य तिचीप्र व याचिति प्र वाटिय ताखाओ हा वाशि। एतच्देकवा दि वा क् ज्योटितीःख ॥८४॥
औपनिषद व्रतम् (ऋ-१, सा-१७)
कस्सविताकासावित्री । अग्निरेवसवितापृथिवीसावित्री । सयत्राग्नितत्पृथिवीयत्रवापृथिवीतदाग्निः । तद्वेयोनीतदेकंमिथुनं ॥ १ ॥
कस्सविताकासावित्री । वरुणएवसविताआपस्सावित्री । सयत्रवरुणस्तदापोयत्त्रवाआपतद्वरुणः । तेद्वेयोनीतदेकंमिथुनं ॥ २ ॥
कस्सविताकासावित्री । वायुरेवसविताआकाशस्सावित्री । सयत्रवायुस्तदाकाशोयत्रवाकाशःतद्वायुः । तेद्वेयोनीतदेकंमिथुनं ॥ ३ ॥
कस्सविताकासावित्री । यज्ञएकसविताच्छन्दांसिसावित्री । सयत्रयज्ञःतच्छन्दांसियत्रवाच्छन्दांसितद्यज्ञः । तेद्वेयोनीतदेकंमिथुनं ॥ ४ ॥
कस्सविताकासावित्री । स्तनयित्नुरेवसविताविद्युस्सावित्री । सयत्रस्तनयित्नुस्तद्विद्युःयत्रवाविद्युस्तनयित्नुः । तेद्वेयोनीतदेकंमिथुनं ॥ ५ ॥
कस्सविताकासावित्ती । आदित्यएवसविताद्यौस्सावित्री । सयत्रादित्यस्तद्यौ.यत्रवाद्यौस्तदादित्यः । तेद्वेयोनीतदेकंमिथुनं ॥ ६ ॥
कस्सविताकासावित्रीचन्द्रएवसवितानक्षत्राणिसावित्री । सयत्रचन्द्रस्तन्नक्षत्राणियत्रवानक्षत्राणितश्चन्द्रः । तेद्वेयोनीतदेकंमिथुनं ॥ ७ ॥
कस्सविताकासावित्री । मनएवसवितावाक्सावित्री । सयत्रमनस्तद्वाक्यत्रवावाक्रस्तद्मनः । तद्वेयोनीतदेकेमिथुनं ॥ ८ ॥
कस्सविताकासावित्री । पुरुषाएवसवितास्त्रीसावित्री । सयत्रपुरुषःतश्रीयत्रवास्त्रीतत्पुरुषः । तेद्वेयोनीतदेकंमिथुनं ॥ ९ ॥
कस्सविताकासावित्री । योवाएतांसावित्रींएवंवेदा । अपपुनर्मृत्युन्चरतिसावित्र्याएवसलोकतांन्जयति ॥ १० ॥
॥ हरिःओम् ॥
कस्सविताकासावित्री । वरुणएवसविताआपस्सावित्री । सयत्रवरुणस्तदापोयत्त्रवाआपतद्वरुणः । तेद्वेयोनीतदेकंमिथुनं ॥ २ ॥
कस्सविताकासावित्री । वायुरेवसविताआकाशस्सावित्री । सयत्रवायुस्तदाकाशोयत्रवाकाशःतद्वायुः । तेद्वेयोनीतदेकंमिथुनं ॥ ३ ॥
कस्सविताकासावित्री । यज्ञएकसविताच्छन्दांसिसावित्री । सयत्रयज्ञःतच्छन्दांसियत्रवाच्छन्दांसितद्यज्ञः । तेद्वेयोनीतदेकंमिथुनं ॥ ४ ॥
कस्सविताकासावित्री । स्तनयित्नुरेवसविताविद्युस्सावित्री । सयत्रस्तनयित्नुस्तद्विद्युःयत्रवाविद्युस्तनयित्नुः । तेद्वेयोनीतदेकंमिथुनं ॥ ५ ॥
कस्सविताकासावित्ती । आदित्यएवसविताद्यौस्सावित्री । सयत्रादित्यस्तद्यौ.यत्रवाद्यौस्तदादित्यः । तेद्वेयोनीतदेकंमिथुनं ॥ ६ ॥
कस्सविताकासावित्रीचन्द्रएवसवितानक्षत्राणिसावित्री । सयत्रचन्द्रस्तन्नक्षत्राणियत्रवानक्षत्राणितश्चन्द्रः । तेद्वेयोनीतदेकंमिथुनं ॥ ७ ॥
कस्सविताकासावित्री । मनएवसवितावाक्सावित्री । सयत्रमनस्तद्वाक्यत्रवावाक्रस्तद्मनः । तद्वेयोनीतदेकेमिथुनं ॥ ८ ॥
कस्सविताकासावित्री । पुरुषाएवसवितास्त्रीसावित्री । सयत्रपुरुषःतश्रीयत्रवास्त्रीतत्पुरुषः । तेद्वेयोनीतदेकंमिथुनं ॥ ९ ॥
कस्सविताकासावित्री । योवाएतांसावित्रींएवंवेदा । अपपुनर्मृत्युन्चरतिसावित्र्याएवसलोकतांन्जयति ॥ १० ॥
॥ हरिःओम् ॥
॥ ऐन्द्र षोडशी तवश्शाव्यं ज्येष्ठ साम सुभेषजं वा ॥
हा बुणाहा बुणाहा बुणा। भ्रा जाणाभ्रा जाणाभ्रा जाणा। आ युणारा युणारा यूःणा। उ दु त्य ञ्जाकीउ दु त्य ञ्जाकीउ दु त्य ञ्जाकी। चि त्रं दे वाषीना मु द गा द नीटूकाचम् । हा बुणाहा बुणाहा बुणा। भ्रा जाणाभ्रा जाणाभ्रा जाणा। आ युणारा युणारा यूःणा। स्त वे द संकीस्त वे द संकीस्त वे द सकीम् । च क्षु र्मिषित्र स्य व रु ण स्याटूग्नाचइःश। हा बुणाहा बुणाहा बुणा। भ्रा जाणाभ्रा जाणाभ्रा जाणा। आ युणारा युणारा यूःणा। दे वंकाव हाशा। दे वंकाव हाशा। दे वंकाव हाशा। आ प्रा द्या वाषीपृ थि वी आ न्त रिटूक्षाचम् । हा बुणाहा बुणाहा बुणा। भ्रा जाणाभ्रा जाणाभ्रा जाणा। आ युणारा युणारा यूणा। स्ति केकात व स्ति केकी। त व स्ति केकीत वःचा। सू र्य आ त्माषीज ग त स्त स्थु षाटूश्चाच। हा बुणाहा बुणाहा बुणा। भ्रा जाणाभ्रा जाणाभ्रा जाणा। आ युणारा युणारा यूणा। दृ शे वि श्वाकीदृ शे वि श्वाकीदृ शे वि श्वाकी। सू र्य आ त्माकीज ग त स्त स्थु षाटूश्चाच। हा बुणाहा बुणाहा बुणा। भ्रा जाणाभ्रा जाणाभ्रा जाणा। आ युणारा युणारा यूणा। र्य्य सूकार्य्य य्य सूकिर्य्य य्य सूकिर्य्याखओ हो वाशि। ईख। हा बुणाहा बुणाहा बुणा। भ्रा जाणाभ्रा जाणाभ्रा जाणा। आ युणारा युणाराटयाखओ हो वाशि। इचन्दु रि ळाचिस त्यंचाद्यौ र्भूचातंकपृ थि वीचिसा ह स्तेचिजा आ पाचिऊ षा दि शोचीज्योकतीःख ॥८५॥
॥ वाचो व्याहृति सामानि सप्त दश ॥
भू रोंचा। भू र्होषाइ भू र्हो इ भू र्हाटूआ उ वाटि। एतस्व ज्योटातीःख ॥८६॥
भु वोंचा। भु व हो इ भुषुव हो इ भु व हाटूआ उ वाटि। एतस्व ज्योटातीःख ॥८७॥
सु वोंचा। सु व हो इ सुषुव हो इ सु व हाटूआ उ वाटि। एतस्व ज्योटातीःख ॥८८॥
स त्योंचा। स त्य हो इ सषुत्य हो इ स त्य हाटूआ उ वाटि। एतस्व ज्योटातीःख ॥८९॥
पु रु षोंचि। पु रु ष हो इ पु रु षषृहो इ पु रु षा हाटूआ उ वाटि। एतस्व ज्योटातीःख ॥९०॥
गौ रोंचा। गौ र्होषाइ गौ र्हो इ गौ र्हाटूआ उ वाटि। एतस्व ज्योटातीःख ॥९१॥
लो कोंच। लो क हो इ लोषुक हो इ लो क हाटूआ उ वाटि। एतस्व ज्योटातीःख ॥९२॥
अ ग्ने हृ द योंचु। अ ग्ने हृ द य हो इ अ ग्ने हृ द्य हो इषौअ ग्ने हृ द य हाटूआ उ वाटि। एतस्व ज्योटातीःख ॥९३॥
द्यौ र्होंचा। द्यौ र्होषाइ द्यौ र्हो इ द्यौ र्हाटूआ उ वाटि। एतस्व ज्योटातीःख ॥९४॥
अ न्त रि क्षोंची। अ न्त रि क्ष हो इ अ न्त रि क्ष होषैइ अ न्त रि क्ष हाटूआ उ वाटि। एतस्व ज्योटातीःख ॥९५॥
पृ थि व्योंचि। पृ थि वी हो इ पृ थि वीषृहो इ पृ थि वी हाटूआ उ वाटि। एतस्व ज्योटातीःख ॥९६॥
अ ग्रोंचा। अ ग्र हो इ अषुग्र हो इ अ ग्र हाटूआ उ वाटि। एतस्व ज्योटातीःख ॥९७॥
वा योंचा। वा य हो इ वाषुय हो इ वा य हाटूआ उ वाटि। एतराटजाख ॥९८॥
सू र्योंचा। सू र्य हो इ सूषुर्य हो इ सू र्य हाटूआ उ वाटि। एतभ्राटजाख ॥९९॥
च न्द्रोंचा। च न्द्र हो इ चषुन्द्र हो इ च न्द्र हाटूआ उ वाटि। एतआ भ्राटाजाख ॥१००॥
ना गोंचा। ना ग हो इ नाषुग हो इ ना ग हाटूआ उ वाटि। एतपृ ष्ठचाम् ॥१०१॥
महानाम्निक व्रतम् (ऋ-१, सा-३)
वीदा᳒मा॑घवन्वीदा᳒गातूमा᳒नूशं॑सीषोदीशाः॑ । शि᳒क्षा॑शचीनांपतेपूर्वीणां᳒पू॑रो᳸वसो । आ᳒भीष्ट्वा᳒मा᳹भीष्टी॑भिःप्रा᳒चे॑तानःप्रा᳒चेतायेन्द्रा᳹द्यु॑म्ना᳒या॑नाईषे । एवा᳒हीशक्रो᳒रायेवा᳒जा॑यवज्रीवः । शा᳒वीष्ठवज्रिन्वृञ्ज᳒सेमंहिष्ठ᳒वज्रिन्वृन्जसाआ᳹या॑हीपीबामात्स्वा ॥ १० ॥
वीदाराये᳒सूवी᳒र्यं॑ । भूवोवा᳹जा॑नांपातिर्वाशंआ᳒नू । मंहिष्ठवज्रिन्वृञ्ज᳒सेयश्शावी॑ष्ठश्शू᳹रा ᳹णाम् । योमं᳒ही॑ष्ठोमाघो᳒नां॑ । चिकित्वोआभी᳹नो॑नाये᳒न्द्रोवीदेता᳒मूस्तुही । ई᳒शे᳹ही॑शक्र᳹स्ता॑मूताये॑हावा॑माहे᳹जेता॑रामापा॑राजितं । सा᳒नाः॑परीषा᳒द᳒तिद्वीषः॑क्रातुच्छन्दोऋतंबृहात् ॥ ११ ॥
इन्द्रंधानास्यासाताये । हावा॑महेजेतारामापाराजित᳒म् । सा᳒नाः॑पारीषद॑तिद्वीषस्सा᳒नाः॑पा᳒री॑षाद᳒तिद्वीषाः॑ । पू᳸र्वास्याया॑क्ते॑अद्रिवः । सुम्नाधे॑हिनो॑वसो । पूर्तीश्शा᳒वीष्ठशस्य᳒ते । व᳒शीहीशक्रोनून᳹न्त ᳹न्नव्यं॑सन्या᳒से । प्रा᳒भो᳒र्जनस्यवृत्रा॑ह᳒न्सामर्ये᳒षु॑स्तवामहे । शू᳒रोयो᳒गोषूगच्छा॑ति । सा᳸खा॑सूशे᳒वोआद्रा᳒युः᳒ ॥ १२ ॥
एवा᳒ह्ये॑वाएवाह्याग्ने॑एवाही॑न्द्राएवा᳒ही᳒पूष॑न्एवाही᳒दे॑वाः ॥ १३ ॥
वीदाराये᳒सूवी᳒र्यं॑ । भूवोवा᳹जा॑नांपातिर्वाशंआ᳒नू । मंहिष्ठवज्रिन्वृञ्ज᳒सेयश्शावी॑ष्ठश्शू᳹रा ᳹णाम् । योमं᳒ही॑ष्ठोमाघो᳒नां॑ । चिकित्वोआभी᳹नो॑नाये᳒न्द्रोवीदेता᳒मूस्तुही । ई᳒शे᳹ही॑शक्र᳹स्ता॑मूताये॑हावा॑माहे᳹जेता॑रामापा॑राजितं । सा᳒नाः॑परीषा᳒द᳒तिद्वीषः॑क्रातुच्छन्दोऋतंबृहात् ॥ ११ ॥
इन्द्रंधानास्यासाताये । हावा॑महेजेतारामापाराजित᳒म् । सा᳒नाः॑पारीषद॑तिद्वीषस्सा᳒नाः॑पा᳒री॑षाद᳒तिद्वीषाः॑ । पू᳸र्वास्याया॑क्ते॑अद्रिवः । सुम्नाधे॑हिनो॑वसो । पूर्तीश्शा᳒वीष्ठशस्य᳒ते । व᳒शीहीशक्रोनून᳹न्त ᳹न्नव्यं॑सन्या᳒से । प्रा᳒भो᳒र्जनस्यवृत्रा॑ह᳒न्सामर्ये᳒षु॑स्तवामहे । शू᳒रोयो᳒गोषूगच्छा॑ति । सा᳸खा॑सूशे᳒वोआद्रा᳒युः᳒ ॥ १२ ॥
एवा᳒ह्ये॑वाएवाह्याग्ने॑एवाही॑न्द्राएवा᳒ही᳒पूष॑न्एवाही᳒दे॑वाः ॥ १३ ॥
॥ ऐन्द्रा महा नाम्नयः सिमाश्शक्वर्यः माटवीर्वा ॥
एटच्वी दाचाम घ व न्वीकीदाच। गा तुषाम नु शं सि षो दासूइ शा याटिआ उ वाटि। ईकृळाट। एटशि क्षा श ची नांकुप ताचाइश। पू र्वी णां पु रोटुव साक्रावाटआ उ वाटि। ईकृळाट। आ भि ष्ट्वा मा भाटूइ ष्टि भीक्रिराटआ उ वाटि। ईकृळाट। सू व र्णा शूटीहायउ वाटा। ईकृळाट। प्रा चे तषिन प्रा चे त या ईक्रून्द्राच। द्युकम्ना य नाटिई षाचाइश। ईकृळाट। ईकृन्द्राच। द्यु म्ना य नाटीई षाचाइश। अ थाचा। ईकृन्द्राट। द्यु म्ना य नाटीई षाचाइश। ईकृळाट। ए वा हि श क्रो राकूए वा जा य वायूज्रापइ वाःशाशा वि ष्ठ व ज्रि न्नाटूञ्जाखसाणइश। मं हि ष्ठ व ज्रि न्नाटूहो ञ्जा सा याटूआ उ वाटि। ईकृळाट। इ ट् इ ळाटिख्। आ याकाहि पि बा माटीत्सूटवाच। इ ळाचा ॥१०२॥
एटच्वी दा राचियेशसू वीचार्यांश। भू वो वा जा नां प ति र्व शंटूआ नुक्रावाटआ उ वाटि। ईकृळाट। एटच्मं हि ष्ठ व ज्रि न्वृकूञ्ज साचाइश। य श्श वि ष्ठ श्शू राकूणाटमायउ वाटा। ईकृळाट। योषमं हि ष्ठो म घो नाटूमायउ वाटा। ईकृळाट। अंकशु र्न्न शो चाटीइ हायाउ वाटा। ईकृळाट। चि कि त्वो अ भि नो न याषृईकृन्द्राःच। वी दे त मूटीस्तु हाचाइश। इ ळाचा। ईकृन्द्राःट। वी दे त मूटीस्तु हाचाइश। अ थाचा। ईकृन्द्राःट। वी दे त मूटीस्तु हाचाइश। इ ळाचा। ई शे हि श क्र स्ताकूमू त येकिह वायामापहा इशा। जेकता र म प राटुजाखइ तणाम् । सा नः प र्षा द ताटूइ हो द्वा इ ष याटूआ उ वाटि। इ ट् इ ळाटिख्। क्रा तुःकाछ न्द ऋ तांटीबृ हाचात् । इ ळाचा ॥१०३॥
एटइ न्द्र न्ध न स्य सातकूत याचाइश। हा वा म हे जे ताषूर म प रा जि ताटूमा आक्राउ वाटा। ईकृळाट। एटसषनः प र्ष द ति द्विकूषाःच। सा नः प र्षा द ताटूइ द्वि षाक्रियाटआ उ वाटि। ईकृळाट। पू र्वा स्य य न्त याटू। अ द्रि वाक्रियाटआ उ वाटि। ईकृळाट। अं शु म र्दा याटीहायउ वाटा। ईकृळाट। सु म्नषाआ धे हि नो सो पूक्रूर्तीःच। शा वि ष्ठ शाटीस्या ताचाइश। ईचळाश। पूकृर्तीःट। शा वि ष्ठ शाटीस्या ताचाइश। अ थाचा। पूकृर्तीःट। शा वि ष्ठ शाटीस्या ताचाइश। ईचळाश। वा शी हि श क्रो नुकून न्त न्न व्यं सायुन्यापसा इशा। प्र भो र्ज न स्य वाटूत्राखहणन् । सा म र्ये षु स्त वाटूहो मा ह याटीआ उ वाटि। इ ट् इ ळाटिख्। शू राःकायो गे षु गाटीच्छा ताचाइश। इ ळाचा। सा खाकासू शे वो आटीद्रा यूःचा। इ ळाचा। ए वाकाह्ये वाटा। हो इ हो वाकीहायउ वाटा। ईकृळाट। ए वाकाह्य ग्राचाइश। हो इ हो वाकीहायउ वाटा। ईकृळाट। ए वाकाही न्द्राटी। हो इ हो वाकीहायउ वाटा। ईकृळाट। ए वाकाहि पू षाटिन् । हो इ हो वाकीहायउ वाटा। ईकृळाट। ए वाकाहिकदे वाःटा। हो इ हो वाकीहायउ वाटा। ईकृळाट ॥१०४॥
आशिर्वचन सामानि (६६)
॥ अग्नेराक्षोघ्नेद्वे ॥
अ ग्ने रा क्षाखीणोशअं हा सःप्लि। प्रा ति स्म देकीवा री षाटिताःत। ता पा इ ष्ठाटीइ राता। ज रो दाटिहाखण्। ओपइ ळाशा ॥१०५॥
अ ग्ने यू ङ्क्ष्वाखीहीशये ता वाप्लि। अ श्वा सो देचीवा सा धाटिवाःत। आ रं वाटिहातन्तीकया शाटावाःखण्। ओपइ ळाशा ॥१०६॥
॥ ऋतुसामनीच ॥
ओ इषाचि त्र इ च्छा इ शोयूस्त रु णापिस्या वा क्षाकिथाःफ। ओ इ न यो मा ता रायूव नु वापिइ ती धा ताकीवेफ। ओ अ नु धा यायुद जी ज नापीद धाचाचीकदाफ। ओषइ व व क्ष सा द्योयूमा हीटाद्यू त्या न्चाखिरात्रन् । दु त्य न्च र न्माटुहीख ॥१०७॥
चि त्राताएत। एतएपइ च्छि शो स्त रू ण स्य व क्ष थषेक्ष थो ही ही ही यातूहातबुश। एतएपन यो मा त रा व न्वे ति धा तषेवे त वे ही ही ही यातूहातबुश। एतएपअ नू धा य द जी ज न द धा चिषैदा चि दा ही ही ही यातूहातबुश। एतएपव व क्ष स्स द्यो म हि द्यु त्य न्च रषैन्च र न्ही ही ही यातूहा उ वाति। एतऋ तूटाख् ॥१०८॥
॥ अग्नेश्चाग्नेयम् ॥
इ मं स्तोखिमाशम र्हा तेखिजाण। ता वेकाद सेचाहो येटार था मीखिवाशस म्मा हेखिमाण। मा नीकाष याचाहो येटाभ द्रा हीखिनःशप्र मा तीखिराण। स्या संकास दीचाहो येटाअ ग्ना इ साखिख्याणइश। मा रा इ षाखिमाण। वा यकान्त वाटाव होखइ ळाशा ॥१०९॥
॥ वामदेव्यञ्च ॥
आ वो रा जाती। न म ध्वा र स्य रूखूद्रशम् । हो ताकराचम् । सषत्य य जं रो द सीखूयोःप्ल। अ ग्निंचापू राचात न इ त्नो रा चीखूक्ताशत् । हि रचाण्य रू पाटिम व सापिइ का र्णूखि। ध्वात्रम् ॥११०॥
॥ बार्हस्पत्यञ्च ॥
सो मं रा जाषीनं व रु णातीम् । अ ग्नी म न्वाकीर भा म हेचीहो वाटाहातइश। आथदि त्यं वि ष्णुंकीसू र्यंकाहो वाटाहातइश। ब्र ह्मा णाटिञ्चातहो वाटाहातइश। बृ हाटाउ वाता। स्पाखतिशम् ॥१११॥
॥ दैवानीकञ्च ॥
भ द्रो नोफिओप्लहो अ ग्नि राखीहु ता एप्लि। भाकद्रा राथाताचइशसुकभ गाटाभ द्रोटाअ ध्वाखाराःण। भ द्रा ऊटितात। प्रापशाशस्ताखयोप्ल। हा इशा ॥११२॥
॥ अग्नेश्चश्रैष्ठ्यम् ॥
आ यंचाअ ग्नि श्रेचिष्ठाकत मोचाहोटच्आ यचाम् । वाटम धु म त्त मोकुहोटच्आ यचाम् । सा हाचास्रा साचात मोटाहोटच्आ यचाम् । अ स्मि न्ना स्तुकीसु वीकाथ्र्या मौटाहोत। ओपइ ळाशा ॥११३॥
॥ आदित्यस्यचरुचिरोचनंवा ॥
आ दि त्य श्शूती। क्राचउ द गा त्पु रु राखूस्ताशत् । ज्योकतिः कृ ण्वाकिन्वि त मो बा ध माखूनाःप्ल। आकभा स मा नाःटीप्रा दी शोकिनु साखार्वाःप्ल। भ द्र स्य काकीर्तातरू च यापिन्ना याखा। गात्रत् ॥११४॥
॥ गौतमस्यच भद्रम् ॥
भ द्रं भातिद्रातम् । नाकआ भाटाराखइ षा मू र्जशीम् । शा ता क्राटिताखबू या दि न्द्रा मृशु। डाटयाखऔ हो वाशि। सीखनःश ॥११५॥
॥ श्रायन्तीयञ्च ॥
श्रा य न्त ई व सूषूओ रातायातम् । वि श्वाटाइ दि न्द्राटिस्य भाटाक्षा ताटा। वा सू नि जाकीतो ज नि माकीच्नी योकाजायसाट। प्रा ती भाकिग न्ना दीकिधी मः प्राटितीत। भा गा न्नापिदा हिशाम् । धि माताओपबाप्ल। हेख ॥११६॥
॥ वसिष्ठस्यचनिन्हवम् ॥
आ इ हिटिआ इ हिटिए हि या उ वोखुवाप्लहातइश। अ सा वि दे व ङ्गोचूऋ जीकाच्काकम न्धोटाअ न्धोटाअ न्धाटाउ वोखवाप्लहातइश। न्य स्मि न्नि न्द्रोचीज नु षेकिच्मूकवो चाटीवो चाटावो चाटाउ वोखावाप्लहातइश। बो धा म सि त्वाचुह रि याकिच्श्वाकया ज्ञैःटार्या ज्ञैटार्य ज्ञाटाउ वोखावाशहातइश। बो धा न स्तो माचुम न्धा साकिच्माकदा इ षूटिदा इ षूटिदे ष्वाटाउ वोखावाशहातइश। आ इ हिटिआ इ हिटिए हि या उ वोखुवाप्लहाखऔ हो वाशि। ईख ॥११७॥
॥ औरूक्षयेद्वे ॥
अ द र्द रूतीत् । स म सृ जोकीच्वीकखा निकात्वा म र्णाटिवातन्ब ल्बचाधा नंथाआ रा म्णाःभि। मा हा न्ताटिमितन्द्र प र्व तंकीवीकया द्वाकासृ जा द्धाटिराःत। अ व य द दाकुच्नाकवाटन्हाखण्। ओपइ ळाशा ॥११८॥
अ द र्द रू त्स म सृ जाःतृ। वी खा नि त्व म र्णाषूवा न्ब ल्ब धा नंकुआ राटाम्णाःत। मा हा न्त मिषन्द्र प र्व तंकीवि याटाद्वाःत। स्र जा द्धाटिरातअ व य द दाकुच्नाकवोटयाखऔ हो वाशि। हाखन् ॥११९॥
॥ यामञ्च ॥
आ या म याकीय मौटाहो वाथाऊट। ना के सु प र्णाषुमु प या त्प तकुन्तं प तकिन्त मौटाहो वाथाऊट। आ या म याकीय मौटाहो वाथाऊट। हृ दा वे न न्तोषुअ भ्या चाकिक्ष त त्वाटिक्ष त त्वौटिहो वाथाऊट। आ या म याकीय मौटाहो वाथाऊट। हि र ण्य प क्षंषुव रू णा स्य दूकुतं स्य दूकित मौटाहो वाथाऊट। आ या म याकीय मौटाहो वाथाऊट। या म स्य यो नौषुश कु नां भु रकुण्युं भु रकिण्यु मौटाहो वाथाऊट। आ या म याकीय मौटाहो वाथाऊट। वाटच्हायउ वाटा। एतदि व मेकिदि व मेकिदि वाटाख्म् ॥१२०॥
॥ ऋतुसामनिच ॥
ब्र ह्मा ब्राटिह्मात। ज ज्ञा नंचिप्रा था मंकिपु रा स्ताभित् । वी सा इ वाटिइ सीता। म त स्सु रूकीचो वेथान आ वाभित् । सा बू साटिबूत। ध्न्या उ पाचिमाकआटस्य वा इ ष्ठाःभी। सा ता स्साटिताःत। च यो नी मा साचुता श्च वाकिइ वाःपाण्। ओपइ ळाप्ला ॥१२१॥
हु वेटाहातइ हु वेटिहातइ हे षाटियात। ब्र ह्म ज ज्ञाकीनांटप्रा था मंकिपु राखास्ताशत् । वी सी म ताकीस्सु रू चो वेकीन आखावाशत् । सा बु ध न्या उकुप मा आकिस्य वाखाइ ष्टाःप्ला। सा त श्च यो नीकुमा साकात श्च वीखिवाःप्ल। हु वेटाहातइ हु वेटिहातइ हे षाटियाखऔ हो वाशि। एतऋ त म मृ त मेकूऋ त म मृ त मेकूऋ त म मृ ताटुख्म् ॥१२२॥
॥ आदित्याः सामनीद्वे तार्क्ष्यसामनिवा ॥
त्य मू षूखिवा जि नाखिन्देखव जूखातशम् । स होकावा नथान्ता रू ताकिरं र थाखिनाशम् । अ रि ष्ट नाखीइ मींशापृ त नाखिज माखाशूशम् । स्व स्त या इ ताकुर्क्ष मि हाखिहू वाखाइश। मात्रम् ॥१२३॥
इ य इ यातीहा इ त्य मु षुषुवा जि नाखिन्देखव जूखातशम् । ई याफाई याफाआप्लहातइश। स होकावा नथान्ता रू ताकिरं र थाखिनाशम् । इ य इ यातीआकरि ष्ट ना इ मिंटुपा र्ता नाकिज माखाशूशम् । ई याफाई याफाआप्लहातइश। स्व स्त या इ ताकुर्क्ष मि हाखिहू वाखाइश। मात्र ॥१२४॥
॥ इन्द्रस्यचत्रातम् ॥
त्राकता र मि न्द्रषीम वि ताकिरा मीटान्द्रातम् । हा वे ह वे सूषुहा वं शुकिरा मीटान्द्रातम् । हू वा इ नु श क्रंषूपु रू हूकिता मीटा न्द्रातम् । ई दंथाहा वाचाइशमा घ वा वापीइ तू वाखिइश। न्द्राःत्र ॥१२५॥
॥ महावैश्वामित्रेद्वे ॥
ह या इ ह याखुओ हाफाओ हाफा। ह या इ ह याखुओ हाफाओ हाफा। ह या इ ह याखुओ हाफाओ हाफा। इ न्द्रं वि श्वातीअ वीचावा र्धाटान् । स मु द्र व्यातीच सचाङ्गा इ राःटि। र थी त मांतीरा थाकाइ नाटाम् । वा जा नां सातीत्पा तींचापा तीटाम् । ह या इ ह याखुओ हाफाओ हाफा। ह या इ ह याखुओ हाफाओ हाफा। ह या इ ह याखुओ हाफाओ हाफा। हो इ ळा हफिहो इ ळाफिप्ल्होखइ ळाशा ॥१२६॥
॥ मधुश्चुन्निधनञ्च प्राजापत्यम् ॥
स पू र्व्यो म हो नातूमेत। वे नाः क्राचितूकभा इ रा ना जेटुहातहा औटाहोतवा आटाइ हीता। य स्याकाद्वा राथामा नूः पी ताटीहातहा औटाहोतवा आटाइ हीता। दा इ वा इ षूटुहातहा औटाहोतवा आटाइ हीता। धी याकाआ नाटाट्जाखऔ हो वाशि। म धूताश्च्यू ताःटाख् ॥१२७॥
॥ वसिष्ठस्यचवैराजे ॥
पी बाता। सो म मि न्द्र मषुन्द तु त्वाटियकन्ते सु षा व ह र्याकूश्वाटद्रीःत। सोट तर्बा हु भीटियांतसू याटाट्ताखऔ हो वाशि। एतच्ना र्वाटाख् ॥१२८॥
॥ प्रजापतेस्सीदन्तीयेद्वे ॥
सापई द न्त स्ते व योप्लूयाङथाश। गोकश्रा इ स्तेकिम धोकाच्र्म्माकदि रो वापिई वाप्लाक्ष णाःता। आ भी त्वा माचीइ न्द्ना नोकिनूफमाःख ॥१२९॥
सी द न्त स्ते व योफूय थातागोपश्री स्ते र्म धो र्म्माप्लीदि राःङा। वि वाताहातबुशक्षापणाःश। अ भीताहोतइशइ त्वापामाशइ न्द्न नोतिनूपमाशउ हु वा हाप्लीबु । बाश ॥१३०॥
॥ प्रजापतेःश्योकानुश्योकानित्रीणि ॥
हा बु स्व र तातु। ब्र ह्मा णाटिओ वाकाइ न्द्र म्माकिह याटान्तोखर्कैःण। आ वाटाच्र्धा याचान्न ह ये हकीन्ता वाखाऊत्र। श्योखकाःप्ल ॥१३१॥
हा व भि स्व र तातू। ब्र ह्मा ण आ इ न्द्राटूचमाकह याटान्तोखर्कैःण। आ व र्धाचियाटन्न ह ये हकीन्ता वापाऊत्र। श्योतच्काकय ताःटाख् ॥१३२॥
हा बु स्व र तातु। स्वा राचात स्वा राटितात। आ ना व स्तेकीर थ म श्वाकीयाचतायक्षूपर्हा बु स्व र ताशु। स्वा राचात स्वा राटितात। त्व ष्टाकाव ज्रकाम्पु रु हूकिता द्यु मा न्तांपीहा बु स्व र ताशु। स्वा राचात स्वा राटिताखऔ हो वाशि। स्वा राचाताटख् ॥१३३॥
॥ प्रजापतेस्सन्तनीकेद्वे ॥
भा गाःता। ना चि त्रोषिअ ग्नि र्म होटीनातन्दाटट्धाखऔ हो वाशि। ती राटात्नाखम् ॥१३४॥
भ गो न चि त्राःतु। अ ग्नि र्म होटीनातन्दाटट्धाखऔ हो वाशि। एतच्ती राटात्नाखम् ॥१३५॥
॥ बार्हस्पत्येद्वेअग्नेर्वाराक्षोघ्ने ॥
अ हा वो हाखीवोप्लअ हा वो हाखीवोप्लअ हा वो हाखीवाःण। अ ग्नि ष्टा पा तीटुच्प्र ति द हाकीख्त्य ग्निं हो ताकीर म्माखान्ये दाचास्वकन्तफम् । वा सो स्सूकीनुं स ह साकीजाखता वेचादकसफम् । वि प्राचान्न जाखाता वेचादाकसफम् । या ऊचार्ध्व याखासू आचाध्वाकराःफ। दे वो देकवाखची याचाकृकपाफ। घृ ताकास्या बि भ्राकिष्टि म नु शूखीक्रा शोचाचीकषाःफ। आ जु ह्वाकिन्वाखस्या साचार्पीकषाःफ। अ हा वो हाखीवोप्लअ हा वो हाखीवोप्लअ हा वो हाखीवाःण। अ ग्नि ष्टा पा तीटुच्प्र ती द हाकीख्आ तात्राइश। एतवि श्वंकास म त्री ण न्द हाखू। एतवि श्वंकास म त्री ण न्द हाखू। एतवि श्वंकास म त्री ण न्द हाखू ॥१३६॥
त्य ग्नाखाइःशप्र ति द हाफितीप्लहा बु होखिहा बुशा। अ ग्निं हो ताकीर म्माखान्ये दाचास्वकन्तफम् । वा सो स्सूकीनुं स ह साकीजाखता वेचादकसफम् । वि प्राचान्न जाखाता वेचादाकसफम् । या ऊचार्ध्व याखासू आचाध्वाकराःफ। दे वो देकवाखची याचाकृकपाफ। घृ ताकास्या बि भ्राकिष्टि म नु शूखीक्रा शोचाचीकषाःफ। आ जु ह्वाकिन्वाखस्या साचार्पीकषाःफ। त्य ग्नाखाइःशप्र ति द हाफितीप्लहा बु होखिहा उ वाशि। एतवि श्वंकास म त्री ण न्द हाकूख्। एतवि श्वंकावि य त्री ण न्द हाकूख्। एतवि श्वंकानि य त्री ण न्द हाकूख् ॥१३७॥
॥ आजीकञ्च ॥
उ च्चाता। ते जाथाताचमायन्धा साटा। दि वि स त्भू म्याषुद दाकाउ ग्रं शाटिर्म्मात। माटट्हाखऔ हो वाशि। उ प्श्राखावाःप्ल ॥१३८॥
॥ वार्षाहरम् ॥
अ चि क्र दातीदा चीकाच्क्राकदाखद चि क्र दा देप्लु। वृ षा ह रातीइशवा र्षाकाच्हाकराखइ वृ षा ह रा एप्लू। म हा न्मि त्रोतीमा हाकान्मिकत्रोखाम हा न्मि त्रा एप्लु। न द र्श तातीना दकार्शाकताखन द र्श ता एप्लु। सं सू र्यातिइशसं सूकाच्रीकयाखइ सं सू र्या एप्ल। ण दि द्यु तातीइशणा दीकाच्द्यूकताखइ णा दाशिइ द्यु ता बूप्ली। बाश ॥१३९॥
॥ वसिष्ठस्यचप्लवम् ॥
हा उ वातिहा उ वातिहातहा उ वोखिवाप्लहातइश। पू ना नाखिस्सोशम धा राखियाण। आ पो वाखिसाशनो आ र्षाखिसीण। आ रा त्नाखिधाशयो ना इ माखीर्क्ताशस्या सि दाखिसीण। उ त्सो दाखिइ वोशाहा इ रा ण्याखीयाण। हा उ वातिहा उ वातिहातह उ वोखीवाप्लहाखऔ हो वाशि। एतआ तिकावि श्वाकानी दू रीकिता त रेकिमाख ॥१४०॥
॥ आश्वञ्च ॥
हो हो अ क्राटीन्साचमु द्राःचाप्र था मेचिवि ध र्म्माशिन् । हो हो इकिज न यकिन्प्रा जाकाभु व न स्य गोकुपाःच। हो हो इ वृ षाटुच्पा वि त्रेटिच्आ धि सा नोभिअ व्याचाइश। हो हो इकिबृ ह त्सो मो वाटुवृकधे स्वाथानो अ द्राटियौटहो वाताहा उ वाति। एतच्स्वाकनो अ द्रीःटिख् ॥१४१॥
॥ सोमसामानिचत्वारि ॥
सो मः प व तेषुज नि ता एतीऔ होखावात्र। मा तापइशनात्रम् । ज नि ताकिदी वोकाज नी ताकिप्र थि व्याःचि। ज नाटाइ ताखाग्नेःण। ज नि ता सूखीरी याखास्यात्र। ज नि तेकिन्द्रा स्य ज नि तोकुत वि ष्णोःटिख् ॥१४२॥
हा बु ज न द्धा बु ज न द्धा बु ज नषोज्ज न द्धा बु ज न द्धा बु ज न द्धातोबुशहो इ ज न द्धो इषूज न द्धो इ ज नाचूत् । सोकमः प वा तेटीजा नी तोकिम तीखानाशम् । ज नि ताकिदा इ वोटिजा नी ताकिपृ थीखाव्याःप्ल। ज नि ताकिग्ना इ र्जकिनि ता सूकिर्याखस्याश। हा बु ज न द्धा बु ज न द्धा बु ज नषोज्ज न द्धा बु ज न द्धा बु ज न द्धातोबुश। हो इ ज न द्धो इषूज न द्धो इ ज नाचूत् । ज नि तेकिन्द्रा स्याटाजा नी तोपिता वाखाइश। ष्णोःत्र ॥१४३॥
॥ कावञ्चैव ॥
अ भ्योतावात। प्री या णिषिप व ता इ च नोकूहा इ ताःटि। ना मा नि य ह्वोषुअ धि या इ षूकुव र्ध ताटिइश। आ सू र्य स्यषीबृ ह तो बृ हकुन्ना धीटा। रा थां वाखिइ ष्वाशाञ्च मातारू हाटाद्वा इ चाटिक्षाख। णाःत्र ॥१४४॥
॥ शौक्तानिपञ्च ॥
ओतहा इ स खा य याषूनी षी दातितात। पु नाकानौ हो इ पु नाकुनौ हो एपिया प्रा या प्राशी। गाकय तौ हो इशीगाकय तौ हो एपीशा इ शूं शा इ शूशूम् । ना य ज्ञौ होतीइशना य ज्ञौ हो एपुपा रीतापा राखाऔ हो वाशि। एतच्भू ष त श्रि येतुच् ॥१४५॥
स खाफाय या उ वोखीवाश। नी षा इ दा ताटुउ वोखावाश। पु नाकाना य प्र गाकीय ताताशा इ शाटिउ वोखावाश। ना य ज्ञैः पा रि भूटूषा ताटाउ वोखीवाश। श्रि येताच् ॥१४६॥
॥ आतीषातीयेद्वे ॥
सो माःचापूकनाफप्ल्ओ न ऊखिर्म्मि णा एप्लि। अ व्यं वा रं वि धायूवापतीश। अ ग्रे वाखिणफप्ल्चाःतच्पाकव माटानाःत। काटट्नाखऔ हो वाशि। क्र द देखि ॥१४७॥
॥ दीर्घेद्वे ॥
सा सूता। न्वे योकावा सूटानातम् । यो राटाया मा नेचिताथया इ ळाटिनातम् । सोटमाःत। या स्सूकाक्षी तापाआ इ नांप्लि। हा इशा ॥१४८॥
स सु हातिबुश। न्वे यो वा सू नांटुहातबुश। यो राचाया मा नेचिताथया इ ळा नांटीहातबुश। सो मो या स्सूटीहातबुश। क्षि तीकाना मौपाहो बाप्ला। होप्लइ ळाशा ॥१४९॥
॥ वाचो व्रते द्वे ॥
हु वे वा चातीम् । वा चंकावा चंथाहु वेटावातक् । श्रु णो तुचिश्रु णोटातु वाटागु वाताक् । स मे तुचिस मैटातु वाटागु वाताक् । र म तांकिर म तांकिर माटाट्ताखओ हो वाशि। ई हा ई हा ई हातू ॥१५०॥
हू वा इ वाचीचा म्चा। वा चंकाहू वाचाइश। वातक् । श्रु णोचातुशश्रु णोचाक्तु वाफाप्लग्वातक् । सा मैचातुशसा मैचाक्तू वाफाप्लग्वातक् । र म तांटिर म तू वाखीओ हो वाशि। मा यि मा यि मातुयिश ॥१५१॥
॥ कृष्णस्यचाङ्गिरसस्य व्रतम् ॥
सो माचास्सो माथासो माचास्सो माथासो माचास्सो माःथा। यषत्र च क्षु स्त दा भायुराट। यषत्र श्रो त्रं त दा भायूराट। यषत्र रू प न्त दा भायूराट। यषत्र आ यु स्त दा भायूराट। यषत्र व र्च स्त दा भायूराट। यषत्र ते ज स्त दा भायूराट। यषत्र ज्यो ति स्त दा भायूराट। सो माचास्सो माथासो माचास्सो माथासो माचारा जथान्होटहाखओ हो वाशि। इ ट् इ ळाटिख् ॥१५२॥
॥ अगस्त्यस्य च व्रतम् ॥
हा बु हा बु हातुबुश। वा ग्द द देकीदा द याकिइकन्द्रो रा जाकिजषग त श्च र्ष णी नाकूम् । आ धि क्षा माचीवि श्व रू पंचीय दा स्याकि। ता तो द दा तीकुदाषशु षा इ व सू नीकू। चोकद द्रा आ धाकीउषप स्तु त ञ्चि द र्वाकूक् । हा बु हा बु हातुबुश। वा ग्द द देकीदा द याटि। हा उ वाति। ईख ॥१५३॥
॥ वाचोव्रतम् ॥
हा बु हा बु हातुबुश। सो मो वाकियाचबुशश सो मो वाकियाचबुश। सो मो वाकियाचबुश। वा यो राकिजाच। न्वा यो राकिजाचन्वा यो राकिजाचन् । रा ज न्वाकियाचबुशरा ज न्वाकियाचबुशरा ज न्वाकियाचबुश। भू य मा नाकीय वाचाया वाचाइश। पू य मा नाकीय वाचाया वाचाइश। इ न्द्रो वाकियूचस म स्व राचीन् । हा बु हा बु हातुबुश। सो मो वाकियाचबुश। सो मो वाकियाचबुश। सो मो वाकियाचबुश। वा यो राकिजाच। न्वा यो राकिजाच। न्वा यो राकिजाचन् । रा ज न्वाकियाचबुश। रा ज न्वाकियाचबुश। रा ज न्वाकियाचबुश। भू य मा नाकीय वाचाया वाचाइश। पू य मा नाकीय वाचाया वाचाइश। ओ हो वाभिहा उ वाति। एतच्वा यु नाकिवि श्वाःकाप्रा जाचाअ भ्याचापा वा थाःखि ॥१५४॥
॥ गवां व्रतानि चत्वारि ॥
हा बु हा बु हातुबुश। गा वो हाकिबुश। गा वो हाकिबुश। गा वो हाकिबुश। वृ षाचाभा प त्नीचिर्हाकबुश। वृ षाचाभा प त्नीचिर्हाकबुश। वृ षाचाभा प त्नीचिर्हाकबुश। वै राथाज प त्नीचिर्हाकबुश। वै राथाज प त्नीचिर्हाकबुश। वै राथाज प त्नीचिर्हाकबुश। वि श्व रू पाकीहाचबुश। वि श्व रू पाकीहाचबुश। वि श्व रू पाकीहाथव स्मा सु र म ध्वांकू। हाथव स्मा सु र म ध्वांकू। हाथव स्मा सु र म ध्वांकूहातबुश। ते म न्व तषीप्र थ म न्ना म गोटूनाचम् । त्रि स्स प्तषिप र म न्ना म जाटूनाचम् । ता जा नषिती र भ्य नू ष ताटूक्षाःच। आ वि र्भु व न्नषुरू र्णी र्य शा सा गाटूवाःच। हा बु हा बु हातुबुश। गा वो हाकिबुश। गा वो हाकिबुश। गा वो हाकिबुश। वृ षाचाभा प त्नीचिर्हाकबुश। वृ षाचाभा प त्नीचिर्हाकबुश। वृ षाचाभा प त्नीचिर्हाकबुश। वै राथाज प त्नीचिर्हाकबुश। वै राथाज प त्नीचिर्हाकबुश। वै राथाज प त्नीचिर्हाकबुश। वि श्व रू पाकीहाचबुश। वि श्व रू पाकीहाचबुश। वि श्व रू पाकीहाथव स्मा सु र म ध्वांकू। हाथव स्मा सु र म ध्वांकू। हाथव स्मा सु र म ध्वांकूहा उ वाति। एतगा वोकावृ षाकाभा प त्नीचिर्वै राथाज प त्नीकिर्वि श्व रू पाकीव स्मा सु र म ध्वांकू। एतगा वोकावृ षाकाभा प त्नीचिर्वै राथाज प त्नीकिर्वि श्व रू पाकीव स्मा सु र म ध्वांकू। । एतगा वोकावृ षाकाभा प त्नीचिर्वै राथाज प त्नीकिर्वि श्व रू पाकीअ स्मा सु राकीमाटध्वाखम् ॥१५५॥
॥ विष्णोर्व्रतम् ॥
हा बु हा बु हातुबुश। ऊटऊटऊ उ वाटिहा उ वातिहाचस् । आतहाचस् । अ र्चि शो चि स्त पो ह रः प्रष्लक्ष स्य वि ष्णो अ रू ष स्य नू माटेहाःत। प्रा नू वो चो वि दषूथा जा त वे दाटुसातइश। वै श्वा न रा य मषूति र्न व्य से शूटुचीःत। सो म इ व प वषूते चा रु र ग्नाटुयातइश। हा बु हा बु हातुबुश। ऊटऊटऊ उ वाटिहा उ वातिहाचस् । आतहाचस् । अ र्चि शो चि स्त पोषूह रोटाहा उ वाति। ईख ॥१५६॥
॥ निन्हवाभि निन्हवौ द्वौ ॥
स्व यंचास्कु न्वाटाइश। स्व यंचास्कु न्वाटाइश। स्व यंचास्कु न्वाखाओ हो वाशि। एतस्कु न्व एकिस्कु न्व एकिस्कु न्वाखाइश ॥१५७॥
॥ बृहत्प्राजापत्यं भरद्वाजस्य वा ॥
औ हो इ त्वा मि द्धीषूह वा म हातीएत। सा तौ वा जा स्या काकुराखवाःण। तू वापाऔकहो वाथा। वृ त्रा इ षु वाषुवा इ न्द्रा साटीओ त्पा ति न्नाखराःण। तू व ङ्का ष्ठापीऔकहो वाथा। सूटव र्वाखाता हो वाशिहा उ वातिहाचस् ॥१५८॥
॥ वरुणस्यार्कः ॥
हा बु हा बु हातुबुश। आ यु श्च क्षु श्रो त्रंषूज्यो ति रौ हो वाकुईटयात। उ दु त्त मंषीव रु ण पा श माटूस्मातत् । आ बा ध मंषीवि म ध्य मं श्न थाटूयात। आ था दि त्यषीव्र ते व य न्ताटुवात। आ ना ग सो अ दि त ये स्याटमात। हा बु हा बु हातुबुश। आ युः च क्षु श्रो त्रं ज्यो ति रौ हो वाकीईटयाखऔ हो वाशि। ईख ॥१५९॥
॥ महावैराजञ्च ॥
हो इ याति। हो इ याति। पि बाचा। म त्स्वा हा वो जो हा बु स हो हा बुशैब लं हा वि न्द्रो हा बु व यो हा बुशैबृ ह द्धा बु व्र तं हा बु स्व र्हा बुशेज्यो ति र्हा बु दा धेशू। हाषबु हा बु हा वौ होटूऔ होटाऔ होटाइश। सोकमा मि न्द्रा माकीन्द तु त्वाकिन्द तु । हाषबु हा बु हा वौ होटूऔ होटाऔ होटाइश। पि बाषासो मा मि न्द्रा माकून्द तु त्वाकिन्द तु त्वाकिन्द तु त्वाकि। हाषबु हा बु हा वौ होटूऔ होटा। पि बाषासो मा मि न्द्रा माकून्द तु त्वाकिन्द तु त्वाकिन्द तु त्वाकि। म त्स्वा हा वो जो हा बु स हो हा बुशैब लं हा वि न्द्रो हा बु व यो हा बुशैबृ ह द्धा बु व्र तं हा बु स्व र्हा बुशेज्यो ति र्हा बु दा धेशू। हाषबु हा बु हा वौ होटूऔ होटाऔ होटाइश। यकन्ते सु षा व ह र्याकूश्रा द्रीकाश्रा द्रीकाश्रा द्रीःका। हाषबु हा बु हा वौ होटूऔ होटाऔ होटाइश। यकन्ते सु षा व ह र्याकूश्रा द्रीकाश्रा द्रीकाश्रा द्रीःका। हाषबु हा बु हा वौ होटूऔ होटाऔ होटाइश। यकन्ते सु षा व ह र्याकूश्रा द्रीकाश्रा द्रीकाश्रा द्रीःका। म त्स्वा हा वो जो हा बु स हो हा बुशैब लं हा वि न्द्रो हा बु व यो हा बुशैबृ ह द्धा बु व्र तं हा बु स्व र्हा बुशेज्यो ति र्हा बु दा धेशू। हाषबु हा बु हा वौ होटूऔ होटाऔ होटाइश। सोकतु र्बा हु भ्यांकीसू य तो ना र्वाकुना र्वाकुना र्वाकु। हाषबु हा बु हा वौ होटूऔ होटाऔ होटाइश। सोकतु र्बा हु भ्यांकीसू य तो ना र्वाकुना र्वाकुना र्वाकु। हाषबु हा बु हा वौ होटूऔ होटाऔ होटाइश। सोकतु र्बा हु भ्यांकीसू य तो ना र्वाकुना र्वाकुना र्वाकु। स ध मे सा ध मेचूसा धाकामेट। ऋ त मे ऋ त मेचूआ र्ताकामेट। इ या हाकिवि या हाकिवि याचापि बाशाम त्स्वाटाहा उ वाति। ईख ॥१६०॥
॥ योषितां प्रियम् ॥
प्रि यचाहो इशाप्रि यचाहो इशाप्रि यचाहो इशा। प्रि यचामो इशाप्रि यचामो इशाप्रि य मोचिइश। अ ग्राकाआ याथाही वाकाइ तायायाटइश। गृ णा नो हाचीव्या दाकाताययाटइश। नी हो ता साचीत्सी बाकार्हायइ षीटा। प्रि यचाहो इशाप्रि यचाहो इशाप्रि यचाहो इशा। प्रि यचामो इशाप्रि यचामो इशाप्रि याटामाखऔ हो वाशि। एतप्रि य मेचिप्रि य मेचिप्रि यचाय्योकषि ता यकिन्म न स्तकिन्म य्यि योकिषि ताटाख्म् ॥१६१॥
॥ सर्प साम ॥
वि हाकायाचबुश। वि हाकायाचबुश। वि हाकायाचबुश। वि हाकायौच। वि हाकायौच। वि हाकायौच। का या ना श्चीचीत्रा आकाभूयवाटत् । ऊ ती स्सा दाचीवृ धाकास्सायखाट। क या श चीचीष्ठा याकावायर्त्ताःट। वि हाकायाचबुश। वि हाकायाचबुश। वि हाकायाचबुश। वि हाकायौच। वि हाकायौच। वि हाटायाखऔ हो वाशि। स य्य तकिन व्या य मकीन्या य तकिन स य्य मकीन्ये के चो द राकुस र्पि णाःटिख्। ते भ्योथान माःटाख् ॥१६२॥
॥ भद्रश्रैयां सि त्रीणि ॥
हो इ हाति। हो इ हाति। हो इ हाति। इ हो इ हाती। इ हो इ हाती। इ हो इ हाती। औटहो इ हाटि। औटहो इ हाटि। औकहो इ हाखिऔ हो वाशि। ई माचानु कंशाभु व ना सी ष धेकूमाचइ हाशा। इ न्द्रा श्चाकिवि श्चे च देकीवाःचइ हाशा। हो इ हाति। हो इ हाति। हो इ हाति। इ हो इ हाती। इ हो इ हाती। इ हो इ हाती। औटहो इ हाटि। औटहो इ हाटि। औकहो इ हाखिऔ हो वाशि। एतच्भ द्रचाम् ॥१६३॥
हो इ याति। हो इ याति। हो इ याति। इ हो इ याती। इ हो इ याती। इ हो इ याती। औटहो इ याटि। औटहो इ याटि। औकहो इ याखिऔ हो वाशि। ई माचानु कंशाभु व ना सी ष धेकूमाचइ याशा। इ न्द्रा श्चाकिवि श्चे च देकीवाःचइ याशा। हो इ याति। हो इ याति। हो इ याति। इ हो इ याती। इ हो इ याती। इ हो इ याती। औटहो इ याटि। औटहो इ याटि। औकहो इ याखिऔ हो वाशि। एतच्श्रे याःचा ॥१६४॥
॥ धेनुपयसी ॥
इ यो इ याचीइ योटाइ याकाईचयाश। अ ग्ने यूं क्ष्वा हीतुये त वाःति। अ ग्ने यू क्ष्वा हीकुये त वाःचि। अ ग्ने यूं क्ष्वा हीतूये त वाःति। इ यो इ याचीइ योटाइ याकाईचयाश। अ श्वा सो दे वातुसा ध वाःति। अ श्वा सो दे वाकुसा ध वाःचि। अ श्वा सो दे वातुसा ध वाःति। इ यो इ याचीइ योटाइ याकाईचयाश। आ रं व ह न्त्वीतुया श वाःति। आ रं व ह न्तीकुया श वाःचि। आ र व ह न्तीतुया श वाःति। इ यो इ याचीइ योटाइ याकाईचयाश। आटहाचस्श। एतप याःटाख् ॥१६५॥
॥ आयु र्नवस्तो भे ॥
हाषबु हा बु हा उ वातू। वि श्व तो दातीवशन्वि श्व तोचिना आचाभ राशा। हाषबु हा बु हा उ वातू। य न्त्वाचाश वीकाष्ठा मीचाम हेशा। हाषबु हा बु हा उ वातू। ई ळाटा। हाषबु हा बु हा उ वातू। सू वाःटा। हाषबु हा बु हा उ वातू। ज्यो तीःटा। हाषबु हा बु हा उ वातू। ईख ॥१६६॥
॥ द्रविण स्पर्धनी ॥
हाचबु म ही हा बु म ही हा बु म हीचै। मा हिटाम हिचा। मा हिटाम हिचा। मा हिटाम हिचा। म ह्येटाच्मंचम ह्येशा। म ह्येटाच्मंचम ह्ये मंचम ह्ये र स्तुचा। द्यु क्ष र्मि त्रा स्याटूर्य म्णाःचा। दू रा ध र्षं व रूटूण स्याचा। हाचबु म ही हा बु म ही हा बु म हीचै। मा हिटाम हिचा। मा हिटाम हिचा। मा हिटाम हिचा। म ह्येटाच्मंचम ह्येशा। म ह्येटाच्मंचम ह्येशा। मा हि माटिहि माखाऔ हो वाशि। एतम ह्येकाम ह्येकाम हीटाख् ॥१६७॥
हाचबु दि वि हा बु दि वि हा बु दि विचै। दि विटादि विचा। दि विटादि विचा। दि विटादि विचा। दा इ वे दा इ वेकू। दा इ वे दा इ वेकू। दा इ वे दा इ वेकू। औकहो औकाहो वाटा। मा हि त्री णा म वाटूर स्तुचा। औकहो औकाहो वाटा। द्यु क्ष र्मि त्रा स्याटूर्य म्णाःचा। औकहो औकाहो वाटा। दू रा ध र्षं व रूटूण स्याचा। हाचबु दि वि हा बु दि वि हा बु दि विचै। दि विटादि विचा। दि विटादि विचा। दि विटादि विचा। दा इ वे दा इ वेकू। दा इ वे दा इ वेकूदा इ वे दाटीइ वाखाऔ हो वाशि। एतदि वेकादि वेकादि वीटाख् ॥१६८॥
॥ शुक्र चन्द्रे ॥
हा बु हा बु हातूबुश। शु क्रंचा। शु क्रंचा। शु क्रचाम् । अ भ्रा त्र व्यो अ नाटूतु वांचा। आ ना पि रिषीन्द्रा ज नु षा स नाटूदा साचाइश। यु धे दा पि त्व माटूइ च्छा साचिइश। हा बु हा बु हातूबुश। शु क्रंचा। शु क्रंचा। शु क्राखाऔ हो वाशि। एतशु क्र मेचि। शु क्र मेचि। शु क्रचाम् ॥१६९॥
हा बु हा बु हातूबुश। च न्द्रंकाच न्द्रंकाच न्द्रकाम् । हाषबु हा बु हा उ वातू। अ भ्राकात्र व्योचाआ नाचात्वं म नाचिपि रि न्द्रा ज नु षाचूसा ना द सिची। यु धे दाकिपि त्व मि च्छकीसेटख्। हा बु हा बु हातूबुश। च न्द्रंकाच न्द्रंकाच न्द्रकाम् । हाषबु हा बु हा उ वातू। एतच न्द्र मेकिच न्द्र मेकिचकन्द्रचम् ॥१७०॥
सहनोस्तु । सहनो भुनक्तु । सहनो वीर्यवद्दस्तु ।
माविद्विषामहै । सर्वेषान्नौ वीर्य वदस्तु ॥
ओं शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥ हरिः ओम् ॥
श्रीमते जैमिन्याचार्याय नमः
श्री तलवकार गुरवे नमः
अस्तु गुरुभ्यो नमः ।
॥ सङ्ग्रह सङ्ख्या ॥
॥ वर्णानुक्रमणिका ॥
- अगस्तस्यचराक्षोघ्नम्
- अगस्तस्यचराक्षोघ्नम् (2)
- अगस्तस्यचराक्षोघ्नम् (3)
- अगस्तस्यचैवराक्षोघ्नम्
- अगस्त्यस्य च व्रतम्
- अग्नेराक्षोघ्नेद्वे
- अग्नेराग्नेयेद्वे
- अग्नेरायुः
- अग्नेर्यद्वाहिष्ठीयेद्वे
- अग्नेर्हरसीद्वे
- अग्नेर्हरसीद्वे (2)
- अग्नेश्चजराबोधीये
- अग्नेश्चद्रविणम्
- अग्नेश्चयज्ञायज्ञीयम्
- अग्नेश्चरथंतरंवसिठस्यवा
- अग्नेश्चराक्षोघ्नम्
- अग्नेश्चवारवन्तीयम्
- अग्नेश्चवैश्वानरस्यार्षेयम्
- अग्नेश्चश्रैष्ठ्यम्
- अग्नेश्चाग्नेयम्
- अग्नेश्चाग्नेयम् (2)
- अग्नेश्चार्षेयम्
- अञ्जश्च वैरूपम्
- आङ्गीरसञ्चइन्द्रस्यवा हरिश्रीर्निधनम्
- आजीकञ्च
- आजीकञ्च (2)
- आतीषातीयेद्वे
- आतीषातीयेद्वे (2)
- आदित्यस्य व्रत शुक्रियाणि षट् भ्राजा भ्राजे विकर्ण भासे महा दिवा कीर्त्यम् आदित्य व्रतमिति
- आदित्यस्यचरुचिरोचनंवा
- आदित्यस्यचरुचिरोचनंवा (2)
- आदित्याः सामनीद्वे तार्क्ष्यसामनिवा
- आदित्यासामनी द्वे तार्क्षसामनीद्वे
- आयु र्नवस्तो भे
- आश्वञ्च
- आश्वसूक्तञ्च
- इन्द्रस्यचत्रातम्
- इन्द्रस्यचत्रातम् (2)
- इन्द्रस्यसहस्रायुतेद्वे प्रजापतेर्वा महोविशीये
- इन्द्रस्यहरिश्रीःनिधनम्
- इहवद्वामदेव्यंतृतीयम्
- ऋतुसामनिच
- ऋतुसामनीच
- ऋतुसामनीच (2)
- ऋष्यस्य व्रतं भूतेच्छन्दसं वा
- ऐन्द्र षोडशी तवश्शाव्यं ज्येष्ठ साम सुभेषजं वा
- ऐन्द्रा महा नाम्नयः सिमाश्शक्वर्यः माटवीर्वा
- औरूक्षयेद्वे
- कश्यपस्य व्रते द्वे
- कश्यपस्यबर्हिषीयम्
- कावञ्च
- कावञ्चैव
- कृष्णस्यचाङ्गिरसस्य व्रतम्
- गवां व्रतानि चत्वारि
- गोतमस्यपौरुमुद्गेद्वे पुरुमुद्गस्यवाङ्गीरसस्यदेवानांवा
- गोषूक्तम्
- गौतमस्यच भद्रम्
- गौतमस्यचैवपर्कः
- गौतमस्यपर्कः
- गौतमस्यपर्कः (2)
- घृताचेराङ्गिरसस्यसामनीद्वे
- तिरश्चेराङ्गीरसस्यसामनीद्वेदेवानांवादेवपुरे
- त्वष्टार्याश्चसाम
- दिशाञ्च दशानुगानं दश
- दीर्घे द्वे
- दीर्घेद्वे
- दैवानीकञ्च
- द्रविण स्पर्धनी
- धेनुपयसी
- धेनुपयसी (2)
- निन्हवाभि निन्हवौ द्वौ
- पाथेद्वे
- पाष्ठौहेच
- पुरुष व्रतं सप्त
- प्रजापतेःश्योकानुश्योकानित्रीणि
- प्रजापतेःश्रुधीयेद्वे
- प्रजापतेःसदोहविर्धानानित्रीणिसदःपूर्वंहविर्धाने उत्तरे
- प्रजापतेर्निधन कामम्
- प्रजापतेर्हिकनिकविकानित्रीणि
- प्रजापतेश्चनिधनकामम्
- प्रजापतेश्चाभीवर्तः
- प्रजापतेस्सन्तनीकेद्वे
- प्रजापतेस्सीदन्तीयेद्वे
- प्रजापतेस्सुतंरयिष्ठीयेद्वे
- प्राजापत्यङ्गायत्रम
- बार्हस्पत्यञ्च
- बार्हस्पत्यञ्चब्राह्मणस्पत्यंवा
- बार्हस्पत्यञ्चब्राह्मणस्पत्यंवा (2)
- बार्हस्पत्ये द्वे अग्नेर्वाराक्षोघ्ने
- बार्हस्पत्येद्वेअग्नेर्वाराक्षोघ्ने
- बार्हस्पत्येद्वेअग्नेर्वाराक्षोघ्ने (2)
- बृहचैवाग्नेयम्
- बृहत्प्राजापत्यं भरद्वाजस्य वा
- बृहत्प्राजापत्यंभरद्वाजस्यवा
- बृहदाग्नेयञ्चसङ्कृतंवा
- भद्रश्रैयां सि त्रीणि
- भारद्वाजस्यप्रासाहम्
- मधुश्चुन्निधनञ्च प्राजापत्यम्
- मर्गीयवञ्च
- महावामदेव्यंत्रृतीयम्
- महावैराजञ्च
- महावैश्वामित्रेद्वे
- मानवेद्वे
- मार्गीयवञ्चैव
- मित्रावरुणयोश्चसंयोजनम्
- यामञ्च
- योषितां प्रियम्
- यौक्ताश्वेद्वे
- यौधाजयम्
- रौद्रेद्वे
- रौरवम्
- वरुणसामच
- वरुणसामानित्रीणि
- वरुणस्यार्कः
- वरूणान्याश्चसाम
- वसिष्ठस्यचनिन्हवम्
- वसिष्ठस्यचप्लवम्
- वसिष्ठस्यचवीङ्कम्
- वसिष्ठस्यचवैराजे
- वसिष्ठस्याभरे द्वे
- वसिष्ठस्याभरेद्वे
- वाचो व्याहृति सामानि सप्त दश
- वाचो व्रते द्वे
- वाचो व्रते द्वे (2)
- वाचोव्रतम्
- वामदेव्यञ्च
- वामदेव्यञ्च (2)
- वामदेव्यञ्च (3)
- वामदेव्यम्
- वार्षाहरम्
- वासिष्ठानि त्रीणि भार्गवं वा तृतीयम्
- विष्णोर्व्रतम्
- विष्णोर्व्रतम् (2)
- वैदन्वतञ्च
- वैश्वमनसम्
- शुक्र चन्द्रे
- शौक्तसामनी द्वे
- शौक्तानि त्रीणि शुक्लानिवा आश्वानिवा
- शौक्तानिपञ्च
- श्यावाश्वञ्च
- श्येनञ्च
- श्रायन्तीयञ्च
- सन्तनिच
- समन्तानित्रिणिअग्नेरेकमिन्द्राग्न्योर्वाप्रजापतेर्वावरुणस्यद्वे
- सर्प साम
- साकमश्वंधुरांवासाम
- सूर्यसामनीद्वे
- सोमसामानिचत्वारि
- हारिवर्णानि चत्वारि
- हृस्वा च बृहतोपशा